चाह के चाहत | Chaht ke Chahat

चाह के चाहत

( Chaht ke Chahat )

चाहत बा कि तु हमरा मे,
हम तोहरा मे बस जईती
जियत मुअत हसत खेलत
बस तोहरे नाम ही गईति

तीनो लोक के तु स्वामी
दास तोहर बन जईती
तोहर गोड के धोअल धुल
माथा पे लगईती

तन मन धन सब तोहर
हर जन्म मे तोहके ही पईती
मांग मे सिंन्दुर तोहसे
जियत, मुअत अउर मुअले पे सजवईती ।

रचनाकार – उदय शंकर “प्रसाद”
[ पुव सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग), तमिलनाडु ]
एवं वर्तमान अधिवक्ता ( सिविल कोर्ट , बगहा)
यह भी पढ़ें:-

सब के फुलईले चल

Similar Posts

  • करै चला कटनी | Katni par Kavita

    करै चला कटनी   ले ला रोटी-चटनी, करै तू चला कटनी, कि मोर धनिया! फिर से लूटिहा लहरवा कि मोर धनिया। ताजी- ताजी अइली हम अबहिन गवनवाँ, छूटल नाहीं हथवा से मेंहदी सजनवाँ। अउतै करावा मत अइसन खटनी, रजऊ समझा न हमके तू कव्वा-हकनी। ले ला रोटी-चटनी, करै तू चला कटनी, कि मोर धनिया! फिर…

  • सब के फुलईले चल

    सब के फुलईले चल सब के फुलईले चलऽ धुल खुशी के उडईले चलऽ कब, कहवा, कईसे रात हो जाई जब ,जईसे ,जहवा जे मिले प्यार् के भेट ओके बढईले चलऽ का टिस, का रिस, का खिस, का विस दिल सगरो के जित ना केहु के कबो दबईले चलऽ प्यार् के ढिबरी जलईले चलऽ रचनाकार – उदय शंकर…

  • कसाई हाथ बछिया

    कसाई हाथ बछिया   कउने संग पगहा धरउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुलहा खरीदला ये बाबूजी। धन कै बड़ा लोभी बाटें हमरो ससुरवा, सासु औ ननद रोज खानी मोर करेजवा। कउने खोंतनवाँ बसउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुलहा खरीदला ये बाबूजी। कउने संग पगहा धरउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुल्हा खरीदला ये बाबूजी। माँगनै दहेज…

  • बहिनिया पुकारे | Bahiniya Pukare

    बहिनिया पुकारे अँखिया के अंगना में रखिहऽ दुलारे ए भइया तोहरी बहिनिया पुकारे । झेंझ नाहीं करी सवनवा में कबो दिल के दरपनवा में देखिहऽ तूँ अबो राखी बान्हे तऽ अरतिया उतारे, ए भइया तोहरी,,,,,। देई के टीका मिठइया खिआवे भइया भइया कही के बतियावे अँखिया में बाकि ना नेहिया निहारे, ए भइया तोहरी,,,,। रोपेआ…

  • शिक्षा के हाल | Shiksha ke Haal

    शिक्षा के हाल ( Shiksha ke haal )   बड़का घराना के हई मैडम समय से कहियो ना आईला आवते दू गो लड़िका पेठाईला कुर्सी दू गो मंगवाईला एगो पर अपने बैठम एगो पर बैग धरवाईला! फेर निकाल के मोबाईल कान में सटाईला… ना जाने केकरा से, घंटो, घिसिर पिटिर बतियाईला? अतने में टिफिन हो…

  • चिंता में किसान बा | Chinta me Kisan ba

    चिंता में किसान बा! ( Chinta me kisan ba )    बिना बारिश के खेतवा सूखान बा, चिंता में किसान बा ना। कइसे होई अब रोपाई, जेब -पइसा ना पाई, महंगे डीजल से जनता परेशान बा, चिंता में किसान बा ना। बिना बारिश के खेतवा सूखान बा, चिंता में किसान बा ना। नदी-नाले सब सूखे,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *