भारत में ई गवर्नेंस
भारत में ई गवर्नेंस

परिभाषा एवं अर्थ :-

गवर्नेंस का अर्थ वह काम जो गवर्नमेंट करती है यानी कि गवर्नेंस किसी राज्य किसी कंपनी किसी समुदाय को संचालित करने वाले काम को कहा जाता है।

इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल यूनानी दार्शनिक प्लेटो ने किया था। विश्व बैंक के अनुसार “गवर्नेंस वह तरीका है जिससे किसी देश के आर्थिक और सामाजिक संसाधनों के विकास के लिए उपयोग में लाया जाता है”।

यूएनडीपी के अनुसार “राजनीतिक प्रणाली के वह नियम जो कर्ताओं के बीच टकराव दूर करने के लिए बनाए जाते हैं।”

गवर्नेंस से तात्पर्य स्वीकार्य शासन प्रशासन से है। इसलिए गवर्नेंस को ‘गुड गवर्नेंस’ के तौर पर लिया जाता है। इसे जनतांत्रिक की कसौटी पर करते हैं।

इसलिए इस प्रशासन को राजनीति से अलग रखा जाता है। हालांकि आज की राजनीतिक व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं है।

विशेष करके भारत में, गवर्नेंस का अर्थ जन स्वीकृति का एक ऐसा स्तर है जसीम सिविल सोसाइटी की भागीदारी को भी राजनीतिक सत्ता और नौकरशाही के साथ बराबरी का भागीदार बनाने की कोशिश की जाती है।

ई गवर्नेंस में कई संभावनाएं विद्यमान है। यह सूचना प्रौद्योगिकी के विकास व प्रयोग को प्रोत्साहन करने का काम करता है। सभी संस्थाओं के बीच पारस्परिक सहयोग होता है।

इंटरनेट के माध्यम से सूचनाएं और सेवाएं आदान प्रदान की जाती है। इसके द्वारा सरकार नागरिकों के हितों के कार्यक्रम चलाते हैं।

जिससे सरकार पर जनता की विश्वसनीयता बढ़ सके। ई गवर्नेंस के माध्यम से भ्रष्टाचार की समस्या को समाधान करने की कोशिश होती है।

ई गवर्नेंस के फायदे :-

बीसवीं सदी के शुरुआत में भारत के सबसे कुशल प्रशासक वायसराय लॉर्ड कर्जन ने दफ्तरों में फाइल को एक मैसेज दूसरे तक पहुंचाने में समय लगता था और कहा जाता है कि जस्टिस डिलेड इस जस्टिस डिनाइड अर्थात न्याय में देरी का मतलब नया से इंकार है।

इसे उसने उसे तक सीमित नहीं रख सकते जो न्यायालय से मिलता है बल्कि यह नया सभी पर लागू होता है चाहे वह कार्यालय में हो या ना हो। एक मानस प्रशासन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हालांकि इस तरह के प्रशासन की आदत बनने में वक्त लग रहा है क्योंकि ज्यादातर मंत्रियों और नौकरशाहों को आज भी इंटरनेट और कंप्यूटर का इस्तेमाल करने नहीं आता लेकिन अधिकांश राजधानियों में बढ़-चढ़कर ई गवर्नेंस का इस्तेमाल बढ़ा रहा है।

एडवांस में विभिन्न स्तरों पर मानवीय संसाधन नीति निर्णय को कार्यान्वित करने वाली कहानियां और उनको समेटने वाले कार्य संस्कृति इसमें शामिल होती है।

केदारनाथ के उत्साहवर्धक परिणाम सरकार का देश और जनता से जुड़ा हुआ तंत्र होना और उसे स्वीकार श्री कार्य होना ही इसे प्रमाणित करता है लेकिन छोटे स्तर पर उद्योग व्यवसाय स्वायत्त संस्था में 1010 के परिणाम उत्साहजनक नजर आ रहे हैं।

कंप्यूटर के इस्तेमाल पर भले ही आतंक दिया जाता था कि इससे लोगों में बेरोजगारी पड़ेगी पर या तर्क भी कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग को रोक नहीं पाया बल्कि या तर्क इसके विपरीत साबित हुआ।

भारतीय समाज हर स्तर पर असमान विकास का शिकार रहा है। ऐसे में फिगर बढ़ने के द्वारा विकास में क्षमता लाई जा सकती हैं।

उप संघार भारतीय समाज में पिछड़ापन रहा है। भारत के गुणात्मक विकास में कई सारे तर्क बाधा बने हैं पर गुलाब विकास अभिव्यक्त के रूप में आता है।

जिसे टाला या भटका या नहीं जा सकता कि जबर ने भारत के आर्थिक राजनैतिक तंत्र के आधुनिकरण का एक अनिवार्य अंग बन गया है।

इसलिए भारत का पिछड़ापन इसे रोक नहीं पाया और धीरे-धीरे ही सही हम लोगों को इसका समुचित लाभ मिल रहा है। फिगर बढ़ने से नहीं बल्कि किसी भी तरह से गवर्नेस में कई तरह के होते हैं।

जैसे उससे संबंध लोगों और था विभिन्न स्तरों पर मानवीय संसाधन निर्णय नीतियां निर्णय को कार्यान्वित करने वाली प्रणाली जिम्मेदारियां इन सब को समझने वाली संस्कृति और इसका परिणाम सही गवर्नेंस के रूप में सामने आ रहा है।

लेखिका : अर्चना  यादव

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