Jeevan Basant

जीवन बसंत | Jeevan Basant

जीवन बसंत

( Jeevan Basant ) 

 

नेह उत्संग जीवन बसंत

कर्म पुनीत धर्म पावन,
यथार्थ पथ नित्य गमन ।
समन्वय परिस्थिति पट,
आशा उमंग अंतर रमन ।
मैत्री प्रभा मुखमंडल संग,
सकारात्मक सोच अत्यंत ।
नेह उत्संग जीवन बसंत ।।

नैराश्य हल मुस्कान,
हास्य विमुक्त जड़ता ।
मिलनसारी उन्नत चरित्र,
मृदुलता दूर कड़कता ।
प्रकृति संरक्षण सद्प्रयास,
दर्श नैसर्गिक सौंदर्य अनंत ।
नेह उत्संग जीवन बसंत ।।

स्वच्छ स्वस्थ परिवेश छवि,
उद्गम स्थल असीम खुशियां ।
आदर सम्मान अपनत्व बिंदु,
सुख वैभव कारक रश्मियां ।
उत्सर्ग तत्परता प्रेम पथ ,
अर्थ परिभाषा संपूर्ण पंत ।
नेह उत्संग जीवन बसंत ।।

मिलन उत्कंठा उद्वेलित,
मोहक प्रियेसी प्रियल छवि ।
प्रतीक्षा पल अति आह्लाद,
प्रीत कल्पना सौम्य नवि ।
दृष्टि बिंब अनुपमा प्रेममय,
संकेत विस्मृत आदि अंत।
नेह उत्संग जीवन बसंत ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें:-

प्रेम में प्रदर्शन नहीं, दर्शन भाव निहित

Similar Posts

  • आधुनिकता | Aadhunikta

    आधुनिकता ( Aadhunikta )   चाँद की हो गई, दुनिया दीवानी । तारों में बसने लगे, शहरे हमारी ।। ख्वाहिश  पूरी  हुई , इंसानो  की । दुनिया छोड़ दी,घर बनाने के लिए ।।   जल हो गई, प्रदूषित भारी । ज़हर  बन  गई, प्राणवायु ।। जिए  तो  जिए कैसे इंसान । नरक बन गई, धरती…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem | Love Kavita -प्रेम अगन

    प्रेम अगन ( Prem Agan )   बचना  होगा   प्रेम  अगन से, इसमे  ज्वाला ज्यादा है। सुप्त सा ये दिखता तो है पर,तपन बहुत ही ज्यादा है।   जो भी उलझा इस माया में, वो ना कभी बच पाया है, या तो जल कर खाक हुआ या, दर्द फफोला पाया है।   कोई कुछ भी…

  • स्वाभाविक | Swabhavik

    स्वाभाविक ( Swabhavik )    हर रात अंधेरे का ही प्रतीक नही होती तीस रातों मे एक रात होना स्वाभाविक है उजाले के दिनकर को भी होता है ग्रहण हर किसी मे कुछ कमी होना स्वाभाविक है कभी टटोलकर देखिए खुद के भीतर भी आपमे भी कमी का होना स्वाभाविक है पूर्णता की तलाश मे…

  • देखो, आई सांझ सुहानी

    देखो,आई सांझ सुहानी गगन अंतर सिंदूरी वर्ण, हरितिमा क्षितिज बिंदु । रवि मेघ क्रीडा मंचन, धरा आंचल विश्रांत सिंधु । निशि दुल्हन श्रृंगार आतुर , श्रम मुख दिवस कहानी । देखो,आई सांझ सुहानी ।। मंदिर पट संध्या आरती, मधुर स्वर घंटी घड़ियाल । हार्दिक आभार परम सत्ता, परिवेश उत्संग शुभता ढाल । परिवार संग हास्य…

  • बदल गया है | Hindi mein kavita

     बदल गया है  ( Badal gaya hai )   बदल गया है लोगों के रहने का,चलने का खाने का, पीने का उठने का,बैठने का एक-दूसरे मिलने का साथ-साथ चलने का ढंग………….।   बदल गया है लोगों के सड़क पर निकलने का सफ़र में जाने का दुकान से खरीददारी का किसी वस्तु को छूने का बाज़ार…

  • नयी रोशनी

    नयी रोशनी अंधेरों की बाहों से छूटकर आई है,एक उम्मीद की किरन जो जगमगाई है।थमी थी जो राहें, अब चल पड़ी हैं,दिलों में नयी रोशनी जो घर बसाई है। खामोशियों की परतें अब पिघलने लगीं,अधूरी सी कहानियां अब संवरने लगीं।हर कोना जो सूना था, वो चमक गया,नयी सुबह की आहट दिल को छूने लगी। दिकु,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *