दृष्टिकोण

दृष्टिकोण

कोचिंग सेंटर पर निधि मैम बच्चों को एग्जाम की तैयारी करवा रही थी। उसी दौरान एक महिला फटे-पुराने, मैले-कुचैले कपड़ों में अपनी गोद में, एक तीन वर्ष के बच्चे व एक हाथ में एक थैला(जिसमें अनाज वगैरह कुछ था) लेकर कोचिंग सेंटर में दाखिल हुई और यह कहकर भीख मांगने लगी, “बहन जी, भैया जी, आप सब मेरी मदद करो।

हम बहुत गरीब हैं। हम खाने-पीने के मोहताज हैं। हमने 2 दिन से कुछ नहीं खाया। मेरा मर्द खत्म हो गया।मेरे बच्चे की भी तबीयत बहुत खराब है। इसको दवा दिलानी है। भगवान, अल्लाह तुम्हारी सेहत बनाए रखें। आपके भाई-बहन, बालक-बच्चे बने रहें। मेरी मदद करो- मदद करो।”

ऐसा बोलकर वह गिड़गिड़ाने लगी और उसकी आंखें आंसुओं से भर गई। उसको परेशान व रोता हुआ देखकर कोचिंग में, शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र राजू का दिल पसीज गया। उसने अपनी जेब से ₹500 का नोट निकाला और आगे बढ़ कर उस महिला को दे दिया।

रुपए लेने के बाद वह महिला निधि मैडम के सामने पहुंची और उनसे भी रुपए देने की विनती करते हुए कहा,
“बीवीजी, आप भी मेरी मदद करो। आपके कहने से कोचिंग में पढ़ रहे बाकी बच्चें भी मेरी मदद को आगे आएंगे। भगवान तुम्हें, तुम्हारे पति व तुम्हारे बच्चों को लंबी उम्र दे। उनको सेहत अदा करें।”

यह सुनकर निधि मैम को गुस्सा आ गया। उन्होंने उस महिला को डांटा और कहा,
“क्या मैं तुम्हें शादीशुदा दिखती हूँ?? क्या मेरी मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र व पैरों में बिछुएँ नजर आ रहे हैं?? किस एंगल से मैं तुम्हें शादीशुदा दिख रही हूं?? अच्छी भली होते हुए भी भीख मांग रही हो। भीख मांगते हुए शर्म न आई। निकलो यहां से बाहर…”

उस महिला से कोई जवाब ना बना। निधि मैडम ने उस महिला को डांट कर कोचिंग सेंटर से बाहर निकाल दिया और फिर राजू की तरफ मुखातिब होते हुए बोलीं,
“राजू, क्या तुम्हारे पास कुबेर का खजाना है?? अगर तुम्हारे पास रुपए ज्यादा हों तो वृद्ध आश्रम या कुष्ठ आश्रम में दान कर आओ। मगर इस तरह के हट्टे-कट्टे भिखारियों की मदद करने की कोशिश बिल्कुल मत करो।

ये सब लोग एक नंबर के कामचोर होते हैं। दिन में बेचारे बनकर, बिन नहाए, फटे-पुराने कपड़ों में दीन दुःखी बनकर घूमते रहते हैं। शाम को अगर इनको देखोगे तो इनकी बिल्कुल भी पहचान ना पड़ेगी। इनके घर आलीशान होते हैं। यह एक नंबर के एक्टर होते हैं। ऐसे लोग सुबह से शाम तक एक मोटी रकम, बिन मेहनत के ही मांग-मांगकर इकट्ठा कर लेते हैं। तुमने देखा कि वह महिला 25 वर्ष की भी बमुश्किल होगी।

लेकिन उसने मेहनत की बजाय भीख मांगना ही क्यों चुना?? कभी सोचा है?? इन लोगों ने भीख मांगने को धंधा बना लिया है। तुमने गौर किया कि उसके पास एक थैला भी था, जिसमें अनाज भरा हुआ था। वह शाम को सारा अनाज किराना दुकान पर बेच देगी.. वह भी बहुत कम कीमत पर.. और उनके बदले रुपए ले लेगी।

यकीन ना हो तो आज उसका पीछा करो और देख लो। फिर तुम्हें लगेगा कि मैं सही बोल रही हूँ। इस औरत को मैं अच्छे से जानती हूँ। यह औरत.. पता नहीं, किसका बच्चा उठा लाती है और भीख मांगने लग जाती है। इसकी तो शादी ही नहीं हुई है और पति को मरा हुआ बता रही है। शर्म भी तो नहीं आती ऐसे कुकृत्यों पर इन लोगो को”
राजू चुपचाप मैम की बातें ध्यान से सुनता रहा। उसे लगा जैसे उससे अनजाने में कोई अपराध हो गया है। उसने मैडम को आश्वासन दिया कि वह आगे से आपकी कही हर बात पर अमल करेगा।

एक सप्ताह बाद, शाम के समय राजू ने देखा कि वही महिला भिखारी (जिसको उसने उस दिन 500 रुपये दिए थे) थैले में भरे हुए अनाज को किराना स्टोर पर बहुत कम कीमत में बेच रही है। उसे निधि मैडम द्वारा कही गई, हर बात सच लगी क्योंकि उसकी पुष्टि हो चुकी थी। वह सोचने लगा कि इंसान रुपए कमाने के लिए कितना अधिक गिर गया है.. कितना कामचोर हो गया है कि मेहनत से जी चुराने लगा है। उसे भीख मांगने में भी शर्म नहीं आती है। उस दिन के बाद से राजू ने भिखारियों को रुपए देने बंद कर दिए। अगर उसको कुछ देना होता तो वह कुष्ठ आश्रम या वृद्ध आश्रम में दान दे आता या सिर्फ दिव्यांग लोगों की ही मदद करता।

कुछ दिनों बाद एक घटना और घटी। राजू अपने दोस्त असद की दुकान पर बैठा, उससे बातें कर रहा था। अचानक एक महिला भिखारी आई और भीख मांगने लगी। असद ने चुपचाप एक ₹5 का सिक्का उठाया और उस महिला भिखारी के हाथ में रख दिया। रुपए लेकर वह महिला आगे बढ़ गई। उसके जाने के बाद, राजू ने असद को निधि मैडम की बातें व उस भिखारिन की बातें बतायीं जिसने अनाज राशन की दुकान पर बेच दिया था। वह असद से कहने लगा,

“हमें इन लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए। हमारी मदद करने की आदत की वजह से ही इन्होंने भीख मांगने को धंधा बना लिया है। इसी वजह से दिनोंदिन भिखारियों की तादाद बढ़ती चली जा रही है।”

“भाई राजू, तुम्हारा कहना सही है परंतु हर किसी को एक ही तराजू से नहीं तोला जाता। यह भी तो हो सकता है, जो भीख मांग रहा है.. उसको सच में रुपए की जरूरत हो। भीख मांगना बहुत हिम्मत की बात है। अगर सब इसी तरह की सोच रखने लगें, शक की निगाहों से देखने लगें तो कोई भी.. किसी जरूरतमंद की मदद नहीं करेगा। हमें भगवान का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उसने हमें देने वाला बनाया, मांगने वाला नहीं।

मैं यह नहीं कहता कि आप उसको ज्यादा रुपए दो, लेकिन दो रुपये, पांच रुपये या दस रुपये देकर हम उसकी थोड़ी तो मदद कर ही सकते हैं। हमें नहीं पता वे भिखारी उन रुपयों का क्या करेंगे?? वे चाहें तो उन रुपयों से अय्याशी करें या अपनी जरूरतें पूरी करें??

यह वे जानें…या भगवान जानें….परंतु मेरी नीयत उनको लेकर बिल्कुल साफ है। मैं सिर्फ सकारात्मक सोच के साथ जरूरतमंद की मदद कर रहा हूँ। भीख मांगना आसान काम नहीं है। लोगों के आगे हाथ फैलाने के लिए बड़ी हिम्मत चाहिए। हम तुमसे तो यह काम कभी हो ही नहीं सकता।

सोच कर देखो.. अगर मुझे तुमसे किसी चीज की या रुपयों की जरूरत होगी तो मैं मांगते हुए भी सौ बार सोचूंगा। मैं संकोच करूंगा… हिम्मत ही नहीं होगी मांगने की। इसलिए मुझे लगता है कि कुछ धूर्त लोगों या धूर्त भिखारियों की वजह से हमें.. दूसरों की या जरूरतमंदों की मदद करने की.. अच्छी आदत नहीं छोड़नी चाहिए।

इसको बनाए रखना चाहिए। इसकी सजा ऐसे इंसान को क्यों मिलें, जिसकी कोई गलती नहीं है। जो सिर्फ मदद की उम्मीद में हमारे दर पर आया है। हमें हर चीज को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। इतना नकारात्मक होना ठीक नहीं। कहीं ऐसा ना हो कि हम जरूरतमंद की मदद करने से वंचित रह जाएं।”

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • मलाल

    “गुरुजी, आप नीतू को स्कूल की साफ सफाई के काम से हटा दीजिए।” ग्रामीण जितेंद्र ने प्राथमिक विद्यालय के हेड मास्टर कृष्ण सर को स्कूल जाते देखकर रास्ते में ही उन्हें रोककर कहा। “भैया जी, शायद आपको पता नहीं.. उसको तो मैंनें छात्रहित में स्कूल की साफ-सफाई हेतु पिछले 1 साल से रख रखा है।…

  • भविष्यफल का मायाजाल | Kahani Bhavishyafal ka Mayajaal

    दिनेश अक्सर समाज में व्याप्त कुरीतियों को देखकर उसका मन व्यथित रहता था। वह अक्सर इस प्रकार के समाज में फैले पाखंड को सुनता था तो उसकी तह तक जाने का प्रयास करता था। एक बार उसने सुना कि कोई भविष्य वक्ता है। जो लोगों का भविष्य बताता है। फिर क्या था वह भविष्य वक्ता…

  • पहला प्यार (दूसरा भाग ) | love story in Hindi

    पहला प्यार  (दूसरा भाग ) #FIRST_LOVE              (An one-sided love story)                             #पार्ट_2 15 दिन हो गए हैं, वह नही आई।मेरा अब यहां जी नहीं लगता। मैं मन बहलाने के लिए गांव भी गया लेकिन कोई फायदा…

  • कपटी दुकानदार

    6 माह पुरानी बात है। स्कूल जाते समय मैंने एक किराना दुकानदार से 25 रुपए की नमकीन का एक पैकेट लिया और भुगतान करने को दुकानदार को 200 का नोट दिया। पेमेंट करके मैं दुकान से बाहर निकल गया। लगभग 3 किलोमीटर दूर जाने पर मुझे ध्यान आया कि दुकानदार ने मुझे 75 रुपये वापिस…

  • अनानास

    दस साल का रामू बहुत भोला भाला और सीधा लड़का था। उसको कोई भी अपनी बातों में फंसाकर उल्लू बना देता था। वह बिना सोचे समझे काम करने लग जाता था परन्तु बाद में उसको बड़ा पछतावा होता था। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ स्कूल जा रहा था। रास्ते में उनको अनानास का…

  • कहाँ तक | Kahani Kahan Tak

    ”  हलो ..भाई साहब , आप मेजर गौरव शर्मा बोल रहे है न ? ओके , मैं लाहौर से मरियम रहमान बोल रही हूँ । भाई  साहब शायद मेरे शौहर आपके साथ भारत- पाक , जंग में आपके साथ थे । उन्ही के विषय मे मैं आपसे बात करना चाहती हूँ। क्या आप मेरी दस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *