Category: शेरो-शायरी
अरसे बाद | नज़्म
अरसे बाद ( Arse Baad ) अरसे बाद आज जिंदगी से मुलाकात हुई खैरियत सलामती की तकल्लुफात हुई। “वैसा ही हूँ, वहीं हूँ, जहाँ तुम थी छोड़ कर गई।” कहना था पर कह न पाया….. . . . खुदी थी कि खुद्दारी… लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :-…
ज़िन्दगी पर एक नज़्म | Zindagi Par ek Nazm
जिंदगी पर एक नज़्म ( Zindagi par ek nazm ) नज़्म हँसती आँखों से दर्द बयाँ करने का नाम है जिन्दगी, जहर-अमृत समझकर पीने का नाम है जिन्दगी। नफरत की पगडंडी का कोई अंत ही नहीं, मोहब्बत की डगर चलने का नाम है जिन्दगी। हाथ नहीं रुकते थे तब नेक कामों से, अब पैसे पे…
अयोध्या | Ayodhya
अयोध्या (नज़्म ) हर किसी को देखो लुभाती है अयोध्या, तप-त्याग,संयम सिखाती है अयोध्या। पल में सिंहासन छोड़ राम वन चले गए, वचन का गुण-धर्म निभाती है अयोध्या। रो -रो के बुरा हाल था तब हरेक का वहाँ, उस राम के जिगर को समझती है अयोध्या। ब्रह्माण्ड का वो सार है चाहो तो देख…
ख़्वाबों में आया करो | Khwabon Mein
ख़्वाबों में आया करो ( Khwabon mein ) रात बीते तू ख्वाबों में आया करो, आके देखो सनम फिर न जाया करो। रुत जवानी की टिकती नहीं ये कहीं, नित्य जलवा तू आके दिखाया करो। आशिकी की परत बूढ़ी होती नहीं, अनछुआ वो बदन न छुआया करो। आग उंगली के पोरों तक सुलगे नहीं,…
वक्त का क्या | Waqt ka Kya
वक्त का क्या #CenturyGettingYoung 2024 वक्त का क्या , न थमेगा न थमा है दीवार पर लगा कैलेंडर मगर हर साल तो बदलता है इसकी रफ्तार का अंदाज़-ए-बयां कुछ और दिल की धड़कन सा कभी तेज़ कभी मद्धम कभी रवां सा है कुछ यादें कुछ निशानियाँ कुछ करम अता कर जाता कुछ चेहरे जवां…
सरहदों को और भी पक्का करें | Sarhad
सरहदों को और भी पक्का करें ( Sarhadon ko aur bhi pakka karen ) सरहदों को और भी पक्का करें दुश्मनों का बंद हर रस्ता करें आ सके दुश्मन नहीं उस पार से सरहदों पर रोज़ अब पहरा करें कान बहरे दुश्मनों के हो जाए जोर से जय हिंद सब बोला करें नाम हो…
आज का आदमी | Aaj ka Aadmi
आज का आदमी ! ( Aaj ka Aadmi ) मादरी जबान से कट रहा आज का आदमी, अंग्रेजी में नाक ऊँची कर रहा आज का आदमी। ऊपर से नीचे तक का लिबास चाहिए विदेशी, अपनी ही पहचान भूल रहा आज का आदमी। अपने दिल की जमीं पे बो रहा विदेशी संस्कार, खुद का संस्कार…
अंदाज जीने का | Andaaz Jeene ka
अंदाज जीने का ! ( Andaaz Jeene ka ) ( नज़्म ) अंदाज जीने का मुझको न आया, गैरों की बाँहों में सोने न आया। जुदाई का जख्म जल्दी भरता नहीं है, खिंजाँ में मुझे गुल खिलाने न आया। करती मोहब्बत बेपनाह मुझसे, ख्वाबों में मुझको बुलाने न आया। फलक से उतरती है किसी हूर…
ख़ुशबू वतन की | Khushboo Watan ki
ख़ुशबू वतन की ( Khushboo watan ki ) सांस में मेरी बसी ख़ुशबू वतन की बात करता हूँ यहाँ तो मैं अमन की प्यार से महके वतन यूं ही हमेशा ख़ूबसूरती कम नहीं हो इस फ़बन की दुश्मनों की चाल हर नाकाम करके हाँ हिफ़ाज़त रोज़ करनी है चमन की सैनिकों ही हौंसले जिससे…
हे राम | Hey Ram
हे ! राम ( Hey Ram ) नज़्म शिकायत किसी की न करते हैं राम, एक प्लेटफार्म पे जीना सिखाते हैं राम। आज्ञाकारी पुत्र तो वो बनकर दिखाए ही, समाधान धैर्य से निकालते हैं राम। राज -परिवार के वो बेटे तो थे ही, जीवन की कला सिखाते हैं राम। हार क्या होती है, जानते नहीं,…