Category: छंद
सरसी छंद : गीत
सरसी छंद ( Sarsi Chhand ) करते हो किन बातों पर तुम , अब इतना अभिमान ।आज धरा को बना रहा है , मानव ही शमशान ।।करते हो किन बातों पर तुम … भूल गये सब धर्म कर्म को , भूले सेवा भाव ।नगर सभी आगे हैं दिखते , दिखते पीछे गाँव ।।मानवता रोती है…
कृष्ण लला | मत्त गयंद सवैया
कृष्ण लला कृष्ण लला अवतार लिए चॅंहु ओर बजे दिन रैन बधाई। सोहर गाय रहीं ब्रज नार सुहासित नंद जसोमति माई। अंबर से अवनी तक आज सभी नर नार रहे मुसकाई। खेल रचा बिधना चुपचाप निहार रहे क्षण मंगलदाई।। केशव बेटिन को दुख कष्ट निवार धरा पर लाज बचाओ घूम रहे चॅंहु ओर दुशासन चीर…
जय हिंद जय भारत | लावणी छन्द
जय हिंद जय भारत इस माँ से जब दूर हुआ तो , धरती माँ के निकट गया । भारत माँ के आँचल से तब , लाल हमारा लिपट गया ।। सरहद पर लड़ते-लड़ते जब , थक कर देखो चूर हुआ । तब जाकर माँ की गोदी में , सोने को मजबूर हुआ ।। मत कहो…
शारदे कृपा करो | रामभद्र संवार्णिक दंडक छंद
शारदे कृपा करो ( Sharde kripa karo ) शारदे! कृपा करो अखंड ज्ञान दान, हूँ अबोध साधिका प्रसाद-दायिनी, l प्रार्थना न जानती न अर्चना निकाम, लेखनी प्रशस्त हो विचार -वाहिनी! l शुद्ध छंद शुद्ध भाव लेखनी प्रबुद्ध, नृत्य गीत वाद्य की प्रचण्ड नादिनी l आपके समक्ष दीन पातकी अशक्त, एक दृष्टि डाल दे विशाल-भावनी!ll ज्ञान…
नैनो में सावन | कुण्ड़लिया छन्द
नैनो में सावन ( Naino mein sawan ) नैनो में सावन लिए , करती हूँ मनुहार । ऐसे मत छेड़ो पिया , लगती जिया कटार ।। लगती जिया कटार , बूँद सावन की सारी । आ जाओ इस बार , विरह की मैं हूँ मारी ।। भीगूँ तेरे संग , यही कहता मनभावन । नही…
गुरु महिमा गीत | ताटक छंद
गुरु महिमा गीत गुरु महिमा है अगम अगोचर, ईश्वर शीश झुकाया है। पढ़ा लिखाकर हमको गुरु ने, काबिल आज बनाया है। समय समय अभ्यास कराते, गीत हमको सिखाते जी। सब शिष्यों को पारंगत कर, छंद विधान लिखाते जी। साहित्य सागर में मनवा ये, डुबकी बहुत लगाया है। पढ़ा-लिखाकर हमको गुरु ने, काबिल आज बनाया है।…
आधुनिक युग विवाह का चलन | मनहर घनाक्षरी छंद
आधुनिक युग विवाह का चलन सुनो जी बात राज की व्यथा कहूं मैं आज की शादी वाले घर पर काज करवाते हैं बन्ना देखो हीरो लागे बन्नी जी हीरोइन लागे सौंदर्य घर जाकर साज करवाते हैं शादी के जी रश्म रीत भूले हैं शगुन गीत चूल्हा चौका सारे काम दूजा कर जाते हैं बड़ी शर्म…
धरती | मनहरण घनाक्षरी
धरती ( Dharti ) हरी भरी प्यारी धरा, वीर प्रसूता अवनी। हरियाली भरपूर, धरती पे लाइए। महकती बहारों से, कुदरती नजारों से। पुष्प धरा की सौरभ, समां महकाइए। धरती अंबर तारे, पर्वत नदिया सारे। ओढ़े धानी चुनरिया, धरा को संवारिए। वसुंधरा वीर भूमि, गौरव से खूब झूमीं। मातृभूमि है हमारी, गुणगान गाइए। कवि : रमाकांत…
भीषण गर्मी | रोला छन्द
भीषण गर्मी कहती है सरकार , आज है भीषण गर्मी । पर भाषण में आज , नही है कोई नर्मी ।। हो विद्यालय बंद , हुए हैं बच्चे मूर्छित । खबर यही हो फ्रंट , सभी के मन हो हर्षित ।। हम भी हैं इंसान , करें हम सब मजदूरी । लू की लगे लपेट…
छंद घूंघट | मनहरण घनाक्षरी
छंद घूंघट मान मर्यादा रक्षक, लाज शर्म धर ध्यान। चार चांद सौंदर्य में, घूंघट सजाइए। प्रीत की फुहार प्यारी, सुंदर सुशील नारी। पिया मन को लुभाती, घूंघट लगाइए। गौरी का श्रृंगार सौम्य, प्रियतम मन भाए। गोरा मुखड़ा चमके, घूंघट दिखाइए। पहने परिधान वो, घर की पहचान वो। भारत की शान नारी, घूंघट हटाइए। कवि : रमाकांत…