Essay in Hindi on urban pollution a crisis in India
Essay in Hindi on urban pollution a crisis in India

निबंध : भारत मे शहरी प्रदूषण एक संकट

( Urban pollution a crisis in India : Essay in Hindi )

प्रस्तवना

आज पूरी दुनिया शहरी प्रदूषण की समस्या से परेशान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 80% जनसंख्या शहरी आबादी के प्रदूषित हवा में सांस लेती है। यह समस्या निम्न और मध्यम आय वाले देशों में और भी ज्यादा बदतर है।

इन देशों में लगभग 95% शहरी जनसंख्या प्रदूषण का शिकार है। भारत में भी शहरी प्रदूषण विकराल रूप धारण करता जा रहा है। इसका ठीकरा कभी उद्योगों पर डाला जाता है तो कभी किसान और जनता के सिर पर परंतु वास्तव में शहरी प्रदूषण की समस्या का निदान एक दूसरे के सिर पर दोष मढ़ने से नहीं होगा बल्कि इसके लिए काम करना होगा।

शहरी प्रदूषण की स्थिति

भारत के उत्तर व मध्य भारत के शहरों में पिछले तीन दशकों के दौरान प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। अगर यही स्थिति जारी रही तो साल 2050 तक उत्तर भारत के कई बड़े शहर रहने लायक नहीं बचेंगे।

तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि पिछले तीन दशक में पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन को लेकर विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम सरकार द्वारा लाए गए, जिन पर अरबों खरबों रुपए खर्च किए गए। लेकिन अगर सही मायने में आधे हिस्से का भी सही से तथा गुणवत्ता पूर्ण उपयोग होता तो आज शहरों की आबोहवा काफी अच्छी होती।

मगर सब कुछ उल्टा-पुल्टा देखने को मिला। साल साल दर साल जितनी भी योजनाएं बनती गई आबोहवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया। आंकड़े इस बात की साफ गवाही देते हैं।

 वस्तुतः आज शहरी प्रदूषण एक राष्ट्रीय संकट बन गया है

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार साल 2008 से 2015 के बीच 181 देशों के 16000 शहरों में वायु प्रदूषण का विवरण पेश किया गया। इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में भारत के 13 शहरों के नाम शामिल है, जिसमें ग्वालियर, इलाहाबाद, पटना, दिल्ली, लुधियाना, कानपुर, रायपुर, लखनऊ जैसे शहर है।

बता दें कि दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाले शहरों में भारत के 5 शहर शामिल हैं। भारत में जिस दर से शहरी आबादी बढ़ रही है ऐसा लगता है साल 2030 तक 70 से 80 करोड जनसंख्या यहां पर पर निवास करने लगेगी।

शहरो को आबादी के इतने बड़े दबाव को झेलने की क्षमता शायद ही है। सरकार को इसके लिए दो स्तर पर काम करने की जरूरत है शहरों की मौजूदा संरचना में परिवर्तन तथा सुधार किया जाए दूसरा शहरीकरण की प्रक्रिया को विस्तार देते हुए नए शहरों की बसावट की जाये।

सरकार को अभी से इस दिशा में पहल करना होगा। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर नीति नियमन से लेकर क्रियान्वयन तक सजगता और सक्रियता दिखानी होगी।

पिछले कुछ सालों से स्मार्ट सिटी परियोजना चर्चा में है। स्वच्छ भारत अभियान भी चलाया गया  इसकी शुरुआत तो काफी अच्छी रही लेकिन निर्धारित लक्ष्यों और उद्देश्यों को हासिल करने में यह योजनाएं उतनी सफल नहीं हो पाई।

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय परिवहन की अनियमितता भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने का काम कर रही है। सार्वजनिक परिवहन का ढांचा परंपरागत ढांचे पर ही चल रहा है, जिसके कारण से यह चरमरा गया है और निजी वाहनों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

दूसरी तरफ शहरी क्षेत्रों में कई ऐसे खतरनाक औद्योगिक इकाइयां हैं जो वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, नाइट्रस ऑक्साइड, क्लोरीन आरसैनिक जैसे खतरनाक कण वायुमंडल में उत्सर्जित कर रहे हैं।

सरकार ऐसी छोटी बड़ी खतरनाक औद्योगिक इकाइयों की स्थापना शहरों से दूर स्थान पर करें। यह वक्त की जरूरत है साथ ही इसके लिए उत्सर्जन एवं क्षतिपूर्ति से संबंधित मानक भी तय किए जाएं। सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों को भी पर्यावरण के प्रति जागरुक होना होगा।

लेकिन अधिकांश नागरिकों में पर्यावरण के प्रति उदासीनता और लापरवाही देखने को मिलती है। जबकि भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व में सरकार के लिए तथा मूल कर्तव्य व दायित्वों के प्रति अवगत कराया गया है।

न्यायपालिका एवं कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसियां भी प्रदूषण को लेकर सरकार को कई बार दिशा निर्देश समय समय पर दे चुकी हैं। सरकार खुद राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी एजेंसियां बनाया है। लेकिन इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहे हैं।

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

  • वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव के रूप में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जैसे दमा, टीबी, कैंसर, हृदय से जुड़ी समस्याएं, फेफड़े से जुड़ी समस्याएं, मस्तिष्क से संबंधित गंभीर बीमारियां, तंत्रिका तंत्र तथा ज्ञानेंद्रियों पर इनका बुरा असर देखने को मिल रहा है।
  • जीव जंतु, पशु पक्षियों तथा वनस्पतियों, परिस्थितिकी तंत्र तथा जैव विविधता पर भी वायु प्रदूषण का असर साफ देखा जा रहा है।
  • खेती तथा अन्य कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादकता में कमी वायु प्रदूषण का ही कारण है।
  • व्यावहारिक तथा व्यवसायिक गतिविधियों में कमी वायु प्रदूषण का ही एक दुष्प्रभाव है।
  • स्वास्थ्य गतिशील और कार्य कुशल जनसंख्या में कमी का एक प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है

शहरी प्रदूषण रोकने के उपाय

  • सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के व्यवहारिक ढांचे को परिवर्तित करके इसे और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाया जाए, साथ ही नवीन उपकरणों तकनीकों का उपयोग किया जाए। मुख्य सड़कों, फ्लाईओवर तथा संपर्क मार्गों के विकास विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • छोटी-बड़ी सभी प्रकार की खतरनाक व प्रदूषक औधोगिक इकाइयों की स्थापना शहर से दूर की जाए।
  • शहरी क्षेत्र के आसपास के क्षेत्र में किसानों द्वारा खेती के अवशेषों विशेष करके पराली को जलाने पर पूर्णता प्रतिबंध लगा दिया जाए। इन अवशेषों का उपयोग रचनात्मक कार्यों में करने हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।
  • स्थानीय निकायों को और अधिक साधन और सुविधा संपन्न बनाया जाए तथा उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाए।
  • दीपावली तथा अन्य निजी और सार्वजनिक कार्यक्रमों योजनाओं तथा महोत्सव के दौरान होने वाली आतिशबाजियों को पूरी तरीके से प्रतिबंधित कर दिया जाए।
  • अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षारोपण किया जाए। हरित पट्टी का विकास किया जाए तथा वनों के संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान दिया जाए। शहरों में विभिन्न स्थानों पर हरे-भरे पार्कों का निर्माण किया जाए।
लेखिका : अर्चना  यादव

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