Bhagwan ke dakiye chhand

भगवान के डाकिए | Bhagwan ke dakiye chhand

भगवान के डाकिए

( Bhagwan ke dakiye )

 

फूलों की मस्त बहार,
बहती हुई बयार।
पेड़ पौधे नदी नाले,
ईश्वर के डाकिए।

 

पशु पक्षी जीव जंतु,
काले काले मेघ घने।
हंसी वादियां पर्वत,
ईश्वर के डाकिए।

 

चेहरे की चमक भी,
होठों की मुस्काने सारी।
दिलों की धड़कनें भी,
ईश्वर के डाकिए।

 

अनजान राहें सारी,
अनकहे शब्द मीठे।
आत्मा की आवाज मानो,
ईश्वर के डाकिए।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

प्यासा मन | Geet pyasa man

Similar Posts

  • जन्म दिवस

    जन्म दिवस ( शुभ जन्म दिन शनिवार 8 फरवरी ) जन्म दिवस विनोद भूरा का,मंगलमय हो ईश lवह तो नित उन्नति करें,दया करो प्रकृति ll जन्म दिवस के साथ ही,खुशियां रखिये खूब lधीरे-धीरे ही मिले,मन माफिक महबूब ll सदा स्वस्थ सुन्दर रहें,प्यारे समाज सेवी विनोद भूरा lउनसे ही उत्तम बने,ईश्वर हर परिवेश ll प्यारा प्यारा…

  • हिन्दी | Hindi Par Kavita

    हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम  ( Hindustan ke Hindi Hai Hum ) १. बड़ी मधुर मीठी है , सुन्दर है सुरीली है | दिल को छू लेने वाली, नाजुक और लचीली है | हर हिंदुस्तानी की जुवां, पर राज है उसका | ऐसी हमारी राष्ट्र भांषा, हिन्दी अलबेली है | हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम…

  • राम नाम अनमोल | Ram Kavita

    राम नाम अनमोल ( Ram nam anmol : shri Ram poem in hindi)   राम ही गीत राम ही तान राम है सात सुरों का ज्ञान राम है एक सुंदर झंकार राम ही जीवन और संसार राम है व्यक्तित्व का दर्पण संपूर्ण साधना प्रभु को अर्पण राम शब्द है मीठे बोल राम नाम है अनमोल…

  • इस दिवाली हर दिल हो दीया | Diwali par kavita

    इस दिवाली हर दिल हो दीया ( Is diwali har dil ho diya : Deepawali kavita )     इस दिवाली हर दिल हो दीया   रूह उसकी बाती प्रेम, प्यार महोब्बत भरे जज्बातों के तेल में जल कर   तेरे मेरे हर इक की अमावस की रात भी बने   पूनम सी पूरनमासी तभी…

  • Ghazal | सूखी दरख्तो के साये

    सूखी दरख्तो के साये ( Sookhi Darakhton Ke Saaye )     ये जो हम में तुम में कुछ प्यार बाकी है कहीं  दो दिलो  को बहलाने का बहाना तो नहीं फांसलो की अपनी भी जुबानें हुआ करती हैं तेरे मेरे करीब आने का इशारा तो नहीं   दिल जब भी धड़के, अफसाने बने ,सुना…

  • किसने देखा | Kavita kissne dekha

    किसने देखा ( Kissne dekha )      कल के कल को किसने देखा ना हमने ना तुमने देखा जीवन के हर गुणा गणित में तू -तू, मैं -मै सबने देखा,   बिन मौसम बरसातें देखा कितने दिन और रातें देखा बदल गये सूरज चंदा क्या? बदला क्यों जज्बातें देखा?   बहती सर्द हवाएं देखा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *