स्त्री घर की देवी | Emotional short story in Hindi

स्त्री घर की देवी

( Stree ghar ki devi )

 

सुधा … ( जोर से आवाज लगाते हुई सासू मां ) दरवाजे , पर कोई हैं देखो तो जरा में पूजा पर बैठी हूं।

सुधा जाकर दरवाजा खोलती है, आज बाहर से उनके मामा ससुर जी को देख वह चौक गई आखिर इतने दिन बाद सुबह के समय , उनका आना हुआ ।

नमस्कार कर ! उसने तुरंत पूछा सब खैरियत तो हैं, उन्होंने ज़बाब दिया हां बेटा सब ठीक , दीदी से मिलना था और पास के ही कस्बे का एक काम भी निकल आया था अब इस उम्र में कहा रोज रोज आना होता हैं। सुधा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया सही कह रहे हैं मामा जी आप।

मामा जी को गेस्ट रूम में बिठाकर , उसने चाय नाश्ता के लिए उन्हें पूछा और बोली मामा जी आप दिन का खाना यही खाना मैं आपके लौटने तक बना लूंगी।

मामा जी ने कहा जैसी आपकी इच्छा बेटा मैं दिन तक लौट आऊंगा अभी दीदी से मिल निकल रहा हूं बस। इतने में सुधा की सासू मां की पूजा समाप्त होकर वह बाहर आई । छोटे भाई को देख कर खुश हुई और बोली कि सुधा ने चाय नाश्ता करा दिया या अभी नहीं। वे मुस्कुराते हुए बोले तुम्हारी बहू पहले ही पूछ चुकी हैं तुम निश्चिंत रहो दीदी।

जैसे ही मामा जी दिन के समय लौट कर आए तो देखते हैं घर पूरा व्यवस्थित दिख रहा है और खाने की टेबल पर भी खाना लग चुका है इतने में सुधा अपने कमरे से निकल कर आई और बोली आप थक गए होंगे, हाथ मुंह धो लीजिए खाना तैयार हैं।

मामा जी ने आग्रह किया बेटा मैं थक रहा हूं यदि तुम बुरा ना मानो तो आधी कप चाय लूंगा उसके बाद ही भोजन करूंगा। सुधा बोली बिल्कुल मामा जी मैं आपके लिए चाय बना लाती हूं, आप बैठिए । वह उनको यह कहकर किचन में चली गई।

मामा जी चाय के इंतजार करते हुए देख रहे थे कि सुधा घर के अन्य काम भी साथ कर रही है जैसे बच्चों को देखना , खाना की टेबल पर खाना परोसने के साथ सभी पर नजर भी।

इतने में चाय के कारण उसने किचन में तीन चक्कर एक्स्ट्रा लगा लिए और 5 मिनट के अंदर बढ़िया कड़क उबली हुई चाय मामा जी के हाथों में लाकर उन्हें खुशी खुशी दे दी। जैसे ही मामा जी ने चाय पी तो वह आंतरिक रूप से प्रसन्न होकर सुधा को आशीर्वाद देकर बोले, बेटा आप घर का काम बहुत ही शिद्दत से करती है।

सुधा की सास यह सब देख रही थी और बोली यह कोई नई बात थोड़ी ना है सभी कर लेते हैं, व्यंग सुनकर मामा जी ने कहा मैं सब जानता हूं सुधा एक पढ़ी-लिखी लड़की हैं, उसने अपनी जॉब छोड़ कर घर जिस प्रकार से मैनेजमेंट के साथ ही संभाल रखा है , उस प्रकार यदि देखा जाए तो हम कह सकते हैं कि स्त्री घर की देवी है जो अपने घर गृहस्थी के लिए हर सुख त्याग कर पूरी कर्मठता के साथ परिवार को संभालती है।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

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