Marriage

कविता शादी | Shaadi par Kavita

कविता – शादी

( Shaadi ) 

 

चल रहे है रिश्ते क्यों
समझ बात नहीं आती l

गृहस्ती रूपी गाड़ी
पटरी पर दौड़ी जाती l

शादी पवित्र बंधन ये
भारत भूमि बतलाती l

मित्रता है अस्त्र हमारा
दुनिया को सिखलाती l

परंपरा संस्कार हमारे
दो जीवन मिलवाती l

साथी का हाथ न छूटे
सात फेरे दिलवाती l

रिश्तो के धागों मे बंधी
जिंदगी गुजरी जाती l

खुशी में हो या गम में
पत्नी साथ निभाती l

पति प्यार में डूबी ऐसे
सुबह शाम ढल जाती l

ढाल बने पति परमेश्वर
जीवन सफल बनाती l

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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