Laghu katha maun

मौन | Laghu katha maun

मौन

( Maun )

 

सुधा ने अपने पति से पूछा रोज की तरह उसकी आदत थी बाहर जा रहे हो कब तक लौट आओगे l यह जानकारी वह जानकारी हासिल करने के लिए नहीं लेती थी l या उन पर पहरेदारी नहीं करती थी l

बल्कि वह जानना चाहती थीl यदि देर से आ रहे हैं तो फिर कुछ खाना बनाकर खिला दिया जाए जब तक पति नहाए धोए पूजा की तब तक पत्नी ने पुलाव बना दिया था l

सुधा ने किचन से ही पूछा टिफिन लगा दूं l प्रतिउत्तर में ना सुनाई दिया l सुधा बोली ठीक है l तो थोड़ा खा कर चले जाओ l इतना उसका कहना ही था पति ने तुरंत कहा खा- खा कर मर जाओ l तुम्हारा काम ही क्या है l खाना बनाना और खिलाना l

पर सुधा शांत रही और मुस्कुरा दी जानती थी इस इस समय मौन रहना ही उचित है l क्योंकि खाने वाले का स्वाद चला जाएगा l वो तन्मयता से नहीं खाएगाl l

साथ ही पत्नी का एक धर्म यह भी होता है कि वह पति का ख्याल रखें मौन स्वास्थ्यवर्धक था उस समय l उसके पति के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए l

मौन भी एक संस्कार है l जो मां से बेटी में आता है और बहुत से विवादों को रोक पाता है l सुधा को आत्मिक संतुष्टि थी कि पति ने कुछ खा लिया है l

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

मॉर्निंग वॉक बनाम पुष्प | Hindi mein kahani

Similar Posts

  • ट्यूशन | Tuition

    मेरे पिता जी का ट्रांसफर जलालाबाद ( थानाभवन) से बदायूं हो गया,बदायूं के पास एक छोटा सा गाँव था तातागंज, वहाँ मैं कुछ दिन ही रहा,मेरे पापा डॉक्टर थे, नीचे अस्पताल था ऊपर मकान जिसमें हम लोग रहते थे। मकान की ख़ाशियत ये थी की दरवाज़े तो थे पर कुंडी नहीं थी,उस गाँव में मुझे…

  • निकम्मा | Nikamma

    उसे सभी निकम्मा कहते थे। वैसे वह 15 — 16 साल का हो चुका था लेकिन उसका मन पढ़ने लिखने में नहीं लगता था । यही कारण था कि कई कई बार तो वह फेल होने से बच गया। उसे नहीं समझ में आ रहा था कि आखिर कैसे पढ़ाई करू कि जो मुझे लोग…

  • शोषण | Shoshan

    रमेश एक बेरोजगार लड़का था। उसे काम की अति आवश्यकता थी। इसी बीच उसके एक दोस्त ने कहा कि कुछ लिखने पढ़ने का काम है । करना है तो आ जाओ। वह दोस्त के साथ कम पर लग गया। दो-तीन महीना तक उसे क्या तनख्वाह मिलेगी यह भी नहीं पता चला। फिर भी उसे विश्वास…

  • सुर असुर | Katha Sur Asur

    प्राचीन काल में सुर और असुर दो भाई थे । दोनों सहोदर थे।। जो भाई काम से जी चुराते थे। किसी प्रकार काम निकाल लेते थे । वह सभी सुर कहलाए। सुर वह लोग थे जो मुख्य रूप से सुरा और सुंदरी में हर समय मस्त रहकर अपनी शक्ति को क्षीण कर देते थे। सुरों…

  • विनोद कश्यप शर्मा की ग़ज़लें | Vinod Kashyap Sharma Poetry

    सावन तेरी बाहों में प्यारे सावनतूने दी है दस्तकअपनी प्यारी -प्यारीबादलों की बूंदों सेतेरी ठण्डी-ठण्डी हवाएं, काली घटाएंदे रही हैं मस्तीदिखती है तेरी अद्भुत मायाआ जाता है मौसम में यौवनदिल लेता है हिल्लौरेंबादलों की गरज की मीठी-मीठी आवाज़ेंहर लेती है मुझ जैसे प्रेमी का दिलमुस्कुराती है हरियाली।फूटतीं हैं वृक्षों पर कोंपलें, खिलखिलाते हैं कुसुम,गर्मी में…

  • पिता का तोहफा | Short laghu katha in Hindi

    पिता का तोहफा ( Pita ka tohfa )   जिंदगी के मायने कब बदल जाते हैं l पता ही नहीं चलता l रत्ना जो कल तक अपने पिता से हर चीज के लिए ज़िद करके मांग लेती थी l शादी होने के बाद रत्ना पहली बार मायके गईl उसका तीजा का व्रत वही पड़ा l…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *