नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर की कविताएं | Nandlal Mani Tripathi Poetry
तिरंगे कि अभिलाषा
आन मान सम्मान
गर्व अभिमान भारत
कि पहचान।।
सीमाओं पर देश कि रक्षा
करते एक हाथ मुझे लिए
दूजे में संगीन।।
अभिमान से लहराता युग
विश्व को बतलाता देखो मैं
हूँ भारत का गौरव मान ।।
भारत वासी शपथ हमारी लेता
वंदे मातरम जन गण मन भारत
माता कि जय गाता ।।
मेरी भी अभिलाषा है
भारतवासी से कुछ आशा है
सिर्फ तीन रंगों का वस्त्र नही
मेरी भी भाव भाषा है।।
मेरी तो इच्छा ना कोई
भूखा प्यासा बेटी नारी
कि खुशहाली शिक्षा और
सुरक्षा।।
मेरी संतुष्टि प्रगतिशील
युवा राष्ट्र कि हस्ती खेतो
में हरियाली गांवों में खुशहाली
हर हाथ को काम उचित काम
का दाम।।
घर घर उजियारा हो
घर घर स्वछ जल धारा हो
युवा पुरुषार्थ अनुभव सत्कार।।
द्वेष द्वंद ना जाति धर्म युद्ध
मॉनव मानवता का रिश्ता
दुनियां सारी हो।।
भय मुक्त उद्योग राष्ट्र का
बैभव गौरव विश्व मे जय जय
कारी हो ।।
निर्मल नदियां और सरोवर
प्रभा प्रवाह धर्म कर्म का
भारत वासी हो।।
हर छत पर लहराता
आजादी का अर्थ बताता
विजयी विश्व तिरंगा भारत
के बीर सपूतों शहीदों का
अभिमान ध्वज धुरी राष्ट्र ध्वज
भारत कि आजादी कि पहचान
तिरंगा।।
देवी माँ
जग तेरे चरणाें आया देवी माँ
जग तेरे शरणाें में आया देवी माँ!!
जग तेरे चरणाें आया देवी माँ
जग तेरे शरणाें में आया देवी माँ!!
तू भय भव भंजक निर्भय कारी
दुष्ट संघारी करुणा छमा,दया कि सागर जग तेरी कृपा तरस दरश में आया देवी माँ!!
जग तेरे चरणाें आया देवी माँ
जग तेरे शरणाें में आया देवी माँ!!
तेरे आँखो का दुलार तेरी संतान,
तेरे आँचल कि ममता तेरी संतान
जग आया लेकर अपनी मुराद
माँ तेरे द्वार!!
जग तेरे चरणाें आया देवी माँ,
जग तेरे शरणाें में आया देवी माँ!!
माँ सबकी भर दे झोली कोई खाली ना जाये कोई सवाली ना जाये खाली
तू जग जननी तू जग कल्याणी
जग तारणी माँ नव दुर्गा माता रानी!!
जग तेरे चरणाें आया देवी माँ जग तेरे शरणाें में देवी मेरी माँ!!
तू भक्ति कि शक्ति तू मंगलकारी शुभ संचारी अमंगल हारी जग तेरे दर दर्शन को आया देवी माँ!!
जग तेरे चरणाें आया देवी माँ,
जग तेरे शरणाें में आया देवी माँ!!
काहे का अभिमान
मात्र दिवस ही चार
दिवस दो आशाओं का
व्यवहार दो प्रतीक्षा प्राप्ति
प्राणी काहे करता अभिमान।।
बचपन खेल खिलौने में बीता
युवा सपनो का संसार
जवानी हस्ती मस्ती संसार
बिसरा सत्य का ज्ञान
प्राणि काहे करता अभिमान।।
जनम लिया जब
संबंध उत्सव का संसार
बढ़ता गया आशाओं का
तरुवर जैसे युग की छाँव।।
स्वार्थ लोभ काम मोह ने
जकड़ लिया भुला कर्म धर्म
भगवान प्राणि काहे करता अभिमान।।
जनम लिया मुठ्ठी बांधे
जैसे मुठ्ठी संसार
हाथ पसारे जाता है
कुछ भी रहा नही साथ
प्राणि काहे करता अभिमान।।
जाने कितनी ही
आशाओं का जनम तेरा
आवनी और आकाश
पाना खोना जीवन तेरा
गया बेकार
प्राणि क्यो करता अभिमान।।
युग मे सारे रिश्ते नाते
स्वार्थ सिद्ध के भान
नही मिला जब तुझसे
कुछ रिश्ते नातों ने दिया
घर से निकार
प्राणि काहे करता अभिमान।।
सोसल मिडिया
आवश्यकता आविष्कार
कहावत नही सत्यार्थ
मानवीय व्यवहार।।
मानव अपने उद्देश्य पथ को
लेता खोज युग जागृती का
शोध करता शिरोधार्य।।
सामाजिक बात विचारों का
माध्यम सोसल मीडिया नव युग
संचार संवाद कि क्रांति।।
सामाजिक माध्यम सोशल
मीडिया व्यक्ति विशेष ज्ञान
विज्ञान प्रवाह ।।
सकारात्मक ऊपयोगी
व्यक्ति व्यक्तित्व के छिपे गुण
ज्ञान का ऊपयोगी संसार।।
अणु संदेश फेसबुक इंस्टाग्राम
टेलीग्राम लिंक्डइन जाने क्या क्या
नित नए आयाम।।
सामाजिक माध्यम समाज राष्ट्र
अंतरराष्ट्र हित हितार्थ दुरपयोग
भी होते जब फैलता झूठ भय
भ्रम का बाज़ार।।
सामाजिक माध्यम प्रयोग
धोखा छद्म छल प्रपंच का भी
बन गया आडंबर जाल।।
सोसल मीडिया का सिर्फ
सत्य सार्थक करना है सदुपयोग
दुरपयोग के दंश का साहस शक्ति
से करना है प्रतिकार।।
डरने कि क़्या बात
पुकारता कोई दिल की आवाज है दोस्ती दुश्मनी दोनों ही जज्बात।!
डरने की क्या बात, मौत तो सच्चाई एक दिन जरूर गले लगाएगी।
मौत की आहट लम्हा लम्हा डरने की क्या बात।!
कली फूल जिंदगी दुनियां के जर्रे में मिलने के लिये ही फिर अंजाम से अंजान रातभर आँसू बहाने की क्या बात।
बागवान ही बागवां बसाता उजाड़ता यकीन यही जिंदगी।
विखरने की क्या बात, बागवान जालिम नहीं होते।
खुदा की रहमत के फरिश्ते जहां में अपने जज्बे जज्बात बोते
भयानक जालिम की क्या बात,!!
पीताम्बर का अंजाम क्या
पीताम्बर तो जहां में खुदा की इनायत का इनाम।
दरिंदो से डरने की क्या बात।!
रचनाकार
रचना निर्माण सिर्फ ईश्वर बस की बात।
मानव यदि रचना करती आत्मा ईश्वर अंश साक्षात विराजमान।!
कविता मानस पटल पर उपजा विचार भाव भावना प्रवाह।
सम्यक समय की धारा यथार्थ, कविता साहित्य समाज का दर्पण।!
कविता साहित्य समाज का दर्पण, अतीत इतिहास अवनि पर
वर्तमान की प्रेरक प्रेरणा का साक्षात, कवि की कल्पना उड़ान।!
व्यंग हास्य परिहास वीरता भक्ति रौद्र रुद्र बिभत्स करुणा प्रेम रस श्रृंगार।
कवि कविता की मौलिकता भौतिकता आध्यात्मिकता जन्म जीवन संस्कृति संस्कार।!
कविता को कविता रहने दो, दूषित ना हो कवि का रचना संसार।!
कवि राष्ट्र समाज का प्रहरी प्रहर प्रहर राजनीतिक व्यवहार।!
तुलसी की मानस दोहा छंद चौपाई राम मर्यादा का साक्षात भाव।
आचरण संस्कृति का युग संवाद, सुर सागर की गहराई कृष्ण वात्सल्य का गान।!
आज भी कान्हा घर घर हर नवजात का अभिमान।
पृथ्वी राज रासो चंद्र वरदायी राजा कवि की मित्रता का धन्य धरोहर प्रमाण।!
दिनकर, निराला, पंथ, हरिऔध महादेवी रघुपति सहाय हरिवंश बच्चन राय।
जाने कितनी अभिव्यक्ति भाव का भारत हिंदी साहित्य महान।!
कविता को कविता रहने दो, उठे ना कोई विवाद।
कवि तो देश काल परिस्थितियों का वर्त्तमान प्रबाह।!
कवि निश्छल निर्विकार निर्विवाद निर्झर निर्मल गंगा जमुना सागर में।
गागर गागर में सागर की भाव भवना यथार्थ।!
कबीर, रहीम, बिहारी, रसखान मीरा निराकार साकार ब्रह्म भाष्य।
भाषा साहित्य गौरव गान, कविता को कविता रहने दो।
दूषित ना हो कवि की कल्पना रवि कवि का संगम समन्यवय साथ।!
हसीं लहरे
समंदर की हंसी लहरें जिंदगी की हिलोरे।
कभी खुशियों का तोहफा तूफान विजय का वज्म लाती।!
समंदर के रखवाले जांबाज वतन के लाडले प्यारे।
छहु ओर जोखिम साये चीरते लड़ते नहीं थकते वतन के नौजवान प्यारे।
समंदर की सीने की गहराई में उतरते रहते।
समंदर राज हमराज परछाई दुश्मन दिखाए आंख भी बनते काल।
समंदर के सिपाही जल जीवन की सरहद पर।
हिंद की शान स्वाभिमान पर मिटते हिंद शेरों की गर्जना।
तराने जिंदगी के
जिंदगी के तरानों में ना कोई उलझन होगी।
इबादत मोहब्बत खुदा की रहमत होगी।!
इधर जिंदगी का तराना उधर खुदाई मोहब्बत होगी।!
रहमत होगी खुदा के किसी रहम की नहीं कोई जरूरत होगी देखने वालों के नजर का नूर।
इधर नगमा सनम छेड़ेंगे उधर जमाने में हलचल होगी।!
हुश्न से घायल नहीं इश्क का हुश्न होगी।
मिलन को ना रोक पाएगा जमाना।
इधर हुश्न से हट जाएगा नकाब दीदार जन्नते हूर होगी।!
कलम की बंदिशें नहीं गजल दिल की होगी।
अफसाने दुनिया मशहूर होंगे।
सनम दामन के दरमियान महफिलों में शमा रौशन इधर मैं और तू उधर दुनिया मगरूर होगी!।
ना वो मेरे पीछे ना मैं उनके आगे
लम्हा लम्हा कदम कदम हमदम उनकी नजरों ने कह दिया सब कुछ।
मेरी नजरों ने जाना देखा दुनिया ने बन गया अफसाना, सजने और संवरने दोऔर कुछ निखरने दो मैं सिर्फ देखता रहूं।!
फितरत नहीं शोहरत के साथ पैदा शोहरत का तूफान बढ़ने दो।i
तेरा दर लगे प्यारा
निराश हो जाता जीवन में चहुँ ओर आंधेरों में खो जाता।
कुछ भी नहीं भाता कुछ भी नहीं प्रिय प्यारा!
तेरा दर मुझे लगे प्यारा।!
तेरे दर पे शीश झुकता जान लेती स्वयं ही मेरे जीवन के दुख दर्द हर लेती दुःख पीड़ा मिटा देती जीवन का तमसो माँ ज्योतिर्मय जीवन हो जाता!!
तेरा दर मुझे लगे प्यारा!!
आशाओं का आकाश आस्था वास्तविकता विश्वाश की विराटता।
तेरी ममता का आँचल का दुलारा
तेरा दर मुझे लगे प्यारा।!!
करुणा की सागर क्षामां की छितिज!
जाने अनजाने में अपराध भी कुछ हो जाता।
अबोध बालक को नई बोध चेतना का तेरा प्रसाद का न्यारा।
तेरा दर मुझे लगे प्यारा।!
तेरा दर युग सृष्टि दृष्टि मर्म मर्यादा का द्वार।
अन्यायी अत्याचार का संघार।
दीन दुखियों की पुकार शब्द स्वर आवाज शेर पर सवार।
युग निर्माता, तेरा दर मुझे लगे प्यारा।
तेरे रूप हज़ार नौ रूप खास
पहाड़ावाली जोता वाली चंड मुंड संघारी।
रक्तबीज नासिनी महिसासुर मर्दनी पाप नासिनी मोक्ष दायनी।
महिमा तेरी अपरम्पार।!
शराब कहते है
हलक को जलाती, उतरती हलक में शराब कहते हैं।
लाख काँटों की खुशबू गुलाब कहते हैं।!!
छुपा हो चाँद जिसके दामन में हिजाब कहते हैं।!
ठंडी हवा के झोंके उड़ती जुल्फों में छुपा चाँद सा चेहरा।
बिखरी जुल्फों में चाँद का दीदार कहते हैं।!
सुर्ख गालों की गुलाबी, लवों की लाली।
बहकती अदाओं को साकी शबाब कहते हैं।!
लगा दे आग पानी में सर्द की बर्फ पिघला दे।
जवानी की रवानी जवानी कहते हैं।!
जमीं पे पाँव रखते ही जमीं के जज्बे में हरकत।
जमीं की नाज मस्ती की हस्ती को मस्तानी ही कहते हैं।!
सांसों की गर्मी से बहक जाए जग सारा।
जहाँ का गुलशन गुलजार कहते हैं।!
धड़कते दिल की धड़कन से साज की नाज मीत का गीत संगीत कहते हैं।!
सांसों की गर्मी से निकलती चिंगारी, ज्वाला।
हद, हसरत की दीवानी उसे कहते हैं।!
मिटा दे अपनी हस्ती को या मिट जाए आशिकी मेंआशिक नाम कहते हैं।!
नशे में चूर इश्क के जाम जज्बे में हुस्न का इश्क में दीदार कहते हैं।!
नादाँ दिल की शरारत में कमसिन बहक जाए।
कली नाजुक का खिलना चमन बहार कहते हैं।!
सावन के फुहारों में, वासंती बयारों में बलखाती बाला बंद बोतल की शराब पैमाने का इंतजार कहते हैं।!
इश्क के अश्क, अक्स एक दूजे के दिल नजरों में उतर जाए।
इश्क की इबादत इश्क इजहार कहते हैं।!
आंसू ना बहने दो
भावों मूल्य के आंसू यू ही ना
बहने दो।
आशा उद्देश्य पथ पथिक
अतीत के कदमो को ना
मिटने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
तमस से उजियार जीवन
पल प्रतिपल विश्वास
इच्छा और परीक्षा की
कसौटी व्यर्थ आंसू ना गिरने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
दुःख दर्द भावों के उत्सर्ग
हृदय मन भावों में ही
रहने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
परतंत्र नही स्वतंत्र नही
कायर कमजोर नही
हृदय में उजियार का
दीपक जलाने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
हृदय भाव मे जलते दीपक
इच्छा आधार प्रकाश
इच्छाओं कि साहस शक्ति
सूरज चाँद निखरने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
समय काल तो चाल है
समय स्वय की गति चालों के
स्वर शब्द की गूंज प्रेरणा
प्रसंग परिणाम पुरुद्धार पुरुषार्थ
संग साथ ही रहने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
यदि अंतर्मन से आये आंसू
तूफान जीवन की परम
परीक्षा काल के धन दौलत
आंसू का अवमूल्यन ना होने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
भय भाव को मिटा लुटा
देते व्यक्ति व्यक्तित्व आंसू
स्वयं के युग मे युग का
परिहास ना बनने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
माँ बाप भगवान का आशीर्वाद
जीवन के झंझावत स्वय के आँसू
पुरस्कार सम्यक रहने दो।।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
विश्व पर्यावरण दिवस
पर्यावरण प्रदूषण प्राणी के
शत्रु ब्रह्मांड काल समय के
जाल जंजाल।।
नदियां झरने ताल तलइया
सुख गए धरती बंजर हो रही
वीरान।।
जल श्रोत गए पातळ
जल ही जीवन ,जीवन दर्शन
बन गया परिहास।।
होगा युद्ध जल के लिए
बिन जल घुट घुट कर
निकलेगा प्राण।।
बचा हुआ है जो जल
प्राणी के दूषण से दूषित
जल जीवन निष्प्राण ।।
ऋतुओं गति बदली मौसम की
भृगुटी तन गयी प्राणि
एक दूजे पर करता प्रहार।।
शरद शिशिर हेमंत वर्षा वसंत
गति अनिश्चित जब इच्छा
आ जाए काल कहर बन
करे संघार ।।
मित्र प्रकृति के प्राणि
धन्य धरोहर विलुप्त प्राय
दादा दादी कि कथा
पात्र पर्याय।।
वन उपवन ही जीव +वन
सिंद्धान्त बृक्षों का नित्य
कटान बाग बगाईचे
विहीन पृथ्वी व्यथित
सुन सान ।।
विषयुक्त पवन है श्वांसों में
विष है संसय द्विविधा में
विलख रहा है प्राणी प्राण।।
ध्वनि प्रदुषण वायु प्रदूषण
प्रदूषण जैसे खर दूषण
दानव का प्राणि प्राण आघात।।
पर्यावरण प्रदुषण बन गया
बिभीषन नित्य निगल रहा
शैने शैने प्राणी ज्ञान विज्ञानं।।
पल प्रहर अवनि डोलती
भय भूकंप का भयावह
साम्राज्य सुनामी तूफ़ान
चक्रवात प्रहार कराह का
युग संसार।।
असंतुलित प्रकृति धरती का
बढ़ रहा तापमान ग्लेशियर
पिघलते सागर तल कि ऊंचाई
बढ़ती अँधेरा होता आकाश।।
अँधा धुंध विकास प्रतिस्पर्धा
प्रतियोगिता कि अंधी होड़ दौड़
अँधा प्राणी जीवन मित्रों का ही
करता विनाश पर्वत हुए मृत चट्टान।।
समय अब भी कर रहा पुकार
शेष अभी बहुत कुछ
सोचो प्राणी प्रकृति का करो
संरक्षण पुनर्निमाण ।।
प्रदूषण के खर दूषण
दानव को ना करने दो
विनाश प्रकृति मर्यादा के
तुम राम ।।
मधुबन के मधुसूदन
कालीदह के नटवर नागर
मुरली कि तान।।
जल सरक्षण बन सरक्षण का
अलख जगाओ शुभारंभ करो
शंकनाद ।।
प्रदूषण दानव से संरक्षित
संवर्धित हो संसार बृक्ष भी है
एक संतान जल किअविरल
निर्मल धरा का प्रवाह।।
ऋतुएँ मौसम संतुलित
हरियाली खुशहाली का
हो ब्रह्माण्ड।।
महिमा वरनी न जाए
हे अंजनी सूत बजरंगबली
महिमा वरनी न जाए।।
पवनपुत्र कहूँ या हनुमान
या रुद्रांश जाने कितने रूप
नाम तुम्हारे सुमिरत काल
समय बीतत जाए।।
बाल काल रवि ग्रास लियो
जग चहुओर भयो अंधियार।।
देव दनुज युग करे विचार
आश्चर्य चकित देखत बाल रूप
बलवान।।
करे याचना कृपा करो दया निधान
कष्ट निवारो रवि का हो युग
उजियार।।
मईया सीता वियोग में
व्यथित नारायण राम अवतार
सागर लांघो सुरसा तारो मच्छोद्री
तारण हार।।
आशीष मातु जानकी लंका जारो
भक्त विभीषण का घर नाही
कूदी पड़े सागर में मझधार।।
मातु जानकी सुधि आराध्य
राम बताए वानर कुल गौरव मान।।
लक्ष्मण मूर्क्षित वाण से
इंद्रजीत पुलकित अधिकाय
वैद्य सुषेण लंका से लायो।।
संजीवनी कि हिमालय से लाए
कालनेमि को तारो जाए।।
जीवन रक्षक संजीवनी लाएं
शेष हुए शेष अवतार।।
अहिरावण अभिमान में
चला देवन प्रभु बलिदान।।
ज्ञात नही हनुमान पुत्र
मकरध्वज ही अहिरावण
कीर्ति पताका द्वार।।
पाताल लोक के सिंघासन
राजा का करने गए उद्धार।।
देवी रूप धरे विध्वंस
कीए यज्ञ अहिरावण हे
हनुमान महिमा अपरंपार।।
नारी हो
भक्ति की शक्ति तुम हो
आस्था अस्तित्व की हस्ती हो
मम्मता की महिमा तुम
क्रोध रौद्र कि दुर्गा तुम
तुम नारी हो तुम नारी हो।।
क्षमा दया करुणा सागर
निर्मल और निराली हो
शौर्य सूर्य कि किरणे तुम हो
चंद्र चांद कि शीतल
चांदनी उजियारी
तुम नारी हो तुम नारी हो।।
अंधियारे की काली तुम हो
भय भयंकर दमन दुष्ट की
संघारी तू जग जननी
नारी हो।।
अर्धनारीरिश्वर ईश्वर सत्य
तुम जगत कल्याणी हो
धारा नेह स्नेह संबंधों की
बहना द्विज दुलारी हो
धैर्य धीर अवनी जैसी
पीड़ा प्रेम संचारी तुम
नारी हो।।
शौम्य शांति प्रवाह
युद्ध द्वंद हुंकारी हो
परम प्रतिज्ञा की प्रज्ञा
रण कौशल संसारी हो।।
अहंकार की मादकता
बाला हाला मधुशाला
जीवन जन्म जीवन
सत्कारी हो तुम नारी हो
तुम नारी हो।।
पुरुष पराक्रम की जननी
पुरुषोत्तम अवतारी हो
आदि शक्ति ब्रह्म ब्रह्मांड की
प्रवाहित नित्य निरंतर
सृष्टि दृष्टि आधी शक्ति
तुम नारी हो तुम नारी हो।।
नर नारायण की
नीति नियत नियंता
भाग्य भविष्य निर्माणी हो।।
काल समय तुम सारी हो
पृथ्वी जैसा कोख तुम्हारा
गरल सुधा स्वधा सत्य
आदि अनंत तुम नारी हो
तुम नारी हो।।
नारी नारायणी
देव शक्ति नारी, सृष्टि युग की गौरव।
प्रकृति प्रवृत्ति की अनिवार्यता, परम शक्ति की सत्ता नारी शक्ति आधार।
ब्रह्म विष्णु शंकर शिवा वैष्णवी सरस्वती।
परम शक्ति सत्ता ईश्वर की भागीदार।
सृष्टि पूर्ण तभी होती, जब नारी लेती प्रथम अवतार।
नर नारायण की शक्ति में नारी समान हिस्सेदार।
देश काल परिस्थिति चाहे जो भी हो, नारी शक्ति से अवनि आकाश निर्माण।
नारी अनिवार्य तथ्य तत्व सृष्टि की दृष्टि दिशा संस्कृति संस्कार।
देव नारी से नारी से राष्ट्र समाज अर्धनारीश्वर देव।
परम शक्ति सत्ता का अंगीकार।
नारी स्वरूप है परम शक्ति सत्ता, भरत भारत भारती दर्शन संस्कृति प्रमाण।
वैशाखी
धर्म शांति प्रगति धन धान्य आश विश्वास।
आजादी अस्तित्व आस्था लाती और जगाती वैशाखी।
गुरुओं की वाणी गुरुवाणी, भरत भारत अगुवानी।
पंथ खालसा स्थापना धर्म मर्म रक्षा संकल्प आराधना है वैशाखी।
धर्मवीर कर्मवीर शूरवीर गुरु गोविंद सिंह ललकार।
सवा लाख से एक लड़ाऊ, तब गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊ का शंखनाद है वैशाखी।
उदय उदित पंथ खालसा, धर्म कर्म रक्षार्थ।
वाहे गुरु का खालसा वाहे गुरु कि फतह हुंकार है वैशाखी।
पावन पर्व पराक्रम वीर धीर धैर्य पहचान।
पंजाब पंजाबियत आन वान शान कि वैशाखी।
घर घर खुशहाली खेती बारी मेहनतकश किसान का श्रम परिश्रम पर्व परिणाम है वैशाखी।
संसय समाप्त अन्न धन से परिपूर्ण अवनी का अभिमान अन्नदाता किसान खास कि है पहचान वैशाखी।
अतीत वर्तमान परंपरा वैभव लाती और बताती वैशाखी।
गुलामी में दम घुटती सांसों कि मुक्ति का शांत अनुग्रह अनुष्ठान जालियांवाला बाग स्मरण है वैशाखी।
गोरों को रास नहीं भारत कि आजादी का स्वर शब्द।
कैसे बैठे रहते शांत देख जलियांवाला बाग कि शांत क्रांति कि वैशाखी।
अंतर्मन कि चिंगारी ज्वाला घायल शेर पंजाब का लाल।
जपत वेदना कराह कहर कि याद दिलाती है वैशाखी।
आंधी तूफान अरमान भारत के भविष्य की चाह राह।
आजादी सत्याग्रह हुंकार कि वैशाखी।
जनरल डायर क्रूर कायर का तांडव मृत्यु का नंगा नाच।
जाने कितने बूढ़े बच्चे माँ बहने निरीह निर्दोष क्रूर काल का ग्रास वहसी दानवी चरित्र बताती है वैशाखी।
वैशाखी का एक अहम पड़ाव अध्याय भारत की आजादी युद्ध शांति का आग्रह बन गयी कायर कि युद्ध भूमि पावन वैशाखी।
रक्त संचार बढ़ाती जिंदा का अभिमान बताती है वैशाखी।
मेरा संघर्ष
मेरा संघर्ष करने दो बस मुझे, मेरा संघर्ष करने दो।
युग दृष्टि दिशा बदलने कि खातिर, जीवन पथ पर बढ़ने दो।
संदेह भय भ्रम अंधकार, उबड़-खाबड़ असमंजस बहुत है।
कठिन बहुत है जीवन पथ, आशा और निराशा का कुरुक्षेत्र रण भूमि है जीवन पथ।
कलयुग है कहते हैं, कर्म युग है एक दूजे से आगे बढ़ने कि दौड़ दौर होड़ में।
रिश्ते नाते संबंधों का बलिदान त्याग है पथ जीवन, मनव एक दूजे का प्रतियोगी प्रतिस्पर्धी।
चाहे रिश्ता कोई हो, दुरूह डरावनी दक्षता योग्यता उत्कर्ष परीक्षा पथ जीवन।
भाई बहन मित्र पड़ोसी एक दूजे से आगे बढ़ने कि दौड़ दौर है आपा धापी।
स्वस्थ्य स्वच्छ नहीं प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता नहीं कलयुग पथ जीवन।
एक दूजे से आगे निकल जाने कि होड़ दौड़ पता नहीं खींचेगा डांग कब कौन?
घायल हो अवनी पर पश्चाताप करू, आंसू बहाऊ अब मेरा संघर्ष करूंगा।
कलयुग युग कि धारा संग बहुगा, देखें मेरा पथ रोकेगा कौन?
जीवन के कुरुक्षेत्र में सभी धुरंधर रथी महारथी ज्ञानी ध्यानी शस्त्र शास्त्र परिपक्व मौन।
एक दूजे के शव सीढ़ी से आगे बढ़ने का काल समय दौर जीवन पथ।
शाम दाम दंड भेद अस्त्र शस्त्र कभी धारदार कभी बेमतलब बेकार।
जीवन के कुरुक्षेत्र में अब मेरा संघर्ष जीवन रण का मतलब बदलेगा।
बस मुझे मेरा संघर्ष करने दो, बदल सकूं युग के रीती रिवाज मतलब मस्ती हस्ती हद तोड़ दूं।
मेरा संघर्ष चिंगारी ज्वाला पल प्रहर नित्य विकृत विरासत परम्परा का अंत कर दूं।
मुझे मेरे संघर्ष के पथ जीवन रहने दो, संघर्ष शक्ति है संघर्ष सत्य है।
संघर्ष शस्त्र है संघर्ष शास्त्र है, संघर्ष से तपता मानव संघर्ष से मानव सुगंध।
खास अंदाज
बात कुछ खास हर अंदाज।
दिल दुनिया खास अंदाज।
तूफान समंदर कातिल खास अंदाज।
कली नाजुक कशिश चाहत मुस्कान खास अंदाज।
सुबह सूरज कि लाली सुर्ख गाल लव गुलाबी लाजवाब खास अंदाज।
ढलता सूरज शराब चाहत जज्बा तूफान ख्वाब खास अंदाज।
लम्हा लम्हा ढलती रात चाँद चाँदनी दिलों धड़कन आह खास अंदाज।
क्या बला है खूबसूरत अदा नागिन मोहब्बत खुमार खास अंदाज।
लचकती कमर हिरनी चाल गज गामिनी खास अंदाज।
सर्द कि गर्मी बर्फ कि चादर पानी झील दरिया समंदर कि रवानी खास अंदाज।
शबनम में नहाई चाँदनी जैसे मुस्कुराई खास अंदाज।
जलता मौसम गर्मी शीतल छांव तेरा पहलू आँचल खास अंदाज।
बेचैन दिल सुकून मकसद कि वासंती वाला वासंती वयार।
भीनी खुशबू मस्त मधुमास खास अंदाज।
रिम झिम बारिश भीगा बदन सांसों कि गर्मी जज्बात ज्वाला निराला खास अंदाज।
कान्हा
हे कान्हा केशव माधव मधुसूदन, युग में जाने कितने नाम तुम्हारे।!
आया हूँ जीवन में जबसे तुम्ही बसे हर गम खुशी पल प्रहर में संग साथ हमारे।!
पुकारे जब भी कोई हृदय से, आए दौड़े सांझ सवेरे!
समय का कोई नहीं है बंधन,
प्रेम भाव ही है तेरा एक बंधन
बांध सके जो उसको तारे!!
हे कान्हा माधव मधुसूदन
युग मे जाने कितने नाम तुम्हारे!!
साँसो धड़कन से नित निरंतर, शब्द स्वरों के साथ हमारे।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे,
हे कान्हा माधव मधुसूदन युग मे जाने कितने नाम तुम्हारे!!
मातु पिता गुरु सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेव।
कुरुक्षेत्र है यह जीवन, नयन दृष्टि है तुम्हारे!
कर्म धर्म का मार्ग बताते, जन्म जीवन रहस्य सुनाते।
तमस मार्ग जीवन में तुम्ही बनते पथ उजियारे।
जब भी नईया उलझे भव सागर भंवर में, तुम्ही एक जो पार लगाते।
हे कान्हा केशव माधव मधुसूदन, युग में जाने कितने नाम तुम्हारे।
अधरम मधुरम वचन मधुरम, नयनयम मधुरम हसितं मधुरम।
मधुराधिपते रखिलं मधुरम,
मधुर मनोहर भाव छवि तुम्हारे।!
शिव महिमा और सावन
शिव महिमा का सावन
शिव तत्व महत्व का सावन
सावन के दो रूप जैसे
शिव स्वरूप एक सावन!!
मनभावन हरियाली
खुशहाली झूला
मेंहदी सखी पिया मिलन
हसीं ठिठोली जीवन आनंद
मंगल शिव समरस दूजा न
कोई सावन!!
विकट विकराल
रौद्र रूप जैसे
खुला शिव त्रिनेत्र
समय सावन!!.
कही हसीं ख़ुशी
मुस्कान पिया बदरा
बरसात सुहाना सावन!!
सुंदर सुगंध मंद
पवन शीतल चाँद
चांदनी अँधियार
उजियार जैसे जिंदगी कि
फुहार बाहर सावन!!
भाई बहन रिश्ता
पावन रक्षा बंधन पर्व
हर्ष हर्षित देश समाज
सावन!!
सोमवार उपवास
शिव शंकर भोले
अभिषेक!!
शिवालय मे जन जन
बोले स्वर आवज एक
गुजे अविनी आकाश!!
हर हर महादेव
जय जय शिव शंकर
बोल बम बोल बम
जै जै श्री महाकाल
ॐ नमः शिवाय!!
सुहाना सावन
सावन कही सुहाना
सावन कही रोअना
गोरी छोरी प्रेम व्यवहार
पिया सुहागन प्रियतम
प्रेयशी भाव भवना!!
तूफान उफान ज्वार गुबार
सावन बाढ़ विभीषिका
विखरल घर दुआर उजड़ल
चमन खेती बारी चौआ
चूरूँग गए बह बिलाय!!
गांव के गांव जैसे
वीरान श्मशान हरियाली
खुशहाली के नहीं नाम
निशान!!
चाहूँ ओर जल ही जल
जैसे द्वीप टापू उजड़ल
गांव महाप्रलय काल के
कोप जैसे दंड महापाप!!
सुख दुःख ख़ुशी गम
जन मन के सावन
हरियाली खुशलाली
बाहरफुहार!!
बौछार सावन वर्वादी
दर्द दंश दंड प्रासच्चचित
कर्म धर्म प्रधान सावन!!
शिव उद्भव विनाश विकास
प्रकाश देव दानव द्वय
आराध्य सावन कही ख़ुशी
कही गम निहितार्थ सावन!!
शिव सावन जन्म जीवन
एक समान दुःख सुख
अनुभूति अनुभव के
सत्यार्थ!!
आत्म बोध चिंतन विचार
जीवन व्यवहार आचरण
आत्ममंथन शिव बोध जन्म
जीवन महिमा महत्व सावन!!
सावन आत्म मंथन माह
शिव सावन जन्म जीवन
आत्मा परमात्मा ईश्वर
बोध समान सावन!!
आत्म बोध शोध सत्य
जन्म जीवन काल चक्र
पथ पड़ाव सावन!!
आत्म शुद्धि मन बुद्धि
प्रवृति चंचल चित्त नियंत्रण
शिवसावन!!
युग जीवन साध्य साधना
आराधना यज्ञ अनुष्ठान ध्येय
ध्यान अंतर्मन सावन!!
शिव सत्य जीवन तत्व
कर्म धर्म मर्म आत्म चिंतन
मंथन महत्व का सार सत्यार्थ.
सावन!!
बारह मास का वर्ष
छः ऋतुए मौसम चार
शिव आराधन आत्म तत्व
सत्य बोथ आत्म मंथन का
सावन मास!!
सात्विक जीवन आहार
अर्घ आराधना नियति नेक
शिव मंगल गान!!
अभिषेक आराधना शांत
चित्त सांयमित संतुलित
विशुद्ध सात्विक जीवन
व्यवहार!!
सावन आत्म मंथन
आत्मा ईश्वर सत्य सद
चरित्र निर्माण निर्विवाद
निर्विकार सावन!!
मैईया आओ घर द्वार
माईया आओ घर द्वारे, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों का है इंतजार।!
घर घर तेरा मंडप सजा है, माईया के स्वागत का दिन रात।!
माईया तेरे रूपों का संसार, माईया तू ही अवनि की अवतार।!
पर्वत बाला बुद्धि, वृद्धि का स्वर संसार, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
माईया तू ही ज्ञान, ध्यान, विज्ञान, ब्रह्म आचरण ब्रह्मचारिणी
विधि विधान बुद्धि पराक्रम प्रवाह माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
माईया तू ही चंद्र हास, शक्ति बल बुद्धि का विकास माईया तू ही दानवता का विनाश, चंद्र माथे घंटा खड़क त्रिशूल हाथ, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
माईया शुभ मंगल का है गान, तेरा आगमन झूमे गाए संसार मिट गए सारे अंधकार, कूष्मांडा का गुणगान, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
माईया चहुं ओर खुशहाली, माईया कर्म, धर्म, मर्म, मान
दुष्टों का विनाश, स्कंध माता का आगमन जग कृतार्थ, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
माईया जग सारा तेरा मंदिर, युग का प्राणी बालक नादान!
माईया बल, बुद्धि, वैभव का वरदान, दुष्ट, दुष्कर्म, दुस्साहस का नाश, मां कात्यानी जग माँ है तू प्राण, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
माईया तू ही सत्य संध, सत्य सत्यार्थ, माईया तेरा जग जाहिर।
न्याय अन्याय दानव का है तू काल, भक्तों की रक्षा राक्षस संघार, तू ही काली काल माईया, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
युग गरिमा गौरव गौरी, भक्ति, शक्ति का विश्वास वरदान।
पूजा, वंदन, अभिनंदन महा गौरी धाम पधार, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
सकल मनोकामना दायनी, रिद्ध सिद्धि दायनी, भय भव भंजक निर्भय कारी।
सिद्धिदात्री माँ नौ रूप नवधा भक्ति नवग्रह सहित विराजै, माईया पधारो घर द्वारे, भक्तों को है इंतजार।!
पाप विनसिनी
कष्ट निवारिणी पाप नाशिनी माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
दुर्लभ, सुगम शुभ मंगल करती, अंधकार की ज्योति माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
आगम, निगम पुराण तेरी महिमा गावैं, जग कल्याणी माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
खड्ग, त्रिशूल, घंटा, खप्पर, पदम् चक्र वज्र धारिणी, रौद्र रूप की काली माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
संदेह हरणी संकल्प की जननी, भक्ति की शक्ति निर्विकार की हस्ती माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
तेरे द्वारे जो भी धावे, मनवांच्छित फल पावे, भोग भाग्य की दाता माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
पापी अधम का बढ़ता अत्याचार, तब तब काल दंड का अवतार, युग धरती हरति संताप माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
शोक, रोग से निर्भय करती, विघ्न विनाशानी विध्यवासिनी माँ, जय जय जय दुर्गे सकल मनोरथ दायनी माँ।!
जग जननी माँ
जग जननी माँ, दुःख हरणी, मंगल करनी,तारणहारी,
सकल जगत संसार माँ।!
दुष्ट विनाशक, भय भव भंजक, पल प्रहर अविरल युग प्रवाह माँ
जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!!
पाप विनाशनी, मोक्ष दायनी, जगत कल्याणी, युग गति व्यवहार माँ जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!!
अपराध क्षमा करती, चाहे जो भी गलती, करती तेरी ही संतान युग संसार माँ।!!
माँ तेरी महिमा ब्रह्मा, विष्णु, शंकर गाएं, तेरी महिमा अपरंपार माँ जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!!
देवों की देवी, स्वर्ग नर्क उद्धार माँ, धन वैभव सुख संपत्ति दाता।
तुझे नित्य दिन जो धावे, तेरा ही ध्यान लगाएं, सकल मनोरथ पावे भव सागर से तू ही करती बेड़ा पार माँ।!!
स्वांस प्राण आधार माँ, जग जननी तू सकल जगत आधार माँ।!!
भक्तों की शक्ति अवनि आकाश ब्रह्मांड माँ, जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!
पार्वती राधा रुक्मिणी अर्धनारीश्वर ईश्वर की श्रृंगार माँ, जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!
माता ममता तेरा आँचल हम बालक नादान माँ, जग जननी तू सकल जगत संसार माँ।!
बोलो जय माता कि
भक्तों की सरकार
माँ के दरबार, बोलो
जय माता की।!!
ऊंच-नीच का भेद
नहीं, सब माँ की
संतान,बोलो जय माता की।!
माँ को भक्तों से दरकार
नहीं,और कोई सरोकार
बोलो जय माता की।!
नहीं चाहिए रुपया पैसा,
कीमती उपहार, केवल
भक्तों की जयकार, बोलो
जय माता की।!
माँ को चाहिए भाव
भक्त सत्कार, बोलो
जय माता की।!
माँ भरती सबकी झोली,
कोई जाता नहीं खाली,
माँ का सारा जग संतान
बोलो जय माता की!!
दुखियों का सहारा
माँ के दरबार, ना
कोई हारा, माँ ही
जीवन आधार, बोलो
जय माता की।!
माँ की महिमा जो
निशदिन गावे, माँ बे
ड़ा पार लगावे, माँ
कर्म धर्म संसार,
बोलो जय माता की।!
माँ के हैं रूप अनेक,
वात्सल्य व्यवहार,
बोलो जय माता की।!
अपराध क्षमा करती,
अवसर देती बार-बार,
बोलो जय माता की।!
दुष्ट दानव कर
जाए जब हद पार,
माँ रूप विकट
काल विकराल,
बोलो जय माता की।!
माँ अष्टभुजी, माँ
हंसवाहीनी, माँ शेर
पर सवार, बोलो
जय माता की।!
धर्म निरपेक्षता ढकोसला
धर्म, समाज, राष्ट्र
धरोहर माँ, जन्म,
भूमि की पहचान।!
धर्म, धन्य मानवता
अभिमान धर्म, संस्कृति,
संस्कार नहीं सिखाता
प्राणी प्राण में भेद भाव।!
हिंसा, घृणा, विद्वेष
धर्म नहीं धर्म मार्ग है
प्रेम, शांति का संदेश
धर्म नहीं करता मानव
मानव में भेद!!
अन्याय, अत्याचार का
प्रतिकार सद कर्मों का
सत्य, सत्यार्थ धर्म,
करुणा, क्षमा मानवता की
मर्यादा मूल्य।!
लोकतंत्र मत बहुमत का
मेल लोक तंत्र में जाति
धर्म के वर्ग बेमेल!!
लोकतंत्र सत्ता,
शासन का मार्ग कभी
तोड़ कर, कभी जोड़
कर मत बहुमत नित्य
निरंतर सत्ता शक्ति के
संतुलन अनेक।!
लोक तंत्र जनता का,
जनता द्वारा, जनता के
लिये!
अक्सर भोली-भाली
जनता अपने सपने को
खुद भावों प्रवाह में दाँव
लगाती,!!
कभी हारती,
कभी जीतती,
कभी हराती,
कभी खुद हार जाती।!
धर्म धुरी है मानवता
जिसके इर्द-गिर्द
मानव घूमता!!
आशा विश्वास में,
आस्था अस्तित्व में,
विराटता वैभव में,
विचलित हो जाता
जब मानव धर्म मार्ग
उसे तब बतलाता।!
लोकतंत्र भी मानवता
मूल्यों का रखवाला,
मत बहुमत के चक्कर में
बांटता, बटाता और बँट
जाता लोकतंत्र सिद्धांत
मत बहुमत पर आधारित।!
धर्म, अक्षुण, अक्षय
युग समाज का निर्माणी
निर्णयकारी।!
लोक तंत्र में बहुमत
निर्णय परिवर्तन का
पथ प्रवाह धर्म में कर्म,
ज्ञान के वेद, पुराण,
कुरान जीवन मूल्य
आधार।!
धर्म की परिभाषा की
उल्टी व्याख्या घृणा
क्रूर, क्रूरतम, उग्र,
उग्रता, उग्रवाद!!
लोक तंत्र में छद्म
खद्दर धारी जनता के
प्रतिनिधि महात्मा की
आत्मा विध्वंसक,
विघटन कारी मानवता
घृणा के संचारी।
धर्म निरपेक्ष नहीं
मानव मन मस्तिष्क की
आस्था मूल्यों की परम
शक्ति भगवान, खुदा,
अल्लाह, बुद्ध, जीजस,
नानक भक्ति की शक्ति।!
लोकतंत्र सिद्धांत सापेक्ष
मति, सहमति की संयुक्त
ताकत राज्य प्रशासन!!
नीति, नियति राज्य
नीति राजनीति निरपेक्ष
नहीं, जब भगवान, खुदा,
जीजस, अल्लाह भक्ति के सापेक्ष।!
लोकतंत्र निरपेक्ष कैसे
लोक तंत्र बहुमत का
प्रति प्रतिनिधि का सापेक्ष।!
निरपेक्ष नहीं पैदा होता
मानव पैदा होता धर्म,
रिश्तों, नातों के समाज
सापेक्ष में कैसे हो
सकता निरपेक्ष।!
धर्मनिरपेक्षता का
राग ढोंग, छद्म,छलावा
सबसे ज्यादा धर्मांध
धर्म निरपेक्षता की
राग अलापता।!
धर्म निरपेक्षता खोखले
मर्यादाओं का अँधेरा
अंधकार दिखता।!
जब इंसान की पहचान
माँ, बाप, मातृभूमि,
समाज, धर्म, राष्ट्र!!
मानव, मानवता
रिश्तों में रचता बसता
समरसता समता
मूलक राष्ट्र बुनियाद।!
शासन प्रशासन
लोकतंत्र हो राजतंत्र हो
जो भी हो कि
सांसे धड़कन प्राण।!
हर राष्ट्र की मौलिक
चाहत एक सूत्र में
बंधा रहे राष्ट्र समाज,
धर्म का भी चिंतन
सिद्धांत।!
दूरदृष्टि, मजबूत
इरादे, नेक नियति
निष्ठा, ईमानदारी,
आस्था और विश्वास,
धर्म और लोकतंत्र
आत्मा आवाज।!
धर्मनिरपेक्षता
फरेब, धोखा, मौका,
मतलब परस्ती
समाज देश बुनियादों
का दीमक जाल।!
देश समाज के
खस्ता हाल का
जज्बा जज्बात
जिम्मेदार।!
लफ्जो की हकीकत
लफ्जो की हकीकत लब्जों का दिल से रिश्ता लफ्ज दिल गहराई जज्बात है।!
लफ्ज दिल परछाई चेहरा लब्जों से बनते विगड़ते जिंदगी का राज है।!
ये लफ्ज आईने हैं इंसानी हद हस्ती लफ्ज दिल की सच्चाई बया हाल है।!
लफ्ज इंसानी हद हकीकत दासता वास्ता ये लफ्ज आईने हैं इंसान इंसानियत पहचान है।!
लफ्ज दिल जज्बे का तूफान दोस्त दुश्मन की शान आन ये लफ्ज आईने हैं आबरू बेआबरू बताते बनाते हैं।!
लफ्ज विखरे दिल को भी जोड़ मोहब्बत के दामन समेटता ये लफ्ज आईने हैं दिल आईने का सेहरे हैं।!
लफ्जो से सजते जंग के मैदान दोस्त दुश्मन, दुश्मन दोस्त अंदाज मोहब्बत महफिलों की रौशनी है।!
ये लफ्ज आईने हैं जिंदगी की चाहत की राह दिखाते इश्क इबादत की ईमान हैं।!
असली नकली का फर्क लफ्जो की दुनिया का यकीन सच ये लफ्ज आईने हैं आवाज दिल में उतरते हैं।!
लफ्जो की दुनिया ही दिन ईमान कुदरत की शान ये लफ्ज आईने हैं दिख जाता जिसमें दुनिया जहां है।!
किताब
किताब काल तिथि वर्तमान पुस्तक पूर्ण वास्तविक युग दर्शन होती,ना किताब युग होता स्वयं से अंजान।!
संस्कृति संस्कार सभ्यता अतीत वर्तमान, ना होता धर्म कर्म का कोई युग यथार्थ,किताब वक्त काल का दर्पण पहचान।!
गीता, कुरान, बाइबल, गुरुबानी किताब,हाथ रख कर सच्चाई की कसमें खाता मानव मर मिटता,
किताब ही जीवन मूल्य मर्यादा मान।!
किताब ज्ञान का दीपक किताब अन्वेषक आधार,किताबों से ही निकला ना जाने कितने शोध साक्ष्य का सत्य विज्ञान।!
किताब से युग काल का शुरू अंत जीवन कदमों का दिया चिराग,
किताब पद चाप किताब निश्चय दिशा प्रवाह किताब।!
किताब कर्म की जननी धर्म धैर्य आस्था विश्वास,किताब प्रेरणा प्रेरक किताब युग सत्य मर्म का साक्ष्य।!
किताब सुरक्षित युग काल सुरक्षित वर्तमान अतीत का भाव मूल्य अर्थ,भविष्य का मार्ग अक्षुण अक्षय भविष्य का मार्ग सुरक्षित।!
संविधान किताब जिसकी
शपथ लेता राजा राज्य प्रधान,
संसय भय का निर्णय किताब किताब युग काल समय की परिभाषा हिसाब।!
गांव बचपन खेल
बचपन दुनिया से अनजाना बेगाना मौज मस्ती का तरंग तराना याराना नज़राना।!
माटी की खुशबू माटी चंदन मिट्टी में लोटना मिट्टी के संग मिट्टी का तन चिंता चतुराई से मुक्त बचपन का अपसाना।!
खेल कूद ही जिंदगी रूठना मनाना गांव की गलियों में लुका छिपी खेलना बचपन की दोस्ती शरारत में मिलना बिछड़ना।!
कबड्डी खेल बेमेल का मेल गांव में लोकप्रिय कबड्डी धन दौलत बैगैर भी खेल गांव परम्परा खेल स्वास्थ अनुष्ठान आराधना।
दौड़ना हांफना छोड़ना पकड़ना छुड़ाना सांसों का तोड़ना हड्डी की मजबूती कबड्डी खेलना।
गांव के बड़ई की कलाकारी लकड़ी का बैट कपड़े की गेंद क्रिकेट विलायती खेल देशी
गांव के बचपन का आधुनिक आकर्षक मेल।!
पेड़ों पर चढ़ना इस डाली से उस डाली कूदना उछलना ओला पाती बंदर की भांति गंवई खेल दोस्ती का मेल।!
मित्र मण्डली में आपसी सहयोग का योग एक दूजे का मनोयोग मैदान भाग दौड़ खेल प्रेम बचपन का योगक्षेम।!
सम्मिलित फुटबाल टीम भावना भाव खेल भावना बचपन की संस्कृति संस्कार संयोग।!
गांव की माटी की खुशबू पीपल की छांव प्राथमिक विद्यालय का मैदान।!
बाग बगीचे खेत खलिहान खेल जीवन स्वास्थ विकास के आयाम।!
कबड्डी, फुटबाल, ओला पाती, इंग्लिश क्रिकेट गांव बचपन की खासियत खेल।!
रोटी
रोटी क्या-क्या नाच नचाती,
रोटी क्या-क्या हालात बनाती,
रोटी के लिए मरता जीता इंसान, रोटी की खातिर बनते विगड़ते हालात।!
रोटी खून पसीने की मोहताज, रोटी पल-पल की सांसे धड़कन प्राण, रोटी रहमत करम आशीर्वाद।!
रोटी के लिए क्या-क्या बनता इंसान, जुआरी भिखारी मदारी का धर्म ईमान,रोटी मजबूर का हक, रोटी मजलूम की जिंदगी बुनियाद।!
रोटी है तो जिंदा रहता ईमान, रोटी नहीं तो वहशी दरिंदा चोर डाकू बन जाता है इंसान,रोटी की खातिर किसी का लहू भी पी जाता इंसान।!
रोटी राजनीति, रोटी धन दौलत की ढाल,भूख इंसान की एक रोटी की मोहताज, रोटी जाने क्या-क्या कर जाती, रोटी ही तकदीर की शान।!
जाने घाट-घाट ले जाती, मातृभूमि जन्मभूमि छुड़वाती, दर-दर भटकाती,शायद समझ नहीं पाता एक रोटी की कीमत इंसान।!
विरह
छोड़ गए जबसे जीवन विरान हुआ, विरह वेदना में गुलशन उजाड़ हुआ।
पल पल खुशबू का मधुबन मौसम कुछ उदास हुआ, रिम झिम सावन की फुहार।
तेरा शर्माना सावन की घटाओं जैसे जुल्फों में चाँद से चेहरे का छुप जाना, बस यादों का ही हुआ।
खुशियां कब आईं चली गईं जिंदगी खुशियों यादों का इंतजार हुआ।
शायद फिर दुनिया में मेरे आ जाए बहार, उम्मीदों का ही साथ हुआ।
राह निहारू संदेशा भेजूं दिल की गहराई से देता हूं आवाज, जीवन केवल विश्वास हुआ।
सांसों धड़कन का राज आ जा बची हुई कुछ आस, सांसों धड़कन भाव बिहीन मात्र
आवाज हुआ।
बीराने सुने मन में अब बसता नहीं भगवान, तेरे जाने से भाग्य समय काल भगवान भी रूठा, जीवन निष्प्राण हुआ।
सुख वैभव सब है दुनिया में मौसम भी मधुमास भी, तेरे ही न होने से मौसम गम साथ हुआ।
बारिश का पानी कागज की कस्ती बचपन अंजाने का नाम हुआ।
प्यार जाने कब एहसास हुआ जीवन का गुजरा व्यवहार हुआ।
तुमने भी जीवन के ख्वाब सजाए जाने कितनी कसमें खाईं, कसम तोड़ दिए सारे, भूल गए प्यार के रस्म सारे, प्यार मेरा जमाने का परिहास हुआ।
दिल दुनिया दामन किस्मत खुशियां शीतल चाँद चांदनी सावन की सर्द सुहानी हवाएं वसंती बयार बीते सपनों का संसार हुआ।
तेरे ही न होने से मेरी दुनिया में दर्द बहुत, जीवन की हर खुशियां मौसम जैसे बेजान हुआ।
वसंत और रंगोली
बसंत और रंगोली,
शौर्य सूर्य चमकता,
दमकता, धमकता युग
ब्रह्मांड।
घड़ी पल प्रहर दिन, महीने, साल का वर्तमान की चुनौती निर्माता मजबूत आधार।
अपेक्षा, प्रेरणा के भविष्य निर्माण के पथ का युग व्याख्याता।
युग अभिमान आशाओं का जमी आसमान, शाबास कि साहस उत्कृष्ट उत्कर्ष की ऊर्जा।
उल्लास, उत्साह, उमंग की तरंग का जाबज।
विजेता विजय का पुरुषार्थ युवा, समाज, राष्ट्र युग की बुनियाद परिभाषा पहचान।
ब्राह्मण के संतुलन की शक्ति, सृष्टि की निरंतरता के शाश्वत सत्य की अभिव्यक्ति की नारी शक्ति।
रंगों की बहार, रंगों की फुहार, रंगों का व्यवहार रंगोली।
सुरों सात रंगों की रंगोली संगीत, सत रंगी इंद्र धनुष मानव मुस्कान की बोली रंगोली।
तरंग, उमंग, उल्लास, उत्सव, उत्साह, खुशी गम के जज्बे जज्बात के रंगों की मिली जुली जिंदगी रंगोली।
सत्कार, उदगार व्यवहार के भाव भावना शृंगार रंगोली।
आओ मिलकर जीवन के रंग में रंग बनाए मानव मूल्यों की रंगोली।
गोरा, काला हो इंसान, लहू रंग है सबका लाल, प्रेम शांति के रंगों की रंगोली व्यवहार बनाए।
चिराग कि लौ
चाहतों के लौ से शमा जल रही है, खास परवानों के इंतजार कर रही है।
कशिश, यकीन, ख्वाबों की हकीकत के दिए में जल रही है।
फर्क रोशन शमां चिरागों में क्या? चिराग जहां का आफताब, महताब।
रोशन शमा दिल की मोहब्बत की रौशनी जल रही है।
जलता हुआ चिराग हालात हवा तूफानों से लड़ता।
अपनी हद, हस्ती, मस्ती फानूस की हिफाजत का जहां में उजाला।
शमा महफिलों की नाज इश्क की इबादत का नूर नजर चमक।
चिरागों से कभी खुद के आशियाने के जल जाने का डर।
परवानों का आशिकी के रोशन शमा में जल जाना।
शमा रौशन आग, आग का दरिया डूबते जाना है।
खास, खाक के कश्मकश में जल रही है।
जलता चिराग जहां के अंधियारे का सूरज, चांद उम्मीदों का उजाला।
इश्क की इबादत में दिल रौशन शमा मोहब्बत का उजाला।
आशिकी, हुस्न, मोहब्बत के जूनून में जल जाना।
रौशन चिराग जहां में अंधेरों से जंग के जज्बात।
खुदाई, इश्क, इबादत की शान जहां जज्बे के शरूर में जलने का उजाला।
कश्मकश, काश से बाहर निकल दिल में चिराग रोशन जलाइए।
चाहे हसरत की इश्क मोहब्बत के रोशन शमा का परवाना बन जाइए।
जिंदगी के मकसद मंजिल की दोनों ही इबादत।
जिंदगी की हकीकत में कोई तो चिराग जलाइए।
जहां खुद के वजूद की रोशन रौशनी जलाइए।
आज का युवा
आज युवा विश्व का स्वयं दिग्भ्रमित, भौतिकता की चकाचौंध में भटक गया है।
भूल गया है युवा चेतना की मर्यादा, जिम्मेदारी, लालच, तृष्णा, मृगमरीचिका दौड़ता
भाग रहा है।
रातों-रात सब कुछ, दुनिया, दौलत, शोहरत, इज्जत हासिल करने की खातिर,मर्यादाओं का नित उल्लंघन कर रहा है।
कभी फंस जाता नशे के जाल में, शराब, कबाब, शबाब की दुनिया में,स्वयं को जलाता ही मगन हो रहा है।
नशा सिर्फ शराब नहीं, मादकता के दानव के दमन में युवा सिमट लिपट रहा है।
हीरोइन, हशीश, जाने क्या-क्या निगल रहा है,देश, समाज, परिवार, परवरिश की आशा, विश्वासों का गला घोंट रहा है।
बुद्धि नहीं है, फिर भी बुद्धिजीवी के खतरनाक इरादों की बलि रोज युवा आज अब चढ़ रहा है।
धर्म, कर्म से विमुख, छद्म धर्मनिरपेक्षता की बलि नित्य चढ़ रहा है।
मर्यादा मर रही प्रतिदिन, अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है।
समस्याओं से जूझता युवा,
युवा चाहता है यदि कुछ करना, अभाव आंधी से पड़ता है लड़ना।
गांव में कृषि अब पर्याप्त नहीं, शिक्षा दीक्षा का व्यवहारिक व्यवहार नहीं,स्वयं युवा को दर-दर भटकना पड़ता।
रोजी-रोजगार नहीं, व्यवसाय व्यापार नहीं,युग युवा को रोटी की खातिर सिमटना पड़ता।
गांव छोड़कर शहर, शहर छोड़कर राज्य,राज्य छोड़ प्रवासी बन पहचान गवाना पड़ता।
माँ-बाप की आशाओं, प्यार, परवरिश,परिवार की आकांक्षाओं से मुंह छुपाना पड़ता।
युवा आज भी ओज, तेज, ऊर्जा का परिपूर्ण,विवश हो खो जाता युग आंधी में, पीठ दिखाना पड़ता।
युग युवा आशा और विश्वास की जलती होली,रोज जीवन की खुशियों के रंगों से बदरंग हो जाना पड़ता।
युग युवा धैर्य, धीर, वीर, गंभीर,
रच डाले हैं जाने कितने ही इतिहास, तुम्हें ही शक्ति, साहस है, चाहो जैसा बदल डालो समय, काल, वर्तमान।
युग युवा की हताशा, निराशा से देश, समाज बीमार,उठो, जागो, युग चेतना के प्रवर्तक, पुकारता समय काल।
युवा क्या है?
युवा सोच, युवा शक्ति, युवा तत्व, समय युग काल!
युवा युग परिभाषा, पराक्रम, पुरुषार्थ, परिणाम, युवा ओज, युवा तेज, मर्म, मर्यादा पहचान।
युवा प्रज्वलित अग्नि, युवा तेज बरछी कटार, युवा वर्तमान कदमों से निर्धारित प्रेरक प्रेरणा इतिहास।
युवा ऊर्जा, युवा चेतना, युवा साहस शक्ति प्रवाह, उत्कर्ष, उत्सर्ग प्रवाह।
युवा आंधी और बवंडर, युवा सुगंध और चंदन, युवा तेज का भाल काल विकट विकराल, युवा लिखता नई कहानी, पृष्ठभूमि का नायक महानायक पात्र प्रकाश।
युवा चरित्र, युवा संस्कार, संस्कृति, युवा सभ्यता, युवा भव्यता, युवा दिव्यता, धर्म, कर्म, क्रांति, शांति, युग, साम्राज्य।
युवा चिंगारी ज्वाला, युवा दीपक और चिराग, युवा युग प्रज्वलित मशाल।
युवा प्रेम प्रवाह, युवा युद्ध शंखनाद, युवा ओजस्वी तेजस्वी, युवा दृढ़, दृढ़ता, विनम्रता, निर्बहन निर्वाह।
युवा आयु नहीं, युवा अंगार, युवा मोम सा मुलायम, युवा पर्वत पहाड़।
युवा ओस की बूंद, नदियों का कल-कल कलरव, सागर की गहराई, समय काल पुकार, आवाज।
समय को मोड़ दे, उद्देश्य पथ की बाधा को तोड़ दे, नित्य निरंतर निर्झर उमंग से नई सीमा, मान्यताओं का निर्माण कर दे।
निडर, निर्भीक, सार्थक, सक्रिय, सत्य का अर्थ, अनर्थ को व्यर्थ कर दे।
अन्याय, अत्याचार प्रतिरोध, न्याय का आयाम, अध्याय, पुरस्कार, आविष्कार, आविष्कारक, भाग्य, भगवान, परम, परंपरा, साध्य, साधना, आराधना, आराधक।
कजरी
अरे रामा जियरा जरे
जैसे आग अंगार जुड़ाए
कैसे रामा!
अरे रामा भोरे बोले
कोयलिया जैसे जरत
जिया हहरावे
तरसावे ना!!
अरे रामा वैरी कोयलिया
के बनिया जैसे सेज
शूल बिछावे ना!!
अरे रामा उमड़ घूमड़
आवत बदरवा जिया
डेरवावे ना!!
अरे रामा दिनवा लागे
जैसे रतिया पिया याद
सतावे ना!!
सावन कि रिम झिम
फुहार जिया जुड़ावे ना!!
अरे रामा बैरी पिया के
जिया मे बिरह के
धुआँ उठावे ना!!
अरे रामा सावन कि
फुहार वरसात पिया
मिलन कि बात
बतावे ना!!
अरे रामा सखीयां करत
ठिठोली मारे ताना ना!!
सखी आइहे सजनवा
बोलत कागा अगनवा
पिया मिलन के राग
सुनावे ना!!
सखीयां करत ठिठोली
मारे ताना सावन बौराये
ना!!
सखी अइहे मोर
सजनवा बोलत
कागा मोरे आँगनवा!
कागा बोले पिया प्यार
सावन आवन सन्देश
सुनावे ना!!
परम्परिक मूल्यों का संरक्षण
बिखर जाता राष्ट्र समाज
विसार देता ज़ब स्वंय कि
परम्परा परम्परागत मूल्य
राष्ट्र समाज!!
राष्ट्र समाज स्व को
खोजता स्व को ही जान
पहचान नही पाता!!
स्व विसर्जन बिसार
स्व का करता समय
राष्ट्र समाज!!
राष्ट्र समाज पहचान साक
परम्परा परमारगत मूल्य
संस्कृति अतीत आचरण
विचार व्यवहार!!
जीवेत जाग्रत राष्ट्र समाज
अभिमान परम्परा मूल्य
सत्यार्थ जीवन समाज
राष्ट्रीय चेतना सत्कार!!
राष्ट्रीय जागरण सामाजिक
चेतना युग काल समय बैभव
परम्परा मूल्य महिमा महान
स्वं परम्परा शास्त्र पराक्रम
निगम निर्भय निर्विकार
निःस्वार्थ निर्माण शिकर
विकास!!
परम्परा परम्परागत मूल्य
नैतिकता निर्वहन निर्मल
नीरझर धीर धैर्य राष्ट्री समाज
धन्य धार!!
परम्परा मूल्यों का ह्रास
राष्ट्र समाज अस्तित्व का
विनाश स्व का सर्वनास!!
वर्तमान परिहास अतीत
अभिमान बिरोचित गाथा
अपमान!!
मुक प्रतंत्रता का पथ पग
भविष्य भाष्य!!
परम्परा मूल्यों का
संरक्षण राष्ट्र समाज
ध्येय धर्म संवर्धन
इतिहास गौरव वर्तमान का
भूषण आभूषण भाव
भविष्य अभिनन्दन!!
आत्म ईश परमतत्त्व
परमात्म राष्ट्र समाज का
जन जाग्रति अध्यात्म चित्त
चेतन संस्कार!!
परम्परा मूल्यों का
संरक्षण जन्म जीवन
प्राणी प्राण प्रणम्य
प्रणाम प्रेम सार
परमार्थ कल्याण!!
परम्परा पारम्परिक
मूल्यों का संरक्षण दायित्व
बोध कर्तव्य युग पीढ़ी
भविष्य बोध सत्यार्थ!!
पारम्परिक मूल्यों का
सत्कार अक्षय अक्षुण
संस्कृत संस्कार राष्ट्र
समय समाज अभय
निर्भय राष्ट्र चेतना संग्राम!!
समय हुंकार ललकार
युग युवा वंदन सत्कार
जागो सुनो काल समय
युग पुकार!!
स्व पहचान परंपरा
पारम्परिक मूल्यों का
रक्षण संचय संवर्धन
गौरवशाली इतिहास!!
पृष्ठ भूमि वर्तमान
जागरण उजियार
भविष्य सवर्धन का
अक्षय अकक्षुण
राष्ट्र समाज!!
भक्ति काल कि मर्म मीरा
भक्ति काल कि मर्म मीरा
नारी शक्ति नारायणी भक्ति
और साहित्य समन्वय सत्य
मीरा महिमा सुभद्रा!!
सुभद्रा साहित्य समाज
काल समय कि गौरव गरिमा
राष्ट्र भक्ति कि अलख अलका
अंगार सुभद्रा चौहान!!
वंशज वीरों कि मातृ भूमि
कि सेवा भक्ति शब्द स्वर
कर्म धर्म मर्म मर्यादा सुभद्रा!!
नव युग काल कलेवर
नारी दुर्गा भाव मर्म स्पर्श
जन्म जीवन कि परिभाषा
व्यखा चौहान सुभद्रा!!
आंचल प्रयाग जन्म भूमि
पीहर खंडवा भरत हृदय
प्रदेश मध्य प्रदेश लक्ष्मण
सिंह सुहाग सुभद्रा!!
स्वतंत्रता संग्राम योद्धा
याताना जेल जीवन पथ
यत्रा पढ़ाव राष्ट्र भक्त राष्ट्र
सेवा कर्तव्य कर्म सुभद्रा!!
खूब लड़ी मर्दानी कि
चेतना जाग्रति स्वंय नारी
जाग्रति चेतना कि हुंकार
सुभद्रा!!
नारी गरिमा महिमा
दृष्टि दृष्टिकोण रानी
लक्ष्मी अवतार हाथ
कलम तेज तलवार!!
दूजा सुभद्रा हो सके कोई
सम्भव नही लक्ष्मी बाई
छाया राष्ट्र गौरव गाथा कि
गहराई ऊँचाई पर्वत चट्टान
सागर उफान सुभद्रा!!
प्रेमचंद्र
क़्या दौर था माँ
भारती का आंचल
जैसे कचरे का चीथड़ा!!
मातृभूमि कि वेदना
कराह सुनता कौन युग
काल समय जन जीव
जानवर थे सब मौन!!
गांव गरीब किसान
मजदूर का पी रहा था
सत्ता सामंत खून!!
व्यथा व्यथित घायल
वेदनासे व्यथित भारत
का जन जन मूक मौन!!
गुलामी का दंश था न
कम सामाजिक रस्मो
रिवाज़ धर्म कर्म मर्म
मर्यादा थी खंड खंड!!
निःशब्द माँ भारती के
सजल नेत्र गए सुख!!
शिव त्रिशूल पर बसी काशी
जागी!!
लम्हो लम्हो कि लालसा
माँ भारती जागी कचरे
चीथड़े आंचल प्रकाश
धनपत राय सपूत लमही
काशी अभिमान!!
शिव त्रिशूल पर बसी
काशी जागी दमड डमड
डमड निनाद कण कण
काशी का हुंकार गूंज!!
लम्हो लम्हो कि लालसा
माँ भारती जागी कचरे
चीथड़े आंचल प्रकाश
उजियार आया!!
लमही पावन भूमि धनपत
राय आवाहन अस्तित्व पाया!!
गुलाम देश समाज राष्ट्र कि
दिन दशा कि दृष्टि दिशा देने
धनंपत राय प्रेम प्रेरणा चंद्र
शीतल प्रकाश आया!!
कलम का सिपाही कर्म
कलम का योद्धा जन जन
आकांक्षा उद्देश्य का उद्धभव
चंद्र प्रेम युग चेतना जगा!!
ना तीर ना तलवार ना
लहू का एक कतरा बहा
शांति सौम्य कलम कि
ताकत ने झकझोर दिया!!
गुलाम मुल्क कि सवेदना
जागृत कर सामाजिक
चेतना अव्यक्त वेदना
कर्म क्रांति कि सवेदना!!
कथा उपन्यास लघु कथा
शस्त्र कलम कि धार तेज
तलवार धनपत राय
प्रेम चंद्र सत्यार्थ कल्पना!!
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
स्वतंत्रता मेरा अधिकार
बाल गंगाधर तिलक
ललकार,!!
हताश निराश जन ऊर्जा
उत्साह आत्म शक्ति ईश्वर
सत्ता परम् पराक्रम जीवेत
जाग्रत जीवन जन्मेजय,
निडर निर्भीक ॐ गं गं गं
गणपति गूंज स्वर संग्राम!!
परतंत्रता मुक्ति यज्ञ
अनुष्ठान महायज्ञ शुभ
शुभारम्भ बिखरी
जनशक्ति संगठित
संगठन शंखनाद
लोकमान्य!!
जगदम्ब मराठा पहचान,
पुणे पावन धरा धन्य
स्वर साधना राष्ट्र आराधना,
लोक मत लोक मन भाव
भवार्थ!!
अवधारणा अस्तित्व राष्ट्र,
महाराष्ट्र गरिमा फणविष
युग युगात्म युग सत्ता
चेतन अभिनंदन तिलक
लोकमान्य सत्य अर्थ,
देवेंद्र लोकमान्य लोकमत
तिलक तथ्य तत्व सत्यार्थ!!
अकेलापन
अकेलापन सिद्धि मार्ग
वैचारिक ऊर्जा का श्रोत
प्रवाह!!
बौद्धिक विकास के अवसर
अकेलापन शोध बोध योग
ज्ञान व्यवहारिक व्यवहार!!
मन मस्तीष्क हृदय भाव
उद्धभव उत्कर्ष निष्कर्ष
संकल्प सिद्धि साध्य!!
पथ पराक्रम प्रारबद्ध
अवसर बौद्धिक विकास
अकेलापन आचरण
अचार!!
एकांत एकात्म बाद
सिद्ध सिद्धांत सूक्ष्म
सूक्ष्मत विराट विकास
एकांत!!
अकेलापन अनेकात्म से
एकात्म ईश्वर सत्यार्थ!!
ईश्वर आत्मा परमात्मा
प्रकृति प्राणी परमेश्वर
प्रवृति प्रकरण प्रकार्य!!
प्रगट प्रासंगिक
प्रामाणिक ब्रह्माण्ड
ॐ ओंकार स्वर शब्द
अकेलेंपन शक्ति
साया युग युगन्तर!!
अकेलापन सात्विक बोध
धर्म कर्म मर्म महान काल
कर्म युग कल्याण!!
ध्येय ध्यान तप साधना
ज्ञान बैराग्य राग ऋषि
महर्षि महत्व महान!!
कल्पना परिकल्पना
अंवेषण शोध प्रयोग
परिणाम वैज्ञानिक
विज्ञानं बैराग्य!!
अकेलापन त्याग
तपस्या अनुसन्धान
अकेलापन बौद्धिक
विकास व्यवहार कर्म
पराक्रम!!
ज्ञान उपयोग उपयोगी
अवनी अतीत वर्तमान
प्रकाश भविष्य अनुराग!!
शुद्ध सात्विक सत्य
सनातन जागरण जाग्रति
पथ अकेलापन प्रखर
शिखर प्रचंड पुष्प कमल
बैभव विकास!!
भाई कि कलाई
भईया की कलाई सजाई कच्चे
धागे से स्नेह भाव में बांध
काल कर्म मर्म बन गई भाई की कलाई!!
क्या सद्भावना संवेदनशील रिश्तों का अभिमान रिश्ता बहन भाई
काहे हुई प्रीति पराई, कच्चे धागे के बंधन निभाई!!
बचपन में करती झगड़ा लड़ाई
छोटी हों या बड़ी बहन, अंतर नहीं आराधना ही करता भाई!!
हर काल समय पल प्रहर में बहन संग भाई बहन की लाज सम्मान का गहना भाई!!
ग्रहण लगे ना चाँद सी बहन पर
कभी कोई बहना का कवच है भाई!!
कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई
कहती है दुनिया कृष्ण है भाव भगवान युग भाष्य भाई!!
रक्षा बंधन है
रक्षा बंधन है, रक्षा बंधन है
जन्मों का बंधन है बहन भाई के
रिश्तों का अर्चन अभिनन्दन है!!
कच्चे धागे का डोर जनम जीवन का बंधन है बहन भाई रिश्तों का अर्चन अभिनन्दन है!!
बचन कर्तव्य प्रतिज्ञा ध्यान संस्मरण शक्ति संवर्धन है
भाई बहन के रिश्तों का
अर्चन अभिनन्दन है!!
रक्षा बंधन बहनों की खुशियों का पल प्रहर युग उत्सव उमंग है!!
भाई बहन के रिश्तों का अर्चन अभिनन्दन है!!
छोटी बड़ी नहीं बहन वंदनीय शक्ति शाश्वत सत्य सनातन है!!
बचपन में करती झगड़ा और लड़ाई, अंतर नहीं आराध्य आराधन भाई बहन के रिश्तों का अर्चन अभिनन्दन है!!
हर काल समय पल प्रहर में बहन संग भाई का गहना, लाज सम्मान का युग योद्धा धन्य है!!
ग्रहण लगे ना चाँद सी बहन पर, कभी कोई अभेद्य कवच है भाई!!
कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई, कहती है दुनिया कृष्ण भाव भगवान युग भाष्य है भाई!!
भाई बहन के रिश्तों का अर्चन अभिनन्दन है!!
मेरा गांव
सावन मे बरसे बदरा
बरखा बूँद पानी नाही
जैसे शोला शबनम आग!!
पिया मिलन कि आश
बादल मे छिपे सूरज
चाँद!
हवाओ मे उड़ती
जुल्फों मे चाँद सा
चेहरा लागे बारूद
गोला आग!!
सावन सुन्दर मन
भावन बिपत्ती क
झरना झील नदी
तालाब समंदर
दुर्भाग्य क बाढ़
कहर कराह
कायनात!!
आएगी जिंदगी जान
सावन मे इंतज़ार
हाथों मे मेंहदी महावर
धड़कते दिल कि
मेहमान!!
गांव नगर जवार
सावन कुल देवी देवता
क पूजा मंगल गान
तरह तरह के मानौती मान!!
सावन क बदरी
बरखा हरियाली
खुशहाली स्वप्न
स्वांग!!
सौगात विश्वास
कजरी के राग
डाली झूला और
कान्हा राधा रास!!
शिव स्तवन अभिषेक
इंद्र इच्छा परीक्षा कोप
शाप वरदान आशीर्वाद!!
नदी किनारे गाँव
तीन तरफ गंडक
छोटी नदी एक तरफ
ताल!!
मानस मे गोस्वामी जी
लंका सागर के मध्य
आस्था विश्वास क बात!!
लंका जस कलयुग मे
हमार गाँव चारो तरफ
नदी तालाब बाज़ार से
गांव क एक ही पथ राह!!
वर्ष क नौ माह कइसो
काम चल जाए गांव मे
पिछड़ा दलित मुसलमान
अधिकाय!!
खेती बारी इतने कि
तीयना तरकारी मिल
जाए अशिक्षा बेरोजगारी
नौजवान बेकार!!
आबो कुछ ऑटो
चलावे कुछ काम करे
हैसियत अनुसार!!
हाय रे सावन हर वर्ष
लिए आस हर्ष विसात
दिए जाए!!
सावन मे पूरा गाँव
जैसे सागर तालाब!!
नावे घर दुआर हर साल
चौथाई मकान गाँव क
ढह जाए फ़सल मेहनत
ऐसे बहे जैसे पानी मे
लड़िकन क कागज क
कस्ती नाव!!
लावारिस हस्ती क गांव
कहावत मशहूर रहा जवार मे
भाई केहू अपनी बेटा बेटी क
जन करिह वियाह रतन पूरा गाँव
देश नया नया आजाद
संसाधन तबो सीमित
तब कारण गुलामी
अब कारण संसाधन
पर जनसंख्या दबाव!!
जन्म से लेके दस बारह
साल सावन के देखे हई
हरियाली खुशहाली के
कहावत मात्र!!
सगरे गाँव के सावन भादो
खाली मछरी चूहा भुज खात
साल मे चार महीना कहर बाढ़!!
फ़सल खरीफ कैसो
होय पाय उहो गाँव के
सगरो घर के साल भर के
पेट भर सके नाही
हर साल बाढ़ी के दुर्गति के
प्रहर काल आजो बचपन के
दिन जैसे वर्तमान!!
हमार घर जैसन गांव मे
घर दुई चार मात्र जेकरे
असरे जिए गाँव के जाने
कितने परिवार!!
हाय रे सावन कहे क़े
मनभावन हरियाली
खुशहाली वाह रे
हमार गाँव!!
सावन रूवाए हर वर्ष
बदहाली हरियाली
खुशहाली सावन क़े
बदरा बरखा बौछार
जाईसन आंसू रोआवे!!
गांव छोड़ कही ना
जाए डाटा रहे सावन मे
गरीब गाँव गांव पुरुखन
के गौरवशाली इतिहास
बतावे!!
आजो सावन के
कहर गांव नगर
शहर ई बात अलग कि
हर वर्ष सावन के कहर के
गांव नगर अलग अलग!!
देश मे हर वर्ष
सावन मे कितने गाँव
उजड़ जाते बिहार मे
कोशी और असम
ब्राह्मपुत्र के दर्द साल
भर लोग सहलाते है!!
हर वर्ष सावन मे
कहर बिभिषिका के
नव अध्याय आयाम
लिख जाते है!!
रोते बिलखते दर्द
वेदना देते छोड़ जाते
मैंने बचपन पूरा
यही सत्य देखा है!!
सावन वास्तव वास्तविकता
दर्द दंश देखा जिया है जो
कभी स्मरण से ओझल नही
होता!!
ज़ब कही सावन मे
बाढ़ का कहर सुनता
बचपन गांव सावन
भादो का अतीत भाव
आज भी अनुभूतियों मे
जीता!!
हर हर महादेव
अविनाशी पर्वत वासी
रुद्र रौद्र शिव मंगलकारी।।
अमंगल हारी विघ्न बिनासक
शिव त्रिनेत्र धारी।।
गले मूंड माला जटा
गंग धारा शिव शीश चन्द्र धारी।।
कर त्रिशूल पहने मृगछला
शिव विषधर विषधारी।।
वसहा सवारी भूत पिचास
बैताल शिव सहचारी।।
सत्य आदि अनंत
शिव अनादि भाग्य भगवंत।।
ओंकारा निर्विकार निर्गुण निराकार सगुण साकार शिव शक्ति संसार।।
मृत्यु विजय समशान प्रिय
शिव चिता भस्म श्रृंगार।।
स्वान श्रीगाल सिंह भालू
व्याल शिव शक्ति के दास।।
महल प्रसाद पकवान नहीं
भांग धतूर बेलपत्र कैलाश
शिव प्रिय सत्यार्थ।।
दिगम्बर महाकाल
शिव जगदीश्वर शेखर शशांक।।
आशुतोष औघड़ दानी शिव
जगत सृगत प्रलय कर्ता
जटा धर अभ्यनांकरा।।
नाग नागेश्वर हरो हर पाप शाप अघोर आराधना श्मसान वंदना शिव प्राणि प्राण ब्रह्माण्ड।।
मृत्यु उत्सव उत्साह सृष्टि दृष्टि उद्भव विकास विनास शिव महा काल कालेश्चरा ।।
काम क्रोध मद मोह त्याग शुभ
मंगल का गणपति गान शिव मृत्यंजय मोक्ष मार्ग।।
विश्वेश्वर उमापति वैद्यनाथ
सोक रोग भय भ्रम विनासक
देवाधिदेव मान।।
ओंकारेशवर ममलेश्वर संयुक्त ज्योति जगत कल्याण स्तुति स्तोत्र वेद पुराण।।
भीमा शंकर नागेश्वर सोम नाथ
रामेश्वर त्रबकेश्चर अनाथों के नाथ
विश्वनाथ।।
मल्लिकार्जुन ब्रमनेभ्यो घृष्णेश्वर
शिवा शिवम् तांडव कुलग्रम बम बम बब म लहरी काल कराल महाकाल।।
नमामि शंकरम रुद्र रौद्र आष्ठकम
नमामि शनकरम प्रणाली शंकरम।।
जीवन
जीवन यात्रा है।
जीवन मात्रा है ।
जीवन स्वर है।
जीवन संगीत है।
जीवन रास्ता है।
जीवन रिश्तो का
वास्ता है।
जीवनकर्तव्य बोध है।
जीवन दायित्व समझ है।
जीवन युद्ध है।
जीवन विशुद्ध है।
जीवन सत्य है।
जीवन याथार्त है।
जीवन सत्यर्थ है।
जीवन प्रेम है।
जीवन श्रृंगार है।
जीवन घृणा का
घर अभिमान है।
जीवन द्वेष का द्वंद
बैर भाव है।।
जीवन शक्ति का
सत्कार है।।
जीवन रिश्ता समाज है
जीवन एकाकीपन
अभिशाप है।।
जीवन निराश बेवस लाचार है
जीवन क्रूर काल है।।
जीवन अन्याय अत्याचार है
जीवन करुणा क्षमा दया सेवा
न्याय दान पुण्य पाप है।।
जीवन भीड़ में भी अकेलापन
नाम है ।।
जीवन भक्ति वरदान है।
जीवन नित्य निरंतर सुख
दुख आंसू मुस्कान है।।
जीवन चलने का नाम है।
जीवन हर हाल में मुस्कुराने
का नाम है।।
जीवन सुबह शाम दिन रात है
जीवन घर परिवार है।।
जीवन विरह बैराग्य है।
जीवन के ना जाने कितने
आयाम है।।
जीवन जीने की कला
अवसर उपलब्धि का
अतीत वर्तमान है।।
हार कायर का श्रृंगार
जीवन कुरुक्षेत्र मैदान है जीवन पथ मे शत्रु शत्र कोटि काल कराल है ।।
जीवन युद्ध संघर्ष हताशा निराशा जंजाल है जीवन पराक्रम साहस शक्ति विश्वास आत्म बल शत्र संग साथ है ।।
जीवन यश अपयश जय पराजय परिणाम है हर प्रातः जीवन संग्राम रणभेरी बजती कर्म धर्म युद्ध का शौर्य सूर्य साक्षी साक्ष्य है।।
अवसान दिवस विजय वरण उसी का जो निडर निर्भीक निर्भय निर्बाध हैं।।
जीवन कुरूक्षेत्र मैदान पथ पर बढ़ता जाता बाधाओं चुनौतियों के अवरोध तोड़ता जाता नही करता विश्राम है।।
निरंतर चलता जाता जन्म शुभारम्भ तो अंतिम सांसे धड़कन जीवन युद्ध कुरुक्षेत्र संग्राम धन्य धरोहर परिणाम है ।।
वर्तमान कि चुनौतियों को चीरता करता स्वर्णिम भविष्य निर्माण है।।
जीवन मे हारता पराजित होता वही जो छोड़ता जीवन युद्ध मैदान है ।।
भय से भागता भाग्य भगवान समय काल को कोसता तिल तिल मरता सांसों धड़कन का जीवंत पुतला असहाय है।।
दया कृपा करुणा का पात्र जीवन जन्म जीवन का अभिशाप है।।
हारता वही जो लड़ता नही शास्त्र पढ़ता नही शत्र गढ़ता नहीं नर नही पशु समान है।।
विजय आकांक्षाओं का आगमन नही अभिलाषा का अभिनंदन नही जन्म जीवन नही युग समय काल अपमान है।।
पराक्रम पुरुषार्थ बीरता दृढ़ता आभूषण धैर्यवान है ।।
जीवन से भगो नही संघर्षो चुनौतियों से लड़ना सीखो जीवन जीवन आशाओं का परचम अभिमान हैं।।
संग्राम जिंदगी
जिंदगी मीत गीत नाटक संगीत जीत हार संग्राम है ।।
पल प्रहर चुनौतियो का आक्रमण प्रहार है।।
सम्भव नही हर चुनौतियों को जितना पड़ता है हराना हारना जीवन मे जीवन विकृति त्रुटि बोध काल है।।
हार भविष्य जीत विजय मार्ग का सत्य सार है।।
सत्य ही है जीना है तो मरना सीखो रुखना ना थकना सीखो।।
बदल जाओ या बदलना सीखो हर पराजय से परिष्कृत पराक्रम बन उठना और निखरना सीखो।।
क्योकि घनघोर आंधकार के बाद ही नव प्रभात है हर हार ही विजय भाव आगमन कि मुस्कान हार है तो जीत है।।
हारने से हताशा निराशा कैसी हर हार के पीछे छीपी जीत मुकुट माल है ।।
जितना है तो हारना सीखो चुनौतियों से नही खुद से डरना सीखो ।।
जिंदगी मुस्कान है बिरोचित गान है जिंदगी कायर कि नही पुरूषार्थ प्रायास परिणाम कि चुनौती का संग्राम है।।
भारत कैसे बन गया हिंदस्तान
संस्कृति संस्कार महान
सक्षम खुशहाल भारत
सोने की चिड़िया कहलाता
दुनियां का दिग्दर्शक भारत
अब है हिंदुस्तान।।
आपस मे लड़ते भिड़ते
बात बात पर एक दूजे के
लहू के प्यासे शासक
भारत की शान!!
चंद कबीलों की एकता
ताकत का हो गया गुलाम
बंट गया भारत दो टुकड़े में
उदय उदित हिंदुस्तान!!
गजनवी गोरी तैमूर तुगलक
खिलजी जाने क्या क्या नाम
जिनकी खुद के मुल्क में नही
कोई औकात लूटा रौंदा जैसे
कोई अबला असाह ऐसी वेदना
से जन्मा हिंदुस्तान!!
बाबर की बर्बरता क्रूरता
ने तोड़ दिये सारे आयाम
आस्था का अस्तित्व मिटाया
लड़ते कटते आपस मे भारत
को गुलाम बनाया मुगलो की
सत्ता का भारत नाम।।
जब थक हार गया तुर्क
भारत को सौंप दिया
गोरों के हाथ गोरों के
जुल्म से आहत क्रंदन
करता भारत देश महान ।।
जाने कितनी कुर्बानी
बलिदानो के बाद
भारत से शेष बचा हिंदुस्तान
नही जानता स्वयं की
सच्चाई हिंदुस्तान।।
छद्म धर्म निरपेक्षता की
छाया कथित बुद्धजीवियों
की माया त्रस्त आज
फिर हिंदुस्तान।।
मालूम नही राष्ट्र क्या?
राष्ट्र हस्ती हैसियत क्या?
राष्ट्र अस्मिता मर्यादा क्या?
कैसा हो गया हिंदुस्तान!!
सत्य सनातन भगवान को
देने पड़ते साक्ष्य
बर्बरता का बाबर गुर्राता
कौन राम कहाँ के राम!!
मौर्य शौर्य कौटिल्य नीति
सरदार लौह कि दूरदृष्टि
मजबूत इरादों के ना जाने
कितने नाम जिनसे आज भी
जागृत राष्ट्र है हिंदुस्तान।।
भारत से बन गया हिंदुस्तान
हिंदुस्तान एक राष्ट्र पर दो
संविधान काश्मीर का राग
अलापते आस्तीन में छिपे
नाग ये कैसा हिंदुस्तान?
नव पीढ़ी खुद को जानो
अपने वर्तमान को इतिहास
सच्चाई पन्नो से जानो
पहचानो चीथड़ों को उतारो
तब जानोगे हिंदुस्तान।।
पौत्र
आशा अभिमान पौत्र
आशाओ का आकाश
पौत्र!!
पौत्र पराक्रम परम्परा
प्रवाह पीढ़ी नव उदय
शिखर उत्साह उत्कर्ष!!
पौत्र कर्म धर्म मर्म
निर्वाहन निर्वाह मर्यादा
मर्म नैतिकता महिमा
गरिमा गौरव गान सौर्य!!
पौत्र दीप चिराग मिशाल
मशाल शुभारम्भ शिखर
अम्बर उत्कर्ष!!
प्रत्यक्ष कल्पना सोच
प्रारबद्ध भाग्य भविष्य
भगवान वरदान!!
पौत्र भविष्य प्रवाह
धरा धारा उज्ज्वल
धवल नवल निर्मल नित्य
निरंतर शश्वत सत्यार्थ!!
पौत्र निरझर अविरल
कल कल कलरव
गुंजन गुण सगुण सद्गुण
सबल सक्षम स्वभिमान!!
पौत्र शक्ति साहस भरत
सिंह क्रीड़ा परम् सत्य
प्रज्वलित प्रबल प्रताप!!
परम प्रकाश परमार्थ
प्रारबद्ध पराक्रम भान
मान अभिमान!!
एक आदर्श गावों प्रेरणा का गाव
दुनिया कि भीड़ में तन्हा खोया खोया अंजान राहो में इंसान अकेला हस्ती कि किश्ती का करावा मकसद का मुसाफिर दुनिया का झमेला चलता है
रफ्त रफ्त!!
वक्त बदलता ठौर बदलता मंज़िल मुलाकात दौर बदलता कभी फुर्सत कि चाह में कहीं उम्मीदाै की राह में चलती है जिन्दगी अपने अंदाज़ में लम्हा लम्हा!!
दुनिया कि भीड़ में तन्हा खोया खोया अंजान राहो में इंसान अकेला हस्ती किश्ती का करावा मकसद का मुसाफिर दुनिया का झमेला चलता है रफ्त रफ्त!!
यूँ हीं चलते चलते मुकाम ऎसा आया पीपल कि छाव अलबेला गाँव खुशहाली हरियाली का रास्ता वास्ता निधियों कि अभिलाषा का गांव!!
दुनिया कि भीड़ में तन्हा खोया खोया अंजान राहो में इंसान अकेला हस्ती किश्ती का करावा मकसद का मुसाफिर दुनिया का झमेला चलता है रफ्त रफ्त!!
अरमानों के चेहरों के अमन कि मुस्कान का गांव सहजना सहजना सहजना!!
दिलों में जोश जज्बा मोहब्बत के दीन ईमान का गांव सहजना सहजना सहजना!!
जज्बात रिश्तों आदमी इन्सानियत का गांव सहजना सहजना सहजना!!
दुनिया कि भीड़ में तन्हा खोया खोया अंजान राहो में इंसान अकेला हस्ती किश्ती का करावा मकसद का मुसाफिर दुनिया का झमेला चलता है रफ्त रफ्त!!
शरारतें
शरारतें बचपन की ज़िंदगी
खूबसूरत यादों का आईना।
अजीब हरकते पहली बारिश
भीगना माँ बापू को सताना
शरारते खुशियों का खजाना।।
बचपन की शरारत चोरी
गुड़ खाना वारिस का पानी
कागज की कश्ती में समंदर तराना।।
बचपन मे भाई बहनों से लड़ना
झगड़ना गुड्डे गुड्डी का खेल कट्टी
मिल्ली मिलना रोना मुस्कराना।
बचपन की शरारतों में शामिल
कीचड़ मिट्टी धूल अंधेरे आवाज़
से डर जाना।।
माँ बापू कोशिश करते
डर जाऊं सो जाऊं
शरारतों से अच्छा लगता
माँ बापू को रात रात जगाना।।
शरारतों में शामिल गली
मोहल्लों गाय कुत्तो संग खेलना
गोदी में घूमना जब भी गोदी से
नीचे उतरता रोना चिल्लाना।।
घर की तमाम साज सज्जा को
बिखेरना मना करने पर जिद्द
ऐसी करना दूँनिया ही सर पे उठाना।।
रूठना मानना पे सिर पैरों की
मांग पे माँ बापू रिश्ते नातों को
झुकाना।।
कहते सब बचपन भगवान का
रूप भगवान भी बचपन का
बहाना ।।
आशा और विश्ववास
आशा विश्वास
जीवन के दो भाव
आशा लौ जैसी
विश्वाश है बाती।
जीवन आशा
विश्वाशों का दीप
जलता दीपक
जीवन दीवाली।।
त्यौहार प्रज्वलित
मद्धिम दीपक
जीवन सुख दुःख का
खेल मेल।!
आशाओे का टूटना
विश्वाश डगमगाता
जीवन बेमेल ।।
आशा उत्साह
जगाती विश्वाश
उद्देश्य का उद्भव
उद्गम महिमा
मंडन का मार्ग
बेजोड़।।
आशा निराशा के
बीच घूमता जीवन जीत
हार जीवन संग्राम
अर्थ उद्देश्य।।
आशा सावन कि
फुहार निराशा
काला बादल
जीवन् में संताप
ख़ुशी का कारण
क्यूआशा कभी
कदाचित निराधार
निर्विकार ।।
आशा साक्षात्कार
सत्कार आशा विश्वास
अवनि आधार!!
आस्था अस्तित्व आविष्कार
आशा विश्वाश जगाती
विश्वाश का आस्था से
रिश्ता नाता।।
आशा विश्वाश आस्था
पत्थर में भगवान दिखाता
भाग्य भगवान आशा विश्वाश
जीवन का वर्तमान
भविष्य बताता।।
प्रेम भाव आशा कि
जलती लौ विश्वास
ज्वाला आस्था।
अस्तित्व का गहरे
सागर से मिल
जाना जीवन मूल्यों
पथ पथिक
का उद्देश्य का
जीवन चलता।!!
आशाओं को जगने दो
अंतर मन के भावो से
विश्वाश का उफान
ज्वार पराक्रम की
ललकारों से!!
मिल जाएंगे अल्ला ईश्वर
खुद में चेतन जीवन राहों में।।
कहीं खो ना जाओ
मिथ्या के आडम्बर में
ना आशा जगे
जीवन में ना
विश्वास का बैभव हो।!
नश्वर जीवन में ना
स्वर हो न उमंग
तरंग संगीत तराना
जिंदगी सिर्फ कटते
काल समय की बोझ
जीवन मृत्यु के मध्य का
सोना जागना।।
संतान
माँ बाप कि उम्मीदों की
शान उनकी संतान ना
जाने कितने सपनों की
सच्चाई का आधार
संतान।।
बुढापे की लाठी सहारा
दर्पण से तारने वाला
जिंदगी की मेहनत कमाई
का दिन ईमान संतन।।
संतानो भी माँ बाप कि
मेहनत कि कमाई का
मोल दिन रात ईमानदारी से
मेहनत कर चुकाई।।
माँ बाप की दौलत मेहनत
संतानो की पल पल की
मशक्कत मेहनत कीमत
का कीमती वक्त लाई।।
वाजिब रोजी रोजगार की
चाहत चाह नौकरी की
करता नौजवान तलाश।।
नौकरी है तो सिपारिश नहीं
बिना जुगाड़ के नौकरी नहीं
लेकर डिग्रियों का अम्बार
दर दर घूमता फिरता
नौजवान ।।
कही काम का अनुभव नहीं
आड़े काम मिलता ही नहीं
तो अनुभव कहाँ से लाये।।
टीवी अखबार में
देखता रोजगार के
प्रचार जाता जब
लेकर डिग्रियों के
अम्बार मिल जाता
जबाब भाई जो काबिल था
उसे मिला रोजगार ।।
क्या जिन्हें नौकरी नहीं
मिलती नाकाबिल अंगूठा
छाप कभी कहा था कवी
घाघ ने निसिद्ध चाकरी
भीख निदान।।
अब निषिद्ध से प्रसिद्ध
चाकरी ही जीवन की चाक
जिसपे घूमते माँ बाप संतानो कि
आरजू के अवनि आसमान।।
सरकार के पास सीमित
संसाधन सीमित
नौकारियां अवसर कोढ़
में खाज आरक्षण।।
कभी कभी तो रोजगार की
तलाश में बेहाल नौजवान
भगवान् को ही कर देता
शर्मसार क्यों बनाया
ऊँची नस्ल की संतान।।
समाज में उंच नीच के
भेद भाव से सैकड़ो
साल रहा राष्ट्र गुलाम!!
अब भी गुलामी का
एहसास कराती
उंच नीच का भेद भाव।।
रोजकार की तलाश में
इधर उधर भटकता
जाता थक हार!!
मध्यम वान की बानगी
करने की हिम्मत नहीं
जुटा पाता व्यपार में
पैसे की दरकार!!
पैसा है ही नहीं
जाए तो जाए कहाँ।।
उत्तम खेती जनसंख्या के
बोझ में बाँट गयी झोपडी भी
बन सके इतनी भी
नहीं रह गयी।।
माँ बाप की संतानो का
अरमान हताश निराश
जिंदगी में साँसो धड़कन की
आश की करता तलाश।।
बहुत तो ऐसे भी जो
जिंदगी का ही छोड देते
साथ खुद गर्ज़ संतान।।
करें तो क्या करे निचे
अवनि ऊपर सुना
आसमान शेष सिर्फ
एक विश्वाश पढ़ा लिखा
ऊर्जावान नौजवान!!
बी पी एल की छतरी का
मोहताज़ सरकार की
मेहरबानी निषिद्ध
भीख की जिंदगी
घिसती पिसती के
दिन चार।।
मुफ़्त राशन मुफ़्त मकान
मुफ़्त शिक्षा मुफ़्त है बहुत
कुछ लेकिन जिंदगी भीख
मांगती जैसी कटोरा लिये
ख़डी अपनी नम्बर का
करती इंतज़ार।।
क्या होगा भविष्य राष्ट्र का
जहाँ नौजवान पढा लिखा
पास नहीं रोजी रोजकार
नहीं नौकरी ना काम
ना दाम।।
भीख दया की जिंदगी भय
भ्रम की मोहलत मोहताज़।।
बिरसा मुंडा — (कथा काव्य)
कौन कहता है
क्रांति को चाहिये
कारण और बहना ।।
क्रांति धर्म कर्म
कर्तब्य दायित्व
बोध के उत्साह
उमंग का है
तरन्नुम तराना।।
जज्बे का जूनून
जज्बातों के रिश्तो
रीत प्रीती परम्परा
की अक्क्षुणता
पर जीना मरना
मिट जाना।।
जूनून आग है चिंगारी है मशाल है दुनियां में मिशाल का मशाल है ।।
अपनी हस्ती की हद जमी से आसमान से आगे जहाँ के नए सूरज चाँद की हैसियत ।।
की गर्मी ताकत से तक़दीर की इबारत लिखने का आगाज़ अंदाज़ के जांबाज़ से वक्त अपने बदलने की करवट लेता।।
वक्त अपने निरन्तर प्रवाह में उठते गिरती अपने कदमों की ताकत के लिये इंतज़ार करता ।।
खुद से गुहार करता खुद में खुदा का इज़ाद करता जहाँ में खुद का खुदाई इज़हार करता।।
दुनियां में इंसान को इंसान से मोहब्बत तकरार की टंकार की गूँज की गवाही देता।।
अडिग चट्टानों का तपना सूरज की गर्मी से जंगल बृक्षों ने झेला मौसम की अंगड़ाई ।।
को फिर निश्चिन्त भाव से फिर भी टीके हुये दृढ़ता से अपने मकसद के मंज़िल के स्वाभिमान के इंतज़ार में ।।
आएगा मतवाला चट्टानों की गर्मी की ज्वाला सा जंगल के जज्बात लिये रणबांकुरा।।
क़ोई निश्चल निश्चय निराला सा उनकी हस्ती की मस्ती का रचने वाला अध्याय नया।।
युग में अपनी हस्ती की हद निश्चय करने वाला ।।
समय सत्य की इक्षा और परीक्षा का परिणाम इबारत लिखने वाला।।
गुलामी की पीड़ा को हरने वाला सन् अठ्ठारह सौ सत्तावन की आज़ादी के संघर्षो को बेरहमी से कुचल चूका था अपने अत्याचारों से हाहाकार मचानेवाला।।
चाहू और निराशा के बादल में आशा की चिराग कभी प्रज्वलित हो बतलाती भारत का वर्तमान भविष्य को है ख़ास कुछ गड़ने वाला।।
बिहार की पावन भुमि के कण कण में थी ज्वाला आदि वासी भी भारत में इतिहास का रचने वाला।।
गौड़,संथाल ,मुंडा स्वाभिमान पर मर मिटने का भारतीय है भारत वाला।।
संघर्षो का जीवन, संघर्ष संस्कृति संस्कार को जीने वाला ।।।
आपनी धुन मकसद का मतवाला त्याग तपश्या बलिदानो का काल कर्म रचने वाला।।
तक़दीर की इबारत खुद लिखने वाला अपने मकसद की राहों को खुद चुनने वाला जहाँ की शान में तारीख लिखने वाला।।
विरला व्यक्ति पुरुष ,महापुरुष इंसान ,इंसानियत का ईमान वक्त को मोड़ने वाला।।
वक्त के आईने में नए काल कलेवर का पराक्रम पुरुषार्थ बिरसा मुंडा मानवता के युग का मानव जैसा भगवान।।
विधाता ने कुछ दिया या नहीं भाग्य भगवान ने कुछ दिया या नही से पेपरवाह नही।।
भगवान से शिकवा गिला नही ,ना भाग्य को तोहमत जिंदगी की हर सांस धड़कन में मकसद की मंज़िल का लम्हा लम्हा।।
माँ सुगना मुंडा पर भगवान् मेहरबान उसकी कोख ने दिया जन्म भारत का अभिमान पंद्रह जनवरी सन् अठ्ठारह सौ पचहत्तर को फौलाद इरादों की औलाद।।
इतिहास शौर्य स्वाभिमान की माटी क्रांति जहाँ की संस्कृत है जीवन जननी जन्म भूमि को समर्पित है जन जन का संस्कार।।
अहिंशा परमोधर्मः के अवतरण आगाज़ की माटी घर घर बौद्ध बिहार भारत की गौरव गाथा का प्रदेश अध्याय ।।
छोटा नागपुर पठार जिसके जर्रे जर्रे में बसती भारत की खुशबू की ख़ास पहचान का सौभाग्य ।।
करमी हातु रचते बसते उति हातु इतिहास पुरुष बिरसा मुंडा जिनकी स्वाभिमान संतान।।
आदि वासी जंगल पर्वत का वासी सृष्टी के प्रेम संताप के प्राणी जिसके साथी ,जीने का अंदाज़ निराला भय भयंकर काल से नित्य निरन्तर पाला ।।
दृढ़ता साहस संघर्ष ही सुबह ,शाम, दिन ,रात जीवन बिना युद्ध भूमि के मातृ भूमि पर जीवन जीने का संग्राम ।।
कठिन चुनौती का जीवन आदि मानव आदि वासी जन का जीवन नित्य निरंतर अविरल अविराम ।।
मानवता की आदि संस्कृत का शौर्य सूर्य उति हातु वन वासी की शक्ति ज्वाला का चिराग मशाल।।
बचपन में पहला गुरुकुल शिक्षा का मंदिर विद्यालय सल्बा गॉव।।
नित नित बढ़ता बचपन वक्त की अपनी रफ्तार ऊदी हातु का चाई बासा ठौर ।।
नया छूटा सल्बा गॉव गुलाम मुल्क की ना अपनी भाषा ना कोई ध्वज पहचान ।।
शासक की भाषा अंग्रेजी ही शिक्षा और लम्हे लम्हे की शान।।
सन् अठ्ठारह सौ चौरासी प्रकृति के तांडव से मचा हाहाकार महामारी अकाल से जन जन था बेहाल।।
उतिहातु का नन्हा कोमल मन देख द्रवित था समाज की दुर्दसा और देश मौन बेहाल।।
नौ वर्ष के किशोर मन में व्यथा हलचल बहुत शोर अंगार ।।
सुलगते मन में जज्बे की ज्वाला काल कराला वक्त विवासता की दासता को तोड़ने को वेचैन।।
दहसत का शासन क्रूरता से दमन कर रहा था आजादी के उठते कदम हाथो सर ।।
कभी सर कलम कर देता कभी सलाखों के पीछे दबा देता आवाज़।।
ऑक्टूबर अठ्ठारह सौ चौरासी मुंडा आदि वासी नौजवानो पर क्रूरता का कहर का मुकदमा।।
अठ्ठारह सौ पच्चासी में हजारी बाग़ अदालत ने बेवजह सजा सुनाई दो साल।।
उतिहातु का मन बचपन से ही प्रतिशोध में धधकती ज्वाला आँखों में अन्गार ।।
ताकत का फौलाद इरादों का चट्टान माँ भारती का अभिमान धरती बाबा नाम दुनिया के विश्वास का नया पहचान।।
धरती बाबा ने सन् अठ्ठारह सौ सत्तानवे से शुरू किया भारत के अपमान के प्रतिशोध का नया अनुष्ठान ।।
आवाहन कर देश के अस्मत की एकत्र किया मुंडा नौजवान।।
मात्र चार सौ विरसा नौजवान अगस्त अठ्ठारह सौ सत्तानवे में खूंटी थाने पर धावा बोल आजादी के युद्ध का किया संखनाद।।
तांगा नदी का तट आज भी है गवाह विरसा के नेतृत्व का उनके वीरता शौर्य का ।।
अठ्ठारह सौ अठ्ठानबे का भारत के इतिहास का आदि वासी वीर सपूतों के नाम अंग्रेजो के घमण्ड को चकनाचूर किया किया शर्मशार परास्त ।।
शर्मशार के हार से अंग्रेज गए बौखलाय बच्चों और औरतो का किया कत्लेआम ।।
बन वासी ,आदि वासी आज़ादी के दीवानो परवानो को किया ग्रिफ्तार।।
उन्नीस सौ अँठ्ठनवे में डोम्बारी पहाड़ियों पर विरसा ने मुंडाओं आदि वासी की महासभा में गर्जना ।।
से जागा मुंडा वीर ज्वाला और ख़ौलते खून की गर्मी का एक एक शुरबीर।।
चौबीस दिसम्बर अठ्ठारह सौ निन्यानबे को क्रांति वीर विरसा लिये हाथ में क्रांति की मशाल।।
हथियारों में आदि वासी परम्परा के हथियार तीर कमान तलवार कटार ।।
सेनापति विरसा युवा ओज़ तेज क्रांति का कान्ति पुत्र आदि संस्कृत का जोश उमंग उत्साह।।
कूद पड़ा युद्ध में कुछ वनवासी आदिवासी युवा साथीयो के संग जीतेंगे या मर जाएंगे का संकल्प लिये साथ।।
युद्ध बहुत कठिन था केवल हौसला हिम्मत का था साथ।।
सामने दुश्मन था विकराल फिर भी हार न मानी झुक जाना मुण्डाओ की शान न मानी ।।
लड़ते लड़ते शहीद हुए गिनती जिनकी आसान नहीं ।।
कुछ को क्रूर दमन के शासन ने ग्रिफ्तार किया चालीस को आजीवन कैद छः को सजा वर्ष चौदह की कुछ को तीन पांच साल का कारावास दिया।।
विरसा ने हार न मानी फिर से मुंडा संघर्स को जिन्दा करने की ठानी ।।
जंगल जंगल फिर क्रांति के मशाल के विश्वास में अपनी लड़ाई और विजय का मानव मसीहा विरसा मुंडा को तीन मार्च सन् उन्नीस सौ को अंग्रेज़ों ने ग्रिफ्तार किया ।।
विरसा पर कैद में क्रूरता दमन का दौर चला धीरे धीरे विरसा मुंडा जीवन के अंतिम पग का सफर कैद मे आत्म साथ किया ।।
न टुटा न झुका न आत्म ग्लानि का भाव वीरों की परम्परा के स्वाभिमान ।।
से नौ जून उन्नीस सौ को महापेनिर्माण किया।।
भारत के इतिहास में उतिहातु धरती बाबा विरसा मुंडा लंबे जीवन का नाम नहीं ।।
मात्र चौबीस वर्ष के जीवन में अपने जीवन मूल्यों के वर्तमान को नया इतिहास दिया।।
आदि मानव आदि संस्कृत का शुर वीर बीरसा मुंडा माँ भारती के आँचल का धन्य धारिहर हैं ।।
दुनिया में कर्तव्य दायित्व बोध का समय काल भाग्य भगवान की व्यख्या का स्वागत सर्वोत्तम है।।
बता गया दुनिया जकड़ नही सकता कोइ जंजीरो में लाख चुनौती भी नहीं रोकती राहों को संकल्पों में हो विश्वास ।।
मकसद और इरादों पर दृढ़ता से चलना हासिल करना मंज़िल को थक हार नही जाना ।।
मर मिटने का जज्बा हो जीत के जज्बे का जूनून संसाधन जयदा हो या कम ।।
पराक्रम पुरुषार्थ के लिये मतलब नहीं पुरुष के होंना उतिहातु अर्थ बताता धरती बाबा ।।
दोनों का युग पथ प्रकाश की प्रेरणा है बिरसा मुंडा।।
बिरसा के जन्म जीवन का मूल्य यही है युवा ओज़ का आकर्षण धैर्य ,धीर ,वीर का आभूषण क्रांति कर्म ,धर्म ,अर्थ ,सत्य युवा वेग।।
नायक युवा कमान के तीर की धार युवा चेतना का संवाहक ।।
जन जाती जंगल पहाड़ो की संस्कृत सिमित संसाधन जीवन संघर्षों का नाम।।
घड़ी पल प्रहर दिन रात निरंतरत प्रकृति की परीक्षा का जीवन नाम ना शिकवा ना शिकायत वनवासी लड़ता रहता जीवन संग्राम।।
विरसा मुंडा आदि संस्कृति का प्रभा ,प्रभाह युगों ,युगों तक भारत की पीड़ी दर पीड़ी अक्षुण होता समबृद्ध प्रेरक पुराण पुरुषार्थ।।
हर वर्ष आती वर्षात
हर वर्ष आती बरसात का
हर्ष कहीं विषाद लाती बरसात।।
तपन की अगन से मुक्त कराती
रिमझिम फुहारों से जीवन के भाव!!
उत्साह जगाती बरसात।।
कड़कती बिजली बादल में सूरज
छिप जाता आशा विश्वास जगाती
बरसात।।
सुखी धरती हृदय की हरियाली
खुशहाली का संदेस सुनाती बरसात।।
दादुर और पपीहा का स्वर
नाचते मोर प्रकृति प्राणि सामंजस्य का राग सुनाती बरसात।।
फुहार झम झम छम छम बरसात अंगिया चुनरी भीगे
प्यासी कली पिया सागर से मिलन की चाह बरसात ।।
कागज की नाव बारिस का पानी
भीगना बचपन की मस्ती बरसात।।
गांव किसान की आशा विश्वाश
हरा भरा गांव ऊम्मीदो की बूंद बूंद बरसात।।
चंद्र से युग का नाता
काहाँ से आते , कहाँ चले जाते ,
तुम्हारा यू आना जाना प्रेम, सुंदरता सौंम्य ,शीतलता से नाता।।
सूरज से तुम्हारा मित्र शत्रु सा नाता
सूरज के जाने से तुम्हारा होता है आना तुम और सूरज ही युग ब्रह्मांड समय व्यख्याता।।
चंद्र तुम प्रेम के पग पल प्रहर
तुझे ही देख मानव प्रेम की प्रेयसी चुनता अपनाता।।
सुंदरता का दर्पण तू युग मे हर
कोई मुखड़ा अपना तेरे दर्पण में देखता इतराता।।
कभी तुम दूज के चंदा कच्चे
धागे का रिश्ता बहन भाई का पावन नाता।।(भैया दूज)
चौथ के चन्द्र गण गण पति उत्सव अम्बर से आवनी पर आता सुत शंकर सत्य शुभ मंगल कहलाता।।(महाराष्ट्र का गणेश उत्सव)
सुहागिन करती है, तेरी ही पूजा अर्घ्य आराधना तू ही सुहागन का चौथ का चन्द्र भी कहलाता।।(करवा चौथ)
तू ही वात्सल्य की महिमा तू माँ ममता चरणों का युग संसार चौथ का चंदा युग रिश्तो को भाता।। (गणेश चतुदर्शी)
अपनी कलाओं में निकलता दूसरे दिन खुदा ईश्वर की सच्चाई रमजान ईद ईश्वर एक सच्चाई युग को समझाता।।(ईद)
तेरे चलने से दुनियां में इस्लाम जागा खुदा का करिश्मा चाँद तू ही
बतलाता।। (इस्लाम मे गणना चाँद की गति पर होती है)
चौदवीं का चाँद, परी, हूर ,अप्सरा जन्नत स्वर्ग सुख सुंदरता की परिभाषा।। (चौदहवी चाँद)
पूर्णिमा का चंद्र तेरा रूप
युग तेरी चाँदनी की शीतलता में नहाता शरद का चन्द्र युग मानव
जन्म जीवन में अमृत की वारिश
जीवन अनुराग जगाता।। (शरद पूर्णिमा )
शरद चन्द्र ,शरद पूर्णिमा तेरी
महिमा का तेरी हस्ती मस्ती का
युग संसार सारा।।
धुंए का कहर
हर कस जिंदगी को जलाता
चला गया जान कर अनजान
नादान जिंदगी आग का दरिया
बनाता चला गया।।
जिंदगी चार दिन की
ज़िंदगी को खाक में
मिलाता चला गया जिंदगी
खूबसूरत इनयात जिंदगी
खुद ही मिटाता चला गया।।
साफ आसमान भी
काला हो जाता जब
उठता है धुआं धुंए के
धुंध घने कोहरे सा बनाता चला गया।।
सिगरेट बीड़ी का धुआं
लम्हा लम्हा जीवन को
समेटता ना जाने कब
जीवन हो जाये दुनियां
में दर्द की यादों जैसा जिंन्दगी
दल दल में डूबता चला गया।।
बड़ी मुश्किल से मिलती
ये जिंदगी कौड़ियों के मोल
मिटाता चला गया।।
जिंदगी प्यार मोहब्बत की
खुशियां खूबसूरत जिंदगी
मायूसीयत की भेंट चढ़ाता
चला गया।।
खांसते खांसते दम निकल
गया दिल जिगर जान जलाता
चला गया।।
मासूम जिंदगी की उम्मीदें
धुंए की दुन्ध दहसत की
भेंट चढ़ाता चला गया।।
जिंदगी
जिंदगी हमनाज है
जिंदगी अंदाज है
जिंदगी अरमा आकाश है!!
जिंदगी रिश्ते नातेदार कि है
जिंदगी धड़कन सांस कि है
जिंदगी आश विश्वास कि है
जिंदगी जज्बे जज्बात कि है
जिंदगी आपकी है लेकिन
नियत के हाथ कि है!!
जिंदगी तकदीर का तराना
जिंदगी जीने का बहाना
जिंदगी में जंग बहुत
जिंदगी के रंग बहुत
जिंदगी सस्ती बहुत
जिंदगी महंगी बहुत
फर्क सिर्फ आपका है
जिंदगी रखा बनाया
कैसी जिंदगी आपकी है!!
जिंदगी आप कि है
जिंदगी खास कि है
जिंदगी आम आदमी
जिंदगी इंसान कि है
जिंदगी ईमान कि है!!
जिंदगी चिराग है
प्रज्वलित मशाल है
जिंदगी मिशाल है
जिंदगी मजाक है
जिंदगी मुस्कान है
जिंदगी ख़ुशी गम
जिन्दगी लम्हा लम्हा
ढलती शाम है!!
जिंदगी किसी कि नही
जीने का अपना अपना
सलिका तरीका तराना
तरंन्नुम तरंग तमाशा
तीर तरकश जज्बा जवान
सुरमा सैनिक महान काल
भाल आशीर्वाद महाकाल है!!
जिंदगी कर्म योद्धा मान है
जिंदगी रास्ते वास्ते कि भी
पहचान है!!
जिंदगी धर्म मर्म ज्ञान वैराग्य है
जिंदगी साथ सारथी सार्थक
सकारात्मक पहल कदम काल
लम्हा समय सत्यार्थ है!!
जिंदगी इबादत है
जिंदगी इरादतन है
जिंदगी हस्ती है
जिंदगी मस्ती है
जिंदगी हद हस्ती मस्ती है!!
जिंदगी भीड़ का
मेला झमेला
जिंदगी परछाई का
साथ वीरान अकेला है!!
जिंदगी मोहब्बत है
जिंदगी इशिता इश्क है
जिंदगी जोश जन्नत है
जिंदगी मदहोश मन्नत है
जिंदगी परवरदिगार कि
दीगार है!!
जिंदगी मन मीत
जिंदगी राज हमराज है
जिंदगी नाटक
नौटंकी जिसके हम
पात्र कलाकार है!!
जिंदगी है आपकी फिर भी
नही आपकी जिंदगी कि डोर
कायनात के मालिक खुदा
साथ हाथ कि!!
जिंदगी दीवानो कि
जिंदगी परवनो कि
जिंदगी हकीकत कि
हद हस्ती!!
झूठ फरेब झमेला जिंदगी
करती खोखला कब विखर
जाए चोला रह जाए जिंदगी
के रास्तो का झोल झमेला!!
जिंदगी बेशक है आपकी
नही पैदा करने वाले
माँ बाप कि!
फिर भी जिंदगी
माँ बाप कि इनायत
खुदा कायनात का इनाम
जिंदगी अबरार कि
जिंदगी आपकी
जिंदगी इंसान कि
इंसानियत कि
जिंदगी वक़्त जहाँ के
यकीन अरमा दानिस
दर्द दुआ खुदा
रहम करम कि!!
जिंदगी आपकी है थाती
परिवार समाज समय खुदा
भगवान कि है!!
जिंदगी जीने का अंदाज़ है
जिंदगी खुशमिजाज है जिंदगी
गम कि गहराई का समंदर
डूबती कस्ती बर्बाद है!!
जिंदगी जिए तो जिए कैसे
बेमतलब जिंदगी आपकी है
जिन्दा दिल जिगर जहाँ कि है
जिंदगी आप कि है!!
मैईया का ध्यान लगा
माईया का ध्यान लगा लो तुम भक्ति निखर कर लो।।
ना काल समय सीमा ना जीवन मृत्यु माईया कि भक्ति मिलती रहे जनम जनम।।
माईया का ध्यान लगा लो तुम भक्ति निखर कर लो।।
दुख क्लेश जितने भी आये विचलित ना हो जाना माईया कि भक्ति ही एक सहारा ।।
माईया का ध्यान लगा लो तुम भक्ति निखर कर ।।
जब से मानव काया जनम मरण असह दुःख माया जनम मरण से मुक्ति का मोक्ष वरण कर लो ।।
विचलित होते माईया कि मूरत धारण कर लो दूजा कोई नही माईया को ही सर्वस्व समर्पित कर दो कल्याण करेगी माईया विश्वास तुम कर लो।।
माईया का ध्यान लगा लो तुम भक्ति निखर कर लो।।
माईया कुष्मांडा अष्टभुजा देवी जिनके कर सोहे कमल कमंडल अमृत कलश गदा चक्र बाण धनुष माईया कुष्मांडा प्रलय अंधकार प्रकाश सृष्टि का निर्माण माईया का आगमन चौथे दिवस नौ रात।।
माईया का ध्यान लगा लो तुम भक्ति निखर कर लो।।
आनहादत चक्र साधक मन अचंचल मन कुष्मांडा ध्यान अटल अविरल निर्मल निश्छल ।।
माईया का ध्यान लगा लो तुम भक्ति निखर कर लो
कोई ज़ब पथ भूल जाए
कोई जब पथ भूल जाये भटक यूं ही जाए मईया तू पथ बतलाए मईया तेरा नेह आशीर्वाद ।।
कोई जब पथ भ्रष्ट हो जाये कुछ समझ ना पाए मईया तू ही जप तप ध्यान जगाए मईया तेरा स्नेह आशीर्वाद।।
मईया ब्रह्म का अर्थ बताए तप मर्म दिखाए वेद तप ब्रह्म शब्द सत्य तथ्य बताए मईया तेरा स्नेह आशीर्वाद।।
कोई जब हताश निराश हो जाये तुझ्रे गोहराये तू भागी दौड़ी आये माईया तेरा स्नेह आशीर्वाद।।
आशा कि ज्योति जगाए पथ उजियार दिखाए मईया तेरा स्नेह आशीर्वाद।।
मईया ब्रह्मचारिणी ज्ञान ध्यान मर्म मार्ग दायनी तू ही जीवन शक्ति सत्य का सार बताये मईया तेरा स्नेह आशीर्वाद।।
मईया तेरा रूप रिझाये कर माला कमंडल सोहे तेज तेरा जग अंधियार मिटावे मईया तेरा स्नेह आशीर्वाद।।
वतन
तन वतन के लिये
मन वतन के लिए
भाव भावनाए
वतन का प्रवाह
वतन ही जिंदगी
वतन ही पहचान ।।
वतन पर जीना
मरना ही ख्वाब
हकीकत अरमान
वतन सलामत रहे
वतन से ही रिश्ता
खास अभिमान ।।
वतन की संस्कृति
संस्कार तिरंगा
शान स्वभिमान तिरंगा
वंदे मातरम माँ भारती के
आराधन का मूल
मंत्र सम्मान तिरंगा।।
सीने में वतन के
जज्बे की ज्वाला
सांसो धड़कन की गर्मी
वतन की अस्मत प्राण।।
चाहे जितने भी आये माँ
भारती को बनाने गुलाम
त्याग बलिदानों कि धरती
शान स्वभिमान!!
आजादी कि रक्षा के लिए मॉ
भारती के बीर सपूतो नें त्याग
दिया जीवन बलिदान किया प्राण।।
वतन की राह चाह में हो
गए कुर्बान ना कोई अफसोस
ना कोई ग्लानि हँसते हँसते
तिरंगे को दिया ऊंचाई
आसमान।।
दुश्मन आंख दिखाए
उसका कर दे वो हाल
जल बिन जैसे मछली
पानी बिन तरसे जीवन को
मौत की मांगें भीख
मर्दन कर देकर दे मान।।
वतन धर्म वतन कर्म
दायित्व सपनो में भी वतन
वतन की गरिमा गौरव का
पल पल मर्यादा की
गाथा गान का भान।।
आजादी के दीवानों के
बलिदानों उद्देश्य पथ का
पथिक स्वतंत्रत गणतंत्र
मौलिक मूल्यों कि अवनि
आकाश आन वान
जीवन जान।।
जय जगन्नाथ जग कल्याण यत्रा
जगन्नाथ भगवान
पूरन करते मनोकामना
पल प्रहर पूरी है धाम!!
जय जय जगन्नाथ
बलभद्र सुभद्रा
संग विराजे करते
भक्तन के कल्याण!!
जय जय भ्राता बलभद्र
बहन सुभद्रा शुभ मंगल
जय जगन्नाथ सत्य
अर्थ बतावत!!
सागर तट पूरी अति पावन
द्वारिकाधीश मध्य सागर
पूरी सिंधु जय जगन्नाथ
बलभद्र बहन सुभद्रा के
पाँव पाखरत!!
नगर भ्रमण में प्रभु
जगन्नाथ भाई बलभद्र
सुभद्रा संग निकलते
जन भांति भांति महत्व
सुनावत!!
त्रेता में सागर विनय
कीन्ह तीन दीन मागत
लंका पथ विनय न माना
धैर्य धीर राम का
क्रोध क्षमा मांगत सागर
लंका जाए का मार्ग
बतावत!!
द्वापर में प्रभु सागर
महिमा गरिमा मान
बढावत बसे मध्य
अरु तीर!!
धर्म मर्म कर्म
पाप पुण्य जन्म
जीवन मुक्त
मार्ग तीर्थ यात्रा!!
प्रभु जगन्नाथ रथ यत्रा
कारक कारण अनेकों
प्रभु इच्छा सृष्टि कल्याण
यात्रा!!
देवी देव संयुक्त यात्रा
प्रभु जगन्नाथ विष्णु
स्वंय बहन सुभद्रा देवी
अवनी धारक बलभद्र
युग धर्म सत्य सनातन
उजियार यात्रा!!
युग प्रकृति प्राणी
उद्धार बैभव विकास
प्रभु जगन्नाथ बहन
सुभद्रा बालदाऊ
आशीर्वाद यात्रा!!
वादा दावा जीवन के साथ भी जीवन के बाद भी
वादे तो वादे
वादों का क्या
वक्त ने मोहलत दी
निभा दिया
निभा नहीं पाये
तो हालात बयां किया
इन हालातों का क्या?
कभी माकूल
कभी दुश्मन
नामाकूल
हालत हालात
बदल सकते
गर तो करो वादा
जुबान जज्बे जज्बे
जज्बात का बयां इरादा
इरादे तो इरादे हैं
इरादों का क्या?
हारते हिम्मत की
शर्मशार कश्ती
मज़ाक हौसलों की
हद हस्ती!
नहीं पस्त कभी
हौसला नहीं
इरादों के जद में
हौसलों की हद
वादों का वजूद
इंसान का कद
वक्त जहाँ में
सबके लिये
बराबर है
मुंसिफ मिज़ाज़
न किसी का दुश्मन
न किसी का दोस्त!!
वक्त का दुश्मन
उसका कद्रदान
वक्त खुद के कद्रदान
पर मेहरबान
जाया करता जो
मिले वक्त को
वक्त ही कर देता
बेमोल उस शख्स को
खुद को खोजता
रह जाता वक्त के
थपेड़ों में लिपटा
भंवर भ्रम के जाल मे!!
बीत जाती जिंदगी
कोषते हुए तक़दीर
वक्त खुदा भगवान् को
तकदीर खुदा भगवान् का क्या?
तदवीर के तरासे इंसान का
चमकते ईमान का
वादे की हैसियत
वक्त की कीमत
वक्त का जर्रा जिगर
हौसलो इरादों के इंसान के
लफ़्ज जुबान की कीमत।।
वादे निभाने की ताकत
तकदीर खुदा भगवान् से मिल
जाने की आदत।।
जीवन के साथ भी
जीवन के बाद
भी वादे पर दावे का
अधिकार या वादों को
जीवन का बीमा कहूँ
या बीमा का जीवन
वादे दावे के दो मजबूत
हाथो के बीच
हर जीवन की लौ
रौशनी को सुरक्षित
संरक्षित रखने के संकल्प का
युग में नहीं विकल्प!!
जन जन का संवर्धन
सम्यक संचय और
निवेशन राष्ट्र राज्य्
जन का संरक्षण संवर्धन!!
भारतीय जीवन
बीमा निगम की शान
स्वाभिमान अभिमान
अभिकर्ता अधिकारी
कर्मचारीसमर्पित सेवक!!
वादे की शक्ति पहचान
जीवन भर साथ निभाते
जीवन के बाद सपूत
सहारा बन कर खड़े
हो जाते!!
भारतीय जीवन
बीमा निगम के
वादे के दावे को
आगे बढ़ कर
साथ निभाते।।
जरूरी नही की बीच लहरों में डूबे
जरूरी नही हम बीच
लहरों में जाकर डूबे
किनारा भी बहुत है
हस्ती मिटाने के लिए!!
किसी शायर नें है कहा-
अगर तूफ़ा डूबो देता तो
इतना गम नही होता किनारे
आके डूबा हूँ किनारा वेवफा
निकला#
किनारा वेवफा था
या खुद नही संजीदा
छोड़ दे फैसला वक़्त
काल समय के लिए!!
लहरों का किसी से ना
कोई रिश्ता नाता न वास्ता
लहरे तो अपनी मस्ती कि
कायल जैसे मर्जी बह लिए!!
कहती है लहरे कायनात
में हमारा कोई दुश्मन
नहीहम तो दिल दरिया
और समंदर कि गहराई
में उठते गिरते मचलने
के लिए!!
हर भटके को चाहे
तिनका ही क्यों न हो
उसके मुकाम के लिए!!
हवाओं के साथ आकाश
अरमान जज्बा जूनून
रफ़्ताऱ मे चलते बहते
हर भटके के मुकाम
किनारे के लिए!!
नगर नगर शहर शहर
गांव के किनारो
सरहदों से गुजरती
सावन कि घटाओं
भादों कि वर्षा
तूफान लिए!!
भादो कि काली रात में
यमुना कि लहरे इतराती
बलखाती खुदा भगवान
के पग पखारने के लिए!!
सागर छिर हो या नीर
दोनों कि गहराई बीच
उठती गिरती लहरे नीर
छिर कि हद के हैसियत
के लिए!!
शेष शय्या विराजते
शेष सय्या विश्व बैभव
विष्णु के पग पखारने क़े
लिए!!
हम दरिया झील मध्य
बीच गहराई वेग से निकलते
बहते मेरा मकसद कायनात
लिए!!
नही किसी को डूबोना
हमारा मकसद हम तो
बहते हे हर तिनके के
किनारे के लिए!!
जिंदगी सम्बन्ध रिश्ते नातो
प्रेम प्यार द्वेष घृणा मोहब्बत
नफ़रत ख़ुशी गम लिए!!
मिलना बिछड़ना आंसू
मुस्कान का कदम कदम
पथ पग पल प्रहर के लिए!!
जिंदगी फलसफो के बीच
गहराई से बहता निकलता
तूफान ना किसी को डुबोने
के लिए!!
डूब जाता हर वो इंसान
जिसके मन मैल दुनियां
भर से नफ़रत बैर
अपने जूनन इश्क का
बुखार नज़रो का अंधा
इंसान हुनर अक्लमंद
डूब जाता मक्कारी लिए!!
चुल्लू भर पानी ही
बहुत झरना झील दरिया
समंदर के बीच तूफान तो
बहुत दूर कि बात!
डूब जाता इंसान दिल
दिमाग़ मे जहर लिए!!
डूब जाता है इंसान
किनारों में तोहमद
किस्मत को देता
भूल जाता खुद का
करम दीन ईमान खुद
खुदगर्ज केलिए!!
जरूरी नही कि हम
बीच लहरों में जाकर
डूबे किनारे चुल्लू भर
पानी खुद कि नज़रों में
गिर जाना गहराई तूफान
काफ़ी है डूबनें के लिए!!
भयानक अंधकार में
खो जाता है इंसान
बंदर की व्यथा
बन्दर -कोइ कहता
कोइ मंकी चाहे जो
कह लो हम तो है
रामभक्त हनुमान
वंशज !!
विज्ञान का है कहना
मानव के आदि हम
मुझसे ही है विकास
मानव का मानव का
विज्ञान मानव जनता
नहीं मानता
माने तो माने कैसे?
बानर तो रह गए
जैसे के तैसे नर तो
नारायण से आगे निकल
नारायण हो गए
औने पौने बौने ।।
बन्दर कि अपनी
भाषा समाज संचार
संवाद अपनी शैली।
जब बैठते साथ कभी
चर्चा करते क्या चीज है
मानव?
मंदिर में बंदर स्वरूप
हनुमान कि पूजा करता
मंगलवार का व्रत रखता
आराध्य भी कहता!!
प्रत्यक्ष हमारा अपमान
तिरस्कार क्यों करता?
राम रावण के युद्ध में
हमने माता सीता का
पता लगाया सीता माता
मुक्ति युद्ध के नारायण
हम बानर!!
महा समुद्र को लाँघ
बाँध चूर किया अभिमान
धुल दुषित कर उसे हद
बतलाया ।।
महा युद्ध में बृक्ष पर्वत और
चट्टानों को शत्र बनाया ।।
मेरी कितनी पीड़ी
युद्ध के भेट चढ़ गयी
बिना किसी दुःख पीड़ा के
राम को विजयी बनाया।।
जगह जगह पर
मंदिर मेरे
मेरे नाम प्रसाद से
जाने कितने ही
मानव पलते।।
राम चरित मानस
हनुमान चालीसा में
मेरे ही गुण भजते।।
अब देखो सचाई क्या है
भटक रहा हूँ इधर उधर!
जंगल वन मेरा बसेरा
जो अब है गायब
मेरे मित्र साथी अब है
नदारत।।
हम बंदर मानव
समाज का हिस्सा
बनने कि कोशिश में
गली मोहल्ले चौराहो
शहर गावँ नगर नगर!!
लहु पथ गामिनी
विश्रामालय पर हर
रोज सुबह शाम
मानव बनने कि
कोशिश करते हम वानर ।।
भला हो डार्विन का
जिसने हममें है
आस जगा रखी ।
जो तुम प्रयास अभ्यास
करोगे वही तुम बन पाओगे।।
जिसका तुम त्याग
करोगे उसको विसराओगे ।
वन जंगल का त्याग किया
मानव बनने का अभ्यास
कर रहा ।
लेकिन मानव तो
मुझसे नफ़रत करता
गोली डंडो से मारता ।।
दिन रात दो रोटी की
तलाश बन्दर इधर उधर
भटक रहा।।
मानव है स्वार्थी
अपनी भूख मिटाने को
मुझे नचाता कैद कर
तमाशा बनाता ।।
बन्दर हूँ मर्यादा
पुरुषोत्तम का सेवक हूँ ।
मैं तो उनकी मर्यादा को
उनकी ख़ुशी के लिये
निभाता ।।
यही अंत नहीं
मानव मानवता
उत्कर्ष में मेरे
बलिदान त्याग का ।
जब भी कोई
असाध्य आफत में
मानव फंस जाता ।
मेरी किडनी गुर्दे
फेफड़े से अपनी
जान बचाता ।।
प्रयोग, प्रयोगशाला
मानव का बन्दर
अपने राजा हनुमान की
इच्छा में मानव कल्याण
फलीभूत करने को पैदा होता
और मरता।।
कभी वाहन के निचे
दब कर मर जाता
कभी विद्युत खंभों के
झटके से जल जाता ।।
कभी लौह पथ
गामिनी से काटता
मरता मेरे साथी मेरी
मृत्यु पर एक साथ सब
मिल बैठ ॐ शांति
शोक मानते क्लेश कष्ट मे ।
मर्यादा पुरुषोत्तम् से
करते एक सवाल
कहाँ गयी मर्यादा
आपकी मानव को
क्यों नहीं समझते ।।
सर्दी गर्मी बारिश की
मार झेलते तड़फ तड़फ
मर जाते ।
मुझमे भी एहसास है
मुझमे भी श्री राम है
इतना गर समझ सके
हे मानव समझो तब
हर बन्दर हनुमान है।!
फागुन की फुहार रफ्ता रफ्ता
बासंती बयार
रफ्ता रफ्ता
फागुन की फुहार
रस्ता रस्ता
होरी की गोरी का
इंतजार लम्हा लम्हा।।
आम के बौर
मधुवन की खुशबू ख़ास
कली फूल गुल
गुलशन गुलज़ार
रफ्ता रफ्ता।।
माथे पर बिंदिया
आंखों में काजल गोरे
रंग पे लाल गुलाल
बैरागी का खंडित
बैराग रफ्ता रफ्ता।।
भेद भाव की टूटती
दीवार गीले शिकवे
दर किनार भांग की ठंडई
गुझियों कीमिठास
रफ्ता रफ्ता।।
बूढ़े हुये जवान
जवां जज्बाआसमान
रफ्ता रफ्ता।।
खेतों में झूमती बाली
सरसों के पीले फूल
महुआ की महक सुगंध
रफ्ता रफ्ता।।
सूरज की बढ़ती शान
नदियों की कलवरव तान
जोगीरा फाग रफ्ता रफ्ता।।
अमीर गरीब ऊंच नीच
प्रेम रंगों के संग पंख
परवाज रफ्ता रफ्ता।।
दिल की चाहत का वर्ष
इंतज़ार लाया बसंत बाहर
जीवन के दिन चार होली
हर्ष हज़ार रफ्ता रफ्ता।।
फूल
तेरी किस्मत को क्या कहूँ
तू तो मानव मानवता युग की बगिया की गुलशन गुलजार।।
हर कली को फूल की किस्मत का इंतजार बेईमान भौंरो को क्या पता कब बिछड़ गया बिखर गया चाँद चकोर सा उनका प्यार।।
महबूब के आने पे बहारो की बरसात अरमानों के चाँद के चेहरे का सेहारा।।
वर माला में चाहतों की जिन्दगी का इज़हार गज़रे में संजती मीर गालिब की ग़ज़ल दिवानों महफिल की शान।।
हर सुबह शाम इंसा की आशाओं का विश्वास भाग्य भगवान् का श्रृंगार खुशियों खुशबू की गुलशन मुस्कान।।
गर खुशियों की खुशबू है तो गम में श्रद्धा कि अंजलि गुजरे रिश्ते यादों लम्हों की प्रसंग प्रेरणा जज्बात।।
देवो के सर पे इतराती माला में गुथी जाती पैरों से रौदी जाती।
हर सुबह कली डाली की बिना किसी अभिलाषा के फूल मानव मानवता युग की गम खुशियों भाग्य भगवान् मंज़िल मक़सद का बहार बन जाती।।
तेरी चाहत तो युवा जोश का सत्कार साहस शक्ति पराक्रम के परिधान नफरत तुझको कायर से धैर्य वीर धीर का अभिमान।।
कली फूल को भाषा जाती धर्म का मर्म नहीं मालूम जानती मात्र पुरुषार्थ की परिभाषा सम्मान।
वतन पे मर मिटने वालों के धूल की की फूल धन्य धरा धरोहर की पहचान।।
उपदेशों ही मुर्खनानम प्रकोप न च शांतय
छोटी सी चिड़ीया अपने अस्तित्व को जूझती ।
छाया नहीं फल इतनी दूर अपेक्षा की उपेक्षा के ताड़ खजूर ।
अपनी हस्ती मस्ती सुरक्षा की संरचना करती.।
तूफान शोला शैतान से जिन्दगी के सुकून प्यार परिवार का ना हो नुकसान चिंता करती ।
चिंता से व्याकुल हर जतन का इन्कलाब करती।
तिनका तिनका चुनती बारीक निगाहों से अपने आशियाने को बुनती।।
मज़बूत खूबसूरत तिनके तिनके में अपने सर्वोत्तम भाग्य भविष्य के दिनों का विश्वास पिरोती।।
अपने प्यार परिवार के साथ अपने श्रम करम दूर दृष्टि मज़बूत इरादों परिणाम का सुख भोगती।।
सुबह से शाम दाना चुन चुन खुद की जिन्दगी बच्चों का पेट पालती भविष्य संवारती।।
दिन महीने साल ऋतुए मौसम गुजरते जाते हर सुबह शाम नए उल्लास उमंग में बीता जाता।।
आखिर आ ही गया वो दिन जिसे दुनिया क्रूर काल कहती ।
ना कोई खास रूप रंग ना द्वेष दंभ ना घृणा ना प्रेम सिर्फ अपनी रफ्तार की अनंत यात्रा में आरंभ उत्कर्ष अंत ।।
अपने रफ़्तार की अनंत यात्रा में मिलते बिछड़ते जीवन अनेक की विरासत को समेटे ।
युगों युगों ब्रह्मांड प्रगति प्रतिष्ठा विकास विनाश का वर्तमान इतिहास ही काल।।
कभी उत्कर्ष का गवाह युग कभी युग की वेदना तड़फ छटपटाहट की गाय ।
काल ही मात्र मिशाल जो खुद की अनंत रफ़्तार की यात्रा में सुख दुख खुशी गम दर्द दिल जीवन जीव एहसास का ईश्वर गवाह।।
छोटी चिड़िया के आदि सुरक्षा संरचना विकास के अंत का समय आया मौसम बरसात ।।
बंदर महाकाल रुद्र का ही अंश आदि उत्कर्ष अंत में अंत ही उद्देश्य आया।।
सर्द का मौसम घनघोर बारिस चिड़िया अपने कर्म श्रम के मज़बूत आशियाने में जीवन की हस्ती मस्ती में झूमती ।।
काल का करिश्मा बंदर भी उसी ताड़ के पेड़ पर बरसात ठंड कि ठिठुरन से दांत किट किटाता हांफता कांपता बिवस बेवस परेशान बेहाल।।
बंदर को देख परेशान छोटी सी चिड़िया का मन व्यथित पड़ोसी पीड़ा से दुखी आहत गलती से किया बेहाल परेशान बंदर से सवाल।।
क्यों नही बनाते अपने अरमानों उम्मींदो का कर्म श्रम धर्म कर्तव्य दायित्व बोध का आशियाना?
चाहे आए आंधी या तूफान इंद्र का कोप या ज्वाला कराल सदैव ही अपने अंदाज़ कि दुनिया की जिन्दगी साम्राज्य का अभिमान।होगे ना कभी परेशान ।।
बंदर को छोटी औकात की पंक्षी की बात ना आयी रास द्वेष दंभ की क्रोध अग्नि से आहत ।
छोटी सी चिड़िया के तमाम अरमानों उम्मींदों के श्रम शक्ति की उपलब्धि हस्ती मस्ती के आशियाने को किया तार तार।।
टूटा सपनो का यथार्थ आदि उत्कर्ष का अंत काल के अनंत यात्रा में काल बंदर का कमाल।।
सुझाव उपदेश उद्देश्य विहीन के शत्रु छोटी सी चिड़िया की छोटी सी दुनिया उद्देश्य विहीन की दिशाहीन अंधेपन का शिकार ।।
काल की चाल आदि उत्कर्ष अंत की प्रक्रिया परम्परा प्रतिस्पर्धा के जीवन का युग ब्रह्मांड।।
उमंग फागुनी
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
झड़ते पत्ते बीते यादों की
बात नव कोमल किसलय
नव उत्सव उत्साह ।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
वीणा पाणी कि वीणा के
झंकार आगमन शुभ बेला
सत्कार युग चेतना जागरण
संस्कृति संस्कार ।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
गौरा व्याह गौने आई कैलाश
झूमे नाचे मंगल गांवे भोला
शंकरपरिवार।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
मंजरी से मदमस्त आम की डाल
सुगंध बयार चहुँओर मधुमास
झूमती खेतों में बाली प्रसन्नता
पुरस्कार।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
भस्म से शिव होली खेले
जीवन सत्य सत्त्यार्थ
दुःख शुख रंगों का औघड़
दानी शिव संसार।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
हाथ कनक पिचकारी
मर्यादा का अबीर गुलाल
अवध में होली खेलत रघु
नाथ।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
गोपी संग राधा की टोली
लड्डू फूल लठ्ठ की होली
होली भावों के रंग हज़ार
विरज में होली खेलत नन्द
गोपाल।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
सब देव होली खेलें
मानव कि क्या बात
गांव नगर गलियों में
जोगीरा फागुन राग
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
उमर जाती पांति ना पूछे
कोई प्रेम रंगों की बरसात
युवा उत्साह खास मधुमास
होली प्रेम प्यार का जागृति
भाव।।
रंग फागुनी उमंग फागुनी
संग लाया मधुमास।।
होली और ससुराल
मस्ती का आलम
ना कोई फेर फिक्र
बस हर होली नई
नवेली।।
ना जाने कितनों की
रंग दी अंगिया चोली
गाल पे मला गुलाल।।
सबका अनुमान बच्चा
अबकी होली फंस गया
बेड़ी में बंध गया।।
छोरी गोरीयां भी करती
इंतज़ार हमे भी निहारे
लगाए रंग गुलाल।।
क्या खूब था मेरा भी
होली के सामाजिक
बाज़ार में भाव।।
हुआ विवाह दोस्तो ने
कहा बेटा अब पाया
औकात अबकी होली में
शून्य हुआ तेरा बाज़ार भाव।।
बात भी सही हालात
भी वही जो होली से
हप्तों महीनों मेरा करते
इन्तज़ार ।।
अब नही करते
याद होली की तो
दूर की बात।।
अब मेरी होली की
मस्ती का बचा एक
ही आस बीबी का
मायका मेरी कथित
ससुराल।।
हज़ारों प्रस्तवित
ससुराल के दिन बीते
हम एक कैदखाने में
सिमटे।।
आनेवाली थी विवाह की
पहली वर्ष गांठ उससे पहले
ही आया मधुमास जगाया
ससुराल की पहली होली
सपना हकीकत का राज।।
पहली होली ससुराल से
आया फरमान बबुआ पहली
होली बा यही मानावे के बा
रंग होली के जमावे के बा।।
हम भी पहुँचगये ससुराल
पहली होली के दामाद
बहुत अच्छी तरह है याद
जली होली और हम हुये
रात ही को हरा पिला लाल।।
कैसो थोड़ी बहुत सोवे के
मिली मोहलत होली की
हुड़दंग की शुरुआत सूरज
की पहली किरण के साथ।।
जो ही आता सिर्फ इतना
ही कहता पहली होली के
दामाद इनके याद दियावो
के ह औकात।।
बीबी की सहेलियां कुछ
लाइसेंस के साथ कुछ
लाइसेंस की खुद करती
तलाश।।
होली की मस्ती
में मदमाती मुझे ही अपने
लाइसेंस का जैसे उम्मीदवार
बनाती।।
हमारी बीबी देखती गुरर्राती
जरा सलीके से रंग लगाओ
जीजा जी शर्मीले है
जैसा समझती नही वैसे है।।
हम भी करते मौके की
तलाश मिलते ही कुंआरे
होली का निकालते भड़ांस
रंग अबीर का बहाना।।
वास्तव में कैद जंजीर शादी
व्याह की सिंमाओ का अतिक्रमण
कर जाना।।
ससुराल में कहती बीबी की
सहेलियां ई त बड़ा है खतनाक
मौका पौते कर देत ह हलाल।।
के कहत रहल बबुआ बहुत
सीधा हॉउवन ई से जलेबी
की तरह कई घाट मोड़ के
घुटाँ हॉउवन।।
ससुराल की पहली होली
में साली सरहज बीबी की
सहेली क पहली होली म
ऐसा दिए सौगात अब
तक नाहीं भुलात।।
अब तनिक सुन हाल
उमर साठ और होली
क हाल ।।
होली के दिन पहुंचे
ससुरारल मिलां बैठे
साला खुदो पैसठ साठ।।
हमारी आदत खराब
सीधे कोशिश करे लाग
पहुंच जाए ससुरारल
क हरम खास।।
बोला गुर्रात रिश्ते का सार
हो गए बुड्ढे नाही शर्म लाज
का बात आदत से नाही
आवत बाज़।।
अंतर बेटवा पतोहि हवन
उनके आइल हॉउवन नात
रिश्तेदार बच्चन के होली
मानावे द मत बन कोढ़ में
खाज।।
देखते नही हम भी ड्राइंग
रूम में बैठे मख्खी मच्छरों
से कर रहे बात होली आई
रे रावण के सिपाही।।
हम त मनई शामिल तोरे
जमात जब देखे साले का
हाल खुद पे तरस आया मन
में आया खयाल उहे हम उहे
ससुरारल।।
होली की उमंग
मस्ती भी खास मगर अब
हम ना रंग उमंग ना गुलाल
हम होली की त्योहारों की
ऑचरिकता के पुराने प्रतीक
चिन्ह मात्र ।।
रंगोत्सव
प्यारा मेरा देश
विश्व में विशेष
जाति धर्म भाषा
अनेक।।
एक दूजे का विश्वाश
आदर सम्मान का परम्परा
समाज परिवेश नेक
राष्ट्र और देश।।
मौसम ऋतुए संग
उमंग उत्साह तीज
त्योहार बहुआयामी
बहुरंग।।
कली फूल सुगंध
वासंती बयार नूतन
जीवन श्रृंगार भौरों का
गुंजन गान खुशिया अनंत।।
कोयल की तान
चेहरों पर मुस्कान
आशा और विश्वास
अभिलाषा कि अवनी
आकाश लाया मधुमास।।
पीले सरसों के फूल
हरियाली खुशहाली
मंगल शुभ कोमल
किसलय प्रकृति
वैभव संसार!!
खुशियों के रंग हजार
होली का त्योहार
अवध में होली खेली
राम बिरज में नंदलाल।।
शिव की होली अलबेली
विभूति भस्म रंग गुलाल
होली खेलत शिव परिवार।।
तिहुं लोक में मधुमास
नूतन जीवन आभास
स्वर्ग अवनी एक समान
होली का त्योहार।।
गंव नगर गली गली
जोगिरा फाग
जाति पाती नहीं जाने
पूछे कोई सतरंगी प्यार
होली का त्योहार।।
बूढ़े हुए जवान उम्र
नहीं सके बांध रिश्तों
के स्वर मिठास
होली का त्योहार।।
मादकता मधुमास
द्वेष घृणा समाप्त
आनंद उत्सव उत्साह
होली का त्योहार।।
होली में मिटते भेद भाव
सम भाव का देश समाज
लहलहाते खेत खलियान
होली का त्योहार।।
बाज़ारू समय समाज
मानवता संस्कार बदल गए
नैतिकता का ह्रास बहुत है
मूल्य समय समाज बदला
मूल्य और मूल्यांवान बदल गए!!
संस्कृति बिकाऊ बाज़ारू है
दिल दौलत दुनियां मे सब
सिक्कों से तौले जाते अब
अर्थ शास्त्र सिद्धांत बदल गए!!
लाज लज्जा लालच लिप्सा
अंधी दुनियां अंधकार बहुत है
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम दिशा
दिशा दृष्टि विचार बदल गए!!
ख़नकते सिक्कों के बाजार यहाँ
ख़नकते सिक्कों के बाजार मे
नीति नियत नियम व्यवहार
बदल गए!!
खनकते सिक्कों के बाज़ारों मे
सम्बन्धो के नव आयाम बहुत
निहित स्वार्थ अब प्रेम धर्म
कर्म कृतज्ञ कृतार्थ बदल गए!!
एक दूजे कि टांग खींचना
एक दूजे के शव सीढ़ी से चढ़ना
बढ़ना प्रतियोगिता प्रतिस्पर्धा
मापदंड और मान बादल गए!!
भौतिकता कि चकाचौध दुनियां
उत्सव और उजियार बदल गए
सिक्कों के बाज़ारों मे भाव भवना
बेमानी सत्य और सत्यार्थ बदल
गए!!
यत्र तत्र सर्वत्र बाज़ार बहुत है
मानव क्रेता विक्रेता व्यवसाय
व्यापार ही जीवन महिमा मर्म
मान्यता महान बदल गए!!
नगर शहर चौराहों पर
मानव मजदूरों सा बिकता
मानव क्रेता मानव बिकता
हानि लाभ आधार बदल गए!!
बाज़ारों का निर्धारक
मानव हद हस्ती हैसियत
पालक ईश्वर भी बिकता
सरेआम खुदा भगवान
बदल गए!!
आए दिन आबरू होती
नीलामी चीख और
चित्कार सुनाता नहीं मुरारी
कौन बचाये सब है भूखे
बाज़ काल भाग्य भगवान
बदल गए!!
प्रगति प्रतिष्ठा शक्ति रसूक
सर्वमान्य मूल्यांकन
मूल्यांवान बदल गए
सिक्कों के बाज़ारों मे
सच्चाई ईमान बिकता
न्याय अन्याय बिकता
अद्भुत अंदाज़ बदल गए!!
जिन्दा आदमी अर्थी अंग
प्रत्यँग ग़रीब और ग़रीबी
बिकती आश विश्वास अवनी
आकाश बदल गए!!
जीवन आदि मध्य
कैसा यह संकल्प
मूल्य जीवन का
संदेश शुभारम्भ ।।
बहु उद्देश्यीय बहु आयामी
जीवन पथ बचपन युवा प्रौढ़
परिवार समाज।।
भौतिकता का प्रकाश
आकांक्षाओं तक पंहुचने
कि प्रतिस्पर्धा प्रतियोगीता
होड़।।
नव युग नव जीवन का
सूर्योदय पुनः आता जीवन
का लेखा जोखा मानव स्वंय
लगाता।।
अतीत पल प्रहर स्मृतियों में
दोहराता उठो नव चेतना
संस्कृति का निर्माण करो
जन साधारण जीवन का
त्याग करो।।
नव मानव मूल्य
सिद्धांत नही सत्यार्थ करो
जीवन अतीत स्मरण सदा
सबको स्वीकार रहो।।
सनातन साधु संतो का वलिदान
कौन कहता है
सत्य सनातन
साधु संत धर्म कर्म
साधना आराधना
शास्त्र आचरण
का सिर्फ प्रवचन
सुनाते।।
जब- जब राष्ट्र
समाज पर
क्रुरता आक्रांता
आता माँ भारती को
कोई आँख दिखता
साधु संत समाज
जागृत हो राष्ट्र रक्षा मे
आगे आता!!
साधु संत का
देवालय से क्रांति
चेतना के अंगारों में
खुद की आहूति
भेंट चढ़ाते।।
घंटे और घड़ियालों की
आवाजों से राष्ट्र
समाज को
नित्य जागते ।।
कुरूक्षेत्र के
युद्ध भूमि से
योगेश्वर कृष्ण का
गीता ज्ञान प्रत्यक्ष
प्रमाण धर्म युद्ध में
पांचजन्य की
शंखनाद है करता।।
भारत ने भुला दिया
सत्य सनातन के
साधु संतों सन्यासियों का
देश भक्ति बलिदान!!
गौरवशाली इतिहास
सर्वश्व न्यवछावर कर
बचा लिया जिसने
भारत की लाज।।
भारत की आजादी
गणतन्त्र शुभ पर्व माँ
भारती की रक्षा पर
मिट जाने वाले संतो की
हम याद दिलाते ।।
मिट गए हज़ारो
जल नदी की
रक्त सी हो गयी लाल
अफगानी आक्रांता के
नियत और इरादे रौंदना
भारत भूमि पे था करना
मौत का था नंगा नाच ।।
विकृत विचारों का
दानव दुष्ट निकल
पड़ा भारत को करने
शर्म सार भारत
भूमि की मर्यादा का
करने तार तार।।
नागा साधु संतों ने
किया प्रतिकार एक
हाथ मे वेद पुराण
दूजे हाथ तलवार।।
दुश्मन से करने
दो दो हाथ
हर हर महादेव
जय भवानी की
गूंज गान।।
नागा साधु संतों ने
भारत की मर्यादा
रक्षा में सर्वश्व किया
बलिदान नापाक
इरादों के दुशमन कर
दिया धूल धुसित
भगा लेकर जान।।
बचा लिया होने से
भारतीयों का
कत्लेआम ना जाने
कितने भारतवासी
दानवता की चढ़ते
भेट मंदिर तोड़े
जाते होती वहाँ
आज़ान।।
वर्तमान में भारत की
पीढ़ी गुलामी
की एक अलग
काला अध्याय
सुनतेऔर सुनाते।।
ना जाने क्यों
भुल गया भारत का
इतिहास भारत के
सत्य सनातन के
नाग साधु संतो के
सौर्य पराक्रम का
बलिदान।।
गनतंत्र दिवस पर
नागा साधु संतों के
बलिदान बीरता का
इतिहास हम भारत
वासी है गाते श्रद्धा से
शीश झुकाते।।
भारत की आज़ादी
अस्मत पर ना जाने
कितने ही इतिहास
अनजाने -जाने
हम याद दिलाते!!
भारत की आज़ादी
अस्मत के बलिदानों
को कृतज्ञ राष्ट्र के
माथे का चंदन
गौरव गरिमा मान
अभिमान सुनते ।।
जिंदगी आहिस्ता
जिंदगी चलती
आहिस्ता आहिस्ता
बचपन जवानी
जरा की शाम आती
जाती सुबह शाम पल
प्रहर बढ़ती घटती
जाती है आहिस्ता
आहिस्ता।।
खुशी गम के साये
आते जाते जिस्म
किराए का घर
चढ़ता ढलता
आहिस्ता आहिस्ता।।
नीद नही आती
सारी रात जगाती
भूख प्यास नही
नज़रों से दिल में
उतरती जुनून
इश्क जगाती
मोहब्बत आहिस्ता
आहिस्ता।।
नशा जिंदगी
सुरूर गुरुर
मिलना बिछुड़ना
रिश्तो का मुकाम
मौका मतलब मिर्ची
मिश्री शहद जिंदगी
आहिस्ता आहिस्ता।।
कभी मौका
कभी धोखा
कभी हसरत की
हस्ती जिंदगी
आहिस्ता आहिस्ता।।
कही घर है
कही घराना
जिंदगी रिश्तो
रास्तों का याराना
नज़राना आहिस्ता
आहिस्ता।।
नशा जिंदगी
दौलत का कभी
शान शोहरत का
रिश्तों मद की मधुशाला
आहिस्ता आहिस्ता।।
खास खुशबू
खासियत खुमार
हाला प्याला उत्साह
उत्सव से गुजरती
उमंग तरंग तरानों
उछलती फिर
मकसद मंजिल को
बढ़ती आहिस्ता
आहिस्ता।।
हे कांहा
हे कान्हा केशव
माधव मधुसूदन
युग मे जाने कितने
नाम तुम्हारे।।
आएं है ज़िंदगी मे
जबसे तुम्ही बसे
हर गम खुशी पल
प्रहर में संग साथ
हमारे।।
हे कान्हा केशव माधव
मधुसूदन युग मे जाने
कितने नाम तुम्हारे।।
पुकारे जब भी
कोई हृदय से
आए दौड़े
सांझ सवेरे!!
समय का कोई
नही है बंधन
प्रेम भाव ही है
तेरा एक बंधन
बांध सके जो
उसको तारे।।
हे कान्हा केशव माधव
मधुसूदन युग मे जाने
कितने नाम तुम्हारे।।
सांसे धड़कनो से
नित निरंतर
शब्द स्वरों के
साथ हमारे
श्री कृष्ण गोविंन्द
हरे मुरारे ।।
हे कान्हा केशव माधव
मधुसूदन युग मे जाने
कितने नाम तुम्हारे।।
मातु पिता गुरु
सखा हमारे
हे नाथ नारायण
वासुदेव कुरुक्षेत्र है
यह जीवन नयन दृष्टि है
तुम्हारे।।
कर्म धर्म का
मार्ग बताते
जन्म जीवन
रहस्य सुनाते
तमस मार्ग
जीवन में तुम्ही
बनते पथ उजियारे।।
हे कान्हा केशव
माधव मधुसूदन
युग मे जाने कितने
नाम तुम्हारे ।।
जब भी नईया उलझे
भव सागर भँबर में
तुम्ही एक जो पार लगाते।।
हे कान्हा केशव माधव
मधुसूदन युग मे जाने
कितने नाम तुम्हारे।।
अधरम् मधुरम
वचन मधुरम
नयनयम मधुरम
हसितं मधुरम
मधुराधिपते
रखिलं मधुरम
मधुर मनोहर
भाव छवि तुम्हारे।।
हे कान्हा केशव
माधव मधुसूदन युग मे
जाने कितने नाम तुम्हारे।।
मैखाना पैमाना
.मैखाने को कद्र दानाे का
इंतजार दीवानों को शाम
ढलने का इंतजार!!
शमा रौशन हुई
महफिल हुई गुलजार
किसी के हाथ गम का
पैमाना मैखाना
किसी कि खुशियाँ
मधुशाला मैखाना!!
किसी को ना खुशी
ना गम जिंदगी लम्हा लम्हा
सांसो धढ़कन का
पैमाना मैखाना!!
हर कोई जिन्दगी के
शौक के मस्ती कि
तलाश में इधर उधर
खोजता मैखाना!!
कोई हुस्न के जाम का
दीवाना इश्क के जुनून के
पैमाने का परवाना!!
बेवफा मोहब्बत से
घायल के दर्द कि दवा
दुआ कि शराब मैखाना!!
हर कोई नशे में डूबा
कही दौलत ही
मैखाने का पैमाना
किसी को हुस्न का
गुरुर मैखाने का
पैमाना!!
न पैमाने में नशा
न मैखाने में नशा
जिंदगी के मकसद के
जज्बे में डूब
जाने में नशा!!
दुनियाँ का वो दीवाना
परस्तिस कि तमन्ना का
है परवाना है मैखाना!!
जिंदगी और हवाई जहाज़
जिंदगी हवाई जहाज
ख्वाबों खयालो कल्पना
उड़ानों में उड़ती ।।
खूबसूरत कल्पना लोक
विचरती कभी कल्पना
ख़्वाब खयाल वास्तविकता
वास्तव के रनवे पर चक्कर
काटती एरोड्रम पर रुकती।।
करती कुछ विश्राम ।।
नई सोच नई कल्पना की
उड़ान उड़ती नए अम्बर की
ऊंचाई का पंख परवाज़।।
उड़ते आकाश में कभी
आशाओ के बादल साफ
निराशाओं का अंधकार।।
डगमगाता खतरे के देता
संकेत कभी सभल जाता
कभी अविनि पर चकनाचूर।।
अविनि से जीवन शुरू
अविनि ही शमशान कब्रिस्तान
कल्पनाओं ख्वाब की उड़ान
विखर जाती टुकड़े हज़ार।।
हवाओं में उड़ना इंसानी
जिंदगी फितरत अंदाज़
जिंदगी का जांबाज
पंख परवाज हवाई जहाज।।
कल्पना लोक में उड़ते
समय मौसम खराब
तमाम खतरे तमाम
फिर भी बेफिक्र लड़ता
जीवन की कल्पनो की
उड़ान भरता जिंदगी में
इंसान।।
जिंदगी और रेल गाड़ी
जिंदगी समय काल
संग नित्य निरंतर
चलती सुख दुख की
अनुभूति।।
जिंदगी रेलगाड़ी
रिश्तो के डिब्बो का
साथ रिश्तो के डिब्बों में
भावनाओ का सवार ।।
अपनी रफ्तार से मंजिल
की तरफ बढ़ती कभी
खुशियों का प्लेटफार्म
उमंग उत्साह के स्टेशन
पर करती विश्राम।।
पल दो पल विश्राम
उपरांत नए स्टेशन की
रफ्तार ।।
कभी दुःख पीड़ा के प्लेटफॉर्म
पर ठहरती शांत लेकिन ठहरती
नही वहाँ फिर चल पड़ती।।
दौड़ती जिंदगी की राह
पर जोखिम बहुत घटना
दुर्घटना की आशंका से
नही इनकार।।
जिंदगी रेलगाड़ी की तरह
अपना सफर पूरा कर पहुँच
जाती यार्ड जहाँ से गंदगी
होती साफ जैसे कर्मानुसार
जिंदगी का इंजन और डिब्बो
का रिश्ता सफर।।
जिंदगी के तराने जज्बात
जिंदगी के तरानों में ना
कोई उलझन होगी इबादत
मोहब्बत ख़ुदा की रहमत होगी
इधर जिंदगी का तराना उधर
खुदाई मोहब्बत होगी।।
रहमत होगी खुदा की किसी रहम
की नही कोई जरूरत होगी
देखने वालों के नज़र का नूर होगी
इधर नगमा सनम छेड़ेंगे उधर
जमाने मे हलचल होगी।।
हुश्न से घायल नही इश्क का
हुश्न होगी मिलन को ना रोक
पायेगा जमाना इधर हुश्न से
हट जाएगा नकाब दीदार
जन्नते हूर होगी।।
कलम की बंदिशें नहीँ ग़ज़ल
दिल की होगी अफसाने दुनिया
मशहूर होगी सनम दामन के दरमियाँ
महफिलों में शमा रौशन इधर मैं और
तू उधर दुंनिया मगरूर होगी।।
ना वो मेरे पीछे ना मैं उनके
आगे लम्हा लम्हा कदम कदम
हमदम उनकी नज़रों ने कह दिया
सब कुछ मेरी नज़रों ने जाना देखा
दुनियां ने बन गया अफसाना।।
सजने और संवरने दो और
कुछ निखरने दो मैं सिर्फ देखता
रहूं फितरत नही शोहरत के साथ
पैदा शोहरत का तूफान बढ़ने दो।।
जिम्मेदार इंसान
नशा जिंदगी का
अभिशाप नशा नाश
विनाश को देता दावत
नशा जिंदगी का पाप।।
नशा दौलत का ताकत का
शोहरत का हुश्न का नशा
अंतर मन का खोखला
अभिमान।।
नशा शराब धीरे धीरे
गलता इंसान शराब
दौलतमंद का नशा दारू
ठर्रा महुआ गरीब
का अहंकार।।
गांजा भांग चरस
अफीम हीरोइन हसीस
जाने क्या क्या नाम नही
मिलता परम्परागत नशा
तो ड्रग एडिक्सन नए
युग का नशा नायाब।।
खैनी गुटका पान
धूम्रपान तंबाकू बीमारी
पैसा देकर खरीदता
इंसान।।।
अब तो ऐसे हालात
नादान सिगरेट
बीड़ी का कस
खिंचते वर्तमान
भविष्य के कर्णधार।।
पर्यावरण प्रदूषित प्रकृति
परेशान ना जाने कितनी
बीमारिया प्रदूषण पर्याय।।
तम्बाकू खैनी बीड़ी
सिगरेट जीवन में छैनी
धीरे धीरे खोखला करती
जिंदगी मजधार में ही
निबट जाता इंसान।।
बीड़ी सिगरेट के धुएं में
पल प्रहर जलता घुट घुट
कर मरता इंसान।।
कैंसर जैसी भयंकर बीमारी
को बैठे बैठे दावत देता सुर्ती
तंबाकू के सेवन से इंसान।।
पीताम्बर का आवाहन
युग विश्व के मानव सुनो
ध्यान लगाय सुर्ती तंबाकू
बीड़ी सिगरेट से तौबा
कसम उठाओ आज।।
बीबी बच्चों पर तो कुछ
रहम करो जिनका जीवन
तुमसे तुम ही हो उनके
जीवन खुशियों के नाज़।।
असमय अगर बीमारी के
बन गए ग्रास महंगा बहुत
इलाज इलाज में ही जाते
कंगाल ।।
जीवित गर रह पाए तब
भी जीवन भार नही रहे
यदि परिवार झेलता सजा
दर दर फटेहाल।।
नौबत ही क्यो आये तुम
जिम्मेदार इंसान ऐसा कुछ
भी ना पालो सौख नशा
जीते जी ही मर जाए
चाहत का परिवार।।
कुछ तो रहम करो
खुद पर ना आये कोई
बीमारी आफत जंझाल।।
बसन्त
उल्लास है उमंग है.
रंग में बसन्त है
ध्यान कर्म धर्म मर्म
ज्ञानऔर प्रसंग है।।
बजती है बीणा
डमरू बजता मृदंग है
बहती बयारों में
कण कण माँ भारती
चरणों की धूल और
फूल है।।
उल्लास है उमंग है रंग में
बसंत है ध्यान कर्म धर्म
मर्म ज्ञान और प्रसंग है।।
साध्य साधना के
पग पग आराधना के
गूँजते साज और संगीत है।।
उल्लास है उमंग है रंग में
बसंत है ध्यान कर्म
धर्म मर्म ज्ञान और प्रसंग है।।
कोयल की मधुर गान
आम की डाली के बौर
मधुबन और सुगंध है।।
सुबह संध्या की लाली
चाँद की चाँदनी
नवचेतना का संचार
संदेस है।।
उल्लास है उमंग है
रंग में बसंत है
ध्यान कर्म धर्म मर्म
ज्ञान और प्रसंग है।।
हरियाली झूमती
खेतों की बाली
धन धान्य किसान
मजदूर का अभिमान
मुस्कान का
गांव और देश है।।
उल्लास है उमंग है
रंग में बसंत है
ध्यान कर्म धर्म मर्म
ज्ञान और प्रसंग है।।
शक्ति की भक्ति माँ के
वात्सल्य का स्नेह प्रसाद
का प्रवाह अनमोल
है।।
उल्लास है उमंग है
रंग में बसंत है
ध्यान कर्म धर्म
मर्म ज्ञान और प्रसंग है।।
सांसो में आश विश्वास
धड़कनों में उठती तरंग है।।
उल्लास है उमंग है
रंग में बसंत है
ध्यान कर्म धर्म मर्म
ज्ञान और प्रसंग है।।
भाग्य भगवान का
आगमन सत्य अर्थ
मार्यादा का गुण गान
का जागृति जागरण
परिवेश है।।
उल्लास है उमंग है
रंग में बसंत है ध्यान
कर्म धर्म ,मर्म ज्ञान
और प्रसंग है।।
प्यारा सा गांव
प्यारा सा गांव
बचपन की
परिवरिश मित्र
मंडली ठाँव।।
लगता था कभी
ना छूटेगा बचपन
प्यारा सा गांव
नदी का किनारा
पीपल की छांव।।
प्रथम अक्षर से
परिचय करवाते गुरु
जी पहली पाठशाला
शिक्षा,परीक्षा प्यार
आती झींक माँ होती
परेशान ।।
बापू डॉक्टर बैद्य के
पास ले जाते माँ उतरती
नज़र कई बार मिर्च
सरसो सर के चारों
ओर घुमात नजर
उतरती बारम्बार।।
नज़र उतरती आग में
मिर्च सरसो
जलती मिर्च और
आग के धुएं से
खांसते खांसते
नज़र उतर जाती।।
माँ खुश हो जाती
बड़े गर्व से कहती
अब किसी की नज़र
ना लगे भोली सी माँ
को क्या पता जिसका
नज़र उतरती उसकी
जिगर का टुकड़ा है
कितनाशरारती शैतान।।
गांव की मित्र मंडली
सुबह शाम दिन रात
अवसर तलासती
गिल्ली डंडा कबड्डी
कंचे खेलने का जुगत
बनाती।।
बचपन की शरारतों में
शामिल गेन तड़ी
लुका छिपी का खेल।
बचपन की मित्र मंडली
की क्या राम रहीम
रहमान ओंकार
अल्लाह हो अकबर ।।
पता नही सिर्फ निश्छल
जिंदगी निर्द्वंद प्रवाह ।।
ग्रीष्म की तपती दोपहरी
आम के बागों की धूमा
चौकड़ी कच्चे आम का
टिकोरा अमिया दिन का
आहार।।
घरवाले परेशान गया
कहाँ उनके घर खानदान का
कुल दीपक।कभी कभी
मरोड़ी जाती कान रोता
माँ होती परेशान!!
दुलारती पुचकारती
अपनेआँचल में समेटती ।।
उसके दामन के आंचल में
भूल जाता कान ऐठन की
पीड़ा डांट फटकार मार।।
मां की ममता की
शक्ति भुला देती
तमाम दर्द घाव।
दुनियाँ में कही स्वर्ग है
तो माँ की चरणों मे
उसके आँचल में
सिमट जाता संसार।।
गांव का बचपन निडर
निर्भीक दुखों से अंजान।
अब तो घर के काक्रोज
चूहों मछरों से भय लगता
जाने कहाँ चला गया
गांव का बचपन
शक्ति साहस।।
बचपन मे मेले छुट्टियों
त्याहारों का करते इंतज़ार
मेलों में घूमते शरारतों से घर
परेशान।।
दिवाली के गट्टे लाई
चीनी की मिठाई मिट्टी के
रंग बिरंगे खिलौनों की
भरमार।।
होली में कीचड़ मिट्टी रंग
पिचकारी उत्साह धमाल
ईद में मित्र मंडली के संग
सिवई का स्वाद ।।
मुहर्रम में ईमाम हुसैन की
हर दरवाजे पर इबादत
ताजिये की शान।
गांव की नदी में नहाने
का खोजते बहाना
पहली वारिस में भीगना
कागज़ की कश्ती बारिस
की पानी की नाव।।
आता वसंत शुरू हो
जाता सुबह की पाठशाला
पाठशाला से छूटते ही
वासंती बयारों की सुगंध
का आरम्भ होता उमंग उत्साह
गांव की गलियों में
टोलियो संग दिन भर घूमना ।।
ब्रह्म मुहूर्त में महुआ के
सफेद चादर को
समेटना पाठशाला
ना जाने के बहाने ही
खोजना।।
नासमझ बचपन की
अठखेलियों जाने कब
कहाँ खो गयी
होने लगे समझदार ।।
समझने लगे जाती पाती
का भेद भाव धर्म और
मानवता का द्वेष दम्भ
गांव का भोला बचपन
क्या बिता हम जाती धर्म
ईश्वर की अलग पहचान
के किशोर अभिमान
बन गए।।
हो गये नौजवान छूट
गया गांव रोजी रोजगार
की तलाश में कभी देश
प्रदेश विदेश में पहचान
को परेशान।।
अब गांव में अब नजर
आने लगी लाखो कमियाँ
छूट गया बचपन का गांव
खून खानदान मित्रो की
मंडली आती नही याद।।
तीज त्योहार में माँ बाप
से हो जाती मुलाकात
गांव हुआ ख्वाब।।
जिंदगी रूठ गयी
जिंदगी रूठ गई
जाने कहाँ खो गई
एक दायरे में सिमट गई
खोजता हूँ घनघोर
आंधेरो में रास्ता
जिंदगी की चाहतों का
वास्ता।।
जिंदगी के सब
दरवाजे बंद
बंद दरवाजो
दस्तक दे रहा हूँ
खत्म ना हो जाये
अरमान आरजू की
ज़िंदगी सिर्फ रह जाए
जीने का नाम।।
हिम्मत जोश
ताकत से जिंदगी को
चाहो की राहों के बंद
दरवाजे पर दस्तक
दे रहा हूँ।।
बंद दरवाजे की
दस्तक का शोर बहुत
आवाज नही सारी कोशिशें
करता थक हार जाता
उदास निराश।।
दिल से आती आवाज
क्यो होता परेशान होगा
कोई इंसान तेरे लिये
फरिश्ते सामान।।
तेरी जिंदगी के मुकाम
मंजिल का हमसफ़र
दोस्त जिंदगी की राहों के
बंद दरवाजों पर तेरी
दस्तक को करेगा
कामयाब।।
सुन जिंदगी के
मुसाफिर खुद के दिल के
बंद दरवाजों दस्तक दे
तेरे ही दिल से गुजरती
तेरे जिंदगी की कस्ती।।
दिल के बंद दरवाजों पर
दी दस्तक खुल गए सच्चाई
ईमान इंसान के द्वार खुद के
दिल मे ही खुदा का हो गया
दीदार।।
जिंदगी की राहों का खत्म
हो गया अंधकार चाँदनी सी
धवल नव कोमल कली सी
जन्नत की परी सामने मंजिल
सी खड़ी।।
बंद दरवाजों पर मेरी
दस्तक की आवाज गायब
मीठी सी आवाज
लबो पे मधुर मुस्कान
जिंदगी की मंजिल
राह की शान ।।
खत्म हो गयी मायूसी
निराशा आशा विश्वाश की
जागी खूबसूरत
जज्बे कीचिंगारी ज्वाला।।
खुल गए जिंदगी के
सभी रास्ते टूटे सारे
अवरोध बेफिक्र चल
पड़ा जिंदगी की राहों में
अकेला कारंवा बनता
गया जिंदगी अरमंनो की
तमाम मंजिले जमी
आसमान मुठ्ठी में बंद।।
जिंदगी कि इबारत
जिंदगी का सफर
गम खुशी आंसू
मुस्कान तन्हाई
कारंवा नफरत
मोहब्बत की दासता
दरमियान।।
मन के कागज़ पर
लम्हे कुछ लिख
जाते जिन्दगी
जज्बात ज़मीं
आसमान ।।
नित्य निरंतर प्रभा
प्रवाह का ठहराव
चलती जिंदगी
रिश्ते नाते प्यार
मोहब्बत
दुश्मनी दोस्ती।
मन के कागज पर
जिंदगी की याद
इबारत।।
कुछ भूलता मिटाता
कुछ साथ याद
जख्मो की शक्ल
कुछ जिंदगी के हसीन
लम्हे हम सफर ।।
मन के कोरे कागज
पर हुश्न इश्क मोहब्बत
जज्बा जुनून सुरूर
गुरुर ईमान गुनाह के
अक्षर अल्फ़ाज़ दर्ज।।
इंसान की चाहत
मन के कोरे कागज
पर सोने के अक्षर
अल्फ़ाज़
खूबसूरत चमकते
सोहरत की इबारत।।
मंजूर नही खुदा को
इंसान अपनी मर्जी से
दर्ज करे मन के कोरे
कागज जिंदगी लम्हो
कदमो की तारीख
इबारत।।
हद हैसियत की लाइने
खिंच देता मन में चाहत
नफरत दोस्ती दुश्मनी
जज्बे के बीज फसल
लहलहाते।।
इंसान की जिंदगी का
सफर जंग का मैदान
लम्हा लम्हा मन के कोरे
कागज़ पर रंग बिरंगी
बहुरंगी इबादत के इबारत।।
भारत का अभिमान
अरमानों के आसमान पे
लहराता जन गण मन कि
शान वंदे मातरम का
सम्मान भारत का
अभिमान।।
गंगा की धाराओं की
कल कल कलरव की
आवाज सत्य अहिंसा का
गांधी जय जवान जय
किसान।।
अरमानों के आसमान
पे लहराता जन गण मन
कि शान वंदे मातरम का
सम्मान भारत का अभिमान।।
भारत की माटी के
कण कण की ललकार
जागो भारत के नव जवान
नए जोश में,नए ओज से,
नए तेज से करने भारत का
नव निर्माण।।
अरमानों के आसमान पे
लहराताजन गण मन कि
शान वंदे मातरम का
सम्मान भारत का
अभिमान।।
आजाद मुल्क के
लम्हे लम्हे की है यही पुकार
श्रमेव जयते कर्मेव जयते
के जन जन का देश महान।।
अरमानों के आसमान पे
लहराता जन गण मन कि
शान वंदे मातरम का
सम्मान भारत का
अभिमान।।
जय हिंद जय भारत ,
आजादी के दीवानों के
त्याग बलिदान की
स्वतंत्रता गणतंत्र राष्ट्र
भारत की गौरव गरिमा मान।।
अरमानों के आसमान पे
लहराता जन गण मन कि
शान वंदे मातरम का
सम्मान भारत का अभिमान।।
पिता और पुत्र
कंही खो न जाए तेरी हसरतों में
तेरे संग चलते चलते मचलते।
जमाने कि यादों में हद भी ना पाऊं
तेरे कारवां को सजाते बनाते ।।
कंही खो न जाए तेरी हसरतों में
तेरे संग चलते चलते मचलते।।
हमें ए गुमाँ है तू ही मेरी जान है
तुझसे ही मेरी जिंदगी के अरमा अंदाज है कही दम ना निकले तेरी
धड़कनों से।।
कंही खो न जाए तेरी हसरतों में
तेरे संग चलते चलते मचलते।।
तू ही आदमी है तू ही इंसान है
मेरी दुनियां का तू ही भगवान है
कहीं मिल ना जाए मंदिरों मस्जिदों में।।
कंही खो न जाए तेरी हसरतों में
तेरे संग चलते चलते मचलते।।
तू ही मेरी मंजिलों का कश्ती और मांझी ख्वाबो ख्वाहिशों का तू ही
उड़ान है कहीं उड़ ना जाए तुंफ़ा
बादलों में ।।
कंही खो न जाए तेरी हसरतों में
तेरे संग चलते चलते मचलते।।
जिंदगी कि इबारत
जिंदगी का सफर
गम खुशी आंसू
मुस्कान तन्हाई
कारंवा नफरत
मोहब्बत की दासता
दरमियान।।
मन के कागज़ पर
लम्हे कुछ लिख जाते
जिन्दगी जज्बात
ज़मीं आसमान ।।
नित्य निरंतर प्रभा
प्रवाह का ठहराव
चलती जिंदगी
रिश्ते नाते प्यार मोहब्बत
दुश्मनी दोस्ती।
मन के कागज पर
जिंदगी की याद इबारत।।
कुछ भूलता मिटाता
कुछ साथ याद
जख्मो की शक्ल
कुछ जिंदगी के हसीन
लम्हे हम सफर ।।
मन के कोरे कागज पर
हुश्न इश्क मोहब्बत
जज्बा जुनून सुरूर गुरुर
ईमान गुनाह के
अक्षर अल्फ़ाज़ दर्ज।।
इंसान की चाहत
मन के कोरे कागज पर
सोने के अक्षर अल्फ़ाज़
खूबसूरत चमकते
सोहरत की इबारत।।
मंजूर नही खुदा को
इंसान अपनी मर्जी से
दर्ज करे मन के कोरे
कागज जिंदगी लम्हो
कदमो की तारीख इबारत।।
हद हैसियत की लाइने
खिंच देता मन में चाहत
नफरत दोस्ती दुश्मनी
जज्बे के बीज फसल लहलहाते।।
इंसान की जिंदगी का
सफर जंग का मैदान
लम्हा लम्हा मन के कोरे
कागज़ पर रंग बिरंगी
बहुरंगी इबादत के इबारत।।
जिंदगी अजीब
जिंदगी भी अजीब
कभी अपनो से दूर
अपनो के ख्वाब
दिखती।।
अपने गैर से हो जाते
गैर अपनो से लगते
जिंदगी में बनते विगड़ते
रिश्तों में गुजर जाती।।
इंसान कभी हालात
हाथो मजबूर तो कभी
अपनो से वेबश ।।
जिंदगी का जीने का
अंदाज़ चाहियेहर हालत में
मुस्कुरानाचाहिये।।
दौर इम्तहानों के इम्तहँ
गुजरते कदम नही डगमगाना
चाहिये ।।
जिंदगी में मोहब्बत की
दुआ इश्क इबादत का
मरहम चाहिये।।
आलिया जिंदगी में
इश्क बेहद जरूरी
इश्क खुदा से फरमाना
चाहिये।।
जरूरी नही नशा शराब
से हो जिंदगी जीने का
अंदाज़ वहीद नशा ।।
जिंदगी के नशे को
जज्बे के शीशे में उतार
कर देखो यारो
आलिया जिंदगी का
मज़बून बताना चाहिये।।
जिंदगी खो गयी
जिंदगी ऐसे मोड़ आ गयी
निराश हताश
जाने कहाँ खो गयी
खोजता हूँ जिंदगी
जीने के बहाने
अतीत की आवाज आ गयी।।
इंसा वही हो जिंदगी में
तमाम मकसद मुकाम
हासिल किये
क्या बात हुई
जिंदगी ठहर गयी।।
अतीत की आवाज़
दिलों दिमागपे छा गयी
जिंदगी फिर नई मुकाम
पा गयी ।
चल पड़ी फिर
अंदाज़ नया
आतीत की आवाज़
क्या बात आ गयी।।
मुश्किलों में जिंदगी ने
जज्बा नही छोड़ा
मौका धोखा परखना
सीखा बीते जिंदगी में
जाने कितने
तारीख का नाज़
अतीत की आवाज
चाह की राह ।।
कितनी ठोकरों से
घायल जहाँ को कर दिया
कायल जिंदगी को
जिंदगी की हद
हस्ती याद आ गयी।।
अतीत की आवाज़
कदमों के निशां जिंदगी में
जिंदगी की सच्चाई
जिंदगी को जिंदगी की
हद बता गयी।।
मायूस जिंदगी जाग गयी
अपनी हैसियत पहचान गयी
विखरे जज्बात जुड़ गए
जिंदगी अपनी रवानगी में
चल गई।।
हर इंसान की जिंदगी में
अतीत के लम्हे खास
दुनियां के लिए खास
जिंदगी की राहों में जब भी
नजर आए अंधेरा
पीछे मुड़ कर
देख लीजिये
अतीत की आवाज़
सुन लीजिए।।
टूट जाएगी मुश्किलों की
ठोकरे जिंदगी की राह
आईने की तरह साफ
जिंदगी नए उमंग
नई मंजिल चल गई।।
जीवन अनमोल
बेमोल जीवन का मोल क्या
बेमोल हवाओ से चलती सांसे
बेमोल जल से जीवन
बेमोल नेह स्नेह के रिश्तो का
रिस्ता समाज भाई बहना का प्यार
बचपन जवानी जीवम का सद्भाव
श्रृंगार।।
ममता भाव भावना लुटती
मिटती माँ ममता का आँचल
साया दुलार छांव।।
ममता मातृ शक्ति अंतर्मन का
प्रस्फुटित प्रबाह जीवन संस्कृति
संस्कार कि बुनियाद।।
ममता का मोल नहीं
ईश्वर खुदा भगवन नही
चुका सकता ममता का मोल
मिटती नही घटतीं नही सिमटती
नही ममता का प्रवाह मन जीवन
को सिंचित करता दिशा दृष्टि का
उद्देश्य पथ आवनी आकाश।।
ममता मनमोल मिलती
बेमोल ममता की समता का
ना ओर ना कोई छोर
ममता की घटाए वर्षा और बारिश
ममता बेमोल मनमोल मन भावो
जीवन रिस्ता समाज की दिशा दृष्टि
अजोर।।
ममता का मोल नहीं
ममता का तोल नहीं
ममता का ऋण नहीं
ममता मन भावो जीवन
उत्कर्ष ।।
मां ममता का शाश्वत
संसार सत्य
ममता व्यक्त अव्यक्त
मन मन्दिर की आभा
आस्था विश्वास।।
ममता का मोल जीवन
ममता अमूल्य अनमोल।।
आंसू ना बहने दो
भावों मूल्य के आंसू यू ही ना
बहने दो।
आशा उद्देश्य पथ पथिक
अतीत के कदमो को ना
मिटने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
तमस से उजियार जीवन
पल प्रतिपल विश्वास
इच्छा और परीक्षा की
कसौटी व्यर्थ आंसू ना गिरने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
दुःख दर्द भावों के उत्सर्ग
हृदय मन भावों में ही
रहने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
परतंत्र नही स्वतंत्र नही
कायर कमजोर नही
हृदय में उजियार का
दीपक जलाने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
हृदय भाव मे जलते दीपक
इच्छा आधार प्रकाश
इच्छाओं कि साहस शक्ति
सूरज चाँद निखरने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
समय काल तो चाल है
समय स्वय की गति चालों के
स्वर शब्द की गूंज प्रेरणा
प्रसंग परिणाम पुरुद्धार पुरुषार्थ
संग साथ ही रहने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
यदि अंतर्मन से आये आंसू
तूफान जीवन की परम
परीक्षा काल के धन दौलत
आंसू का अवमूल्यन ना होने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
भय भाव को मिटा लुटा
देते व्यक्ति व्यक्तित्व आंसू
स्वयं के युग मे युग का
परिहास ना बनने दो।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
माँ बाप भगवान का आशीर्वाद
जीवन के झंझावत स्वय के आँसू
पुरस्कार सम्यक रहने दो।।
भाव मूल्य के आँसू
यूँ ही ना बहने दो।।
दिल और चेहरा
चेहरे तो चेहरे
चेहरों का क्या?
अच्छे बुरे बदसूरत
खूबसूरत चेहरों का
दोष क्या?
चेहरे तो ईश्वर
बनाता चेहरों का
माँ बाप से नाता
चेहरे से मानव की
गरिमा महिमा की
परिभाषा ।।
चेहरे से नही
पहचाना जाता
ईमान दुनियां में
मशहूर दिल को
देखो चेहरा ना देखो
चेहरे ने लाखों को
लूटा दिल सच्चा
और चेहरा झूठा।।
ईश्वर भी सुनते
सुनते दिल सच्चा
चेहरा झूठा हो गया
बोर सोचने को
हुआ विवशदिल चेहरे
दोनों ही मेरी कृति
आनमोल फिर एक
सच्चा एक झूठा का
क्या कलयुग में झोल?
ईश्वर स्वयं हुए
मजबूर दिल चेहरे को
एक जैसा बानाने का
किया संकल्प
दिल नही दिखता
चेहरे को भी
पर्दे में रखने को
कर दिया मजबूर।।
ईश्वर ने ब्रह्मांड के
आधे हिस्से प्रकृति
को दे दिया आदेश तुम
करो कुछ ऐसा
दिल चेहरे में
समानता हो जैसा।।
प्रकृति बोली मेरे
मालिक आका इसमें
कौन सी बड़ी बात
मानव मुझे प्रतिदिन
अपने लाभ के लिए
रौंदता मैं होती परेशान
फिर भी रहती शान्त
क्योकि सम्पूर्ण प्राणि
मेरे ही जैसे संतान।।
मगर आपका
आदेश का अक्षरशः
पालन करना मेरा
धर्म अब सृष्टि में
समाप्त होगी दिल
चेहरे में असमानता भेद।।
दोनों ही होंगे
अदृश्य फिर क्या था
चमगादड़ से कोरोना की
हुई उत्पत्ति लाइलाज
संक्रमण की मार परमाणु
बम से अधिक तरीका
सिर्फ दो ग़ज़ की दुरी
मास्क हुआ जरूरी।।
हर चेहरे पर मास्क
अब दिल की तरह मानव
हुआ मशहूर मास्क वाले
चेहरे ना दिल दिखता ना
चेहरा दिल असली नकली
चेहरे का दौर समाप्त ।।
दिल चेहरा दोनों ही खुश
अब असली लफड़ा खत्म
जो चाहे करो ना दिल की
पहचान ना चेहरे की पहचान
ना दीन ना ईमान पर्दे के
पीछे सब जायज कुछ भी
नही हराम।।
इंसान चेहरे पर चेहरे को
मास्क कहता नही कोई
पहचान जाती धर्म के मिटे
भेद भाव नकाब बुरखा
हिजाब इस्लाम मे औरतों की
अस्मत इस्लाम का सिंद्धान्त।।
औरत मर्द का भेद
मिटा दिया हर चेहरों पे
मास्क चढ़ा दिया धर्म मर्म
को मिटा दिया दिल
चेहरे में अंतर मिटा दिया
हाय रे भगवान ईश्वर खुदा
जीजस अल्ला बुद्ध महाबीर
गांधी कबीर ना रंग ना अबीर
ना गुलाल ना ईददिवाली ना
हिन्दू ना मुस्लिम ना सिक्ख
ना ईसाई सब लगते इंसान।।
मास्क वालो चेहरों से
नई दुनियां बसा डाला
नई संस्कृति संस्कार को
विवश मानव अब दिल चेहरे के
फर्क को ही नही सारे फर्क ही
मिटा डाला मास्क वाले चेहरों की
दुनियां बना डाला।।
रचना सिर्फ रचना कार के बस कि बात
रचना निर्माण
सिर्फ ईश्वर
बस की बात
मानव यदि
रचना करती
आत्मा ईश्वर
अंश साक्षात
विराजमान।।
कविदा मानस
पटल पर उपजा
विचार भाव
भावना प्रवाह
सम्यक समय की
धारा यथार्थ।।
कविता साहित्य
समाज का दर्पण
अतीत इतिहास
अविनि पर वर्तमान की
प्रेरक प्रेरणा का साक्षात।।
कवि की कल्पना
उडान व्यंग हास्य
परिहाश बीरता
भक्ति रौद्र रुद्र
बिभत्स करुणा
प्रेम रस श्रृंगार।।
कवि कविता की
मौलिकता
भौतिकयता
आध्यात्मिकता
जन्म जीवन
संस्कृति संस्कार।।
कविता को
कविता रहने दो
दूषित ना हो
कवि का रचना
संसार कवि
राष्ट्र समाज का
प्रहरी प्रहर प्रहर
राजनीतिक
व्यवहार।।
तुलसी की मानस
दोहा छंद चौपाई राम
मर्यादा का साक्षात
भाव आचरण संस्कृति
का युग संवाद।।
सुर सागर की
गहराई कृष्ण
वात्सल्य का
गान आज भी
कान्हा घर घर हर
नवजात का अभिमान।।
पृथ्वी राज रासो
चंद्र वरदायी
राजा कवि की
मित्रता का धन्य
धरोहर प्रमाण।।
दिनकर, निराला
पंथ ,हरिऔध
महादेवी रघुपति सहाय
हरिवंश बच्चन राय
जाने कितनी अभिव्यक्ति
भाव का भारत हिंदी साहित्य महान।।
कविता को कविता
रहने दो उठे ना कोई
विवाद कवि तो देश काल
परिस्थिति वर्तमान प्रबाह।।
कवि निश्छल निर्विकार
निर्विवाद निर्झर निर्मल
गंगा जमुना सागर में गागर
गागर में सागर की भाव
भवना यथार्थ।।
कबीर रहीम बिहारी
रसखान मीरा निराकार
साकार ब्रह्म भाष्य
भाषा साहित्य
गौरव गान।।
कविता को कविता
रहने दो दूषित ना हो
कवि की कल्पना
रवि कवि का संगम
समन्यवय साथ।।
मौसम और फूल
ऋतुएं मौसम
आती जाती
सबकी शेष
विशेष पहचान
मौसम मधुमास
ऋतु बसंत क्या बात।।
प्रातः की बेला जैसे
स्वर्ग सुबह प्रभात
लहलहाते खेत
खलिहान सबृद्धि कि
आश विश्वाश।।
फूलों की छतरी बौर
मंजरी आम की
डाल मदमस्त
बसंत बयार के
झोंको में आम बौर
मंजरी की सुगंध।।
ब्रह्म मुहूर्त कि बेला
मुर्गे कि वान
कोयल की मधुर
तान फूलों की बगिया
कली फूलों की छतरी
रस लोलुप मकरंद का
क्रंदन चहुंओर।।
ऋतुएं मौसम भी
मानव युग समय
काल जीवन प्रवाह
आदि अनंत में
कली फूल किसलय
कोमल फूलों की
छतरी खुशियो
पल यादों
चाहत की बात।।
जिंदगी आजमाने लगी है
जिंदगी आजमाने लगी है
चाँदनी मुस्कुराने लगी है
घने बादलों के साये में
आरजू आसमाँ बताने लगी है।।
सुबह सूरज की मुस्कान
दिल के अरमाँ जागती
कभी सावन के फुहारों में
वासंती बयारों में जिंदगी
मुस्कुराने लगी है।।
ख़ाबों की अंगड़ाई
चाहतो तन्हाई
परछाई दिल की
दस्तक मुहब्बत
जगाने लगी है
जिंदगी मुहब्बत
बताने लगी है।।
जज्बे की जमीं को
जन्नत की है ख्वाहिस
इरादों के आईने जन्नत
दिखाने लगी है
जिंदगी जिंदगी
बताने लगी है।।
जिंदगी है मासूका
मासूक है जहाँ ,जहाँ
जिंदगी में आशिकी अश्क
बेपनाह ।
नज़राने हज़ार
जिंदगी मकसद से
मिलने पास आने लगी है।।
जिंदगी का नसीब
कभी गम के आसूं
शबनम के मोती समन्दर
किनारे कभी बैठा
मोतियो का इन्तज़ार।
जिंदगी ख़ुशी औ
गम बताने लगी है।।
जिंदगी सावन की घटाओं
की अदाएं हवा के झोंको
में बिखरी जुल्फों में छिपा
चेहरा कभी सूरज की लाली
कभी अँधेरा ही अँधेरा
जिंदगी जिंदगी का
मतलब बताने लगी है।।
नशा है जिंदगी
अंदाज़ जीने का
ना सकी है ना पैमाना
नजर आता नहीं
मैख़ाना नशे में
झूमती जिंदगी
जिंदगी नसीहत का
नशा बताने लगी है।।
नशा जूनून
नशा सुरूर बिन
पिए शराब
जिंदगी का नशा
लाज़बाब जिंदगी
गाती हस्ती में
जिंदगी
नशा नशेमन बताने लगी है।।
जिंदगी आग है
जिंदगी ख़ाक है
परवाने सी जलती है
दीवाने सी भटकती है
जिंदगी मायने
मोहब्बत समझाने लगी है।।
गांव बचपन खेल
बचपन दुनिया से अनजाना
बेगाना मौज मस्ती का तरंग
तराना याराना नज़राना।।
माटी कि खुशबू माटी चंदन
मिट्टी में लोटना मिट्टी के संग
मिट्टी का तन चिंता चतुराई से
मुक्त बचपन का अपसाना।।
खेल कूद ही जिंदगी रूठना
मनाना गांव की गलियों में
लुका छिपी खेलना बचपन
की दोस्ती शरारत में मिलना बिछड़ना।।
कबड्डी खेल बेमेल का
मेल गांव में लोकप्रिय कबड्डी
धन दौलत बैगैर भी खेल गांव
परम्परा खेल स्वास्थ अनुष्ठान
आराधना।।
दौड़ना हांफना
छोड़ना पकड़ना
छुड़ाना सांसों का
तोड़ना हड्डी की
मजबूती कबड्डी खेलना।।
गांव के बड़ई की
कलाकारी
लकड़ी का बैट
कपड़े की गेद
किक्रेट विलायती
खेल देशी गांव के
बचपन का आधुनिक
आकर्षक मेल।।
पेड़ों पर चढ़ना
इस डाली से उस
डाली कूदना उछलना
ओला पाती
बंदर की भांति गंवई
खेल दोस्ती का मेल।।
मित्र मण्डली में
आपसी सहयोग का
योग एक दूजे का
मनोयोग मैदान भाग
दौड़ खेल प्रेम बचपन
का योगक्षेम।।
सम्मिलित फुटबाल टीम भावना
भाव खेल भावना बचपन की
संस्कृति संस्कार संयोग।।
गांव की माटी की खुशबू
पीपल की छांव प्राथमिक
विद्यालय का मैदान।।
बाग बगीचे खेत खलिहान
खेल जीवन स्वास्थ विकास के
आयाम।।
कबड्डी,फुटबाल,ओला पाती,
इंग्लिश क्रिकेट गांव बचपन कि
खासियत खेल।।
जिंदगी रूठ गईं
जिंदगी रूठ गई
जाने कहाँ खो गई
एक दायरे में सिमट गई
खोजता हूँ
घनघोर आंधेरो में
रास्ता जिंदगी
चाहतों का वास्ता।।
सब दरवाजे बंद
बंद दरवाजो दस्तक दे रहा हूँ
खत्म ना हो जाये
अरमान आरजू
ज़िंदगी सिर्फ रह जाए
जीने का नाम।।
हिम्मत जोश ताकत से
जिंदगी चाहो की राह
बंद दरवाजे पर खोलने
कि कोशिश कर रहा हूँ।।
बंद दरवाजे की दस्तक
शोर बहुत आवाज नही
सारी कोशिशें करता थक
हार जाता निराश हो जाता हूँ।।
दिल से आती आवाज
क्यो होता परेशान होगा
कोई इंसान तेरे लिये फरिश्ते
सामान।।
तेरी जिंदगी मुकाम
मंजिल का हम सफ़र
दोस्त जिंदगी की राहों के
बंद दरवाजों पर तेरी दस्तक
करेगा कामयाब।।
सुन जिंदगी के मुसाफिर
खुद दिल के बंद दरवाजों पे
दस्तक दे तेरे ही दिल से
गुजरती तेरे जिंदगी की कस्ती।।
दिल के बंद दरवाजों पर
दी दस्तक खुल गयी सच्चाई
ईमान इंसान के द्वार खुद के
दिल मे ही खुदा का हो गया
दीदार।।
जिंदगी की राहों का खत्म
हो गया अंधकार चाँदनी सी
धवल नव कोमल कली सी
जन्नत की परी सामने मंजिल
सी खड़ी।।
बंद दरवाजों पर मेरी दस्तक की
आवाज गायब मीठी सी आवाज
लबो पे मधुर मुस्कान
जिंदगी की मंजिल राह की शान ।।
खत्म हो गयी मायूसी
निराशा आशा विश्वाश की
जागी खूबसूरत जज्बे की
चिंगारी ज्वाला।।
खुल गए जिंदगी के सभी
रास्ते टूटे सारे अवरोध
चल पड़ा जिंदगी की राहों में
अकेला कारंवा बनता ।।
जिंदगी अरमंनो की
तमाम मंजिले
जमी आसमान
मुठ्ठी में बंद।।
प्यार
प्यार दिल की गहराई का
जज्बात प्यार दिल जज्बे
की आवाज़।।
प्यार में सीमाएं नही
समाज देश की मर्यादा
मान्यता नही प्यार जज्बातों
का ज्वार।।
ना कोई बंधन ना कोई
विचार प्यार सिद्धान्त
प्यार तो हो जाता निःस्वार्थ।।
सोच समझ योजना
प्यार नही करता स्वीकार
प्यार तो मस्ती की हस्ती
अल्हण मासूम नादान।।
यदि होता काश कशमकश
संसय प्यार के दुश्मन
चाहत ख्वाब प्यार के यार।।
प्यार में शंका संदेह नही
प्यार में स्वयं सिद्ध का कोई
स्थान नही प्यार तो विरह वेदना
मिठास।।
प्यार में लूट जाता
मिट जाता फिर भी
दिल मोहब्बत की दौलत
से रहता माला माल।।
प्यार का इश्क जुनून है
प्यार में हुस्न दौलत है
प्यार दीवाना परवाना
की हसरत है।।
पैदा होता जब इंसान
माँ ममता की कोख से
मातृभूमि के आंचल
प्यार परिवरिश परिवार की छाँव।।
भाई बहन का प्यार
बापू के अरमानों का
प्यार दुलार का जीवन
लम्हा लम्हा रीति रिवाज।।
प्यार बिना नीरस जन्म
जीवन नीरस सब व्यर्थ
गोपीओ की शिक्षा भक्ति
प्रेम जगत का सार और कछु
सार नही है उद्धव ज्ञान कर्म
का ज्ञान।।
जिम्मेदार इंसान
नशा जिंदगी का अभिशाप
नशा नाश विनाश को देता
दावत नशा जिंदगी का पाप।।
नशा दौलत का ,ताकत का,
शोहरत का ,हुश्न का नशा
अंतर मन का खोखला
अभिमान।।
नशा शराब धीरे धीरे गलता
इंसान शराब दौलतमंद का
नशा दारू ठर्रा महुआ गरीब
का अहंकार।।
गांजा भांग चरस अफीम
हीरोइन हसीस जाने क्या
क्या नाम नही मिलता
परम्परागत नशा तो ड्रग
एडिक्सन नए युग का नशा
नायाब।।
खैनी गुटका पान धूम्रपान
तंबाकू बीमारी पैसा देकर
खरीदता इंसान।।।
अब तो ऐसे
हालात नादान सिगरेट
बीड़ी का कस खिंचते वर्तमान
भविष्य के कर्णधार।।
पर्यावरण प्रदूषित प्रकृति
परेशान ना जाने कितनी
बीमारिया प्रदूषण पर्याय।।
तम्बाकू खैनी बीड़ी सिगरेट
जीवन में छैनी धीरे धीरे
खोखला करती जिंदगी
मजधार में ही निबट जाता
इंसान।।
बीड़ी सिगरेट के धुएं में
पल प्रहर जलता घुट घुट
कर मरता इंसान।।
कैंसर जैसी भयंकर बीमारी
को बैठे बैठे दावत देता सुर्ती
तंबाकू के सेवन से इंसान।।
पीताम्बर का आवाहन
युग विश्व के मानव सुनो
ध्यान लगाय सुर्ती तंबाकू
बीड़ी सिगरेट से तौबा
कसम उठाओ आज।।
बीबी बच्चों पर तो कुछ
रहम करो जिनका जीवन
तुमसे तुम ही हो उनके जीवन
खुशियों के नाज़।।
असमय अगर बीमारी के
बन गए ग्रास महंगा बहुत
इलाज इलाज में ही जाते कंगाल ।।
जीवित गर रह पाए तब
भी जीवन भार नही रहे
यदि परिवार झेलता सजा
दर दर फटेहाल।।
नौबत ही क्यो आये तुम
जिम्मेदार इंसान ऐसा कुछ
भी ना पालो सौख नशा
जीते जी ही मर जाए चाहत
का परिवार।।
कुछ तो रहम करो खुद पर ना आये कोई बीमारी आफत जंझाल।।
जेठ की दोपहरी का एक दिया-भाग-1
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया दिया जलाने की
कोशिश में लम्हा लम्हा जिये
जिये जा रहा हूँ।।
शूलों से भरा पथ शोलों से
भरा पथ पीठ लगे धोखे फरेब
के खंजरों के जख्म दर्द सहलाते
खंजरों को निकालने का प्रयास
किये जा रहा हूँ।।
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाने को लम्हा
लम्हा जिये जा रहा हूँ।।
दर्द जाने है कितने
जख्म जाने है कितने
फिर भी युग पथ पर
फूल की चादर बिछाए जा
रहा हूँ।।
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाने को लम्हा
लम्हा जिये जा रहा हूँ।।
कभी सपनो में भी नही सोचा जो
वही जिये जा रहा हूँ।।
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाने को लम्हा
लम्हा जिये जा रहा हूँ।।
खुद से करता हूँ सवाल
कौन हूँ मैं ?
आत्मा से निकलती आवाज़
मात्र तू छाया है व्यक्ति
व्यक्तित्व तू पराया है
सोच मत खुद से पूछ मत
कर सवाल मत तू भूत नही
वर्तमान मे किसी हकीकत में
छिपी रहस्य सत्य की साया है।।
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाने को लम्हा
लम्हा जिये जा रहा हूँ।।
कोशिश तू करता जा लम्हो
लम्हो को जिंदा जज्बे से जीता जा
भरी जेठ की दोपहरी में दिया जलाने
कि कोशिश करता जा।।
गर जल गया एक दिया
जल उठेंगे अरमानो के लाखों
उजालों के दिए चल पड़ेंगे
तुम्हारे साथ साथ लम्हो लम्हो
में एक एक दिया लेकर युग
समाज।।
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाने को लम्हा
लम्हा जिये जा रहा हूँ।।
जेठ की भरी दोपहरी -3
अपने हस्ती की मस्ती का मतवाला
अपनी धुन ध्येय का धैर्य धीर गाता
चला गया जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाता चला गया।।
जेठ की भरी दोपहरी में एक
दिया जलाने की कोशिश में
लम्हा लम्हा जीता चला गया
जमाने को जमाने की खुशियों
से रोशन करता चला गया।।
ना कोई उसका खुद कोई अरमान था
एक दिया जला के जमाने को जगाके
जमाने के पथ अंधकार को मिटाके
जमाने का पथ जगमगा के ।।
लम्हो को जिया जीता चला गया
कहता चला गया जब भी आना
लम्हा लम्हा मेरी तरह जीना मेरे
अंदाज़ों आवाज़ों खयालो हकीकत
में जीना मरना ।।
जेठ की दोपहरी में एक दिया
जलाने जलाने की कामयाब कोशिश
करता जा जिंदगी के अरमानों अंदाज़
की मिशाल मशाल प्रज्वलित करता जा।।
जेठ की भरी दोपहरी-2
जेठ की भरी दोपहरी में
एक दिया जलाने की कोशिश में लम्हा
लम्हा जिये जा रहा हूँ।।
भूल जाऊँगा पीठ पर लगे धोखे
फरेब मक्कारी के खंजरों के
जख्म दर्द का एहसास।।
तेज पुंज प्रकाश मन्द मन्द शीतल
पवन के झोंको के बीच खूबसूरत
नज़र आएगा लम्हा लम्हा।।
चट्टाने पिघल राहों को सजाएँगी
शूल और शोले अस्त्र शस्त्र
बन अग्नि पथ से विजय पथ ले जाएंगे।।
चमत्कार नही कहलायेगा
कर्मो से ही चट्टान फौलाद पिघल
जमाने को बतलायेगा।।
लम्हा लम्हा तेरा है तेरे ही वर्तमान
में सिमटा लिपटा है तेरे ही इंतज़ार
में चलने को आतुर काल का करिश्मा कहलाएगा।।
पिया जमाने की रुसवाईयों
का जहर फिर भी जेठ की भरी दोपहरी जला दिया एक चिराग दिया।।
जिससे भव्य दिव्य है युग वर्तमान
कहता है वक्त इंसान था इंसानी
चेहरे में आत्मा भगवान था।।
बतलाता है काल सुन ऐ इंसान
मशीहा एक आम इंसान था
जमाने मे छुपा जमाने इंसानियत
का अभिमान था।।
देव शक्ति नारी
सृष्टि युग की गौरव
प्रकृति प्रवृति की
अनिवार्यता परम्
शक्ति की सत्ता नारी
शक्ति आधार।।
ब्रह्म विष्णु शंकर
शिवा वैष्णवी सरस्वती
परम् शक्ति सत्ता ईश्वर
की भागीदार।।
सृष्टि पूर्ण तभी होती
जब नारी लेती प्रथम
अवतार।।
नर नारायण की
शक्ति में नारी
समान हिस्सेदार।।
देश काल परिस्थिति
चाहे जो भी हो
नारी शक्ति से अविनि
आकाश निर्माण।।
नारी अनिवार्य तथ्य
तत्व सृष्टि की दृष्टी
दिशा संस्कृति संस्कार।।
देव नारी से नारी से
राष्ट्र समाज अर्धनारीश्वर
देव परम् शक्ति सत्ता का अंगीकार।।
नारी स्वरूप है परम्
शक्ति सत्ता भरत भारत
भारती दर्शन संस्कृति
प्रमाण।।
जिंदगी के अहम लम्हे पल
अस्तित्व का पल पल
याद नही वो पल
दुनियां में रखा कब
कब पहला कदम।।
माँ की लोरी याद नही
याद है माँ की ममता
आँचल का पल पल।।
याद नही बापू की
गोदी कंधा दुनियां में
सबसे ऊंचा सिंघासन।।
कुछ कुछ याद आता है
माँ की उंगली पकड़
सीखाखड़ा होना गिरना
औऱ संभालने का पल पल।।
याद है बापू के संग
विद्यालय का प्रथम
कदम पल गुरु से
बापू की आशाओं की
संतान का वर्तमान
भविष्य की चाहत
वर्णन का वो पल।।
याद हमे आज भी
वह पल जब माँ बड़े
गर्व से मेरे गुण गान
बखान करती हर पल।।
कभी कभी तो सुनने
वाले शर्माते मुझ जैसा
बनने को करते हलचल।।
पल पल दुनियां को
समझने की जिज्ञासा
का पल पल।।
जीवन संग्राम के पल
मां बापू का आशीर्वाद
भगवान का वरदान
जीवन की सच्चाई
संग्राम के पल।।
धीरे धीरे पढता बढ़ता
गिरता उठता जीवन
अर्थ अथर्व पल पल।।
सामाजिक अच्छाई
कुटिलता नीति नियत के
जाने कितने पल।।
पड़ता लिखता बढ़ाता
जाने कब कहां खो गया
बचपन नोक झोक
अभिमान का वह पल।।
हठ करता जो भी
मिल जाता उसी पल
खुशियों का वह पल।।
मा बापू को
जाहे जो भी पड़ता
करना पड़े मेरा हठ
हँसी ठिठोली खुशियो का
रहता पल।।
किशोर जवानी का
पल जिम्मेदारी
जिम्मा जीवन के
संग्राम का सच देखता
सिखाता पल।।
संघर्ष परीक्षा परिणाम के
पल आशा और निराशा के
पल जीवस की सच्चाई
पल पल।।
प्रेम प्रणय पल पल
जीवन कुछ ही
खुशियो का पल
प्यार यार आशिकी
मोहब्बत के
पल पल।।
कमसिन नादा
भोली नाज़ुक
मुस्कान जानशीन
जिंदगी जान का हर पल।।
वचन रीति प्रीति
प्रतिज्ञा काजीवन
साथ निभाने की
सांसो धड़कन का
धक धक पल पल।।
मादकता जीवन
मधुवन कि मदकता
कली कचनार का
खिलनें मुरझाने का
प्रहर पल!!
प्रणय प्रतीक्षा
साक्षात सपनो
हृदय भाव मकरंद
गुंजन करता पल पल।।
मगनी रश्म
जयमाल सात
जन्मो के बंधन का
सतरंगी पल।।
चांद चादनी की
परछाई प्रथम प्रणय
प्रियतमा का पल।।
जीवन माँ बापू से
विलग संसार
सांसारिकता का
प्रथम कदम पल।।
पल पल चलती
जिंदगी का हर
पल खास खासियत
का पल।।
बिछोह का पल
मिलन विरह का पल
विश्वास नही था माँ बापू
ना होंगे संग का पल।।
ना जाने कौन सा पल
मनहूस या परम्परा का पल ।।
जीवन मे आने जाने का
पल पल जिस कोख पैदा
पल भर में हुआ जुदा पल।।
वात्सल्य का आँचल
पल भर में ओझल बापू की
गोदी ने आंखे मूंदी कंधे का
सिंघासन छूटा चार काधो का
पल आसन पल।।
क्या अजीब है जीवन
जिनके कारण है जीवन
जिनकी छाया काया
अस्तित्व है यह जीवन
उनको ही आग लगाने का
आता है पल।।
कैसे कोई भुला सकता
जीवन ख़ुशी गम आंसू
प्यार मोहब्बत अक्षय
अक्षुण का पल पल।।
वर्तमान का परिवेश और बेटी नारी
विकसित होते पल प्रहर
समाज संस्कार पर प्रश्न
अनेको आज।।
शिक्षा मर्यादा संस्कार का
आधार आवारा भौरों की
शक्ल में नर भक्षी शैतान आज ।।
आवारा भौरों को आकर्षित
करता वर्तमान का परिवेश
समाज।।
दुःशासन क्या चीर खिंचेगा
वस्त्र नहीं पुरे तन पे श्रृंगार
पाश्चात।।
सुपनखा के कारण हुआ था
राम रावण का भीषण संग्राम।।
सुपनखा अब फैसन है
रावण जैसा भाई नहीं है आज।।
कृष्णा किसकी लाज बचाये
बचा नहीं अब लोक लाज।।
बेटी अस्मत इज़्ज़त नहीं
सुरक्षित घर रिश्तों में आज।।
मर्यादा आये दिन अब टूटती
भय दहसत में बेटी पल पल
घुटती भय मानव गिद्ध और बाज।।
पल पल घुटती मरती घर बाहर
चारो ओर बेटी नहीं सुरक्षित बेटी आज।।
दोष समाज का बेटी बेटो
की हया लाज अब छुटी
बेटी नारी नव दुर्गा अवतारी
दुष्ट दलन की दुर्गा काली।।
बेटी बेटो में हो सभ्यता
की समझदारी नकल
नहीं किसी की अपनी
पहचान की हो बेटी नारी।।
पुरुष समाज में दलित
दासता की ना हो बेटी
नारी मारी।।
बेटी की जाती धर्म तो मात्र
शिक्षा सक्षम मजबूत इरादों
की बेटी नारी।।
बेटी और नारी
नन्ही परी की किलकारी
गूंजे घर मन आँगना।।
कहता कोई गृहलक्ष्मी
आयी घर आँगन की गहना।।
बेटी आज बराबर बेटों के
फर्क कभी ना करना।।
बेटी बेटा एक सामान
बेटी बेटों की परिवरिश
दो आँखों से ना करना।।
पड़ती बेटी बढती बेटी
अभिमान सदा ही करना।।
शिक्षित बेटी सक्षम बेटी
परिवार समाज के संस्कार
का रहना।।
बेटियां हर विधा हर क्षेत्र में
आगे बढ़ती देख रही है दुनियां
शिक्षित समाज में फिर भी
बेटी को संसय भय में पड़ता
है जीना।।
माँ बाप सुबह शाम ईश्वर से
करते प्रार्थना विद्यालय से
शकुसल वापस आ जाए
बेटी तो कहते शुभ
दिन है अपना।।
नगर गली चौराहे पे नर भक्षी
पिचास गिद्ध दृष्टि से कब
कर दे दानवता का नंगा नाच
बेटी का मुश्किल हो जाए जीना।।
बेटी अनमोल रत्न है जजनी
मानव की नारी की कली कोमल
आवारा भौरों का संस्कार से क्या
लेना देना।।
समाज को शर्मसार कर देते
बेटी नारी मर्यादा का तार तार
करते।।
पुरुष समाज के आहंकार
विकृत होता समाज टूट जाती
मर्यादाये मिट जाता लोक लाज।।
मानवता की पीड़ी में कही कभी
दानवता की सुनाई दे जाती पद
चाप बेटी नारी की जिम्मेदारी
का एहसास ।।
बेटी शक्ति स्वरुप नारी
विराट रूप बेटी सक्षम शिक्षित नारी
समाज राष्ट्र की गौरव मान।।
बर्तमान की बेटी भविष्य की
भविष्य की नारी—
बेटी बेटों में ना हो फर्क
शिक्षा दीक्षा प्यार परिवरिश
में ना हो अंतर।।
बेटी ही कल की माँ बहन
रिश्तों की अवतारी नव दुर्गा
नौ रूपों की बेटी ही
लक्ष्मी शिवा सरस्वती देवो
की शक्ति नारी।।
साहस शक्ति की बेटी
निर्भय निर्भीक निडर शिक्षित बेटी
राष्ट्र समाज युग की निर्माणी नारी।।
बहू बेटी में ना फर्क दहेज़
दानव का बंद हो प्रचलन
अस्तित्व अस्मत की बेटी
मजबूत राष्ट्र समाज की
बैभव नारी।।
नारी जत्र पुज्जयते रमन्ते तंत्र
देवता यथार्थ सत्य सत्यार्थ हो
देवो की संस्कार की नारी।।
भविष्य की नारी
कर्म बोध की कन्या
दुष्ट दमन की दुर्गा
ब्रह्म ब्रह्मांड।।
कर्म धर्म संस्कृति
युग समाज राष्ट्र विश्व
समाज की संस्कृति
संस्कार सत्यार्थ प्रकाश।।
भाग्य भविष्य की प्रेरणा
नैतिक नैतिकता रिश्तों का
आधार।।
पुषार्थ प्रेरणा की गहना बहना
उत्कर्ष उत्थान सम्मान।।
नारी अबला कमजोर नहीं
युग विश्व समाज राष्ट्र की
प्रेरणा प्रतिष्ठा
जीवन मूल्यों की
गौरव महिमा मशाल।।
शांत शौम्य काल काली
अमृत विष मान आरजू
अरमान।।
योग्य योग्यतम नारी
सभ्य समाज की आधार।।
अपमान नही तिरस्कार नही
अस्तित्व इज़्ज़त मानव
मानवता का अंगीकार।।
शिक्षित सशक्त नारी
दृष्टि दिशा सृष्टि की नारी
मानव मानवता विश्व समाज में
वर्तमान शानदार रचती स्वर्णिम
इतिहास।।
नारी वेबस क्यों?
नारी आज खोजती
खुद को राष्ट्र
समाज के हर पल प्रहर में
करती सवाल कौन हूँ मैं ?
क्या अस्तित्व है मेरा?
क्यों हूँ मैं बेहाल?
सभ्य समाज की
सभ्यता से गली
चौराहों हाट
बाज़ारों पर सवाल?
मैँ माँ भी हूँ बहन बेटी
रिश्तो के समाज मे
फिर क्यो डरी सहमी?
सम्मान अस्मत को
करती चीत्कार पुकार।।
कहती है नारी जन्म
से पूर्व कोख में मेरा
क्यो करते हो नाश।।
गर जन्म ले लिया हमने
जीवन भर अस्मत अस्तित्व
की खातिर लड़तीं संग्राम।।
शिक्षा दीक्षा अधिकार
की खातिर लड़ते रहना ही
मेरा संसार।।
घर सड़क गली बाज़ार
चौराहों पर डरी सहमी
भागती दौड़ती मांगती
अपना सामान अधिकार।।
कभी स्वयं की अस्मत
बचाने में मीट जाती
कभी दहेज की बलि
बेदी पर जिंदा ही जल
जाती या जला दी जाती
दहसत दासता नियत का
जीवन भार।।
मानव मानवता के विकसित
समाज मे भी बेबस हूं मैं
नारी परम् शक्ति सत्ता की
स्वीकार।।
नारी स्वर साधना
स्वर साधना आत्मा
ममता ममत्व आँचल
कला काल भाव नारी
दुर्गा ज्वाला।।
इंदिरा लक्ष्मीबाई सरोजनी
कल्पना मरियम यशोदा
सती शीतल अंगार।।
चंचल चितवन शोख
अदा अंदाज़ प्रेम घृणा
कोमल कठोर खुशबू
खूबसूरत श्रृंगार।।
त्याग तपस्या राग रागिनी
विद्या वादिनी वीणा झंकार।।
जन्म दायनी वात्सल्य
बैभव विशाल कामिनी
ग़ज़ गामिनी काल कराल
विकट विकराल।।
पृथ्वी पतित पावनी
सृष्टि युग समाज
स्वाभिमान।।
खास अंदाज
बात कुछ खास हर अंदाज़ ।
दिल दुनियाँ खास अंदाज।।
तूफां समन्दर कातिल
खास अंदाज़
कली नाज़ुक कशिश
चाहत मुस्कान
खास अंदाज़।।
सुबह सूरज कि लाली
सुर्ख गाल लव गुलाबी
लाजबाब खास अंदाज।।
ढलता सूरज शराब
चाहत ज्जबा तूफान
ख्वाब खास अंदाज।।
लम्हा लम्हा ढलती रात
चाँद चाँदनी दिलों धड़कन
आह खास अंदाज।।
क्या बला है खूबसूरत
अदा नागिन मोहब्बत
खुमार खास अंदाज।।
लचकती कमर हिरनी चाल
गज गामिनी खास अंदाज
सर्द कि गर्मी बर्फ कि चादर
पानी झील दरिया समंदर कि
रवानी खास अंदाज।।
शबनम में नहाई चाँदनी
जैसे मुस्कुराई खास अंदाज
जलता मौसम गर्मी शीतल छांव
तेरा पहलू आँचल खास अंदाज।।
बेचैन दिल सुकून
मकसद कि वासंती वाला
वासंती वयार भीनी खुशबू
मस्त मधुमास खास अंदाज।।
रिम झिम बारिश
भीगा वदन सांसों कि
गर्मी जज्बात ज्वाला
निराला खास अंदाज।।
माँ आओ मेरे द्वार
माईया पधारों घर द्वारे
भक्तों का इंतज़ार है।।
घर घर तेरा मंडप सजा है
माईया के स्वागत का
दिन रात है।।
माईया तेरे रूपों का संसार
माईया तू ही अवनि अवतार
पर्वत बाला बुद्धि बृद्धि
स्वर संसार ।
माईया पधारो घर द्वारे
भक्तो को इंतज़ार है।।
माईया तू ही ज्ञान ध्यान विज्ञान
ब्रह्म आचरण ब्रह्म चारिणी
विधि विधान बुद्धि पराक्रम प्रवाह
माईया पधारों घर द्वारे भक्तों को
इंतज़ार है।।
माईया तू ही चंद्र हास शक्ति बल
बुद्धि का विकास माईया तू ही
दानवता का विनाश।
चंद्र माथे घंटा खड़क त्रिशूल
हाथ माईया पधारों घर द्वारे
भक्तों इंतज़ार है।।
माईया शुभ मंगल का है गान
तेरा आगमन झूमे गाए संसार
मिट गए सारे अंधकार कूष्माण्डा
का गुणगान माईया
पधारों घर द्वारे भक्तों का
इंतज़ार है।।
माईया चहुँ ओर खुशहाली
माईया कर्म धर्म मर्म मान
दुष्टो का विनाश स्कन्ध
माता का आगमन जग कृतार्थ
माईया पधारों घर द्वारे भक्तों
का इंतज़ार है।।
माईया जग सारा तेरा मंदिर
युग का प्राणी बालक नादान
माईया बल बुद्धि बैभव का वरदान।।
दुष्ट दुष्कर्म दुःसाहस का नाश
मां कात्यानी जग माँ है तू प्राण
माईया पधारों घर द्वारे भक्तों को
इंतज़ार है।।
माईया तू ही सत्य सन्ध सत्य
सत्यार्थ माईया तेरा जग
जाहिर न्याय।।
अन्याय दानव का है तू काल
भक्तो की रक्षा राक्षस संघार
तू ही काली काल माईया पधारो
घर द्वारे भक्तोंको इंतज़ार है।।
युग गरिमा गौरव गौरी
भक्ति ,शक्ति का विश्वास
वरदान पूजा वंदन अभिनंदन
महा गौरी धाम पधार माईया
पधारो घर द्वारे भक्तों को है
इंतज़ार।।
सकल मनोकामना दायनी
रिद्ध सिद्धि दायनी भय
भव भंजक निर्भय कारी
सिद्धदात्री माँ नौ रूप नवधा
भक्ति नवग्रह सहित विराजै
माईया पधारो घर द्वारे भक्तों
का हैं इंतज़ार।।
माँ
माँ मैं जब रोता था
तू बेचैन हो जाती
मेरी खुशियों की खातिर
दुनिया समेट लाती
अपने दामन में
जो भी मेरी चाहत की जिद्द होती ,
तेरी कोशिश तू भर दे
मेरी भावों में रख दें
मेरे हांथों में!!
मैं जब सोता
तू जगती
मुझेको निहारती
पल पल
अपने आँखो के काजल से
मेरी नजर उतारती
देती निर्भय का बरदान!!
माँ मैं दुनियाँ में आने से पहले
तेरी कोख में आया
मैं जब तेरी कोख में अटखेली करता
तुझे करता परेशान
तब भी तू अपने
ख्वाबों को देती
कितने ही नाम
आँखो का तारा
राज दुलारा
खुद के जीवन की दौलत
दुनियाँ अभिमान!!
मेरी खुशियाँ
तेरी दुनियाँ भर की दौलत
मैं तेरे जीवन की
चाहत की दुनियाँ!!
दुनियाँ में जब रखा मैंने
अपना पहला कदम,
मेरे जीवन की शक्ति
मेरा अस्तित्व का आधार
तेरे स्तन का अमृत पान!!
मेरे आँखो के आँसू से
तू तड़प उठती
मेरी खुशियों,रक्षा की खातिर
तू रणचण्डी, दुर्गा, काली
दुष्ट विनाशक साक्षात महाकाल!!
मेरी चांद के पाने की अभिलाषा
भी नहीं करती तुझे परेशान
तू मेरे बचपन के जज्बे
जज्बातों में रख देती
अपने अरमानों का सूरज चांद!!
मेरे लिए तेरी गोद
सबसे बढ़ा सिंहासन
दुनियाँ
तेरे ममता के आँचल की छाया
सम्पूर्ण ब्राह्मण
भगवान् नहीं देखा मैंने
देखा तो तेरा चेहरा
तेरे चेहरे में भगवान्!!
माँ तू मूरत है
तू सूरत हैं
तू साक्षात है
हर संतान की भाग्य भविष्य
खुदा भगवान्
माँ महत्व का ही युग संसार!!
प्यार
प्यार दिल की गहराई का
जज्बात प्यार दिल जज्बे
की आवाज़।।
प्यार में सीमाएं नही
समाज देश की मर्यादा
मान्यता नही प्यार जज्बातों
का ज्वार।।
ना कोई बंधन ना कोई
विचार प्यार सिद्धान्त
प्यार तो हो जाता निःस्वार्थ।।
सोच समझ योजना
प्यार नही करता स्वीकार
प्यार तो मस्ती की हस्ती
अल्हण मासूम नादान।।
यदि होता काश कशमकश
संसय प्यार के दुश्मन
चाहत ख्वाब प्यार के यार।।
प्यार में शंका संदेह नही
प्यार में स्वयं सिद्ध का कोई
स्थान नही प्यार तो विरह वेदना
मिठास।।
प्यार में लूट जाता
मिट जाता फिर भी
दिल मोहब्बत की दौलत
से रहता माला माल।।
प्यार का इश्क जुनून है
प्यार में हुस्न दौलत है
प्यार दीवाना परवाना
की हसरत है।।
पैदा होता जब इंसान
माँ ममता की कोख से
मातृभूमि के आंचल
प्यार परिवरिश परिवार की छाँव।।
भाई बहन का प्यार
बापू के अरमानों का
प्यार दुलार का जीवन
लम्हा लम्हा रीति रिवाज।।
प्यार बिना नीरस जन्म
जीवन नीरस सब व्यर्थ
गोपीओ की शिक्षा भक्ति
प्रेम जगत का सार और कछु
सार नही है उद्धव ज्ञान कर्म
का ज्ञान।।
साधना
साध्य साधना भाव भवना अर्घ आराधना हृदय गहराई अंतर्मन आवाहन मर्म धर्म कर्म स्पर्श अनुभव अनुभूति सच्चाई बोध भाष्य प्रेम व्यक्त अव्यक्त जन्म जीवन आत्म बोध परितोष ।।
पुष्प देवों के शीश पांवों पर चढ़ इतराता ,नवयौवना केशो का गजरा बन महकाता।।
स्वागत अभिनंदन श्रद्धा अंजली का पुष्प से रिश्ता नाता पुष्प ही भाता ।।
अप्सरा का स्वर सुंदर अभिमान पुष्प पल प्रहर संवारता बनाता ।।
देश भक्त कि राहों पग कि शूल पुष्प फूल मिटाता महिमा मंडित कर प्रेरणा परिभाषक बन जाता।।
ब्रह्म ब्रह्मांड का सत्य अर्थ बताता पुष्प कमल कर लिए देव पद्मासनी देवी पुष्प परमेश्वर अस्तित्व सच्चाई सत्य ब्रह्म ब्रह्मांड पर मर मिट जाता।।
सूर्यास्त निशा तमश कि कली कोमल सूर्योदय पुष्प उदय प्रदूर्भाव जन्म जीवन वास्तविकता समझाता।।
डाली मकरन्द से बागवा ही अलग कर पुष्प पावन को युग स्वार्थ परमात्मा परमार्थ को समर्पित कर जाता।।
सुनो साधना मन मस्तिष्क हृदय आत्म बोध गहराई से नन्ही कोमल कली फूल पुष्प युग अभिलाषा प्रत्याशा हो ।।
निर्भय निडर निर्विकार निर्विरोध निर्झर निर्मल गंगा यमुना नर्वदा ताप्ती कृष्ण कावेरी सी कल कल कल कलरव करती मुस्कानों जैसी चलती जा बहती जा ।।
तेरी धारा कि चालों से कठिन तूफान चट्टान पथ परिवर्तन को विवश हो जाएंगे व्यर्थ सोच नही सत्य साथ सब हो जाएंगे।।
प्रेम प्यार संवेदना कि पुष्पों जैसी देवो देवी का अभिमान मानव मन की कशिश कोशिश साधन साध्य आराधना साधना जैसी।।
कवि कि कविता
बुझे दिए जला दे अन्धकार में उजियारा फैला दें दिशा दृष्टि दृष्टिकोण बता दे समझो कवि कि कविता है।।
जीवन कि आपा धापी मृग मरीचिका में जीवन का उद्देश्य बता दे समझो गिरते उठाते उलझे सिमटे जीवन कि राहों का अवरोध हटा दे समझो कवि कविता है।।
कायर में पुरुषार्थ जगा दे हताश निराश में उत्साह जगा दे थके हुये में उमंग का जगा दे पराजित को पथ विजय बता दे। समझो कवि कि कविता है।।
युवा ओज को तेज बना दे युग को मूल्यवान बना दे मरुस्थल में दरिया झरना झील बहा दे समझो कवि कि कविता है।।
खुली आँखों के सोये मन में चेतना जगा दे पत्थर को मोम् बना दे लोहा पिघला दे समझो कवि कि कविता है ।।
रक्त रंजीत तलवारों से फूलों की बारिस करवा दे फुलों को शूल शूल बना दे शूलों को फूल बना दे
समझो कवि कि कविता है।।
नदियां झरने प्रकृति प्राणी पशु पक्षी के श्रृंगार आभूषण का आवाहन कर दे समझों कवि कि कविता है।।
वेवश बिवस लाचार अंतर्मन शक्ति का आभास करा दे भटके को उद्देश्य बता दे मानव को आम खास महिमा गरिमा युक्त बना दे।
समझो कवि कि कविता है ।।
युग समाज संस्कृति संस्कार अतीत दर्पण में वर्तमान शक्ल दिखा दे आत्मा का परमात्मा से विलय करा दे समझो कवि कि कविता हैं।।
सूर तुलसी मीरा कबीर रासखान की भाव जगा दे सिद्धार्थ को बुद्ध बना दे समझो कवि कि कविता है।।
साधारण को असाधारण वर्तमान का चुनौती बना दे इतिहास का निर्माण करा दे पृथ्वी बरदायी का राग सुना दे। समझो कवि कि कविता है ।
सूने मन में प्रेम भाव जगा गोपी राधा कान्हा के प्रेम जगत का सार बता दे समझो कवि कि कविता है।।
कृपण क्रोध को दांनबीर और सौम्य बना दे कुटिल कठोर में दया छमाँ का भाव जगा दे । समझो कवि कि कविता है।।
जीवन के कुरुक्षेत्र संग्रामो का विजयी का शत्र शास्त्र बना दे। समझो कवि कि कविता है ।।
अज्ञान में ज्ञान प्रकाश जला दे काली को कालिदास हुलसी के तुलसी को तुलसी दास बना दे। समझो कवि कि कविता है।।
मानव मन मस्तिष्क ह्रदय में स्वतंत्रता के अस्ति अस्तित्व का भाव जगा दे समझो कवि कि कविता है ।।
खंड खंड को अखंड बना दे चाणक्य का चंद्र गुप्त बना दे। समझो कवि कि कविता है।।
परतंत्रता से लड़ते स्वतंत्रता के महारथियों को धरती माँ के स्वाभिमान में रंग बसंती चोला केशरिया बाना पहना दे । समझो कबि कि कविता है ।।
पराक्रम त्याग तपश्या बलिदानों के अतीत का वर्तमान जगा दे। समझो कवि कविता है।।
उदासी गम मायूसी में हास्य्, परिहास व्यंग मुस्कान कि फुहार वर्षा दे समझो कवि कि कविता है।।
रस छन्द अलंकार से गीत, ग़ज़ल संगीत समारोह कि अलख जगा दे समझो कवि कि कविता है।।
काल को मोड़ दे ,राह सारे खोल दे विकट विकराल को बौना बना दे बौने को कराल महाकाल बना दे समझो कवि कि कविता हैं।।
कल्पना का सत्यार्थ प्रकाश शब्द शिल्पी के शब्दों का चमत्कार बना दे समझो कवि कि कविता है।।
नीर नदी का निर्झर निर्मल अविरल प्रवाह सागर गहराई से उठता ज्वार तूफ़ान का समय समाज कवि धर्म कर्म कि बान बना समझो कवि कि कविता है।।
कर्तव्य दायित्व बोध कवि का शंखनाद भाषा साहित्य साहित्य कार युग समय समाज का संचार संबाद कवि कीमकर्तव्य बिमुड़ हुआ यदि समझो लूट मिट गया युग समय समाज वर्तमान इतिहास।।
कवि समय युग समय कि आवाज़ त्रेता का वाल्मीकि द्वापर का वेदपव्यास कलयुग का सुर कबीर मीरा बिहारी रहीम वरदायी तुलसीदास।।
पाखंड
पाखंड पराक्रम परिहास धर्म स्वार्थ में अंधा समाज पाखंड झूठ फरेब का स्रोत चमत्कार ।।
पाखंड कि उम्र नही पल प्रहर पाखंड एक आग सब जलकर भस्म सब खाक।।
बचता नही अवशेष पाखंड परमेश्वर को करता बदनाम पाखंड छल छद्म है मानव अस्ति अस्तित्व का विष समय काल।।
अंतर्मन चीत्कार पाखंड काया कि काली माया जीवन युग का अमावस अंधकार ।।
पाखंड शैने शैने करता सृष्टि कि दृष्टि का सर्वनाश पाखंड अँधाविश्वास ।।
आस्था का ही संसार भांति भाती के चोला दामन अनन्त चीत्कार पुकार पाखंड बलिवेदी मिट जाता संसार।।
अंधविश्वास
विश्वास सामाजिक संबंधों का आधर ईश्वर आस्था जीवन नैतिक मूल्यों का सार सारांश ।।
विश्वास अंधा हो जाता मानवता शर्मशार मानव निहित स्वार्थ में दल दल में गिर जाता जिंदा ही मर जाता इंसान।।
रक्त पिपाशु नरभक्षी सा दानव बन जाता अंधविश्वास अबोध में अंतर खास अंध विश्वास कलुषित कलह द्वेष दम्भ का मार्ग ।।
अबोध निर्मल निर्झर निर्विकार बहता जल समान नैतिकता में आंख का पानी मर जाता धर्म कर्म का अंतर मिट जाता घृणा घाव प्रहार ।।
सिलसिला बन जाता समाज राष्ट्र क्रुरता कि भट्टी में भुनता
अंधविश्वास बीमारी है कुरीतियों कि महामारी है धर्म अधर्म शुभ में अशुभ अहंकार।।
किसान
किसान जवान नव जवान युग समय काल के निर्धारक अभिमान।।
संघर्ष ज्वाला में तपते भाग्य भगवान का विश्वास ।।
मौसम ऋतुओं से लड़ता शत्रु अनेक फिर भी निडर निर्विकार।।
अन्नदाता किसान धरती माँ कि संतान धरतीपुत्र विराट।।
समाज का पेट पालता स्वयं फटेहाल बदहाल कभी बाढ़ कभी सूखा का प्रकृति कि मार ।।
आश लगाए जीवन का युद्ध लड़ता रहता घरों का चूल्हों कि आग।।
ना कोई भूखा रहे पल प्रहर श्रम पराक्रम करता घुट घुट कर जीता मरता किसान।।
आहे भरता कह गए कवि घाग उत्तम खेती लेकिन निकृष्ट बन गया किनान ।।
धन लक्ष्मी को तरसता पैसे पैसे को मोहताज कर्ज के जंजाल में फंसता किसान।।
बेटी का व्याह बेटे कि शिक्षा दीक्षा हताश निराश किसान।।
कभी कभी जीवन स्वंय का स्वंय समाप्त कर देता किसान राष्ट्र कि शान ।।
हालत हालात से मजबूर कभी किसी भी हाल में नही चाहता भवि पीढ़ी बने किसान ।।
वाह दुनियां कितनी बदल गयी इंसान अन्नदाता किसान दबा कुचला समाज समय का अभिशाप।।
जिम्मेदार इंसान
नशा जिंदगी का अभिशाप
नशा नाश विनाश को देता
दावत नशा जिंदगी का पाप।।
नशा दौलत का ,ताकत का,
शोहरत का ,हुश्न का नशा
अंतर मन का खोखला
अभिमान।।
नशा शराब धीरे धीरे गलता
इंसान शराब दौलतमंद का
नशा दारू ठर्रा महुआ गरीब
का अहंकार।।
गांजा भांग चरस अफीम
हीरोइन हसीस जाने क्या
क्या नाम नही मिलता
परम्परागत नशा तो ड्रग
एडिक्सन नए युग का नशा
नायाब।।
खैनी गुटका पान धूम्रपान
तंबाकू बीमारी पैसा देकर
खरीदता इंसान।।।
अब तो ऐसे
हालात नादान सिगरेट
बीड़ी का कस खिंचते वर्तमान
भविष्य के कर्णधार।।
पर्यावरण प्रदूषित प्रकृति
परेशान ना जाने कितनी
बीमारिया प्रदूषण पर्याय।।
तम्बाकू खैनी बीड़ी सिगरेट
जीवन में छैनी धीरे धीरे
खोखला करती जिंदगी
मजधार में ही निबट जाता
इंसान।।
बीड़ी सिगरेट के धुएं में
पल प्रहर जलता घुट घुट
कर मरता इंसान।।
कैंसर जैसी भयंकर बीमारी
को बैठे बैठे दावत देता सुर्ती
तंबाकू के सेवन से इंसान।।
पीताम्बर का आवाहन
युग विश्व के मानव सुनो
ध्यान लगाय सुर्ती तंबाकू
बीड़ी सिगरेट से तौबा
कसम उठाओ आज।।
बीबी बच्चों पर तो कुछ
रहम करो जिनका जीवन
तुमसे तुम ही हो उनके जीवन
खुशियों के नाज़।।
असमय अगर बीमारी के
बन गए ग्रास महंगा बहुत
इलाज इलाज में ही जाते कंगाल ।।
जीवित गर रह पाए तब
भी जीवन भार नही रहे
यदि परिवार झेलता सजा
दर दर फटेहाल।।
नौबत ही क्यो आये तुम
जिम्मेदार इंसान ऐसा कुछ
भी ना पालो सौख नशा
जीते जी ही मर जाए चाहत
का परिवार।।
कुछ तो रहम करो खुद पर ना आये कोई बीमारी आफत जंझाल।।
एै वक्त ठहर जा ( गीत )
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का शबब तेरी तारीख का नूर बताने वाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
तेरे लम्हों ने जहां को बनते बिगड़ते देखा तूं ही इंसा को जमाने में बताने वाला ।।
तूं ही किस्मत का करिश्मा राजा रंक बनाने वाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
कभी मुकद्दर का गूरुर कभी ताकत का सूरुर हुस्न दौलत कि चमक चाँद दिखाने वाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
तेरी करम का बूझदिल इंसा तेरी रहमों का इंसा खुदा भगवान् तूं ही खुदा भगवान् को जमाने में लाने वाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
तूं चलता मचलता है अपनी रफ्तार में इंसा तेरी रफ्तार का रफ्ता रफ्ता जहाँ कि तमाम जागीर का तूं ही रखवाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
कभी दुआयों कि मुस्कान कही गमगिन हालत कि चाल कभी चहतों कि चाहत मंज़िलाै कि राह बताने वाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
तूं रुकता ही नहीं चलता जाता खुदा भी बुलाए लौट कर नहीं आता इंसा तेरे लम्हों कि कसक यादों में जीता जाता!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
तूं ठहरता है वहां जहां तेरी रफ्तार कि नई पहचान बनाता कोई, तूं दुनिया को इंसान के चेहरों में खुदा भगवान् कि पहचान बताने वाला!!
एै वक्त ठहर जा कोई खास अंदाज़ है आने वाला तेरे लम्हों के इंतज़ार का सबब तेरी तारीख कि का नूर बताने वाला!!
जीवन की कस्ती
भावों रिश्तो संग
जीवन कस्ती जैसी
निर्मल निर्झर प्रवाह
हद हस्ती जैसी
सागर की गहराई
जीवन की सच्चाई जैसी।।
झरने झील तालाब
नदियां जीवन
जीवन मकसद की
राहों जैसी
कभी निर्बाध निकलती
कभी डूबती छिछलेपन की
कंकण जैसी।।
जीवन कस्ती का
पतवार जैसा चाहो
वैसी कभी चाहत
की मस्ती
कभी वक्त की मार
तूफानों जैसी।।
जीवन की कस्ती
जीवन की कठिन चुनौती से
डगमग होती
झूठ और सच्चाई जैसी ।।
उठते गिरते तूफानों में
जंग जीवन का लड़ती
जीत हार का जश्न
हाहाकार हश्र की
संसय जैसी।।
जीवन के रिश्ते नाते
जीवन की कस्ती सवार
मांझी मकसद मंजिल
खेवनहार को मिलती
चाही अनचाही
मुरादों जैसी।।
कभी चाहों की
राहों की कस्ती
कभी अनचाही
साहिल और किनारा
अनजानी दुनियां जैसी।।
तूफ़ानो झंझावत में
लहरों तूफानों में
कस्ती जब फंसती
सवार भाँवो के रिश्तो में
हलचल जैसी।।
रिश्ते नाते कुछ मुसक जैसे
जिस कस्ती में सवार
उसे कुतरते डूब ना जाए
भागते जल बिन
मछली जैसी।।
छोड़ अकेला खुद
खुदा का शुक्र करते
पता नही होता
उनकी नियत दुनियां में
चोर उचक्कों जैसी।।
जीवन की कस्ती मस्ती
सूझ बोझ सोच समझ
शौम्य संयम पतवार की
हस्ती।।
जिम्मेदारी नैतिकता
नीति नियत निर्धारण कि
चुनौती से लड़ती बदलती
निकलती पहेली जैसी।।
जीवन कि सच्चाई
अतीत नहीं भविष्य नहीं
जीवन पल प्रहर संध्या
दिन रात प्रभा प्रभात।।
विश्राम नहीं विराम नहीं
नित्य निरंतर चलने का नाम
समय काल परिवेश
प्रस्तुत करते चुनौती
जीवन नहीं आसान।।
भय भ्रम का अंधकार
क्लेश दुःख का आलस्य
मोह व्याधि जीवन के पथ
उद्देश्य के संताप।।
जीवन एक कुरुक्षेत्र
लडना पड़ता है पल पल
नया युद्ध विजय घोष का
शंखनाद।।
संबध समाज परिवार
कुटुंब के अपने उद्देश्य स्वार्थ
शक्ति सत्ता के सब साथ
शक्ति सत्ता बिहिन सरस्वती
लक्ष्मी का श्राप।।
पुरुष पुरुषार्थ को धिक्कार
जीवन क्रांति शांति चमत्कार
साहस पराक्रम पौरुष पुरुषार्थ।।
जीवन संसो धड़कन का
स्थूल शरीर निर्मूल
सत्य सार्थक उद्देश्यों की
युग चेतना व्यवहार
जीवन कर्म धर्म का
भाग्य निर्माण।।
संकट विकट कायरता
अधीर अधर्म अधम मार्ग
विफलता शिक्षा का नव
अध्याय।।
अग्नि पथ अंगार झूठ
छल प्रपंच कूटनीति
राजनीति अवरोध अवरुद्ध
करती जीवन का मार्ग।।
जीवन कठिन परिस्थितियों
में भी लड़ने कि ऊर्जा उत्साह
जीवन गुण मर्म कला मर्यादा
निर्वाह।।
जीवन में मरने से ना डरना
कोख से जन्मा
अवनि अभिमान
जीवन सत्य सार्थक
सारथी पथ
महा रथी महान।।
जीवन संग्राम
पल प्रहर लड़ रहा हूं
जीवन का संग्राम
कभी गुप्त शत्रु कभी
प्रत्यक्ष शत्रु का आक्रमण
जीवन पर प्रहार।।
निद्रा में स्वप्न देखते
कुछ भी प्राप्त कर सकने का
अहंकार ।
टूटते ही निद्रा के
जीवन कठिन चुनौती की
संध्या दिवस दिन रात।।
बचपन भय भ्रम से मुक्त
माता पिता कि छाया
वज्र कवच निर्भय निडर
निर्विकार ।
आभास नहीं बाल
काल का भी विराम।।
विद्यालय गुरु शिक्षक
शिक्षा शस्त्र शास्त्र
किशोर की ध्वनि प्रतिध्वनि
से आनंदित घर परिवार
समाज।।
युवा ओज ओजस्वी
अभिलाषा उपलब्धि
आस्था विश्वास।
दायित्व बोध कर्म धर्म सामना
जीवन में चाहूं ओर अंधकार।।
जीवन जैसे गहरे
समुद्र उफानो पर सवार
नौका के जल समाधि
भय भयंकर विकट विकराल।।
शासन प्रशासन राष्ट्र समाज
युवा उत्साह ऊर्जा अतीत
भविष्य वर्तमान ।
कभी अतीत उपलब्धि का
बोझ कभी स्वर्णिम
भविष्य कि सोच दो पाटों का मझधार।।
माता पिता का विश्वाश
डगमगाता पुरुषार्थ पराक्रम
कर्म धर्म को लेते जान
भाग्य भगवान राष्ट्र
राज्य राजा दोषी
संसद संविधान।।
खेती निषिद्ध बान का
मूल्य नहीं सेवा सेवक बनना
जीवन उद्देश्य लायक ज्ञान का
प्रमाण।।
जेठ की भरी दोपहरी में
नंगे पांव इधर उधर
भटकता आशाओं
कि टिमटिमाती चिराग
लिए हाथ कभी बुझती कभी प्रज्वलित जीवित आशाओं की मशाल।।
जीवन कब बचपन
किशोर युवा प्रौढ़ चौथेपन
आगमन अस्तित्व का
वर्तमान।
पल प्रहर लड़ते लड़ते
जीवन अपुर्णता की पूर्णता की
आश प्याश।।
जिंदगी रूठ गईं
जिंदगी रूठ गई
जाने कहाँ खो गई
एक दायरे में सिमट गई
खोजता हूँ
घनघोर आंधेरो में
रास्ता जिंदगी
चाहतों का वास्ता।।
सब दरवाजे बंद
बंद दरवाजो दस्तक दे रहा हूँ
खत्म ना हो जाये
अरमान आरजू
ज़िंदगी सिर्फ रह जाए
जीने का नाम।।
हिम्मत जोश ताकत से
जिंदगी चाहो की राह
बंद दरवाजे पर खोलने
कि कोशिश कर रहा हूँ।।
बंद दरवाजे की दस्तक
शोर बहुत आवाज नही
सारी कोशिशें करता थक
हार जाता निराश हो जाता हूँ।।
दिल से आती आवाज
क्यो होता परेशान होगा
कोई इंसान तेरे लिये फरिश्ते
सामान।।
तेरी जिंदगी मुकाम
मंजिल का हम सफ़र
दोस्त जिंदगी की राहों के
बंद दरवाजों पर तेरी दस्तक
करेगा कामयाब।।
सुन जिंदगी के मुसाफिर
खुद दिल के बंद दरवाजों पे
दस्तक दे तेरे ही दिल से
गुजरती तेरे जिंदगी की कस्ती।।
दिल के बंद दरवाजों पर
दी दस्तक खुल गयी सच्चाई
ईमान इंसान के द्वार खुद के
दिल मे ही खुदा का हो गया
दीदार।।
जिंदगी की राहों का खत्म
हो गया अंधकार चाँदनी सी
धवल नव कोमल कली सी
जन्नत की परी सामने मंजिल
सी खड़ी।।
बंद दरवाजों पर मेरी दस्तक की
आवाज गायब मीठी सी आवाज
लबो पे मधुर मुस्कान
जिंदगी की मंजिल राह की शान ।।
खत्म हो गयी मायूसी
निराशा आशा विश्वाश की
जागी खूबसूरत जज्बे की
चिंगारी ज्वाला।।
खुल गए जिंदगी के सभी
रास्ते टूटे सारे अवरोध
चल पड़ा जिंदगी की राहों में
अकेला कारंवा बनता ।।
जिंदगी अरमंनो की
तमाम मंजिले
जमी आसमान
मुठ्ठी में बंद।।
धुप छाँव
कभी है धूप कभी है छांव
मद्धिम सर्द हवाएँ है कशिश
मौसम कि कहती है हंसी
अंदाज़ लाया हूँ।।
कसक दिल मे उठती है
साँसों कि हस्ती धड़कन कि
मस्ती कहती है!
सुर्ख सुबह गुलज़ार चेहरा
शाम शर्माया चेहरा
लम्हा लम्हा मुस्कान चेहरा
ढले शाम चांद का सेहरा चेहरा
हंसी चेहरे कि खुशियों का
पैगाम लाया हूँ।।
कभी है धूप कभी है छांव
मद्धिम सर्द हवाएँ है कशिश
मौसम कि कहती है हंसी
अंदाज़ लाया हूँ।।
कही यादे कही राहे
ए कहती है चमन में
चांद का आना चाँदनी का
तराना बहारों में आशिक
भैंरों का गुनगुनाना
चमन बहार लाया हूँ।।
कभी है धूप कभी है छांव
मद्धिम सर्द हवाएँ है कशिश
मौसम कि कहती है हंसी
अंदाज़ लाया हूँ।।
अंधेरों कि उदास जिन्दंगी
अरमानों उजाले कि तलाश
कभी बैचैन टूटती आश
कभी टूटती आश का.
विश्वास जिन्दंगी का
रौशन चिराग लाया हूँ।।
कभी है धूप कभी है छांव
मद्धिम सर्द हवाएँ है कशिश
मौसम कि कहती है हंसी
अंदाज़ लाया हूँ।।
मेरा संघर्ष
बस मुझे मेरा संघर्ष
करने दो युग दृष्टि
दिशा बदलने कि
खातिर जीवन पथ
पर बढ़ने दो!!
संसय भय भ्रम अंधकार
उबड़ खाबड़ असमंजस
बहुत है कठिन बहुत है
जीवन पथ!!
आशा और निराशा का
कुरुक्षेत्र रण भूमि है
जीवन पथ!!
कलयुग है कहते है
कर्म युग है एक दूजे से
आगे बढ़ने कि दौड़ दौर
होड़ में रिश्ते नाते संबंधो
का बलिदान त्याग है
पथ जीवन!!
मनव एक दूजे का
प्रतियोगी प्रतिस्पर्धी
चाहे रिश्ता कोई हो
दुरूह डरावनी
दक्षता योग्यता उत्कर्ष
परीक्षा पथ जीवन!!
भाई बहन मित्र पढ़ोसी
एक दूजे से आगे बढ़ने कि
दौड़ दौर है आपा धापी
स्वस्थ्य स्वच्छ नही
प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता नही
कलयुग पथ जीवन!!
एक दूजे से आगे निकल
जाने कि होड़ दौड़ पता नही
खींचेगा डांग कब कौन?
घायल हो अवनी पर
पश्चाताप करू आंसू
बहाऊ अब मेरा संघर्ष
करूंगा कलयुग युग कि
धारा संग बहुगा देंखे
मेरा पथ रोकेगा कौन?
जीवन के कुरुक्षेत्र में सभी
धुरंधर रथी महारथी ज्ञानी
ध्यानी शस्त्र शास्त्र परिपक्व
मौन!!
एक दूजे के शव सीढ़ी से
आगे बढ़ने का काल
समय दौर जीवन पथ!!
शाम दाम दंड भेद
अस्त्र शस्त्र कभी धारदार
कभी बेमतलब बेकार!!
जीवन के कुरुक्षेत्र में
अब मेरा संघर्ष जीवन
रण का मतलब बदलेगा!!
बस मुझे मेरा संघर्ष
करने दो बदल संकू युग के
रीती रिवाज़ मतलब मस्ती
हस्ती हद तोड़ दूँ!!
मेरा संघर्ष चिंगारी
ज्वाला पल प्रहर नित्य
विकृत विरासत
परम्परा का अंत कर दूँ!!
मुझे मेरे संघर्ष के पथ
जीवन रहने दो संघर्ष
शक्ति है संघर्ष सत्य है!!
संघर्ष शत्र संघर्ष शास्त्र है
संघर्ष से तपता मानव संघर्ष
से मानव सुगंध!!
वादा
गर वादा निभाने की
कोशिश करो कदमों में
दुनियां बिछा देंगे हम
साथ चलने का गर
इरादा करो जन्नत
जमीं को बना देंगे हम।।
मौका मुबारख
तेरी हसरतों का
मौका मुबारख
तेरी हसरतों का
वक्त को मेहमा
बना देंगे हम ।।
गर वादा निभाने की
कोशिश करो
कदमों में दुनियां
बिछा देंगे हम
साथ चलने का
गर इरादा करो
जन्नत जमीं को
बना देंगे हम।।
दिल मे तेरे गर
मेरे जज्बे के जज्बात हो
धड़कनों में वीणा
बजा देंगे हम।।
गर वादा निभाने की
कोशिश करो
कदमों में दुनियां
बिछा देंगे हम
साथ चलने का
गर तुम इरादा करो
जन्नत जमीं को
बना देंगे हम।।
खाबों में भी गर मैं
तेरे ख़ास हूँ खाबों में भी
गर मैं तेरे खास हूँ
राहें जिंदगी कि
सजा देंगे हम ।।
गर वादा निभाने की
कोशिश करो
कदमों में दुनियां
बिछा देंगे हम
साथ चलने का
गर इरादा करो
जन्नत जमीं को
बना देंगे हम।।
वनमाली
चलो आज फिर वक्त बुलाता
अरमानों के अंजुम में खुद को
खोज रहा वनमाली सावन के
मैखाने में।।
दोस्त मोहब्बत रिश्ते नाते
यादों के आईने में
लम्हे गुजरे सदियां गुजरी
चाहत के पैमाने में ।।
चलो आज फिर वक्त बुलाता
अरमानों के अंजुम में खुद को
खोज रहा वनमाली सावन के
मैखाने में।।
कभी कारवाँ का माँझी
दुनियां कि उम्मीदों का
आज अकेला खोया खोया
अनजानी राहों में ना
कोई हलचल ना कोलाहल
उड़ते रंग गुलालों में।।
चलो आज फिर वक्त बुलाता
अरमानों के अंजुम में खुद को
खोज रहा वनमाली सावन के
मैखाने में।।
चला जा रहा अपनी धुन में
गिरता उठता राहों में
सड़के सुनी गालियां सुनी
खिलते चमन बहारों में ।।
चलो आज फिर वक्त बुलाता
अरमानों के अंजुम में खुद को
खोज रहा वनमाली सावन के
मैखाने में।।
दोस्त मोहब्बत रिश्ते नाते
अपने अपने मकशद के
हुस्न हकीकत और
मोहब्बत बिकते अब
बाजारों में।।
चलो आज फिर वक्त बुलाता
अरमानों के अंजुम में खुद को
खोज रहा वनमाली सावन के
मैखाने में।।
स्वामी विवेका नन्द
समय सारथि धर्म
ध्वज अभिमान
मानव मानवता
व्यख्याता चिंतन
चिंतक महान।।
योद्धा पुरोद्धा युग
जीवन मूल्य महारथी
दीप पुंज मशाल!!
कर्म क्रान्ति की
काया माया महिमा
गर्व गौरव मान।।
उत्कर्ष उत्कृष्ठ
युवा ओज तेज
पराक्रम गगन गूंज ।
अवनि युग
भाव भावना
वर्तमान ।।
दिग्दर्शक सन्यासी
ब्रह्म ब्रह्मांड
सत्यार्थ प्रकाश!!
पुरुष में पुरुषार्थ को
ललकारता ईश्वर कि
सत्यता प्रणाम!!
आत्मा परमात्मा कि
परम् शक्ति का युवा
सौर्य साक्षात्।।
सादगी सच्चाई का
हंस भरत भारत वंश!!
मर्यादा राम कृष्ण
कर्म योग योगेश्वर
ज्ञानी ज्ञानेश्वर!!
परम् हंस की
आत्म बोध का
काल कलरव
शंखनाद युग
गूँज गान।।
मर्म मूल्य
मानव संस्कृति संस्कार
अभ्युदय उत्थान!!
अवनि आकाश
माँ भारती आँचल में
विश्व को समेटता
व्यक्ति व्यक्तित्व
विश्व विराट।।
वीर वीरता की
व्याख्या धीर
धैर्यता की दक्षता!!
धरती अम्बर
तेज पावक की
ज्वाला विज्ञ विज्ञान!!
नीर की निर्झर
निर्मल निरंतरता
तूफ़ान।।
अविरल अविराम
उद्धेश्य का उमंग
उत्साह प्रवाह!!
जीवन उर्जा साक्षात
साक्षात्कार युवा
ललकार ।।
उदय उदित सूरज
लाली रक्त संचार
युवा पुकार पल
प्रहर रात
सुबह शाम!!
क्रांति -शान्ति
शांति- क्रांति
आवाज का युवा
संस्कृति संस्कार।।
नर में नारायण ,
नारायण से अस्ति
अस्तित्व निर्माण!!
इंद्र नरेन जन्म
जीवन का
अनुसन्धान
अन्वेषक।।
विवेका आनंद
अनुभूति आवाहन
योग का योगी
सन्यासी परम्
पराक्रम पुरुषार्थ।।
कर्तव्य दायित्व की
प्रमाणिकता का
प्रभा प्रबाह!!
क्रिया प्रकिया से
बिमुख जन्म जीवन
को देता नयी पहचान!!
नया आयाम
नरेन से विवेका
सत्य अंनंत माहात्म्य।।
माँ की महिमा
वात्सल्य का
वरदान माँ काली
आशिर्बाद!!
भाग्य काल
भगवान प्रमाण
भय अन्धकार का
जनमेजय अजेय
युवा हुंकार ।।
इच्छा आकांक्षा
संग्राम समर का
महारथी विजेता
विशिष्ट विशिष्ठता
विशेष विशेषता
बैभव भाव!!
विवसता त्यागता
कर्म तपस्या व्याख्या
विधि विविधता स्वामी
सत्यार्थ!!
नियमित नियम
अनुशासन शासन
सयंम निधि से सिद्दी।
जीवन जन्म सत्कार
चिंगारी अंगार
जोश जोशीला
नौजवान।।
विश्व युवा बोध
सिंघनाद युग
युवा चमत्कार!!
शैली शृंखला
विवेका युवा
अस्तित्व आधार।।
सिद्धार्थ से बुद्ध
कभी -कभी आता
बन कर मानव खुद ही
भगवान्!!
निहित उद्धेश्यों कि
ख़ातिर करता नव
जागृति चेतना का
युग का पुनर्निर्माण।।
प्रवर्तक बन युग का
परिमाजर्न करता
संस्कृति संस्कार!!
युग जब स्वीकारता
प्रवर्तक परिवर्तन
आदर्शों को तब मानव
मानव को कहता
उद्धारक अवतार ।।
सिद्ध अर्थ का
सिद्धार्थ ने जाना
जब जीवन कि
अवस्थाएं चार!!
बीमार बृद्ध मृत्यु
असहाय निकल पड़ा
सत्य कि खोज में
राजा शुध्धोधन का
राज कुमार सिद्धार्थ ।।
माता पिता बेटा और
पत्नी कुटुंब परिवार
समाज का कर
परित्याग!!
पिता चाहता बेटा
सुख सुविधा का
भोग करे राजा बन
राज करे स्वीकार नहीं
कर पाया सिधार्थ।।
विलास राज पाठ
मोह माया बंधन का
किया त्याग जागा
मन में बैराग!!
निकल पड़ा बैरागी
जन्म् जीवन सच का
करने को आविष्कार ।।
मोक्ष कि कामना में
प्राणी करता है जहाँ
यज्ञ अनुष्ठान!!
गया तीर्थ बना
गवाह सिद्धार्थ से
बुद्ध की जीवन
यात्रा का प्रमाण।।
राज गिरी भूमि वहीँ है
बोध बोधि का बट
बृक्ष वहीँ है!!
सिद्धार्थ कि कठिन
तपस्या और चुनौती
गूँज का प्राणी
प्राण वहीं है!!
भगवान् तथ्य तत्व का
ज्ञान यही है सिद्धर्थ
बुद्ध कि अवधारणा
अवतार सत्य सही है।।
अहिंसा परमो धर्मः का उपदेश अर्थ काम कर्म मोक्ष का मार्ग।
काशी के कर्म ज्ञान का
शंख नाद सारनाथ वहीं है ।।
पूर्णता सम्पूर्णता कि
आत्मा से परमात्मा कि
यात्रा का सिद्धार्थ ।
बुद्ध का युग में
साक्षात्कार सत्कार
लुम्बनी कपिल वस्तु काल
भय भाग्य का भगवान् ।।
अनर्द्वंद से निकला
निखारा मूल्यों आदर्शो कि
आत्मा परमात्मा का सिद्धांत!!
करुणा दया छमाँ
प्राणी प्राण की अनंत
परंपरा का सिद्धार्थ
बुद्ध अवतार का सत्कार ।।
कुशीनारा की धरती
जीवन कि सच्चाई
अन्वेषक का महा
परिनिर्माण!!
त्याग तपस्या सच्चाई
ही जीवन के है न्यास ।।
आत्म साथ कर लेता
जो इनको बोध बुद्ध का
भिक्षु सन्यास।।
संघम शरणम् गच्छामि
धम्मम् शरणम गच्छामि
अहिंसा परमो धर्मः का
प्रादुर्भाव!!
प्राणी प्राण में
परमेश्वर का सत्य
सत्यार्थ बुद्ध का
दिव्य दिव्यार्थ।।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस
क्रांति क़ी भाषा
परिभाषा का नया
शौर्य सूर्य भीख नहीं
आजादी रक्त संचार
अधिकार ।।
आजादी लहू का
प्रभा प्रवाह आजादी
और लहू से लिखी
इबारत का काल
वर्तमान ।।
आजादी त्याग
बलिदान की तकदीर
मागने से मिलती नहीं
आजादी शक्ति साहस
जज्बे की जागीर।।
देश स्वाभिमान पर
मर मिटने वाला
अंगार ज्वाला!!
कुर्बानी की हद से
गुजने वाला रथी
महारथी महान ।।
अन्याय अत्यचार को
बर्दास्त की कायरता की
ललकार!!
यौद्धा महायोद्धा
माँ काली का
आशीर्वाद!!
आक्रामक सिपाही
सैनिक सेनापति
स्वतंत्रता संग्राम!!
आज़ादी की कल्पना का
सत्य सार्थक साकार
निडर निर्भय निर्भीक
मंज़िल मकसद
का बाज़ जाँबाज।।
सांसो में आजादी का
तूफ़ान धड़कन में
माँ भारती का अभिमान!।
खून में आजादी ज्वाला
मशाल का उठता ज्वार
सुर नीति नियत निर्विकार।।
प्रगति शान्ति
समन्वयक आजादी
मानव मानवता के
मूल मूल्य समर का
युग समय काल।।
रमइया कि हार
महात्मा के आहत भाव
मूल्यों आदर्शो पे मिट
जाना बलिदान कि
पराकाष्ठा पुरुषार्थ
सुभाष ।।
वक्ता प्रेरक प्रेरणा
पराक्रम का चंद्र चाँद
आस्था निति नियत
नेतृत्व विराटता सर्व
स्वीकार का नेता
सुभाष।।
पल प्रहर दिन रात
सुबह शाम युवा ऊर्जा
उत्साह उमंग प्रसंग
प्रमाण।।
दिग्दर्शक पथ प्रदर्शक
दूर दृष्टि इरादों का चट्टान
बाधाओ से उद्धेश्य विमुख
नहीं बाधाओ को
फेंकता उखाड़!!
अपनी राहो में आराम
नहीं विश्राम हराम
मंज़िल से पूर्व विश्राम!!
आजादी के लिये खून
माँ भारती का
अभिषेक आवाहन
अल्लादित उल्लास।।
वास सुगंध युग
वयार प्रणेता
सुभाष नियत
नीति नेता!!
बहना
आई देखो बहना देखो आई
प्यार कि सौगात लिए आई।।
रिश्तो जीवन संस्कार लिए आई
भाई की खुशियों का आशीर्वाद
लिए आई।।
आई देखो बहना देखो आई
प्यार का सौगात लिए आई।।
बचपन की यादों वादों का
मान सम्मान लिए आई
जाने कितने गीले शिकवों
का सत्कार लिए आई।।
आई देखो बहना देखो आई
प्यार का सौगात लिए आई।।
कच्चे धागे कि बंधन और
प्रतिज्ञा भाई बहन संसार
लिए आई ।
भाई का शुभ मंगल
गान लिए आई।।
आई देखो बहना देखो आई
प्यार का सौगात लिए आई।।
आशा अभिलाषा भाव
लिए आई भाई कि शक्ति का
वरदान लिए आई ।।
आई देखो बहना देखो आई
प्यार का सौगात लिए आई।।
रोली टिका रक्षा का विजयी
मुस्कान लिए आई।
आई देखो बहना देखो आई
प्यार का सौगात लिए आई।।
छोटी बड़ी नही बहना
वंदनीय वंध्या ही है बहना
जीवन रिश्तो का आकर्षण
अभिमान लिए आई।।
आई देखो बहना देखो आई
प्यार का सौगात लिए आई।।
माँ
माँ मैं जब रोता था
तू बेचैन हो जाती
मेरी खुशियों की खातिर
दुनिया समेट लाती
अपने दामन में
जो भी मेरी चाहत की जिद्द होती ,
तेरी कोशिश तू भर दे
मेरी भावों में रख दें
मेरे हांथों में!!
मैं जब सोता
तू जगती
मुझेको निहारती
पल पल
अपने आँखो के काजल से
मेरी नजर उतारती
देती निर्भय का बरदान!!
माँ मैं दुनियाँ में आने से पहले
तेरी कोख में आया
मैं जब तेरी कोख में अटखेली करता
तुझे करता परेशान
तब भी तू अपने
ख्वाबों को देती
कितने ही नाम
आँखो का तारा
राज दुलारा
खुद के जीवन की दौलत
दुनियाँ अभिमान!!
मेरी खुशियाँ
तेरी दुनियाँ भर की दौलत
मैं तेरे जीवन की
चाहत की दुनियाँ!!
दुनियाँ में जब रखा मैंने
अपना पहला कदम,
मेरे जीवन की शक्ति
मेरा अस्तित्व का आधार
तेरे स्तन का अमृत पान!!
मेरे आँखो के आँसू से
तू तड़प उठती
मेरी खुशियों,रक्षा की खातिर
तू रणचण्डी, दुर्गा, काली
दुष्ट विनाशक साक्षात महाकाल!!
मेरी चांद के पाने की अभिलाषा
भी नहीं करती तुझे परेशान
तू मेरे बचपन के जज्बे
जज्बातों में रख देती
अपने अरमानों का सूरज चांद!!
मेरे लिए तेरी गोद
सबसे बढ़ा सिंहासन
दुनियाँ
तेरे ममता के आँचल की छाया
सम्पूर्ण ब्राह्मण
भगवान् नहीं देखा मैंने
देखा तो तेरा चेहरा
तेरे चेहरे में भगवान्!!
माँ तू मूरत है
तू सूरत हैं
तू साक्षात है
हर संतान की भाग्य भविष्य
खुदा भगवान्
माँ महत्व का ही युग संसार!!
वैशाखी
धर्म शांति प्रगति धन धान्य
आश विश्वास आजादी
अस्तित्व आस्था लाती
और जगती वैशाखी।।
गुरुओं कि वाणी गुरुवाणी
भरत भारत अगुवानी
पंथ खालसा स्थापना
धर्म मर्म रक्षा संकल्प
आराधना है बैशाखी।।
धर्मवीर कर्मवीर शूरवीर
गुरु गोविंद सिंह ललकार
सवा लाख से एक लड़ाऊ
तब गुरु गोबिंद सिंह नाम
कहाऊ का शंखनाद है
वैशाखी।।
उदय उदित पंथ खलसा
धर्म कर्म रक्षार्थ वाहे गुरु का
खलसा वाहे गुरु कि फतह
हुंकार है वैशाखी।।
पावन पर्व पराक्रम
वीर धीर धैर्य पहचान
पंजाब पंजाबियत
आन वान शान कि
वैशाखी।।
घर घर खुशहाली
खेती बारी मेहनतकस
किसान का श्रम परिश्रम
पर्व परिणाम है वैशाखी।।
संसय समाप्त अन्न धन से
परिपूर्ण अवनी का अभिमान
अन्नदाता किसान खास कि
है पहचान वैशाखी।।
अतीत वर्तमान परंपरा
बैभव लाती और बताती
बैशाखी।।
गुलामी में दम घुटती साँसों
कि मुक्ति का शांत अनुग्रह
अनुष्ठान जालियांवाला बाग
स्मरण है वैशाखी।।
गोरों को रास नही भारत कि
आजादी का स्वर शब्द
कैसे बैठे रहते शांत देख
जलियांवाला बाग कि
शांत क्रांति कि वैशाखी।।
अंतर्मन कि चिंगारी ज्वाला
घायल शेर पंजाब का
लालजपत वेदना कराह
कहर कि याद दिलाती है
वैशाखी।।
आंधी तूफान अरमान भारत के
भविष्य की चाह राह आजादी
सत्याग्रह हुंकार कि वैशाखी।।
जनरल डायर क्रूर
कायर का तांडव मृत्यु का
नंगा नाच जाने कितने बूढ़े
बच्चे मॉ बहने निरीह निर्दोष
क्रूर काल का ग्रास वहसी
दानवी चरित्र बताती है
वैशाखी।।
वैशाखी का एक अहम पड़ाव
अध्याय भारत की आजादी
युद्ध शांति का आग्रह बन गयी
कायर कि युद्ध भूमि पावन वैशाखी।।
रक्त संचार बढ़ाती
जिंदा का अभिमान बताती है वैशाखी।।
सीय स्वयंवर और परशुराम
सीय स्वयंवर न जाओ
परशु पईया पड़ी
सीय स्वयंवर ना जाओ
परशु पईया पड़ी
सीय स्वयंवर ना जाओ
परशु पईया पड़ी।।
सीय स्वयंवर जो जाओ
परशु जइबे करो
जइबे करो
हां जइबे करो।।
ऋषि दिव्य बन जावो
परशु पईआ पड़ी
ऋषि दिव्य बन जाओ
परशु पईया पड़ी
ऋषि दिव्य बन जाओ
परशु पईया पड़ी।।
सीय स्वयंवर ना जाओ
सीय स्वयंबर ना जाओ
परशु पईया पड़ी
सीय स्वयंवर ना जाओ
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी।।
सीय स्वयंवर जो जाओ
तो जइबे करो
तो जइबे करो
हां जइबे करो।।
दिव्य ऋषि बन जाओ
तो जईबे करो
तो जईबे करो
हां जईबे करो।।
सीय स्वयंवर जो जाओ
तो जाईबे करो
परशु जईबे करो
हां जईबे करो।।
विदेह बन जाओ
परशु पईया पड़ी
विदेह बन जाओ
परशु पईया पड़ी।।
बन विदेह जाओ जो जाओ
तो जईबे करो
जईबे करो
हां जईबे करो।।
क्रोधाग्नि ना जलाओ
परशु पईया पड़ी
क्रोधाग्नि ना जलाओ
परशु पईया पड़ी
हां पईया पड़ी।।
क्रोधाग्नि जो जगाव तो
जगाईबे करो परशु
जगईबे करो
हां जगईबे करो।।
आशीष जानकी
द्वि भाई दिए
जाओ
परशु पईया पड़ी
आशीष जानकी द्वि भाई
दिए जाओ पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी।।
सीय स्वयंवर ना जाओ
परशु पईया पड़ी
सीय स्वयंवर ना जाओ
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी।।
लाल लखन ना उलझाव
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी।।
लाल लखन जो उलझाव तो
उलझईबे करो
उलझईबे करो
उलझईबे करो
सारंग राम ना सौंप जाओ
परशु पईया पड़ी
परशु पईआ पड़ी
परशु पईया पड़ी
सारंग राम जो सौंप जाव सौंवबे करो
तो सौंवबे करो
सौंवपे करो
हां सौंवाबे करो
तप पुण्य न गंवाओ
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी
सीय स्वयंवर न जाओ
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी।।
सीय स्वयंवर जो जाओ
तो जइबे करो
तो जइबे करो
हां जइबे करो।।
गिरी महेंद्र ना जाओ
परशु पईया पड़ी
गिरी महेंद्र न जाओ
परशु पईया पड़ी
परशु पईया पड़ी।।
भक्ति शिव कि मैं जगाता
चला गया
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
कोई भी मिल गया
उसे शिव महिमा
बताता चला गया
जन जन कि मनोकामना की
पूर्णता है रुद्र का
गुण गान मैं गाता चला गया।।
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
सावन में शिवालय कि गूंज
हर हर महादेव जयकारा मैं
लगाता चला गया।।
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
शिव आदि देव देवता
जो कुछ भी मांगता
हैं व्यही दाता
दिगम्बर भक्ति भाव मैं
जलाता चला गया।।
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
अनाथों के है नाथ विश्वेश्वर
विश्वनाथ विश्वम्भरा को भाव
भक्ति से नहलाता चला गया।।
सोम रूप प्रथम सोमनाथ
द्वितीय मल्लिकार्जुन दूसरे
ब्रम्ह सत्य ब्रह्मांड गुणागार
गाता चला गया।।
जन्म जीवन मृत्य का सत्य
प्राणि प्राण अवनी आकाश
अभ्यंकरा महाकाल का डमड
डमड निदाद बजाता चला गया।।
ॐ का अस्तित्व आत्मबोध
ॐ ओंकारेश्वर का उजियार
मैं फैलाता चला गया।।
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
जन्म जीवन मोक्ष मार्ग
साकार शिव केदार
गुणागार संसार अभयदान
पाता चला गया।।
ज्ञान बैराग्य का है
प्रकाश वैद्यनाथ शक्ति
श्रोत सार वैद्यनाथ
शंकर कण कण विश्वास
वैद्यनाथ शिव तांडव मै
गुनगुनाता चला गया।।
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
अकाल मृत्यु से मुक्ति
आशीर्वाद त्रयम्बकेश्वर
काल सर्प का विनाश
भय मुक्त दिवम्बरा
राग सुनाता चला गया।।
भक्ति मैं शिव कि जगाता चला गया
हर मन मे शिव ज्योति जलाता चला गया।।
आजादी के रंग में डूबे
आजादी के रंग मे डूबे
बच्चे बूढ़े सजनी और
सजनवां हो अब
आजादी का गीत गाए
भारत जन मनवा।।
हो अब आजादी के गीत गाए
भारत जन मनवा।।
आजाद है हम ,आजाद वतन है
आजादी का मौसम आया
चेहरों पर मुस्कान है लाया
नाचे गाए मनवा।।
हो अब आजादी का धूम मचाओ
भारती के लालनवा।।
चढ़ा रंग आजादी का
नाचे जन जन जनवा
तासे ढोल मृदंगा बाजे
हर्षित गाए जन गण
मन मनवा।।
हो अब आजादी के जश्न
मनाए भारत जन मनवा।।
आजादी का मौसम आया
सावन कि फुहार है लाया
तपन गुलामी का है मिटाया
हरियाली खुशहाली जैसे
लागे सपन सलोनवा।।
हो अब आजादी नही सपनवा
कहता भारत जन मनवा।।
तप त्याग जंगो कि
आजादी खून और
अधिकार आजादी
भारत छोड़े गए अंगेज
नए दौर का भारत
अब हैं ना।।
हो अब आजादी के गीत गाए
भारत जन मनवा।।
शपथ भारत की लेते है हम
आजादी के बलिदानों की
संघर्षों कि आजादी के
अरमानों कि सर भारत का
झुकने अब देंगे ना ।।
हो अब आजादी के गीत गाए
भारतजन मनवा।।
लाली नव प्रभात कि नव सूर्य
सूर्योदय है नव जीवन एहसास की
आजादी जिम्मेदारी और संकल्प है
नव भारत निर्माण की भाव भवना।।
हो अब आजादी के गीत गाए
भारत जन मनवा।।
घर घर तिरंगा फहर रहा है
शौर्य शक्ति कि गौरव गाथा
है कहता भारत के
इतिहासों की
वर्तमान कि प्रेरणा है
अभिमानवा।।
हो अब आजादी के गीत गाए
भारत जन मनवा।।
रंग बिरंगे फूल खिले है
गांव नगर गली सजे है
तोरण द्वार लगे है
जय भारत जय जय भारती
वंदे मातरम बोलता भारत का
जवान किसान नौजवनवा।।
हो अब आजादी के गीत गाए
भारत जन मनवा।।
खास अंदाज
बात कुछ खास हर अंदाज़ ।
दिल दुनियाँ खास अंदाज।।
तूफां समन्दर कातिल
खास अंदाज़
कली नाज़ुक कशिश
चाहत मुस्कान
खास अंदाज़।।
सुबह सूरज कि लाली
सुर्ख गाल लव गुलाबी
लाजबाब खास अंदाज।।
ढलता सूरज शराब
चाहत ज्जबा तूफान
ख्वाब खास अंदाज।।
लम्हा लम्हा ढलती रात
चाँद चाँदनी दिलों धड़कन
आह खास अंदाज।।
क्या बला है खूबसूरत
अदा नागिन मोहब्बत
खुमार खास अंदाज।।
लचकती कमर हिरनी चाल
गज गामिनी खास अंदाज
सर्द कि गर्मी बर्फ कि चादर
पानी झील दरिया समंदर कि
रवानी खास अंदाज।।
शबनम में नहाई चाँदनी
जैसे मुस्कुराई खास अंदाज
जलता मौसम गर्मी शीतल छांव
तेरा पहलू आँचल खास अंदाज।।
बेचैन दिल सुकून
मकसद कि वासंती वाला
वासंती वयार भीनी खुशबू
मस्त मधुमास खास अंदाज।।
रिम झिम बारिश
भीगा वदन सांसों कि
गर्मी जज्बात ज्वाला
निराला खास अंदाज।।
पितरों का मान
आशाओं का वर्तमान
जीवन आकांक्षा मार्ग
संघर्ष पुरखो कि
महिमा महान।।
विश्वाश छोड़ गए जो युग मे
हमको दे गए अपने जीवित
जीवन का विश्वास
उनके ही विश्वास धरा का
मान सम्मान करे।।
मातु पिता दादा दादी
पीढ़ी पुरखों पीढ़ी पुरुषार्थ
उनका हम अभिमान करे
पल प्रहर उनका ध्यान धरे।।
पुरखो के जीवन कि
त्याग तपस्या आत्म अस्तित्व
अविनि आकाश धरे।।
ईश्वर वरदान पुरखो को
तपर्ण अर्पण और समर्पण
श्रद्धा आस्था याद नही
अंगीकार करे ।।
जन्म बात्सल्य किशोर
युवा प्रौढ़ जरा जीवन
सत्य बृहद जीवन में
पुरखो का ज्ञान धरे।।
पितर अस्तित्व
परम्परा युग सृष्टि
ईश्वर आत्म साथ करे ।।
पुरखो कि गोदी कान्हे का
मर्म धर्म ऋण बोध दायित्व
प्रवाह आत्म साथ करे।।
विद्वत शिक्षा संस्कार
स्वीकार पितरों कि आस्था
आभा बोध का
मंगल गान करे।।
मातु पिता गुरु
सेवा धर्म
जीवन मर्म की
महत्व आवाहन।।
पितरों का ध्यान धर्म
श्रद्धा का श्राद्ध
जीवन मूल्य कर्म
बोध का निर्वाह करें।।
जीवन कि नैतिकता
मार्ग दिग्दर्शक
मानवता का प्रत्यक्ष
परम् प्रकाश ज्ञान पुरखो
पितरों का सत्यार्थ करे।।
जीवन शक्ति भक्ति
सार्थकता सत्य वास्तव
वास्तविक सत्य सनातन
शुभ मंगल मनोहर मर्म
मर्यादा गुणगान करे ।।
बौद्धिक सात्विक
जीवन भाव
करुणा छमां वैराग्य
क्रोध घृणा द्वेष
दंम्भ का ह्रास नाश
भावना भाव पितरों
पुरखो का आत्म भाव धरे।।
पग प्रतिज्ञा मानवता
उपकार गिरते मानव
मूल्यों के युग मे
ईश्वर का वरदान
पुरखो पितरों का
अस्तित्व सत्य
आशीर्वाद सदा प्राप्त करे।।
हृदय मे तुम बसे हो
हृदय में तुम बसे हो
जीवन का सार बनके
जीवन मे यूं ही रहना
पथ उजियार बनके।।
धरती पर तुम हो आए
गो अवनी पुकार सुनके
जीवन मे यूं ही रहना
पथ उजियार बनके।।
मां देवकी का कोख
कारागार में चतुर्भुज पगटे
माता पिता कि याचना
वात्सल्य पुकार सुनके
आए बालक रूप धरके।।
भादों का महीना
तिथि अष्टमी
घनघोर अंधेरा
वारिस झमाझम
मध्य रात्रि को
तुम आए
अंधियार हरने।।
बालक रूप तुम्हारा
माता पिता कि इच्छा
देखेंगे बाल लीला
देव लोक में सब हरषे।।
निद्रा में बंदी रक्षक
चिर निद्रा में हो जैसे
बाल रुदन तुम्हारा
सुनना नही था उनके
बस में।।
निर्भय करते जग को
भय में माता पिता तुम्हारे
वसुदेव देवकी ने पत्थर
हृदय बनाए।।
सूप में तुम सोए त्रिलोकी
तुम कहाते चल दिए
वृंदावन को वसुदेव जी के
माथे।।
उल्लास यमुना का
तट पर तुमको पा के
बढ़ती गई उछाह में
पद पखारना ही बस में
वसुदेव थे व्याकुल
यमुना का हठ देखते
व्यथा वसुदेव कि
तुम समझे।।
पग यमुना को दे दिया
पग पखारती है यमुना
प्रभु पग धरके।।
आशीर्वाद पाई
लगने लगी घटने
सुगम मार्ग वसुदेव का
वृंदावन पहुंचे।।
निद्रा में थी यशोदा
माया कि महिमा जैसे
वसुदेव ने सुलाया
अंश हृदय का यशोदा
के बगल में।।
माया कि देवी कन्या
मथुरा को लेकर लौटे
द्वार कारागार बंद हुए
खुलके।।
बंदी रक्षक जागे
कन्या का रुदन सुनके
भागे गए महल कंस के
जन्म कन्या का बंदी
रक्षक हरषे।।
हिंदी
बोल चाल कि
भाषा है हिंदी
संवाद संचार है हिंदी
व्यवहार आचार है हिन्दी
प्रेम परस्पर भाव भवना
सत्यार्थ है हिंदी।।
धर्म मर्म कर्म
भारत का
संसार है हिंदी
रिश्ते सम्बन्धो का
आन है हिंदी
शान हैं हिन्दी
भारत सत्य
सनातन
भान है हिंदी।।
भाषा है हिंदी
बोली है हिंदी
भाव भावना
भारत की
पहचान है हिंदी।।
पूर्व से पश्चिम
उत्तर से दक्षिण
जन जन की आत्मा
भारत की प्राण है हिंदी।।
प्रेम की भाषा
मानव मानवता की
आशा निर्मल निर्झर
गंगा की धाराओं सी
कलरव नित्य
निरन्तर प्रभा
प्रवाह है हिंदी।।
सागर गहराई
हिमालय ऊंचाई
रस छंद अलंकार है हिंदी।।
स्वर व्यंजन
व्याकरण कि
संस्कृति सतत
सम्यक
संस्कार है हिंदी।।
भारत जन जन
मन का सूत्र औे बंधन
राष्ट्र राष्ट्रीयता का
सार है हिंदी।।
गीत गजल
संगीत आधार
धीर धैर्य का
पराक्रम पुरुषार्थ
क्रांति शांति का
शंखनाद हैं हिन्दी।।
पवन संग बहती है
कली फूलों की खुशबू
भारत की फुलवारी का
बाग बहार है हिंदी।।
अवनी के कण कण की
आवाज भारत का
स्वाभिमान मर्यादा की
मान है हिंदी।।
माँ आओ मेरे द्वार
माईया पधारों घर द्वारे
भक्तों का इंतज़ार है।।
घर घर तेरा मंडप सजा है
माईया के स्वागत का
दिन रात है।।
माईया तेरे रूपों का संसार
माईया तू ही अवनि अवतार
पर्वत बाला बुद्धि बृद्धि
स्वर संसार ।
माईया पधारो घर द्वारे
भक्तो को इंतज़ार है।।
माईया तू ही ज्ञान ध्यान विज्ञान
ब्रह्म आचरण ब्रह्म चारिणी
विधि विधान बुद्धि पराक्रम प्रवाह
माईया पधारों घर द्वारे भक्तों को
इंतज़ार है।।
माईया तू ही चंद्र हास शक्ति बल
बुद्धि का विकास माईया तू ही
दानवता का विनाश।
चंद्र माथे घंटा खड़क त्रिशूल
हाथ माईया पधारों घर द्वारे
भक्तों इंतज़ार है।।
माईया शुभ मंगल का है गान
तेरा आगमन झूमे गाए संसार
मिट गए सारे अंधकार कूष्माण्डा
का गुणगान माईया
पधारों घर द्वारे भक्तों का
इंतज़ार है।।
माईया चहुँ ओर खुशहाली
माईया कर्म धर्म मर्म मान
दुष्टो का विनाश स्कन्ध
माता का आगमन जग कृतार्थ
माईया पधारों घर द्वारे भक्तों
का इंतज़ार है।।
माईया जग सारा तेरा मंदिर
युग का प्राणी बालक नादान
माईया बल बुद्धि बैभव का वरदान।।
दुष्ट दुष्कर्म दुःसाहस का नाश
मां कात्यानी जग माँ है तू प्राण
माईया पधारों घर द्वारे भक्तों को
इंतज़ार है।।
माईया तू ही सत्य सन्ध सत्य
सत्यार्थ माईया तेरा जग
जाहिर न्याय।।
अन्याय दानव का है तू काल
भक्तो की रक्षा राक्षस संघार
तू ही काली काल माईया पधारो
घर द्वारे भक्तोंको इंतज़ार है।।
युग गरिमा गौरव गौरी
भक्ति ,शक्ति का विश्वास
वरदान पूजा वंदन अभिनंदन
महा गौरी धाम पधार माईया
पधारो घर द्वारे भक्तों को है
इंतज़ार।।
सकल मनोकामना दायनी
रिद्ध सिद्धि दायनी भय
भव भंजक निर्भय कारी
सिद्धदात्री माँ नौ रूप नवधा
भक्ति नवग्रह सहित विराजै
माईया पधारो घर द्वारे भक्तों
का हैं इंतज़ार।।
हिंदुस्तान में सिसकती हिन्द
जन्मी जहां
वही सिसकती हिन्दी
काल की चाल
बदलते युग पीढ़ी
से पूछती कौन हूँ मैं ?
मेरी पहचान क्या?
सांसे धड़कन
प्राण है कहते
दिवस पल प्रहर
बस याद है करते
माँ शारदे समक्ष
प्रतिज्ञा करते
फिर विस्मृत करते।।
परतंत्रता मानसिकता से
उबर नही सकते
आंग्ल भाषा बसी
जीवन में राज भाषा
कहते राज्य राज में हिंदी से
अलग ही रहते।।
घर मे मम्मी पापा
डैडी अच्छा लगता
गुड़ बाई टाटा करते
मातु पिता नमस्कार
प्रणाम हिंदी संस्कृति
परम्परा याद नही करते।।
अंग्रेजी में बात करो तो
विकसित बैभव विराट
व्यक्तित्व ।
हिंदी पिछड़ेपन
समाज की सोच आज भी
हिंदी मांगती चाहती भारत हो
अपना अभिमान।।
विश्व गुरु बनने का
दंम्भ बहुत भारत
मात्र एक राष्ट्र
जिसकी कोई
राष्ट्र भाषा नही
कैसे कहूँ स्वतंत्र राष्ट्र।।
स्वतंत्र राष्ट्र के
तीन स्वाभिमान
निज ध्वज भाषा धर्म समाज
भाषा है ही नही अधूरी स्वतंत्रता अधूरा राष्ट्र भारत वर्तमान।।
फ़ारसी अरबी
आंग्ल कि मिली जुली
भाषा संस्कृति
अब भी भारत की
राज भाषा नाम मात्र।।
न्याय अरबी फारसी आंग्ल में
राज्य कार्य संस्कृति आंग्ल में
अभिमान राज भाषा भी हिंदी है
ना परिहास।।
दुर्गति दुर्दशा पर
रोती सिसकती
हिंदी भारत से
करती पुकार
क्यो नही देते मुझे त्याग ?
क्यो करते मेरे ही संतान
मेरा ही अपमान तिरस्कार।।
हिंदी तो अपनी बोली है
हिंदी तो अपनी बोली है
इसे अंतर मन से बहने दो
संस्कृत जननी जन जन की
संस्कृति संस्कार है।।
हिंदी सत्य सनातन सत्य
भाषा भाव अभिव्यकि विचार
बदलते पल प्रहर युग अवसर
उपलब्धि का संसार है।।
परिवर्तन प्रवाह युग काल समय
चाल नित्य निरंतर निर्मल निर्झर
अविरल निश्चल निश्चय अविरल
निर्विकार है।।
हिंदी भाषाओं का आधार
सार्थक सत्य याथार्त आधुनिक
युग भले लगता पाश्चात हिंदी
पर्याय अपरिहार्य है ।।
हिंदी अवसर उपलब्धि
भाषा संगम सरस्वती हर शब्द
स्वर भाव की वीणा की झनकार
संस्कृत जननी जन जन कि संस्कृति
सांस्कार है।।
सारे जहां से अच्छा भारत देश हमारा
सारे जहां से प्यारा
यह देश है हमारा
भारत है जिसको
कहते दुनियां सबसे
न्यारा।।
माटी है जिसकी पावन
माता जिसे हम कहते
बेटियां यहाँ कि देवी
नारी को पूजते।।
बच्चा बच्चा है जैसे
राम कण कण हैं
बसते कंकड़ कंकड़
शंकर है रहते।।
कश्मीर भाल जिसका
अवनी का स्वर्ग दुनियां
के लोग सभी कहते।।
गुरुओं के त्याग बलिदानों
के इतिहास कि है भूमि
महाबीर बुद्ध का संदेश
शांति मार्ग पर चलते।।
प्रेम शांति सद्भाव भवना
भारत कि जन जन साधना
क्रूरता उग्रता का प्रतिकार
हम करते।।
कलरव करती नदियां
भारत संस्कार गान करती
निर्मल निर्झर निकलती
भारत का मान कहती।।
भारत है हमको प्यारा
जहां जन्म जीवन है हमारा
जीने मरने कि प्रतिज्ञा
पावन वचन है हमारा।।
ऐसा भारत देश हमारा
देश ऐसा विश्व मे
रिश्तो कि मर्यादा है
माँ बहन नारी शक्ति
गरिमा गौरव विश्वस
आशा कि ज्योति जलती।।
ऋतुएं मौसम जहां
स्वर्ग का आभास कराती
जीव आत्मा वेदना सत्य
जीवन मौलिक मूल्य बताती।।
नदियां सागर में भी
देवी देवो का वास
पत्थर और कण कण
अविनि में ईश्वर कि
आवाज बताती।।
गौ गौरी गांगा कि बात
निराली मत्स्य कच्छप
वाराह भी अवतारी
वन जीवन जल जीवन
जीवन दर्शन का भाष्य
बताती।।
धर्म ध्वज है मानवता
पशु पक्षी लता गुल्म
बृक्ष सभी भी पूजे जाते
प्रकृति प्राण का शाश्वत
सत्य सनातन है भाषी।।
काल निरंतर अपनी
गति में देवो के आने
जाने का गुणगान कराती
पावन भूमि है भारत
विश्व का संध्या और प्रभाती।।
गुरु शिष्य कि परम्परा
माता पिता कि सेवा थाती
रिश्तो का बंधन समाज
जन्म जीवन कि दिया वाती।।
भारत देश है प्यारा
विश्व गुरु है न्यारा
कोई एक मुल्क नही
जिसको भारत कि
शौम्य सभ्यता नही
है भाती।।
सुधार कि शुरुआत
सुधार कि सुरुआत कीजिए
क्लेश दुःख कि अनुभूति मत
कीजिए ।।
सुधार सदा अल्प पीड़ा कारक
दीर्घ जीवन काल का सुख सुंदर
वरण कीजिए।।
सुधार कि शुरुआत बहुत आसान
सुधार कि मंजिल कठिन चुनौती
सुधार कि चुनौती स्वीकार कीजिए।।
काल अविरल गतिमान नित्य
निरंतर सुधार और काल का
अभिमान मत कीजिए।।
स्वंय कि त्रुटि कमी को स्वंय
करना समाप्त सुधार कोई
सिंद्धान्त परम्परा नही सुधार
काल समय कि पुकार सुनने
कि कोशिश कीजिए।।
सुधार करना कोई कायर कमजोर
का नही काम सुधार सुधार दृढ़
इच्छा शक्ति साहस शौर्य आत्म
साथ कीजिए।।
दिए जलाओ राष्ट्र समाज निर्माण के
जननी जन्म भूमिश्च
अभिमान हमारा
आज्ञाकारी संतान
राम रहे!!
अन्याय अत्याचार का
ना नामो निशा रहे
लिंग भेद का दर्द नहीं
प्राणी प्रकृति परिवार का
युग संसार रहे!!
पड़ती बेटी बढती बेटी
अंतर द्वन्द नहीं बेटी बेटों में
बेटी लक्ष्मी जैसी
शुभ मंगल का उपवन
सारा जग उजियार रहे।।
नारी उत्पीड़न बाल श्रम श्रमिक
अभिशाप सबके अधिकार
सुरक्षित सबको उपलब्धि
अवसर का देश युग
समाज काल रहे।।
हाथ उठे गर श्रम
कर्म धर्म में भिक्षा ना ले
दे कोई मूल्यों मर्यादा का
संसार रहे।।
मजदूर मज़लूम
मजबूर न हो रोष
प्रतिरोध न हो कोई
उचित काम का
उचित दाम मजदूर
मानव महिमा की
दौलत पूंजी का
राष्ट्र समाज रहे।।
किसान हताश
निराश न हो
धरती सोने की
खान रहे!!
फ़र्ज़ कर्ज के
मकड़जाल
आत्म शारीर का
त्याग नही
आत्महत्या का शिकार
ना किसान रहे।।
कर्षती इति कृष्णः का
गोपालक किसान
ग्राम देवता अभिमान रहे।।
गाँव खुशहाल
आमिर गरीब का ना
भेद भाव शहर नगर की
डगर डगर खुशहाली
महक मान का मान रहे।।
व्यवसायी का व्यवसाय
निर्विवाद निर्बाध हो
उद्योंगो का पहिया
नित्य निरंतर चलता जाए
उद्योंगो की गति जाम नही
निर्वाध रहे।।
युवा शक्ति उत्साहित
राष्ट्र निर्माण की सार्थक
ऊर्जा ना उग्र उग्रबाद रहे।।
युवा उत्साह उल्लास
शौर्य का नित शंखनाद
बुजुर्ग प्रेरणा का सम्मन रहे।।
आदर्श समाज
आदर्श राष्ट्र ना
भय भ्रष्टाचार रहे
त्वरित न्याय
रामराज्य का
भारत विश्व
प्रधान रहे।।
हर रोज खुशियो रंगों
का तीज त्योहार
खुशहाल पल प्रहर
राष्ट्र समाज रहे।।
बच्चा बच्चा राम
कुपोषण का
ना शिकार रहे
मातृत्व सुख में
नारी को अभिमान रहे।।
जवान देश की
सरहद पर
निर्भीक निडर
सरहद का फौलाद रहे।।
राम विजय
अच्छाई सच्चाई की
विजय शक्ति की
अर्घआराधना
नव रात दिन का
पल पल वर्ष
युग दिन रात रहे।।
राम आगमन
मन मे नव स्फूर्ति
जागृति चेतना का
संचार रहे।।
ना कोई व्याधि
रोग से पीड़ित
ना अकाल काल का
कोई प्राणी ग्रास
रहे।।
घर घर दिए जलजाएंगे
आशा विश्वास के प्रेम
प्रवाह की मानवता
का नवयुग में संचार रहे।।
कवि लेखक कलाकार
लिखे पढ़े अभिव्यक्त करें
युग का अभिमान
रामराज्य की सार्थकता का
गुण गान रहे।।
लोकतंत्र लोपतंत्र नही
अराजक अराजकता
नही सात्विक सद्कर्म
सहिष्णु लोकतंत्र का
नाम रहे।।
आसमान में लहराता
फहराता तिरंगा
रामराज्य का विश्व
प्रकाश रहे।।
सार्थकता के लेखन का
प्रबुद्व समाज निर्थक का
ना कोई प्रमाण रहे।।
स्वच्छ अवनि आकाश
वायु ध्वनि प्रदूषण से
मुक्त प्रकृति निर्मल
निर्झर बहती नदियां
पर्वत वन जल
जीवन वन जीवन का
सत्यार्थ रहे।।
ना कोई महामारी ना
कोई बेरोजगारी
समय सिद्ध का
उपयोग कोई जीवन
ना बेकार रहे।।
लेख लेखन हो
गुण धर्म उपलब्धि
सर्वसमाज जन जन
उपयोगी योगदान रहे।।
नर में हर मानव
नरेंद्र हो राष्ट्र समाज
के लिये त्याग तपस्या का
मिशाल मशाल रहे।।
बापू के सपनों का
भारत बल्लभ की
एकता का भारत नेता
नियत का भारत
विश्वगुरु बेमिशाल रहे।।
दीये जलाओ प्यार के
जग में ना
रह पाये अंधेरा
ऐसा उजियार करो
दिए जलाओ प्यार के
मानवता संसार में!!
ना कही अँधियार रहे।।
अवनि स्वर्ग सरीखा
बैर द्वेष ना हो क़ोई
मानव मानवता का
जग सारा सुंदर मन
भावन संसार रहे।।
भेद भाव नहीं
कोई मजबूर नहीं
प्राणी प्राण प्रेम की
बहती निर्मल धरा
सम भाव समाज
शक्ति के साथ रहे।।
नारी वेबस क्यों?
नारी आज खोजती
खुद को राष्ट्र
समाज के हर पल प्रहर में
करती सवाल कौन हूँ मैं ?
क्या अस्तित्व है मेरा?
क्यों हूँ मैं बेहाल?
सभ्य समाज की
सभ्यता से गली
चौराहों हाट
बाज़ारों पर सवाल?
मैँ माँ भी हूँ बहन बेटी
रिश्तो के समाज मे
फिर क्यो डरी सहमी?
सम्मान अस्मत को
करती चीत्कार पुकार।।
कहती है नारी जन्म
से पूर्व कोख में मेरा
क्यो करते हो नाश।।
गर जन्म ले लिया हमने
जीवन भर अस्मत अस्तित्व
की खातिर लड़तीं संग्राम।।
शिक्षा दीक्षा अधिकार
की खातिर लड़ते रहना ही
मेरा संसार।।
घर सड़क गली बाज़ार
चौराहों पर डरी सहमी
भागती दौड़ती मांगती
अपना सामान अधिकार।।
कभी स्वयं की अस्मत
बचाने में मीट जाती
कभी दहेज की बलि
बेदी पर जिंदा ही जल
जाती या जला दी जाती
दहसत दासता नियत का
जीवन भार।।
मानव मानवता के विकसित
समाज मे भी बेबस हूं मैं
नारी परम् शक्ति सत्ता की
स्वीकार।।
नारी स्वर साधना
स्वर साधना आत्मा
ममता ममत्व आँचल
कला काल भाव नारी
दुर्गा ज्वाला।।
इंदिरा लक्ष्मीबाई सरोजनी
कल्पना मरियम यशोदा
सती शीतल अंगार।।
चंचल चितवन शोख
अदा अंदाज़ प्रेम घृणा
कोमल कठोर खुशबू
खूबसूरत श्रृंगार।।
त्याग तपस्या राग रागिनी
विद्या वादिनी वीणा झंकार।।
जन्म दायनी वात्सल्य
बैभव विशाल कामिनी
ग़ज़ गामिनी काल कराल
विकट विकराल।।
पृथ्वी पतित पावनी
सृष्टि युग समाज
स्वाभिमान।।
देव शक्ति नारी
सृष्टि युग की गौरव
प्रकृति प्रवृति की
अनिवार्यता परम्
शक्ति की सत्ता नारी
शक्ति आधार।।
ब्रह्म विष्णु शंकर
शिवा वैष्णवी सरस्वती
परम् शक्ति सत्ता ईश्वर
की भागीदार।।
सृष्टि पूर्ण तभी होती
जब नारी लेती प्रथम
अवतार।।
नर नारायण की
शक्ति में नारी
समान हिस्सेदार।।
देश काल परिस्थिति
चाहे जो भी हो
नारी शक्ति से अविनि
आकाश निर्माण।।
नारी अनिवार्य तथ्य
तत्व सृष्टि की दृष्टी
दिशा संस्कृति संस्कार।।
देव नारी से नारी से
राष्ट्र समाज अर्धनारीश्वर
देव परम् शक्ति सत्ता का अंगीकार।।
नारी स्वरूप है परम्
शक्ति सत्ता भरत भारत
भारती दर्शन संस्कृति
प्रमाण।।
इश्क की बीमारी
जिंदगी में बीमारी
कम नहीँ औकात
बता देती है अच्छे
खासे इंसान को
जिंदा लाश
बना देती है।।
कहूँ कैसे मैं बीमार हूँ
खासा नौजवान हूँ
फिर भी हुश्न के
इश्क का शिकार हूँ
लगता नही मन कहीं भी
भूख प्यास से अंजान हूँ।।
माँ बाप को फिक्र
ये बीमारी क्या?
वैद्य कहता है
मैँ बीमार नही
इसका कोई
इलाज नही
शर्म आती है
बताऊँ कैसे
मुझे क्या हुआ है?
मैं बीमार हूँ।।
इश्क ने खोखला
कर दिया सिर्फ
चाहत का दीदार ही
इलाज है!!
नज़र इबादत
इश्क की आती नही
शायद वह भी
बीमार बेजार है।।
अब तो जिंदगी
सांसे धड़कन
चाहत इश्क का
जुनून जिंदगी
इंतज़ार है।।
गर न मिली मेरी
बेबाक चाहत कि
मुहब्बत का दुपट्टे
ओढे कफन जनाजे पे
चढ़ने को बेकार हूँ।।
चढ़ गया है इश्क का
शुरुर इस कदर
कहती दुनियां
इश्क का बुखार है।।
ना संक्रमण है
कोई ना बीमारी
कोई खतनक है!!
कोरोना भी पास
नही आता जमाने की
दहसत से इश्क़ के
कोरेनटाइन मास्क है ।।
क्या कहूँ की
बीमारी क्या?
कोई सुनने को
तैयार नही
कहते है सभी
प्यार मुहब्बत की
उम्र नही तू तो
नादान है।।
कहती है दुनियां
लिखने पड़ने में
लगता ही नही मन
आवारा भौरा
जिन्दगी का जिंदगी की
सच्चाई से अनजान है।।
क्या करूँ दिल तो दिल है
बच्चा बूढ़ा जिस्म नही
चाहत की ना कोई उम्र
मुकद्दस दिल तो सच्चे
मुहब्बत का ईमान है।।
इश्क का भूत नजर
नहीं आता दिखता नही
वर्तमान है भविष्य
पता किसको जिंदगी
खुद की खुदा जिंदगी
राज है।।
इश्क की बीमारी
अच्छी या बुरी
पता ही नहीँ
मैं बीमार हूँ
इश्क से इश्क का
मिल जाना ही
इलाज है।।
लेखक की चाहत पाना
मेरी चाहत काल मानवता
आदर्शो का नायक हो।।
मेरे भावो की
अभिव्यक्ति
सच्चाई दर्पण हो।।
कलम चले
हमारी अन्याय
अत्याचारों पर
नैतिकता के विजय
तेज धार तलवार हो।।
सृजन करूँ
ऐसा युग आदर्श
अवधारणा जैसा
लिख दूँ इतिहास
कलम से वर्त्तमान का
प्रेरक हो।।
जन जन हृदय
भाव मे स्थान हो मेरा
ना रहने पर भी शब्द
स्वर कलम अक्षय अक्षुण
अभिमान हो मेरा।।
निःस्वार्थ रहूँ
निरपेक्ष रहूँ
सत्य याथार्त रहूं
विचलित ना हो
मार्ग हमारा सार
साहित्य का मान रहूं।।
काव्य कविता और
कहानी मेरे मानव
मानवता के मूल्यो के
मेरी इच्छा चाहे
देनी हो कितनी
परीक्षा न्याय
नैतिकता नीति
नियत काल रहूं।।
तुलसी सुर कबीर
कालिदास व्यास
नागार्जुन परसाई
हरिवंश राय सा
बच्चन मधुशाला
का गान रहूं।।
मेरे अन्तर्मन की
ज्वाला अंगार
कलम से निकले
दृष्ट दमन का
काल बने सत्य
अहिंसा की मौलिक
मर्यादाओं का मान रहूं।।
कलम हमारी
कालजयी आविष्कार
लिखे युग आकांक्षा
भविष्य वर्तमान लिखे।।
मेरे मन के भाँवो से
किरणों का सांचार
निकले परिवर्तित हो
साहित्य सार का सार
आभार मिले।।
मेरी पहचान है हिंदी
बेटा हिन्द का हूँ मैं
मेरी पहचान है हिंदी
माँ शारदे की वीणा
झंकार है हिन्दी!!
लहू सांसों धड़कन में
बहती धड़कन प्राण है
हिंदी!
बेटा हिन्द का हूँ मैं
मेरी पहचान है हिंदी।।
अविनि से अम्बर
तक प्रभा प्रवाह है
हिंदी!
निशा दिवस शुभ
संध्या प्रभात है हिंदी!
ह्रदय मेरा एक मंदिर
माँ भारती देवी स्वर
साधना आराधना
मेरी है हिंदी!!
बेटा हिन्द का हूँ मैं
मेरी पहचान है हिंदी।।
आन है हिंदी
बान है हिंदी
सम्मान है हिंदी
स्वभिमान है हिंदी
हिंदुस्तान है हिंदी
भारत कि भाषा बोली
भारत की भावना
मुस्कान है हिंदी!
बेटा हिन्द का हूँ मै
मेरी पहचान है हिंदी।।
पूरब से पश्चिम
उत्तर से दक्षिण
जन आकांक्षा
आत्म पुकार है
हिंदी!
हिमालय सा ऊंचा
सागर सी गहरी
हिन्द की भाग्य है
हिंदी।
बेटा हिन्द का हूँ मै
मेरी पहचान हैहिंदी।।
प्रेम की भाषा
मानवता रसधार है
हिंदी!
अविरल निर्मल निर्झर
कल कल कलरव
गान है हिंदी।
बेटा हिन्द का हूँ मैं
मेरी पहचान है हिंदी।।
संस्कृति सम्यक
संस्कार है हिंदी
हिन्द एक नेक की
बंधन सूत्र राष्ट्र कि
सार है हिंदी।
बेटा हिन्द का हूँ मैं
मेरी पहचान है हिंदी!!
स्वामी विवेका नन्द
समय सारथि धर्म
ध्वज अभिमान
मानव मानवता
व्यख्याता चिंतन
चिंतक महान।।
योद्धा पुरोद्धा युग
जीवन मूल्य महारथी
दीप पुंज मशाल!!
कर्म क्रान्ति की
काया माया महिमा
गर्व गौरव मान।।
उत्कर्ष उत्कृष्ठ
युवा ओज तेज
पराक्रम गगन गूंज ।
अवनि युग
भाव भावना
वर्तमान ।।
दिग्दर्शक सन्यासी
ब्रह्म ब्रह्मांड
सत्यार्थ प्रकाश!!
पुरुष में पुरुषार्थ को
ललकारता ईश्वर कि
सत्यता प्रणाम!!
आत्मा परमात्मा कि
परम् शक्ति का युवा
सौर्य साक्षात्।।
सादगी सच्चाई का
हंस भरत भारत वंश!!
मर्यादा राम कृष्ण
कर्म योग योगेश्वर
ज्ञानी ज्ञानेश्वर!!
परम् हंस की
आत्म बोध का
काल कलरव
शंखनाद युग
गूँज गान।।
मर्म मूल्य
मानव संस्कृति संस्कार
अभ्युदय उत्थान!!
अवनि आकाश
माँ भारती आँचल में
विश्व को समेटता
व्यक्ति व्यक्तित्व
विश्व विराट।।
वीर वीरता की
व्याख्या धीर
धैर्यता की दक्षता!!
धरती अम्बर
तेज पावक की
ज्वाला विज्ञ विज्ञान!!
नीर की निर्झर
निर्मल निरंतरता
तूफ़ान।।
अविरल अविराम
उद्धेश्य का उमंग
उत्साह प्रवाह!!
जीवन उर्जा साक्षात
साक्षात्कार युवा
ललकार ।।
उदय उदित सूरज
लाली रक्त संचार
युवा पुकार पल
प्रहर रात
सुबह शाम!!
क्रांति -शान्ति
शांति- क्रांति
आवाज का युवा
संस्कृति संस्कार।।
नर में नारायण ,
नारायण से अस्ति
अस्तित्व निर्माण!!
इंद्र नरेन जन्म
जीवन का
अनुसन्धान
अन्वेषक।।
विवेका आनंद
अनुभूति आवाहन
योग का योगी
सन्यासी परम्
पराक्रम पुरुषार्थ।।
कर्तव्य दायित्व की
प्रमाणिकता का
प्रभा प्रबाह!!
क्रिया प्रकिया से
बिमुख जन्म जीवन
को देता नयी पहचान!!
नया आयाम
नरेन से विवेका
सत्य अंनंत माहात्म्य।।
माँ की महिमा
वात्सल्य का
वरदान माँ काली
आशिर्बाद!!
भाग्य काल
भगवान प्रमाण
भय अन्धकार का
जनमेजय अजेय
युवा हुंकार ।।
इच्छा आकांक्षा
संग्राम समर का
महारथी विजेता
विशिष्ट विशिष्ठता
विशेष विशेषता
बैभव भाव!!
विवसता त्यागता
कर्म तपस्या व्याख्या
विधि विविधता स्वामी
सत्यार्थ!!
नियमित नियम
अनुशासन शासन
सयंम निधि से सिद्दी।
जीवन जन्म सत्कार
चिंगारी अंगार
जोश जोशीला
नौजवान।।
विश्व युवा बोध
सिंघनाद युग
युवा चमत्कार!!
शैली शृंखला
विवेका युवा
अस्तित्व आधार।।
सिद्धार्थ से बुद्ध
कभी -कभी आता
बन कर मानव खुद ही
भगवान्!!
निहित उद्धेश्यों कि
ख़ातिर करता नव
जागृति चेतना का
युग का पुनर्निर्माण।।
प्रवर्तक बन युग का
परिमाजर्न करता
संस्कृति संस्कार!!
युग जब स्वीकारता
प्रवर्तक परिवर्तन
आदर्शों को तब मानव
मानव को कहता
उद्धारक अवतार ।।
सिद्ध अर्थ का
सिद्धार्थ ने जाना
जब जीवन कि
अवस्थाएं चार!!
बीमार बृद्ध मृत्यु
असहाय निकल पड़ा
सत्य कि खोज में
राजा शुध्धोधन का
राज कुमार सिद्धार्थ ।।
माता पिता बेटा और
पत्नी कुटुंब परिवार
समाज का कर
परित्याग!!
पिता चाहता बेटा
सुख सुविधा का
भोग करे राजा बन
राज करे स्वीकार नहीं
कर पाया सिधार्थ।।
विलास राज पाठ
मोह माया बंधन का
किया त्याग जागा
मन में बैराग!!
निकल पड़ा बैरागी
जन्म् जीवन सच का
करने को आविष्कार ।।
मोक्ष कि कामना में
प्राणी करता है जहाँ
यज्ञ अनुष्ठान!!
गया तीर्थ बना
गवाह सिद्धार्थ से
बुद्ध की जीवन
यात्रा का प्रमाण।।
राज गिरी भूमि वहीँ है
बोध बोधि का बट
बृक्ष वहीँ है!!
सिद्धार्थ कि कठिन
तपस्या और चुनौती
गूँज का प्राणी
प्राण वहीं है!!
भगवान् तथ्य तत्व का
ज्ञान यही है सिद्धर्थ
बुद्ध कि अवधारणा
अवतार सत्य सही है।।
अहिंसा परमो धर्मः का उपदेश अर्थ काम कर्म मोक्ष का मार्ग।
काशी के कर्म ज्ञान का
शंख नाद सारनाथ वहीं है ।।
पूर्णता सम्पूर्णता कि
आत्मा से परमात्मा कि
यात्रा का सिद्धार्थ ।
बुद्ध का युग में
साक्षात्कार सत्कार
लुम्बनी कपिल वस्तु काल
भय भाग्य का भगवान् ।।
अनर्द्वंद से निकला
निखारा मूल्यों आदर्शो कि
आत्मा परमात्मा का सिद्धांत!!
करुणा दया छमाँ
प्राणी प्राण की अनंत
परंपरा का सिद्धार्थ
बुद्ध अवतार का सत्कार ।।
कुशीनारा की धरती
जीवन कि सच्चाई
अन्वेषक का महा
परिनिर्माण!!
त्याग तपस्या सच्चाई
ही जीवन के है न्यास ।।
आत्म साथ कर लेता
जो इनको बोध बुद्ध का
भिक्षु सन्यास।।
संघम शरणम् गच्छामि
धम्मम् शरणम गच्छामि
अहिंसा परमो धर्मः का
प्रादुर्भाव!!
प्राणी प्राण में
परमेश्वर का सत्य
सत्यार्थ बुद्ध का
दिव्य दिव्यार्थ।।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस
क्रांति क़ी भाषा
परिभाषा का नया
शौर्य सूर्य भीख नहीं
आजादी रक्त संचार
अधिकार ।।
आजादी लहू का
प्रभा प्रवाह आजादी
और लहू से लिखी
इबारत का काल
वर्तमान ।।
आजादी त्याग
बलिदान की तकदीर
मागने से मिलती नहीं
आजादी शक्ति साहस
जज्बे की जागीर।।
देश स्वाभिमान पर
मर मिटने वाला
अंगार ज्वाला!!
कुर्बानी की हद से
गुजने वाला रथी
महारथी महान ।।
अन्याय अत्यचार को
बर्दास्त की कायरता की
ललकार!!
यौद्धा महायोद्धा
माँ काली का
आशीर्वाद!!
आक्रामक सिपाही
सैनिक सेनापति
स्वतंत्रता संग्राम!!
आज़ादी की कल्पना का
सत्य सार्थक साकार
निडर निर्भय निर्भीक
मंज़िल मकसद
का बाज़ जाँबाज।।
सांसो में आजादी का
तूफ़ान धड़कन में
माँ भारती का अभिमान!।
खून में आजादी ज्वाला
मशाल का उठता ज्वार
सुर नीति नियत निर्विकार।।
प्रगति शान्ति
समन्वयक आजादी
मानव मानवता के
मूल मूल्य समर का
युग समय काल।।
रमइया कि हार
महात्मा के आहत भाव
मूल्यों आदर्शो पे मिट
जाना बलिदान कि
पराकाष्ठा पुरुषार्थ
सुभाष ।।
वक्ता प्रेरक प्रेरणा
पराक्रम का चंद्र चाँद
आस्था निति नियत
नेतृत्व विराटता सर्व
स्वीकार का नेता
सुभाष।।
पल प्रहर दिन रात
सुबह शाम युवा ऊर्जा
उत्साह उमंग प्रसंग
प्रमाण।।
दिग्दर्शक पथ प्रदर्शक
दूर दृष्टि इरादों का चट्टान
बाधाओ से उद्धेश्य विमुख
नहीं बाधाओ को
फेंकता उखाड़!!
अपनी राहो में आराम
नहीं विश्राम हराम
मंज़िल से पूर्व विश्राम!!
आजादी के लिये खून
माँ भारती का
अभिषेक आवाहन
अल्लादित उल्लास।।
वास सुगंध युग
वयार प्रणेता
सुभाष नियत
नीति नेता!!
अहिंसा –(कल्पसूत्र)
मानव मानवता का
संसार लिये करुणा
प्रेम छमाँ गुण
धन धान्य लिये ।।
जीव आत्मा रिश्तों का
वैभव विधि विधान लिए
प्राणी प्राण समानता
सत्य ब्रह्मांड लिए।।
दुःख सुख हर्ष
विषाद नहीं
अवनि अम्बर
सिद्धान्त लिए।।
प्राणी प्राण का उद्धार
उद्देश्य मोक्ष मार्ग लिए।।
हिंसा पर विजय
सत्य अंहिसाआत्म
साथ हथियार लिए।।
भटकती पीड़ा के
अंधकार में दुनियां
शांत शौम्य का
उजियार लिये।।
यत्न प्रयत्न का
कर्म धर्म ज्ञान
विज्ञान लिए!!
महात्मा कि आत्मा
परमआत्मा तत्व तथ्य
विश्वाश लिए।।
तत्पर तत्क्षण कल्याण
विश्व का संकल्प साध्य
साधना साथ लिए।।
काया माया का महात्म
अंत सात्विक जीवन
मार्ग लिए।।
महावीर महापरक्रम
पुरुषार्थ का जन्म
जीवन ज्ञान लिए।!
कर्म धर्म दायित्व
बोध का कल्पतरु
कल्प सूत्र शास्त्र लिए ।।
जनमेजय जन्म
मृत्यु के बंधन से
मुक्ति बोध का ईश्वर
ब्रह्म ब्रह्मांड लिए ।।
सयंम संकल्प निति
नियम संयम का जीवन
मर्म मूल्य मूल्यवान लिए।।
भय भव भंजक शुभ मंगल
भाग्य भविष्य वर्तमान
व्यवहार लिए।।
प्राणी प्राण कि निष्ठां
भगवान अंश अहिंसा
अवतार लिए।।
इंसान खो गया है
इंसान खो गया है
बौना सा हो गया है!!
परछाई ने भी साथ
छोड़ा तन्हा सा
हो गया है ।।
शराब हुई महंगी
खून हुआ सस्ता
दुनियां का एतवार
घर परिवार खो गया है ।।
मैख़ाना ही
घर बार हो गया है
पैमाने कि सरपरस्ती
ईमान खो गया है!!
नशे में झूमता
इंसान खो गया है
इंसान का गुरुर
जिंदगी का शुरुर
फितूर फासलों का
हो गया है ।।
कही दौलत का है नशा
कही ताकत का नशा
हुश्न की हद का नशा।
रसूख का नशा
सोहरत का नशा
इल्म हुनर का नशा
आशिकी का नशा
नशे में डूबते इंसान का
ईमान खो गया है।।
जिंदगी ही जिंदगी का
कातिल इंसान ही
इंसानियत का दुश्मन।
रश्क और रंजिस में
इंसानियत का तार तार
हो गया है ।।
रोटी हुई महँगी
जान अब आम
घास हो गया है ।
झूठे गुबार कि
अंधी दौड़ में है
शामिल हर इंसा
खार खार हो गया है ।।
भाई भाई से लड़ता
भाई भाई का प्यार
खून कि प्यास कि
चाह राह हो गया है ।
एक ही बिभीषण था
काफी रावण का नाश
करने को अब बिभीषणो का
हर परिवार हो गया है ।।
हर इंसान
हुनर इल्म का शान
शानी इल्म मश्वसरे का
व्यपार इंसान होगया है ।
हुक्म मशविरे का
आदि इंसान खुद के
लिये अँधा गूंगा बहरा
सा हो गया है ।।
रोटी और बोटी के
वास्ते इज़्ज़त ईमान
का सौदा इंसान कर रहा है इंसान।!
जहाँ में बाज़ार का
चलती फिरती दूकान
अब हो गया है ।।
कुछ भी नहीं है
नामुमकिन अब
इंसानो कि बस्तियों में
इंसान बिक रहा है ।।
हर सुबह शाम
इंसानो कि लगती है मंडी
खुद बिकता इंसान
खरीदार भी इंसान
बन गया है।।
हर चीज है बिकती
कभी मौल तोल से कही
बेमोल हो गया है।
मतलब और मौके कि
लगती है कीमत
बिना मतलब के
इंसान भी कबाड हो गया है।।
दीन और ईमान
बिक रहा है हुस्न का इश्क
बिक रहा है नाम बदनाम्
बिक रहा है।
बूढ़ा नौजवान बिक रहा है
माँ बाप बिक रहे
औलाद बिक रहा है।।
बोलो चाहिये क्या
तुम्हे जोश जश्न
नफ़रत मोहब्बत का
हर सामान बिक रहा है।।
कीमत से है दरकार
किस्मत खुदा भगवान्
बिक रहा है।!!
हालात और इंसान
मजबूर मजलूम
इंसान हो गया है
दुनियां में भीड़
शोर है बहुत
दुनियां कि भीड़ मे
इंसान खो गया है!!
भीड़ में भी इंसान
तनहा खुद में खोया
खुद को खोजने में
खो गया है ।।
नीद में भी सहमा
इंसान ख्वाबों के खौफ
दहशत में जी रहा है ।!
टूटते ही ख्वाब
शेर कि दहाड़ का
इंसान जहाँ को
लुटने ठगने लगा है ।।
चीखती है बेटियां
परवदिगार से
इन्साफ कि चाह में
नसीब उनका
कफन आम हो गया है ।।
बाप बूढ़ा दरवाजे पर
बैठ दिन रात खांसता
एक गिलास पानी का
मोहताज हो गया है!!
आपा धापी कि है
जिंदगी फ़ुर्सत नहीं
किसी को खुदा भी
इंसान बना कर
शर्मशार हो गया है।।
सडको पर जब
निकलते हवा से
बात करते ।
हकीकत से नफ़रत
तिलस्म और फरेब से
प्यार हो गया है ।।
इंसानो कि दुनियां से
इंसानियत के जज्बे
जज्बात गायब ।
इंसानो कि दुनियां
अब तिज़ारत का
बाज़ार हो गया है ।।
महात्मा के तीन बंदर और इंसान
इंसान अँधा बहरा
गुगा हो गया सच
सुनने देखने बोलने से
बचने लगा है।!
गांधी जी के तीन
बन्दर को इंसान
तिलांजलि दे रहा है!!
इंसान आँख खोलता
मतलब मौको पर
खुद के लियेजबान
खोलता हैं नाज़ और
गुरुर में भूखे भेड़िये
बाज़ कि तरह शिकार
के लिये कान खोलता है
बुराई सुनने के लिये ।।
महात्मा कि आत्मा
हर शहर गली चौराहों
पर बूत बनी देखती है
इंसान के बदलते
ईमान का तमाशा अपने
मतलब के लिए।।
आत्मा महात्मा
धिक्कारती है खुद को
सत्य के आग्रह सत्य
अहिंशा का मार्ग क्यों
खुद का सिद्धान्त बनाया!!
जमाने को क्यों
सत्य अहिंषा का
मार्ग दिखलाया
जीवन मूल्यों में
नैतिकता का पाठ
क्यों पढ़ाया।।
आजका नौजवान
जहाँ के भरोसे का
भाग्य कुछ ज्यादा ही है
अक्लमन्द समझदार
होसियार!!
पैदा होते ही देने
लगता है माँ बाप
दुनियां को शिक्षा।।
राम और कृष्णा
उसे आम इंसान
लगने लगते
खुद में उसको
भगवान दिखने लगते ।
गांधी जी के तीन बन्दर
अन्धे बहरे बेजुबान
लगने लगते ।।
गूंगा अँधा बहरा
होते हुये भी जहाँ में
खुद को समझदार
लगाने लगते!!
इंसानियत का
इल्म ईमान से
वास्ता नहीं खुद
को ही सत्य का
साक्षात्कार कहने लगते।।
हिंसा हद तक करते
अहिंसा के अलमदार
बनने लगते!!
शहर नगर गलियां
नहीं सुरक्षित दुनियां में
जमाने के खारख्वाः
लगने लगते ।।
माँ बाप को बताते
जनरेसन के अंतर
कि संस्कृति संस्कार
बदल लगे!!
धर्म और ज्ञान
मर्म मर्यादा को
बैकवर्ड ऑर्थोडॉक्स
कहने लगे।।
माँ बाप महात्मा
ऋषियों मुनियों कि
शिक्षा दीक्षा
त्याग तपस्या का
धर्म शास्त्र बताते!
देश कि माटी के
गौरव गाथा के
इतिहास का
वर्तमान बताते ।।
आज का नौजवान
कल देश की भविष्य
अभिमान कल का
इंसान का ईमान ।
बहरा बन जाता
जैसे कि उसे देश
समाज कि विरासत से
नहीं कोई वास्ता।।
हसरत पीढ़ियों कि
नए जहाँ का नए
उत्साह जोश का
नौजवान सत्य के
अर्थ कि दुनियां
नई बनाये ।
आँखों के रहते
अँधा हो गया है
इंसान नए समाज का
नौजवान ।।
देखता नहीं
देखना चाहता ही नहीं
जिंदगी और जिंदगी के
रास्तो में बेगाना बन
जाता अनजान।
जैसे कि उसे कोई
लेना देना ही ना हो
अन्धे क़ानून का
मांगता है न्याय ।।
कितने अत्याचार
अन्याय हो जुबान
खोलता ही नहीं ।
जुबान खोलता है
जब हलक सुख जाती
अटक जाती जुबान।।
गांधी जी के तीन बन्दर
बुराइयों को देखते सुनते
नहीं बुरा बोलते नहीं ।
जमाने का नौजवान
इंसान सच्चाई देखता
नहीं सच्चाई सुनता
नहीं सच बोलने कि
हिम्मत रखता ।।
इंसान नौजवान
बन्दर सा हो गया है
अपने स्वार्थ में
अँधा बहरा गूंगा
हो गया है।!
कभी इधर कूदता
कभी उधर कूदता
कभी स्वार्थ के इस डाल
पर कभी उस दाल पर।।
कभी खुद का खून पीता
कभी दुनीयाँ समाज का
वहसी दरिंदा सा खुद भी
परेशान दुनियां को
करता परेशान।।
महात्मा कि आत्मा
होती शर्मशार कहती
मैंने तो बंदरों को भी
ईमान से जीना
सिखसलया उन्हें
भगवान राम के दौर का
हनुमान बनाया!!
आज तो इंसान
बन्दर से भी बदतर
हो गया है मर्यादा का
कर रहा नित्य हैं हनन
निर्लज्ज हो गया है।।
अँधा गुगा बहरा
हो गया है अपनी
बेमतलब कि जिंदगी को
अपने काँधे पर अर्थी कि
तरह अर्थ हिन् बे मतलब
ढोरहा है।।
मकर
मौसम ने बदली करवट
धरा कि जैसे अंगडाई।।
ठंढक ठिठुरन से काँपते
जीवन ने है राहत पाई !!
दक्षिणायन से उत्तरायण सूर्य
खुशियों की राह दिखाई ।।
संवृद्धि किसान घर
खुशियों की सौगात है लाई !!
मिठास गन्ने कि गुड़ शक्कर
गावों की खुशहाली
गिद्दा भांगडा का पंजाब
लोहडी है लाई !!
बृषभ पूजा कदली पत्ता
तंदुल श्वेत खट्टा मीठा
परिश्रम स्वाद कन्नड़
तमिल तेलगु मलयालम
पोंगल भरत भारती
संस्कृति शितलताई।।
शुभ सूर्य पूरब का
कर्म पराक्रम परिणाम
संध्या और आराम विराम ।।
सपनो का सौदागर दिनकर
दिवाकर का पुनः नव प्रभात !!
लोहित की कलरव करती
धारा धरातल कि लालिमा।।
सूर्य जीवन में शौर्य प्रवाहित
रक्त संचार व्यवहार !!
पूर्वोत्तर का सूरज मानव
मानवता का उमंग उल्लास
विहु विश्वाश !!
विविध धर्म सांस्कृतियों का
भारत प्यारा देश महान।।
मौसम ऋतुएँ पर्वत मालाएं
सागर झील प्रकृति परिवेश
ईश्वर यहाँ बसाएं !!
पृथ्वी का स्वर्ग देव भी
आते यहॉँ कुम्भ अमर
अमृत कर्म मोक्ष स्नान
जीवन सच्चाई ।।
गुरुओं का परम प्रकाश
उपदेश सुनाएँ तीर्थ और
त्योहारों में प्राणि जीवन
महत्व बताएं !!
आसमान में रंग बिरंगी
संस्कृति संस्कार आशाओ की
उड़ान का परचम लहरायें ।।
धन्य धरोहर मां भारती
मूल्यों का राष्ट्र समाज
अखिल कि अलख जगाएं !!
हे शिव शंकर हरो क्लेश संताप
औघड़ दानी
पालनहार
करते जगत
कल्याण!!
ताप हरो हे
शिव शंकर
रहे क्लेश संताप!!
समय काल
निर्धारक तुम ही
दुष्टन तुम काल जाने
कितने युग में नाम आपके
भुत भाँवर भोले नाथ!!
ताप हरो हे शिव शंकर
रहे क्लेश संताप!!
रहे कोई भय भ्रम
संसय ना मृत्यु अकाल
महाकाल वरदान!!
ताप हरो हे शिव शंकर
रहे क्लेश संताप!!
शीश चंद्र जटा गंग
लिपटे गले सर्प
शोभित मुंड माल
कर त्रिशूल डमरू
सोहे पहने मृगछाल!!
जय जय शोमेश्वर
हरो ताप हे शिव शंकर
मिटे क्लेश संताप!!
तन चिता भस्म
लपेटे छवि निराली
मोहे संसार
आदिअनंत दीगम्बर नाथ!!
शैल शिखरे
श्री शैल शेलम जय जय
बाबा भोले नाथ!
ताप हरो हे शिव शंकर
निकट ना आवे क्लेश
संताप!!
महल अटारी भाए ना
पार्वती संग विराजे प्रिय
पर्वत कैलाश!
वाहन वसहा नंदी
भुत प्रेत पिचास
डाकिनी साकिनी वेताल
परिजन रिश्तेदार!!
ताप हरो हे शिवशंकर
हो तुम दीन दयाल!!
मिष्ठान पकवान ना भावे
बेल पत्र भाँग धतुर प्रिय
शनीचर राहु केतु भैरव
ग्रह गोचर करते जय
जयकार!!
ताप हरो हे शिव शंकर
दया सागर करुणा निधान!!
शमशान विराजत
कहत जन अशुभ स्थान
शुभ कर्मन के देव
विनायक सुत विकट
निकट विकाराल!!
ताप हरो हे शिव शंकर
भावसागर पार कराय!!
सागर मंथन का विष
पी कर किया जगत उद्धार
कंठ हुआ नीला नव संवेदना सम्बोधन नीलकंठेश्वर महाराज!!
ताप हरो हे शिव शंकर
पालक अवनी अम्बर पाताल!!
माथे तीसर आंख करत
काम क्रोध मद मोह का नाश
खुलता ज़ब ज़ब तीसर आँख
नव दृष्टि कि सृष्टि कि रचना आधार!!
ताप हरो हे शिव शंकर
त्रिनेत्र धारी त्रिलोकी नाथ!!
मातृ भूमि
जन गण मन मैं गाता हूँ
जय श्री राम सुनाता हूँ!!
गणतंत्र राष्ट्र भारत मे
राम राज्य जगाता हूँ ।।
त्रेता राम राज्य आदर्श
द्वारिका द्वापर उत्कर्ष।
मातृ भूमि महत्व बताता
हूँ!!
जन गण मन मैं गाता हूँ
जय श्री राम सुनाता हूँ ।।
गणतंत्र राष्ट्र भारत मे
राम राज्य जगाता हूँ ।।
त्रेता राम राज्य आदर्श
द्वारिका द्वापर उत्कर्ष
उमंग बताता हूँ।।
सत्य सनातन स्वर
साम्राज्य तिरंगा मैं
लहराता हूँ।।
मुगल फिरंगी पहचान
परतंत्रता मकड़ जाल
मुक्ति संघर्ष का रक्त
तिलक महावर मैं लगाता हूँ।।
माँ भारती कि स्वतंत्रता का
उल्लास उत्साह नव प्रभात
मैं गाता हूं।।
जय भवानी जगदम्ब शिवा
मेवाड़ प्रताप मैं सुनाता हूं ।।
मिट गए मिटाने वाले
आंख दिखाने वाले
भारत का स्वर्णिम अतीत
इतिहास भविष्य मैं गाता हूँ।।
तमस परतंत्रता अंत
नव उदय भारत भाग्य
उदित सूर्य नव उजियार
जलाता हूँ।।
जननी जन्म भूमि स्वर्ग से
सुंदर वर्षो कि परतंत्रता
राम जन्म भूमि यज्ञ
अनुष्ठान का परचम मैं
लहराता हूँ।।
जय हिंद जय भारत
जय जय जय गणतंत्र
राष्ट्र जीवन राग दोहराता हूं।।
नशेड़ी
सुर्ती गांजा भांग, पान धूम्रपान, मद्य पान जिंदगी का छद्म छलावा नशा!!
गोरी छोरी हुस्न आशिकी इंसान के डोलते ईमान का नशा!!
गंजेड़ी भंगेड़ी नशेड़ी शराबी, कबाबी जुआरी, महान के तमाम नाम नशा!!
बीमार कि दावा नशेमन नीशील जहरीली ड्रग एडिक्शन नए जहां के नौजवान का नशा!!
मजदूर के पसीने से टप टप टपकता दारु परिवार कि भय भूख अर्धढ़के वदन बेहाल आंखो के मासूम आँसू मजबूर तकदीर, अरमान के बाप का नशा !!
तरुण छोड़ता सिगरेट कि लंबी कश का धुंआ, नौजवान चरस हीरोइन हसिस कि चिलम चिमनी को थामे दवा का मेवा ड्रग्स एक्शन का सन हीरो माँ बाप के अरमां का कातिल समाज के विगड़ते हालात का नशा!!
आँख सलामत फिर भी अंधे, सूरज का उजाला फिर भी अँधेरा अंधी गलियों कि दौड़ नज़र आज के नौजवान का नशा!!
नशा नसीहत कि गली से गुजर जाता हद से गटर वॉटर गंगा जल जमीं जन्नत विगड़े छैल छबीले के ज्ञान विज्ञान के भविष्य वर्तमान का नशा!!
जात पात नहीं धर्म अधर्म रिश्त नाता मित्र शत्रु नहीं दीन ईमान नहीं ऊंच नीच नहीं भेद भाव नहीं आदमी इन्सान का पथ भ्रष्ट भ्रष्टाचार नशा!!
नशा
प्यार का नशा
यार के दीदार का नशा
नशा,नशा नहीं
मजा जिंदगी का।।
कही दौलत का है गुरुर नशा
कही शोहरत का सुरूर नशा!!
हुस्न की हस्ती का नशा
इश्क की मस्ती का नशा
नशा, नशा है जिंदगी का,
प्यार की बन्दगी का!!
किसी को दानिश इल्म का नशा
किसी को पत्थरों में
खुदा को खोजने का नशा!!
किसी को ईमान के इम्तेहान का नशा
किसी को ईमान बेचने का नशा!!
किसी का गैरों के खातिर मिटना
किसी को किसी लूटने का नशा!!
नशा न मैखाने में,
नशा न पैमाने में,
न हुस्न के इश्क के दीवाने में
न तो परवाने में
नशा तो जज्बा जुनून है
जिंदगी जीत जाने में।।
मैं पैसा हूँ
मै ऐसा हूँ ना वैसा हूँ
मैं धन दौलत बैभव
किस्मत मैं पैसा हूँ।।
ना मैं खुशबू
ना मैं खूबसूरत
फिर भी दुनियां
चलती मेरी चाहत
आहट मोहब्बत
नफरत चाल
चरित्र मैं चेहरा हूँ!!
मैं ऐसा हूँ ना वैसा हूँ
धन दौलत बैभव
किस्मत मैं पैसा हूँ।।
कुछ सुनता नहीं
कुछ देखता नहीं
कुछ बोलता नहीं
मुँह आँख कान नहीं
अँधा गूंगा बहरा हूँ
उल्लू पर मैं बैठा हूँ!!
मैं ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ मैं धन
दौलत बैभव
किस्मत मैं पैसा हूँ।।
मेरे वर्ण नाम अनेकों
कोई करता मेहनत मेरी
खातिर पसंद सर्वोत्तम
संग उसके मैं रहता हूँ!!
हाशिल करता कोई
मुझको छल छद्म भ्रष्ट्र
भ्रष्टाचार कहलाता मैं मानव से जाने
क्या क्या नही करवाता
मैं ऐसा हूँ मानव युग
संसार से
ना मैं ऐसा वैसा हूँ
मैं धन दौलत बैभव
मैं पैसा हूँ।।
मेरे रंग रूप अनेकों
युग संसार भाग्य
विधाता हूँ!
मैं पैसा हूँ मैं ऐसा हूँ
ना वैसा हूँ धन दौलत
बैभव मैं पैसा हूँ।।
प्यार इश्क मोहब्बत
जूनून ताकत सुरूर
खुशबू खूबसूरत
यौवन मादकता
हाला प्याला रंगशाला
मधुशाला हूँ!!
मैं ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ मैं धन दौलत
बैभव किस्मत मैं पैसा हूँ।।
मैं नहीं तो –
भय भूख
बीमारी लाचारी
जरा जवानी
निठाला ठन ठन
गोपाला हूँ।
धन दौलत बैभव
किस्मत नश्वर
निराला हूँ मैं पैसा हूँ।।
जन्म जीवन
मैं अस्तित्व
शक्ति साहस शौर्य
चमक जीवन में
जीवन महत्व का
मैं बाला हूँ!!
मैं ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ मैं
धन दौलत बैभव
किस्मत मैं पैसा हूँ।।
चलते जीवन की
बात ही छोडो
मरने के बाद
जीव जीवन
मूल्यों का रखवाला हूँ।
ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ धन दौलत
बैभव किस्मत
मैं पैसा हूँ।।
सर की पगड़ी
शाला और दो शाला
जीवन में”
जीवन के बाद
कफ़न कब्र श्मशान
श्राद्ध स्वर्ग नर्ग
दाता हूँ ।!
ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ धन
दौलत बैभव
किस्मत मैं
पैसा हूँ।।
घृणा प्रेम ख्याति
शक्ति हस्ती मस्ती
मैं ही आफत
मैं ही राहत
मैं ही मान प्रतिष्ठा
अपमान!
मैं ही शैतान
मैं ही हैवान
महल अटारी,बंगला
गाडी गृहलक्ष्मी नारी हूँ!!
मैं ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ
मैं धन दौलत
बैभव किस्मत
मैं पैसा हूँ।।
जबरन मुझको
हासिल करता
क्रूर दुष्ट डाकू
बेईमान कहलाता
लूटता कोई
किसी को
नंगा खूंखार
अपमानित हो
जाता ।
सड़क बिजली पानी
स्वास्थ्य शिक्षा भिक्षा
और परीक्षा सरकारी हूँ!!
मैं ऐसा हूँ
ना वैसा हूँ
धन दौलत बैभव
किस्तम मैं पैसा हूँ।।
युग संसार मेरी
महिमा न्यारी है
मन्दिर मस्जिद चर्च
गुरुद्वारे में
मैं ही वारि वारि हूँ!!
मैं ऐसा हूँ ना
वैसा हूँ धन दौलत
बैभव किस्मत
मैं पैसा हूँ।
काशी काबा
मक्का और मदीना
ध्यान धर्म पूण्य
कर्म खैरात
जकात पर्व तीज
त्यौहार खुशियाँ
वसंत बहार
आला और
निराला हूँ!!
मैं ऐसा हूँ
ना वैसा हूँ
धन दौलत बैभव
किस्मत मैं पैसा हूँ।।
अरमान जल रहे है
अरमान जल रहे है
जिंदगी मर रही
सब ख़ाक हो रहा है
दम घुट रहा कोइ
कैसे जिए।।
हर शाख पे है शैता
कैसे किससे क़ोई निपटे
अरमान जल रहे
जिंदगी मर रही सब
ख़ाक हो रहा है
क़ोई कैसे जीये ।।
क़ुफ़्त में है जिंदगी
दम निकल रहा
तू ही बता ऐ खुदा
जिंदगी का मतलब
अब बच गया है क्या!!
अरमान जल रहे है
जिंदगी मर रही
सब ख़ाक हो रहा है
कोई कैसे जिए।।
तूफ़ान का कहर है
आपा धापी में भागता
इंसान जिंदगी कि
चाह का पनाह खोजता ।।
अरमान जल रहे है
जिंदगी मर रही
सब खाक हो रहा है
क़ोई कैसे जिए।।
खौफ मौत का
पीछा नहीं छोड़ता
ना जंग है ना इंसान ही
हैअब एक दूजे के
खून का है प्यासा।
ना गोली है ना बम है
ना तलवार तीर भाला
अनजान कि मार से
इंसा मर रहा।
अरमान जल रहे है
जिंदगी मर रही है
सब ख़ाक हो रहा है
कोई कैसे जिए।।
बस्तियां अब श्मशान
कब्रिस्तान बन रहे
खामोश है इंसा मौत का है
मंजर मौत का यह खेल
खेलता कौन है।।
अरमान जल रहे है
जिंदगी मर रही है
सब ख़ाक हो रहा है
कोई कैसे जिए।।
नाराज खुदा है या
कायनात कयामत।
दुनियां में इंसान मजबूर
बेबस बहुत है!!
बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल
सवाल कर रहा एक
दूसरे से इंसान।
रोटी है जरुरी या
जिंदगी जरुरी का
है सवाल।।
वतन को छोड़ा
रोटी कि आश में
वतन को भागता फिर
जिंदगी कि चाह में ।
मुश्किलें बहुत है
रोटी और जिंदगी कि
राह में ।।
देश का ही वासी
अब प्रवासी हो गया है।
मजबूर मजदूर
कहीं का ना रहा
दहसत के दौर में
भगाता फिर रहा।।
दो वक्त कि रोटी
जिंदगी कि राह में
तेज हवाओ के थपेड़े
बरसात धुप मार में।
मीलों का सफर
पैदल ही चल रहा
वतन कि दो रोटी कि
चाह में।।
सफ़र बहुत कठिन है
हौसलो पे याकि है ।
चुप चाप देखता खुद के
हुनर इल्म कि इमारते ।
खामोश बया करती
जो मेहनत् कश मजदूर के
हालात हसरते।।
बन्द कल कारखाने
खामोश मशीने हो
रही कबाड़।
कौन सी है आफत क्या है
बवाल जिंदगी बचाएं कि
रोटी का करे इंतज़ाम ।।
जंजाल जिंदगी में
झमेला है बहुत
मौत का खौफ है
साथ चल रहा।
तपिस में तड़फ
तड़फ क़ोई मर रहा
क़ोई रोटी भूख
प्यास से मर रहा
फिर भी बिना थके
चल रहा।।
गिरते संभालते
जो पहुँच गए
अपने वतन गॉव ।
लोग गॉव के रिश्ते
नातों का है सवाल
लौट कर क्यों आये
तुम्हारा यहाँ क्या।।
छोड़ कर गए थे
वतन को किस
गुरुर में ।
पाला था वतन ने
वतन के लिये ही
कुछ करते वतन
पर जीते मरते।।
मजदूर तुम वहां भी
मजदूर तुम यहाँ भी ।
मेहनत ही तेरी
दौलत हिम्मत तेरा
जहाँ ना भागता वतन
छोड कर ना होता
परेशान ।।
जिंदगी दी है तो
रोटी भी मै देती
वतन हूँ तुम्हारी
तन की हूँ माँ ।
मेरी मुहब्बत के
तुम मेरी औलाद
तेरी जिंदगी मेरे
लिये है कीमती।।
तेरी रोटी का मैं ही
करुँगी इंतज़ाम
आ गया है तो फिर
लौट के फिर ना
जाना!!
माँ हूँ मैं तेरी मेरे
आँचल के दमन तेरी
जिंदगी और रोटी ।।
अब जिंदगी और
रोटी का करना मत
सवाल ।
तेरी जिंदगी मुझे है
प्यारी तुझसे मेरी
पहचान ।।
मै तेरी माँ हूँ न्यारी
मेरे दामन में गर्मी है
सर्दी लम्हा लम्हा
बरसात या तूफाँ।
नहीं दहसत कहर
रोटी और जिंदगी
महफूज है यहाँ।।
मत भाग मेरे
बच्चे ख्वाब और
लालच के दरमियाँ ।
मेहनत ही करना हैं
तो मेहनत कर यहाँ ।।
तेरे मेहनत के
पसीनों से ही मेरा
जर्रा जर्रा मेरा
अनमोल सोना।
तू गॉव का गरीब
मजदूर मेरी दौलत
अनमोल खजाना।।
मेरे दामन में पैदा
हुआ यही तेरी
जिंदगी और रोटी
तेरी परिवरिस का
गुरुर ।।
मेरी ही मिट्टी कि
हस्ती कि मस्ती मेरी
मीट्टी मिल माँ कि
ममता कि लाज
अब बचाना।।
इश्क मोहब्बत
इश्क मोहब्बत
आशिकी जज्बा
जूनून मकसद
मंजिल साहिल
किनारा।।
वतन से इश्क
वतन से मोहब्बत
आशिकी अंदाज़
वाहिद जिंदगी का
सहारा।!
जीना मरना वतन कि
खातिर वतन कि राह में
कुर्बान हो जाना।।
खुदाई इश्क
मोहब्बत
खुदा को खोजना
फकीरी फक्र में है
खो जाना मुस्कुराना।
आशिकी मंजिल
मुक़द्दस जहाँ का
नाज़ सूफ़ियाना।।
हुनर इल्म से इश्क,
मोहब्बत आशिकी
खाव्बों कि हकीकत
दानिस का जहाँ में
रूबरू हो जाना।।
दौलत कि इश्क
मोहब्बत इश्क ईमान
दुनियां का बनना
बिगड़ जाना।
दौलत ही मतलब
दौलत ही दुनिया
दिल दुनियां कि
तिज़ारत जिंदगी का
अपसाना।।
शोहरत कि इश्क
मोहब्बत का गुरुर
आशिकी अश्क
रश्क का सुरूर जहाँ में
जिंदगी का दिए कि लौ के
रौ में जल जाना।।
नशा है जिंदगी
जज्बा जिंदगी
जीने का जरिया
इश्क मोहब्बत
आशिकी इबादत कि
जिंदगी का खुदा ही है
मिज़ाज़ मुंसिफाना।।
जिंदगी मकसद कि
मंजिल का सफर।
बिन मकसद का
इश्क मोहब्बत
आशिकी कि
जिंदगी बुलबुला
पानी बनना और
बिगड़ जाना।।
पैमाने का चुल्ल्लू ही
सागर कि गहराई में
है डूब जाना।।
मैख़ाना है मंदिर
मस्जिद जिंदगी का
इश्क मोहब्बत
आशिकी।।
इश्क मोहब्बत
आशिकी का छलकता
जाम जहाँ में जिंदगी
तरन्नुम तराना।
हुश्न से इश्क
मोहब्ब्त आशिकी
जहाँ में आम
कोइ दीवाना
कोई पागल
कोइ परवाना
हुश्न कि रौशन
शमा में चाहता है
जल जाना।।
कोइ बदनाम
बेईमान चाहत कि
मोहब्बत इश्क का
नूर नज़राना।।
मकसद कि मोहब्बत
इश्क आशिकी
जिंदगी फतह
मंजिलो का
जूनून जहाँ में
पागल दीवाना।।
हर दामन का
जज्बा इश्क
मोहब्बत आशिकी
फर्क सिर्फ मकसद का
बदल जाना।।
मोहब्बत है तो जहाँ में
रौनक कायनात भी रौशन
इश्क इबादत खुदाई शान
जिंदगी का कलमा
आशिकी उजाले का
सूरज चाँद ।।
इश्क मोहब्बत
आशिकी जहाँ में
इंशा कि हद हस्ती ।।
इम्तेहान इबादत में
खुदा का भी है
मिल जाना।।
हुश्न मस्ताना
बहारों का आशिक मैं
तू ख्वाबों कि तूँ है
शहजादी तेरे आने से
होता है बहार का आना।।
तेरे दीदार से
सांसो कि गर्मी
तेरे जाने से धड़कनों
का रुक जाना।!
शायरी शायर कि
गीतों का है तूँ तराना
तेरे नाज़ों सजो से गीत
संगीत बहाना!!
तेरी मुस्कान है
जैसे कली नाजुक का
मुस्कुराना!!
जिंदगी जान जानम तू
सरगम कि सहेली
जिंदगी का अफ़साना।।
हसरत कि पहेली
तेरा आना चाँद
चांदनी का आना!!
हवाओं में तेरी उड़ती
जुल्फे चाँद से चेहरे का
चिलमन नजराना!!
तू झील कि कमल
तेरी आँखों का काजल
घटाओं सा बादल।
तेरी तिरछी नज़रों का
इशारा दीवानो का
तेरी अदाओं पे
मिट जाना।।
तेरे माथे पे चमकती
बिंदियाँ तेरे कानो कि
बाली हुश्न का अंदाज़
आशिकाना।।
तू शोला है सबनम है
तेरी जुल्फों के साये में
तेरे चेहरे का छुप जाना
सावन कि घटा जैसे
चांदनी चाँद का शर्माना!!
सावन कि घटाओं का
बिन सावन छा जाना ।।
छम छम खनकती
तेरी पायल दीवानो को
कर देती है घायल
दीवानों का परवानो
सा मिट जाना।।
तू सागर है मोहब्बत कि
जिंदगी के किनारों कि
परवानो कि मस्ती है
तेरी चाहत में डूब जाना।।
तू तकसीम नहीं फिरकों में
तू बँटी कटी नहीं टुकड़ो में
तू वाहिद मोहब्बत
पाक पाकीजा जाने जाना!!
तू खुदाई शान है
अरमा ईमान जहाँ में
इबादत अकिकद
इश्क इज़हार
हुश्न है मस्ताना।।
जिंदगी ठहर गयी है
जिंदगी ठहर गयी
यादों में रह गयी!!
खुशियाँ जिंदगी अब भी
खुश किस्मत नशीब
आम इंसान के ख्वाबों में
बस गयी!!
सुबह सड़क पे
निकलना बाँहों में बाहें
डाल कर टहलना
बाज़ार कि रौनक
शॉपिंग माल कि नाइट
डीनर बस बात कि
बात रह गयी है ।।
पार्टियों का दौर
गीत गाने का शोर
वन्स मोर वन्स मोर
थम गयी जिंदगी
बोर हो गयी!।
ना बचा है जोश जश्न का
गुमान जिंदगी अब बोझ
बन गयी है ।।
काटे नहीं कटता
जिंदगी का लम्हा लम्हा
चाँद सा प्यारा चेहरा ।
शोला और चिंगारी
लगने लगी है।।
घर था एक मंदिर
प्यार परिवरिश कि थी
दीवारे घर में ही जिंदगी
कैद हो गयी ।।
जिन्दगी अब बेजान बेजार
हो गयी घर पर साथ बैठ
चाय कि चुस्कीयो पे
गप्पे लड़ाना घर में ही
एक दूजे से हो गए बेगानी
हो गयी है।।
जवाँ जिंदगी के
जज्बे जज्बात हो
गए है गायब सूरज
निकलने के साथ ही
शाम हो गयी है ।।
बंद हुई महफिले
गीत गज़ले शहनाई
रस्मे कसमें जिंदगी
बस अदायगी रश्म
रह गयी है ।।
हर शाम शौहर के
इंतज़ार में सजाना
संवरना प्यार दिल में है
जिंदगी दूरिया दरमियाँ
सिमट गयी है।।
आईने को भी अरमानो
उम्मीद का मायूस चेहरा
देखते देखते उबन
सी हो गयी है।।
नज़रों का नूर बेनूर हो
जाना जिंदगी सील सिले
को जज्ब कर रही है।!
जिंदगी अब खुदा
कायनात कि मोहताज़
मयस्सर हो गयी है।।
टूट रहा इंसान का
गुरुर जूनून जिंदगी
अब खुदाई करिश्मा
आश रह गयी है।।
वक्त के हाथ मजबूर
वक्त के ही इंतज़ार में
जिंदगी कट रही है।।
शायद फिर आये
चमन में बहार मैसम
खुशगवार गुलशन हो
गुलज़ार!!
यकीन इबादत
इंतज़ार जिंदगी
रह गयी है।।
कहर का क़ुफ़्त
दहसत लम्हा दिन रात
जिंदगी बीरान
आदत सी हो गयी है।।
इंतजार
सुबह से शाम हो गयी
इंतज़ार में धूप तपिस
छावँ में।
हवाओं में तेरे आने कि
खुशबू वक्त गुजर गया
बेकरार के इंतज़ार में।।
आये न आये तुम
लम्हों बहार में
मायूसी का आलम
तेरे न मिलने का गम
जाने कब ख़्वाबों
आ गए!!
रात भर तेरी याद में
कभी जागता सोता
करवटें बदलते रहे हम।
हसीन ख्वाब में तुझे ही
देखते रहे हम दिन तेरे
इंतज़ार कि बेकरारी
रात तेरे ख्वाबो कि
हकीकत बन गए हम।
शायद हसरत प्यार का
यही है सबब मोहब्बत का
सबाब चढ़ने दो!!
ख्वाब कि मोहब्बत को
हकीकत कि चाहत का
जूनून बनने दो!!
मेरी मुहब्बत का खुदा ने
अंजाम यही लिखा है
सुबह से शाम परवाने कि
तरह ढलने दो!!
कि इबादत जूनून चढ़ने दो।
इश्क में दर्द के अश्को
को बहने दो ।।
इश्क और इबादत में
इम्तेहान तमाम।
आरजू के इंतेहा
इंतेहानो से गुजरने दो ।।
दीवानो का शायद
हश्र है यही इश्क के
गुमाँ गुरुर में जलने दो।।
कायनात कि इस
जिंदगी को मयस्सर
नहीं तेरी मुहब्बत ।
चाह यूँ ही इश्क के
पैमाने में ढलने दो ।
बंद बोतल के शराब में
भी तेरे ही अक्स शराब
इश्क के अश्को में
पी लेने दो!!
तेरे मिलने कि उम्मीद
खुशियो के इंतज़ार में
गम के पल दो पल कि
जिंदगी तो जी लेने दो।।
खामोश निगाहों के
दिल कि गहराई के
जज्बात यादों में रहने दो।।
मोहब्बत का मशीहा
मोहब्ब्त का मसीहा हूँ
सपनों का हूँ सौदागर!!
नफ़रत के दौर में करता
प्यार कि तीजारत!!
दोस्ती दाग दामन पर
फिर भी हूँ दोस्तों कि
हिफाज़त!!
इंसानियत कि इबादत हूँ
फरिश्तों कि मै चाहत!!
दुनियां के बाज़ारों में
बिकते है ईमान अस्मत
शोहरत का दामन।।
जिंदगी कि राहो में
प्यार का तोहफा
जिंदगी नाम हूँ मैं।
दुनियां के मेले में
तमाशा खेल है बहुत
दुनियां के झमेले मैं
अमन का मैं रखवाला।।
अंधेरों के साये में
सच और झूठ में
फर्क नहीं दिखता ।
सच्चाई कि दुनियां का
चाँद हूँ मै रौशन।।
इंसा मैं तन्हा
एकी कारवाँ मेरे साथ
दिल मेरा है आईना
हर चेहरे दिल का हूँ
राजदार।।
दर्द से है मेरा रिश्ता
दुनियां के दर्दो का है
एहसास मोहब्बत प्यार
मरहम हूँ मैं आम हूँ!।
मज़लूमो कि बेबसी
लाचारी का हूँ आश
अरमा ।।
खुद तनहा हूँ
तन्हाई कि परछाई
जिंदगी नाम है मेरा
जीने का अंदाज़ जोश
मैं जज्बा!!
