दिल है ये अब तेरे हवाले

दिल है ये अब तेरे हवाले

दिल है ये अब तेरे हवाले

ठुकरा दे इसे चाहे तू या अपना बना ले
महबूब मेरा दिल है ये अब तेरे हवाले

उन पर भी नज़र डाल कभी ऐ मेरे मौला
मिलते हैं जिन्हें खाने को बस सूखे निवाले

मझधार में है नाव मेरी जग के खिवैया
ऐ श्याम ज़रा आके मुझे अब तू बचाले

सूरत पे भला उनकी यक़ीं आए भी क्यों कर
तन के तो हैं उजले वो मगर मन के हैं काले

संसार की नज़रें हैं बुरी, जाऊँ कहाँ मैं
माँ आके मुझे आज तू आँचल में छिपाले

भटका हूँ बहुत तेरे लिए राहे वफ़ा में
देते हैं गवाही ये मेरे पाँव के छाले

हम जीते रहे जिनके लिए ख़ुद को भुला कर
मीना वही देते हैं हमें ज़ह्र के प्याले

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • वो निशानी दे गया | Wo Nishani de Gaya

    वो निशानी दे गया ( Wo Nishani de Gaya ) ज़र्द चेहरा वो निशानी दे गयाबे सबब सी ज़िन्दगानी दे गया उम्र भर जिसको समझ पाए न हमइतनी मुश्किल वो कहानी दे गया खूँ चका मंज़र था हर इक सू मगरकोई लम्हा शादमानी दे गया जाते जाते वो हमें यादों के साथखुश्बुएं भी जाफ़रानी दे…

  • ज़रूरत है | Ghazal Zaroorat Hai

    ज़रूरत है ( Zaroorat Hai ) जो रूठे हैं फ़क़त उनको मनाने की ज़रूरत है मिटाकर दूरियों को पास जाने की ज़रूरत है उदासी ही उदासी है हमारे दिल की बस्ती में कोई धुन प्यार की छेड़ो तराने की ज़रूरत है गुज़ारी ज़िंदगी तन्हा किसी की याद में हम ने मगर इस दौर में हमको…

  • बुलावा माँ का

    बुलावा माँ का कहाँ पिकनिक मनाने को वो नैनीताल जाता है, बुलावा माँ का आये तो वहां हर साल जाता है, खुले बाज़ार में जबसे बड़े ये मॉल हैं यारों, दुकानों से कहाँ फिर कोई लेने माल जाता है, बहुत तारीफ करता है सभी से माँ की तू अपने, मगर कब पूछने तू अपनी माँ…

  • हाल-ए-दिल बताना है | Haal-E-Dil

    हाल-ए-दिल बताना है ( Haal-e-dil batana hai )    हाल -ए – दिल उसे बताना है। आज कुछ भी नहीं छुपाना है। प्यार करके ये दिल बहुत रोया, और पीछे पड़ा ज़माना है। आँसुओं से लिखे है ख़त मैने, क्यूँ बना वो रहा बहाना है। बेवफ़ा वो नहीं पता मुझको, जान है वो उसे मनाना…

  • रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी

    रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी।उसने बिजली सी दिल पर गिरा दी। ख़्वाबे ग़फ़लत में खोए हुए थे।जागे-जागे से सोए हुए थे।आन में रूबरू आ के हाए।नींद उसने हमारी उड़ा दी।रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी।उसने बिजली सी दिल पर गिरा दी। मारे-मारे से फिरते थे…

  • घर नहीं मिला | Ghazal Ghar Nahi Mila

    घर नहीं मिला ( Ghar Nahi Mila ) हमसे मुसाफिरों को कहीं घर नहीं मिला रस्ते बहुत थे राह में रहबर नहीं मिला वीरान रास्तों में पता किससे पूछते राह-ए-सफ़र में मील का पत्थर नहीं मिला दिन रात हम उसी के ख़यालों में ही उड़े तन्हाइयों में चैन तो पल भर नहीं मिला उसके सितम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *