दिकुप्रेम की राह

दिकुप्रेम की राह

दिकुप्रेम की राह

जीवन मेरा बस तुझसे जुड़ा एक अफसाना है,
हर लम्हा तेरा इंतज़ार, प्रेम बस तेरा दीवाना है।
कभी हँसी में तू आई, कभी अश्कों में बसी,
अब हर साँस में बस तेरी यादों का तराना है।

राहों में तेरा एहसास अब भी मौजूद है,
तेरी बातों की मिठास हर लम्हा मख़मल सी दूज है।
कभी ख्वाबों में मिलती, कभी यादों में सिसकती,
पर हकीकत में अब भी कोसों की दूरियाँ मौजूद है।

पर मैं आज भी जलाए बैठा हूँ उम्मीदों का चिराग,
जब लौट आए तू, मिट जाए मेरा हर एक विराग।
दिकुप्रेम की इस राह में बस एक ही आस है,
कि फिर से तू आएगी मेरे जीवन में,
प्रेम को अपने प्रेम पर यह विश्वास है।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

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