प्रतिभा पाण्डेय “प्रति” की कविताएं | Pratibha Pandey Poetry
प्रतिभा हो अनाड़ी दिखना नहीं है हे नारी!तुम्हें कभी टूटना नहीं है,सशक्त बनो तुम्हें बिखरना नहीं है ।।1। सावन कहाँ सदैव रहता भला,पीड़ित बन गेसू झरना नहीं है ।।2। बसंत जानकर चलो खुद को,पर कभी पतझड़ बनना नहीं है ।।3। फूल की उपमा से सुशोभित हो,फिर कण्टक बन चुभना नहीं है ।।4। शिव शक्ति बने…