संस्मरण

  • चाय

    जब मैं छोटा था, 12 वर्ष का रहा होऊंगा। मैंने तब चाय बनाना सीखा ही था। तब घर में कोई भी मेहमान आता, चाय मैं ही बनाता था। मुझे चाय बनाने में खुशी मिलती थी, बड़ा मजा आता था। इसी बहाने मुझे भी चाय पीने को मिल जाती थी। एक दिन घर पर सीताराम अंकल…

  • ओर अंततः मैने बिरयानी खा ही ली..

    यह मेरे लिए बड़ी परेशानी वाली बात थी कि कोयम्बटूर में शाकाहारी होटल नही के बराबर है.. ईक्का दुक्का होंगी भी तो मेरी नजरो से नही गुजरी.. रेलवे स्टेशन पर ही होटल हरिप्रिया में मेरा मुकाम था और यही एक शाकाहारी होटल थी जहाँ मैं दक्षणी भारत का भोजन करता था।        शुरुआती कुछ दिन…

  • मेरी डायरी से

    मनुष्य जब जीवन के उत्तरार्ध में होता है तो जिंदगी के अनुभवों को किसी  सुपात्र व्यक्ति को सौंपना चाहता है। सोचता है जिंदगी में जो कुछ हम नहीं रह कर सके उसे आने वाली पीढ़ियों को सौंप दूं । जिससे ज्ञान की धारा सतत बहती रहे । जितने भी बड़े बुढो से मिलता हूं एक…

  • ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी को दी श्रद्धांजलि

    स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी के शरीर छोड़कर परमात्मा शिव की गोद लेने पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। आध्यात्म और रूहानियत के क्षेत्र में बड़ी शख्सियत राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने श्रीगोपाल नारसन की कई पुस्तकों का विमोचन विभिन्न अवसरों पर किया था। गत…

  • सव्वा किलो गुड़

    महेंद्र भाई की छोटी सी उम्र मे मौत के बाद मेरे ससुर जी स्व. गेबिलाल जी ढालावत साहेब ने नागपुर के गड्डी गोदाम स्थित दुकान और घर को छोड़ने का फैसला करते हुए निर्णय लिया की कलमना स्थित घर मे रहने हेतु जाये.. वहीँ किराणे की दुकान शुरू की जाये। महेंद्र भाई मेरे इकलोते साले…

  • शरीफभाई साडी वाले

    आज अचानक एक अजनबी चेहरे को देख मन में हलचल सी मची.. लगा की इस शख्स को कही देखा है.. वो साइकल पर जा रहे थे और मै अपने बेटे मनीष के साथ हिरोहोंडा पर.. काफी आगे बढ़ जाने बाद भी मन न माना और मै गाड़ी पलट उस शख्स की और बढ़ गया। मैने…

  • 26 वीं वैवाहिक वर्षगांठ

    सर्वप्रथम अरविंद भैया और स्मिता भाभीजी को 26 वीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर “प्रदीप” की और से प्रणाम! बहुत- बहुत बधाई , शुभकामनाएँ व मंगलकामनाएँ । जीवन के प्रवाहमान में निरन्तर साँसों की तरह रिश्तों को भी उतार- चढ़ाव में पत्थर की ठोकर लगती हैं और विवेक से ख़ुशी का रसनानुवादन भी होता हैं परन्तु यह…

  • दादी जी का घर

    दादी जी सलुम्बर में अकेले ही रहती थी.. नागपुर छोड़ने के बाद वे और दादाजी दोनों सलूंबर में स्थायी हो गए थे.. दादा जी के निधन के बाद मैने दादी जी को बहुत बार कहा की चलो मेरे साथ अकोला.. मगर वे नही मानी। वे तो भरेपूरे समाज में समाज के साथ रहना चाहती थी…..

  • मेरा घर मर रहा है

    ये है वह दरवाजा जो कि माँ और बाबूजी के हाथों सैकड़ो बार खुला बन्द हुआ.. ये जो रंग लगा है न यह मेरे हाथों से ही लगा हुआ है.. एक कमरे का घर था वो। छोटा सा कमरा मगर बहुत बड़े मन के माता पिता और बहुत प्यारे प्यारे भाई बहनों की शरारतों ओर…

  • मेरी जीवन यात्रा : डा. तरूण राय कागा

    Dr. Tarun Rai Kaga Biography in Hindi दिनांक एक जनवरी 1946 को प्रभाणी परिवार में श्री रामचंद्र कागा के घर श्रीमती सांझी देवी की कोख से बालक का जन्म हुआ जिसका नाम तुला राशि में तगो तोतो तिलोक तिलक तोकल नाम में चयन करना था। परिजन किसी एक नाम को निश्चित नहीं कर पाये गांव…