तंबाकू निषेध
तंबाकू निषेध

निबंध : तंबाकू निषेध

( Smoking Prohibition :Essay In Hindi )

प्रस्तावना (Introduction) : –

तंबाकू के दुष्प्रभाव से आज भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कई देश प्रभावित है। विकसित देशों के साथ-साथ विकासशील देशों में भी इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।

तंबाकू से तैयार होने वाले विभिन्न तरह के उत्पाद जैसे सिगार, सिगरेट, गुटखा आदि का निर्माण बहुराष्ट्रीय कंपनियां करके अपने उत्पादों को गरीब मुल्कों में बहुत तेजी से खफा रही है।

एक मोटे मोटे अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 22 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। यही वजह है कि हमारे देश में प्रतिदिन 2200 लोग तंबाकू के सेवन की वजह से होने वाली बीमारियों के कारण मर रहे हैं।

हाल में ही जारी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 में भारत दुनिया में तंबाकू से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा ठिकाना बन गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 50 फीसदी युवा इसके सेवन की वजह से अपनी जिंदगी खो देंगे। अगर हालात जल्दी नही सुधरे तो देश में होने वाली 13.3% मौतों की वजह तंबाकू का सेवन होगा।

यह एक बेहद दर्दनाक सत्य है कि सिगरेट पीने वालों के बराबर ही बीड़ी पीने वाले और खैनी पान मसाला या गुटखा चबाने वाले भी उतनी ही बुरी तरीके से प्रभावित होते हैं।

अर्थात सिगरेट हमारे शरीर के लिए जितना नुकसान पहुँचाता है, बीड़ी, पान मसाला, गुटका भी हमारी सेहत को उतना ही नुकसान पहुंचाता है। इसकी वजह से आज देश में बड़ी संख्या में लोग कैंसर से पीड़ित है। इसमें तंबाकू के उत्पादों का बड़ा योगदान रहा है।

तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक क्यों है? ( Why is tobacco harmful to health in Hindi ) :-

तंबाकू के प्रति हमारा मानव शरीर संवेदनशील होता है। क्योंकि तंबाकू में निकोटिन नामक तत्व पाया जाता है जो मनुष्य के मस्तिष्क में नशे का एहसास कराता है।

साथ ही हृदय कोशिकाओं को संकुचित कर देता है जिसकी वजह से हृदय गति, धमनी में रक्त संचार में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है, ब्लड में ग्लूकोज, स्ट्रेस हार्मोन, मुक्त वसीय अम्ल आदि का स्तर बढ़ जाता है।

तंबाकू का असर केंद्रीय स्नायु तंत्र पर भी होता है। यह तंत्र मस्तिष्क को प्रभावित करता है। तंबाकू के धुएं में पाया जाने वाला कार्बन मोनोऑक्साइड ब्लड कोशिकाओं में ऑक्सीजन को ब्लॉक करके उसकी जगह अपना स्थान बना लेता है।

जिसकी वजह से मनुष्य का मस्तिष्क और शरीर शिथिल पड़ने लगता है। कई बार यह कोरोनरी डिजीज, स्ट्रोक, कैंसर जैसी  का कारण बनती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट ( World Health Organization report ) :-

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न देशों की सरकारों हर साल $200 से भी अधिक का राजस्व तंबाकू उत्पाद पर गए करों से उगाही करती हैं।

इतनी धनराशि के बावजूद इनका तंबाकू के सेवन पर रोक लगाने हेतु मात्र 0.002% व्यय किया जाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार बीसवीं शताब्दी में 10 करोड़ लोगोंकी मौत तंबाकू के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सेवन से हुई है। 21वीं शताब्दी में करीब एक अरब लोग इसका शिकार बन सकते हैं।

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि तंबाकू के सेवन की वजह से विश्व भर में हर साल 5400000 लोगों की मृत्यु फेफड़े के कैंसर, हृदय रोग तथा तंबाकू जनित बीमारियों के कारण हो रही है। अगर समुचित रोकथाम के लिए प्रयास नहीं किया जाता है तो यह आंकड़ा 2030 तक बढ़कर 80 लाख हो जाएगा।

तंबाकू निषेध हेतु सरकार के प्रयास ( Government’s efforts to prohibit tobacco ) :-

केंद्र सरकार द्वारा तंबाकू के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए सिगरेट एंड टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट 2018 में कई सारे प्रावधान जारी किए गए हैं।

यह प्रावधान 2 अक्टूबर 2018 से प्रभावी है जिसमें सभी सार्वजनिक स्थानों जिसमें अस्पताल, रेस्टोरेंट्स, स्टेडियम, परिवहन, रेलवे स्टेशन आदि शामिल है, में तंबाकू और धूम्रपान को प्रतिबंधित किया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक निर्देश में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट गुटका आदि के पैकेट के ऊपर स्वास्थ्य संबंधित सचित्र चेतावनी छापना अनिवार्य है।

तंबाकू निषेध की दिशा में भारत सरकार पिछले कई सालों से प्रयासरत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साल 2003 में फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल को लागू कर दिया गया है। तंबाकू से जुड़े कार्यक्रमों का नेतृत्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा हो रहा है।

निष्कर्ष (Conclusion) :-

हमारे देश में तंबाकू उत्पादों की बिक्री से सरकार को भारी मात्रा में राजस्व की प्राप्ति हो रही है। देश में तंबाकू उत्पादन की बड़ी शक्तिशाली कंपनियां है जिनकी पकड सत्ता के गलियारों तक है।

राजस्व लोभ के चलते तंबाकू निषेध के कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत भले ही तंबाकू के विरुद्ध प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रहा है।

लेकिन घरेलू स्तर पर ठोस कार्यवाही का अभाव देखने को मिलता है। तंबाकू के खतरे को देखते हुए भारत सरकार को चाहिए कि इस पर कड़ा प्रतिबंध लगाए।

इसके खिलाफ सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है।तभी सरकार द्वारा की जाने वाली प्रयास प्रभाव कारी होंगे और लोग स्वस्थ और निरोग रह कर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकेंगे।

सरकार के साथ-साथ समाज को भी जागरूक होना होगा और तंबाकू निषेध के लिए मिलकर एक सार्थक पहल की शुरुआत करनी होगी।

लेखिका : अर्चना  यादव

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