Farishta

मैं कोई फरिश्ता नहीं | Farishta

मैं कोई फरिश्ता नहीं!

( Main koi farishta nahi )

 

इतना काफी है जमाने को बताने के लिए,
आजकल आती नहीं हमको रुलाने के लिए।
कहानी तैरती है उसके दिल की झीलों में,
उतरती दरिया नहीं बेसुध नहाने के लिए।

हुस्न की गागर वो चलने पे छलकती ही है,
बढ़ती बेताबियाँ हमको जलाने के लिए।
कौन उठाएगा बोझ उसकी अदाओं का रोज,
उलझी गुत्थी वो आती नहीं सुलझाने के लिए।

उसकी मासूम आँखों में है शरारत इतनी,
नहीं आती है चौबारे आँख लड़ाने के लिए।
नींद आती नहीं साँसों का कफ़न ओढ़ा हूँ,
राह दिखती नहीं है उसको मनाने के लिए।

पहचान लूँगा मैं उसे उसके खुशबुओं से,
आजकल आती नहीं वो ज़ख्म दिखाने के लिए।
उड़ रही है बात मेरी सारी गली-कूचों में,
मैं कोई फरिश्ता नहीं आओ उठाने के लिए।

मेरा दिल लुट चुका, हार चुका दुनियावालों,
लगता है आँसू नहीं बचेंगे बहाने के लिए।
भरी बहार में मैं खिला हूँ एक फूल की तरह,
क्या मेरे नसीब में ये लिखा है मुरझाने के लिए।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक),

मुंबई

यह भी पढ़ें :-

योग | Yoga Diwas

Similar Posts

  • राधा रानी की प्रेम की होली

    राधा रानी की प्रेम की होली राधा की चुनर है पीलीकृष्ण संग खेले राधे होलीप्रेम का रंग सदा बरसाती हैराधा रानी सबको ही भाती है। गोपियों को करके किनारेराधा रानी है पिचकारी ताने,कृष्ण पर गुलाल बरसाती हैराधा रानी प्रेम की होली खेलाती है, पिचकारी में भर के रंग,कृष्ण भिगोते गोपियों के अंगराधा देख – देख…

  • जीवन की परिभाषा | Jeevan par Hindi kavita

    जीवन की परिभाषा ( Jeevan ki paribhasha )   हां! हम हर बात को बोलते है डंके की चोट, नही है हमारे मन में किसी प्रकार की खोट। पीठ- पीछे बोलें ऐसी आदतें नही है हमारी, चाहें रुठ जाऐ दुनियां अथवा बांटे हमें नोट।।   सही को सही एवं गलत को गलत है कहते, समझने…

  • माँ का भय

    माँ का भय मैंने बेटा जनाप्रसव पीड़ा भूल गयी वह धीरे-धीरे हँसने-रोने लगामैंने स्त्री होना बिसरा दिया उसने तुतली भाषा में माँ कहामैं हवा बनकर बहने लगी वह जवान हुआमैं उसके पैरों तले की मिट्टी वारती फिरूँ उसके सिर सेहरा बंधामुझे याद आयामैं भी एक रोज ब्याहकर आयी थीइसके पिता संग कुछ दिनों बाद मैंने…

  • पाषाण हृदय कैसे हो गए | Pashan Hriday

    पाषाण हृदय कैसे हो गए ( Pashan hriday kaise ho gaye )    किन सपनों ख्वाबों में खोए, क्या गहरी नींद में सो गए। दर्द दिल का जान सके ना, पाषाण हृदय कैसे हो गए। पहले पूछते रहते हमसे, तुम हाल-चाल सब जानते। मन की पीर ह्रदय वेदना, शब्दों की भाषा पहचानते। सब की खुशियों…

  • दिल वालों की दिल्ली | Delhi

    दिल वालों की दिल्ली ( Dilwalon ki Dilli )    महाभारत काल से है दिल्ली, जो इंद्रप्रस्थ में थी पहले दिल्ली। पहला शहर तोमर राजा ने बनाया, जो लाल कोट शहर कहलाया।। हुमायु और मोहम्मद गोरी आया, तुर्को का आगमन वहां छाया। सात बार शहर बना और उजड़ा, सोमेश्वर राजा निड़र था योद्धा।। पृथ्वीराज ने…

  • कसक | Poem in Hindi on kasak

    कसक ( Kasak ) रौशनी की तलाश में हम बहुत दूर निकल आये जहाँ तक निग़ाह गई बस अन्धेरे ही नजर आये जिन्दगी ने हमें दिया क्या और लिया क्या सोच के वक्त के हिसाब आँसू निकल आये कसक दिल में रहती है अपनो को पाने की समझ  नहीं  आता अपना किसे कहा जाये अपनो …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *