प्रार्थना 

प्रार्थना 

प्रार्थना 

हो दया का दान प्रभु , विनती यही है आप से 

हम बने इस योग्य प्रभु , बचते रहें हर पाप से। 

जो मिला जीवन हमें ,प्रभु एक ही आधार हो 

कर  सकें  नेकी  बदी , ऐसा मेरा व्यवहार हो

हो  बुराई  दूर  खुद , हे! प्रभु  तेरे  प्रताप  से, 

हो दया का दान प्रभु ,विनती यही है आप से। 

हम  रहें  बढ़ते  सदा, सृजन के उन्नति राह पे 

लोकहित  में  कार्य  को ,करते रहें उत्साह से

स्वार्थ  से  हों  दूर  हम , हों दूर दुर्जन ताप से, 

हो दया का दान प्रभु ,विनती यही है आप से। 

दीन  हों  या  हीन हों , सबके लिए उपकार हो

प्रेम  की  गंगा  बहे , कुछ  ऐसा  ही संसार हो 

कर दिखाएं हम सभी निज कर्म के विश्वास से,

हो  दया  का दान प्रभु ,विनती यही है आप से। 

काम  आए  देश  के,कण कण लहू सम्मान में 

भक्ति  का  हो भाव प्रभु,इस देश का ईमान में 

हो  सुबह  का काम प्रभु, शुरुआत तेरे नाम से, 

हो  दया  का दान प्रभु ,विनती यही है आप से। 

रचनाकार : रामबृक्ष बहादुरपुरी

अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • भगवान के डाकिए | Bhagwan ke dakiye chhand

    भगवान के डाकिए ( Bhagwan ke dakiye )   फूलों की मस्त बहार, बहती हुई बयार। पेड़ पौधे नदी नाले, ईश्वर के डाकिए।   पशु पक्षी जीव जंतु, काले काले मेघ घने। हंसी वादियां पर्वत, ईश्वर के डाकिए।   चेहरे की चमक भी, होठों की मुस्काने सारी। दिलों की धड़कनें भी, ईश्वर के डाकिए।  …

  • भोर की किरण | Kavita

    भोर की किरण ( Bhor ki kiran )   भोर की पहली किरण उर चेतना का भाव है उषा का उजाला जग में रवि तेज का प्रभाव है   आशाओं की जोत जगाती अंधकार हरती जग का जीने की राह दिखाकर उजियारा करती मन का   कर्मवीरों की प्रेरणा हौसलों की उड़ान है योद्धाओं की…

  • अच्छे शिक्षक | Acche Shikshak

    अच्छे शिक्षक ( Acche Shikshak ) प्रथम गुरू है हम सबकी माता, जिसने संसार में जन्म दिया है । दूसरे गुरू हैं हम सबके पिता , पाल पोष के बड़ा किया है । तीसरे गुरू हैं हम सबके शिक्षक, जिसने संसार का ज्ञान दिया है । चौथे गुरू हैं हम सबके प्रकृति, जिसने उदार का…

  • राष्ट्रधर्म | Kavita Rashtradharm

    राष्ट्रधर्म ( Rashtradharm ) देश काल सापेक्ष संस्कृति का जिसमें विस्तार है। राष्ट्र धर्म है श्रेष्ठ सभी से, सब धर्मों का सार है। प्राप्त अन्नजल जिस धरती से, बनी प्राणमय काया, जिसकी प्रकृति सम्पदा पाकर, हमने सब भर पाया, पवन प्रवाहित हो श्वांसों में, ऊर्ज्वस्वित है करता, अपने विविधि उपादानों से, जीवन सुखद बनाया, करे…

  • महारानी लक्ष्मी बाई | Maharani Laxmi Bai Par Kavita

    महारानी लक्ष्मी बाई ( Maharani Laxmi Bai )   आजादी की चिंगारी थी बैरियों पर भारी थी गोरों के छक्के छुड़ाए लक्ष्मी वीर नारी थी   तेज था तलवारों में ओज भरा हूंकारों में रणचंडी पराक्रमी हजारों पर भारी थी   क्रांति काल की कहानी वो झांसी की महारानी बिगुल बजाया रण का राष्ट्र पुजारी…

  • मां शैलपुत्री | Maa shailputri

    मां शैलपुत्री ( Maa shailputri )    पर्वतराज हिमालय के घर जन्मी मां शैलपुत्री, आदिशक्ति जगदम्बा का प्रथम रूप हिमराज की पुत्री। कठोर तपस्या करके शिव की बनी अर्धांगिनी, रूप अनुपम शांत स्वभाव की है ये स्वामिनी। श्वेत वस्त्र प्रिय इनको करती वृष की सवारी, हिमराज और मैना देवी की है ये दुलारी। कैलाश पर्वत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *