जीवन समय

जीवन समय

जीवन समय

जीवन का पहिया चलता रहता है,
समय का पहिया घूमता रहता है।
यूं तो इंसान के पास भी पहिए होते हैं,
कभी गाड़ियों में,
कभी विचारों में,
कभी भाग्य में भी।

तुमसे भी तेज़ दौड़ते समय के पैर नहीं होते,
पैरों का लेकिन समय होता है।

तुमसे छीनते समय, समय के हाथ भी नहीं होते,
हाथों का लेकिन…

तो, क्यों ना फिर समय बिताएं,
हाथों से कुछ बनाने, कुछ संजोने के लिए।
और पैरों से, वर्तमान में जमे रहने को और भविष्य की ओर चलने के लिए।

यह भी सच है कि,
समय कविता का नहीं होता,
कविता लेकिन समय की होती है।
आज लिखा गया हर शब्द,
कल बीता हुआ होगा।
समय बीत चुका होगा।
होगा कविता में ज़िंदा…
साथ में, तुम भी शायद…

और,
यह एक समय की नहीं,
हर समय की बात है।

चंद्रेश कुमार छ्तलानी

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • कलमकार मस्ताना | Kavita kalamkar mastana

    कलमकार मस्ताना ( Kalamkar mastana )   मैं देशप्रेम दीवाना हूं मैं कलमकार मस्ताना हूं रंगों की लेकर छटा गीतों का मधुर तराना हूं   केसरिया ले निकला माटी का तिलक किया मैंने देशप्रेम में झूम पड़ा मैं कागज कलम मेरे गहने   सद्भावौ की धारा में जब गीत सुहाने गाता हूं राष्ट्रधारा अलख जगाते…

  • होली ‌पुरानी | Kavita Holi Purani

    होली ‌पुरानी ( Holi Purani )   याद है वो होली मुझको। बीच गांव में एक ताल था, ताल किनारे देवी मन्दिर, मन्दिर से सटी विस्तृत चौपाल, जहां बैठकर बुजुर्ग गांव के, सुलझा देते विवाद गांव के, फिर नाऊठाकुर काका का, आबालवृद्ध के मस्तक पर, पहला अबीर तब लगता था, फिर दौर पान का चलता…

  • मुश्किल हो गया | Poem mushkil ho gaya

    मुश्किल हो गया ( Mushkil ho gaya )   जब तुम मुझसे मिलना ही नहीं चाहते थे तो फिर ये बातों का सिलसिला प्यार-मोहब्बत की बातें क्यों बढ़ाई…….??   क्यूँ झूठे चक्कर में डाला तुम अपना इरादा पहले ही बता देते क्यूँ तुमने मेरा चैन छीना क्यूँ मेरे मन को डुलाया? मैं नादान था जो…

  • उपहार | Uphar

    उपहार आता नववर्षसब होते मिलकर हर्षदेते उपहार प्यारा नववर्षघर आंगन देते दर्षमिलता उपहार अपने जीवनजीवन में बने श्रीमनउपहार संग नववर्ष वेलानववर्ष पर लगता मेलाईश्वर उपहार उपहार प्यारामिलता जब उसे प्याराखुशियों संग चहुंओर खुशीमिलती हैं जब ताजपोशीअनमोल उपहार सुनील कुमारनकुड़ सहारनपुरउत्तर प्रदेश भारत यह भी पढ़ें :-

  • तुम तो | Tum to

    तुम तो ( Tum to )   कौन सा काम कब करना है यही तो फ़ैसला नहीं होता तुम से यही तुम्हारी उलझन का सबब है और कमज़ोरी भी नाँच रही हैं आज बहारें महकी हुई हैं सभी दिशाएँ हंसने का मौसम है और तुम तो रोने बैठ गई हो बादल घिरे हैं बारिश का…

  • मतदान का अधिकार | Kavita Matdan ka Adhikar

    मतदान का अधिकार ( Matdan ka Adhikar )   लोकतंत्र देश हमारा। है संविधान सर्वोपरि देश का। देकर मतदान अधिकार, मान बढ़ाया जनशक्ति का।। जो बालिग हो वह, देकर अपना मत, मन पसंद नेता चुन सकता है। ऐसा गौरवपूर्ण अधिकार, मिला हमें संविधान से है।। सदुपयोग इसका करें हम। जागरूक सदा रहें हम। जन-जन अलख…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *