न मनाओ अंग्रेजी नया वर्ष

न मनाओ अंग्रेजी नया वर्ष

अब तो अंग्रेजों का नया वर्ष सबको मुबारक हो,
अंग्रेजियत जिसने अपनाया है उसे मुबारक हो।
हम तो आर्यावर्त की धरती पर रहते हैं जनाब,
हमारा नया वर्ष हमें तुम्हारा तुमको मुबारक हो।।

नया वर्ष हम क्यों मनाते हैं समझ नहीं आता मुझे,
न तो एक प्रकृति में कोई हलचल नजर आता मुझे।
फिर भी नए वर्ष की शुभकामनाएं नहीं दे रहे हैं लोग,
शायद हम सब बेवकूफ हैं अब यही समझ आता मुझे।।

न आर्यावर्त में कुछ आरंभ होता,न कुछ अंत होता है,
न तो कोई स्वागत दिखता लेकिन यह तुरंत होता है।
जरा ध्यान लगाओ,मन की गहराइयों से तो सोचो तुम,
भ्रमित किया गया हूं मै, इसका असर तुरंत होता है।।

जिसने हमको मारा उन्हीं के वर्ष को बड़े प्यार से मनाते हैं,
हम अपने नहीं विदेशी नववर्ष संस्कार को भी अपनाते हैं।
किसी ईसाई को हमारे नववर्ष की बधाई देते देखा कभी,
जिसने लूटा उनके त्यौहार को हम धूमधाम से मनाते हैं।।

अंग्रेजी नववर्ष,क्रिसमस,ईद,मदर डे मेरा त्यौहार नहीं है,
फ्रेंडशिपडे,वेलेंटाइनडे हमारी परंपरा को स्वीकार नहीं है।
इन आयातित लोगों के त्योहारों को मोड़ दो अपने घर से,
समझो और समझाओ, इसमें मिलता कोई सार नहीं है।।

आलसी सनातनी अब जागो और विरोध पर उतर जाइए,
यह त्यौहार भारतीय नहीं है सनातनियों को भी समझाइए।
वरना हमारा सर्वनाश हो जाएगा जग से बचेगा नहीं कोई,
सांता क्लास को मारो और अंग्रेजी त्योंहारों को भगाइए।।

प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी
गोंडा,उत्तर प्रदेश

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