कायर

फोन की घंटी बजी। राजीव ने फोन उठाया। फोन पर अनुराग था।

“भैया आप कहाँ है? क्या आपसे इस समय मुलाकात हो सकती है?”

यह पूछते वक्त अनुराग की आवाज में वह बात नहीं थी जो अक्सर बात करते समय राजीव महसूस करता था। ऐसा लग रहा था जैसे कि वह किसी दिक्कत में है। राजीव ने बिना देरी किए तुरंत कहा-

“बिल्कुल। अब कहाँ हो अनुराग? मैं तेरे घर आता हूँ तुमसे मिलने।”

“भैया मैं आपको ग्रीन पार्क में मिलूंगा। वहीं पर आपको सब कुछ बताऊंगा। फोन पर या घर पर बात करना उचित नहीं है।”

अनुराग और राजीव में की उम्र में लगभग 5 साल का अंतर था। राजीव अनुराग से बड़ा था। ज्यादातर मामलों में अनुराग, राजीव से सलाह लेना पसंद करता था। तय समय पर राजीव ग्रीन पार्क पहुंच गया। समय जाया ना करते हुए उसने अनुराग से उसकी समस्या पूछी।

मामला प्रेम प्रसंग से संबंधित था।

“भैया, मैं पिछले 3 सालों से रिया के संपर्क में हूँ और उससे प्रेम करता हूँ। कल रिया की शादी है। मैं बहुत परेशान हूँ। मैं रिया को सबक सिखाना चाहता हूँ। उसने मुझे धोखा दिया है। मुझसे शादी का वायदा करके, अब वह किसी और से शादी कर रही है। मैं उसको छोडूंगा नहीं। मैं उसकी जिंदगी नरक बना दूंगा।”

“रिया ने तुम्हें धोखा दिया? मगर कैसे? क्या रिया तुमसे प्यार नहीं करती थी? क्या तुम्हें नहीं पता था कि उसकी शादी होने वाली है? या फिर तुम्हें अचानक आज ही पता चला कि उसकी शादी तय हो चुकी है?” राजीव ने एक साथ कई सवाल पूछ डाले।

“प्यार तो रिया मुझसे बहुत करती थी। उससे एक बार मैंने मजाक मजाक में पूछ लिया था कि तुम मुझसे कितना प्यार करती हो? तो उसने कहा कि मैं तुम्हारे लिए जान भी दे सकती हूँ.. तो मैंने कहा इस तरह की बातों में कोई सच्चाई नहीं होती। आज के समय में कोई किसी के लिए नहीं मरता। मेरा सिर्फ इतना कहना था और उसने अपना प्यार साबित करने के लिए अपने हाथ की नस काट ली थी। उसने तो मुझे हर छोटी बड़ी बात बताई। कब लड़के वाले देखने आ रहे हैं? कब रिश्ता हुआ? कब शादी की तारीख निकली है?”

“फिर तुम उसे कैसे बेवफा कह सकते हो?”

“उसने मुझसे हर बात शेयर की लेकिन उसने कभी खुलकर अपने मम्मी पापा से यह नहीं कहा कि वह मुझसे प्यार करती है। मैं उस जगह शादी नहीं करूंगी, जहाँ उसके मां-बाप चाहते हैं। वह हर फैसले में अपने माता-पिता के साथ रही, जबकि एक समय उसने कहा था कि वह मरने को मर जाएगी, लेकिन दूसरी जगह शादी नहीं करेगी। आज स्थिति बिलकुल उलट है। मैं अपनी आंखों के सामने उसे किसी और का होते नहीं देख सकता। मैं उसकी जिंदगी बर्बाद कर दूंगा।” अनुराग बोला।

“ठंडे दिमाग से सोच अनुराग। मुझे नहीं लगता कि उसकी कोई गलती है। अगर वह खामोश रही तो तुम्हें अपने स्तर से प्रयास करना चाहिए था। अपने माता-पिता को सारी बातें बता कर रिया से शादी करने का प्रयास करना चाहिए था। क्या तुमने ऐसा कोई काम किया?”

“नहीं, मैं हिम्मत नहीं जुटा पाया। अभी मैं बेरोजगार हूँ। नौकरी में स्थायित्व ढूंढने का प्रयास कर रहा हूँ। वैसे भी रिया मेरी दूर के रिश्ते की बहन लगती है। मेरी मम्मी की सहेली की लड़की है वह। मुझे लगता है कि मेरे मम्मी पापा वहाँ शादी के लिए कभी राजी ना होंगे। वह कहेंगे कि वह तेरी बहन लगती है और बहन से तेरी शादी हम होने नहीं देंगे। बहन भाई में हम हिंदुओं में शादी कहाँ होती है? दो साल पहले, एक बार मैंने मजाक मजाक में कहा था, पूछने की कोशिश की थी तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया था।”

“अजीब बात है कि दूर के ही सही, भाई बहन के रिश्ते को जानकार भी तुम प्यार कर बैठे। मुझे लगता है कि दूर का बहन भाई का रिश्ता है तो तुम्हारी शादी हो सकती थी। तुम्हें फिर से मौका देखकर अपने मम्मी पापा से बात करनी चाहिए थी। पहले जब तुमने पूछा था, तब अलग समय था, अलग बात थी।

अब बिना मम्मी पापा से बात किए तुम कैसे कह सकते हो कि वह राजी ना होते? अरे यार कम से कम तूने कोशिश की होती तो शायद बात बन जाती। तू भी सब कुछ रिया से ही चाहता है कि वह तुझे पाने के लिए शेरनी बनकर सबसे लड़े। अपने और अपने परिवार की इज्जत समाज में तार तार कर दे। तू बस खामोश रहकर, सब कुछ अपनी आंखों के सामने होता हुआ देखता रहे। देखा जाए तो यही तो हो रहा है अब। कल उसकी शादी है।”

“भैया, आप मुझे ही गलत ठहराने लगे।”
अनुराग ने शिकायत की।

“तुम्हारी अब तक की सारी बातें सुनकर तो यही लग रहा है कि वह लड़की कहीं से भी गलत नहीं है। तुम्हारी सारी उम्मीदें रिया से हैं। वही हर काम की पहल करें और तुम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहो। वैसे मैं जान सकता हूँ कि आखिर तुम चाहते क्या हो? क्यों रिया को बर्बाद करना चाहते हो, समाज में उसके व उसके परिवार की धज्जियां उड़ाना चाहते हो?” राजीव ने अनुराग की मंशा पूछी।

“मैं चाहता हूँ कि रिया की शादी वहां ना हो। मैं अपनी आंखों के सामने रिया को किसी और का होते नहीं देख सकता। वह सिर्फ मेरी है। मैं रिया के होने वाले पति को सब कुछ फोन करके बता दूंगा। मेरे पास रिया की अपने साथ फोटो, वीडियो, ऑडियो सब है। मैं उसको बोल दूंगा कि वह रिया से शादी ना करें।”

“अब इस तरह की बातें करने का कोई फायदा नहीं है। तुमने पहले से रिया को पाने का प्रयास क्यों नहीं किया? शादी तक बात ही क्यों आने दी? सोचो, अगर रिया के पति ने उसे चरित्रहीन बोलकर छोड़ दिया तो क्या तुम रिया से शादी कर सकोगे, उसका हाथ थाम सकोगे? अपने परिवार के सभी सदस्यों को मना सकोगे?

रिया को अपने परिवार द्वारा अपनाए न जाने पर रिया को कहाँ रखोगे? जीविकोपार्जन कैसे करोगे? कुछ सोचा है या सिर्फ यही सोचा है कि रिया की शादी वहाँ ना हो, जहां उसके मम्मी पापा करना चाह रहे हैं? रिया व उसके परिवार की बदनामी करना चाहते हो?”

“इन सब बातों के बारे में मैंने कुछ भी नहीं सोचा। अभी इतनी जल्दी उससे शादी कैसे कर सकता हूँ। मुझे अभी अपने पैरों पर खड़ा होना है, फिर शादी करूँगा।”

“बुरा मत मानना। तेरे अंदर रिया से शादी करने की खुद में हिम्मत नहीं है और रिया को पाने चला है… वो भी उसकी शादी तुड़वाकर। कायर कहीं का। कुछ तो शर्म कर। खुद के मां-बाप और उसके मां-बाप की इज्जत का ख्याल तो कर। याद रखना, अगर तुमने उसकी शादी तुड़वाने की कोशिश की तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।

इस लगाई आग से तुम भी बच न पाओगे। इसकी जद में तुम्हारा परिवार भी आएगा। तुम्हारी इज्ज़त की भी धज्जियां उड़ा जाएंगी। इतनी बड़ी बदनामी के बाद तुम्हारा परिवार रिया को कभी अपना न सकेगा। अगर उसके पति को तुम्हारे साथ अफेयर का बारे में पता चल भी गया और बावजूद इसके दोनों की शादी हो भी गई तो बेचारी की पूरी जिंदगी जीते जी नरक बन जाएगी।

बात बात पर उसे चरित्रहीन होने के ताने मिलेंगे। सच्चे मन से उसका पति उसे कभी अपना न पायेगा। सोचो, अगर उसके पति ने कुछ समय बाद, रिया को तलाक दे दिया तो क्या तुम उससे तब शादी कर सकोगे? अपना सकोगे उसे? बोलो?”

अनुराग खामोश रहा। उसके पास इन सब बातों का जवाब न था।

“भैया मैंनें यहां तक सोचा ही ना था कि शादी तुड़वाने के इतने भयंकर परिणाम होंगे। इससे तो मेरी व उसकी दोनों की जिंदगी नरक बन जाएगी। परिवार की बदनामी होगी सो अलग। आप ही बताओ भैया, अब मैं क्या करूँ?”

“अनुराग, अगर तूने सच में रिया से प्रेम किया है तो रिया की खुशी के लिए, उसके परिवार की खुशी के लिए उसको भूल कर आगे बढ़। अपने मोबाइल से उसके फोटो, वीडियो, ऑडियो सब डिलीट मार। उससे जुड़ी कोई भी सामग्री… यहां तक कि मोबाइल नंबर भी अपने मोबाइल में डिलीट कर। उससे जुड़ी हर चीज को डिलीट कर जो उसकी याद दिलाती है। उसको उसकी नई जिंदगी मुबारक, तू अपना ध्यान कहीं और लगा।

अपने करियर बनाने पर लगा। याद रखना, तुझे रिया से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी पड़ेगी। कहीं ऐसा न हो कि उसकी शादी के बाद भी तू उसके संपर्क में रहे। यह ठीक नहीं होगा। यह गलत होगा। देर सवेर अगर तुम्हारे अवैध संबंधों का उसके पति को पता चल गया, तब बहुत बड़ी दिक्कत/समस्या खड़ी हो जाएगी। अगर उसके पति ने उसको छोड़ दिया तो तुम भी उसको अपना न पाओगे। चीजें/परिस्थितियों को सही करने का समय अब निकल चुका है। इस समय तुम्हारा एक भी गलत कदम दोनों परिवारों के लिए ठीक ना रहेगा।

रिया पूरी तरह से अपने मंगेतर से शादी करने का मन बना चुकी है, इसलिए वह खामोश है। उसने समझदारी से काम किया। उसे पता था कि तुम अपने परिवार से बात ना कर सकोगे। तुम कायर हो। हर समझदार लड़की वही करती जो रिया ने किया। अब रिया को भूल कर आगे बढ़ाने में ही समझदारी है। वैसे भी प्रेम का सही अर्थ अपने प्यार को खुश देखना है।

अपनी क्षणिक खुशी के लिए दूसरों की खुशियों को, इज्जत को मिट्टी में मिला देना प्रेम नहीं होता। प्यार देने का नाम है पाने का नहीं। मुझे यह भी लगता है कि तुम्हें रिया की शादी तक अकेले छोड़ना खतरे से खाली नहीं है। तुम्हारा गुस्से व नासमझी में उठाया गया एक भी गलत कदम दोनों परिवारों के लिए, पूरी जिंदगी के लिए कष्टकारी होगा। एक काम करते हैं। कल सुबह कुछ दिनों के लिए हिल स्टेशन पर घूमने चलते हैं। रिया की शादी को सेलिब्रेट करते हैं।”

“ठीक है भैया। मुझे आपकी बात समझ में आ गई है। मुझे अब उसे भूलकर आगे बढ़ना ही होगा। सच कहा आपने, प्रेम वह नहीं होता जो मैं करने वाला था, ऐसा तो दुश्मन करते हैं। सारी गलती मेरी है। अब गलती सुधारने में देर हो चुकी है। अब कुछ नहीं हो सकता। मैं रिया और उसके परिवार की कभी बदनामी नहीं चाहूंगा। लेकिन भैया, मैं क्या करूं? मुझे बार-बार रह-रहकर उसके साथ बिताए पल मुझे जीने नहीं दे रहे। मुझे बहुत दिक्कत हो रही है। हम कल की बजाय आज ही कहीं घूमने निकल जाए, अगर आपको दिक्कत ना हो तो…”

“ठीक है। मैं बिल्कुल तैयार हूँ। मेरी भी फिलहाल गर्मियों की छुट्टियां चल रही है। तुम भी चलने की तैयारी करो, मैं भी तैयार होकर मिलता हूँ। घर जाने से पहले, अभी एक काम करो। मेरे सामने रिया के फोटोज, वीडियोज, ऑडियोज सब डिलीट मारो… यहां तक कि उसका मोबाइल नंबर भी।” राजीव ने अपने सामने रिया से जुड़ी हर तरह की ऑडियो, वीडियो सामग्री, रिया व उसके परिवार के सभी सदस्यों के कांटेक्ट नम्बर आदि मोबाइल से परमानेंटली डिलीट करवाई। फिर उसको घर जाने दिया।

लगभग 2 घंटे बाद राजीव और अनुराग एक साथ हिल स्टेशन पर घूमने के लिए निकल पड़े। एक सप्ताह बाद जब वे दोनों लौट कर आए। अनुराग तब काफी हद तक रिया को भूल…. जिंदगी में आगे बढ़ाने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार था।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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