Pratibha Pandey Poetry

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति” की कविताएं | Pratibha Pandey Poetry

प्रतिभा हो अनाड़ी दिखना नहीं है हे नारी!तुम्हें कभी टूटना नहीं है,सशक्त बनो तुम्हें बिखरना नहीं है ।।1। सावन कहाँ सदैव रहता भला,पीड़ित बन गेसू झरना नहीं है ।।2। बसंत जानकर चलो खुद को,पर कभी पतझड़ बनना नहीं है ।।3। फूल की उपमा से सुशोभित हो,फिर कण्टक बन चुभना नहीं है ।।4। शिव शक्ति बने…

Dr. Pallavi Singh 'Anumeha' Poetry

डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ की कविताएं | Dr. Pallavi Singh ‘Anumeha’ Poetry

प्रतिध्वनि यकीनन कभी-कभी न,सह्रदय,भावमय हो,स्नेह से,बाहों में भर लेना,कितना ठहराव-सादे जाता है,मेरे अंतर्मन को।जिससे मुझे आत्मिक प्रेम है,उसके हिय से लगकर,विस्मृत हो जाती है,मेरी हर पीड़ा।चारों तरफ का परिवेश,निष्कलंक मालूम होता है,हिय के स्पन्दन में,उठ रहीं आवाजेंकिसी देवालय की घण्टियों-से,आ रही प्रतिध्वनि-सीप्रतीत होती है,अन्तःकरण सुवासित हो,अलक्षित-सानाच उठता है।। ये सारे सतरंगी रंग         खुशी में…

चॉकलेट डे

चॉकलेट डे

चॉकलेट डे तेरी यादों की मिठास से, हर लम्हा गुलजार है, तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही सरोकार है।हर एहसास, हर ख्वाब बस तुझसे है जुड़ा,जैसे चॉकलेट की खुशबू में लिपटा दिकुप्रेम का प्यार है। आज चॉकलेट डे पर तेरा एहसास पास लगे,तेरी मुस्कान ही मेरे प्यार की मिठास लगे।हर लफ़्ज़, हर धड़कन बस…

लौटेगी कुछ दिन में

लौटेगी कुछ दिन में

‘लौटेगी कुछ दिन में’ आंखों में खुशी मन में कुंभ की छाया बसी थी। लौटूंगी कुछ दिन में घर की,की व्यवस्था थी। निकल पड़ी गंगा मैया का नाम लेकर, आंखों में बस चंचलता थी। कुंभ नहाने के लिए छोड़ी उसने अपनी गली बस्ती थी। क्या मालूम था उसे की कुंभ में सांसें बडी सस्ती थी।…

Indu Sinha Poetry

इन्दु सिन्हा “इन्दु” की कविताएँ | Indu Sinha Poetry

प्रेम – दो चित्र (1) “प्रेम एक याद” प्रेम क्या है ?क्या सिर्फ एक दैहिक रिश्ता ?एक छत के नीचे रहना दो अजनबियों के समान ?खोखली जंजीरों में जकड़े रिश्ते,हर पल फिसलते,मुट्ठी में दबी रेत के समान |नहीं नहीं यह तो प्रेम नहीं है ,प्रेम तो एक याद है,वो याद जो दिलों में जिंदा है,वहाँ…

विनोद भूरा

जन्म दिवस

जन्म दिवस ( शुभ जन्म दिन शनिवार 8 फरवरी ) जन्म दिवस विनोद भूरा का,मंगलमय हो ईश lवह तो नित उन्नति करें,दया करो प्रकृति ll जन्म दिवस के साथ ही,खुशियां रखिये खूब lधीरे-धीरे ही मिले,मन माफिक महबूब ll सदा स्वस्थ सुन्दर रहें,प्यारे समाज सेवी विनोद भूरा lउनसे ही उत्तम बने,ईश्वर हर परिवेश ll प्यारा प्यारा…

प्रपोज़ डे

प्रपोज़ डे

प्रपोज़ डे तेरी आँखों में जो प्यार झलकता है,वही मेरी रूह तक महकता है।हर धड़कन में तेरा ही नाम बसा है,दिकु, तू ही मेरा पहला और आखिरी किस्सा है। सांसों में खुशबू है तेरे एहसास की,हर शाम है मेरी अब तेरी तलाश की।आज जुबां पर वही बात ले आया हूँ,जिसे सदियों से दिल में दबाया…

प्रकृति और मानव की उत्पत्ति

प्रकृति और मानव की उत्पत्ति

प्रकृति और मानव की उत्पत्ति प्रकृति की गोद मेंमानव की उत्पत्ति हुई।पेड़-पौधों की छाया में मानव का बचपन बीता।प्रकृति की सुंदरता नेमानव को आकर्षित किया। प्रकृति की शक्ति नेमानव को मजबूत बनाया।प्रकृति की सुंदरता नेमानव को जीवन का आनंद दिया।प्रकृति की गोद मेंमानव ने अपने जीवनकी शुरुआत की। प्रकृति की सुंदरता नेमानव को जीवन काप्रकृति…

निर्मल कुमार दे की कविताएं

निर्मल कुमार दे की कविताएं | Nirmal Kumar Dey Poetry

तुम्हारा खत एक खत तुम्हाराआज भी सहेज रखा है मैंनेहर शब्द में झलकता है तुम्हारा प्यारखुशबू मिलती है तेरी जुल्फों कीअनायास सामने आ जाता है तुम्हारा चेहरातुम्हारी बड़ी- बड़ी आँखेंतुम्हारी मासूमियत,तुम्हारी नादानीतुम्हारी सादगीसभी प्रतिबिंबित हो जाती हैंइस गुलाबी खत में।कुछ भ्रम -सा हैयह मेरी नादानी भीबरसों बीत गएपर याद है किजेहन में बिल्कुल ताजा हैभूल…

मैं नदी का शोर हूँ

मैं नदी का शोर हूँ

मैं नदी का शोर हूँ ( पूर्णिका ) मैं नदी का शोर हूँ मैं हूँ परिंदों का बयान, काट सकते हो अगर तो काट लो मेरी ज़ुबान। मैं अगर मिट्टी महज़ होता दफ़न आसान था।मैं हवा हूँ, रोशनी हूँ छेंक लूंगा आसमान । बिक रहे हैं ख़ुशनुमा नक़्शे खुले बाज़ार मेंखेत में उगता नहीँ हंसता…