कुल्हड़

कुल्हड़ | Kulhar

कुल्हड़

प्यारे कुल्हड़ बनते प्यारी मिट्टी से
तिलक करते सब प्यारी मिट्टी से
कुम्हार बनाए प्यारे होते कुल्हड़
जब देखें सब मन भाए कुल्हड़

चाय के कुल्हड़ सबको होते प्यारे
यार दोस्त सब मिलकर पीते सारे
कुल्हड़ की चाय सबको होती प्यारी
खुश होकर चाय पीएं जनता सारी

कुल्हड़ शुद्धता के सदा ही होते प्रतीक
बनाएं कुम्हार कुल्हड़ मिट्टी करके बारीक
कुल्हड़ सबके मन भाएं सर्दी हो या गर्मी
मिट्टी में मिल जाएगा नहीं चलेगी तेरी अर्जी

सुनील कुमार
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

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