सूनी बगिया

सूनी बगिया

चारों ओर सामान बिखरा पड़ा है। चद्दर कंबल सब ऐसे पड़े हैं। घर नहीं कबाड़खाना बन चुका है। ऐसा हर समय नहीं रहता था। एक एक सामान बहुत शलीके से रखा रहता था क्या मजाल थी कोई सामान इधर से उधर हो जाए। लेकिन क्या कहा जा सकता है। मौत का ऐसा अनोखा झोंका आया सब बिखर कर रह गया।

आखिर उनकी अभी उम्र ही क्या थीं?
अभी तो बिटिया रानी के शादी के सपने देख रही थी। बिटिया रानी भी पूरी अपनी मां को पड़ी थी। मां को देख लिया समझो बेटी को देख लिया।
भारत में एक परंपरा रही है कि लोग बेटी की जगह मां को देखा करते थे। यदि मां के संस्कार अच्छे हैं तो बेटी भी अच्छी ही होगी ऐसा लोगों का विश्वास था।

सुदेश जी अतीत में खो से जाते हैं। कैसे राधिका जब इस घर की बहू बनकर आई थीं तो पूरा घर आनंद के हिलोरे मारने लगा था। उनका मन करता था कि बस सामने राधिका बैठी रहे और मैं देखता रहूं? गजब की खूबसूरत थी राधिका। कभी-कभी सुदेश अपने को उसके सामने ठगा सा महसूस करता है। वह थीं ही इतनी खूबसूरत। परमात्मा ने उन्हें लगता है बड़े प्रेम से बनाया होगा। शरीर के एक-एक अंग को बड़ी फुर्सत में सजाया होगा।

सुदेश के तो राधिका के साथ संबंध बनने के बाद जैसे भाग्य खुल गए हो। इसी बीच उन्होंने वकालत पास कर लिया। और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस भी करने लगे। धीरे-धीरे घर के हालात भी सुधरने लगे। घर में कब भाई बहन की जोड़ी पदार्पण कर लिया पता ही नहीं चला।

कहते हैं कि स्त्री जब मां बन जाती है तो उसकी संपूर्ण ध्यान पति की अपेक्षा बच्चों में ज्यादा अटक कर रह जाता है। राधिका भी अपने दोनों बच्चों के पालन पोषण में समर्पित कर दिया था। बच्चों की देखभाल में वह इतना खो जाती थी कि वह किसी की पत्नी हैं , बच्चों के अलावा कोई और उसका इंतजार कर रहा है। वह भूल सी गई थी।

उसकी बेटी लक्ष्मी ऐसा लगता था उसकी फोटोकॉपी हों। अपना संपूर्ण ध्यान बच्चों को सफल बनाने में लगा दिया था। धीरे-धीरे बच्चे बड़े होने लगे। बच्चों की उच्च शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दिया।

समय का पहिया अपनी गति से बढ़ता जा रहा था। बच्चे जब थोड़ा बड़े हुए तो उसे थोड़ा समय मिलने लगा। फिर सोचा कि इस जिंदगी का क्या भरोसा है जो कुछ स्वांस बची हुई हैं परमात्मा का भजन कर लिया जाए। फिर दोनों पति-पत्नी ने एक गुरु जी महाराज से दीक्षा लेकर नाम जप भी करने लगे थे।

सुदेश तो अक्सर व्यस्तता के कारण नाम जप छोड़ देता था लेकिन राधिका ने कभी छोड़ा हो ऐसा नहीं हुआ कभी। उसके गुरुजी तो उसे मीरा कहा करते थे जो हर समय भगवान की भक्ति में लीन रहा करती थी। सुदेश को यह भरोसा नहीं हो रहा था कि परमात्मा उसे इतनी जल्दी अपने धाम बुला लेगा।

सुदेश के पास आज सब कुछ है लेकिन ऐसा लगता है कि बाग का माली जैसे खो सा गया हो। जिंदगी की बाग बड़ी सूनी सूनी सी हो गई है। जिंदगी है काटनी तो पड़ेगी। राधिका के जाने के बाद सुदेश को ऐसा लगता है कि शरीर तो है लेकिन प्राण जैसे सूख से गए हो। लगता है जैसे जिंदगी निष्प्राण हो गई हो।
सच है जीवन साथी जब तक साथ रहता है उसको हम कभी नहीं समझ पाते हैं।

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मदद

    कुलदीप प्राथमिक विद्यालय बसेड़ा खुर्द में कक्षा 5 का छात्र था। वह पढ़ाई में बहुत होशियार था। सब कुछ आसानी से तथा जल्दी से याद कर लेता था। रमेश सर को उस पर गर्व था। वे बाकी बच्चों को कुलदीप से प्रेरणा लेने व मेहनत से पढ़ने के लिए बोलते थे। कुलदीप की पढ़ाई के…

  • |

    पुनर्विवाह | Punar vivaah film script

    एक लड़की, पलक | अमृतसर मे, अच्छे जीवनसाथी पाने के लिए माथा टेक रही है, तभी पीछे दो लड़के अलग-अलग शहरों से आये (1>पवन {अनाथ अमीर,बिजनेश}) और (2> पुनीत {मिडिल परिवार,जॉब}) पलक के अगल-बगल बैठ माथा टेक, अपने घर की सुख-शांती और सुन्दर सुशील जीवन साथी की कामना की दर्शन कर पलटे, तो पलक को…

  • हँसी

    बहुत दिनों बाद सब एक साथ इकट्ठा हुए थे। घर का आँगन रौनक से भर गया था। बच्चे दौड़ते फिर रहे थे, औरतें रसोई में व्यस्त थीं, और मर्द हुक्का-चाय का आनंद ले रहे थे। मिलजुल कर खाना खाने के बाद सभी बरामदे में बैठ गए — बातें चलने लगीं, हँसी-ठिठोली का दौर शुरू हो…

  • गृहशिल्पी

    जब शिल्पी की शादी हुई तब उसकी उम्र 24 वर्ष थी।वह भी अन्य लड़कियों की तरह अपने जीवनसाथी की अर्धांगिनी बन उसके सुख-दुख बांटने ससुराल आ गयी। वह पढ़ी लिखी तो थी ही सुलझी और समझदार भी थी वरना पढ़ाई बीच मे छोड़कर अपने बूढ़े पिता का मान रखने की खातिर शादी के लिए बिना…

  • अहिल्या | Ahilya

    रूप सौंदर्य की प्रति मूर्ति है अहिल्या। अहिल्या के सौंदर्य को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उसका विवाह गौतम ऋषि के साथ हुआ था। कहा सौंदर्य की प्रति मूर्ति और कहा ऋषि महर्षि। कोई मेल नहीं खाता था। एक बार देवराज इन्द्र की उस पर पड़ी तो वह उसके सौन्दर्य को निहारता ही…

  • ‘छेड़खानी और समझदारी’

    तीन व्यक्ति चौपाल पर खड़े होकर महिलाओं पर बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं पर चर्चा कर रहे थे। तीनों व्यवसायी हैं। उनमें से पहला व्यक्ति बोला:- “कल यहीं मेरी दुकान के सामने एक लड़के ने एक लड़की को छेड़ा और उसके साथ बदतमीजी की। आसपास के सभी लोगों ने इस घटना को अपनी आंखों से देखा,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *