Inspirational kavita in Hindi

आओ सारी कसम तोड़ दे | Inspirational kavita in Hindi

आओ सारी कसम तोड़ दे

( Aao saaree kasam tod de )

 

आओ सारी कसम तोड़ दे, हवा का रुख मोड़ दे।
प्यार भरे झरने लाए, सद्भाव दिलों में छोड़ दें।
हंसी खुशी से रहना सीखें, बैर भाव सब छोड़ दे।
हिलमिल कर रहे हम, आओ सारी कसम तोड़ दे।

 

कुदरत भी हम संभाले, अपने हाथों पेड़ लगा ले।
होठों पर मुस्कान ले, दीन हीन को गले लगा ले।
जाति-पाति विष फैलाए, उनमें मानवता जोड़ दें।
रोक रही हो परंपरायें, आओ सारी कसम तोड़ दे।

 

फूलों सी खुशबू सा महके, हो खुशियों भरी बहार।
पग पग पर विजय हमारी, नेह की चले बयार।
शब्द मोती चुन चुनकर, संगीत से स्वर जोड़ दे।
प्रेम की महफिल सजा,आओ सारी कसम तोड़ दे।

 

ना सीमाए ना सरहद, ना हमें बांधे कोई दीवार।
उन्मुक्त विचारों की भाषा, ना रोक सके सरकार।
प्रगति पथ पर बढ़ते जाएं, रुक ना जाना हौड़ से।
प्रतिभा दिखलाने को, आओ सारी कसम तोड़ दे।

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/hamare-purvaj-kavita/

Similar Posts

  • घर की देवी | Ghar ki devi par kavita

    घर की देवी ( Ghar ki devi )   ज्ञान के आभूषण से अलंकृत महत्वकांक्षी,आत्मसम्मान से भरी जीवन के संघर्षो से नही हारी सशक्त हूं तृष्णाओं से परे हूं ।।   ओज की ज्वाला जलाकर मैं मर्यादा के गहनों से ही अपनी नित देह को सजाती हूं स्त्री हूं रिश्ते सभी निभाती हूं।।   तपकर…

  • आशिक़ी | Poem on Aashiqui

    आशिक़ी ( Aashiqui )    चढ़ा है सोलहवें बरस का ये पानी, रहना सजग तू दुुनिया दीवानी। उतरकर सितारे करेंगे वो बातें, मोहब्बत के लहजे में गुजरेंगी रातें। नहीं मुझको अपनी इज्जत गंवानी, रहना सजग तू दुुनिया दीवानी, चढ़ा है सोलहवें बरस का ये पानी, रहना सजग तू दुुनिया दीवानी। उभरती है देखो जब भी…

  • मैं तुम्हारे प्रेम में

    मैं तुम्हारे प्रेम में     मैं तुम्हारे प्रेम में तुम्हारे हाथ की मेहंदी होना चाहता हूं जो तुम्हारे हाथों को भी महकाए और मेरे दिल को भी बहकाए…..!   तुम्हारे प्रेम में मैं तुम्हारे हथेली में बने गहरे लाल सुर्ख़ टीके का रंग होना चाहता हूँ जो अपने प्रेम को ओर भी गहरा बनाए…….!…

  • Kavita Raat Kaali | रात काली रही

    रात काली रही ( Raat Kaali Rahi )   रात  काली  रही  दिन  उजाला  भरा, बीतीं बातों पे चिन्तन से क्या फायदा।   वक्त कैसा भी था, दुख से या सुख भरा, बीतें लम्हों पे चिन्तन से क्या फायदा।   जब उलझ जाओगे, बीतीं बातों में तुम, आज की मस्तियाँ ग़म मे ढल जाएगी।  …

  • मेरा अस्तित्व | Kavita Mera Astitva

    मेरा अस्तित्व ( Mera Astitva ) क्या मेरे अस्तित्व के कोई मायने रहेंगे ? अगर मैं उतार भी दूं चेहरे पर से चेहरा मेरे स्वयं का अस्तित्व ही पिघल जायेगा और—- मैं अनाम हो जाऊँगी तेज झंझावतों में उठे धूलकणों की तरह हो चुका होगा जर्जर मेरा अंग-प्रत्यंग मेरा वर्ण धीमा हो जायेगा चेहरा, चेहरा…

  • उबारो गणपति | Ubaro Ganpati

    उबारो गणपति ( Ubaro Ganpati ) हे गणपति बप्पा!गणनायक। विघ्नहर्ता सिद्धि विनायक।। हम तो हैं भक्त प्रभु नादान। आए हैं शरण दयालु जान।। रखिए प्रभु हमारा भी मान। दीजिए हमारी ओर ध्यान।। हमको निहारिए सुखदायक। हे गणपति बप्पा!गणनायक ।। भटक रहे जग की माया में । मैल चढ़ रहा इस काया में ।। अंधकारमय है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *