Tumhari khushi ke khatir
Tumhari khushi ke khatir

तुम्हारी खुशी की खातिर

( Tumhari khushi ke khatir )

 

अदनान आज समुंद्र की सैर को निकाला, उसका दिल चाह रहा था कि आज वह समुद्र की ठंडी हवा खाए, इसीलिए वह अपनी बाइक पर समुद्र की जानिब निकल पड़ा। साथ ही उसने अपने पीछे अपने पांच साल के भतीजे शाजर को भी बिठाया।

शाम के वक्त समुंद्र की रेत पर टहलना उसे अच्छा लग रहा था। दूर-दूर तक फैला समुद्र का नीला पानी और उसके ऊपर फैला नीला आसमान दोनों का रंग एक हो रहा था। जमी तो मानो कहीं थी ही नहीं। चारों तरफ समुंद्री चट्टाने, रेत के टीलें नजर आ रहे थे।

कभी कोई समुद्र की लहर जोर से आती तो रेत का टीला बना देती। फिर हवा आती तो रेत के टीले को सुखा देती। फिर हवा मैं उड़ा देती इसी तरह हवा और लहरों की आंख मिचौली चल रही थी। अदनान तो इस फिजा मे खोकर ही रह गया।

समुद्र के किनारे रेत् पर बहुत सी रंग-बिरंगी सीपिया, घोंघे, कोड़िया बिखरी पड़ी थी। नन्हें शाजर की नज़र जब इन पर पड़ी तो वह उन्हें उठाने के लिये मचल उठा। उसने अपनी पैंट और शर्ट की सभी जेबें इनसे भर ली। फिर भी उसे अफसोस हो रहा था कि कैसे और उन सीपियों को समेटा जाये।

अदनान ने अपना काफी वक्त इन समुद्र की लहरों के बीच बिताया। जब शाम गहराने लगी तो वह घर जाने के लिए उठ गया।

उसने अभी अपने कदम बाइक की जानिब बढाये ही थे कि पीछे से आवाज आयी बाबूजी, बाबूजी आप ये मछली ले लिजिए बड़ी अच्छी मछली है। मैने समुद्र में जाकर पकड़ा हैं। आप जो भी दाम देगे मैं ले लुंगी। अधेरा हो रहा है इसलिए मैं इसे बाजार जाकर नहीं बेच सकती।

अदनान ने घूमकर देखा कि अट्ठारह उन्नीस साल को सावंली सी लड़की मछली की टोकरी लिए खड़ी है। उसकी बडी-बडी सुरमई आँखे मछली की तरह लग रही थी। उसके सांवले चहेरे पर चमक थी। मगर उन सुरमई आँखो मैं उदासी फैली थी, शायद उसमें मछली न बेच पाने का दुःख समाया था।

अदनान ने खमोशी से वह मछली ले ली और एक पचास का नोट निकालकर उसे दे दिया। पैसे पाकर वह लड़की खुश हो गयी। उसने शुक्रिया अदा करती नजरो से अदनान को देखा।

अदनान को उसकी आँखों मे न जाने क्या नजर आया कि वह उससे ही उलझकर रह गया। अदनान वह मछली लेकर घर आ गया।

अदनान अपने घर मे सबसे छोटा था। बड़ी बहन शादीशुदा थी और दूसरे मुल्क मैं ब्याही थी। उससे बडे भाई भी शादीशुदा थे। उनकी बीवी शमिरा थी और एक पाच साल का बेटा शाजर।

अदनान के वालिद फौज के रिटायर्ड कर्नल थे। वालिदा घरेलू और नेक खातुन थी। उनका परिवार छोटा था। सभी एक दूसरे का बेहद ख्याल रखते थे।

वह मछली वाकई काफी अच्छी बनी थी। सभी उस मछ्ली की तरीफ कर रहे थे। अगले रोज उनके घर कुछ मेहमान आने वाले थे, इसलिए अदनान की भाभी शामिरा ने उसे आज वैसी ही मछली लाने को कहा। अदनान तो खुद चाहता था कि लड़की से मिले और उससे मछ्ली खरीदे।

इसी उममीद पर वह आज फिर समुद्र के किनारे गया लेकिन उसे वहां पर वह मछ्ली वाली लड़की नहीं दिखायी दी। वह उसका काफी देर तक इंतजार करता रहा।

इसी दौरान सभी मछुआरे अपनी अपनी नाव किनारे पर लाकर खड़ी करने लगे और नाव से मछलियों की टोकरियां उत्तार कर उन्हें बाजार ले जाने लगे।

मछुवारों के आने से वहां काफी चहल पहल हो गई। घूमने वाले विदेशी भी उसने मछलिया खरीदेने लगे, लेकिन न जाने क्यों अदनान को उसी लड़की की तलाश थी उससे ही मछली खरीदना चाहता था उसने उसका काफी इन्तजार किया लेकिन, वह उसे कहीं दिखायी न दी मायूस होकर जाने ही वाला था कि सामने किनारे पर उसे वह लड़की अपनी नाव से उतरती दिखायी दी।

उसे देखकर अदनान की आँखों में चमक आ गयी। वह जल्दी से उसके करीब आया ओर बोला, क्या आज मछ्ली नहीं दोगी।

हां, क्यों नहीं बाबूजी, मैं इन्हें बेचने के लिये ही तो बाजार ले जा रही हूँ। लेकिन किया करू। मुझे मछली पकड़ने में देर हो जाती है। सभी मुझसे पहले चले जाते हैं। क्या तुम हर रोज मछलिया पकड़ कर बेचती हो। अदनान ने पुछा।

नहीं, जबसे मेरे बाबा बीमार हुए है, तबसे मुझे उनकी डयूटी सभांलनी पड़ रही है। घर मैं कोई बड़ा भी नहीं है। इसलिए मुझे ही ये काम करना पड़ता है। ठीक है, तुम ये सारी मछलिया मुझे देदो, तुम बाजार जाने से बच जाओगी, लेकिन बाबुजी आप इतनी मछलियां का क्या करोगे।

ज्यादा नहीं, बस अपने दोस्तों मैं बांट दूंगा। लेकिन तुमने अपना नाम नहीं बताया। अदनान ने बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए कहा।

जी मेरा नाम रुकय्या है, और आपका नाम बाबूजी? रुकय्या ने उसकी और देखते हुए कहा। अदनान ने उसे अपना नाम और परिवार के बारे में बताया। अदनान रोज समुद्र के किनारे जाने लगा।

रुकय्या भी उससे काफी घुलमिल गयी। अकसर दोनो समुद्र के किनारे टहलते बातें करते। रुकय्या उसके लिये सबसे बढ़िया मछली छांटकर रखती।

दिल ही दिल में दोनों एक दूसरे से मुहब्बत करने लगे थे। अगर अदनान किसी वजह से उससे न मिलता तो उस रोज वह बहुत बेचैन रहता।

रुकय्या भी उसका इंतजार करती, उसके कान उसकी बाईक की आवाज सुनने को बेताब रहते। दोनां एक दूसरे को बेहद चाहने लगे लेकिन, शायद इजहार उनकी किस्मत मे नहीं था।

काम की मसरूफियात की वजह से वह रुकय्या से न मिल सका। इसी सिलसिले मे उसे काम की वजह से शहर से बाहर भी जाना पड़ा। जब वह बाहर से वापस आया तो सीधा रुकय्या से मिलने समुद्र के किनारे गया। तो वहां का नजारा ही बदला हुआ था।

दूर दूर तक सिवाय समुद्र के कुछ नया, न कोई नाव, न कोई शोर, न रुक्क्या। दूर दूर तक फैले पानी के निशानियां बता रहे थे कि वहां दूर दूर तक पानी फैला होगा।

अदनान की समझ मे नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो गया। तभी उसने सामने से आते हुए एक लड़के से पूछा, यहाँ पर इतना बदलाव क्यो है?

आपको नहीं मालूम छः रोज पहले यहा बाढ़ आयी थी। समुद्री तुफान का रुख इसी बस्ती की ओर था। जो यहाँ सब कुछ तहस नहस करता हुआ चला गया। सारी बस्ती उजड गयी।

और वह मछली वाली। अदनान ने एकदम बेताबी से पूछा।

मालूम नहीं, आप किसकी बात कर रहे है। वैसे कुछ मछुवारे बचे है। जो तैरना जानते थे इसलिए बच गये। वो सब शरणार्थी कैम्प में हैं।

क्रमशः

✍️

रुबीना खान

विकास नगर, देहरादून ( उत्तराखंड )

 

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