कुदरत का इंसाफ़

कुदरत का इंसाफ़

बेटी निधि के प्रेम प्रसंग की जानकारी होने के बावजूद पिता अमर सिंह ने अखबार में वैवाहिक विज्ञापन दिया। निधि एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी। इस स्कूल में पढ़ाने वाले कमल से निधि की आंखें चार हो गई।

निधि कमल से शादी करना चाहती थी, लेकिन अमर सिंह इसके विरोध में थे क्योंकि कमल गैर बिरादरी से ताल्लुक रखता था। जब कमल को निधि के पिता द्वारा अखबार में शादी का विज्ञापन दिए जाने का पता चला तो कमल डर गया। वह किसी भी कीमत पर निधि से शादी करना चाहता था। उसने निधि से कहा-

“निधि, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता। यह जालिम दुनिया हमें जीने नहीं देगी। क्यों ना हम भाग चलें…? कहीं दूर रहकर हम अपने प्यार की दुनिया बसाएंगे और इत्मिनान से मजे से रहेंगे। दोनों मिलकर परिवार चलाएंगे। बोलो क्या कहती हो?”

“घर से भागना गलत होगा, कमल। इससे दोनों के परिवारों की बदनामी होगी। हम यहीं रहकर भी तो एक हो सकते हैं। मैं ही कुछ करती हूँ। तुम परेशान ना हो। यह दुनिया हमें जुदा नहीं कर सकती। हम एक होकर ही रहेंगे।” निधि ने कमल को आश्वस्त करते हुए कहा।

कुछ दिनों बाद ही निधि का रिश्ता अमर सिंह ने सुरेश से तय कर दिया। शादी की तारीख भी दो माह बाद निश्चित कर दी गई। यह सब जानकर कमल आग बबूला हो गया। उसने निधि से कहा-

“तुमने तो कहा था कि तुम सब ठीक कर दोगी, लेकिन यहाँ तो तुम्हारा सुरेश से रिश्ता तय हो गया है। शादी भी 2 महीने बाद हो ही जाएगी। यह गलत है। तुम मेरे साथ दोहरा गेम तो नहीं खेल रही हो? मुझे सच-सच बताओ। आखिर तुम चाहती क्या हो?”

“मैं तुम्हें चाहती हूँ कमल। मेरा विश्वास करो, मैं कोई डबल गेम नहीं खेल रही। मैं तुम्हारे साथ ही रहना चाहती हूँ, जीना चाहती हूँ और शादी करना चाहती हूँ।”

“मुझे अब तुम पर यकीन नहीं है। मैंने तुम पर भरोसा किया लेकिन इसके बावजूद तुम्हारा सुरेश से रिश्ता हो गया।”

“तुम्हें यकीन दिलाने के लिए मैं एक काम कर सकती हूँ।”

“वह क्या है? निधि से कमल ने पूछा।

“कोर्ट मैरिज। बोलो, करोगे कोर्ट मैरिज मुझसे।” निधि ने पूछा।

“हाँ, मुझे मंजूर है।”

“कमल, कोर्ट मैरिज के बाद हम कानूनन पति-पत्नी बन जाएंगे। फिर हमें कोई जुदा नहीं कर पाएगा। तुम शादी को लेकर परेशान मत होना। शादी का मैं कुछ सोचती हूँ। यकीन रखना कि मैं सुरेश से कभी शादी नहीं करूंगी, चाहे कुछ भी हो जाए।”

कमल और निधि ने घर वालों से छुपकर अगले एक महीने के अंदर ही कोर्ट मैरिज कर ली।

इधर शादी का दिन नजदीक आ गया था। दो दिन बाद शादी होनी थी। निधि और कमल (दोनों ने) ‘शादी ना हो’ इसके लिए खतरनाक प्लान बनाया। शादी वाले दिन जब बारात आई तो कमल ने अपने कुछ गुंडे दोस्तों के साथ मिलकर बारात में झगड़ा करवा दिया। खुद को लड़के वाला बोलकर निधि के मां-बाप के साथ बदतमीजी की, उनसे दहेज मांगने लगे।

उन गुंडो ने सुरेश को भी खूब पीटा और उसके मां-बाप के साथ भी बदसलूकी की। चुपके से मौका देखकर कमल सुरेश के पास पहुंचा और उसने उसको बताया कि वह निधि का बॉयफ्रेंड है। उन्होंने कोर्ट में शादी कर लिए ली है। यह सब सुरेश बर्दाश्त ना कर सका। उसने निधि से शादी करने को स्पष्ट तौर पर मना कर दिया।

वावजूद इसके निधि के मां-बाप इज्ज़त की दुहाई देते हुए, सुरेश से निधि की शादी करवाने को तैयार थे। लेकिन किसी भी कीमत पर सुरेश सब कुछ जानते हुए भी (कि कमल निधि से शादी कर चुका है) शादी करने को तैयार नहीं हुआ। अमर सिंह ने सुरेश के परिवार को दहेज मांगने के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।

धमकाने के बावजूद सुरेश और उसका परिवार ने स्पष्ट तौर पर शादी से मना कर दिया और निधि के परिवार द्वारा शादी में हुआ सारा खर्चा ब्याज सहित लौटाने के लिए कहा। निधि और उसके परिवार वालों ने दहेज के मुकदमे से बचाने के लिए सुरेश के परिवार वालों से 10 लाख रुपए ऐठ लिए।

कुछ समय बाद निधि ने अपने मां-बाप को कमल से शादी के लिए मना लिया। निधि का एक छोटा भाई भी था, उसका नाम अंकुश था। दोनों भाई-बहन की शादी 6 माह बाद, एक ही बैंक्विट हॉल में अलग अलग संपन्न हुई। उधर सुरेश ने भी एक अच्छी लड़की देखकर कहीं और शादी कर ली।

3 साल बाद, एक दिन अखबार में सुरेश ने खबर पढ़ी-

“निधि की भाभी अर्चना के परिजनों ने निधि, कमल, अमर सिंह (पिता), रजनी (माता) व भाई अंकुश के खिलाफ दहेज उत्पीड़न समेत अनेक धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई है।

इस मामले में उनकी तहरीर पर धारा 498 ए (स्त्री के साथ ससुरवालो द्वारा क्रूरता करना), धारा 506 (जान से मारने की धमकी देना), धारा 504 (गाली गलोज करना), धारा 406 (शादी में दिए सामानों पर कब्जा जमाना) के आरोप में नामजद कर लिया है।

इस केस में अब निधि और उसका पूरा परिवार जेल में है। 3 साल बाद ही सही, लेकिन ऊपर वाले ने सुरेश को न्याय दिया। निधि व कमल के कुकर्मों की सजा कुदरत ने उन्हें दी। इस बात का अब पूरा समाज प्रत्यक्षदर्शी था।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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