कविताएँ

  • सर्दी की धूप | Sardi ki Dhoop

    सर्दी की धूप सर्दियों में धूप का राज,हर गली में उसका ही बाज।घर के आँगन में जो उतर आई,लगता जैसे सरकार बनकर आई। गुनगुनी धूप का खेल निराला,कभी सीधे छत पर, कभी आँगन में पग डाला।जहाँ तिरपाल देखा वहीं लेट गई,फूस की छत पर तो जैसे फिक्स बैठ गई। चाय की दुकान पर चर्चा थी…

  • आधुनिक द्वंद्व

    आधुनिक द्वंद्व प्रभु सुमिरन के पथ पर, पाओ सच्ची राह,सत्य, करुणा, प्रेम ही, जीवन का उन्नाह। फूलों की महक में छुपा, है प्रभु का आभास,जीवन की हर साँस में, बसा प्रेम-विलास। नदी बहती निर्बाध सी, सिखलाए ये बात,कठिनाई चाहे जितनी, रखना सहज प्रवाह। भारतीय संस्कृति में, गूँज रहा संसार,रीति-रिवाज और कला, अनमोल उपहार। नृत्य में…

  • अलविदा से स्वागत

    अलविदा से स्वागत गुज़रा साल बहुत ही अच्छा था,हर हाल में इतिहास वह रचा था;गुजरा कल सारा वो भी सच्चा था,हर पल जो ख़ुशीओं में बीता था। वक्त आएगा और निकल जाएगा,सोच अपनी अपनी कैसे जिएगा;गर बुरी आदतों को छोड़कर रहेगा,अच्छी आदतों से खुशियां पाएगा। अब सारी बुराइयां हम मिटा देंगे,जीवन में सदा सभ्यता को…

  • कागा के खट्टे मीठे अनुभव

    राम नाम राम मेरे रोम रोम में बसता,राम मेरे सांस रोमांस में बसता! आंखों का तारा बन हर पल,राम मेरी नज़र नूर में बसता! रक्त धारा बहती रग रग में,लाल ध्वल नस नस में बसता! राम रंग रूप स्वरूप मन मूर्त,स़ूरत बन सलोनी तन में बसता ! मृग नाभि कस्तूरी ढूंढे वन उपवन,सूंघे घास सुगंध…

  • अद्वैत दर्शन की गाथा

    अद्वैत दर्शन की गाथा ब्रह्म से हम, ब्रह्म में समाहित,यही सत्य है, जीवन का उद्देश्य।अहं ब्रह्मास्मि, आत्मा का स्वर,अद्वैत में बसा, जीवन का मर्म। न कोई भेद है, न कोई दूरी,सब एक हैं, यही सत्य की पूरी।ब्रह्म साकार, ब्रह्म निराकार,एक ही शक्ति, आत्मा का दुआर। जीवन की धारा, एक ही प्रवाह,आत्मा और ब्रह्म, दोनों का…

  • दुआँ है ऊपरवाले

    दुआँ है ऊपरवाले दुआँ है ऊपरवाले तुमसे,आने वाले साल में -2सुखमय जीवन सबका बीते,फँसे न अब जंजाल में -2 धारा बहे विकास की हरदम, खुशियाँ ऐसे बरसे हो, खुशियाँ ऐसे बरसे. हरमन प्यार से झूमें, गाये ,गम पाने को तरसे हो, गम पाने को तरसे. हटे समस्या और गरीबी -2मरे न कोई काल में, हो…

  • निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम

    निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम निर्मल गंगा की धारा जैसे साथ रहे तुम,2024, खत लिखना चाहती हूं मैं तुम्हें।जीवन की उपलब्धियों में संगी बनाना चाहती हूं,कभी हौसलों को परखते रहे,कभी चलने का साहस बढ़ाते रहे। तुम ने एकांत के एहसासों को कोमलता से जगाया,अनुभवों की यात्रा में नयन सजल हुए जब,तुमने ही…

  • न मनाओ अंग्रेजी नया वर्ष

    न मनाओ अंग्रेजी नया वर्ष अब तो अंग्रेजों का नया वर्ष सबको मुबारक हो,अंग्रेजियत जिसने अपनाया है उसे मुबारक हो।हम तो आर्यावर्त की धरती पर रहते हैं जनाब,हमारा नया वर्ष हमें तुम्हारा तुमको मुबारक हो।। नया वर्ष हम क्यों मनाते हैं समझ नहीं आता मुझे,न तो एक प्रकृति में कोई हलचल नजर आता मुझे।फिर भी…

  • मनमोहन | Manmohan

    मनमोहन मन को जिसने मोहाजिसकी कार्य रही महान,माॅं भारती की तुम संतानहे मनमोहन तुम्हें बारम्बार प्रणाम। अर्थशास्त्र के डॉक्टर बनेआरबीआई का गवर्नर,भारत सरकार में वित्त मंत्री बनेप्रधानमंत्री भी रहे डट कर। अयोग्यता नहीं तुम्हारे अंदरनहीं रहा कोई दोष व्यक्तिगत,कोयले की खान में बने रहे हिराचमकते रहे जिवन पर्यंत। थे दूरदर्शी तुम्हारी योजनाओं नेजन का कल्याण…

  • प्रार्थना 

    प्रार्थना  हो दया का दान प्रभु , विनती यही है आप से  हम बने इस योग्य प्रभु , बचते रहें हर पाप से।  जो मिला जीवन हमें ,प्रभु एक ही आधार हो  कर  सकें  नेकी  बदी , ऐसा मेरा व्यवहार हो हो  बुराई  दूर  खुद , हे! प्रभु  तेरे  प्रताप  से,  हो दया का दान…