Kavita Sant Sangati

संत संगति | Kavita Sant Sangati

संत संगति

( Sant sangati ) 

 

सज्जन साधु संगत कर लो बेड़ा पार हो जाएगा।
बिनु सत्संग विवेक नहीं उजियारा कैसे आएगा।

संत सुझाए राह प्रेम की हरि मिलन विधि सारी।
मंझधार में अटकी नैया हो पतवार पार संसारी।

दीप जलाए घट घट में करें ज्ञान ज्योति आलोक।
दिव्य प्रभा सुखसागर सी जीवन को करें अशोक।

ऋषि मुनि साधु संत योगी तपस्वी मुनिराज।
संत समागम सुख देता खुशियों का है आगाज।

शील दया धर्म सिखाए वरदानों से झोली भरते।
त्याग तपस्या योग बल वह दुनिया के कष्ट हरते।

संत सदा देते रहते कर परोपकार जीवन भर।
कुदरत की भांति जीते औरों का भला करो नर।

सन्मार्ग सत्संग से देते हमको संस्कृति का ज्ञान।
प्रगति पथ पे हमें बढ़ाते उन्नति का दे वरदान।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

गैरों में तुम अपने लगते हो | Geet Tum Apne Lagte ho

 

Similar Posts

  • मॉं शारदे, विद्या, विवेक मान दो

    मॉं शारदे, विद्या, विवेक मान दो माँ शारदे, विद्या विवेक मान दो,मुझे सुर साम्राज्ञी जैसी तान दो।मेरा वाचन दिव्यमयी हितकारी हो,माँ शारदे, ब्रह्माणी ये वरदान दो।टेक। मेरे सिर-माथे वरद हस्त रख दो,सुमन शब्द-अक्षर ज्ञान-मख दो।प्रतिभा स्वयं,पर अल्पज्ञ मूरख हूँमाँ-कल्याणकारी शुभम कर दो ।पूजा अर्चन करूॅ तेरी आराधना,नारियाँ हों सशक्त,स्वाभिमान दो।माँ शारदे विद्या विवेक मान दो,मुझे…

  • संभव हो तो | Kavita Sambhav ho to

    संभव हो तो ( Sambhav ho to )   संम्भव हो तो कुछ बातों पे, मेरे मन की करना। सूर्ख रंग के परिधान पर तुम,कमरबन्द पहना।   लट घुघरालें एक छोड़ कर, जूडें को कस लेना, लाल महावर भरी पैजनी,थम थम करके चलना।   काजल की रेखा कुछ ऐसी, जैसी लगे कटारी। बिदिया चमकें ऐसे…

  • भजन हनुमान जी का | Hanuman Bhajan lyrics

    भजन-हनुमान जी का   ओ भोले हनुमान मैं निशिदिन करूँ तुम्हारा ध्यान। सियाराम के प्यारे सबका करते तुम कल्यान।। प्रभु के संकट में भी तुमने उनके काज बनाए राम मुद्रिका सीता मय्या तक तुम ही पहुँचाए जला के लंका हिला दिया था रावण का अभिमान।। सियाराम के—– अपने भक्तों की विपदा में तुरंत दौड़ कर…

  • संग हमें रहना है | Geet sang hamen rahana hai

    संग हमें रहना है ( Sang hamen rahana hai )   हर मुश्किल संघर्षों को मिलकर हमें सहना है। कुछ भी हो जाए जीवन में संग हमें रहना है। संग हमें रहना है   प्रीत की धारा बह जाए प्रेम सुधारस हम बहाये। प्यार के मोती लुटाए अपनापन अनमोल बढ़ाए। हमारी हर खुशियों का दिल…

  • स्वच्छता | Swachchhata Kavita

    स्वच्छता  ( Swachchhata : Kavita )   १.स्वच्छ भारत अभियान का समर्थन करो | गंदगी को साफ करो,स्वच्छ भारत का निर्माण करो ||   २.किसी एक के बस की बात नहीं,सबको मिलकर चलना होगा | इतनी अटी गंदगी को साफ हमें ही करना होगा ||   ३.अवैतनिक काम है ये,अद्रस्य रुप से करना है |…

  • बचपन की बातें : कुछ सुनहरी यादें

    बचपन की बातें ( Bachpan ki baatein )   काग़ज़ की नाव बना फिर से तैराए, बारिश के पानी में छबकियां लगाए। दरवाजे के पीछे छुपकर सबको डराए, चलो फिर से एक बार बच्चे बन जाए। पापा की कमीज पहन कर हाथ छुपाए, इस कला को हम लोगों को जादू बताएं। खुद भी हँसे सभी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *