चांदनी | Chandni

चांदनी

( Chandni ) 

 

पूनम के चांद से सब कतराने लगे
अमावस की चांदनी मे नहाने लगे

जलने लगी है अब उन्हे सूरज की धूप
हैलोजन की फ्लैश मे ही नचाने लगे

रंगीन बालों मे ही दिखती है जवानी
बूढ़े भी अब तो सिर मे विग लगाने लगे

युवतियों के कपड़े उतारने लगे तन से
देख उनको बुजुर्ग भी खुद शर्माने लगे

दिखाने की काया चाहत बढ़ गई है
अब मिलकर जिम मे संग जाने लगे

अंधेरे की खाई भी कितनी बढ़ने लगी
भेड़ की तरह खुद को ही गिराने लगे

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

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