Hai Teri Rahmat Gazab

है तेरी रहमत ग़ज़ब | Hai Teri Rahmat Gazab

है तेरी रहमत ग़ज़ब

( Hai teri rahmat gazab )

 

है गज़ब की शान तेरी है तेरी रहमत गज़ब
मेंरे मौला तेरी अज़मत है तेरी ताकत ग़जब।

है अजब ये बात की मैं उफ़ भी कर दूं तो क़हर
और उससे क़त्ल होकर भी मिले राहत ग़जब।

दे रहा था हक़ मेरा मुझको मगर ख़ैरात सा
कर दिया इंकार जागी जब मेरी ग़ैरत ग़ज़ब।

वो मेरे पहलू में बैठा क्या कहूं जब बज़्म में
उड़ गई कुछ ख़ास चेहरों की वहां रंगत ग़जब।

जब तलक थी मैं तलबगारों में वो मग़रूर था
बेरुख़ी पर अब मेरी राग़िब हुआ हैरत ग़जब।

बैठ कर शब भर जलाता वो रहा सब ख़त मेरे
करने को तर्क-ए -तअल्लुक़ या ख़ुदा ज़हमत ग़जब।

इस तरह यादों में गुम हर वक्त दिल उसके नयन
ख़ल्वत-ओ- जल्वत लगे सब एक से हालत ग़जब।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

मर जायेगा | Ghazal Mar Jayega

Similar Posts

  • रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ | Roz Jeetee Hoon Roz Marti Hoon

    रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँ ( Roz jeetee hoon roz marti hoon ) रोज़ जीती हूँ रोज़ मरती हूँशम्अ सी रोज मैं तो जलती हूँ पिघला देती हूँ मैं तो पत्थर कोमैं जो सोचूँ वही मैं करती हूँ ईंट का दूँ जवाब पत्थर सेमैं कहाँ अब किसी से डरती हूँ बीत जाता तो फिर…

  • दुश्मनों पे वार कर लूँ

    दुश्मनों पे वार कर लूँ आज खुल कर दुश्मनों पे वार कर लूँउनकी ख़ातिर ख़ुद को मैं अख़बार कर लूँ रफ़्ता-रफ़्ता मैं तुम्हीं से प्यार कर लूँजब तलक साँसे हैं मैं इकरार कर लूँ प्यार कर लूँ कुछ मैं अब तक़रार कर लूँउल्फ़तों से ज़ीस्त ये गुलज़ार कर लूँ वो दवा देंगे यक़ीनन आ के…

  • छोड़ दे ऐब को

    छोड़ दे ऐब को छोड़ दे ऐब को, तख़सीस ,दुआ तू रख लेअपने असलाफ़ के अख़लाक़ की तू बू रख ले तू सलीके से पहुँच जाए बुलंदी पे भीख़ार दे गुल के मुझे और तू ख़ुशबू रख ले है फ़रेबी ये जहाँ लोग तमाशाई भीमत बिफर नादां तू गुस्से पे भी काबू रख ले मिल…

  • यह ज़िन्दगी | Ghazal Zindagi

    “यह ज़िन्दगी” ( Yah zindagi )   भटक कर ना जाने कहीं दमी रह गई चलकर भी यह ज़िन्दगी थमी रह गई। कहा तो बहुत मगर सुना नहीं गया जाने शब्दों में मेरे कहाँ कमी रह गई। उसकी ख्वाहिशों की बात करते सब मेरे जज्बातों में तो बस नमी रह गई। जहाँ चलते रहे बेबाक…

  • नाम तेरा | Naam Tera

    नाम तेरा ( Naam Tera ) नाम तेरा सदा गुनगुनाता रहा । मन ही मन सोचकर मुस्कराता रहा ।। जब कभी ख्वाब में आप आये मेरे । रात फिर सारी घूँघट उठाता रहा ।। क्या हुआ मुश्किलों से जो रोटी मिली । प्रेम से तो निवाला खिलाता रहा ।। बद नज़र है जमाने की सारी…

  • प्यार करने की ज़माने से इजाज़त ली है

    प्यार करने की ज़माने से इजाज़त ली है प्यार करने की ज़माने से इजाज़त ली हैहमने ख़ुद मोल बिना बात ही आफ़त ली है है मुनासिब कहाँ हर रोज़ बहाना आँसूहमने कुछ दिन के लिए ग़म से रिआयत ली है मुफ़लिसों का नहीं कोई भी सगा दुनिया मेंसारी दुनिया ने ग़रीबों से अदावत ली है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *