शरद चाँदनी

शरद चाँदनी | Sharad Chandni 

शरद चाँदनी

( Sharad Chandni )

चली है ..
पवन शीतल मंद सुगन्ध नूपुर
खिले खिले हुए है
शरद की चाँदनी में
कुन्द के फूल
चंद्र पूर्ण आकार सोलह कलाओं को संग लियें उदित हुआ बदली तेजपुंज से भरी-भरी
हो रही है अमृत वर्षा
आकाश से आज बरस रही है शरद चाँदनी
है ओस की बूँद में भी
अमृत बूटी चूर्ण
सब रोगों का होगा नाश
माँ लक्ष्मी धरती पर विचरण करेंगी आज
अंजुरी में भरे हुए है
ओस की बूँद लिए अमृत बरसाते कुन्द के फूल
दायां बांया न देखे
करे दोनों हाथ सुगंधित एक समान
शरद चाँदनी …
हो रही अमृत की वर्षा
चली पवन शीतल मंद सुगंध नूपुर
खिले खिले है ,
शरद पूर्णिमा के पावन पर्व में
कुन्द के फूल
हो रहीं अमृत की वर्षा
तेजपुंज से है बदली भरी-भरी..
शरद चाँदनी….

Shubhangi  Chauhan

चौहान शुभांगी मगनसिंह
लातूर महाराष्ट्र

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • बंजारा के दस कविताएं

    1 प्रवाह ——- सोचता हूं कि दुनिया की सारी बारूद मिट्टी बन जाये और मैं मिट्टी के गमलों में बीज रोप दूं विष उगलती मशीनगनों को प्रेम की विरासत सौप दूं . पर जमीन का कोई टुकड़ा अब सुरक्षित नहीं लगता . कि मैं सूनी सरहद पे निहत्था खड़ा अपने चश्मे से, धूल -जमी मिट्टी…

  • ब्रह्मचारिणी | Brahmacharini Navratri Kavita

    ब्रह्मचारिणी ( Brahmacharini Navratri )   हे ब्रह्मचारिणी तपस्विनी सदाचरण की देवी करो कृपा हे जगदंबे मत करो अब देरी   आचरण को विमल कर दो निर्मल कर दो भाव शब्दों में तुम शक्ति भर दो मां दे दो चरणों की छांव   भरा रहे दरबार तुम्हारा सुख समृद्धि यश कीर्ति सृष्टि की करतार माता…

  • कविता शादी | Shaadi par Kavita

    कविता – शादी ( Shaadi )    चल रहे है रिश्ते क्यों समझ बात नहीं आती l गृहस्ती रूपी गाड़ी पटरी पर दौड़ी जाती l शादी पवित्र बंधन ये भारत भूमि बतलाती l मित्रता है अस्त्र हमारा दुनिया को सिखलाती l परंपरा संस्कार हमारे दो जीवन मिलवाती l साथी का हाथ न छूटे सात फेरे…

  • तुझ तक पहुंचने की चाह

    तुझ तक पहुंचने की चाह कोई मिल जाए जो तुझ तक पहुंचा दे,मेरे शब्द, मेरी सासें तुझ तक बहा दे।कि तू जान ले, आज भी प्रेम वहीं खड़ा है,तेरी राहों में, तेरी बाहों में, खुद को समेटे खड़ा है। चाहत की लौ बुझी नहीं है अब तक,तेरी यादों में जलती रही है अब तक।तेरे बिना…

  • मैं खुशनसीब | Main Khushnaseeb

    मैं खुशनसीब ( Main Khushnaseeb)   आज समझता हूं खुशनसीब खुद को काटों की दवा भेज दी खुदाने मुझको जख्मों की दवा लाया है दोस्त मेरा चमन की हवा लाया है दोस्त मेरा खुशनसीब फूल हूं मैं खिला हुआ कौन कहता है की मैं हूं बिखरा हुआ सवालों के घेरे से निकला हूं आज बाहर…

  • तुम्हें मनाने आया हूं | Prarthana

    तुम्हें मनाने आया हूं ( Tumhe manane aaya hun )   दीन दयाल दया के सागर तुम्हें   मनाने   आया  हूं शब्दों के मोती चुनकर फूल  चढ़ाने  लाया  हूं   हे  जग  के करतार सुनो केशव माधव दातार सुनो करुणा के सागर आप प्रभु अब दीनों की पुकार सुनो   कुछ चमत्कार हरि कर दो दूर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *