प्यार की जब उससे दोस्ती टूटी है

प्यार की जब उससे दोस्ती टूटी है

प्यार की जब उससे दोस्ती टूटी है

 

 

प्यार की जब उससे दोस्ती टूटी है!

रोज़ तन्हाई से जिंदगी टूटी है

 

हर घड़ी नफ़रतों की रवानी थी बस

वो न दिल से उसके दुश्मनी टूटी है

 

डूबी है जिंदगी ही नशे के ग़म में

प्यार की ही दिल से मयकशी टूटी है

 

घेर लिया है ग़मों ने आकर आंसू से

जीस्त के बीज सफ़र में ख़ुशी टूटी है

 

दें गया वो दग़ा बीज सफ़र में मुझे

प्यार से ही भरी आशिक़ी टूटी है

 

बू गुलिस्तां में आज़म नफ़रत की फ़ैली

आज ख़ुशबू भरी वो कली टूटी है

 

️✍️शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : – 

जिंदगी में लेकर ये ख़ुशी

Similar Posts

  • हे राम | Hey Ram

    हे ! राम ( Hey Ram ) नज़्म शिकायत किसी की न करते हैं राम, एक प्लेटफार्म पे जीना सिखाते हैं राम। आज्ञाकारी पुत्र तो वो बनकर दिखाए ही, समाधान धैर्य से निकालते हैं राम। राज -परिवार के वो बेटे तो थे ही, जीवन की कला सिखाते हैं राम। हार क्या होती है, जानते नहीं,…

  • मैं भी चाहूंगा | Poem Main bhi Chaahunga

    मैं भी चाहूंगा ( Main bhi chaahunga )   कि इन सब बातों की नहीं है उम्र अब मेरी, मुझे कुछ लोग कहते हैं, मगर हसीं चेहरों पे मिटने को तैयार होना, मैं भी चाहूंगा… लानत है किसी दौलतमंद, रसूखदार का दरबान होने पेे, किसी मज़लूम, किसी बेबस का पहरेदार होना, मैं भी चाहूंगा.. कभी…

  • दुस्साहस | Kavita dussahas

    दुस्साहस ! ( Dussahas ) *** भय से भी भयभीत नहीं हो रहे हैं हम, लाख चेतावनियों के बाद भी- कान में तेल डाल, सो रहे हैं हम। दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा आंकड़ा- दानव रूपी कोरोना का, हम ताली थाली पीट रहे- सहारा ले रहे जादू टोना का ! सरकार जुटी है सरकार बनाने…

  • सोचा नहीं था हम इस कदर जाएंगे

    सोचा नहीं था हम इस कदर जाएंगे   सोचा नहीं था हम इस कदर जाएंगे यहाँ से भी हम क्या बे-क़रार जाएंगे   एक रात भी अपने बस में नहीं है यानी गुज़रते थे, आज भी गुजर जाएंगे   क्या अजीब दुनियादारी है हमारी ज़िंदा दिल वाले आए तो मर जाएंगे   बे-इंतिहा मुहब्बत का…

  • आशिक़ी | Aashiqui

    आशिक़ी! ( Aashiqui ) (नज़्म ) ( 3 )  बदलेगा मौसम मगर धीरे-धीरे, उठेगी जवानी मगर धीरे-धीरे। पिएंगे प्यासे उन आँखों से मय को, चढ़ेगी नशा वो मगर धीरे-धीरे। ढाएगी कयामत जमाने पे एकदिन, बढ़ेगी बेताबी मगर धीरे-धीरे। राह -ए -तलब में छोड़ेगी दिल को, होगा आशिक़ी का असर धीरे-धीरे। करेगी इनायत किसी न किसी…

  • कशमकश | Kashmakash shayari

    कशमकश ( Kashmakash )   फैसला हक मे है मेरे या मेरी हार हुयी है। बस इसी कशमकश में रात फिर बेकार हुयी है।।   सोचते सोचते आंखों में आगये आंसू, फिर वही बात कि बारिश बहुत दमदार हुयी है।।   तमाशा देखने वालों कभी ये सोचा भी, यहां तक पहुंचने में हश्ती ख़ाकसार हुयी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *