किसको दिल की पीर सुनाएं

किसको दिल की पीर सुनाएं

किसको दिल की पीर सुनाएं

एक ख़ता की लाख सज़ाएं।
किसको दिल की पीर सुनाएं।

कोई नहीं इब्न-ए-मरियम सा।
ज़ख़्म जिगर के किसको दिखाएं।

जान ही जाते हैं जग वाले।
राज़-ए-मुह़ब्बत कैसे छुपाएं।

नफ़रत के सहरा में आओ।
उल्फ़त के कुछ फूल खिलाएं।

ख़ाली से बेगार भली है।
मुफ़्त न अपना वक़्त गंवाएं।

क़रिया-क़रिया पेड़ लगा कर।
आबो-हवा को मस्त बनाएं।

क़ौमी यकजहती की ख़ातिर।
आओ फिर से हाथ मिलाएं।

सुनता नहीं वो बात हमारी।
कैसे फ़राज़ अब उसको मनाएं।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

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