कविताएँ

  • कुल्हड़ | Kulhar

    कुल्हड़ प्यारे कुल्हड़ बनते प्यारी मिट्टी सेतिलक करते सब प्यारी मिट्टी सेकुम्हार बनाए प्यारे होते कुल्हड़जब देखें सब मन भाए कुल्हड़ चाय के कुल्हड़ सबको होते प्यारेयार दोस्त सब मिलकर पीते सारेकुल्हड़ की चाय सबको होती प्यारीखुश होकर चाय पीएं जनता सारी कुल्हड़ शुद्धता के सदा ही होते प्रतीकबनाएं कुम्हार कुल्हड़ मिट्टी करके बारीककुल्हड़ सबके…

  • बढ़ई का इतिहास

    बढ़ई का इतिहास प्राचीन सभ्यता से जुड़ा हुआ है बढ़ई का इतिहास,कुशल कारीगरी शिल्प-कला है कारपेंटर के पास।करतें है इनके हृदय भगवान विश्वकर्मा जी निवास,फर्नीचर के कामों में यह लोग कर रहें है विकास।। छिल-छिलकर यह काठ को अद्भुत चीजें बना देते,ना देखा ना सोचा किसी ने मनमोहक रूप दे देते।दिल में उम्मीद लिए यह…

  • सावन आया | Sawan Aaya

    सावन आया  नयी चेतना  नयी जाग्रत  अंतर्मन में  नया भाव कुछ  मन को भाया, गूॅंज उठे स्वर झूॅंम उठे वन प्रकृति ने भी  नव मधुरस का  पान कराया, लतिकाएं तरु आलिंगन कर  लिपट लिपट कर  नतमस्तक  साभार जताया, रिमझिम रिमझिम  बूॅंदें जल की  छोड़ गगन को  उतर धरा पर  उपवन का  संसार बसाया, स्पर्श प्रेम…

  • तुम्हारा साथ और तुम

    तुम्हारा साथ और तुम मैंने हमेशा प्रयत्न किया,अपने अनुराग को पारावार देने का,एवं उसकी नीरनिधि में समाने का,तुम्हारे चेहरे की आभा,और उस पर आईहँसी कोकायम रखने का,किन्तु-मैं हमेशानाकामयाब रही,क्योंकि–तुम मुझे एवं मेरे प्यार कोसमझ ही नहीं पाये।तुम मेरीभावनाओं में लिप्त,परवाह कोभांप न सके,मालूम है कि-हमेशा साथ संभव नही,फिर भी मैंने हमेशा ढूंढ़ी तलाशी,तुम्हारे साथ रुक…

  • जिनसे अब तक सुना दुश्मनी हो गई

    जिनसे अब तक सुना दुश्मनी हो गई जिनसे अब तक सुना दुश्मनी हो गईकह रहे अब वही दोस्ती हो गई बात देखो बहुत ये बड़ी हो गईक्यों नबाबी नगर गोमती हो गई माँ-पिता से मिला आज आशीष तोदूर जीवन की सब बेबसी हो गई घर कदम क्या पड़े आज सरकार केहर तरफ़ अब यहाँ रोशनी…

  • अति

    “अति” प्रत्येक अति बुराई का रूप धारण कर लेती है।उचित की अति अनुचित हो जाती है।। अति मीठे को कीड़ा खा जाता है।अति स्नेह मति खराब कर देता है।। अति मेल मिलाप से अवज्ञा होने लगती है।बहुत तेज हवा से आग भड़क उठती है।। कानून का अति प्रयोग अत्याचार को जन्म देता हैं।अमृत की अति…

  • चाँद को निखार कर

    चाँद को निखार कर चाँद को निखार कर आज बहुत प्यार दूँ,प्रेमिका की झूमती लटे बिन कहे संवार दूँ निज हृदय प्रतीत होते प्रेम की बात हैछोड़कर समाज य़ह कामना की बात हैहृदय के प्रकोष्ठ यूँ अनुभाव कांपते रहेहृदय को न्यौछावर कर भावना की बात हैरूप कांच को छुए नहीं दृश्य को संवार लूँअपनी निश्चल…

  • गुरु घासीदास बाबा जयंती

    गुरु घासीदास बाबा जयंती सन्ना न न ना सना हो रे नना ।सन्ना न न ना नाना हो रे नना ।। गुरु बाबा जी के जयंती मनाए बर।सतनाम के पावन अंजोर बगराए बर।आवा जी संगी हो आवा जी मितान।गुरु बाबा के सीख ल कर लव धारन।सन्ना न न ना सना हो रे नना ।सन्ना न…

  • खुदीराम बोस | Khudiram Bose

    खुदीराम बोस भारत का जयघोष..बेबाक शब्दों का उदघोष..मनाया बचपन में ही फाँसी का जल्लोष..खुदीराम बोस…खुदीराम बोस…भारत की रक्षा का प्रणतेज पवन वायू का था प्रकंपनपाषाण थाथा वह तीर भाले का निशानस्वतंत्रता संग्राम कास्वतंत्र आकाश..विदेशियों का कालइस नाबालिग युवक ने कर दिए थे ब्रिटिश साम्राज्य के हाल..सीने पर अपने झेले वारगुलामी के ऊपर किया कड़ा प्रहारभारत…

  • प्रियंका सौरभ की कविताएं | Priyanka Saurabh Poetry

    “मनीषा की अरदास” मत रो माँ, अब मत रो,तेरी बेटी की आवाज़ हम सब हैं,न्याय की राह पर चल पड़े,अब जाग उठा हर जन-जन है…। गूँजे धरती, गगन गवाह,अन्याय के विरुद्ध उठे निगाह।“भाग गई होगी” कहना भूल,अब टूट चुका हर झूठा फूल। मनीषा तेरी कसम हमें,लड़ेगे जब तक साँस है।न्याय की ज्वाला जलती रहे,हर दिल…