सर्दी की धूप | Sardi ki Dhoop
सर्दी की धूप सर्दियों में धूप का राज,हर गली में उसका ही बाज।घर के आँगन में जो उतर आई,लगता जैसे सरकार बनकर आई। गुनगुनी धूप का खेल निराला,कभी सीधे छत पर, कभी आँगन में पग डाला।जहाँ तिरपाल देखा वहीं लेट गई,फूस की छत पर तो जैसे फिक्स बैठ गई। चाय की दुकान पर चर्चा थी…










