Poem abhi aur sadhna hoga

अभी और सधना होगा | Poem abhi aur sadhna hoga

अभी और सधना होगा

( Abhi aur sadhna hoga )

 

नहीं  साधना  पूरी  हुई है, अभी और  सधना होगा।
अभी कहाँ कुंदन बन पाये, अभी और तपना होगा।।

 

अभी निशा का पहर शेष है, शेष अभी दिनकर आना
अभी भाग्य में छिपा हुआ है, खिलना या मुरझा जाना
अभी  और  कंटक  आना  है, जीवन पथ की राहों में
अभी छिपा है सुख दुख सारा, मौन समय की बाहों में
अभी  समर्पण  और  शेष है, अभी और तजना होगा।
अभी  कहाँ  कुंदन बन पाये, अभी और तपना होगा।।

 

अभी शशि की शीतलता से, तुमने हृदय मिलाया है
अभी  अमावस  देखी न है, नहीं ग्रहण की छाया है
अभी  मिली  है सीधी राहें, कठिनाई का भान नहीं
अभी  तुम्हें अपने पराये का, चतुराई का ज्ञान नहीं
अभी  कसौटी रही अधूरी, अभी और मपना होगा।
अभी कहाँ कुंदन बन पाये, अभी और तपना होगा।।

 

अभी ओस की बूँदों ने ही आँगन तेरा सजाया है
अभी सही न बरसातें भी, अभी शिशिर न आया है
अभी  बसंती  मधुमास  ने, प्रेम ही घोला कानों में
अभी ग्रीष्म से मिलन हुआ न, पड़े नहीं तूफानों में
अभी शिखर “चंचल” न आया, अभी और चढ़ना होगा।
अभी  कहाँ कुंदन बन पाये, अभी और तपना होगा।।

 

🌸

कवि भोले प्रसाद नेमा “चंचल”
हर्रई,  छिंदवाड़ा
( मध्य प्रदेश )

 

यह भी पढ़ें : –

हरि की माया | Poem hari ki maya

Similar Posts

  • आम | Aam

    आम ( Aam ) आम सब फलों का राजा मीठा रसीला फलों का राजा जून में लग जाता जोरदार खट्टा मीठा फलों का राजा नाम दाम रंग रूप अनेक स्वाद सुंदर फलों का राजा दशहरी हापूज़ तोता पुरी ताज़ा लंगड़ा केस़र फलों का राजा मिश्री से मीठा मधुर ज़ायक़ा कच्चा पक्का फलों का राजा कच्चे…

  • प्रेयसी | Preyasi

    प्रेयसी ( Preyasi )    सृष्टि में  संचरित अथकित चल रही है। प्रेयसी ही ज्योति बन कर जल रही है।।   कपकपी सी तन बदन में कर गयी क्या, अरुणिमा से उषा जैसे डर गयी क्या, मेरे अंतस्थल अचल में पल रही है।। प्रेयसी०   वह बसंती पवन सिहरन मृदु चुभन सी, अलक लटकन नयन…

  • पथ में फूल खिलेंगे | Path mein Phool Khilenge

    पथ में फूल खिलेंगे ( Path mein phool khilenge )   अपने भविष्य के निर्माता तुम स्वयं ही कहलाओगे! जब पथ पर अपने कांटों को भी देख कर मुस्कुराओगे ।। पग पग चलते जाना तुम, विषमताओं से न घबराना तुम ! भविष्य निर्माण की खातिर ही संभव प्रयासों की अलख जगाना तुम।। पथ मिले जो…

  • कृष्ण जन्माष्टमी | Krishna Janmashtami

    कृष्ण जन्माष्टमी ( Krishna Janmashtami )    काली घटा रात में छाई यमुना जब अपने तट आई उफन उफन वो पैर पड़त है देखो जन्मे कृष्ण कन्हाई ।। वासुदेव के आठवें पुत्र रूप में कृष्ण अष्टमी को प्रगट हुए मात पिता के संकट मिटाने श्री नारायण धरती पर जन्मे।। जन्म लिया पर देखो कैसी ,लीला…

  • बारिश की बूंदें

    बारिश की बूंदें     ऐसी बरसी थीं मुझ पर कल बारिश की बूंदें बरसा था मुझ पर तुम्हारा प्यार जैसे   मिट गईं खलिश मिट गईं दूरियां एहसासों से मेरे कर गई साजिशें ऐसी बरसी थीं मुझ पर कल बारिश की बूंदें   भीगे भीगे से शिकवे भीगी भीगी शिकायत आंसुओं से मेरे कर…

  • सिया के राम | Poem Siya Ke Ram

    सिया के राम ( Siya Ke Ram )   सिया के राम जन्म लेकर, पतित का नाश करेगे अब। ताड़का खर दूषण के संग, नाराधम मारेगे वो अब।   धरा पर पाप बढा जब,नारायण राम रूप सज धज, मनोहर रूप भुजा कोदंड, धरा से पाप मिटेगा अब।   प्रकट भयो नवमी को श्रीराम,पूर्णिमा जन्म लिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *