कविताएँ

  • फिर क्यों?

    फिर क्यों? हम बंटेंगे तो कटेंगे  फिर क्यों बंटे हैं? जातियों में  धर्मों में  ऊॅंच में  नीच में  शिकार हो रहे हैं – केवल गरीब  लुट रहे हैं – केवल बदनसीब  मारे जा रहे हैं – पेट के भूखे।  लोकतंत्र की पद्धतियाॅं ऐसी नहीं है  जो तोड़ती ही नहीं  झुका देती है पेट के बल …

  • आनंद त्रिपाठी की रचनाएँ

    लिखो नवल श्रृंगार फूलों की मकरंद है छाया हर्ष अपारउठो कवि इस भोर में लिखो नवल श्रृंगार लिखो नवल श्रृंगार प्रेम की अनुपम धुन मेंहो कोई न द्वंद कभी इस चंचल मन में अरुणोदय की झलक तुषार की कैसी मालाभ्रमर गीत यह मधुर गान है रस वाला यही अवधि है बजें दिलों के तारउठो कवि…

  • कागा की क़लम से | Kaga ki Kalam Se

    जाति धर्म जनता को नहीं बाटो जाति धर्म में ,मुफ़्त रेवड़ियां नहीं बांटो जाति धर्म में! चुनावों के चक्रव्यू में फंस धंस कर ,दलगत दलदल नहीं बाटो जाति धर्म में ! लोभ मोह माया छोड़ शिक्षा मुफ़्त करो ,अमीर ग़रीब नहीं बांटो जाति धर्म में! ऊंच नीच छूआ छूत भेद भव बेकार ,मानव को नहीं…

  • नफरत भरी है जमाने में

    नफरत भरी है जमाने में नफरत भरी है जमाने मेंदर्द भरा है दिवाने मेंवह मजा नए में अब कहांजो मजा होता था पुराने में।। पैसा है तो अब प्यार हैमोहब्बत भी एक व्यापार हैइंतजार कौन करता हैजब बेवफा सरकार है।। दौर कहां अब पुराना हैदेवदास जैसा कोई दीवाना हैअब तो पैसे से दिल्लगी होतीप्यार तो…

  • भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिवस

    भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिवस धर्म मार्ग को जीवन आचरण में अपनायें ।विकट – विकटतम मार्ग से पार लगायें ।कही न रुके सदैव आगे बढ़ते जायें ।मानव जीवन से मोक्ष पायें ।प्रभु पार्श्वनाथ की तरह मंजिल पायें ।धर्म से भावना प्रबल रहती ।गलत आचरण से कोसों दूर रहते ।मन में निर्मल सरिता की भावना…

  • अहं का नशा

    अहं का नशा नशा मदांध कर देता हैमनुष्य जन्म का मूलउद्देश्य ही भुला देता हैजो उड़ते है अहं के आसमानों मेंज़मीं पर आने में वक़्त नही लगताहर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी मेंवक़्त गुज़रने में वक़्त नही लगता हैंनशा जहर से ज़्यादा घातक हैअहं का नशा हावी हो ही जाता हैऔर उनके विवेक पर…

  • संत गुरु घासीदास | Sant Guru Ghasidas

    संत गुरु घासीदास छोटे-बड़े का भेद मिटाकर,सबको एक समान बनाए।संत गुरु घासीदास का संदेश,जो जग को राह दिखाए।दूसरे का धन पत्थर समझो,परस्त्री को माता मानो।सत्य की डगर पर चलकर,जीवन को उजियारा जानो। जुआ-शराब के मोह को छोड़ो,ये दुख का कारण है।पाप की राह जो चुने,वो केवल संकट का दर्पण है।संत की वाणी अपनाकर, सत्य की…

  • निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?

    निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता? गुलिस्तां जो थे सुनसान हो गए।पंछी पेड़ों से अनजान हो गए॥ आदमी थे जो कभी अच्छे-भले,बस देखते-देखते शैतान हो गए॥ सोचा ना था कभी ज़ख़्म महकेंगे,गज़लों का यू ही सामान हो गए॥ निभाए तो कैसे, कौन-सा रिश्ता?दिल सभी के बेईमान हो गए॥ पूछते हैं काम पड़े सब हाल मियाँ,मतलबी अब…

  • सर्दी | Sardi

    सर्दी सर्दी में होती जब कड़क ठंडी हवा ।चाय की प्याली होती सबकी प्यारी दवा।।मास दिसंबर में जब होती प्यारी सर्दी।भाई पहन लेते सब अपनी गर्म वर्दी।। सर्दी में जब-जब ठंडी हवा चलती।कपड़े भी देखो कहा हवा सुखाती।।ठंडी हवा में चाय की प्याली होती प्यारी।ठंडी हवा में चाय का मजा लें दुनिया सारी।। किट-किट बजते…

  • चिट्ठी और संदेश

    चिट्ठी और संदेश तेरी यादें, हवाओं में सजी हैं,हर आहट में तेरी कोई कड़ी बसी है।चिट्ठी न कोई, न ही कोई पैगाम,तेरे बिना वीरान लगे ये सारा जहां तमाम। तेरे जाने का दर्द, अब भी दिल से उतरता नहीं,हर रास्ता तेरा पता पूछता है, कहीं पर भी रुकता नहीं।जाने वो कौन सा देश है, जहाँ…