मेरी सुबह मेरी शाम | Meri Subah meri Shaam

मेरी सुबह मेरी शाम

( Meri subah meri shaam )

 

मेरी सुबह भी तुम
मेरी शाम हो
मेरे चेहरे की हर मुस्कान हो
कुदरत भी ठहर जाए
जिसे देखकर
बारिशों में भीगी तुम ऐसी शाम हो

मेरी सुबह भी तुम
मेरी शाम हो
इतरा रहे हैं बाग
जिन फूलों को देखकर
उन फूलों की महकती
खुशनुमा एहसास हो

मेरी सुबह भी तुम
मेरी शाम हो
बदल रही है सृष्टि
जिन “नवीन “हवाओं से
उन हवाओं में महकती
“नवीन “एहसास हो
मेरी सुबह भी तुम
मेरी शाम हो
मेरी बंदगी में भी तुम खास हो
पर क्या तुम मेरे साथ हो
हां शायद तुम मेरे साथ हो

 नवीन मद्धेशिया

गोरखपुर, ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

शब्द | Shabd

Similar Posts

  • है ये मिट्टी की काया | Mitti ki Kaya

    है ये मिट्टी की काया! ( Hai ye mitti ki kaya )    मैंने खुद को तपा करके, जीवन को सजाया है। था कर्म मेरा अच्छा, तब जनम ये पाया है। कुदरत के आंगन में, बड़े मजे से खेला है। ये बीत गया जीवन, अब जाने की बेला है। पुरुषार्थ किया हमने, अब मोक्ष को…

  • कब बरसी सवनवाँ | कजरी

    कब बरसी सवनवाँ टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। लुहिया के चलले से सूखेला कजरवा, ऊपरा से नीचवाँ कब बरसी बदरवा। गरमी से आवें न पजरवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। ताल-तलइया,नदिया,पोखरी सुखैलीं, अपने बलम के हम गोनरी सुतऊलीं। चिरई जुड़ाई कब खोंतनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप…

  • राम विवाह | Ram vivah kavita

    राम विवाह ( Ram vivah : kavita )   टूट चुका धनुष शिव का तोड़े रामचंद्र अवतारी है सीताजी का हुआ स्वयंवर हर्षित दुनिया सारी है   देश देश से राजा आए दरबार भर गया सारा था धनुष उठा सके नहीं जो शिव शक्ति से भारी था   विश्वामित्र कहे राम से सब जनक राज…

  • गिरे आंखों से आंसु तो क्या

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या गिरे आंखों से आंसु तो क्या ,नहीं मिले गले उनके तो क्या ,तराने लिखने मिले थे दो डगर,नहीं लिख सके मिलन गीत तो क्या ,गिरे आंख से आंसू तो क्या …..सभी कदम तरंग की धुन में ,कोई सुने कुछ कोई कुछ मन में ,मिलाते रहे बिंदुओं को रेख में,जिन्हें…

  • चूड़ियों की खनक | Chudiyon ki Khanak

    चूड़ियों की खनक ( Chudiyon ki khanak )   चूड़ियों की खनक में,नारीत्व की परिभाषा दिव्य सनातन धर्म संस्कृति, कंगन कर कमल अलंकरण । परम प्रतिष्ठा दांपत्य शोभा, सरित प्रवाह माधुर्य अंतःकरण । हर धर्म पंथ समाज क्षेत्र, महिला शक्ति अनूप अभिलाषा । चूड़ियों की खनक में,नारीत्व की परिभाषा ।। विविध वर्णी अनुपमता, आकृति मोहक…

  • मुरलीवाला | Kavita Muraliwala

    मुरलीवाला ( Muraliwala ) दुनिया से निराला है तू बंसी वाला। जन्म दिया देवकी ने यशोदा ने पाला। गोपियों का प्रेमी, जग का रखवाला। नाचती हैं ठुमुक ठुमुक वो बृजबाला। छोटे छोटे पांव हैं, रंग का है काला। मगर चितचोर तू वो मुरलीवाला। शांत हो जाती है अंतर से ज्वाला। जपे जो भी कोई, तेरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *