मलाल

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“गुरुजी, आप नीतू को स्कूल की साफ सफाई के काम से हटा दीजिए।” ग्रामीण जितेंद्र ने प्राथमिक विद्यालय के हेड मास्टर कृष्ण सर को स्कूल जाते देखकर रास्ते में ही उन्हें रोककर कहा।

“भैया जी, शायद आपको पता नहीं.. उसको तो मैंनें छात्रहित में स्कूल की साफ-सफाई हेतु पिछले 1 साल से रख रखा है। आपको तो पता है कि सफाईकर्मी स्कूल आता ही नहीं है। रोज बच्चे स्कूल में बहुत गन्दगी कर देते हैं, शौचालय भी गन्दा हो जाता है। पेड़ पौधों के पत्ते भी काफी हो जाते हैं।

नीतू से पहले मुझे बच्चों के साथ मजबूरी में रोज स्कूल की साफ सफाई करनी पड़ती थी। इसी साफ-सफाई में काफी समय बीत जाता था। अतः बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए नीतू को रखना पड़ा। वैसे भी वो मात्र 1 घंटे के लिए ही तो स्कूल आती है, फिर घर चली जाती है।” कृष्ण सर ने पूरी बात बताते हुए जितेंद्र से कहा।

“सर, मुझे नीतू के साफ सफाई करने को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। आपकी सोच अच्छी है। आप बहुत अच्छे और नेक इंसान हैं लेकिन कोई व्यक्ति यदि आपके चरित्र पर उंगली उठाये, स्कूल की ख्याति को… जो आपने अपनी मेहनत, लगन व पढ़ाई से बनाई है… उस पर बट्टा लगाने की कोशिश करें तो यह अच्छा नहीं है।”

“क्या बात हो गयी भाई? मैं आपकी बात का मतलब नहीं समझा।”

“सर, कल रात शहर से घर आते समय मुझे नीतू का ससुर दयाराम शराब के नशे में धुत रास्ते में मिल गया। चूंकि मैं गांव जा रहा था, अकेला भी था तो दयाराम को अपनी बाइक पर बैठा लिया। रास्ते में दयाराम ने अपनी बहू नीतू को चरित्रहीन बताते हुए, गांव के बहुत से लोगों से उसके संबंध बताये। उसने यह भी कहा कहा कि नीतू के आपके साथ अवैध संबंध है। तभी तो रोज सुबह उठकर वह नहा धोकर स्कूल पहुँच जाती है?”

“हे भगवान! यह मैं क्या सुन रहा हूँ। नीतू के ससुर ने ही इतना बड़ा आरोप लगा दिया?”

“जी सर, मैंनें तो दयाराम को डांट लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में बोल दिया कि गुरुजी जैसा भला इंसान आसपास के इलाके में ढूंढे से भी ना मिलेगा। एक तो उन्होंने तेरे परिवार की गरीबी देखकर तेरी बहू को काम पर रखा, एक घण्टा रोज काम करने के 3000 रुपये महीना तनख्वाह दे रहे हैं… ऊपर से तू ही उन्हें गलत ठहरा रहा है।

उनके जैसा चरित्रवान व्यक्ति तो आसपास के क्षेत्र में मिलना ही मुश्किल है। पूरे गांव में कोई भी उन पर उंगली नहीं उठा सकता तो तुम गुरुजी के बारे में ऐसा कैसे बोल सकते हो? मैं गुरूजी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन सकता। यह कहकर मैंने उसको बीच रास्ते में ही बाइक से उतार दिया और घर चला आया।”

“आपने यह बात बताकर बहुत अच्छा किया। मैं आज ही नीतू को स्कूल से बाहर करता हूँ। मुझे भी इस तरह अपनी बदनामी पसंद नहीं। सच में, भलाई का जमाना ना रहा। मैंने तो सोचा था कि अगर किसी जरूरतमंद की मदद की जाये तो दुआएं ही मिलेंगी, क्या पता था कि बुराई मिलेगी? बताओ, जब घर के लोगों का ही नीतू पर विश्वास नहीं है तो कोई हमारी बात पर कैसे यकीन करेगा?”

जितेंद्र से बात करके… स्कूल पहुंचकर कृष्ण सर ने नीतू को बुलाया। उन्होंने उसके ससुर की सब बातों को बताते हुए कहा-

“नीतू जी, यह लीजिए आपके इस महीने के आज तक के रुपए… और कल से स्कूल की साफ सफाई हेतु मत आना। मैं किसी पुरूष व्यक्ति को साफ सफाई हेतु रख लूंगा लेकिन अब मैं किसी महिला को स्कूल की साफ सफाई हेतु नहीं रखूंगा।”

बेचारी नीतू दुखी मन से रुपए लेकर घर चली गई। कुछ समय बाद नीतू अपने पति करन को लेकर पुनः स्कूल आई।

“सर, अभी मुझे पिताजी द्वारा शराब के नशे में जितेंद्र से कहीं गलत बातों का पता चला। पूरे परिवार ने मिलकर पिताजी को खूब डाँट लगाई। आइंदा आपको परिवार के किसी सदस्य द्वारा कोई भी गलत बात सुनने को नहीं मिलेगी। आप मेरी पत्नी को स्कूल में रख लीजिए। मैं आपके आगे हाथ जोड़ता हूँ।” हाथ जोड़ते हुए करन बोला।

“आप इस तरह हाथ मत जोड़िए। मैं मजबूर हूँ। मैं अपनी और स्कूल की इज्जत से समझौता नहीं कर सकता। बहुत मुश्किल से अपनी पहचान बनाई है, उसको मैं गवा नहीं सकता। मुझे माफ कीजिए।” स्पष्ट रूप से अपनी बात रखते हुए कृष्ण सर ने नीतू को पुनः रखने से साफ मना कर दिया।

नीतू मायूस होकर अपने पति के साथ वापस लौट गई। कुछ समय बाद पुनः स्कूल आयी और कृष्ण सर पर तंज मारते हुए बोली-

“आप बहुत बुरे हो सर। मेरे पति ने आपसे कितनी मिन्नते की… मुझे कितना रखने के लिए कहा? लेकिन आपने एक न सुनी। आपने बहुत गलत किया।”

“अगर तुम मेरी जगह होती… हम दोनों के अफेयर की चर्चा चल रही होती तो तुम क्या करती? यही करती ना… जो मैंने किया। इज्जत किसे प्यारी नहीं होती? मुझे भी अपनी इज्जत प्यारी है और आपको भी। अब मैं अपनी, तुम्हारी व स्कूल की… रत्ती भर बदनामी नहीं चाहता इसलिए मुझे यह फैसला लेना पड़ा। मुझे लगता है कि मेरा यह फैसला बिल्कुल सही है। आप मेरी किसी बात का बुरा मत मानना।”

“सर, बुरा तो बहुत लग रहा है। बिन बात के ही ससुर जी द्वारा हमारे अवैध संबंध बना दिए गए। ससुर जी ने कल जितेंद्र से कहा था… उन्होंने ना जाने कितने लोगों से कहा होगा कि हमारे अवैध संबंध हैं। मुझे मलाल व दुःख इसी बात का है कि काश इन बातों में कुछ सच्चाई होती तो कितना अच्छा होता? तब मुझे इतना बुरा नहीं लगता, जितना अब लग रहा है।”

इस तरह नीतू को बोलता देखकर कृष्ण सर हैरान हो गए। उन्होंने नीतू को हमेशा अपनी बहन की नज़र से देखा था। उनके मन में नीतू को लेकर कभी इस तरह के विचार नहीं पनपे थे लेकिन नीतू ऐसा सोचेगी, ऐसा बोलेगी? इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। नीतू को यह सब बोलते हुए बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही।

अच्छा हुआ, जो उन्होंने उसे स्कूल से हटा दिया। उसकी अब की बातों से तो यही लग रहा था कि वह सच में अवैध संबंध बनाना चाहती थी। उन्होंने मन ही मन ईश्वर और जितेंद्र का धन्यवाद अदा किया जिस कारण से समय रहते, उन्होंने सही समय पर… सही निर्णय लेते हुए, नीतू को स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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