भूरिया तू क्यो बदल गया

भूरिया तू क्यो बदल गया

भूरिया से मुलाकात करीब दस महीनों पहले हुई थी.. कोरोना ने दस्तक दे दी और दुनिया रुक गयी.. थम गई.. कुछ दिन तो मैं घर मे ही रहा मगर फिर मैंने सांझ होते ही पैदल घूमना शुरू किया.. पैदल.. नंगे पाँव।

हर रोज छह किलोमीटर.. एक तय जगह तक रोज जाना और फिर घर लौट आना.. शुरुआती दिनों में पैदल चलने पर कुत्तों ने मुझ पर भोंकने की कोशिश की तो मैने पुचकार कर उन्हें चुप करा लिया।

फिर रोज का क्रम बन गया तो उन्होंने मुझे नजरअंदाज करना शुरू किया.. वे समझ गए थे यह कोई गलत आदमी नही है और इस पर भोंकना बेकार है.. अलबत्ता वे मित्रता की भूमिका में आ गये.. मुझे देख कर मेरे पीछे पीछे आते और उनके इलाके से बाहर निकलते ही फिर वे अपनी जगह लौट जाते।

भूरिया इन्ही कुत्तो में से एक कुत्ता था.. वह अक्सर एक दुकान के बाहर बैठा रहता था.. चूंकि शाम ओर रात के समय कुत्ते अधिक सक्रिय हो जाते और आते जाते लोगो का निरक्षण कर अपनी मुस्तेदी बताते हैं सो भूरिया भी कुछ ऐसा ही था।

एक दिन उस ने मुझे देखा ओर चूंकि मैं जानता हूं कि कुत्तो से भागने पर ये पीछे दौड़ते है सो मै खड़ा हो गया और उसे पुचकारने लगा.. पता नही मेरी पुचकार में क्या बात थी कि वह मेरे कदमो में लौटने लगा.. मैं आगे बढ़ा तो वह मेरे साथ चलने लगा।

मुझे भी उसका साथ चलना भाया.. मैं भी सहज बोल पड़ा चल भूरिया चल थोड़ा घूम कर आते हैं.. मुझे उसका नाम नही पता मगर वह सफेद रंग का तंदुरुस्त कुत्ता था सो सहज ही मेरे मुख से उसके लिए भूरिया सम्बोधन निकल पड़ा।

वह भी मेरे साथ हो लिया.. मैने उसके लिए बिस्कुट खरीदे ओर उसे खिलाये.. वह बहुत खुश हुआ.. थोड़ा आगे जाने पर अन्य कुत्तो का इलाका आ गया.. रोज मेरे आगे पीछे दुम हिलाने वाले कुत्तो ने भूरिया को देख भोंकना शुरू कर दिया.. कुत्तो में भी इंसानी बीमारी घुसी हुई है।

कोई इंसान सरहद पार करे तो सरहद के उस पार के इंसान उसे रोकते हैं, उसे टोकते है.. कुदरत की नियामत धरती पर कुछ लकीरे खींच कर इंसान यह फैसला कर बैठता है कि यह मेरा देश है और दूजे लोग यहाँ नही आ सकते।

कुत्तो ने लकीरे तो नही खींची मगर अपने अपने इलाके बना लिए ओर अन्य कुत्तो के प्रवेश को निषेध कर दिया.. भूरिया भी थोड़ा सहम गया.. वे करीब आठ कुत्ते ओर यह अकेला.. मैने उन कुत्तो को भगाया ओर भूरिया के साथ आगे बढ़ा.. मगर आगे भी ऐसे ही हालात थे।

कुत्तो ने भूरिया पर हमला कर दिया.. बड़ी मुश्किल से उसे मैने बचाया.. परेशान भूरिया अब वापस लौट पड़ा.. मुझे भी उसका यह निर्णय सही लगा क्योकि कुत्तो के लगातार होते हमलों से वह चोटिल हो सकता था।

वापसी में वह मुझे फिर मिला.. थोड़ा थका हुआ लग रहा था.. मैने उसे देखा तो वह दुम हिलाते हुए मेरे पास आ गया.. मैने उसे कहा चल.. घर चल.. तुजे बढ़िया बिस्कुट ओर रोटी खिलाता हु.. यह सुन असमंजस की स्थिति में मुझे वह देखने लगा।

मैं आगे बढ़ा और उसे साथ चलने का इशारा किया.. वह मेरे पीछे पीछे चल दिया.. रास्ते मे इक्का दुक्का कुत्ते मिले तो बिना मेरी मदद के ही भूरिया उन्हें निपटाते चला.. घर पर उसे लाया तो पत्नी और बच्चे मुझे हैरानी से देखने लगे मगर कोई कुछ नही बोला।

भूरिया की बड़ी खातिरदारी मैने की.. बिस्किट ओर परांठे खाने को दिए.. उसे साफ पानी पीने को दिया.. पानी इसलिए कि मुझे नही लगता कि इन मूक जीवो को शुध्द साफ पानी कहि मिलता होंगा.. गटर ओर नाली के पानी के अलावा कोई और विकल्प इनके पास नही होता है.. भूरिया ने खूब पानी पिया।

बिस्कुट पर उस ने कुछ विशेष ध्यान नही दिया मगर पानी उस ने दो बार पिया.. पानी पी कर उसे अदभुत शांति मिली.. वह पूछ हिलाने लगा और मेरे पैरों में लौटने लगा.. थोड़ी देर बाद उसे मैने घर के बाहर किया तो वह उदास हो गया.. उस ने शायद मन मे सोच लिया था कि आज के बाद मुझे यही रहना है।

यही.. इसी घर मे.. वह घर के बाहर ही खड़ा रहा इस उम्मीद में की शायद उसे मैं फिर बुला लू मगर जब मैंने ऐसा कुछ नही किया तो वह लौट गया।

अब तो यह रोज का क्रम हो गया.. वह मुझे दूर से ही सूंघ लेता ओर सड़क पर बहुत ही बढ़िया उछल कूद कर नृत्य की बानगी पेश करता है.. मेरा पक्का मानना है कि वह मुझे देख नृत्य ही करता था.. वह दौड़ा दौड़ा आता और मुझ पर चढ़ने की कोशिस करता.. एक बार तो मैं गिरते गिरते बचा था।

वह रोज मेरे घर आता.. पानी पीता.. बिस्कुट ओर रोटी खाता ओर फिर चले जाता.. उसका मेरा साथ इतना पक्का हो गया था उसे मैं भगाता तो भी वह जाता नही था.. मैं कई बार सड़क पर खड़े ट्रकों के पीछे छुप जाता मगर वह पट्ठा मुझे ढूंढ ही लेता.. उसकी मेरी मस्ती लोगबाग देखते.. कुछ हँसते.. कुछ व्यंग्य से मुस्करा कर आगे बढ़ जाते।

ओर फिर कुछ दिनों बाद मेरे घर के आसपास के कुत्तो को भूरिया के बारे में जानकारी मिली.. उन्हें पता चल गया कि कोई ओर कुत्ता है जो इधर आता है और खा पी कर चले जाता है.. उस दिन भूरिया मेरे साथ आया तो दो कुत्ते पहले से ही उस के स्वागत में खड़े थे.. भूरिया को देख वे उस पर हमला करने को तत्पर हुए मगर मैने उन्हें डांटा।

मेरे वे परिचित थे सो वे एक तरफ हट गए ओर भूरिया को घूरने लगे.. भूरिया को बढ़िया खाते पीते देख वे दुम हिलाने लगे.. कुछ बिस्कुट मैने उन्हें भी दिए मगर उनकी नजर भूरिया के बिस्कुट पर थी.. उन दोनों कुत्तो की उपस्थिति में भूरिया स्वयं को सहज नही रख पा रहा था।

रोज तो उस के चेहरे पर शहंशाह वाले भाव होते थे मगर आज वह थोड़ा घबराया सा लग रहा था.. खाने के बाद वह वही बैठ गया.. जबरन उसे मैने बाहर धकेला.. दोनों कुत्ते भूरिया को बाहर छोड़ कर फिर मेरे पास आ गए.. उनके व्यवहार में अब थोड़ा बदलाव आ गया था।

भूरिया को मेरे साथ देख वह भी मुझ से निकटता बढ़ाने चाहते थे.. उनको अब यह समझ मे आ गया था कि घर से मैं कब निकलता हु ओर फिर घर कब आता हूं.. दोनों समय वे दोनों कुत्ते मेरे साथ हो लेते मगर मैं उन्हें जबरन भगा देता था.. भूरिया रोज मिलता ओर रोज मेरे घर आता।

कुछ दिन तो दोनो कुत्तो ने शांति बना कर रखी मगर बाद में उनका संयम टूटने लगा.. वे भूरिया पर घुर्राने झपटने लगे.. उन्हें यह विश्वास हो गया था कि यह भूरिया अब स्थायी रुप से डेरा जमाएगा.. मेरे रोकने पर भी वे नही रुकते ओर भूरिया पर हमला करने लगे थे.. भूरिया भी रोज रोज की इस परेशानी से दुःखी हो गया था.. दोनों कुत्तो से उसका तालमेल नही बैठ पा रहा था और थोड़े से भोजन के लिए रोज उसे उन दोनों से लड़ना पड़ रहा था।

धीरे धीरे भूरिया की मुझ में रुचि कम होने लगी.. अब वह घर आने से पहले ही पलट लेता.. ओर फिर ऐसा भी समय आया कि भूरिया मेरी आवाज सुन कर भी मुझे नजरअंदाज करने लगा.. उसकी गर्मजोशी खो गयी और वह मेरे पैरों में लौटना भूल गया।

मुझे देख अब वह नृत्य भी नही करता था.. मुझे देख खुश नही होता था.. मेरे पुकार को अनसुना कर देता था.. भूरिया बदल गया था.. वह उस कहावत को झूठी साबित करने लगा था कि कुत्ता कभी भी गद्दारी नही कर सकता।

वह कुत्ताधर्म से विपरीत व्यवहार करने लगा था.. कभी कभी मै सोचता था कि कही वह धीरे धीरे इंसानों के गुण तो नही धारण करने लगा है.. क्योकि धरती का यही एक जीव है जो अपने सारे रंगों को दिखाता है.. कुछ रंग इंसान के अच्छे है.. कुछ रंग उसके दुःख देने वाले है।

भूरिया के भी रंग बदलने से मैं दुःखी हो रहा था.. मगर मेरे सुख दुख से भूरिया को कोई प्रभाव नही पड़ना था.. वह मुझे भूलने लगा.. बिसराने लगा.. इस कदर की वह फिर साथ चलता भी नही था।

अभी मैं कुछ दिनों से देख रहा हु वह कही नजर भी नही आ रहा है.. न जाने क्या बात है.. न जाने क्या हुआ है.. मन मे कई शंकाएं उठती है और सब से खराब शंका यह कि कही किसी गाड़ी के नीचे आ कर वह मर तो नही गया.. अनेक अनेक धन्यवाद।

रमेश तोरावत जैन
अकोला

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