क्या होता है जीडीपी
क्या होता है जीडीपी

क्या होता है जीडीपी और कैसे करते है इसका आकलन

( What Is GDP & How Do We Assess It / Essay In Hindi )

 

किसी भी देश की Economy की रफ्तार को उसके GDP (जीडीपी ) के जरिए ही आंका जाता है। कोरोना वायरस महामारी के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP मे नकारात्मक ग्रोथ देखी गई है। अभी हाल में ही जारी हुई तिमाही समीक्षा में India’s GDP -23.9 फीसदी दर्ज की गई है।

भारत में आजादी के बाद 1996 के बाद से GDP के तिमाही आंकड़े जारी होना शुरू हुए थे। तब से यह पहली बार है जब अर्थव्यवस्था में इतनी अधिक नकारात्मक ग्रोथ दर्ज की गई है।

बता दें कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कोरोना वायरस महामारी के चलते देश भर में लॉकडाउन किया गया था जिसके चलते देश की Industrial Activity (औद्योगिक गतिविधियां ) पूरी तरह से चरमरा गई थी। नतीजा यह रहा कि India’s GDP में नकारात्मक ग्रोथ देखी गई। बता दें कि भारत का वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

क्या होती है जीडीपी  ( What Is GDP ): –

जीडीपी से तात्पर्य किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में देश की सीमा के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल सकल मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product – GDP) अर्थात जीडीपी कहा जाता है। GDP ही अर्थव्यवस्था का आईना दिखाने का काम करती है।

इसी से किसी भी देश की Economy के बारे में पता चलता है। जीडीपी से ही यह पता चलता है कि अर्थव्यवस्था के किस सेक्टर में तेजी दर्ज की जा रही है तथा किस में गिरावट आ रही है।

अगर किसी भी अर्थव्यवस्था के GDP के आंकड़े पिछले साल की तुलना में कम है तब इससे यह पता चलता है कि उस अवधि में सामानों का उत्पादन कम हुआ है और उसमें गिरावट दर्ज की गई है।

Indian Economy ( भारतीय अर्थव्यवस्था ) में देश की जीडीपी का आकलन केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किया जाता है।

यह साल में 4 बार होता है और हर तीन महीने में GDP के आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं। जीडीपी के ये आंकड़े हर साल केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा साल भर के भी जारी होते हैं।

इस तरह होता है जीडीपी का आंकलन ( This is how GDP is estimated ) : –

 

GDP का आकलन दो तरह से होता है एक सांकेतिक, दूसरा वास्तविक। एक साल में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल से सांकेतिक जीडीपी निकाली जाती है और इसे किसी आधार वर्ष के संबंध में महंगाई के सापेक्ष रखकर वास्तविक जीडीपी का आकलन किया जाता है। इससे अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति का पता चलता है।

 जीडीपी की आकलन में चार घटकों का ध्यान रखा जाता है  ( Four factors are taken into account in estimating GDP ) :-
  • उपभोग व्यय ( Consumption expenditure )
  • सरकारी व्यय ( Public Expenditure )
  • निवेश व्यय ( Investment expenditure )
  • कुल (आयात- निर्यात) ( Total Import – Export )

भारत में GDP की गणना के लिए केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा देश के 8 बड़े क्षेत्र के आंकड़े लिए जाते हैं। यह क्षेत्र कृषि, रियल स्टेट, मैन्युफैक्चरिंग, विद्युत गैस सप्लाई, माइनिंग, होटल, कंस्ट्रक्शन ट्रेड और कम्युनिकेशन फाइनेंस और इंश्योरेंस बिजनेस सर्विस और कम्युनिटी सोशल सर्विस।

भारत की GDPपर नजर डालने पर पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले 4 सालों से सुस्ती देखी जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में भारत की जीडीपी 8.3 फीसदी थी।

उसके बाद से भारत की GDP में गिरावट देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी की दर 7 फ़ीसदी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2018-19 में 6.1 फेसदी और वित्त वर्ष 2019-20 में यह घटकर मात्र 4.2 फैसले पर आ गई।

लेखिका : अर्चना 

यह भी पढ़ें : 

°°° “बसंत” °°° उत्साह, आशा और उमंग की ऋतु

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here