मुसाफिर हूँ मै
जिंदगी कि राहों का
जूनून का इंसान हूँ
जहाँ जज्बात है मेरा!!
खुदा कि रहम दुआ का
अजीम अंदाज़ है मेरा।।
बहारों कि मल्लिका
बहारों कि मल्लिका हूँ
मेरा अंदाज़ है मस्ताना!!
गर ख़्वाबों में आ जाऊं
बाना दू मैँ दीवाना ।।
गुल हूँ गुलशन कि गर
शाक पर बैठुं गुलशन का
गुलज़ार हो जाना।!
कली हूँ मैं नादाँ
गुजर जाऊं जिधर से
महक राहों का जाना।।
मेरी चाहत में जीते है
आहे भरते है जमाने में
मुहब्बत कि मैं हूँ
जाने जाना।
मै यारों कि यारी हूँ
शमा रौशन हूँ परवाना।
मै आरजू कि शबनम हूँ
इरादों कि राहो का मैख़ाना।।
मै शराब का शबाब
नशे का पैमाना
आहों कि आहट हूँ
चाहत कि चाँदनी”!
मेरी मुस्कान पे
दुनियां को है
मर मिट जाना मै
हुस्न कि हद हूँ
इबादत इश्क
मेरा चहना!!
हर जिंदगी कि
किस्मत हूँ
किसी के लिये
खुदा कि दुआओं का
नज़राना ।।
आहे कोई भरता
किस्मत को तौबा
करता है कोई
किसी कि यादों
मैं तराना!!
प्यासी कली मै
सावन कि सागर को
खोजती पिया के
दामन में मुझे
सिमट है जाना ।।
दौलत कि मैं दौलत हूँ
जिंदगी का अफ़साना ।!
सांसों कि धड़कन हूँ
जीने का बहाना ।।
कई राज हूँ मै नाज़ हूँ मै
तख्त और ताज हूँ
मै अरमानो कि जंगो के
जाँबाज का बहाना ।
कोई मेरे मिलने से
जीता है क़ोई मेरी
जुदाई के गम में जीत है ।
मै जिंदगी कि ख़ुशी
गम जिंदगी जीने का
फ़साना ।।
जिंदगी के तारानों मे
जिंदगी के तरानो में
तेरा अंदाज है शामिल!!
जिंदगी के तरानो में
तेरा अंदाज है शामिल!
धड़कते दिल कि धड़कन में
तेरा एहसास है शामिल!!
जिंदगी के तरानो तेरा
एहसास हैं शमिल!!
जिंदगी के लम्हों कि राहों में
तेरा इजहार है शामिल!!
जिंदगी के तरानो में तेरा
एहसान है शामिल!!
सुर्ख सुबह कि लाली
चमकती गालों पे बाली
माथे पे चांद सी दमकती
बिंदिया नजर के नूर का
दीदार है शामिल!
जिंदगी के तरानो में
तेरा एहसास हैं शामिल!!
घने जुल्फों के सेहरे में छुपा
तेरा ए चेहरा करम किस्मत कि
ख्वाहिस का इंतजार है शामिल!!
जिंदगी के तरानो में
तेरा एहसास है शामिल!!
तू मकसद कि मल्लिका
अरमानों कि बांहो में
इरादों कि इबादत का
इम्तिहान है शामिल!!
जिंदगी के तरानो में तेरा
एहसास हैं शामिल!!
तेरी चाहत
लव है पैमाना
नज़रे है मैख़ाना
तेरी चाहत कि दुनियां
तकदीर दीदार
बिन पिए वहक जाना।।
सावन की घटायें तेरी
जुल्फे चाल है मस्ताना ।
चाल हिरणी सी
अंदाज़ अशिकाना
हुस्न की हद हैसियत
नजराना ।।
तेरे क़दमों कि आहट से
ज़माने में हलचल
धड़कते दिलों कि है
तू जाने जाना।
हवाओं में उड़ती जुल्फे
कभी चाँद से चेहरे का
हिज़ाब कभी चाँद का
दीदार का बहाना।।
जन्नत की जीनत
प्यार का अरमान
जहाँ में खुदा का
नूर अफसाना।।
फिजाओं की मस्ती
इश्क इबादत की हस्ती
तू जिंदगी जान यारी
याराना।।
वज्म वजूद जहाँ
जमाने कि मोहब्बत कि
मल्लिका जिंदगी का तराना ।।
दुनियां कारवां मंजिल
आशिकी का अफ़साना ।।
शर्म से चिलमन में
तेरा चेहरा खूबसूरत
कायनात का चांदनी का
छूप जाना।।
चाहतों कि जिंदगी
करिश्मा किस्मत का
तेरा मिल जाना।।
आह भरते जीते है
सुनते तेरा ही फ़साना
सिर्फ एक नज़र को
तरसता है दीवाना।।
दिल दुनियां दौलत
करम किस्मत है
जज्बा जूनून हकीकत
जन्नत तेरा मुस्कुराना।।
परवानों कि परस्तीस
तमन्ना है इबादत
आशिकी इश्क में
जल जाना।।
प्रेम
हृदय स्वीकृति प्रेम
आकर्षण अभिव्यक्ति।।
आसक्ति नहीं है प्रेम
प्रेम पावन प्रेम मनभावन
प्रेम शुद्ध सात्विक भक्ति।।
वासना नही प्रेम
प्रेम त्याग तपस्या शक्ति।।
प्रेम में स्वार्थ नही
प्रेम अंतर्मन निष्काम
अभिमान नहीं प्रेम मे
प्रेम निःस्वार्थ जागृति
परमार्थ।।
प्रेम प्रयोजित नहीं
प्रेम सदकर्म सद्भवना
पुरस्कार!!
प्रेम नियोजन
नियोजित नही
प्रेम का नही कोई
निश्चित निर्धारित
सिद्धान्त।।
प्रथम प्रेम अंकुरण
परिवेश परिस्थिति
प्रस्फुटन प्रभा प्रवाह!!
धुव्र को नारायण का
आकर्षण का प्रेम प्रथम
अंतर्मन अंतिम उजियार!।
ॐ नमो भगवते
बासुदेवाय जीवन मूल्य
प्रेम जन्म जीवन सत्कार!!
श्री हरि चरण अनुरक्ति
भक्ति प्रहलाद जीवन
प्रेम प्रथम अनुराग।।
मीरा दीवानी
गली गली पगली सी
फिरती मीरा कान्हा
प्रथम प्रेम संसार!!
एकलव्य वनवासी
गुरु द्रोण चरणों प्रेम
प्रथम प्रताप माटी
मूरत में ही जीवेत जाग्रत
प्रेम प्रथम ब्रह्माण्ड!!
लैला का दीवाना कैफ
प्रेम प्रथम खुदाई दीदार!!
प्रेम पराकाष्ठा का काल
समय प्रमाण लैला मजनू
एक दूजे को दीखता ईश्वर
साक्षात्!!
जाने कहाँ कब हो जाये हो
जाए प्रेम मिल जाये जीवन
भावों के उद्देश्य पथ
आकर्षण अस्तित्व वास्तविक
प्रेम हर्ष हर्षित वर्षित जगत
जीवन सार।।
ईश्वर आराधन का
प्रेम पथ सर्वोत्तम
संस्कार!!
प्रेम प्रथम कोमल भाव
धरातल पर उपजा बट
बृक्ष समान।।
प्रेम भेद विभेद रहित
तमस तामासा से विलग
जीवन धवल प्रकाश ।।
प्रेम मूल्य संस्कृति संस्कार
निश्छल निर्विकार स्वतन्त्र
अस्तित्व आत्म पुकार।।
मिट जाना लूट जाना
स्वंय विलय विलीन हो
जाना प्रेम प्रधान जीवन
प्रथम अवनी आकाश!!
जाति पाती धर्म भेद भाव
नही प्रेम में टूटती संकीर्ण
सीमाओं की दीवार प्रेम
प्रथम जीवन सच्चाई
सत्य सत्यार्थ।।
पीताम्बर का स्वर
शांखनाद सुनो ध्यान
लगाय युवा उत्साह
प्रेम जीवन सत्य
पराक्रम पुरुषार्थ!!
युग मूल्य मानवता अतीत
समय काल वर्तमान प्रेम
प्रथम संकल्प प्रतिज्ञा
जीवन जन्मेजय आचरण
निर्विकार!!
पराक्रम
पराक्रम का मतलब
वो क्या जाने जिसे
पता नही भारत हिन्द
हिंदुस्तान।!
जीवन पराक्रम कर्म
न्योछावर मान उपकार
परमात्मा सत्ता आत्म
शक्ति संधान!!
समपर्ण युग समाज
राष्ट्र वर्तमान इतिहास
पराक्रम मूल मंत्र सम्मान।।
स्वयं स्वार्थ का त्याग
नियत नीति निर्धारक
जन्म मृत्यु से निडर
जीवन उद्देश्य काल
गति निधार्रण पराक्रम
सत्य सत्यार्थ!!
प्रभावती जानकी
नाथ की आभा कटक
भूमि भारत की
अविनि अभिमान।
वर्तमान अतीत गौरव
गूंज गवाह शिक्षा दीक्षा
मे उत्कृष्ट का उकर्ष समय
प्रेरणा मान!!
चुनौती
व्यक्ति व्यक्तिव अपना
अंदाज़ पराक्रम का नव
सूर्य सूर्योदय पराक्रम युग
पुरुष प्रवाह नेता सुभाष नाम।।
विनम्रता आभूषण धीर
बीर गंभीर नैतिक मूल्यों का
मानव मानवता का
पराक्रम अग्रदूत अडिग
अखंड प्रवाह!!
टकराव फौलाद इरादों
पराक्रम प्रखर प्रवाह
गांधी जी के उद्देश्यों की
ज्वाला आग अंगार सत्य
अहिंसा के महात्मा कर्म धर्म
राष्ट्र मूल्य बापू का मकसद
विश्वास!!
उत्साह पराक्रम नेता नाम
युग पुरुष सुभाष शून्य से
शिखर जीवन परिभाषा
प्रमाण ।।
निर्बाध बढ़ता जाता लिखने
खुद वर्तमान से नया इतिहास
अभिमान!!
कल्पना सत्यता कि क्रांति
भारत के बीर सपूतो की
संयुक्त शक्ति हिन्द की सेना
नायक नेता सुभाष कि
गूंज गान।।
हिम्मत साहस पूंजी मात्र
भारत की आजादी की ज्वाला
चिंगारी काल कराल विकट
विकराल दुश्मन का भय भान।।।
प्रथम पुरुष विश्व का
पास नही कुछ भी जिसके
था ठन ठन गोपाल
दृढ़ इच्छा शक्ति निष्ठा
समपर्ण से अस्त्र शस्त्र
आजाद हिंद फौज
सेना का निर्माण।।
दानव दुश्मन ने हिम्मत हारी
समझ गया अर्थ पराक्रम
खून और आजादी जंग
जज्बे का आवाज अंदाज़।।
भारत के इतिहास में नेता
स्वतंत्रता के स्वतंत्र सोच
विचार ज्वाला मिशाल मशाल
पराक्रम पराकाष्ठा की अविनि
आकाश।।
लौ पुरुष
अभ्युदय सोच नैतिक
मूल्यों निर्विकार
निःस्वार्थ परमार्थ।।
जीवन संघर्षो से तपता
फौलाद मानव मोम
पत्थर अडिग चट्टान।।
साधारण असाधारण
सम्भव असंभव जीवन
यात्रा मानव मूल्य
मूल्यवान।।
गांधी सत्य अहिंसा
पुजारी गर्मी ज्वाला
खून आजादी सुभाष।।
कानून पंडित मानवता
सजग प्रहरी सरदार
अन्याय अत्याचार
प्रखर प्रतिकार।।
दृढ़ निश्चयी उद्देश्य पथ
पथिक अविरल अविराम
परतंत्र राष्ट्र माँ भारती अश्रु
वेदना का आग अंगार।।
बीर धीर गंभीर धीर
धैर्य कर्म क्रांति राष्ट्र
गौरव गरिमा महिमा
का बल्लभ शौर्य
शंख नाद ।।
खंड खंड में खंडित
वसुंधरा का बीरोचित
बैभव अखंडता का
वर्तमान गौरव शाली
प्रेरक प्रेरणा महान।।
मिथक ध्वस्त करता
यथार्त यसस्वी राष्ट्र
भक्त राष्ट्र का गौरव
गान।।
भेद भाव ऊंच नीच का
समतल समता समरस
भाव पटेल मर्यादा मान।।
सरदार वल्लभ पटेल
भारत भूमि का कण कण
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण
कन्या कुमारी कश्मीर
गर्व मुकुट भाल।।
हे भारत अखंड अक्षुण
संप्रभुता सत्ता मनीषी
हम दे ही क्या सकते
आपको?
आस्था श्रद्धा से नत
मतमस्तक हो करते है
प्रणाम।।
मजबूत इरादों दूर दृष्टि
मानवता राष्ट्रीयता मानक
लौह पुरुष सरदार भारत
पीढ़ी अतीत वर्तमान
अभिमान।।
महा प्रलय
चारों तरफ अंधेरा
संसय भ्रम का मेला
भय भयाक्रांत
ब्रह्माण्ड अंधेरों में खोया।।
आशा विश्वास
सम्भवतः हो
उजियार!!
असंभव कि सभवना
उजियार मील पथ
विश्वास प्रकृति प्राणी
परिवार।।
अविश्वास वेदना
अंधेरा जल जीवन
सृष्टि दृष्टि का ध्येय
ध्यान!!
संघर्ष भटकाव
अस्तित्व पुकार
हाहाकार।।
आहत ब्रह्माण्ड निराश
ईश्वर को काल पुकार
बैठा नीर झिर सागर
अधर बांसुरी मुस्कान!!
फन शेष नाग सागर
छीर नीर निश्चित शयन
सृष्टि सम्भवना स्वयं
सिद्ध आधार देता मुक
आशीर्वाद।।
अंधकार महाप्रलय
का निश्चित छाट जायेगा
आएगा उजियरा चंद्र मौली
महाकाल!!
आस्था महाप्रलय
निशा मध्य आस्था
अस्तित्व चंद्र प्रादुर्भाव।।
ब्रह्ममुहूर्त की बेला
नव प्रभात लाएगा
ब्रह्म दिवस शुभारंभ
प्रथम देव सूरज लाली
किरणे परम् प्रकाश
आशा का सांचार।।
छंट जाएगा अंधकार
उदित उदय अम्बर पर
नव उत्साह शौर्य सूर्य
अन्तर्मन ब्रह्माण्ड प्रकाश।।
जीवन
कर्त्वय काल के मध्य
सच झूठ जन्म जीवन
मृत्यु झमेला है।।
जिंदगी नाटक संगीत
मनमीत घृणा प्रेम युद्ध
हार जीत का पुरस्कार।।
उलझन कशमकश कोशिश
भावना अभिमान स्वाभिमान
सम्मान उपलब्धि अवसर सार।।
भीड़ में खो जाना आशा
मेला सृष्टि परम्परा
अविराम जीवन जन्म
युग सृष्टि अविनि पथ
गामिनी मतंग।।
कामना कामिनी कभी
निरुद्देश्य भटकने वाली
तरंगों में उठती उमंग
सुगंध विशेष।।
चाहत विशेष इंद्रधनुष रंगों
सी बहुरंगी बहुआयामी काल
धरा युग मे मात्र होने का
देती संकेत।।
बेचैनी छटपटाहट कर्म
आत्मा शरीर मे काल मे
धरा परिवर्तन पराक्रम
महान उड़ान।।
काल के साथ काल के
गाल में परम शक्ति
सत्ता को लज्जित करते।।
स्वंय कि अनुभूति एहसास
मानव मानवता आवाज
अविनि कण कण मे ईश्वर
कण कण में दृष्टगत विश्वास।।
स्वंय हस्ती शक्ति
पराक्रम मानवता नर
नारायण के लिए ही नर में
ही सृष्टि कि सत्ता अविनि
स्वर्ग कल्पना साकार करें।।
संतान
युग समय समाज का
मानव कितना संकीर्ण
जन्मदाता से लड़ता युद्ध।।
लालन पालन प्यार
शिक्षा दीक्षा त्याग
तपस्या माता पिता का व्यर्थ।।
कलयुग कि संतान भूल
गए सत्य वर्तमान है उनका
अतीत था माता पिता का
भविष्य अतीत में अपमानित
होने कि क्या है यह परंपरा।।
ऐसी भी है संताने
पास नही जिनके
कुछ भी पुरुषार्थ मात्र
साथ जिनके।
माता पिता कि सेवा में
अर्थ समाज संस्कृति
संस्कार समाज सब
पर भारी।।
ऐसे ही पुत्रों का
युग संसार
ऋणी आभारी
नमन करता
काल युग समाज
श्रवण कुमारों से
जगत अभिमान।।
काल समय युग है
कहता साधक है जीवन
मूल्यों का मानव में
आत्म बोध देव का
आराधक पुजारी है।।
श्रद्धा के पुष्प लिए
सम्बन्धो के लिए समर्पित
संतानों पर कोटि कोटि
मूल्य के धन भंडार कण
तिनका समान।।
सेवा का दीपक आत्म
भाव कि थाल आरती
अधिकारी ऐसी संताने
अवतारी।।
युग चाहे जो भी हो
देश काल भी जैसा हो
धर्म कर्म मर्म को
परिभाषित करता पुत्र ।
राम परशुराम कृष्ण
स्वर शब्द गुरुओ का
वेद ब्रह्म का चक्र रिद्धि
सिद्ध सुदर्शन धारी।।
गंग गणपति जैसी संताने
राष्ट्र समय समाज युग का
अभिमान वर्तमान!!
देव शक्तियां कहती
माता पिता कि प्रिय
संतान श्रवण ही उत्तम
संतान सृष्टि कि दृष्टि को
करता चरितार्थ।।
विश्व शांति देवी
विश्व शांति कि देवी
बैभव विकास संगिनी
जजनी माँ कि ममता
बहना का प्यार दुलार।।
माधव महिमा बेटी
घर आंगन कि गरिमा
चांद चाँदनी लालिमा
प्राभात।।
वर्तमान कि बेटी भविष्य की
नारी शक्ति नारायणी
आधी शक्ति जगत संसार ब्रह्मांड।।
पढ़ती बेटी बढ़ती बेटी
सक्षम बेटी शिक्षित बेटी
गर्व गौरव किनारी महत्व कि
महिला औरत औकात
समाज संसार।।
बेटी नारी शक्ति मान
अभिमान सबृद्धि सुख
अभिलाषा अम्बर अविनि
सकल सम्पदा शान ।।
नैह स्नेह कि माता माँ
अपमान तिरस्कार में
दुर्गा रणचंडी नारी विकट
विकराल काल कराल।।
कोमल कठोर शीतल शांत
शौम्य मनोरमा नारी युग
मानवता अस्मत अहंकार ।।
कली कोमल बेटी
प्यार पुष्प सी नारी
कमल कुमुदनी
बेला हर श्रृंगार ।।
अमृत धारा परम पावनी
पतित पावनी निर्मल निर्झर
गंगा कि धारा जैसी नारी
जगत संसार।।
नारी जग जीवन युग
काल समय कि धैर्य धीर
सागर गहराई अडिग चट्टान।।
साहस दृढ़ता चपल
चंचलता सुंदर अति
सुंदर दृष्टि दिशा व्यवहार।।
गृह लक्ष्मी रण भय
भयंकर दुर्गा काली
युग जीवन क्षेत्र कि
प्रथम पग अपरिहार्य।।
सैनिक और सिपाही
शासकऔर प्रशासक
शिक्षक और प्रशिक्षक
ऑटो बस ट्रेन उड़ाती
हवाई जहाज।।
लिंग भेद का फर्क नही
लिंग भेद संकीर्णता मर्ज
मात्र नारी पुरुष में अंतर नही
पुरुष नारी संग संग एक साथ।।
बेटी नारी का मान करो
मत इनका अपमान करो
यदि आंसू आ गए बेटी नारी
नेत्रों में मिट जाएगा युग
जीवन देव सत्यार्थ।।
उलझन
उलझने सुलझती नही
एक का अंत दूसरी का
शुभारंभ।।
उत्तर खोजती उलझने
अनुत्तरित उलझने
सच्चाई जीवन की
ऐसा प्रश्न नही उत्तर
जिसका असंभव।।
उलझन मन भाव
दशा मनोदशा का घुन
शैने शैने सोच समझ
करता समाप्त धैर्य
धीरज साहस शक्ति को
करता छीन।।
उलझन कशमकश
संसय शंका असमंजस
दुविधा कि सुविधा ।।
दृष्टि दिशा विचार
स्प्ष्ट साफ कशमकश
उलझन को माफ उदार
करुणा परमार्थ संस्कृत
आवश्यकता के
सांस्कार।।
सौम्यता विनम्रता
मानवता प्यार भाव
भवनाए कशमकश
उलझनों का शस्त्र
शास्त्र।।
उलझन जीवन मे
ना आए स्वच्छ आचरण
नीति नियत जब हो
सुविचार ।।
समय काल परिस्थिति
निर्णय शक्ति का परिहास
उलझन कशमश कायर
कमजोर श्रृंगार ।।
घुट घुट जलने कि
चिंगारी ज्वाला विकट
विकराल उलझन आए
ही ना सुलझाना ना हो
जीवन का काम ।।
रिश्ते नाते मित्र
समाज से दर्पण
जैसा व्यवहार हर
रिश्ते नाते समाज
का चेहरा चाल
चरित्र स्प्ष्ट ना कहीं
कलुषित विचार ।।
उलझन अविनि होगी बंजर
जीवन निर्मल अविरल निर्झर
गंगाजल कशमकश उलझन
का ना होगा नामो निशान।।
होली और मधुमाश
जीवन को मधुमाश भाता
चला गया पचपन से जवानी
बुढ़ापे का साथ निभाता चला
गया मधुमास।।
सर्द से मिलती निजात
समझ आता आ गया
मधुमास।।
निश्चिंत खेलना नव कोमल
किसलय तोड़ना पत्ते बटोरना
बचपन को लुभाता चला गया
मधुमास।।
जाने लगे स्कूल वीणा पाणी
आराधना वंदना मधुमाश माँ
शारदे गुण गाने लगा
मधुमास।।
माँ शारदे कि वंदना उड़ते
अबीर गुलाल संवत विदा
नव आगमन बताने लगा
मधुमास।।
वासन्ती वयार प्रकृति
पर्यावरण मनोरम पवन
सुगंध प्रातः लालिमा
संग कोयल तरंग मधुमास!!
यौवन ललचाने लगा।।
आई गयी होली रिश्तो ने
करवट बदली बूढ़े भी युवा
यौवन भी ललचाने लगा
सारा संसार खुशहाल
मधुमास!!
नशा जीवन नव अरमान
जगाता चला गया मधुमास।।
होलिका दहन स्वाहा
बुराई जीती अच्छाई
श्री हरि नरसिंह अवतार
मधुमास!!
जाती पांति के भेद मिटे
ना कोई गोरा काला उम्र
रिश्तो के टूटे दीवाल उड़े
रंग गुलाल रंग जीवन मे
उड़ाता चला गया मधुमास।।
धरती अवनि जल रही है
जननी अवनि एक समान
जन्म दाता पालनहार।।
जननी कोख में पालती
संतान क्लेश दुःख पीड़ा
अनुभूति सुखद संसार ।।
जन्म देती जननी संतान
आशा अभिलाषा कि उड़ान।।
बेटी बेटों में फर्क नही करती
जननी ममता दृष्टि बेटी बेटा
एक समान ।।
जाननी जन्म देती प्रथम पग
रखती अवनि पर जन्म लेने वाली
हर संतान ।।
जननी माँ कहलाती
अवनि मातृभूमि अभिमान
जननी अवनि द्वय ही
जीवन अधार।।
पालन हार द्वय महत्व
महिमा अपरम्पार जननी
ममता आँचल अवनि
ममता का सागर जननी
दूध कर्ज कि संतान।।
अवनि वक्ष पर
किलकारी भरता
संतान जननी कि
आकांक्षाअम्बर
आकाश संतान!!
अवनि अभिलाषा
प्रकृति पर्यावरण सरंक्षक
संतान अविनि जननी का
करता स्तन पान संतान ।।
अविनि का बक्ष
चीरता अपने मतलब का
अन्न जल प्राप्त
करता संतान ।।
जननी कि चाहत अभिमान
संतान अविनि कि इच्छा
हरियाली खुशहाली कि संतान।।
समय काल की निरंतर
धारा बदलते युग समाज
जननी अवनि द्वय
संसय में देखती
अपनी संतान।।
धरती जल रही धरती
अविनि मातृभूमि कह रही
अंधा बहरा गूँगा क्यो हो
गयी मेरी संतान ।।
बैभव विकास के अंधे
दौड़ में भगती क्यो
मेरी संतान सुहागन
जैसी प्रकृति लगती
जैसे वीरान ।।
बृक्ष पौधे धरती अविनि के
ही संतान मानवता के मित्र
शत्रु क्यो बन गए बहन
जननी के संतान।।
अविनि मैं धरती सीने में
धधकती ज्वाला करते क्यो
प्रकृति पर्यावरण का नाश ।।
धरती कहती सुनो
मेरी संतान भरण पोषण
करती तेरे हर दुःख क्लेश
पर रोती और विलखती
क्यो भरता मेरी आंखों में
आंसू के तूफान।।
सुन मेरी पुकार मां हूँ
तेरी जननी जैसी मेरे
सीने ममता शीतल
छाया रहने दे मत कर
मेरे श्रृंगार प्रकृति
पर्यावरण से खिलवाड़ ।।
ज्वाला गर बन जाऊंगी
तो तेरी जननी को क्या
बतलाऊं तेरी संतानों
ने ही उजाड़ दिया
मेरा एहिवात।।
राम जन्म जीवन सत्यार्थ
राम नाम जीवन सार
राम नाम से भवसागर पार
राम नाम जीवन पतवार
राम सत्य सत्य जीवन संसार।।
राम बिन जीवन निर्मूल
राम जीवन उजियार
राम बिन जीवन भय
भयंकर अंधकार राम
करुणा सागर दीन दयाल।।
राम विघ्न विनाशक
निष्कंटक जीवन संस्कृति
संस्कार राम नियत नैतिकता
भाव राम मर्म मर्यादा महिमा
प्रभु प्रभाव।।
राम अहंकार अभिमान
प्रतिकार राम विनय
क्षमा दया व्यवहार
राम ईश्वर कला अवतार।।
राम प्राणि प्राण आधार
राम दींन दयाल गुण सागर
महिमा अपरंपार राम
कर्म धर्म ज्ञान योग बैराग्य।।
राम गुह सबरी गिद्ध जटायु
जामवंत सुग्रीव रीछ वानर
वन जीवन प्रकृति प्राणि
सत्यार्थ ब्रह्मांड।।
राम जीवन मूल्य विचार
राम जय पराजय धुरी
धुरंधर शिव शाक्ष्य मार्ग
राम सत्संग सन्मार्ग
राम राम जीवन जीवन
जीवेत जाग्रत प्रमाण।।
राम राम राम प्रायश्चित
बोध अपराध परिमार्जन
अभिप्राय।
राम राम राम मोक्ष मार्ग
राम नाम सत्य जन जीवन
यात्रा आत्म यात्रा परम यात्रा
परिणाम।।
बिन राम नही कल्याण
राम जीवन आधार
राम ही करेंगे बेड़ा पार।।
अयोध्या के राम
घट घट वासी राम
कण कण अवनि
एक दर्पण कण कण
अवनि दर्पण में
रघुपति राघव राजा राम
पतित पावन सीता राम।।
राम
राम गुण धाम
अविरल अविराम
जन्म जीवन राग।।
राम पल प्रहर
निशा संध्या प्राभा
प्रभात ।।
राम नित्य निर्मल
कल कल कलरव
निर्मल निर्झर
जीवन धारा धार ।।
राम समंदर शांत
राम उठती गिरती
लहरे तूफान
प्रेरणा अनुराग
कौमुदी ब्राह्मण।।
राम हंस वंश
सूर्यवंश दया
क्षमा करुणा
निधान।।
न्याय मर्यादा
भाव भूषण
राम राज्य
धर्म कर्म
काल भाष्य ।।
दुष्ट दलन
काल विकट
विकराल कठिन
कठोर पाषाण ।।
राम राम शुभारम्भ
लालिमा प्रभात
राम राम राम आत्म
सत्य अभिप्राय।।
राम नाम सत्य
मोक्ष सद्गति जन्म
जीवन मौलिक मूल्य।
राम जीवन सत्य
राम जीवन अनुराग
जीवन श्वास
प्राण आधार।।
दरिद्रता दारुण
दुःख भय नाश
तमस का उजियार राम।।
निराशा में आश संचार
पराजय में विजय संचार
विश्वास आस्था भाव स्वंय
अस्तिस्त्व आभास राम।।
चलो आज हम राम बताए
चलो आज हम राम बताएं
राम मर्यादा अपनाएँ।।
राम सिद्धांत सम्बन्ध
मानवता की अलख
जगाएं।।
प्रभु राम का समाज बनाएं
मात पिता की आज्ञा सेवा
स्वयं सिद्ध को राम बनाएं।।
भाई भाई के अंतर मन का
मैल मिटाए भाई भाई में
बैर नहीं भाई भाई को
भारत का भरत बनाएं।।
लोभ क्रोध का त्याग करे
समरस सम्मत समाज बनाएं।।
सम्मत सनमत बैभव
राम नियत का दीप जलाए।।
कर्म धर्म श्रम शक्ति
निष्ठां धन चरित पाएं।।
पावन सरयू की धाराएं
कलरव करती जन्म जीवन
का अर्थ सुनाएँ।।
भव सागर का स्वर्ग नर्क
केवट खेवनहार बनाये
भेद भाव रहित राम भव
सागर पार कराएं।।
निर्विकार निराकार राम
सबमें साकार राम बोध
प्राणी प्राण का दर्शन पाएं।।
राम नाम नहीं राम मौलिक
मानवता सिद्धान्त राम रहित
जीवन बेकार।
सांसो धड़कन
पल प्रहर में राम
बसाएं।।
राम वनवास रहस्य
जल वन जीवन राम
दैत्य दानव से भयमुक्त
धर्म दया दान ऋषिकुल
बैराग्य विज्ञान का राम।।
सेवक राम यत्र तंत्र
सर्वत्र राम,राम से बिमुख
ना जाए ।।
चलो आज हम
राम बताएं राम
मर्यादा का युग
अपनाएं।।
अम्बे तेरा दर्शन
अम्बे तेरा दर्शन दुर्लभ दौलत
अम्बे तेरा मुखड़ा हरता दुखड़ा।।
अम्बे तेरे आशीष का है संसार
अम्बे तेरे रूप हाथ हजार।।
अम्बे तू ही दुःखियों की साहरा
अम्बे तू ही करती बेड़ा पार।।
अम्बे तेरी भक्ति में ही शक्ति
अम्बे तू ही दयालु कृपल।।
अम्बे तू ही करुणा की है सागर
अम्बे तू ही है दीन दयाल।।
अम्बे तू ही जीवन का आधार
अम्बे तेरी भक्ति भाग्य सैभाग्य।।
अम्बे तू ही जननी पालन हार
अम्बे तू ही दुष्टो का संघार।।
अम्बे तू ही नारी की है शक्ति
अम्बे तू ही सृष्टि और संसार।।
अम्बे तू ही भक्तों की है भक्ति
अम्बे तू ही अवनि और आकाश।।
अम्बे तू ही नदियां और सागर
अम्बे तू ही वायु और तूफान।।
अम्बे तू ही शुख शांति की लक्षमी
अम्बे तू ही ममता और दुलार।।
अम्बे हम तो बालक है नादान
अम्बे हम गाते तेरा गुण गान।।
अम्बे तू ही क्षमा की है सागर
अम्बे क्षमा कर बालक हम
जो भी हो अपराध।।
राम
कहाँ हम आ गए आज
खुद को खोजते भटकते
नगर की हर डगर पर तेरा
ही नाम लिखा हैं!
तेरी अवनि का कण कण
एक दर्पण के जैसा हैं
तेरी अवनि के कण कण
दर्पण में तेरा रूप देखा हैं
कोई राम कहता हैं कोई
भगवान कहता हैं।!!
हर सांसो की धड़कन में
एक राम लाया हूँ
मानवता के मूल्यों का
भगवान लाया हूँ।।
सुबह और शाम
कल कल कलरव
करती सरयू की धाराए
परम् पावन माटी
मैं साथ लाया हूँ।।
मर्यादाओं की भीड़ में
मार्यादा को खोजता
साकेत के पुरुषोत्तम
श्री राम लाया हूँ।।
जै जगदम्बे जय माँ काली
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जगदंबै
जै माँ काली
वीर भूमि भी
आंचल तेरा
तूं जग जननी
जग रखवाली!!
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जगदंबै
जै माँ काली
वीर भूमि भी
आंचल तेरा
तूं जग जननी
जग रखवाली!!
पारिजात का
पुष्प और पल्लव
प्रणव ध्यान कि
धन्य तूं न्यारी!!
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जै जगदंबै
जै माँ काली
वीर भूमि भी
आंचल तेरा
तूं जग जननी
जग रखवाली!!
समनिष्ठा कि
जागृति ज्योति
आत्म बोध कि
साहस शक्ति
विघ्न विनासक
मंगल कारी!!
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जगदंबै
जै माँ काली
वीर भूमि भी
आंचल तेरा
तूं जग जननी
जग रखवाली!!
आदि मध्य
अवसान अनंत
तुम्हीं युग जीवन
कि संचारी!!
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जै जगदंबै
जै माँ काली वीर
भूमि भी आंचल
तेरा तूं जग जननी
जग रखवाली!!
सौम्य साधना भाग्य
भविष्य निर्भय निर्झर
जीवन कल्याणी!!
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जगदंबै
जै माँ काली वीर
भूमि भी आंचल तेरा
तूं जग जननी
जग रखवाली!!
उत्कर्ष उत्सर्ग
निश्चय निष्कर्ष
विश्व पुरुष कि
प्रगति प्रतिष्ठा
शुभ ही शुभ कि
लक्ष्मी हो तुम
दुष्ट दलन कि
दुर्गा काली!!
जै जगदंबै
जै माँ काली
जै जै जगदंबै
जै माँ काली
वीर भूमि भी आंचल
तेरा तूं जग जननी
जग रखवाली!!
कृष्ण दामोदरम
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव धन्य
राधे राधितम!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव धन्य
राधे राधितम!!
भाग्य भगवान् मिटाता
है तो बनाता भी है!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव
धन्य राधे राधितम!!
इच्छा भी है तू
परीक्षा भी है
भाव भक्ति में
नाचता भी है तू,
इशारों पे युग को
नचाता भी है
विधि विधान
विधाता भी है!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव
धन्य राधे राधितम!!
नंद नन्दन यशोदा का
लाडला कर्म ज्ञान कि
ज्योति जलाता भी है!!
बसु्धैव कुटुम्बकम का
कृष्ण है मर्म सृष्टि
कि दृष्टि का विश्वास है!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव
धन्य राधे राधितम!!
नर का नारायण
पुरुष का पुरूषार्थ
जिसका कोई नही
उसका संसार हैं!!
सत्य का सारथी
मित्र कि मित्रता का
मर्म मर्यादा सम्मान है!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव
धन्य राधे राधितम!!
रास रसिया रसिक
महारास है गोपियों का
गोपेश्वर नारी कि लाज़ है!!
है प्रेम जगत में सार
और कछु सार
नहीं का सार है!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव
धन्य राधे राधितम!!
जगत का गुरु
योगियों का योगेश्वर
परम ब्रह्म ब्रह्माण्ड
सत्य सत्यार्थ हैं!!
माधवम केशवम
कृष्ण दामोदरम
भगवतम भाव
धन्य राधे राधितम!!
अर्जुन प्रतिज्ञा
टुटते उम्मीदों में
उम्मीद की काव्य
कथा सुनाता हूँ!!
पुत्र शोक प्रतिज्ञा
जयद्रथ पिता पुत्र
नियत मोक्ष सुनाता हूँ।।
अभिमन्यू युवा पुत्र का
कुरुक्षेत्र के कपट क्रूर
काल से आहत अंत!!
युग ब्रह्मांड महारथी
श्रेठ धनुर्धर अर्जुन
प्रतिज्ञा सुनाता हूँ!!
अर्जुन प्रतिज्ञा जयद्रथ
वध लक्ष हमारा सूरज
ढलने से पूर्व या स्वंय
शयन चिता पर भस्म
हो जाऊँगा!!
कुरुक्षेत्र समर भूमि
संस्कृति प्रतिज्ञा जयद्रथ
वध रहस्य बताता हूँ!!
घायल अन्तर्मन
महानिशा का अंधकार
पल प्रहर का घायल
अंतर्मन द्वन्द सुनाता हूँ!!
देखेगा युग काल
महारथी का महासमर
सूरज भी अस्त हुआ था
उदय उदित होगालेकर
भयंकर महासमर।।
सूरज निकला मधुसूदन का
शंखनाद परम् प्रतिज्ञा का
नव संग्राम महासमर।।
युद्ध शुरू हो गया गिरते
मुंड बहने लगा रुधिर
समंदर ज्वाला से चलते
अस्त्र शत्र महाकाल सा
महासमर!!
काल स्वयं खड़ा
देख रहा था महासमर
कमलविह्यू रचना मध्य
खड़ा जयद्रथ कंप रहा था
थर थर!!
पार्थ कुरुक्षेत्र में काल
महाकाल का साक्षात्
रूप प्रत्यक्ष।।
केशव ने देखा
असम्भव है वध जयद्रथ
पार्थ कर ले चाहे लाख
जतन!!
नारायनःका आदेश
चक्र सुदर्शन आज वध
सांघर नहीं ढक लो सूरज!!
चक्रधारी का आदेश
सूरज को ढक लिया
सुदर्शन नें छा गया अंधेरा
हा हाकार मचा पांडव दल में
छा गए निराशा का बादल।।
महारथी अर्जुन अब रण में
स्वयं चिरनिद्रा गले लगाएगा
प्रतिज्ञा चिता अग्नि में भस्म
स्वयं हो जाएगा।।
कौरव दल में उत्साह हर्ष
विजय पांडव अब ना पायेगा
चलो देखते है अर्जुन खुद ही
कैसे भस्म हो जाएगा।।
अर्जुन नें चिता ओर
चिरनिद्रा को प्रस्थान किया
किया कहा मधुसूदन ने
सुदर्शन आज तुमने क्या
काम किया।।
अब आओ लौट मेरे पास
अंधेरा अब फिर छटने दो
पाते ही केशव का आदेश
लौटा सुदर्शन!
ज्यो लौटा मधुसूदन का सुदर्शन
सूरज निकला कहा नारायणन ने
पार्थ अब ना देर करो।।
पूर्ण करो प्रतिज्ञा जयद्रथ
खड़ा सामने टूटते
उम्मीदों की उम्मीद का
सत्कार करो!!
कायर नही कहेगा युग के
टुटते उम्मीदों की उम्मीद
धर्म युद्ध टंकार करो।।
मारो ऐसा वाण
शीश कटे जयद्रथ
पिता गोद मे गिरे पिता
पुत्र दोनों को युग से
मोक्ष प्रदान करो।।
मधुसूदन के आदेश मिला
गूंजी गांडीव प्रत्यंचा कौरव
दल में हा हाकार मचा!!
कटा शीश जयद्रथ का
धड़ कुरुक्षेत्र की युद्ध
भूमि में शीश पिता गोद मे
चक्रधारी की महिमा से
अर्जुन ने पिता पुत्र
उद्धार किया।।
धर्म युद्ध मे टुटते
उम्मीदों की उम्मीद
विजय अवसर
उपलब्धियों की युद्ध
नीति!
महासमर नीति नियत
चक्रधारी कि मार हार
विजय निर्णायक कर्म
धर्म मर्म का मान किया।।
वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई
दात्तक पुत्र दामोदर के
आते ही अंग्रजो की हड़प
नीति झांसी हड़पने की
विशात बिछाना शुरू किया।।
झांसी के खजाने पर
कब्जा कर रानी झांसी को
किले में कैद किया।।
लक्ष्मी के अंतर मन मे
गुलाम जीवन से मुक्ति की
ज्वाला ने जन्म लिया।।
सन अठ्ठारह सौ सत्तावन में
ओरछा दतिया ने झांसी पर
आक्रमण किया!!
झांसी के रन बांकुरों ने
दतिया ओरछा युद्ध का
दमन कर झांसी की मंशा
इजहार किया ।।
अंग्रेज चाहता झांसी को
मिटाना सम्भव नही था
लक्ष्मीबाई के रहते चाल
चलता जाता दमन दंश
कुचक्र किया।।
सन अठ्ठारह सौ अट्ठावन में
रानी तात्या टोपे से मिल
सलाह किया ग्वालियर के
निकट कोटा सराय!!
युद्ध मैदान युद्ध भयंकर
शुरू हुआ रानी लक्ष्मी बाई
वीरांगना दृढ़ता वीरता
युद्ध भूमि में झुकी नही
ना ही मानी हार ।।
पीठ पर बांध कर प्रिय पुत्र
दामोदर को निकल पड़ी
अंग्रेजो से करने दो दो हाथ।।
मर्दानों सी लडती मर्दानी
जंग अंग्रेजो को कर दिया
रक्त के शर्म में पानी पानी।।
युद्ध भूमि में बिजली सी
चमकती रानी की तलवार
ओलो से गिरते अंग्रेजों
कटते शीश बुंदेलों संग
हर भारत वासी ने बोला
खूब लड़ी मर्दानी ।।
इतिहास है गवाह रानी
लक्ष्मीबाई की त्याग
बलिदान की गाथा
युद्ध भूमि में नारी शक्ति
भारत की ज्वाला माँ
भारती की स्वाभिमान!!
हिन्द की सेना
बर्फ चट्टानों पे
एक हाथ संगीन दूजे
हाथ तिरंगा रेतीले
तूफानों में खड़ा बना
फौलाद देश की
सीमाओं मुश्तैद जवान।।
नयी नवेली दुल्हन
कर रही होती है
इंतज़ार ईश्वर से
आशीर्वाद मांगती
बना रहे सुहाग।।
बूढे माँ बाप की
पथराई आँखे
अपने सपूत का
एकटक इंतज़ार
बेटा देश की रक्षा में
लम्हा लम्हा
दुश्मन से लड़ता
होगा कब उसका
दीदार।।
सीमाओं पे जो
हालात दुश्मन कब
किधर से आए पता नहीं
धोखा मक्कारी का
छद्म युद्ध लड़ रही सेना हिंदुस्तान।।
माँ भारती का हर
जवान दुश्मन से करता
पल प्रहर दो दो हाथ!!
दुश्मन को औकात
बताएं भारत के बीर
जवान।।
जय भवानी
हर हर महादेव
भारत की सेना का
शंख नाद विजयी विश्व
तिरंगे की सेना
भारत का अभिमान।।
दुश्मन चाहे जितना भी हो
चालाक हिन्द की सेना
चकनाचूर करती अभिमान!!
धीर धैर्य बीर गंभीर साहस
निष्ठा समर्पण पराक्रम
पुरुषार्थ हिन्द की सेना बाज़।।
शपथ तिरंगे की
कफ़न तिरंगा
आन बान् सम्मान!!
तिरंगा कर्तव्यपथ पर बढ़ते
जाना जीवन मोल मूल्य
मातृ भूमि की सेवा में
दुश्मन लहू का तर्पण या
खुद के लहू से नई
इबारत लिख जाना।।
नई नवेली दुल्हन भी
भाग्य पर इतराती देश की
खातिर मर मिटने वाले
शौहर की मर्यादा को
जीवन भर निभाती!!
गर्व से नारी गैरव की
गाथा का किस्सा हिस्सा
बन जाती।।
पथराई आँखों के
माँ बाप अपने बीर
सपूतो को आशीष
वरदान ईश्वर से मांगते
जन्मों जन्मों देश पर मर
मिटने वाली हो मेरी
संतान।।
हिन्द की सेना हिन्द का
हर एक जवान वतन की
रक्षा में काल कराल विकट
विकराल ।।
हिन्द का जन जन
करता नमम प्रणाम
हिन्द की सेना गौरव
गाथा की शान स्वाभिमान।।
चंद्र से युग का नाता
काहाँ से आते
कहाँ चले जाते
तुम्हारा यू आना
जाना प्रेम सुंदरता
सौंम्य शीतलता से नाता।।
सूरज से तुम्हारा
मित्र शत्रु सा नाता
सूरज के जाने से
तुम्हारा होता है आना
तुम और सूरज ही
युग ब्रह्मांड समय
व्यख्याता।।
चंद्र तुम प्रेम के
पग पल प्रहर
तुझे ही देख मानव
प्रेम की प्रेयसी
चुनता अपनाता।।
सुंदरता का दर्पण
तू युग मे हर कोई
मुखड़ा अपना तेरे
दर्पण में देखता इतराता।।
कभी तुम दूज के
चंदा कच्चे धागे का
रिश्ता बहन भाई का
पावन नाता।।(भैया दूज)
चौथ के चन्द्र गण
गणपति उत्सव अम्बर
से आवनी पर आता
सुत शंकर सत्य
शुभ मंगल कहलाता।।
(महाराष्ट्र का गणेश उत्सव)
सुहागिन करती है
तेरी ही पूजा अर्घ्य
आराधना तू ही सुहागन का
चौथ का चन्द्र भी कहलाता।।(करवा चौथ)
तू ही वात्सल्य की
महिमा तू माँ ममता
चरणों का युग संसार
चौथ का चंदा युग
रिश्तो को भाता।।
(गणेश चतुदर्शी)
अपनी कलाओं में
निकलता दूसरे दिन
खुदा ईश्वर की सच्चाई
रमजान ईद ईश्वर एक
सच्चाई युग को समझाता।।
(ईद)
तेरे चलने से दुनियां
में इस्लाम जागा
खुदा का करिश्मा
चाँद तू ही
बतलाता।।
(इस्लाम मे गणना चाँद की गति पर होती है)
चौदवीं का चाँद
परी, हूर अप्सरा जन्नत
स्वर्ग सुख सुंदरता की
परिभाषा।।
(चौदहवी चाँद)
पूर्णिमा का चंद्र तेरा रूप
युग तेरी चाँदनी शीतलता में नहाता !!
शरद का चन्द्र युग मानव
जन्म जीवन में अमृत वर्षा
जीवन अनुराग जगाता।।
(शरद पूर्णिमा )
शरद चन्द्र शरद पूर्णिमा
तेरी महिमा का तेरी
हस्ती मस्ती का
युग संसार सारा।।
इश्क इबादत का चेहरा
दिल मे हलचल बेचैनी
फ़ज़र से नज़र दिल में
उतरता चेहरा।।
तपिश बारिस इंतज़ार हो
शाम दीदार नज़र का चेहरा।।
करीब थे लगता ही
नही जिंदगी में दूर
कभी जाएंगे क्या कहूँ
वक्त को वक्त की
यादों का चेहरा।।
सुर्ख गालों की
लाली कानो में बाली
चमकती माथे पे बिंदिया
जहां कि नूर नज़र का चेहरा।।
सावन की रिमझिम
फुहार भीगा बदन
साँसों की गर्मी हुश्न
निखार काचेहरा।।
बादलों में छुपा चाँद
कभी चाँदनी अंधेरा
कभी हवाओ में जुल्फ
घटाओंमें छुपा
चाँद सा चेहरा।।
संगेमरमर सा तरासा
वदन जुनून इश्क़
जैसे पिघलता मोम
चिरागों की जरूरत ही
नही चाँद भी शर्माए
जमाने में रौशन नाज़ चेहरा।।
मंदिर में मूरत जैसी
हीरे मोती की तमन्ना
क्या करे कोई तमाम
मन्नत मुरादों की
इबादत चेहरा।।
लेखक की चाहत
मेरी चाहत काल मानवता
आदर्शो का नायक हो।।
मेरे भावो की अभिव्यक्ति
सच्चाई दर्पण हो।।
कलम चले हमारी
अन्याय अत्याचारों पर
नैतिकता के विजय तेज
धार तलवार हो।।
सृजन करूँ ऐसा युग
आदर्श अवधारणा जैसा
लिख दूँ इतिहास कलम से
वर्तमान का प्रेरक हो।।
जन जन के हृदय भाव मे
स्थान हो मेरा ना रहने पर भी
शब्द स्वर कलम अक्षय अक्षुण
अभिमान हो।।
निःस्वार्थ रहूँ निरपेक्ष रहूँ
सत्य याथार्त रहूं विचलित
ना हो मार्ग हमारा सार
साहित्य का मान रहूं।।
काव्य कविता और कहानी
मेरे मानव मानवता के
मूल्यो के मेरी इच्छा चाहे
देनी हो कितनी परीक्षा
न्याय नैतिकता
नीति नियत काल रहूं।।
तुलसी सुर कबीर
कालिदास व्यास
नागार्जुन परसाई
हरिवंश राय सा बच्चन
मधुशाला मैं गान रहूं।।
मेरे अन्तर्मन की ज्वाला के
आँगर कलम से निकले दुष्ट
दमन का काल बने सत्य
अहिंशा की मौलिकता का
मर्यादाओं का मान रहूं।।
कलम हमारी काल
जयी का आविष्कार
लिखे युग की आकांक्षा
भविष्य वर्तमान लिखे।।
मेरे मन भावों से किरणों का
सांचार निकले परिवर्तित हो
साहित्य सार का सार
आभार मिले।।
सावन तब आया
सावन आया जब
मन मे हो खुशहाली
बाग बगीचे रहे
सलामत झूलों
की हो डाली ।।
सबके सर छत
छप्पर सावन
बाढ़ कहर से घर
ना उजड़े जन ना
बिछड़े ना बने
कोई सवाली।।
एक दूजे का
सुख दुख मिलकर
बांटे प्यार परिवार
समाज में भेद भाव
ना द्वेष कलह ना
कोई बदहाली।।
सावन की बदरी
और बारिष मुस्कान
शिव शंकर की
महिमा गान
ॐ नमः शिवायः
भोले भंडारी
औघड़ दानी
वरदानी।।
बृंदावन में गोपी संग
राधा झूला झूले
बंशी बजावत कृष्ण मुरारी
अवधपुरी अति पावन
जहां राम की किलकारी।।
गांव नगर सावन की फुहार
पुलकित हृदय सौगात
सखियों की कजरी गान
बगियन में मकरंदन की
हलचल कली फूल खिले
झूमे सावन की फुलवारी।।
विरह बेदना की बात
राग नही सुहागन पिया
संग पिया के देश सेज
सुहाग प्यार पीया का
मनोकामना प्यारी न्यारी।।
सावन की रिम झिम
फुहार बूंदे बरसात
मनभावन लागे आश
विश्वाश सावन की
बात निराली।।
सूरज चाँद बादल
अंचल में सावन
इंद्रधनुष के सप्त रंग
सावन हरियाली खुशहाली।।
वतन
तन वतन के लिये
मन वतन के लिए
भाव भावनाए
वतन का प्रवाह
वतन ही जिंदगी
वतन ही पहचान ।।
वतन पर जीना
मरना ही ख्वाब
हकीकत अरमान
वतन सलामत रहे
वतन से ही रिश्ता
खास अभिमान ।।
वतन की संस्कृति
संस्कार तिरंगा
शान स्वभिमान तिरंगा
वंदे मातरम माँ भारती के
आराधन का मूल
मंत्र सम्मान तिरंगा।।
सीने में वतन के
जज्बे की ज्वाला
सांसो धड़कन की गर्मी
वतन की अस्मत प्राण।।
चाहे जितने भी आये माँ
भारती को बनाने गुलाम
त्याग बलिदानों कि धरती
शान स्वभिमान!!
आजादी कि रक्षा के लिए मॉ
भारती के बीर सपूतो नें त्याग
दिया जीवन बलिदान किया प्राण।।
वतन की राह चाह में हो
गए कुर्बान ना कोई अफसोस
ना कोई ग्लानि हँसते हँसते
तिरंगे को दिया ऊंचाई
आसमान।।
दुश्मन आंख दिखाए
उसका कर दे वो हाल
जल बिन जैसे मछली
पानी बिन तरसे जीवन को
मौत की मांगें भीख
मर्दन कर देकर दे मान।।
वतन धर्म वतन कर्म
दायित्व सपनो में भी वतन
वतन की गरिमा गौरव का
पल पल मर्यादा की
गाथा गान का भान।।
आजादी के दीवानों के
बलिदानों उद्देश्य पथ का
पथिक स्वतंत्रत गणतंत्र
मौलिक मूल्यों कि अवनि
आकाश आन वान
जीवन जान।।
अटल विचार है
अटल विचार है,
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
अटल है कर्म
अटल है धर्म मर्यादा
मान के भान है
अटल मौलिक,
अटल अलौकिक
शक्ति श्रोत प्रवाह है।।
अटल विचार है
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
अटल आग है,
अटल अंगार है
अटल शौम्य शीतल
विनम्र मानवता श्रृंगार है।।
अटल विचार है
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
अटल क्रांति है
अटल है शौर्य
अटल पराक्रम पुरुषार्थ है!!
झरना झील नदी
समंदर सा निर्मल निर्झर
धारा जीवन तुफानो से
लड़ता अटल तेज
धार रफ़्तार है।।
अटल विचार है
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
अटल जीवन के
कुरुक्षेत्र का गीता ज्ञान
कर्म योग सत्यार्थ है
अटल अक्षुण अटल
अक्षय अटल अविरल
निर्झर प्रेरक प्रेरणा
पुरुष महान है।।
अटल विचार है
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
अटल कहीं शोला
कही शबनम फानूस
फौलाद है।!
युग काल कपाल पर
लिखतें मिटाते
बदलते पल प्रहर का
अमिट छाप काल पुरुष
काल के भाल है।।
अटल विचार है
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
एकाकी नही खुद की
परछाई तन्हाई विराटता
दृढ़ दृष्टि दृष्टिकोण
राष्ट्र निधि उजियार है।।
अटल विचार है
अटल व्यवहार है
जेठ की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित
मशाल है।।
मौत जिंदगी की
सच्चाई जन्मेजय
जीवन सत्य
युग भाष्य है।।
अटल विचार है
व्यवहार है जेठ की
भरी दोपहरी के बिहारी
प्रज्वलित मशाल है।।
अटल युवा अभिमान
काल प्रबाह वर्तमान
आवाहन आवाज़
शंखनाद है।।
अटल विचार है
व्यवहार है जेठ
की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित
मशाल है।।
अटल आस्था
अटल मानवता का
वास्ता रास्ता मानव
मूल्यों का स्वर्णिम
इतिहास का
वर्तमान संचार है।।
अटल विचार है
व्यवहार है जेठ
की भरी दोपहरी के
बिहारी प्रज्वलित मशाल है।।
रोटी
रोटी क्या क्या नाच नचाती
जाने क्या क्या खेल खिलाती।
रोटी रिश्ते नाते परिवार तोड़ती
जोड़ती!!
रोटी दोस्त दुश्मन बनती
रोटी बोटी कटवाती
बोटी से रोटी,रोटी से बोटी
जाने क्या क्या करवाती।।
रोटी भीख मंगवाती रोटी
अपराध कराती रोटी घर
परिवार मां बाप संसार
छुड़ाती तप त्याग कराती।।
मातृ भूमि आँचल कि छाया
कही माया का मार्ग दिखती
वासी प्रवासी प्रवासी वासी बनाती।।
रोटी रंजिस जड़ फसाद
कराती हाय रे रोटी
क्या क्या राह दिखाती
रोटी मान अपमान
परिहास कराती!!
रोटी कभी रुलाती कभी
हँसाती रोटी इज्जत
आबरू बिकवाती रोटी
करम रहम का साथ निभाती।।
रोटी कायर कमजोर बनाती
रोटी मजबूर मजदुर बनाती
तड़पती आँखों के आंसू से
रोटी अपना एहसास कराती।।
रोटी कि खातिर लड़ता इंसान
रोटी कि खातिर मरता इंसान
रोटी कि खातिर जीता इंसान।।
रोटी महँगी जान है सस्ती
रोटी कि खातिर जान देता
जान लेता है इंसान।।
दहसत आफत कहर
झंझट झंझावात तूफ़ान
झेलता इंसान रोटी के वास्ते
जाने क्या क्या करता है
इंसान।।
भय में जीता भ्रम में जीता
लम्हा लम्हा घुट घुट कर
जीता घीस घिसट कर जीता
पल पल जीत मरता इंसान।!
जीवन जिन्दा विश्वाश
कराती रोटी मख्खन से
खाता कोई सुखी भी नसीब
नहीं किसी को!
कूड़े कचढ़े कि रोटी दे
जाती जीवन दान राजा
हो या रंक सबका रोटी से
रिश्ता नाता!!
मिलती ज़ब सस्ते मे क़ीमत
नहीं समझता पता इंसान
मेहनत पर भी नहीं मिलती
दर दर ठोकरे खाता इंसान।।
अलग अलग रोटी की
पहचान मज़लूम कि रोटी
किस्मत भगवान् तक़दीर कि
रोटी तदवीर कि रोटी रोजी
रोटी के जाने क्या क्या नाम।।
झगड़े फसाद बलवा
बवाल कराती बेटी रोटी
करवाती धर्म धंधा चोरी
करवाती रोटी कभी
हँसाती और रुलाती ।।
जाने क्या क्या दौर
दिखाती रोटी,रोटी रहमत
रहम रहीम करीम रोटी
खुदा भगवान् मिलाती!!
किस्मत कि रोटी बैचैन
करती रोटी चैन कि रोटी
रोटीसे इंसान।।
मैंने पूछा माँ से इंसान
बड़ा या भूख बड़ी या रोटी?
माँ बोली–
रोटी है तो भूख नहीं है
भूख नहीं है तो जिन्दा है
इंसान!!
रोटी पानी कि ताकत से
मैंने तुझको अपना
दूध पिलाया मेरे लाल!!
रोटी ना होती ना होती
कायनात ना होता इंसान।।
जिन्दा इंसान
बुझे तीर में धार
नहीं आती जंग खाई
तलवार में मार
नहीं आती।।
जरुरी नहीं की
सांसो धड़कन का
आदमी इंसान
जिन्दा हो!
पुतला भो हो
सकता है पुतलों के
कदमो की चाल
आवाज नहीं आती।।
जिन्दा आदमी
उद्देश्यों के आसमान में
उड़ता बाज़ अवनि की
हद हस्ती का जाबांज।।
तरकस के तीर जिसके
नहीं बुझते तलवारे
जिसकी जंग नहीं खाती!
जिसके उद्देश्य पथ पर
नहीं आती बाधा जिसके
पथ पर अंधेरो का
नहीं नामो निशान।।
जिसके कदमों की
आहट को लेता समय
काल पहचान!!
सक्रियता का वर्तमान
पीढ़ियों का प्रेरक प्रसंग
प्रेरणा का युग में प्रमाण।।
जन्म मृत्यु के मध्य का
भेद मिटा रहता सदा वर्तमान
गर चाहो गिनना नाम ।।
थक जाओगे परम् शक्ति
सत्ता ईश्वर की रचना का
मानव या ईश्वर प्रतिनिधि
पराक्रम का परम प्रकाश।।
युग मानवता कहती
दुनियां पता नहीं खुद उसको
चल पड़ा किस पथ पर धरा
धन्य युग में कहाँ पड़ाव।।
चलता जाता निष्काम
कर्म के पथ पर छड़
भंगुर पल दो पल की
सांसो धड़कन संग
अकेला निर्धारित करने
नया आयाम।।
गुजर जाता जिधर से
बूत पुतलो में आ जाता
अपने होने का विश्वाश।।
जड़ को भी चेतन
कर देता सृष्टि सार्थक
मानव!
कहता कोई महान
कोई कहता शूरबीर
जाने क्या क्या कहती
दुनियां!!
बेखौफ़ निफिक्र निर्विकार
चलता जाता अपनी
धुन में नए जागरण जाग्रति का
सदा वर्तमान।।
जिन्दा हो जागती कब्रो की
रूहे शमशान के मुर्द्रे भी
जीवित हो जाते ।
बुझे तीर को देता नई धार
जंग लगी तलवारों से भी
लड़ता जीवन का संग्राम!!
कभी अतीत नहीं
ह्रदय ह्रदय में जीवित का
आदर भाव युग तेज का
शौर्य सूर्य नित्य निरंतर प्रवाह।।
पर्यावरण
पर्यावरण प्रदूषण
प्राणी प्राण के शत्रु
ब्रह्मांड काल समय
जाल जंजाल!!
झरने नदियां तालाब
ताल तलइया सुख गए
धरती बंजर हो रही वीरान।।
जल श्रोत गया पाताल
जल ही जीवन जीवन
दर्शन बन गया परिहास!!
जल के लिए युद्ध लड़े
जाएंगे बिन जल घुट घुट
कर निकलेगा प्राण।।
अब भी है जो बचा हुआ
जल प्राणी के दूषण से
दूषित जल जीवन निष्प्राण!!
ऋतुओं गति बदली
मौसम की भृगुटी तन
गयी प्राणि एक दूजे पर
करता प्रहार।।
शरद शिशिर हेमंत
वर्षा वसंत गति अनिश्चित
जब इच्छा आ जाए काल
कहर बन करे संघार!!
मित्र प्रकृति के प्राणि
धन्य धरोहर विलुप्त प्राय
दादा दादी कथा पात्र पर्याय।।
वन उपवन ही जीव +वन
सिंद्धान्त बृक्षों का नित्य
कटान बाग बगईचा विहीन
पृथ्वी व्यथित सुन सान ।।
विषयुक्त पवन है श्वांसों में
विष है संसय द्विविधा में
विलख रहा है प्राणी प्राण!!
ध्वनि प्रदुषण वायु प्रदूषण
प्रदूषण जैसे खर दूषण
दानव का प्राणि प्राण आघात।।
पर्यावरण प्रदुषण बन गया
काल नित्य निगल रहा
शैने शैने प्राणी ज्ञान विज्ञानं!!
पल प्रहर अवनि डोलती
भय भूकंप भयावह
साम्राज्य!!
सुनामी तूफ़ान चक्रवात
प्रहार कराह युग संसार।।
असंतुलित प्रकृति
धरती का बढ़ रहा
तापमान!!
ग्लेशियर पिघलते
सागर तल ऊंचाई बढ़ती
अँधेरा होता आकाश।।
अँधा धुंध विकास
प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता
अंधी होड़ दौड़ अँधा प्राणी
प्राण प्रयाण!!
जीवन मित्रों का ही
करता विनाश पर्वत
हुए मृत चट्टान।।
समय अब भी कर रहा
पुकार शेष अभी बहुत
कुछ सोचो प्राणी प्रकृति
कर्णधार!!
प्रकृति संरक्षण
पुनर्निमाण प्रदूषण
खर दूषण दानव को ना
करने दो विनाश!!
प्रकृति कि मर्यादा के
तुम राम मधुबन के
मधुसूदन कालीदह के
नटवर नागर
मुरली कि तान।।
जल सरक्षण
वन सरक्षण का
अलख जगाओ
शुभारंभ का करो
शंकनाद!!
प्रदूषण दानव से
संरक्षित संवर्धित हो
संसार बृक्ष भी जैसे
एक संतान!!
जल किअविरल
निर्मल धारा धरा प्रवाह
ऋतुएँ मौसम संतुलित
हरियाली खुशहाली का
हो युग संसार।।
जिंदगी आजमाने लगे
जिंदगी आजमाने लगे
ख़ुशी दामन छुड़ाने लगे।।
अश्क ना रुक पाए
आखों को रुलाने लगे
चाहत जिंदगी खफा
दूर जाने लगे ।।
अंजाम यकीं
सताने लगे
जुदाई नगमें
गुनगुनाने लगे।।
मन मैल से जुबाँ
लड़खड़ाने लगे
नीद आँख से जाने
लगे बेचैनी सताने लगे।।
मोहब्बत जिंदगी
ख्वाब आने लगे!!
सामने का पैमाना
भी हाथ आने से
कदराने लगे।।
हक़ीक़द दुनियां
फरेब नज़र आने लगे
जिंदगी में अरमानो के
चिराग टीमटीमाने लगे।।
मायूस जिंदगी बेवफाई
जुदाई गम के साये
डराने लगे!!
एक बार मुड़ कर
पीछे देख लेना
कौल यकीन ज़ब
फ़साना लगे!!
दोस्त शायद मेरी
वफ़ा जिंदगी का
यकीन हो बहाल
जिंदगी चाहत
पास आने लगे।!
तेरी चाहतों पे
तेरा नाम लिख दूंगा
ए दोस्त जिंदगी
जब त आजमाने लगे!
दोस्त पत्थर कि लकीर
दोस्ती पत्थर कि लकीर
दोस्त तेरी मोहब्बत कि
आवाज़ लगाने लगे।।
तेरे अश्क आँसू
दोस्त आबे जमजम
पतित पावनि गंगा
दूर जाने लगे!!
वफ़ा सनद के लिये
तेरे आंसुओं मे गम
गुनाह धोते नहाने लगे।।
नादाँ कि आजमाईस
अंजाम खुद कि नज़रों में
गिरे दोस्त तेरी नज़रों में
उठाने लगे।।
तेरे दिल कि उफ़
आह बन जायेगी
जागती बैचैन रातें
सताने लगे!!
खुदा कि ठोकरों से
घायल तेरी मोहब्बत
कसम खाने लगे।।
जिंदगी मेरी
मंजिल मकसद तेरी
चाहत कारवाँ
आने लगे!!
चाहत ख़ुशी
जीवन रंगो की
फुहार दीवाली कि
तरह जगमगाने लगे।।
विचलित धारा
विचलित हो जाती
जब बहती धारा
अर्थ बदल जाते दुनियां मे
बन जाती नयी परिभाषा
धारा।।
अविरल अविराम निरंतर
बहती धारा,भटक जाती
मकसद से विचलित
बैचन किनारा खोजती
बिचलित धारा।।
कभी कभी विचलित
धारा भी बन जाती
आशा विश्वास धरा धारा
विचलित धारा।।
अलग बिलग अस्तित्व
असमंजस भाग्य भगवान
सहारा कर्म कर्तव्य
चुनौती विचलितधारा।।
नित्य निरंतर बहती धारा
मोड़ता नया काल समय
पराकम पुरुषार्थ नई
शुरुआत युग विचलित
धारा।।
विचलित धारा विलग
अस्तित्वअस्तमत कि
चाहत धारा कभी नई
चेतना अक्सर काली
छाया विचलित धारा।।
भय भ्रम संसय से
विलग विचलित धरा
प्रकृति प्रबृति में
नकारात्मक
विचलित धारा।।
प्रेम प्रसंग अविरल
प्रवाह वियोग दुःख है
विचलित धारा ।।
जीवन मतलब परम्परा
संस्कृति संस्कार विमुख
नव सिद्धान्त विज्ञानं
विचलित धारा।।
यादा कदा चैतन्य जागृति
अवनि आकाश अवधारणा
विचलित धारा।।
अविरल निरंतर धारा
दुनियां परम्परा मान गान
शौर्य सूर्य नव सूर्योदय
पराक्रम कदाचित
विचलित धारा।।
धाराओ का विचलित होना
साहस शक्ति सोच ज्ञान
ताकत मोल मूल्य विचलित धारा।।
अविरल धारा
अविरल प्रभा प्रवाह
पल पल प्रातः संध्या
दिवस माह वर्ष हर्ष
समय साथ अविरल
धारा!!
निर्मल निर्विकार चाल
सत्यार्थ निश्चल निर्वाह
जीवन अविरल धारा!!
धरा धन्य धरोहर धैर्य
जीवन भाव भावना
उफान उछाल सागर
गहराई पर्वत ऊंचाई
अडिग चट्टान जीवन
अविरल धारा!!
मायने मतलब
अर्थ अनर्थ
जीवन जन्मेजय
अविरल धारा!!
दुख सुख काल समय
अधिपति उपलब्धि
जीवन अविरल धारा!!
आंसू मुस्कान
मर्यादा मर्म ज्ञान
आस्था विश्वास
विज्ञानं जीवन
चाल चुनौती जीत
हार अविरल धारा!!
सपनों कि
सच्चाई
युद्ध जीवन
अविरल धारा
अतीत पृष्टभूमी
काली छाया जीवन
अविरल धारा!!
चमकदार वर्तमान
निर्माण आधार
जीवन अविरल धारा!!
प्रेम द्वेष घृणा
मित्र शत्रु रिश्ता
समाज है जिंदगी
माँ कि कोख से
जन्मी माँ बाप
भाई बहन के
स्नेह सम्बन्ध का
परिवार जीवन
अविरल धारा ।।
स्वार्थ विकृति विकार
अवसाद जीवन
क्रोध वैमनश्व
आग जीवन
अविरल धारा!!
जीवन करुणा प्रेम क्षमां
सेवा पुरस्कारजीवन
अविरल धारा!!
बुद्धा कि अनुभूति
जीवन अवस्थाये चार
बचपन युवा प्रौढ बृद्ध
असहाय लाचार मृत्यु
नित्य निरंतर
अविरल धारा!!
त्याग तपश्या बलिदान
पुण्य दान जीवन
कर्म धर्म दायित्व कर्तव्य
आश्रम चार जीवन अविरल
धारा!!
पल पल घटता जीवन
जन्म दिन ख़ुशी खुमार
हज़ार का सच जीवन
अविरल धारा!!
उद्धेश्यों कि उड़ान तूफ़ान
चक्रवात झंझावात तमाम से
टकराती उलझती निकलती
घायल घमासान जीवन
अविरल धारा!!
कली फूल नादाँ कमसिन
नाज़ुक अनजान का साथ
प्रेयसि पत्नी का साथ है
जीवन अविरल धारा!!
माँ बाप का लाड़ला
दुलारा स्वय माँ बाप भी
संतान प्रतिबिम्ब प्रत्यक्ष
जीवनअविरल धरा!!
आचरण संस्कृति संस्कार
आचार व्यवहार ठहरती
नहीं चलती जाती अपनी
गति मे गतिमान संयोग
वियोग संबंधो का सार
जीवन अविरल धारा!!
सच झूठ का मेला
झमेला मिश्री मिर्ची
पराक्रम पुरुषार्थ
जीवन सावन कि
फुहार बारिस कि
बौछार धुप छाँव
जीवन अविरल धारा!!
मधुबन मधुमास
जीवन माटी मोल
अनमोल बेमोल
नाम बदनाम
जीवन अविरल
धारा!!
माँ कि कोख गोद
माँ कि ममता
आँचल का प्यार
बाप कि आशाओ कि
अवनि आकाश
अविरल धारा!!
रिश्ते नातो परिवार
विश्वश भविष्य वर्तमान
जीवनअविरल धारा!!
रोक दे मोड़ दे क़ोई
प्रमाण नहीं का प्रमाण
जीवनमाटी तन मन
माटी मे मिल जाती
पानी के बुलबुले जैसा
जीवन अविरल धारा!!
कब्र शमशान में चिर
निद्रा में सो जाती माटी मे
मिल जाती अनंत यात्रा
पर निकलता बहता
जीवन अविरल धारा!!
नई चेतना नई अविरल धारा
मिल जाती आत्मा शारीर कि
अविराम यात्रा है जीवन
अविरल धारा!!
गांव वर्तमान और इतिहास
इतिहास पुरुष हो
या वर्तमान गाँव की
माटी कण कण भाव
भावना जन्म जीवन
पहचान ।।
सुखा बाढ़ मौसम की
मार विषुवत रेखा का
भी गाँव अग्नि की
वर्षा भी लगाती है
शीतल छाँव।।
लेह लद्दाख लाहौल
गंगोत्री हिम हिमालय
गोद में बसे गाँव!!
हर दुविधा दुश्वारी
प्यारी नहीं चाहता
छोड़ना क़ोई
अपना गाँव।।
गाँव की मिट्टी का
पुतला गाँव का वर्तमान
गाँव की परम्परा में ही
खुश गाँव!!
गांव कि माटी पर ही
पग प्रथम अंतिम सांस।।
गाँव माँ के आँचल जैसा
बचपन कागज की कश्ती
बारिश का पानी आशा!!
गाँव कि परेशानी बदहाली
गॉव फिर भी स्वर्ग से सुन्दर
जननी जन्म भूमि स्वर्गादपि
गरीयष्ये आस्था विश्वास!!
गाँव की माटी जीवन का
प्रारम्भ अंतिम सांस की
माटी गाँव।।
गाँव से रिश्ता
गाँव की मिट्टी की
कोख से जन्मा भारत
नवजात बचपन किशोर
युवा मानव महान!!
मानव चाहे कहीं
चला जाए गाँव की
माटी ही पहचान।।
जन्म होता जब जातक का
पूछा जाता माँ बाप कौन?
कहाँ जन्म भूमि कौन सा गाँव?
गाँव गर्व है गाँव गर्भ है
गांव की माटी का
कण कण ऊतक टिशु
सांसे धड़कन प्राण।।
उत्तर हो या दक्षिण
पूरब हो या पक्षिम
गाँव से ही पहचान
कहीं नारियल के
बागान!!
कहीं चाय के बागान
सेव संतरा अंगूरों
की मिठास!!
खुसबू में भारत के
कण कण का गाँव।।
त्याग तपस्या
बलिदानो की
गौरव गाथा का
सुबह शाम
गाँव की माटी का
अभिमान।।
आजाद भगत
बटुकेश्वर
बिस्मिल या
लाला लाजपथ राय
बल्लभ सरदार पटेल
डॉ राजेन्द्र प्रसाद
शास्त्री लालबहादुर
सब भारत के गाँवो की
माटी के लाल।।
गाँव की माटी प्रकृति
सुबह कोयल की
मधुर तान मुर्गे की
बान सुर्ख सूरज की
लाली हल बैल
किसान का गाँव!!
माटी की शोधी
खुशबू भारत गांव
जान प्राण।।
बहती नदियां झरने
झील तालाब पगडंडी
पीपल की छाँव गाँव!!
बाग़ बगीचे विशुद्ध
पवन के झोंके भावों के
रिश्तों के ठौर ठाँव गाँव!!
माटी की शान
भोले भाले लोग
नहीं जानते राजनिति
क्षुद्र पेंच दांव!!
एक दूजे के
सुख दुःख के
साथी गाँव की
माटी का अलबेला
रीती रिवाज।।
जाती धर्म अलग अलग
मगर उमंग से
शामिल होते
मिल साथ मनाते
एक दूजे का
तीज त्यौहार।।
गांव वर्तमान और इतिहास
इतिहास पुरुष हो
या वर्तमान गाँव की
माटी कण कण भाव
भावना जन्म जीवन
पहचान ।।
सुखा बाढ़ मौसम की
मार विषुवत रेखा का
भी गाँव अग्नि की
वर्षा भी लगाती है
शीतल छाँव।।
लेह लद्दाख लाहौल
गंगोत्री हिम हिमालय
गोद में बसे गाँव!!
हर दुविधा दुश्वारी
प्यारी नहीं चाहता
छोड़ना क़ोई
अपना गाँव।।
गाँव की मिट्टी का
पुतला गाँव का वर्तमान
गाँव की परम्परा में ही
खुश गाँव!!
गांव कि माटी पर ही
पग प्रथम अंतिम सांस।।
गाँव माँ के आँचल जैसा
बचपन कागज की कश्ती
बारिश का पानी आशा!!
गाँव कि परेशानी बदहाली
गॉव फिर भी स्वर्ग से सुन्दर
जननी जन्म भूमि स्वर्गादपि
गरीयष्ये आस्था विश्वास!!
गाँव की माटी जीवन का
प्रारम्भ अंतिम सांस की
माटी गाँव।।
आईना
आईना कहता
इंसा देखता
मुझमे चेहरा
अपना।
तमाम दाग
छुपा देता
चहरे का
मैं आईना।।
चाँद कहता है
दाग है मुझमे फिर भी
हुस्न का नाज़ मैं चाँद
मैं आईना।।
चाँद ख़ास
अकिकत का
चाँद पूर्ण मै पूर्णिमा
चौथ का चाँद का
भाव चौदहवी का
चाँद हुस्न हैसियत
का रुतबा।।
चाँद दूज का एकरार
ईद का चाँद यकीन
एतबार जहां अपना।
सावन सुहानें
मौसम में
बादलों में पनाह
ठाँव अपना।।
ठंडी हवा के झोकों में
जुल्फों का साया
चाँद से चेहरे का सेहरा
अपना।।
रातों की तन्हाई में
चाँदनी चाँद का क्या
कहना।
मेरी पूनम की रौशनी
में उठता सागर के
दिल गहराई से
इश्क का तूफां
जमाने में मोहब्बत
का जज्बा।।
दीवानों की
नज़रों में मासूम
मासूका को
नज़र आता हूँ
मैं चाँद जैसा
चेहरा माँ बाप की
औलाद का
रौशन चाँद सा चेहरा।।
चाँद कहता है
सुन आईना
तू तो दाग
छुपा लेता
इंसा के तमाम
इंसा का।।
पूछता तुझसे
चेहरे कासबब दिल की
तरह नाज़ुक
आह आहट पर भी
टूटता बिखरता।।
जमाने के संग संग
चलता जहाँ के गम
खुशियों को
दुश्वरियों को
झेलता जीता।।
बचपन से सुरूर का
जूनून कायनात अपना।।
आईना तू तो
आपने पराये का
फर्क बतलाता
दिल चहरे का
फर्क आईना।
चाँद मैं दुनियां में
नफरतों के फर्क से
बेगाना इश्क मोहब्बत
आशिकी का तरन्नुम
तराना मेरा दीवाना जमाना।।
भूख
भूख दुनियां के
क्या -क्या
रंग रूप राह
दिखती?
कभी रुलाती
कभी हंसाती
भूख रोटी कि
जाने क्या क्या
दिन दिखती।।
भूख इंसान को
दर दर भटकाती
भूख इंसान को
ताकत का मशीहा
कायर कमजोर
बनती।
भूख जिंदगी कि
मंजिल मकसद
बताती।।
भूख शौख भी
भूख जिंदगी ,
भूख भय दहसत
कहर,कोफ़्त
बन जाती।
शोहरत कि भूख
इंसान को देवता
शैतान बनती ।।
दौलत कि भूख इंसान को
चोर बेईमान बनाती।
भूख रोटी जिंदगी सांसो
धड़कन के लिये आवश्यक!
जूनून भूख चाहतो कि
मोहब्बत दुनियां संसार
हासिल का दीवाना गुरुरि।।
परवानो कि तड़फ इश्क के
अश्क रुलाती हंसती।
आरजू कि मंजिल भूख
नज़रों के इंसान को
अँधा बनती।।
सरहदों पे दिन
रात मरता है
जवान वतन पे
मर मिटने का
जज्बा भूख
जागती।
मर जाता वतन पे
कफ़न तिरंगे का
ओढ़ भूख जवाँ के
जज्बे को अमर शहीद
बनती।।
भूख आग है
लपटों में
जिसके दुनियां
जल जाती।
भूख भयंकर क्रांति कि
ज्वाला भूख शांति का
पैगाम सुनाती।।
भूख मशाल है दुनियां में
मिशाल बनती ।
पेट कि आग भूख है
ख्वाहिसों चाहतो का
हद जुनूं भूख है।।
भूख क्रोध काल
जागती भूख भ्रम
भयंकर बनाती
भूख करुणा
दया का पात्र
बनती।।
छुधा से भूख कि
शुरुआत भूख अग्नि आग
भूख चाहत जूनून है।
भूख मकसद कि
महिमा का ज्वलित
प्रज्वलित प्रवाह है ।।
भूख हुस्न इश्क कि
इबादत भूख जज्बात
भूख कर्म है भूख
धर्म है भूख काम
भूख आम है,
प्राणी प्राण है।।
भूख गम ख़ुशी आसु
मुस्कान छुधा कि भूख
मिटाने में प्राण प्राणी
परेशान है।!
छुधा कि भूख शांत होते ही
तमाम भूखो कि आग कि
लपटों में झुलसता प्राणी
प्राण है।।
भूख कि रोटी या
मकसद कि भूख दोनों
ही में प्राणी के प्राण है।!
रोटी कि भूख
जिंदगी मकसद कि
भूख जूनून पागलपन
दीवानापन जिंदगी की
पहचान है।।
दोनों ही जिंदगी के
लिये जरुरी
दोनों से ही मिलती
प्राणी कि जिंदगी
प्राण पहचान ।!
दोनों में ही जिंदगी
प्राणी प्राण की आदि
मध्य अनंत यात्रा का
महाप्रयाण है।।
शिवोह
शिवोहं शिवोहं शिवोहं
चिता भस्म भूषित
श्मसाना बसे हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।
अशुभ देवता मृत्यु
उत्सव हमारा
शुभोंह शुभोंह
शुभोंह शुभोंह
शिवोहं शिवोहं शिवोहं ।।
भूत पिचास स्वान
सृगाल कपाल कपाली
संग साथ हमारे
स्वरों हम स्वरों हम स्वरों
हम शिवोहं शिवोहं!!
गले सर्प माला
जटा गंग धारा
मुकुट मुंड माला
देवों हम देवों हम
देवोँ हम देवोँ हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।
डमरू त्रिशूल
शीश चंद्र धरे हम
पहने मृग छाला
कैलाशम बसेंह
शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।
देवता दानव
शरण हमारे
जगत कल्याण
धैर्य ध्यान त्रिनेत्र
धरे हम देव तत्व की
शक्ति बनी रहे ये सृष्टि
विषपान करें हम
विषपान करे हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं ।।
अकाल का काल
महामृत्युंजओ हम
दुख क्लेश हर्ता
विघ्न विनाशक हम
शिवोहं शिवोहम शिवोहम!!
पार्वती अर्धागिनी
अर्ध नारीश्वरों हम
अर्धनारीश्वरों हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।
वसहा बैल नंदी है
वाहन हमारा
रौद्र रुद्र तांडव दुष्ट
संघार कारक
औघड़ रूप धरे
हम औघड़ रूप धरे हम
औघड़ रूप धरें हम
शिवोहं शिवोहं
शिवोहं शिवोहं।।
पकवान नही प्रिय मुझको
भांग धतूर बेल पत्रम प्रिये हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।
महादेव शिव शंकर
भोला गङ्गाधर आशुतोष
पंचाछरी मंत्र ॐ नमः
शिवायः से रीझे हम
शिवोहं शिवोहं शिवोहं।।
पाप शाप विनाशक
मोक्ष मुक्ति प्रदायक
कलयुग जीव उपकार
हम द्वादस ज्योतिर्मय
ज्योतिर्लिंग बसे हम
शिवोहं शिवोहंग शिवोहं।।
भारत कि बात बताता हूँ
भारत माता कि संतान
माँ भारती का वरदान
भारत माता कि
बात सुनाता हूँ।।
भारत के वीर सपूतो
ऋषियो मुनियों कि
बात बताता हूँ।
कुरुक्षेत्र के महायुद्ध में
कृष्णा का गीता
उपदेश सुनाता हूँ।।
सत्यवती परासर
वेदब्यास उतपत्ति
बताता हूँ।
देव ब्रत जन्म
गंगा का जाना
भीष्म प्रतिज्ञा
सुनाता हूँ।।
भारत माता कि
संतान माँ भारती
का वरदान
भारत कि बात
सुनाता हूँ।।
सूर्यपुत्र का शौर्य
दानवीर कर्ण
मित्रता दुर्योधन की
भारत में मित्र धर्म
कृष्ण सुदामा
बताता हूँ ।
लाक्षा गृह का
षड्यंत्र कृष्णा का
बैभव विराट रूप
द्रोण अर्जुन घटोत्कच
बरबरिक वीरों के
महाभारत का
महायुद्ध कि
बात बताता हूँ।।
भारत माता कि
संतान माँ भारती का
वरदान भारत कि
बात बताता हूँ।।
परक्षित जनमेजय
विक्रमादित्य की
शौर्य गाथा मै गाता हूँ।
आशा और निराशा में
अखंड भारत की
कल्पना के सत्य
सत्यार्थ विष्णु गुप्त
चाणक्य मौर्य सिंह
चंद्र गुप्त का शंख
नाद सुनाता हूँ ।।
भारत माता कि
संतान माँ भारती
का वरदान भारत कि
बात बताता हूँ।।
महाबीर सिद्धार्थ बुद्ध
अशोक महान के
गौरव का इतिहास
भारत माता वर्तमान।
पन्ना धाय का त्याग
बलिदान राणा सांगा के
अस्सी घाव महाराणा का
मेवाड़ संग्राम बताता हूँ।।
पद्मावती का जौहर
खूब लड़ी मर्दांनी कि
हिम्मत शोहरत ।
रानी दुर्गावती,
दुर्गा रणचंडी
इंदिरा भारत की
नारी कि मर्यादा
मर्म सुनाता हूँ ।।
भारत माता कि
संतान माँ भारती
का वरदान भारत
कि बात बताता हूँ।।।
स्वामी विवेकानंद
के परमहंस हुलसी के
तुलसी कबीर रहीम
केशव सूर मीरा कि
भक्ति कीशक्ति बताता हूँ।
जगदम्ब शिवा का
खौफ मुगलो
का टूटा दम्भ
शिवा युद्ध कौशल का
मराठा छत्रप का
पौरुष पुरुषार्थ बताता हूँ।।
भारत माता कि
संतान माँ भारती का
वरदान भारत कि
बात बताता हूँ।।
आजादी के
दीवानों लाला
लाजपत भगत सिंह
सुकदेव विस्मिल
खुदीराम चंद्रशेखर
आजाद!
बटुकेश्वर राजेन्द्र लाहिड़ी
असफकुल्लाह ना जाने
कितने नाम ।
नौजवानो के बलिदानो की
आजादी का राग सुनाता हूँ ।।
भारत माता कि
संतान माँ भारती का
वरदान भारत कि
बात सुनाता हूँ।
गुरुओ कि वाणी का
पंजाब सवा लाख से
एक लडाऊ गुरु गोविन्द
सिंह का अंदाज़।
गुरुओं का त्याग
बलिदान गुरुवाणी का
सन्देश सुनाता हूँ ।।
भारत माता कि संतान
माँ भारती का वरदान
भारत कि बात सुनाता हूँ।।
राम नाम मर्यादा का
पुरुषोत्तम पितृ भक्ति
रावण राम युद्ध
प्रसंग सुनाता हूँ।।
भारत माता कि संतान
माँ भारती का वरदान
भारत कि गौरव गाथा
महान मै गाता हूँ ।
वर्तमान में भारत
कि संतान नौजवान
मैं जगाता हूँ।।
शान तिरंगा
माँ भारती का
अभिमान तिरंगा
भारत की गरिमा
गौरव मान तिरंगा
भारत की आन बान
शान तिरंगा।।
अरमानो के आसमान में
लहराता माँ भारती का
स्वाभिमान तिरंगा
भारत का आन बान
शान तिरंगा।।
रंग बसंती
चोले का प्राण तिरंगा
आजादी के दीवानो
परवानो का कर्म कफ़न
अभिमान तिरंगा!
भारत का आन बान
शान तिरंगा।।
गिरते और
संभालते
सीमाओं पर
दुश्मन से
लड़ते हाथ
हथियार तिरंगा!!
जीने मरने की
कस्मे खाता
हर जवान का
मान तिरंगा।।
गज़ भर कपड़ा
नहीं मातृ भूमि महिमा
मर्यादा वर्तमान
इतिहास तिरंगा!!
भारत का आन बान
शान तिरंगा।।
वन्दे मातरम्
सत्यमेव जयते
जन गण मन का
गान तिरंगा!!
जय हिन्द हिंदी
हिन्दुस्तान की
पहचान तिरंगा!!
भारत की माटी
का आन बान
सम्मान तिरंगा।।
माँ भारती के
वचन सौगंध
का पल प्रहर
सुबह शाम दिन
रात सांसे धड़कन
प्राण तिरंगा।।
भरत भारती के
वीर सपूतो का
धन्य धरोहर
परिधान तिरंगा।।
पराक्रम पुरुषार्थ
क्रांति का केशरिया
निर्बाध तिरंगा!!
विकास खुशहाली
हरियाली का हर्ष हरा
ताना बाना प्रेम शान्ति
मान तिरंगा!!
श्वेत विश्व बन्धुत्व
संचार संबाद प्रीति
रीती रिवाज़ तिरंगा।।
भारत की संस्कृति
संस्कार का सम्यक
शौर्य का नाज़ तिरंगा।।
चक्र अशोक कि
चौबीस तिली
समय गति काल
चाल तिरंगा।।
भरत भारत के अक्षुण
अक्षय बृहद बीर धैर्य
धीर का अवनि
आकाश तिरंगा।।
जग जननी
जग जननी सकल
जगत संसार माँ
दुःख हरणी मंगल करनी
तू तारण हार माँ।।
जग जननी सकल
जगत संसार माँ।।
दुष्ट विनासक
भय भव भंजक
पल प्रहर अविरल
युग प्रवाह माँ।।
जग जननी सकल
जगत संसार माँ।।
पाप विनासनी
मोक्ष दायनी
जगत कल्याण माँ।
जग जननी सकल
जगत संसार माँ।।
अपराध क्षामं करती
चाहे जो भी हो गलती
तेरी ही संतान युग संसार माँ।।
माँ तेरी महिमा
ब्रह्मा विष्णु शंकर
गाए तेरी महिमा
अपरंपार माँ।।
जग जननी सकल
जगत संसार माँ।।
देवोँ की देवी
स्वर्ग नर्क उद्धार माँ
धन बैभव शुख संपत्ति
दाता महिमा अपरमपार
माँ!!
तेरी महिमा जो
नित गावे सकल मनोरथ पावे।
भव सागर से तू ही करती
बेड़ा पार माँ।।
स्वांस प्राण आधार माँ
जग जननी सकल
जगत आधार माँ!!
दाम्पत्य जीवन वर्तमान
जिंदगी मे सपने हज़ार
सजाये जगाये लाख
अरमान सजायेगी सपने
प्राण!!
रूप की रानी सहजादी
भाग्य भगवान पुरस्कार
जीवन साथी हम राज ।।
ना कभी देखा
ना कभी मुलाकात
माँ बापू की चाहत
मेरी किस्मत हम राह।।
दो अनजान बनने चले
सुख दुख के सहभागी
साथी सोच जुदा समझ
संयोग का विवाह।।
पहली मुलाकात
जागे दोनों के अरमान
दो अनजाने हद हस्ती
एक दूजे संग मर मीटने
कि कस्मे निर्वाह।।
अलग अलग चाहते
चाह राह तमाम चाहतो
का समझौता जीवन की
शुरुआत।।
अंतर्द्वंद विरोधाभास
भी खुशियों की सौगात
जीवन दाम्पत्य
विशेष खास।।
जीवन मे सुख दुख
खुशी गम आंसू मुस्कान
में बराबर हिस्सेदार
जिंदगी भर मुस्कुराते निर्वाह।।
जमाना बदल गया
अब दाम्पत्य जीवन
की शुरुआत से पूर्व ही
जिंदगी के पसंद ना
पसंद का प्यार।।
जब कभी चाहतो से
ऊब गया मन
नई चाहत के नए
ठौर की तलाश तलाक।।
माँ बापू की पसंद से
परिचय प्यार दाम्पत्य
जीवन की शुरुआत वाह
क्या बात जिंदगी अभिमान।।
नया जमाना स्वतंत्र
विचार पहले प्यार
फिर विवाह!!
कुछ दिन निर्वाह
फिर जुदा रास्ते
नए प्यार की तलाश
दाम्पत्य जीवन नही
जीवन परिहास।।
जीवन की राह
बचपन बीता
थम गया किशोर का शोर।।
युवा जोश जश्न
उमंग, उत्साह
दौर दरमियाँ गुजरता
गया जीवन की सच्चाई की
सांझ भोर।।
जिंदगी की सच्चाई से पाला
पड़ने लगा धन दौलत बिना
दूँनिया में जज्बा जज्बात धूल
कागज़ कोर।।
जीवन भागम भाग में
शामिल भीड़ में तन्हा हो गया।।
बचपन के सपने
रह गए सपने
कभी जगती सोते
देखने लगा।।
रोजी रोज़गार की
मार भीड़ में खुद की
पहचान बनाने की
मार।।
कभी किस्मत का
इंतज़ार कभी
भगवान की गुहार।।
भगवान के लिये
बराबर सभी प्राणी
संसार सारभौमिक उसका न्याय।।
जानता सच्चाई
फिर भी पता नही
क्यों स्वयं का भगवान
पर मानता पहला अधिकार।।
जिंदगी जंग कठिन चुनौती
जिंदगी नाटक का
उठता गिरता परदा।।
जिंदगी में खुशबू
खूबसूरत झोंके
हवा बेशुमार जागते
आशा विश्वाश
का संचार।।
जिंदगी संघर्षों की
अवनि आकाश
हर जगह भीड़
लंबी कतार में खड़ी
खुद के परवाह
बारी का इंतज़ार।।
जिंदगी के खट्टे मीठे
स्वाद कभी दुखो का
पहाड़ कड़वे घूंट की याद।।
जिंदगी जंग का
मैदान साहस शक्ति
सूझ बूझ धैर्य धीर का
आभूषण श्रृंगार।।
जिंदगी सच्चाई का सामना
समंदर का भाटा ज्वार
तूफान जिंदगी रिश्ते नाते
प्यार वफाई बेवफाई आंसू, मुस्कान।।
जिंदगी पराक्रम पुरुषार्थ
याथार्त सत्यार्थ का त्याग
परमार्थ तीज त्यौहार।।
युवा जोश
बचपन बीता
युवा किशोर का शोर
आ गया युवा
उत्साह का दौर।।
दूँनिया मुठ्ठी में
करने के सपनो की
हकीकत परीक्षा
पुरुषार्थ का फल बौर।।
दुनियाँ को अपनी
मस्ती हस्ती हद
हैसियत का जज्बा जंग।।
तमाम दुश्वारियां चुनौतियाँ
सच्चाई से लड़ने का
हौसला उमंग।।
मजबूत इरादों का
फौलाद माँ बापू
की जान जाबांज़ ।।
शक्ति भक्ति ज्ञान
विज्ञान समाज
संस्कार के मध्य
नई सोच समझ
सिद्धान्त शान।।
दुनियाँ को अपनी
चाहत पर ले जाने का
युद्ध कभी खुद से लड़ना
कभी विकृतियों के
बहाने लड़ना जीत हार।।
युवा जोश है युवा जश्न है
युवा चाह है युवा राह है
युवा ओश है युवा अंगार।।
युवा समाज राष्ट्र धुरी
इर्द गिर्द घूमता जिसके संसार।।
युवा सोच युवा सार्थक युवा
सत्य सार्थक पराक्रम
परिवर्तन राह।।
युवा धर्म युवा संस्कृति
युवा चैतन्य जागृति का
परम प्रवाह।।
बचपन बीता किशोर
सपनो का युवा सत्य
सत्यार्थ प्रकाश।।
युवा निर्धारित करता
युग समाज राष्ट्र की
दिशा दशा का वर्तमान
इतिहास।।
किशोर उमंग
बीता बचपन खत्म हुई
शरारते किशोर का
शोर एहसास दौर।।
माँ बापू कि आशा
विश्वाश का ठार ठौर
रिश्ते नातों
आशाओं का बौर।।
अपनी जिंदगी
धरती आकाश
अरमानो की उड़ान
मन सोच समझ सौर्य।।
मुट्ठी में कैद कर लू दूँनिया
चाहत करू जिंदगी की दौड़।।
हर वक्त सोती जगती आँखों
से खूबसूरत सपने संजोता
घर परिवार कुल का गौरव
मान का ताना बाना बुनता
दिन रात शाम भोर।।
हर चाहने वाला
यही कहता
मेरा अभिमान है
अरमानो का बाज़ है
बचपन किशोर!!
अवनि आसमान का
कुल परिवार का प्रेरक
प्रणेता सम्मान शोर
प्यारा परिवार किशोर।।
मीठी यादे
बचपन की शरारतें
खूबसूरत जिंदगी क
यादों का आईना।
अजीबो गरीब हरकते
बारिश में भीगना
माँ बापू को सताना
माँ बापू के लिये शरारते
खुशियों का खजाना।।
बचपन की शरारते
चोरी से गुड़ खाना
बारिस का पानी
कागज की कश्ती में
समंदर का बहाना।।
बचपन मे भाई बहनों
से लड़ना झगड़ना
गुड्डे गुड्डी का खेल कट्टी
मिल्ली मिलना रोना
मुस्कराना।।
बचपन कि शरारतों में
शामिल कीचड़ मिट्टी
धूल अंधेरे आवाज़ से
डर जाना।।
माँ बापू कोशिश करते
डर जाऊं सो जाऊं
शरारतों से अच्छा लगता
माँ बापू को रात रात जगाना।।
शरारतों में शामिल
गली मोहल्लों के गाय
कुत्तो संग खेलना
गोदी में घूमना जब भी
गोदी से नीचे उतरना
रोना चिल्लाना।।
घर की तमाम
साज सज्जा को
बिखेरना मना करने
पर जिद्द ऐसी करना
दूँनिया ही सर पे उठाना।।
रूठना मानना पे
सिर पैरों की मांग पे
माँ बापू रिश्ते नातों को
झुकाना।।
कहते सब बचपन
भगवान का रूप
भगवान भी बचपन का
बहाना तराना।।
अठखेलियाँ
बचपन की अठखेलियाँ
माँ बापू की खुशियो
का खजाना।।
कभी जिद्द से दुनियाँ सर
पे उठा लेना कभी छोटी
छोटी बातों पर भी
मुस्कुराना।।
बचपन की अठखेलियाँ
याद नही माँ बापू रिश्ते नातो
की खूबसूरत यादों का तराना।।
दुख सुख अनुभव
अनुभुति से बिमुख
चाहत के चरम का चाहना।।
किसी भी हद से
बचपन गुजर जाए
माँ बापू रिश्ते नातो को
लुभाता हंसाता।।
बचपन की अठखेलियों
चर्चा घर परिवार में
खुशियों की वर्षा।।
कभी वारिस की
पानी मे भीगना
झिकना चाहने
वालो को परेशान
करना।।
बचपन की अठखेलियां
घर आँगन मन भावन
पहेलियां घर परिवार का
परमेश्वर पुरस्कार खजाना।।
बचपन से पचपन
हर गम से बेगाना
दुनियाँ से अनजाना
भेद भाव जाती धर्म
वर्ग ऊँच नीच से
अलग सिर्फ वात्सल्य
हठ हठी बचकाना।।
कभी चाँद पाने की
जिद्द कभी माँ की लोरी
ममता का आँचल ही आशियाना।।
बापू का काँधा दुनियाँ का
बड़ा सिंघासन अभिमान
का आसमान।।
विद्यालय जाने
पर रोना दूँनिया
सर पे उठा लेना
रूठना मान जाना
पल भर में ही धरती
आकाश उठाना।।
माँ बापू को जिद्द
अच्छी लगती
बचपन शरारते
माँ बापू के आशा
विश्वास का खजाना।।
बचपन जाने कब
बीत गया शरारते
शोखियां जाने जाने
कहाँ खो गया जिंदगी में
जाने कब सच्चाई
का सामना हो गया।।
जिंदगी का कीमती
दौर गुजर गया
अब बचपन का
सफर पचपन में
पहुँच गया।।
सिर्फ जिंदगी के
गुजरे दौर की
खूबसूरत यादों की
दौलत संग रह गया।।
जिम्मेदारियों का
बोझ अधूरे सपनो को
पूरा करने करने का सौख
अंधी दौड़ बचपन मे
माँ बापू से करते जिद्द
अब बन चुके खुद
माँ बाबू दादा दादी
नए जमाने के
बच्चों की जिद्द पीढ़ी
परिवर्तन का धौंस।।
बचपन से पचपन का
सफर गुजर गया
जैसे बचपन सपना था
पचपन हकीकत
चुनौती बन गया।।
पचपन में वक्त नही
जिम्मेदारी बहुत
बचपन मे वक्त बहुत
जिंदगी मस्त पचपन में
हद हस्ती पहचान
सम्मान धन दौलत हो गया ।।
बचपन मे
अमीरी गरीबी की चिंता
नही मां बापू का
प्यार ही दौलत।।
और मुझे क्या चाहिए
माँ मुझे गले से लगा ले
चरणों मे जगह दे
आँचल सुला दे और
मुझे क्या चाहीये।।
माँ ढूध तेरा अमृत
आशीष मेरी ढाल
प्यार तेरा जहां
और मुझे क्या चाहिये।।
माँ मैँ तेरी सेवा करूँ
मूरत भगवान की तुझमे
देखा करूँ मुझे
और क्या चाहिये।।
लम्हा लम्हा
तेरे ही अरमानो को
जिया करूँ तेरे ही
लम्हो की जिंदगी
पला बढ़ा कोई गिला
ना शिकवा करूँ
और मुझे क्या चाहिये।।
नौ माह तेरी
कोख ने पला
हर दुःख पीड़ा का
पिया विष हाला
माँ मैँ कर्ज़ तेरा
कैसे मैँ उतार दू
तेरे कर्ज फ़र्ज़ को
दूँनिया मैँ तुझपे ही
वार दूं और
मुझे क्या चाहिये।।
माँ मैं तेरा सूरज चाँद
तू ही कहती है
हूँ बापू का नाज
मरे लिये तू ही
धरती आसमान
जन्नत जहाँ और
मुझे क्या चाहिये।।
माँ तू मेरी शरारत को
सहती कुछ नही
कहती सही!
मैं किसी भी हद से
गुजर जाऊं तू सहती।
माँ मेरी हस्ती तू
मेरी मस्ती तू
मेरे जज्बे की ज्योति
तू और मुझे क्या चाहिए।।
माँ तू शक्ति है,
मेरी भक्ति है
मेरे सामर्थ की
ज्वाला दूँनिया में
मेरे जिंदगी की
डोर रिश्तों की धुरी है ।।
माँ मेरा तू आसरा
माँ मैँ तेरा ही आश
विश्वाश मुस्कान
और मुझे क्या चाहिये।।
माँ जब भी जनम मैँ लू
तेरा ही बेटी या बेटा हूँ
तेरी ममता के आंचल में
भाग्य भगवान भी
इतराता और क्या चाहिये।।
सावन भादों की बदरिया
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे ।।
ढंक जाए सूरज, बादल
और बारिस जीवन की
खुशियां जैसे भावे।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
बादल और बारिश जैसे
चाहत वइसन आवे फुहार
छम छम पायल की झंकार
मन प्रीत प्यार जगावे।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
उमड़ घुमड़ ,बादल और
बारिश प्रेम प्रीति की रीति
राग बताये।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
जब आवे बादल और वारिश
प्यार प्रेम की मस्ती याद आवे।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
रिमझिम बारिश की फुहार
भीगा बदन गोरी का आँगर
प्यार के बादल और बरसात
मौसम लाये।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
बाहारों की बादल और बारिश
दिल की गली में मोहब्बत के
अरमां जगाए।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।।
चाँद बादल की आगोश में
मल्लिका मोहब्बत की पायल
की छम छम जिंदगी मोहब्बत
का सरगम सुनाए।।
सावन भादों की बदरिया
मनभावन लागे।!
कहर कायनात – तपती ज्वाला और बाढ़ बरसात
जेठ की ज्वाला
तपती धरती
प्यासी धरती
बेहाल इंसान।।
कुछ हो राहत
आशा आसमान
हल्की फुहार भी
बहारों की बहार
सुकून के पल
जीवन संचार।।
आया मानसून
अरमानो की झूम
गांव किसान के
मन मे जागी आश
ईश्वर का करते
धन्यवाद।।
फुहार से झमा झम
बरसात क्षुद्र नदी भर
गई उतराई औकात
पे आई पागल हुई
नदी टूटते विश्वाश।।
जल ही जीवन
जीवन के लिये
बना जंजाल
धरती पर जहां तहां
मिटने लगी हरियाली
की खुशहाली
संकट में पड़े प्राण।।
पागल हुई नदी का
जल प्रवाह बह गई
झोपड़ी उजडा
आशियाना सवाल
जाए तो जाए कहाँ
खोजते ठिकान।।
किसी तरह मिला
जीने का बहाना
ऊंचे बंधे पर बस
गया ठौर ठिकाना
मुश्किल हुआ
रोटी पकाना।।
नदियां झील
झरने तालाब
जीवन की रेखा
जीवन ही लगता धोखा
पागल हुई नदी
जैसे प्रीतम का प्यार
कभी जिंदगी की सच्चाई
फरेब फसाना।।
सुबह से होती शाम
बरसात की आफत
कहर भागते इधर उधर
जाने कैसे गुजरती
जिंदगी पल प्रहर।।
बरखा बाहारों की
दिल की गली मेँ
मोहब्बत के अरमान
बरखा रानी दिलवर का
दिल में रहने का राज।।
बारिस का मौसम
आरजू इंतजार हुश्न
इश्क की दस्तक दीदार ।।
वारिस से पागल हुई
नदी का कहर टुटते रिश्ते
छूटते प्यार के घरौंदों याद पुकार।।
मजबूर नहीं मजदूर है हम
मजबूर नहीं
मजलूम नहीं
मजदूर है हम।!
मेहनत मेरा ईमान
खून पसीना बहाते हम।।
मेरा अपना घर जीवन
का सपनासारे जहाँ का
घर बनाते है हम!!
कल कारखानों में
मानव हम मशीन
बन जाते है हम।।
बड़े बड़े महल अटारी
बनाते हम।
वैसे तो दुनियां का
हर मानव श्रम करता
मगर श्रमिक कहलाते
केवल हम।।
दिन और रात
चिलचिलाती
धुप हो या कड़क
सर्द की ठंडी
बारिस हो या तूफ़ान
श्रम की भठ्ठी में खुद को
गलते है हम।।
कोई इच्छा अभिलाषा नहीं
विकास निर्माण की कोल्हू में
पिसते जाते हम।।
दो वक्त की रोटी
मेरे लिये जीवन की
सौगात आजाद मुल्क में
गुलाम सा जीवन जीते जाते हम।।
गीता में कर्म योग कृष्णा का
ज्ञान सिरोधार्य कर कर्मनेव
धर्मेव जयते श्रमेव जयते
सत्यमेव जयते को जीते
जाते हम।।
खून हमारा पानी जीना
मारना बेईमानी वक्त समय
घुट घुट कर जीते जाते हम।।
अभिमान हमे भी हम है
मानव किला दुर्ग हो या रेल
प्लेन हम मजदूर बनाते है।।
बिडम्बना मेरी किस्मत का
अपने ही वतन में प्रवासी
कहलाते हम।।
पल पल चलते राष्ट्र धुरी के
इर्द गिर्द साथ चलते जाते
हम।।
जो भी हम निर्माण करे
मेरा अधिकार नहीं रेल
की भीड़ में धक्कम धक्का
खाते हम।।
आकाश में उड़ते
वायुयान देख खुश हो
जाते है अपने ही कृति
कौशल की दुनियां से
अनिभिज्ञ हो जाते
हम।।
ऐसे उद्योगों में जहाँ जहर ही
जीवन की परवाह नहीं
जहर भी पीते जाते हम।।
खेतिहर मजदूर या कामगर
हर प्रातः नगर शहर चौराहों
पर नीलाम हो जाते हम।।
सर्कस या चिड़िया घर के
जानवर मजदूरों का अपनी
भाषा भाव में परिहास उड़ाते हम।।
मानव ने ही मुझको
गुलाम बनाकर
बंदी गृह में कैद किया
फिर भी हम तुम
मजदूरों से बेहतर
अपनी मर्जी से जीते
मौज मनाते हम।।
कही मेम् का डांगी
बेशकीमती कारो से
मुस्काता कहता हम तो
प्राणी अधम जाती
कुकर्मो से जानवर
फिर भी मानव मजदूर
तुमसे बेहतर हम।।
गर हो जाए रोग ग्रस्त
अस्पताल इलाज के
चक्कर में ही दम तोड़
जाते हम।।
किस्मत से इंसान
बदकिस्मत से मजदूर
सिर्फ सांसो धड़कन की
काया में जीते जाते हम।।
ना कोई हथियार हाथ में
ना कोई दुःख पीड़ा
सत्य और आग्रह से
इंकलाब हम गाते है।।
मांगे गर अधिकार
शांति से जीवन
जीने का लाठी गोली
खाते मारे जाते हम।।
किसी मिल का द्वार
प्रांगण हो या हो मजदूर
किसान के स्वाभिमान
की बात पैरों से
रौंदे जाते हम।।
चाहत इतनी काम
मिले काम का न्यायोचित
दाम मिले जीवन जीने का
अवसर उचित सम्मान मिले।।
मेरी भी पीढ़ी अभिमान
से जीवन जीना सीखे
नैतिक मूल्यों के राष्ट्र में
मानव बन कर जिए।।
वैसे तो हर मानव मजदूर
श्रम कर्म की महिमा मर्यादा
मानव मजदूरों में जीना
सीखे ।।
अहंकार नहीं अभिमान नहीं
अधिकार के आयांम में करते
पुकार शंखनाद हम!!
चाहते मजदूरों की
खुशहाली सम्मान हम।।
कुदरत और कायनात
उठती लहरे सागर से
तहस नहस करता
तूफान जैसे युग
मानव का अहंकार।।
चाहता लाख बचना
बच नही पाता होता
निश्चय होता विनाश
संघार ।।
कुदरत का कहर
सुनामी चक्रवात
तूफान!!
मानव विज्ञान करता
लाख प्रयास रोक नही
पाता ज्ञात हानि नुकसान।।
सुनामी का पता नही
कब आएगी विकट
विकराल विज्ञान
चाँद मंगल पर पहुँचना
सुलभ आसान!!
नही रोक पाया अब तक
कहर कुदरत का विज्ञान।।
कुदरत क्या है?
कुदरत ताकत की क्या है?
क्या है कुदरत की मार?
अब तक संमझ रहा है
युग मानव विज्ञान।।
दिखता नही समझ नही
पाता युग मानव संक्रमण
संक्रामक कुदरत का कहर
कोरोना काल।।
टुटा युग मानव का
अहंकार बिखर गयी
संस्कृति बिगड़ गए
चाल अभिमान ।।
रिश्तों से रिश्ते दूर
मुश्किल साँसों का
संचार ।।
पास नही आता कोई
चाहे प्रियतमा हो या प्यार
हुश्न इश्क मोहब्बत जज्बा
जुनून समाप्त।।
अरबो की दौलत लाखो
कारिन्दों की फौज बेकार
तड़फ तड़फ कर मरता युग
मानव लावारिस सा पड़ा
शमशान कब्रिस्तान।।
नज़र बंद कैद कर
दिया घर मे ही युग
खोज रहा अपना
अपराध।।
कुदरत का कानून अलग
कुदरत का न्याय फैसला
अलग कुदरत का कहर
सजा काटती कायनात।।
सड़के सुनी हाट बाजार
बीरान गलियां मोहल्ले भी
लगते जैसे बसते नही यहां
इंसान।।
कोरोना का रोना कुदरत
की नाराजगी का अपना
अलग अंदाज बेबस लाचार
दे रहे सभी एक दूजे को
अपने अपने नुक्से उपचार।।
रिम झिम सावन की फुहार
प्रेम प्यार हुश्न इश्क मोहब्बत
दुनियां में इज़हार कुदरत की
इनायत उपहार।।
सूखा कही बाढ़ प्यास से
मरता कोई पानी कोई पानी
पी पी कर मरताअजब अजीब
करम किस्मत का संसार
अब बाजार!!
कभी सर्द की चांदनी
यौवन प्यार मोहब्बत की
खुशियों का दीदार।।
शीत लहर ठंठ से मरता
इंसानवासंती वायर नव
कोपल कोमल किसलय
मधुमास!!
जलती ज्वाला सी गर्मी
मृत्यु काल कुदरत के
कायनात में सौगातों की
शान कहर रहम दो धार।।
कुदरत की दुनियां में
कुदरत का प्यार मिले
कुदरत के करिश्मे का
दुनियां को सौगात मिले।।
कुदरत का कहर ना
बरपे बरसे मिले कुदरत
का प्यार सौगात!!
कुदरत से प्यार करो
बेजा कुदरत ना हो
नाराज!!
समझो कुदरत का
विज्ञान ना होगा
कुदरत का कहर
ना होंगे हैरान परेशान।।
खुशियों का पल परिवार
प्राणि प्रकृति परमेश्वर
ब्रह्मांड युग अवयव
निर्माण!!
प्राणि जीवन
परिवार समाज
प्रेम भाव भावना
रिश्ता समाज आधार!!
सुख दुख गम खुशी
मुस्कान रिश्तो की
दुनियां का अपना रीति
रिवाज!!
संस्कृति संस्कार
जन्म जीवन
लम्हा लम्हा साथ।।
माँ बाप से शुरू
रिश्ता समाज
माँ बाप से जीवन
शुरू ना जाने कितने
रिश्ते नातो का
आना जाना समाज।।
परिवार परस्पर
नेह स्नेह सामाजिक
नैतिक संबधों रिश्तो का
विचार व्यवहार ।।
घर एक मंदिर
भाव भावना की
दीवारे आस्था
विश्वाश बुनियाद।।
हर रिश्ता एक दुजे की
खातिर एक दूजे की
खुशियाँ सौगात।।
एक दूजे का
साथ हाथ
चाहे जो भी
स्थिति परिस्थिति
दुःख चुनौती
लम्हा लम्हा साथ।।
एक साथ जब
होते साथ खुशियों की
वारिस सौगात।।
माँ बाप दादी दादा
भाई बहन जाने
क्या क्या रिश्तो का
परिवार।।
एक साथ जब होते
परमेश्वर मुस्काता
देख अपनी दुनियां
का परिवार समाज।।
द्वेष दंम्भ गृणा बैर
नाही चाहता है ईश्वर
चाहत उसकी प्रेम करुणा
का संसार।।
भाव भावना की
अनुभूति अनुभव रिश्तो
खुशियों का परिवार
समाज प्राणि
प्रकृति ब्रह्मांड।।
पिता
पिता तपन अगन कि
तपती ज्वाला कि गर्मी हो
या हो वर्षा तूफ़ान!!
हाड़ कपाती सर्दी हो या
हो कोई ऋतु मौसम हालात!!
खुद का पेट भरा न भरा
औलाद भूखी कैसे रह सकती
माँ बाप के रहते कैसे?
सम्भव नहीँ अपनी प्रिय
सन्तानो कि खातिर ईश्वर
को कई दिया चुनौती
कई बार!!
सन्तानो कि सुख सुविधा
भरण पोषण कि खातिर
जो भी कर सकते थे बन
सकते थे बने जीवन का
सम्मान किया!!
मजदूर मजबूर मगरूर
भिखारी जुआरि बनना
स्वीकार किया बेटी बेटों
अपूर्ण इच्छा का
जीवन अस्वीकार किया!!
बच्चे हुए जवान सबके
अपने अपने अरमान सब
हुए पिता सन्तानो के जैसे
अतीत रहा हो पुकार!!
बहुओ का राज्य बेटों का
चलता हुकुम नहीँ बेबस
लाचार संतान सुख सुविधा
कि भरमार!!
माँ बाप कि देख रेख सेवा
भोजन जीवन कि खातिर
बेटी बेटों मेँ होती तकरार!!
बेटी बेटों कि द्वेष घृणा
प्रतिस्पर्धा मेँ माँ बाप
परेशान!!
बेटों कि पल प्रहर कीच कीच
झिग झिग अंत मेँ हुआ निर्णय
बड़का छोटका दोनों ही रखेंगे
छः छः माह माँ बाप!!
बाँट दिया माँ बाप को जैसे
खेती बारी जर ज्यादाद!!
जीवन कि संध्या बेला मेँ
जिनके लिए जीते मरते रहे
खुद का किया नहीँ ख्याल!!
कौड़ी कौड़ी जोड़ कर बेटी
बेटों कि शिक्षा दीक्षा और
किया शादी व्याह!!
ढलते जीवन, जीवन के होते
अवसान संध्या अंधकार मेँ
खुद कि संतान दीप चिराग
नें छोड़ दिया साथ!!
छः छः माह के हक हिस्से
मेँ भी अपमानित करते
संतान पोते को स्कूल
लाना पहुंचना साग भाजी बाजार!!
जैसे छः माह के लिए मुक्त मेँ
मिल गए माँ बाप नौकर रखवार!!
छः माह के भांजे मेँ भी माँ
बाप रख न सके संतान
बहुओं कि आशा उम्मीदों का
ही बेटों का परिवार!!
पोती पोतों का दादा दादी से
मोह माया अनुराग कि दुनियां
मेँ फंसे वर्तमान के दादा दादी
अतीत के माँ बाप!!
दोनों बेटों बेटी दामाद
बहुओं का अंतिम फैसला
माँ बाबू जी को बृद्धिआश्रम
कि नव युग सौगात!!
पता चला ज़ब बूढ़े
माँ बाप को बेटे भेज रहे है
उनको वृद्धाश्रम!
बोले बहुत हुआ बंद करो
बटवारा ख़र्चा माँ बाप!!
बृद्ध आश्रम भेजना भी
तुम लोंगो का स्वांग कल
वृद्धाश्रम के खर्चे बाँटोगे
फिर कुछ बाद हो जाएंगे
हम अनाथ!!
हम फुटबाल नहीँ
जीवन फूलबाल
खेलमैदान नहीँ!!
कभी छोटे बेटे का घर
कभी बड़े बेटे का घर
नहीं कोई अपना घर
संसार नहीँ!!
हो गए बूढ़े जैसे
ढेर कुढ़े अपनी ही
संताने जैसे माँ बाप
नहीँ!!
जीवन नहीँ खेल
फुटवाल ध्यान रखो
हम हैमाँ बाप!!
कितना आगे
बढ़ जाओ नहीँ
बना सकोगे हमें
फुटबाल!!
हम जन्म दाता तुम्हारे
नहीँ हैं फुटबाल!!
त्रिकोण जीवन क़े तेरह दिन
जन्म जीवन मृत्यु सुनहरे
त्रिकोण में तेरह दिन।।
कभी खुशियों की किरणों
की आभा से स्पंदित हृदय
प्रफुल्लित मन।।
भय भ्रम संसय में चलता
बीत रहा सुनहरे त्रिकोण
का तेरह दिन।।
गम आंसू खुशीमुस्कान
संग साथ मिलने और
बिछड़ने परिवार परम्परा
परिवेश परिस्थितियों के
सुनहरे त्रिकोण का पल
पहर दिवस संध्या में
तेरह दिन।।
सुनहरे त्रिकोण में प्रेम,
घृणा द्वेष दंभ युद्ध शांति
उपलब्धि अविनि अवनति
सुनहरे त्रिकोण में तेरह
दिन।।
करुणा सेवा त्याग तपस्या
छल छद्म पदम् पग
उद्देश्य अनुभूति ज्ञानवैराग्य
राग रागिनी सुनहरे त्रिकोण
में तेरह दिन।।
एक तीन का संग साथ
संयोग योग का चार
अभिव्यक्तिविचार
सुनहरे त्रिकोण में
तेरह दिन।।
अभ्युदय अवसान अद्भुत,
चर्मोत्कर्ष चमत्कार के दिन
अविरल अविराम लेता एक
दिन पूर्ण विराम।।
जन्म में बजते ढोल मृदंग
थाल शहनाई विरह वियोग
बसती और उजड़ती दुनियां
भाव भाष्य तेरहवीं की विदाई
सुनहरे त्रिकोण का तेरह दिन।।
काश तुम
काश तुम मेरी
ज़िंदगी में जो होते
ज़िंदगी से इतनी
शिकायत न होती।।
वफ़ा ज़िंदगी में
बेवफाई न होती
मोहब्बत के हम भी
मसीहा ही होते जिंदगी में
इतनी रुसवाई न होती।।
ख्वाहिसों कि चाहत
हकीकत की जिंदगी
इश्क कि इतनी दीवानगी
न होती ।।
जूनून जिंदगी का
मकसद कि मंजिल
तूफां कि मंजिलों से
इतनी शिकायत न होती।।
जिंदगी में दोस्त कम
दुश्मन बहुत दोस्तों से
शिकवा दुश्मनो कि इतनी
इनायत न होती।।
जज्बों कि जिंदगी
रिश्तों का जहाँ
रिश्तों में इतनी
कवायत न होती।।
नादा मोहब्बत निभाने का
वादा कशमकश कि
जिंदगी में कशिश
इबादत न होती।।
जिंदगी का सफर
आरजू की ख़ुशी
जिंदगी गम के
आंसुओ कि
सुराही न होती।।
जिंदगी ख़ुशी गम कि
साकी शराब जिंदगी
नशा गम जुदाई न होती।
छट जाएगा अंधेरा
छँट जाएगा अँधेरा
विश्वाश कीजिए
सूरज निकलने का
इंतज़ार कीजिये।।
छोड़िए मायूसी कदम
बढाईये मुश्किलें बहुत
लड़ते बढ़ते जाईये ।।
मंजिलो कि राह में
दुश्मन हैं बहुत
हौसलो हुनर हो
शास्त्र शत्र पराक्रम ही
पथ विजय बनाइये।।
रिश्तों के इस जहां में
ना धोखा खाइये
दोस्त दुश्मन में फर्क
फासला बनाइये।।
जिंदगी के हर कदम पे
वादे मुश्किलों में हिम्मत
हौसलों का चिराग जलाइए।।
छँट जाएगा अँधेरा
विश्वाश कीजिये
सूरज निकलने का
इंतज़ार कीजए।।
चिरागों की रौशनी में
वादों इरादों यादों
संग साथ चलते जाइए।।
मतलब के इस जहॉ में
दोस्त नहीं मिलते ईमान का
इंसान एक दोस्त बनाइये।।
जिंदगी के सफ़र में
दौर हैं तमाम जिंदगी के
हर दौर में मुस्कुराइए।।
छँट जाएगा अँधेरा
विश्वाश कीजिये सूरज
निकलने का इंतज़ार कीजए।।
रिश्तों से धोखा गैरों से
मौका जिंदगी के अजीब
अंदाज़ आजमाईये।।
ख़ुशी में आंसुओ का
रिवाज़ गम आंसुओ का
है जहाँ गम और ख़ुशी की
जिंदगी में सदा मुस्कुराइए।।
छंट जाता अँधेरा तो
टूटता ग़ुरूर उजाले
आईने में सच्चाई निभाइए।।
दिल आईना जरा सी
हरकत से टूटता बिखरता
दिल सच का साथ निभाइए।।
मोहब्बत है जिंदगी
जहर नफरत कि नहीं
नफरतों के नस्तरो से
फासला बनाइये।।
जिंदगी और जहाँ में
दल दल है बहुत जिंदगी के
दलदल से निकल कमल
सूरज के संग इतराइये।।
प्रिये
चाहत की मंजिल
जीवन की सौगात प्रिये
तेरे ही मिल जाने से
जीवन उद्धार प्रिये।।
स्वर संगीत दिल
धड़कन प्राण प्रिये
करम किस्मत की
राह प्रिये तेरे ही मिल
जाने से जीवन का
उद्धार प्रिये।।
बचपन शरारत
साथ प्रिये बारिश का
पानी कागज की कश्ती
हद हस्ती मौज मौसिकी
नाज़ प्रिये।।
तेरे संग लम्हा लम्हा
जन्नत की शान प्रिये
तेरे ही मिल जाने से
जीवन उद्धार प्रिये।।
नज़रों दूर चली जाती
जीवन हो जाता
वीरान प्रिये अंधेरों में
खो जाता जीवन
अंधकार प्रिये!!
भटकता इधर उधर
मकशद जीवन में
तेरे ही होने से
उजियार प्रिये
तेरे ही होने से
जीवन का उद्धार प्रिये।।
जीवन की आपा धापी में
गर थक जाता हार प्रिये
तेरे ही दामन जिंदगी में
छाँव प्रिये!!
तेरी ताकत गर्मी का
मैं धड़कन प्राण प्रिये
तेरे ही मिल जाने से
जीवन का जीवन
उद्धार प्रिये।।
मेरी जीवन की बगिया की
कली फूल गुल गुलशन
गुलजार प्रीये ।
खुशियाँ खुशबू साकी
सौक मधुशाला मधुपान प्रिये
तेरी मकसद मस्ती का
जीवन श्रृंगार प्रिये
तेरे ही होने से
जीवन उद्धार प्रिये।।
जीवन के लड़ते जंगो में
तेरा ही हो साथ प्रिये
जीवन की जीत हार में
तेरा ही साथ प्रिये ।
तेरे संग जीना तेरे
संग मरना जीवन
उद्धार प्रिये।।
जीवन का सत्कार प्रिये
जीवन का उत्साह प्रिये
जीवन का उत्थान प्रिये
जीवन का संबाद प्रिये
हो जीवन का उद्धार प्रिये।।
जीवन का अतीत
जीवन का हो आज प्रिये
जीवन की सच्चाई परछाई
शुभ सौभाग्य प्रिये।।
जीवन का उपकार प्रिये
जीवन का उद्धार प्रिये।।
यदि याद काश से परे
पास प्रिये जननी जीवन के
साथ संस्कृति संस्कार प्रिये
जीवन का उद्धार प्रिये।।
प्रेयसी जीवन मूल्यों
मकसद उद्धेश्यों पथ
पुरुषार्थ प्यार प्रिये!!
जीवन का सत्य
सत्यार्थ सार प्रिये
जीवन का उद्धार प्रिये।।
चाहत कि ऊँचाई
चाहत की ऊंचाई को
बाजार नहीं बनने देते
दिल सांसों धड़कन की
गहराई में ही रहने देते !!
नादा हैं वो जो दुनियां को
नादान समझते रहते हैं
शायद उनको मालूम नहीं
लम्हा लम्हा दुनियां के
रंग बदलते है!!
लम्हा लम्हा रंग
बदलती दुनियां में
नियत और ईमान
बदलते रहते है।।
दिलोँ का दिल से
रिश्ता ही नहीं,
रिश्तों के अब व्यापार
भी होते रहते हैं।।
रिश्तों के बाज़ार हैं
अब रिश्तों के बाज़ारो में
रिश्तों के व्यपार भी
सजते रहते हैं !।
रिश्तों की कीमत
मौका,और मतलब
रिश्तों के बाज़ारों की
दुनियां में अक्सर रिश्ते,
रिश्तों की खातिर
शर्मशार नीलाम ही
होते रहते हैं !।
दुनिआ की भीड़ में भी
इंन्सा तंन्हा खुद में
खोया -खोया खुद को
खोजता भटकता
दुनियां की भीड़ अक्सर
नफ़रत की जंगो के
मैदान बनते रहते है !!
मतलब की नफ़रत
जंगो में इंन्सा एक
दूजे का कातिल लहू की
स्याही की इबारत तारीख
बनाते रहते हैं !!
कभी परछाई भी
ऊंचाई दुनियां छू
लेने का पागलपन!!
कभी ऊंचाई की
तनहाई छलकते
आंसू जवा जज्बे के
पैमाने से छलकते
गुरूर सुरूर दुनियां को
बतलाया करते हैं !!
तंन्हा इंन्सा की तन्हाई
उसकी परछाई की
ऊंचाई तन्हाई के
आंसू ख्वाबों अरमाँ के
मिलने और बिछड़ने का
खुद हाल बयां ही
करते रहते है।।
योग
योग से निरोग
योग से शक्ति भोग
योग मार्ग बैराग्य मोक्ष
योग अनुशासन आसान
योग कर्म धर्म मर्म महात्म्य।।
योग संयम जीवन
संकल्प योग आत्म बल
योग अन्तर्मन बैभव
योग नित्य निरंतर
योग व्यधि वध अंत।।
कोरोना उन्नीस संक्रमण
योग योग्य साथ हथियार
योग से स्वस्थ प्रसन्न मन
ना बीमारी ना बीमार।।
योग आहार प्रत्याहार
आचार विचार व्यवहार
अक्षुण अक्षय जीवन प्रवाह।।
कोविड उन्नीस में महत्वपूर्ण
संक्रमण से लड़ने का सत्य
सनातन सार्थक प्रहार योग से
बढ़ती शक्ति रोग विषाणु जाते हार।।
कोरोना उन्नीस का काल
योग प्रभाव से रोगों से लड़ने
बढ़ती शक्ति कोरोना आता
नही पास।।
योग कोरोना उन्नीस का
उपचार नही मूल समाधान
ज्यादा नही तो कम से कम
मिनट बीस तीस ही प्रतिदिन
पर्याप्त!!
योग से जीवन मे
कहावत आम के आम
गुठलीयो के दाम चरितार्थ।।
जीवन यौवन दामन की
क्षमता शक्ति अपरम्पार।।
मकर
मौसम ने बदली करवट
धरा कि जैसे अंगडाई।।
ठंढक ठिठुरन से काँपते
जीवन ने है राहत पाई !!
दक्षिणायन से उत्तरायण सूर्य
खुशियों की राह दिखाई ।।
संवृद्धि किसान घर
खुशियों की सौगात है लाई !!
मिठास गन्ने कि गुड़ शक्कर
गावों की खुशहाली
गिद्दा भांगडा का पंजाब
लोहडी है लाई !!
बृषभ पूजा कदली पत्ता
तंदुल श्वेत खट्टा मीठा
परिश्रम स्वाद कन्नड़
तमिल तेलगु मलयालम
पोंगल भरत भारती
संस्कृति शितलताई।।
शुभ सूर्य पूरब का
कर्म पराक्रम परिणाम
संध्या और आराम विराम ।।
सपनो का सौदागर दिनकर
दिवाकर का पुनः नव प्रभात !!
लोहित की कलरव करती
धारा धरातल कि लालिमा।।
सूर्य जीवन में शौर्य प्रवाहित
रक्त संचार व्यवहार !!
पूर्वोत्तर का सूरज मानव
मानवता का उमंग उल्लास
विहु विश्वाश !!
विविध धर्म सांस्कृतियों का
भारत प्यारा देश महान।।
मौसम ऋतुएँ पर्वत मालाएं
सागर झील प्रकृति परिवेश
ईश्वर यहाँ बसाएं !!
पृथ्वी का स्वर्ग देव भी
आते यहॉँ कुम्भ अमर
अमृत कर्म मोक्ष स्नान
जीवन सच्चाई ।।
गुरुओं का परम प्रकाश
उपदेश सुनाएँ तीर्थ और
त्योहारों में प्राणि जीवन
महत्व बताएं !!
आसमान में रंग बिरंगी
संस्कृति संस्कार आशाओ की
उड़ान का परचम लहरायें ।।
धन्य धरोहर मां भारती
मूल्यों का राष्ट्र समाज
अखिल ब्रह्मांड में भारत
कि अलख जगाएं !!
मातृ भूमि
जन गण मन मैं गाता हूँ
जय श्री राम सुनाता हूँ ।।
गणतंत्र राष्ट्र भारत मे
राम राज्य जगाता हूँ ।।
त्रेता राम राज्य आदर्श
द्वारिका द्वापर उत्कर्ष।
समातृ भूमि
जन गण मन मैं गाता हूँ
जय श्री राम सुनाता हूँ ।।
गणतंत्र राष्ट्र भारत मे
राम राज्य जगाता हूँ ।।
त्रेता राम राज्य आदर्श
द्वारिका द्वापर उत्कर्ष
उमंग बताता हूँ।।
सत्य सनातन स्वर
साम्राज्य तिरंगा मैं
लहराता हूँ।।
मुगल फिरंगी पहचान
परतंत्रता मकड़ जाल
मुक्ति संघर्ष का रक्त तिलक
महावर मैं लगाता हूँ।।
माँ भारती कि स्वतंत्रता का
उल्लास उत्साह नव प्रभात
मैं गाता हूं।।
जय भवानी जगदम्ब शिवा
मेवाड़ प्रताप मैं गाता हूं ।।
मिट गए मिटाने वाले
आंख दिखाने वाले
भारत का स्वर्णिम अतीत
इतिहास भविष्य मैं गाता हूँ।।
अंत परतंत्रता तमस
भारत भाग्य का नव उदय
उदित सूर्य नव उजियार
जलाता हूँ।।
जननी जन्म भूमि
स्वर्ग से सुंदर
वर्षो कि परतंत्रता
राम जन्म भूमि यज्ञ
अनुष्ठान का परचम मैं
लहराता हूँ।।
जय हिंद जय भारत
जय जय जय गणतंत्र राष्ट्र
जीवन राग दोहराता हूं।।
हर हर गंगे
कठिन भगीरथ तप
वरदान तुम्हे पृथ्वी पर
जाने का ,रोके कौन वेग
तुम्हारा ।।
शिव शंकर कि अर्घ
आराधना भगीरथ कि
करुण याचना ।।
भोले कि जटा में
स्थिर वेग तुम्हारा
जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष
दशमी तिथि धरती पर
उदय तुम्हारा।।
गोमुख से उद्गम सागर से
मीलती गांगा सागर
सागर अन्तर्मन ,देव भूमि
पग प्रथम तुम्हारा।।
हरिद्वार में हरि कि पैड़ी
प्रयाग में संगम यमुना
सरस्वती संग मिलन
तुम्हारा।।
काशी में विशेश्वर
अभिषेक साठ हजार
सगर पुत्रो का मोक्ष
संसय भय समाप्त
करती मोक्षदायनी
नाम तुम्हारा।।
सगर पुत्रो के तारन को
ही धरा धन्य पर पग तू
धरती गांगा मईया तेरा
अवनि आना नर पर
उपकार तुम्हारा।।
तेरा पावन तट साध्य
साधना तप तपसी
बसेरा धर्म मर्म कर्म
मार्ग तूं ,तट तुम्हारा।।
माताओं में श्रेष्ठ मईया तू
संतानों का तू हरती पाप क्लेश
सांस प्राण कि काया जीवन को
आशीर्वाद तुम्हारा।।
सांस प्राण बिन काया कर्मो का
अंत तेरा तट, मरणकर्णिका
मोक्ष भूमि अस्थि अंत मे तेरे ही
पावन जल में पाती सद्गति नर कि
अंतिम इच्छा नारायण का कार्य
तुम्हारा।।
भृगु तपोस्थली दरदर
मुनि का ददरी मेला
हरिहर क्षेत्र सोनपुर
जन मन का मंगल मेला।।
सारे तीरथ सत्य
साकार तभी, गंगा सागर
स्नान मिले ,हिरयाली
खुशहाली तेरा
आशीर्वाद मिले तुम्हारा।।
जय गंगे माता निश दिन
जो तुझे धाता सुख संपत्ति पाता
मईया गंगे कि आरती जो गाता
जीवन चक्र जन्म मृत्यु बंधन से
मुक्त हो जाता युग कल्याण ही
रिश्ता नाता तुम्हारा।।
निर्मल निर्झर अविरल निश्चल
कल कल कलरव नित्य निरंतर
धर्म जाती पाती नही जानता
पण्डित मुल्ला पादरी रागी भिक्षु
सबकी प्यारी गंगा मीईया तेरा युग
प्राणि से नाता।।
आदि शक्ति अम्बे जगदम्बे
हे देवी माँ
हे देवी माँ
तू भय भव भंजक
जगत कल्याणी है ●
दुष्टो की दुर्गा काली
भक्तो की रखवाली है ●
शक्ति दे मुझे अपनी
भक्ति का भाव भाग्य दे !!
माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का वर
वरदान दे!!
खोजता भटकता
सारे जहां में
आ गया हूँ
तेरे द्वार
तेरे ज्योति के
उजियार में !!
जिंदगी की दुस्वारिया
बहुत मैं आ गया
जिंदगी चाहतों
की राह में
तेरी ममता
आँचल की छाव में !!
माँ शारदेय
मैं आया तेरे
द्वार तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!
माँ शारदेय
मैं आया
तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!
माँ शारदेय
मैं आया
तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!
हो गया हो
गर कही
अपराध
तेरी सेवा पूजा
सत्कार में
तेरा ही वात्सल्य हूँ
कर छमा
दया का आशिर्बाद दे !!
तू तो जग
जननी सद्गुण ही
जानती तू
अपनी संतान में
मेरे दुर्गुणों को
सद्गुणों में निखार दे !!
माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते मैं
तेरी संतान सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!
लालसा बहुत
मानवीय स्वभाव मैं
तेरी भक्ति का भाव
शक्ति धन धान्य में ,
मेरी चाहत
सिर्फ तू रहे
आत्म प्रकाश में
आत्म के प्रकाश में !!
माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का
वर वरदान दे!!
साध्य साधना
आराधना मेरी
कर्म धर्म ज्ञान
के बैभव
बैराग्य में ,
माँ मेरी तू अपनी
ध्यान ज्ञान की भक्ति
की शक्ति का
मुझे वर दान दे !!
माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते मैं
तेरी संतान सुन
पुकार
मेरी कामना का वर
वरदान दे!!
तू भय भव
भंजक जग कल्याणी
दुष्टो की दुर्गा काली
भक्तो की रखवाली
शक्ति दे अपनी
भक्ति का भाव
भाग्य दे !!
माँ शारदेय
मैं आया तेरे द्वार
तुझे पुकारते
मैं तेरी संतान
सुन पुकार
मेरी कामना का वर
वरदान दे!!
पिता
जब तक थे साथ
नही हुआ दुःख का
एहसास लगता ही
नही था छूटेगा कभी
पिता आपका साथ।।
छोड़ गए दुनियां
संसार प्रत्यक्ष नही
काया में फिर भी
छाया बनकर रहते साथ।।
भौतिक जीवन मे
तन मन से खड़े
जैसे अडिग चट्टान
लगता आप है तो
चिंता किस बात की
हर कठिन घड़ी चुनौती में
मुस्कान समाधान पिता बाप
भगवान कभी देखा
नही देखा तुमको जाना
तुमको तुमसे ही मिलता
हर चाहत का वरदान।।
दुनियां के सारे क्लेश
कष्ट चुप हो सह जाते
आए नही कोई आंच संताप
पुत्र पर काल से लड़ जाते
पिता आप भगवान सत्यार्थ।।
वसुदेव तुम नारायण तुम
जीवन के पल प्रहर में रखा
जैसे ध्रुव प्रह्लाद श्री कृष्ण
गोविंद हरे मुरारे है नाथ
नारायण वासुदेव पिता गुरु
सखा हमारे सर्वेश्वर साक्षात।।
कुरुक्षेत्र कि अंतिम ललकार
देखो पार्थ
तुम जागे युग जागा
युग चेतना है लौटी।।
कुरुक्षेत्र कि समर भूमि
कटे मुंड काया से रक्तरंजित
लथपथ है लज्जित।।
कराहती अधर्म कि
अंतिम सांसे अभी शेष
महासमर का प्रेरक प्रणेता
सरोवर छिपा अवशेष।।
भीम प्रतिज्ञा का अंतिम
पल भी है आने वाला
अब भी है शेष।।
ललकारो कायर को
छुपा हुआ विष वेल
माधव केशव का संकेत।।
गूंजी ललकार गदा युद्ध
आमंत्रण की समझ न
सका अहंकारी का
अधर्म अहं अंत संदेश।।
जागृत हुआ सरोवर से
बाहर आया गदा युद्ध
आमंत्रण किया स्वीकार।।
महाभारत के महायुद्ध
कुरुक्षेत्र कि समर भूमि
में अंतिम युद्ध किया
शिरोधार्य।।
गांधारी का आदेश
वात्सल्य रूप में निर्वस्त्र
आओ पुत्र दुर्योधन माँ समक्ष
देती हूँ तुमको वज्र काया देह।।
माता का आदेश
दुर्योधन स्नान कर
चला मातु का
लेने आशीष।।
केशव ने देखा
जाना काल गति का
अंतर्मन वेष अट्टहास
कृष्णा का सुन
दुर्योधन स्तब्ध खड़ा
पूछा केशव ने
जा रहे नग्न हो
तुम कहाँ?
समझ न सका कृष्ण को
देख न पाया था
स्वंय की सभा मे
विराट स्वरूप युग का
सन्देश।।
बोला माता का है आदेश
कृष्णा कि मुस्कान बोले
करुणा निधान
माता के समक्ष क्या
तू नंगा जाएगा ?
नंगा नाच किया अपनो कि
मृत्यु पर कुरुक्षेत्र के महासमर में
अंत समय युद्ध के माता को
लज्जित करके तू क्या पायेगा?
शिकायतें बहुत है ऐ जिंदगी
जिंदगी के अंदाज़ बहुत
कभी रुलाती कभी हंसाती
सुख दुःख ख़ुशी गम के
मुकाम जिंदगी!!
विरह वियोग में रुलाती
श्रृंगार संयोग में मुस्कुराती
संवेदना कि वेदना का पल
प्रहर पथ विश्राम जिंदगी!!
मित्र संबंध सब अपने अपने
स्वार्थ अर्थ अर्थात के पग पग
पर संबंध शत्रु जैसे बहुत कठिन
एक सच्चा सम्बन्ध जिंदगी !!
प्रेम भी बिकता क्रेता विक्रेता
बाजार यहाँ जो भी चाहिए
उपलब्ध धन धान्य कि सूरज
चाँद चमक चाशनी जिंदगी!!
शिकायतें बहुत है ऐ जिंदगी
बंद मुट्ठी मैं आया था पसारे
हाथ जाऊँगा कुछ तो हासिल
कर पाऊं उदास ना कर जिंदगी!!
कुछ ऐसा कर पाऊ जमाने
को अपनी पैदाईस जिंदगी का
एहसास दे जाऊं कुछ तो
अवसर उपलब्धि दे जिंदगी!!
चाँद सिंदूरी
अवसान दिवस का होने वाला
लालिमा सूरज कि जैसे शाम
सिंदूरी चाँद भी निकलने को है
लिए पहचान सिंदूरी!!
दिवस भी शांत था जैसे तुफानो
से पहले कि ख़ामोशी ढलने लगी
रात लिए चमक चाँद लिए
निकला सिंदूरी!!
शांत दिवस कि हलचल हरकरत
लेकर आया चाँद सिंदूरी उड़ते
राफेल ब्रम्हहोस उगलते आग
ज्वाला अंगार सिंदूरी!!
शत्रु कि भूमि लथ पथ रक्तरंजीत
लाल जैसे बहता रक्त सिंदूरी!!
भारत के जाँबाज हिन्द कि सेना
बीर जवान रण भूमि के सिंह शेर
निकले जैसे शेर नें छोड़ा माद चल
पड़े चाँद के साथ बन चाँद
सिदूरी!!
चुटकी भर सिंदूर कि क़ीमत
हद हैसियत समझाया सिंदूर
कि शक्ति ताकत बतलाया!!
चाँद भी है कहता हिन्द कि
सेना का हर वीर जवान
चाँद कि नज़र नाज़ सिंदूरी!!
तुम्हारे लिए
फूल पंखुड़िया प्रेम बारिस
धड़कता दिल जिंदगी राहें
फुहार पवन पावन सुगंध
दिल दामन तुम्हारे लिए!!
नादा नाजुक कमसिन भोली
ख्वाब लाखो अरमान कोमल
कली मुस्कान सारी खूबसूरती
तुमसे तुम्हारे लिए!!
नयन कि तरस दरश विश्वास
घृणा घोर तमस का अवसान
उलझें प्रश्नों का उत्तर बेवाक
छट गए निराशा के बादल
प्रश्नफुटीत प्रेम प्रकाश!!
लम्हा लम्हा जिंदगी तुम्हारे लिए
हर ख़ुशी जिंदगी कि तुम्हारे लिए
जिंदगी के ख्वाब हकीकत आरजू
तुम्हारे लिए!!
हर सुबह नीद से जागू देख
चेहरा तेरा हर साम सिंदूरी
रात कि चांदनी तुम्हारे लिए
हर तराना जिंदगी का तुम्हारे
लिए!!
बारिस का इंतजार
प्रचण्ड सूरज उगलते आग,
तपिश मे जलते भुनाते लोग.
बादल वारिस वरखा कि.
लगाए आश!!
बहुत हुआ तपन अगन ताप,
जागो इंद्र जन जन कि पुकार.
घर हो या बाहर गर्मी झूलसन.
लू लपेट अंगार!!
जेठ नें ध्वस्त किए ग्रीष्म उत्कर्ष,
के अपने अतीत अंदाज़ अब तो.
जन वारिस वर्षा कि आश मे गाते
मेघ मल्हार!!
उमड़ घूमड़ बदरा भी जैसे
करता खेल हज़ार चला जाता
देकर कुछ बूंदो कि फुहार
जैसे जन मन राहत का करता
मेघ परिहास!!
वारिस के इंतज़ार में कट रहे
दिन रात हो रहे टोटके अनुष्ठान
रूठें इंद्र देवता को मनाने को हो
रहे पूजा पाठ!!
वारिस का इंतजार क्या हुआ
जैसे चकोर का चाँद का दीदार
पापीहे का सावन भादों का ख्वाब!!
जैसे दिन में खुली नज़रों का
हसीन हरियाली खुशहाली छमा
छम झमा झम सावन भादों कि
बदरा वर्षात का आभास!!
प्रेम और जीवन
जीवन अनमोल जीवन से ही
भाग्य भगवान भाव भोग प्रेम
घृणा द्वन्द नेह जीवन संबंध हैँ!!
जीवन से ही प्रेम घृणा
राग द्वेष शांति युद्ध बुद्धि
बौद्ध पल प्रहर काल क्लेश
कर्म धर्म शोध बोध है!!
जीवन से ही सम्बन्ध
स्नेह जीवन है तों प्रेम परमेश्वर
प्रेम में दीखता ईश्वर पल
प्रहर प्रभा प्रवाह ही सत्य
चलता जीवन महिमा महान है!!
प्रेम जीवन का सत्य
प्रेम जीवन का आधार
आलम्ब प्रेम जीवन का
अर्थ रंग भान!!
प्रेम में विरह वियोग
मिलन संयोग ऊर्जा
उत्सव उत्साह रोष
दोष विवाद प्रतिशोध
प्रारबद्ध परिवर्तन गणमान्य!!
प्रेम चेतना जाग्रति जागरण
वंदन अभिनन्दन चित्त चिंतन
चिता ज्वाला आग अंगार सत्कार
अभिप्राय अभिशाप जीवन
आशा आसमान है!!
प्रेम प्रसंग परिणाम अनुभव
अनुभूति आनंद जन्म जीवन
उद्देश्य पथ संकल्प बैभव मान
अभिमान भाव भोग सुख संसार
सत्यार्थ मान सम्मान!!
प्रेम अनुराग विराग संस्कृति
संस्कार अवनी आकाश
पराक्रम पुरुषार्थ क्रोध काम मद
शाम दाम दंड विधान!!
प्रेम निशा तमस अंधकार
प्रेम किरण विकिरण उजियार
प्रेम बंधन शक्ति भक्ति साहस
वेदना संवेदना ज्ञान बैराग्य
वरदान!!
जीवन प्रेम एक दूजे पूरक
एक दूजे बिन जन्म होता नहीं
सिद्ध सफल साध्य है यदा कदा
प्रेम में होता महा संग्राम है!!
प्रेम सागर कि गहराई आकाश
से ऊपर ऊँचाई प्रेम परमेश्वर
सत्य जीवन जन्मेजय युग नाम है!!
जीवन और प्रेम पूरक
प्रेम और जीवन चुननें का
आए काल कठिन दौर
जीवन ही प्रथम अनिवार्य
प्रेम तो मंजरी बौर!!
जीवन है प्रेम है जीवन
नहीं तो प्रेम अर्थ हीन है
प्रेम तो मिल जायेगा
टूटे सपने तारों को
संजो जाएगा!!
जीवन चला गया तो
काल वहीं ठहर जाएगा
अतीत इतिहास हो जायेगा
लोंगो के लिए भुला देने
वाला किस्सा बन जाएगा!!
प्रेम के प्रतिशोध में
जीवन का तिरस्कार
नहीं जीवन का प्रेम
शस्त्र शास्त्र से घायल
जीवन का त्याग नहीं!!
प्रेम में जीवन को
ठुकराना नहीं
प्रेम जीवन संबल
प्रेम ही जीवन
सार!!
जीवन अनमोल से प्रेम का
मोल जीवन है तो प्रेम है
परमार्थ है पराक्रम पुरुषार्थ है
जन्म जीवन मोक्ष मार्ग है!!
खुद से करना होगा बात
ईश्वर अंश जीव अविनाशी.
आत्मा ईश्वर बोध सत्य.
आत्मा निर्विकार निर्मल.
अविरल काल प्रवाह पर्याप्त!!
ध्यान पूजन आराधन.
ईश्वर वंदन आत्म संतुष्टि.
ईश्वर अभिनन्दन कहते है.
ईश्वर सब कुछ देख रहा.
ईश्वर कि दृष्टि कण कण में.
है व्याप्त!!
मानव मन वायु वेग सा
गतिमान कभी यहाँ कभी
वहां कल्पना परिकल्पना
अंवेषण अनुसन्धान चाह!!
योजना परियोजना संकल्प.
निर्माण आत्म चिंतन क्षमता.
शक्ति जोखिम परिणाम विचार!!
मानव मन मस्तीष्क विचारों से.
खुद से करना होगा बात ईश्वर
सब कुछ देख रहा है कण कण मे
है व्याप्त!!
ईश्वर सब देख रहा धर्म दर्शन
बात हर प्राणी जानता स्वंय
का पल प्रहर कार्य परिणाम
सही गलत का फैसला न्याय
खुद से करना होगा बात!!
बात करना होगा धरती और गगन से
अरमान उम्मीदों कि जिंदगी.
ख्वाहिश ख़्वाबों कि जिंदगी.
मोहब्बत नफ़रत जंग जिंदगी.
इम्तेहा इम्तेहान तोफा जिंदगी!!
औकात हसरत कि जिंदगी.
दिखाती नए अंदाज़ जिंदगी!!
हर मोड़ पर करती नए सवाल.
सवाल का लम्हा लम्हा जबाब.
खोजती जिंदगी!!
दायरे में बध सिमटती जिंदगी.
सिमटे दायरे को तोड़ अपने हद.
हस्ती का तूफ़ान है यह जिंदगी!!
हद हस्ती गर तय करना है.
खुद तो बात करना होगा.
धरती -गगन से!!
अवरोध पथ के लौह पत्थर.
तोड़ निरझर निकलना Sach.
चाहत कि मंजिल से करनी.
होंगी बात धरती -गगन से!!
अवकाश मस्ती
ग्रीष्म अवकाश
स्वच्छद बचपन
विद्यालय बस्ता
कितबा बोझ नहीं
खुशियाँ हज़ार!!
समर वाकेशन होम
वर्क का नहीं टेंशन
घूमना फिरना पार्क
दोस्तों के संग खेलना
कूदना बेहिसाब!!
गांव कि बगिया बाग
कच्चे पक्के आम
हरियाली से ढकी
अवनी बचपन
बाग बाग़!!
दिन बीतता पल
प्रहर नई खुशियों के
साथ मम्मी डैडी कि
डांट फटकार छाड़
दरकिनार!!
वाह वाह बचपन
क्या बात है बचपन
बचपन मे ग्रीष्म
अवकाश स्कूल
का झंझट समाप्त
खाते पीते मौज मनाते
दिन बीतते!!
माँ वीणा पाणी
महिमा न जाए बखानी
जय जय माँ वीणापाणि
तेरी कृपा का संसार।।
पंगु लांघे गिरि
कृपा तुम्हारी
मूक बने वाचाल
तूँ ही जीवन प्राण
जय जय माँ वीणापाणि
तू सृष्टि दृष्टि आधार।।
हंसारूढ़ पद्म विराजत
कर वीणा माल वेद पुराण
विग्रह माँ मोहे संसार
जय जय माँ वीणापाणि
तू ही जीवन संसार।।
माथे मुकुट विराजे
मुख मंडल तेज प्रकाश
अंधकार का उजियार
आत्म बुद्धि का साम्राज्य
जै जै माँ वीणापाणि
तेरी महिमा अपरंपार।।
वीणापाणि कि वीणा से
संस्कृति संस्कार झंकार
सम्यक अक्षर शब्द स्वर प्रवाह
मॉ वीणापाणि तू ही
जीवन साधना सार
जै जै माँ वीणापाणि
बल बुद्धि शक्ति का
आशीर्वाद ।।
जागृति चेतना संवाद
सत्य संचार सत्यार्थ
काल धरा धारा प्रभा
पल प्रहर
युग अक्षय
अक्षुण्ण का वरदान
जय जय माँ वीणापाणि
तेरी भक्ति जीवन गौरव
अभिमान।।
बसन्त के रंग
बहती शीतल मंद बयार
कोयल की कू कू
पवन कि खूशबू खास।।
खेतो मैं हरियाली
खुशहाली की झूमते
पीले सरसों के फूल
गेंहू की बाली।।
प्रत्येक प्रभात युग शौर्य
सूर्य विश्वाश मुस्कान।।
आम के बोैर की बान
मधुर मिठास की शान ।।
छट गया अंधियार
धुंध मुक्त आकाश।।
मुक्त पवन झोकों में
इठलाती बलखाती बृक्षों
कि डाली कि अपनी
धुन मुस्कान।।
युग उत्सव का आगमन
सतरंगी बहुरंगी कली फूल
मानव मानवता की बगिया
अभिमान सम्मान।।
राग रंग के पंख उमंग
बाग- बाग की डाल -डाल पे
तितली भौरो कलरव
मधुमास वसंत उल्लास।।
निर्मल निर्झर बहती
नित्य निरंतर नदिया झरने
सागर पर्वत अचल
अस्तित्व का मान ।।
जल जीवन का भान
सरोवर पंकज
प्राणी प्राण प्रकृति
महत्व का युग प्रथम शौर्य
अवाहन संस्कार ।।
खुशियों का पल परिवार
प्रकृति प्राणी परमेश्वर
युग ब्रह्माण्ड अवयव
निर्माण
जीवन परिवार समाज।।
प्रेम भाव भावना
रिश्ता समाज आधार
सुख दुख गम खुशी
मुस्कान।।
दुनियां रिश्तों का
अपना रीति रिवाज
संस्कृति संस्कार
जन्म जीवन
पल प्रहर साथ।।
माँ बाप से
शुरू रिश्ता समाज
माँ बाप से सफर सुरु
ना जाने कितने ही
रिश्ते नातो का
आना जाना समाज।।
परिवार परस्पर
नेह स्नेह सामाजिक
नैतिक संबंधों रिश्ता
विचार व्यवहार ।।
घर एक मंदिर
भाव भावना दीवार
आस्था विश्वाश बुनियाद।।
हर रिश्ता एक
दुजे की खातिर
एक दूजे की
खुशियाँ सौगात।।
एक दूजे का
साथ हाथ
चाहे जो भी
स्थिति परिस्थिति
दुःख चुनौती
पल पल साथ।।
एक साथ जब
होते साथ
खुशियों की
वारिस सौगात।।
माँ बाप दादी दादा
भाई बहन जाने
क्या क्या रिश्तो का
परिवार।।
साथ जब होते
परमेश्वर मुस्काता
देख अपनी दुनियां
का परिवार समाज।।
द्वेष दंम्भ गृणा बैर
नाही चाहता ईश्वर
चाहत उसकी प्रेम
करुणा का संसार।।
भाव भावना
अनुभव अनुभूति
रिश्तो खुशियों का
परिवार समाज
प्राणि प्रकृति ब्रह्मांड।।
जै जै जै अम्बे
जै जै अम्बे मातु भवानी
माँ दुर्गा जग कल्याणी!!
जै जै अम्बे मातु भवानी
माँ दुर्गा जग कल्याणी!!
मनोकामना कि माता
ममता का आँचल तेरा
वात्सल्य कि मुरत
महिमा माता रानी!!
जै जै अम्बे मातु भवानी
माँ दुर्गा जग कल्याणी!!
दुष्ट विनाशक भय भव
भंजक माता शेरों वाली!!
जै जै अम्बे मातु भवानी
माँ दुर्गा जग कल्याणी!!
सूर्योदय संध्या तक तेरी
सेवा भक्ति जागरण आराधना
देवी तू देवों कि शक्ति
जै जै माता जोता वाली!!
जै जै अम्बे मातु भवानी
माँ दुर्गा जग कल्याणी!!
सृष्टि रक्षक सकल मनोरथ
पूरन करने वाली सुख शांति
सम्मान माता लक्ष्मी रानी!!
जै जै अम्बे मातु भवानी
माँ दुर्गा जग कल्याणी!!
माँ मै क्या जानू भगवान
मै क्या जानू भगवान
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
मेरी शक्ति आशीर्वाद तेरा
आँचल जगत संसार!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
तेरी ममता कवच है मेरा
अभिमान!
आँख दिखाए कोई
मुझको बन जाती
तू काल!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
मै तेरी सृष्टि तेरी
दृष्टि आशा अभिलाषा
लाड़ प्यार दुलार!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही भगवान!!
जन्म दायनी जीवन दायी
तू ही पालन हार पथ जीवन
उजियार!!
तेरी आँखों का मै तारा
कहती मुझको सूरज चाँद
सांसे धड़कन मेरी तुझसे
रिश्तो कि डोरी जान!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान? खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
माँ मै क्या जानू भगवान
मै क्या जानू भगवान
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
मेरी शक्ति आशीर्वाद तेरा
आँचल जगत संसार!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
तेरी ममता कवच है मेरा
अभिमान!
आँख दिखाए कोई
मुझको बन जाती
तू काल!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
मै तेरी सृष्टि तेरी
दृष्टि आशा अभिलाषा
लाड़ प्यार दुलार!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान?खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही भगवान!!
जन्म दायनी जीवन दायी
तू ही पालन हार पथ जीवन
उजियार!!
तेरी आँखों का मै तारा
कहती मुझको सूरज चाँद
सांसे धड़कन मेरी तुझसे
रिश्तो कि डोरी जान!!
मै क्या जानू भगवान?
माँ मै क्या जानू क्या
भगवान? खुद क़ो तुझमे
देखू तू ही मेरी भगवान!!
सिद्धार्थ से बुद्ध सत्यार्थ
शांति अहिंसा कायर
आभूषण नहीं शौर्य धैर्य
धर्म का गौरव ज्ञान!!
परम तत्व परमात्मा
आत्मा अवलोकन भान!
सिद्धार्थ जिज्ञासा
जीवन क्या है?
सत्य क्या?
परमात्मा क्या?
बोध शोध यज्ञ
अनुष्ठान!!
सुख बैभव भोग विलास
राज पाठ शक्ति सात्ता
भर्या पुत्र माता पिता
परिवार महानिशा घोर
अंधकारमें त्याग!!
सूर्योदय प्रश्नफुटन
संग आत्म अंधकार
महानिशां त्यागअंतर्मन
वरण बैराग्य!!
राजगीर वर्ष तीन
तमस प्रकाश ध्यान
साधना अनुसन्धान!!
उद्देश्य सत्य खोज
राजगीर मात्र पढ़ाव
बोध गया तीर्थ पुरातन
मोक्ष मार्ग सत्यार्थ!!
चक्र जीवन से मुक्ति
काल समय धरा धारा से
मुक्त प्राण प्रयोजन
अभिप्राय!!
तेरह वर्षो कठिन तप
ज्ञान योग त्याग जन्म
जीवन सच्चाई खोज
यथार्थ!!
परम सत्य आत्म बोध
मुक्त भोग सिद्धार्थ
बुद्ध युग भाग्य भगवान
गौरव महिमा गरिमा मान!!
शांति अहिंसा त्याग तप
ज्ञान बैराग्य जन्म जीवन
सिद्धार्थ आत्म परमयात्रा
परमात्मा युग परमार्थ!!
स्वर साधना
ईश्वर अवतार
शांति अहिसा
शौर्य ओज तेज
यशस्वी तेजश्वी
प्रेम करुणा
गागर सागर
युग चेतना
संस्कृति जाग्रति
संस्कार!!
प्रेम और जीवन
जीवन अनमोल जीवन से ही
भाग्य भगवान भाव भोग प्रेम
घृणा द्वन्द नेह जीवन संबंध हैँ!!
जीवन से ही प्रेम घृणा
राग द्वेष शांति युद्ध बुद्धि
बौद्ध पल प्रहर काल क्लेश
कर्म धर्म शोध बोध है!!
जीवन से ही सम्बन्ध
स्नेह जीवन है तों प्रेम परमेश्वर
प्रेम में दीखता ईश्वर पल
प्रहर प्रभा प्रवाह ही सत्य
चलता जीवन महिमा महान है!!
प्रेम जीवन का सत्य
प्रेम जीवन का आधार
आलम्ब प्रेम जीवन का
अर्थ रंग भान!!
प्रेम में विरह वियोग
मिलन संयोग ऊर्जा
उत्सव उत्साह रोष
दोष विवाद प्रतिशोध
प्रारबद्ध परिवर्तन गणमान्य!!
प्रेम चेतना जाग्रति जागरण
वंदन अभिनन्दन चित्त चिंतन
चिता ज्वाला आग अंगार सत्कार
अभिप्राय अभिशाप जीवन
आशा आसमान है!!
प्रेम प्रसंग परिणाम अनुभव
अनुभूति आनंद जन्म जीवन
उद्देश्य पथ संकल्प बैभव मान
अभिमान भाव भोग सुख संसार
सत्यार्थ मान सम्मान!!
प्रेम अनुराग विराग संस्कृति
संस्कार अवनी आकाश
पराक्रम पुरुषार्थ क्रोध काम मद
शाम दाम दंड विधान!!
प्रेम निशा तमस अंधकार
प्रेम किरण विकिरण उजियार
प्रेम बंधन शक्ति भक्ति साहस
वेदना संवेदना ज्ञान बैराग्य
वरदान!!
जीवन प्रेम एक दूजे पूरक
एक दूजे बिन जन्म होता नहीं
सिद्ध सफल साध्य है यदा कदा
प्रेम में होता महा संग्राम है!!
प्रेम सागर कि गहराई आकाश
से ऊपर ऊँचाई प्रेम परमेश्वर
सत्य जीवन जन्मेजय युग नाम है!!
जीवन और प्रेम पूरक
प्रेम और जीवन चुननें का
आए काल कठिन दौर
जीवन ही प्रथम अनिवार्य
प्रेम तो मंजरी बौर!!
जीवन है प्रेम है जीवन
नहीं तो प्रेम अर्थ हीन है
प्रेम तो मिल जायेगा
टूटे सपने तारों को
संजो जाएगा!!
जीवन चला गया तो
काल वहीं ठहर जाएगा
अतीत इतिहास हो जायेगा
लोंगो के लिए भुला देने
वाला किस्सा बन जाएगा!!
प्रेम के प्रतिशोध में
जीवन का तिरस्कार
नहीं जीवन का प्रेम
शस्त्र शास्त्र से घायल
जीवन का त्याग नहीं!!
प्रेम में जीवन को
ठुकराना नहीं
प्रेम जीवन संबल
प्रेम ही जीवन
सार!!
जीवन अनमोल से प्रेम का
मोल जीवन है तो प्रेम है
परमार्थ है पराक्रम पुरुषार्थ है
जन्म जीवन मोक्ष मार्ग है!!
मोक्ष कि चाह
जिंदगी गुजर गयी दौड़ते भागते
बचपन खेल खिलौने मौज मस्ती
युवा ओज तेज निखारने में
शिक्षा दीक्षा परीक्षा में बीता!!
जवानी जोश जज्बे सागई विवाह
बीबी शौहर कि नोक झोंक पीढ़ी
घर परिवार आशा उम्मीद विश्वास में बीता!!
बचपन के माँ बाप जवान बूढ़े
सुनी आँखे नजर के नूर औलाद
के सहारे उनकी सेवा आशीर्वाद
अवसान के निर्वाह में बीता!!
खुद हो गए बुजुर्ग सुनी नजरें
अधूरे अरमान लिए चल दिए
चार कंधो पर कब्रिस्तान शमशान
में बीता!!
कब्र इंतजार कयामत के दिन
खुदा आएगा जन्नत दोजख या
इंसानी रूह दे जायेगा आस
आसमान जज्बा जमीन पर बीता!!
चिता में जल आत्मा भटकती
वो दिन भी आएगा ज़ब जन्म
जीवन के काल चक से मुक्त हो
जायेगा चाहत कि राह में बीता!!
जिन्दा दिल
दिल धड़कता सांस चलती है
दिल कि हरकत से जिंदगी
मचलती है जिन्दा दिल इंसान
जिन्दा दिल धड़कन सांस!!
जिन्दा दिल ही जिंदगी
हैसियत हद पहचान सम्मान
मुस्कान जिन्दा दिल इंसान
इंसानियत का खुदा भगवान!!
जिन्दा दिल इंसान जैसे
खुदा भगवान मुर्दा दिल
खाक जिंदगी गुमनाम
नफ़रत तोहमत का नाम!!
दिल दर्पण आइना आवाज
आहट से भी टूट कर टुकड़े
हज़ार लाख विखर जाता
कोशिशे तमाम भी नाकाम
दिल लौट नहीं आता!!
टूटे बिखरे हज़ार लाख टुकड़ो से
जिन्दा दिल मुस्कुराता सुख दुख
ख़ुशी गम का रिश्ता नाता जिन्दा
दिल जज्बे जज्बात वाक्या वास्ता!!
यादें
जीवन चलता जाता
पल प्रहर आगे बढ़ता
पग पथ पीछे नहीं
आगे बढ़ता जाता!!
काल समय अतीत वर्तमान
धरोहर जीवन का पथ प्रदर्शक
यादें लाभ हानि ज्ञान वैराग्य
भाग्य भगवान आइना!!
यादें धरोहर धन्य रखती
चैतन्य उद्देश्य पथ पग
उत्साह ऊर्जा अग्रिम पग
सामना!!
यादें दृष्टि दिशा दृष्टिकोण मर्म
कर्म धर्म सम्मान ज्ञान योग
कर्तव्य मनोकामना सफल
सिद्ध भावना!!
छाँव के साथ
परछाई अपनी छाँव चलती
साथ साथ ऊँचाई तन्हाई
परछाई मुस्कान भीड़ साथ!!
पीपल कि छाँव अपना गांव
बचपन शरारत याद साथ
चाल चरित्र चेहरा आचरण
संस्कृति संस्कार छाँव साथ!!
व्यक्तित्व विराटता कि छाँव
व्यक्ति विशेष कि परछाई
पहचान सदा साथ साथ!!
छाँव शीतल सौम्य सुखदायी
जीवन साथ यादो और विचार
भाव प्रभा प्रवाह जीवन बाद भी
छाँव नाम साथ!!
माँ कि ममता आँचल बापू के
ऊँचे कंधे सिंघासन बंधु वांधव
सम्बन्ध कुटुंब नेह स्नेह सम्मान
छाँव जन्म जीवन राष्ट्र सत्य छाँव साथ!!
प्रभु श्री राम आए है
प्रफुल्लित भाई भरत
सुमित्रा नंदन साथ
हनुमान आए है!!
अंगद नल नील
रिछ बानर भालू
मंत्री बृद्ध जमवंत
आए है!!
पदुका पूजत बीते
चौदह वर्ष अवध के
नर नारी के प्यारे
कौशल्या कैक़ेई
दुलारे साकेत
हंस सूर्य वंश
अभिमान प्रभु
राम आए है!!
विश्व है अभिभूत
प्रभु आगमन पर
अयोध्या राम राज्य
मानवता समाज
सनातन मान आए है!!
अयोध्या राम आए है
हर प्राणी ने प्राण जैसे
पाए है!!
प्रसन्न है मानवता
विश्व है अचरज अभिभूत
जन्म जैसे हो दोबारा
भाग्य जागे है!!
अयोद्धा संजी संवरी
स्वर्ग जैसी लगती
विश्व अभिभूत अवनी
आकाश पाताल दसों
दिशाओं ब्राह्मण मे
छा जाने पर मधुर
मनवता मुस्कान आए है!!
कुबड़ी मंथरा उद्धारक
गुहा के मित्र भीलनी
सबरी के मान आए है
मानव स्वरूप प्रभु
परमेश्वर श्री राम आए है!!
सूर्य वंश साकेत सरयू
तट पावन कोशलाधीश
विश्व मानवता सत्कार
आए है!!
नगर के चहु ओर
तोरण द्वार बजते
ढ़ोल मजीरे झाल
जन जीवन सार
आए है!!
नव जीवन उत्सव
उत्साह कौशल्या
कैकई सुमित्रा के
दुलारे अवध पति
श्री राम आए है!!
मेवाड़ मुकुट प्रताप
युग अभिमान
मानवता स्वाभिमान.
पल प्रहर मूल्यों महान
संग्राम गर्जना मात्र से
कंपन भूचाल प्रताप!!
क्रान्ति की चिंगारी
ज्वाला अंगार.
हुकार कराल
विकट विकराल
पूर्ण पराक्रम पुरुषार्थ
महाराणा प्रताप!!
भय मुक्त निर्भय
उन्मुक्त राष्ट्र प्रेम
स्वन्त्रता चेतना गर्जना
जागृति गूंज का गगन
भेदी अनुगूँज भाव
अंदाज़ प्रताप!!
भाग्य भगवान् की
आत्म सत्ता सत्य
सत्यार्थ बोध परमार्थ
मतवाला धुन ध्येय
ध्यान का निराला
मेवाड़ मुकुट प्रताप!!
पथ पथिक
चुनौती वर्तमान
भविष्य का इतिहास
निर्माण का काल
कलेवर वीरता
दृढ़ता का प्रबल
प्रवाह प्रताप!!
निराशा तोड़ता
अंधेरों को चिरता
कायरता ललकार
परम प्रखर प्रकाश!!
साहस का सत्कार
शौर्य का पुरस्कार
युग की दिशा
दृष्टि का विश्वास
हृदय में हुक गुलामी
वेदना की आंधी
अस्मत अस्तित्व की
पुकार महाराणा मेवाड़!!
मूक दासता की
छटपटाहट ईश्वर
आत्मशक्ति उजियार
अवसान तमस
ओज तेज जीवेत
जागृतम का हुंकार
महाराणा प्रताप!!
मुर्ख विद्वान में अंतर
मुर्ख पर उपदेश कुशल
बहुतेरे का अनुगामी
आचरण में बेमानी!!
कथनी करनी में भेद
नहीं करता विद्वान
शांत चित्त अनुगामी!!
जिस डाल पर बैठाता
काटता स्वंय उसी को
मुर्ख शैतानी!!
विद्वान पैधे बृक्ष लगता
छाया फल अन्य अनंत
लाभ का विश्व मनवता
अनुगामी!!
मुर्ख बोलता बहुत
तर्क कुतर्क के साक्ष्य
प्रेषित करता अनेक
धूर्त धूर्तता भाग्य भागी!!
विद्वान सुनता सबकी
शांत भाव से उचित
उत्तर प्रतिउत्तर का
औचित्य शास्त्र प्रवाही!!
मुर्ख विद्वान में अंतर
मात्र इतना मुर्ख स्वंय
ब्रह्माण्ड नियंता ग्रहण
ग्राही!!
विद्वान ब्रह्माण्ड ब्रह्म
ईश्वर परमेश्वर पोषक
पालक प्राणी प्राण वेदना
संवेदना का सानी!!
आनंद कि खोज
आनंद अनुभूति है
आनंद अभिव्यक्ति है
आनंद आत्म संतुष्टि है
आनंद बोध बुद्धि है!!
जीवन आनंद अंवेषण
पथ अविरल अविराम
आनंद जीवन का शाश्वत
सत्य प्रमाण!!
धन धान्य सुत संतान
आनंद पथ संसार सत्य
यही है मिथ्या युग संसार!!
जन्म जीवन आना जाना
युग सृष्टि का सत्य सार
काल समय नित्य निरंतर
प्रक्रिया परम्परा व्यवहार!!
मिथ्या संसार में आनंद
अंवेषण चाह आनंद
अस्तित्व पथ दुरूह नहीं
आसान!!
प्राणी प्राण आत्मा ईश्वर
आनंद अंतरात्मा का बैराग
संतोष जो है उपलब्ध अनुभव
आनंद सत्यार्थ!!
भोग विलास काम कामना
दलदल व्याधि जीवन के
घुटन ईश्वर आत्म बोध का
अंत पढ़ाव!!
आनंद अंतर मन चेतना
जाग्रति संतुष्टि निर्विकार
आनंद निर्मल निर्मल
विवेक सत्यार्थ!!
जीवन का उद्देश्य आनंद
कि खोज आनंद मन बुद्धि
विकार बिलास रहित प्रभा
प्रकाश!!
आनंद जीवन कि दृष्टि
दिशा दृष्टिकोण छल प्रपंच
से मुक्त सौहार्द विनम्र
उजियार!!
आनंद कि अनुभव अनुभूति
खोज प्राप्ति जन्म जीवन से
मुक्ति मोक्ष ईश्वर अनुराग!!
पर्यावरण संरक्षण
प्रकृति प्राणी
ब्रह्माण्ड के दो
कारण कारक
आवयव अनिवार्य!!
जल जीवन वन जीवन
सृष्टि युग सांसे धड़कन
मौसम ऋतुए प्रकृति
प्राणी प्राण!!
परम्परा प्रक्रिया संतुलित
संसार ब्रह्माण्ड सिद्धांत
मौसम ऋतुए संसार!!
ताल तलैया झरना
झील पेड़ पौधे सागर
गागर आगर प्रणाम!!
हिम गलेसियर चट्टान
पर्वत मलाए हरित मृदा
मृदुल मलय पहाड़!!
प्रकृति पर्यावरण
पराक्रम पौधे बृक्ष
अवनी आकाश
मौसम ऋतुए शस्त्र
शास्त्र!!
विलुप्त हो रहे है प्राणी
परिवार मित्र प्रकृति
पर्यावरण पोषक प्राणी
विशेष कर मानव
शोषण से पराभव
हो रहे समाप्त!!
प्रकृति पर्यावरण
बचाओ दुश्मन
दूषण प्रदूषण भगाओ!!
बूँद बूँद जल संरक्षण
मानव जीवन
बृक्ष संवर्धन जैसा!!
पौधे बृक्ष वन उपवन
वन जीवन सत्यार्थ जैसा!!
अंधा धुंध विकास कि दौड़
विनाश आमंत्रण कि होड़!!
प्रकृति प्राणी विनाश
ह्रास परम्परा करना होगा
समाप्त!!
प्रकृति प्राणी
परमेश्वर को होना
होगा साथ!!
ध्वनि वायु अवनी
आकाश प्रदूषण से
मुक्त पृथ्वी कि वेदना
मिटाना होगा!!
प्रकृति प्राणी परमेश्वर
शाश्वत सत्य सृष्टि शुद्ध
विशुद्ध रखना होगा!!
बृक्ष सन्तानो जैसा
बृक्ष सन्तानो जैसा
छाँव बृक्ष कि शीतल
मृदु मनोरम जैसा!!
बृक्ष बृद्धि विकास
प्राणी प्राण उपहार
उपकार जैसा!!
बृक्ष भाग्य भगवान
प्रकृति प्राणी वरदान
जीवन सांसे धड़कन
प्राण जैसा!!
बृक्ष वंश हंस पीढ़ी
परम्परा परिवार हर्ष
उत्कर्ष जैसा!!
हरियाली खुशहाली
सावन मधुमाश ऋतु
मौसम ज्ञान विज्ञानं
बृक्ष बैभव चमत्कार
हो जैसा!!
बृक्ष लगाना धर्म कर्म
शाश्वत सत्य कर्तव्य
दायित्व बोध संस्कृति
संस्कार संसार जैसा!!
जल ही जीवन
जल ही जीवन
पंचतत्वों मे जल
का प्रमुख महत्व
ब्राह्मड मे अवनी
पच्चिस जल
पचहत्तर प्रतिशत
चल जाए बिन आहार
जीवन जल विहीन
समाप्त जीवन
प्रतिशत अस्सी
दूध मे जल
जल खून मे
पचत्तर प्रतिशत!!
जल जीवन का सत्य
जल संरक्षण जीवन
संवर्धन!!
बिन जल ज्वाला
अंगार विश्व मानवता
संसार!!
युद्ध का कारक
कारण विशुद्ध
जर जोरू जमीन
मशहूर
धरती सुखी
हृदय उसका
छटपटा रहा जैसे
मीन
जल पाताल गया
वलि जहाँ का मूल
दानेन्द्र नहीं करेगा
जल जीवन को
दान
सुख गए ताल
तलैया नदियां नालो
मे तब्दील
जल जीवन पर
संकट संक्रमण
भय भयाक्रांत है
काल समय
संरक्षित हो कैसे
जल जीवन प्रश्न
बहुत गंभीर
युद्ध लड़े जाएंगे
युद्ध मैदानो मे
कारण आत्म
अभिमान सम्मान
नहीं
जल जन्मेजय
इच्छा और परीक्षा
चाहत होंगे भीषण
संग्राम
जल ही जीवन
सत्य जीवन दर्शन
जल संरक्षण
युग जीवन सृष्टि
संरक्षण संवर्धन
जिंदगी का फलसफा
हर जिंदगी का
अपना अंदाज होता है
ख़ुशी गम आंसू
मुस्कान होता है!!
जिंदगी सिर्फ
वक़्त के साथ
चलना सिफर
रिश्ते नातो रुसवाई
बेवफाई मोहब्बत
जुदाई मिलन आम
होता है!!
हर जिंदगी का
फलसफा जुदा फिर भी
मकसद आम होता है
जिंदगी सिर्फ लम्हो का
गुजरना ही नहीं
जिंदगी तो बावफा
बेवफा वफा का
नाम होता है!!
जिंदगी हो नहीं सकती
जिसकी अपनी कोई
कहानी जुबानी नहीं
नजर नाज पहचान
का मोहताज होता है!!
जिंदगी आम उलझन मे
उलझ जाए असल अंजाम
ही न पाए!!
जिंदगी जिन्दा दिल
जज्बा जज्बात फलक का
फलसफ़ा कायनात होता है!!
चलो कुछ नया करे
ज़ब भी कुछ करना हो
सोचो समझो निर्धारित
करो उद्देश्य पथ पराक्रम
परिणाम!!
कुछ भी ज़ब करना चाहो
नव हो विधि विधान नव
अध्याय आयाम
लिक लिंक मे अंतर
लिंक उद्देश्य पथ भ्र्ष्ट
भ्रष्टाचार भय लीक
परम्परा परिवर्तन कि वाधा
विराम
जिंदगी चलने का नाम
भाग्य कायर कि काया
विश्वास आलस्य जीवन
जीवेत जाग्रत विराम!!
नव चिंतन नव कल्पना
अंवेषण प्रयोग परमार्थ
परिणाम नव उपलब्धि
समय समाज युग प्रेरणा
पथ पुरुषार्थ!!
नव सोच नव कर्तव्य
दायित्व बोध नव संवेदना
शाश्वत का नया कुछ करने
हासिल करना नव क्रांति
चेतना शांखनाद!!
डागी महल का महान
मानव महत्व हीन
खोजता नसीब
भटक रहा इधर उधर
मिलता नहीं इंसान
इंसानियत जमीर!!
भूख से बेहाल सर
पे छत नहीं फतेहाल
तपन अगन से हंफाता
बृक्ष छाया भी भगती दूर!!
सर्द से काँपता
फुटपाथ पर
दम तोड़ता कोषता
भाग्य भगवान को
वेवस मजबूर!!
गौ माता पूजा
जिसकी करते
दूध लेकर
दर दर भटकने को
देते छोड़!!
गौ जननी समान
फिर भी मरने को
छोड़ते!!
कुत्ता सबसे वफ़ादार
गौ इंसान से कीमती!!
महिमा महत्व
घर परिवार जैसा
समझते सुबह शाम
डागी के साथ
घूमते टहलते!!
इंसान मित्र
पीछे छुटते
अब तो डॉगी शान!!
डॉगी सम्पन्नता पहचान
ड्राइंग रूम बेड रूप तक
डागी रहता जैसे महल
का महान!!
टूटा सागर अहंकार
सागर तट पहुंचे
रघुबीर संग सेना
बानर और रीछ।।
लंका पहुंच पाना
समस्या विकट गम्भीर
सागर में कैसे हो पथ
निर्माण कार्य कठिन।।
प्रश्न बहुत जटिल
विभीषण जामवंत
लखन संग मन्तव्य
रघुबीर ।।
सागर से ही
मांगे पथ करे स्वंय विनम्र
निवेदन रघुबीर।।
लखन लाल क्रोधित
रास नही मन्तव्य
शेष भृगुटी तनी
धरे रूप रौद्र।।
बोले सुनो भईया
जड़ का चेतन
संस्कार नही
सागर जड़ है करो
निवेदन वंदन उचित
व्यवहार नही।।
धनुष उठाओ
प्रत्यंचा चढ़ाओ
सागर को नीर विहीन
करो ।।
लंका पथ स्वंय
मिल जाएगा युग
परिहास नही होगा।।
आने वाला काल समय
मर्यादा पुरुषोत्तम की
युग मे महिमा का यश गान
करेगा रघुकुल का
शौर्य ध्वज लहराएगा।।
बोले धैर्य धीर गम्भीर
रघुवर रघुबीर सुनो भ्राता
लखन विनम्र अनुनय
निवेदन वंदन पराक्रम
तरकस और तूणीर।।
बैठेंगे सागर तट पर
सागर का आवाहन कर
उसकी इच्छा से ही लंका
पथ पाएंगे ।।
सागर ही पथ प्रयास
परिणाम प्रथम पथ
विजय दिखलाएगा
लंका विजय से अपनी
कीर्ति मान बढ़ाएगा।।
लखन लाल का क्रोध
शांत नही भ्राता आदेश
से विवश शांत हुआ
रणधीर ।।
पूजा वंदन कि थाल
लिए सागर तट पहुंचे रघुवीर
ध्यान मग्न सागर अर्चन वंदन
पर बैठे शांत शौम्य सूर्य बंसी
धैर्य धीर वीर रघुवीर।।
देख रहे थे प्रभु लीला
को बानर भालू रीछ
लक्ष्मण और विभीषण
सबकी यही परीक्षा और
प्रतीक्षा।।
सागर के आने और पथ
लंका पाने की पूरी हो
लंका विजय प्रतिज्ञा।।
रघुबर की सागर मनौती
विनय आराधना काम न
आई दिवस बीत गए तीन
टूटा ध्यान जागे क्रोधित
रघुवीर।।
बोले सकोप लखन
लाओ धनुष सारंग हमारा
आज सोखेऊ सागर नीर।।
सागर अहंकार मैं तोड़ू
युग मे सागर मर्यादा झिन्न
भिन्न मैं कर देंऊ ।।
सागर को कैसा अभिमान
पता नही जड़ को
उसके तट पर आया है
स्वंय राम।।
ज्वाला अनल अडिग क्रोध
देख रघुवीर जमवन्त विभीषण
हतप्रद बानर रीछ ।।
अति विनम्र करुणा के स्वंय जो
सागर उर में जिनके उठता
विध्वंसक ज्वार सागर अस्तित्व
ही मिट जाएगा कैसे होगा युग
उद्धार।।
संसय में राम की सेना
लखन लाल को भाई क्रोध ही
भया बोले भईया मैंने तो किया
ही था सचेत सागर जड़ है
जड़ से जड़ता ही सर्व सम्मत है।।
लखन लाल ने दिया
सारंग कर पिनाक लिए
प्रत्यंचा पर वाण
चढ़ाया रघुवीर।।
बोले आज सागर से
सृष्टि विहीन कंरू
सागर अहंकार का
मान गर्दन करू
शपत जब तक
सागर का अंत नहीं
राम क्रोध का
अर्थ नहीं।।
सागर के अंतर्मन में
कोलाहल ज्वाला
भीषण विकट विकराल
उथल पुथल सागर
साम्राज्य में चहूं ओर
हाहाकार।।
सागर ने देखा
अस्तित्व अंत
लज्जित आत्म ग्लानि
मर्यादा का तिरस्कार
अपमान स्वंय के
अहंकार अभिमान में।।
आया सम्मुख
क्षमाभाव में
वंदन पूजन
थाल सजाए
रख माथा
रघुकुल तिलक
चरण कमल में
त्राहि त्राहि माम
शरणागति बोला।।
बोला सागर प्रभु
हम तो कुल सम्बन्धी
कितने उपकारों से
उपकृत मैं सागर
रघुवंश का अंश मात्र।।
मेरा अस्तित्व
हंस वंश सूर्य वंश के
साथ सम्भव कैसे ?
सूर्यवंश से मेरा विनाश।।
करुणा सागर
क्षमा सागर
दया सागर
मर्यादा पुरुषोत्तम से ही हो
सागर को त्रास।।
बोले धीर वीर गभ्भीर
सुनो सागर ध्यान से
शांत चित्त मन से।।
कैसे पार उतरेगी
सेना राम की
पथ का कैसे हो निर्माण ?
बतलाओ जैसे भी हो
सागर सेना पार।।
बोला सागर
नल नील भ्राता द्वय
पाहन फेंके
मेरे जल में
पाहन नही डूबेगा
मेरी सतह पर ही तैरेगा
ऐसा ही है नल नील
को ऋषि श्राप।।
सागर बंध जाएगा
महिमा उसकी
घट जाएगी
अभिमान अहंकार का
शमन हो जाएगा
पथ राम सेना को
मिल जाएगा।।
क्षमा किया रघुवर ने
सागर को
सागर अपराध बोध से
ग्रसित अहंकार के
अंधकार गहराई से
मुक्त रघुवर विजय पथ में
स्वंय की गरिमा महिमा
मिट जाने से
आल्लादित प्रसन्न।।
सती सुलोचना
राम रावण युद्ध
निर्णायक पल प्रहर
आने वाला इंद्रजीत
धैर्य धीर कि वीरता
रण कौशल सत्य
साक्षात था
रामादल करने वाला।।
इंद्रजीत सा पुत्र
पिता अहंकार
अभिमान कि
खातिर था जीवन
प्राण त्यागने वाला
पिता पुत्र सम्बन्धो का
नव अध्याय आयाम
लिखने वाला।।
प्रयास विश्वास आश
परिणाम शून्य
माता मंदोदरी निराश
जान कर्म कोख
अतुलित बल योद्धा
पुत्र भी था साथ छोड़ कर
जाने वाला।।
देवता भी जिसे पराजित
कर नही सकते
युद्ध भूमि में था
मृत्यु वरण करने वाला
चौदह वर्ष वनवासी निद्रा
त्यागी इंद्रजीत
काल था बनने वाला।।
इंद्रजीत इंद्र विजेता
शस्त्र प्रकांड ज्ञाता
त्याग तपस्या का
शेष अवतारी द्वय का
समर भयंकर देखने को
काल समय भी था
लालाइत समय था
निकट आने वाला।।
शेष वासुकी कन्या
सुलोचना नारी गौरव
दानवता कुल में
देव कन्या पर भारी
उर्मिला सती नारी
सुलोचना उर्मिला द्वय के
सती धर्म कि परीक्षा का
काल प्रहर था युग
समक्षआने वाला।।
लखन लाल चले
करने इंद्रजीत से
निर्णायक युद्ध
बोले रघुवर सुनो
अनुज संदेह नहीं
इंद्रजीत का वध
तुम्हारे हाथों ही होगा।।
ध्यान रहे मस्तक
इंद्रजीत का युद्ध
भूमि में कहीं गिरे नही
इंद्रजीत स्वंय
एक पत्नीव्रता
पत्नी सुलोचना
सती नारी सतीत्व कि
गरिमा महिमा सारी।।
यदि मस्तक इंद्रजीत का
कट कर युद्ध भूमि में
गिर जाएगा सती
सुलोचना की शक्ति से
रामादल का जयकार
पराजय वर्तमान
बन जाएगा।।
अग्रज राम का
आदेश लखन लाल ने
किया शिरोधार्य
चला वीर दसो दिशाओं से
देवो का हुंकार हुआ।।
चौदह वर्ष का
वनवासी निद्रा त्यागी
शेषवतार राम रावण
युद्ध का निर्णायक
शंखनाद किया।।
युद्ध भयंकर
बानर दानव सेना का
रौद्र रूप भयंकर
कटते मुंड अंग
रक्त प्रवाह नद
काल कराल हुआ।।
शवो का किनारा
प्रकृति परमेश्वर ने
जैसे मृत्यु को ही
अंगीकार किया।।
कभी इंद्रजीत कि
माया भारी कभी
लखन लाल कि
त्याग तपस्या शक्ति भारी
कुलदेवी कि अपूर्ण
आराधना इंद्रजीत का
अंत सम्भावी।।
बहुत झकाया इंद्रजीत ने
लखन लाल को
इंदरजीत ने अंत समय
अब आया ।।
लखन लाल ने
इंद्रजीत का मस्तक हाथ
काट दिया मस्तक गिरा
रामादल में भुजा
सुलोचना ने सम्मुख पाया।।
देख भुजा सुलोचना
करने लगी विलाप
बोली कटी भुजा से यदि
इंदरजीत मेरे पति की
भुजा सत्य तुम हो
दे दो मुझे प्रमाण ।।
लिख दो कैसे हुआ
वध युद्ध का आंखों
देखा हाल कटी भुजा
इंद्रजीत कि लिखने लगी
युद्ध वध का स्वंय लड़ा
पल पल का भाव ।।
समझ गयी सुलोचना
नही रहा अब दुनियां में
उसका इंद्रजीत अटल
सुहाग भागी दौड़ी गयी
श्वसुर दसाशन के पास ।।
बोली मस्तक लेने जाओ
पिता श्री मेरे पति
इंद्रजीत का रामादल
सती मैं पति संग हो
जाऊंगी पाऊंगी एहिवात।।
कहा रावण ने सुन पुत्री
कल युद्ध भूमि में इंद्रजीत
मृत्यु प्रतिशोध में लाखो
सर कट जाएंगे।।
बोली सती सुलोचना
पिताश्री मुझे क्या मिल
जाएगा मेरा सुहाग इंद्रजीत
क्या फिर लौट पायेगा?
मुझे पति का मस्तक
रामादल से ला दो मैं
पति संग जल जाऊंगी
पति परमेश्वर बिन व्यर्थ
यह जीवन अब किस
ईश्वर से नेह लगाउंगी।।
दशानन ने रामादल
स्वंय जाने से किया इनकार
कहा सुलोचना तुम
स्वंय ही जाओ रामादल
पति मस्तक लाओ
मेरा जाना कहाँ उचित होगा।।
चली सुलोचना
रामादल को
देखा जब सुलोचना को
राघव ने स्वंय खड़े
करुणामय बोले
सुनो सती इंद्रजीत
योद्धा जैसा दूजा
नही कोई सत्य यही है ।।
यह तो युग सृष्टि कि है
परंपरा जो जन्मा है
वह मरेगा जो
आया है जाएगा ।।
सती सुलोचना कि
सुन याचना कहा
राघवेंद्र ने लज्जित ना
करो देवी बोलो मैं
क्या करूं पीड़ा दुःख
दूर तुम्हारा हो सके
तुम्हारा ऐसा हर
प्रयत्न करूं।।
बोली सती सुलोचना
राघव मस्तक मेरे
पति का मेरे सती होने का
गौरव आशीर्वाद चाहिए।।
राघवेंद्र का आदेश
मस्तक इंद्रजीत का
सौंप दिया सती सुलोचना को
सुलोचना ने देखा
लखन लाल को बोली
ब्रह्मांड में कोई ऐसा
शूरवीर नही जो इंद्रजीत को
मार सके ।।
तुम्हारी पत्नी
सती नारी है
मैं भी सती नारी हूँ
अंतर मात्र इतना
इंद्रजीत पिता दशानन का
पुत्र और नमक हक को
पूर्ण किया ।।
दशानन ने सीता माता
हरण करने का कुकृत्य किया
दूषित अन्न दशानन का
कारण मृत्यु इंद्रजीत बना।।
कलयुग में राम और रावण
जग में अंधेरा
मन में अंधेरा
अंधेरे का साम्राज्य
राम विजय का
विजय पर्व
विशेष खास।।
लक्षण जैसा भाई
मर्यादा का मान
रावण छल प्रपंच
द्वेष दम्भ की
काया मात्र।।
हारा युग पंडित
रावण विद्वान
अहंकार स्वाभिमान
संघार!!
रावण दहन
अहंकार अभिमान
ज्ञान का नाश त्रेता से
पीढ़ी दर पीढ़ी
रावण मरता जलता
कहता सुनो
कलयुग मानव
मेरी बात
बांध लो गांठ।।
कलयुग मानवता
मन में जगता नहीं
जलता नहीं सत्य
सत्यार्थ प्रकाश!!
रावण का जलना
विकृत अन्याय
अत्याचार द्वेष दंभ
घृणा के भस्म से
उठता गुब्बार।।
वर्ष दर वर्ष रावण का
मरना जलना मर्यादा
मानवता मूल्य प्रकाश
फिर भी जग में
जग मन में
अंधेरा अहंकार!!
रावण भी मरते -मरते
जलते- जलते
ऊब चुका है
करता खोखले
मर्यादा राम का
परिहास!!
रावण हर वर्ष
मरता जलता
नहीं जलता मरता
भय भ्रष्टाचार
साम्राज्य!!
कहाँ गयी वो
मर्यादा मानवता
जो आनी थी रावण
मरने जलने के बाद?
रावण ने तो
बस एक जानकी
हरण किया
अब हर दिन
जानकी मांग रही
जीवन इज़्ज़त
रक्षा प्राण !!
युगों युगों से जलते
मरते रावण कि
गूँज रही हैअट्टहास।।
रावण का अट्टहास
युग से ही सवाल
मैं अत्याचारी अन्यायी
अहंकारी अभिमानी
दिया चुनौती
अपने युग को
अपने मूल्यों
उद्देश्यों में।।
ब्रह्मांड सत्य सारथी
मर्यादा पुरुषोत्तम
पुरुषार्थ ने
युद्ध किया मुझसे
युग परिवर्तन
प्रकाश के
सन्दर्भ में!!
रावण जलते मरते
कहता कलयुग से
मेरे मरने से अहंकार
अभिमान घृणा क्रोध का
नाश मेरे जलते
प्रकाश से जग अंधेरा
करो सर्वनाश।।
रावण मेरा जलना
मरना युग धर्म
मानवता का संवर्धन
संरक्षण होगा पथ युग का
परम प्रकाश।।
मर्यादा का राम
युग राष्ट्र में होगा
प्रमाणित प्रमाण !!
भय रहित रहो
विशुद्ध सात्विक
सत्य रहो मर्यादा
मूल्यों का उल्लास
विजय पर्व का
युग अमूल्य रहो!!
भाई विभीषण
कुल विध्वंसक
त्रेता में अकेला मात्र।।
भ्राता द्रोही कलयुग में
हर कुल परिवार में
विध्वंस द्रोही नही कोई
मिलता अपवाद मात्र।।
स्वार्थ में अंधे कुछ भी
संभव कर जाते
अन्याय पाप मर्म
राम का धर्म राम का
कहते इतराते!!
रावण मै प्रतीक
अधर्म का मुझमे भी है
कुछ अच्छाई।।
राम पूर्ण धर्म का
प्रतिनिधि आदि
अनादि अनंत प्रतिबिंब
आत्म भाव परछाई।।
देखो एक ओर
खड़ा रावण दूजा
अंश सूर्यवंश
दूसरी ओर
हर प्रातःयुग का मिटाता
अंधकार फिर भी
अंधेरा चहूंओर!!
मेरी नाभि का अमृत
मुझे अमर नहीं
कर पाया
कलयुग पाप पूंज के
अंधकार में
आशा और
विश्वस किरण का
एक उजाला राम।।
स्वय भगवान् सर्व
शक्तिमान सूर्यवंश
अभिमान हर प्रातः का
नव जीवन संदेश
जीवन उद्देश्य फिर भी
राम सिर्फ प्रतीक मात्र।।
नव ग्रह दीगपाल
हमारे कदमाे और
सेवा में देवो का
राजा इंद्र पखारे
पाव हमारे मेरे
कदमों से
अवनी डोले!!
शिव शक्ति कि
भक्ति में मैंने अपने ही
शीश चढ़ाए दस बार
मेरी बीस भुजाएं मेरे
पराक्रम को करती
परिभाषित कलयुग
में भी आज।।
मैंने शिवआसन
आवास उठाया
कैलाश कुबेर का
पुष्पक साहस शक्ति से
मैंने पाया सोने कि
लंका मैंने
फिर भी सुख चैन
कभी ना आया रास!!
मुझे मारने ब्रह्मांड
सत्य के परब्रह्म ने
स्वयं लिया
मनुज अवतार ll
दशो दिशाओं
भुवन लोक में
मेरी तूती कि गूंजती
आवाज।।
भुवन भास्कर
चन्द्र सप्तर्षि मंडल
मेरी इच्छा और
इशारे पर नाचे नाच।।
ऋषियों के रक्त
कर कलश शेषनाग
फन कि अवनी
हृदय भाव में
स्थापित कर स्वंय कि
चुनौती का निर्माण
किया आधार!!
मुझे मारने की
खातिर तापसी वेश
विशेष उदासी
वन वन भटका
अंश शेष और राम।।
पत्नी वियोग में
साधारण मानव सा
रोया अविनाशी ईश्वर
पत्नी की मृगमरीचीका
माया में खोया संग भाई
बैरागी चौदह वर्ष नहीं सोया!!
एक लख पूत
सवा लख पौत्र
उत्तम कुल पुलस्त
कर मैं नाती।
विश्वेस्वरवा पुत्र
मय दानव का जमता
सबल कुल परिवार
ऋषि दानव के
संयुक्त रक्त श्रेष्ठ !!
रावण को मार
सकने में
अकेला नही सक्षम
मर्यादा पुरुषोत्तम
राम अवतार।।
चौदह वर्ष रहा
जागा लक्षण शेषा
अवतार बानर
रिछ मित्रता कि भी
पड़ी दरकार!!
अपने युग जीवन में
बना रहा चुनौती
रच डाले जाने
कितने ही इतिहास।।
युद्ध अनेकों विजय
गाथा कि
गाथा मेरा जीवन
संसार शस्त्र शास्त्र के
कर डाले कितने
आविष्कार!!
रामेश्वर तट पर
शिवा बना गवाह
टूटी सागर कि
मर्यादा और
स्वाभिमान।।
नदियां सागर पहाड़
प्रकृति ब्रह्मांड के
दर दर भटका स्वयं
परब्रह्म ब्रह्मांड!!
युद्ध भूमि में भाई कि
खातिर करता रहा
विलाप
हनुमान सा
स्वामी भक्त
जामवंत सा
मंत्री रिछराज।।
सम्पाती कि
गिद्ध दृष्टि
जटायु का
भक्ति भाव
लाखों ऋषियों का
श्राप मेरे कंधो पर
था भार ।।
जाने कितने यत्न
प्रयत्न असंभव के
संभव से मेरे समक्ष
युद्ध भूमि मुझे मारने
पहुचें श्री राम!!
रावण के मरने
जलने का उमंग
उल्लाश विजय पर्व
मनाते क्यो हो?
ना राम कि पितृ भक्ति
ना साहस शक्ति मर्यादा
फिर मेरा राम से मारा
जाना जलना क्यों बुराई पर
विजय अच्छाई
विश्वास आस्था बताते हो।।
पुरुषार्थ पराक्रम से
मैं लड़ा कितनी बार
छकाया और थाकाया
राम को हारा और
मरा भी कितने ही
इतिहास बनाए!!
छुद्र स्वार्थ में खुद के
सुख विश्वास में
कितने रक्त बहाते हो
अबला नारी कि
चीत्कार से सुर
संगीत सजाते हो।।
मैंने तो जानकी को
ना देखा ना उसने
मुझकॊ देखा ।।
तुम क्या जानो
मेरे मरने जलने कि
मेरी वेदना ?
का मतलब तुम अंधे
सावन के तुमको अपने
मतलब के मानव दानव!!
ना तुममे रावण जैसा
पराक्रम ना शस्त्र शास्त्र का
ज्ञान पाले बैठे हो
व्यर्थ का अहंकार।।
भ्रम है तुम्हारा
रावण का मरना
जलना तेरा
विजय उल्लास
ना हो रावण तुम
ना मर्यादा के
तुम राम!!
भाई भाई लूट रहा
बहना को भाई लूट रहा
माँ को बेटा लूट रहा
हर रिश्ते को
रिश्ता लूट रहा ।।
ना कोई शर्म लाज़ है
ना कोई नैतिकता
ना राम कि
मर्यादा तुम
ना रावण कि
तुम गरिमा मॉन!!
मनाते मेरे
मरने जलने पर
विजय पर्व का
उल्लास किस बात का
और क्यो?
मैं तो त्रेता में मरा जला
तब से अब तक
जलते मरते
युगों युगों से
दुर्दशा राम कि
देख रहा हूँ ।।
बेबस लाचार मैं
एक बार मरा जला
तब से राम पल पल
घूँट घूँट कर अपनो से
होता अपमानित
पल प्रहर संध्या और प्रभात।।
अमर्यादित होकर
सूर्य वंश के सूर्योदय के
अंधेरे में भटक रहा है राम!!
छोड़ाे व्यर्थ मेरे
मरने जलने का
विजय उल्लास पर्व को ।
एक बार सिर्फ
एक बार सिर्फ
एक बार सिर्फ
मेरी चिता
अग्नि कि लपटों से
खुद में छुपे बसे
रावण का
कर दो नाश ।।
रावण जलने के
प्रकाश से खुद के
अंधकार को त्यागों
तब होगा रावण मेरा
मरना जलना
विजय पर्व युग के
अंधेरे का उजियारा!!
उठो पार्थ
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो
निर्भय चेतना में
तुम जागो
मोह का
त्याग करो
कुरुक्षेत्र के
महासमर में
निर्मम हो
प्रहार करो।।
देख रहे हो जिन्हें
युद्ध मे खड़े तुम्हारे
जो सामने रिश्तो के
बंधन में बंधे है तुमसे
रक्त रिश्तो का
बंधन काटो
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
धर्म कर्म का
सजा हुआ रण
धर्म नियत का
वर्तमान पहचानो
कुरुक्षेत्र का
महासमर है
देख रहा वर्तमान
भविष्य है
अतीत अपमान का
अंतर्नाद जगाओ
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
अपने अंतर्मन में झांको
लाक्षा गृह द्रोपदी चीर
भीम विष द्रुत क्रीड़ा
कपट द्वंद के
प्रतिशोध को
ज्वाला अंगार बनओ
उठो अब पार्थ
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
रिश्ते नातों के
अधर्म मार्ग को
कुरूक्षेत्र के
महासमर में
मोक्ष मार्ग
बनाओ
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों की
निद्रा त्यागो।।
बारह वर्षों कि
वन पीड़ा
कौन्तेय कि है
अग्निपरीक्षा
कुरुक्षेत्र के
महासमर में
वीर गति को
प्राप्त हुए
देवलोक करेंगा
वंदन स्वागत
उठो अब
खुले नेत्रों
कि निद्रा त्यागो।।
विजयी हुए तो
नए युग का
इतिहास लिखोगे
युद्ध करो
भय को त्यागो
माया से बरबस ना
भागो उठो पार्थ
अब खुले नेत्रों की
निद्रा त्यागो।।
मैं मधुसूदन
सखा तुम्हारा
तुम नर
मैं नारायण
देख पार्थ अब
विकट अलौकिक
दुर्लभ विराट
स्वरूप हमारा
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
दिव्य नेत्र तुम्हे
मैं देता देख रहे
तात भीष्म द्रोण
धर्म धुरंधर द्वय
जानता युग सारा
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों की
निद्रा त्यागो।।
युग जानता है
धर्म सत्य का
धर्म हानि पर
मेरे अवतरण का
धर्म स्थापना
मर्म का
संत उद्धार
कुटिल दंश का
देखो पार्थ सत्यार्थ
स्वीकारों
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
कृष्ण मैं
स्वंय नारायण
मेरे छः
भ्राताओ का वध
रिश्तो के कारण
कारागार में
अवतरण हमारा
काल चक्र का
चक्र सुदर्शन है
मेरा प्यारा
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
मातु पिता के
हाथ पांव कि बेड़ी
अधर्म शिखर का
मामा कंस से
युग का उद्धार
किया नव आशा
संचार किया
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
अपने ही रिश्तो का
वध कर डाला
कंस शिशुपाल
जाने कितने
रिश्ते नाम सबका
उद्धार किया
नव युग का
शंखनाद किया
अब भी जानो
पहचानो
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
काल निरंतर
चलता जाता
ना कोई रिश्ता
ना कोई काल का
युग से नाता
काल तुम्हारे संग
चल पड़ा है
पार्थ काल तुम्हारे
लिए पल दो पल
खड़ा है
काल कर्म का
रहस्य तुम
समझो जानो
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
शौर्य शक्ति और
पराक्रम दृढ़ता
निश्चय और आचरण
निष्काम कर्मयोग का
अभिनंदन अभिवादन
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
कुरुक्षेत्र के
महासमर मे
मेरा उद्देश्य
पथ यही है
मैं सारथी तुम्हारा
अस्त्र शस्त्र ना
हाथ उठाऊं
हनुमत को तेरे
रथ ध्वज बैठाऊ
पथ विजय
अब प्रशस्त तुम्हारा
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
युद्ध भूमि में
उपदेश यही है
भविष्य का
गीता ज्ञान यही है
जन्म मृत्यु का
सच यही है
दोनो ही
भाई भाई है
जीवन तो
पल प्रहर
गति गतिमान
काल के संग
युग जीवन
प्राणी का
आना जाना
उठो पार्थ अब
खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
प्राण एक
परछाई है
काया कर्मों कि
काई है
ईश्वर का स्वर
शाश्वत निरंतर
युगों युगों का पथ
ज्योति सत्य
उठो महा समर के
महारथी धुरंधर
मृत काया का
अधर्म छाया से
उद्धार करो
उठो पार्थ
अब खुले नेत्रों कि
निद्रा त्यागो।।
शांति कायरता नहीं
शौर्य पराक्रम प्रगति प्रतिष्ठा
कि जननी भरणी सौहार्द
शांति सरोवर अमृत हूँ!!
विनम्र संस्कृति क्षमा दया
करुणा कि गागर सागर
मानवता मूल्यों कि
शांति मै अवनी हूँ!!
संस्कार परमार्थ है मेरा
पथ समय काल समाज
कल्याण कि देव और देवी
समता ममतामयी हूँ!!
धैर्य धन्य धरा कि मै शांति
विवेक हीन दुष्ट दनवता
अंत क्रोध बोध अहंकार
तमस तरणी तपसी हूँ!!
महाभारत कि कृष्णा
मै शांति संकल्प का
विकल्पहीन सत्यार्थ
अंध पिता का अभिमान
पुत्र दुर्योधन कि महाकाल
और काली हूँ!!
कृष्णा कर्म धर्म सिद्धांत
मै शांति मात्र शास्त्र सयंम
नीति नियत जन्मेजय हूँ!!
संकल्प सिद्ध का मार्ग हूँ मै
विकल्प रहित युग मानवता
देव मनुज समतुल्य हूँ मै!!
युद्ध भूमि से पूर्व कृष्णा का
कुरु सभा कि शिक्षा शांति
प्रयास युग विश्वास
बैभव धर्मध्वज सत्य
सनातनी हूँ!!
कायरता का आभूषण नहीं
विश्व शांति कि मर्यादा मान
मूर्खो का परिहास वीरो कि
गौरव गाती हूँ मै!!
भोग विलास से वीरत
द्वेष दम्भ छल प्रपंच से
विमुख शब्द नहीं भाव
अभिव्यक्ति सूर वीर कि
महिमा हूँ मै!!
सतत संस्कृति सबंध
विकास वरदान वर्द्धस्त मेरा
शांति शांखनाद संवाद स्वर
शब्द आवाज प्रेरणा स्वतंत्र
शक्ति सार्थक हूँ!!
शांति जग जन्मेजय
अजेय अजीत आजात कि
शस्त्र शास्त्र स्वच्छ कलुषित
रहित प्रतिस्पर्धा मानवता कि
प्रसन्नता परमेश्वर हूँ मै!!
स्वस्थ्य प्रतियोगिता युद्ध
नहीं शांति सौहार्द सिद्धांत
कि पोषक पालक संजीवनी हूँ मै
कैसे सम्भव जग हँसाई
अपमान मेरा पैगाम मै
शांति विरोचित आचार
व्यवहार समाज कि
भूषण हूँ!!
युद्ध योद्धा समाज
संस्कृति का ह्रास
युद्ध युग कलंक परिहास
शांति मानव मानवता
सम्मान कि गीत मीत
वाद्य वादिनी हूँ!!
शांति परिवार समाज
राष्ट्र समय काल समझ
ज्ञान विकास उत्सव ऊर्जा
उत्साह उमंग तारंगिनी हूँ!!
अशांति आक्रांता अहंकार
संसय अवसाद भय भ्रम
भयंकर का आमंत्रण
परिणाम शत्रु कि उद्धारक
शांति सर्वोदय उजियारी हूँ!!
खून और सिंदूर
हार नहीं
निर्भीक निडर
पथ विजय हमारा
कहती है दुनियां
जानती है दुनियां भरत
भारत कि सेना है हम!!
आंख दिखाए
गर कोई औकात
बता देते है हम
माँ भारती के वीर
सपूत दुश्मन का
नामो निशान
मिटा देते है हम
कहती है दुनियां
जानती है दुनियां भरत
भारत कि सेना है हम!!
जन्म दायनी माँ को
देकर वचन आए है हम
जननी जन्म भूमि कि
गरिमा गौरव मे
पीठ नहीं दिखाएंगे
भरत भारत का विश्वास
नहीं मिटाएंगे
शीश नहीं झुकायेंगे हम
कहती है दुनियां
जानती है दुनियां भरत
भारत कि सेना हम!!
कदम पीछे नहीं हटाएंगे
जननी जन्म भूमि पर मिट
जाएंगे दुश्मन का नामो
निशान मिटाने वाले भारत
के बीर योद्धाओ का
सामूहिक पराक्रम परिणाम
है हम कहती है दुनियां
जानती है दुनियां भरत
भारत कि सेना है हम!!
थल नभ जल के
आग अंगार हम दुश्मन के
काल है हम शत्रु कि
हाहाकार है हम
कहती है दुनियां जानती है
दुनियां भरत भारत कि
सेना है हम!!
तेज धार तलवार है हम
वायु वेग कि चाल है हम
सागर का तूफान है हम
जय जय भवानी हर
हर महादेव समर भूमि
महाकाल है हम
कहती है दुनियां जानती है
दुनियां भरत भारत कि
सेना है हम!!
सिंह शेर दहाड़ है हम
दुर्गम दुरूह प्रवाह है हम
अवरोध का अवसान है
हम, जन्म जीवन मृत्यु का
लिखते नव इतिहास है हम
कहती है दुनियां जानती है
दुनियां भरत भारत कि सेना
है हम!!
युद्ध भूमि सांघर है हम
रण कौशल ही कर्म धर्म
संसय भय भ्रम पर प्रहार
है हम कहती है दुनियां
जानती है दुनियां भरत
भारत कि सेना है हम!!
जगदंब शिवा कि दहाड़
हैं हम रण भूमि मे काली
काल कराल है हम परशु
परशुराम गाण्डीव पार्थ
सारंग नारायण का
पंचजन्या शंख नाद
है हम कहती है दुनियां
जानती है दुनियां
भारत कि सेना है हम!!
शिव शंकर का मृत्यु तांडव
सुदर्शन कि चाल है हम
शत्रु कि साजिस चालों पर
विकट प्रहार है हम कहती है
दुनियां जानती है दुनियां
भरत भारत कि सेना है हम!!
खून और पानी का
मर्म धर्म बतला देते
खून और सिंदूर का
कर्ज चुका देते ऋण
नहीं छोड़ते उधार है हम
कहती है दुनियां जानती
है दुनियां भारत कि सेना
है हम!!
घर वाली से झगड़ा
सात जन्मों का फेरा
सात किस्मों का फेरा
साथ जीने मरने का फेरा
जीवन का सुबह शाम सबेरा।।
साथ न छोड़ने की कसमें
प्रेम के भावनाओ की रस्मे
दो जिस्म एक जान का बंधन
जन्म जीवन परिवार धड़कन सांसे।।
बस चंद दिनों में ही भूल जाती
जीवन की सच्चाई सामने आती
प्रेम कसमें रस्मे झूठे जीवन की
प्रपंच कहानी।।
सुहाग की सेज ना जाने
कितने अरमान बस दिनों
में विखर जाती।।
कसमें रस्मो का ताना वाना
नरम पड़ जाता जिंदगी बोझ
प्रेम के सात फेरे बदरंग हो जाते।।
कुवांरा जीवन बिंदास हज़ारों
रंगीन ख्वाब पत्नी के आते ही
भस्म हो जाते।।
आटा चावल दाल घर
गृहस्थी की चक्की में
पिसते जाते साथ फेरे
कसमें याद नही आते।।
पत्नी घर वाली का ताने
पड़ोसी सहेलियों के जीवन शैली
स्तर के वाने सुबह शाम रोज बहाने।।
घर वाली से झगड़ा जाने
क्या क्या करवाते कभी
घर वाली मायके की तारीफ
करती हम तो वही अच्छे थे
ना तुम जैसा खड़ूस था कोई
ना परेशान करते तुम्हारे बच्चे।।
घर वाली से आय दिन
झगड़ा कभी रूठती तो
मनाते नही मानती तो
बिन खाये ही सो जाते।।
काम पे जाते मन नही लगता
बॉस से भिड़ जाते व्यवसास गर
करते बोहनी बिगड़ती ख़ुद पर
छल्लाते।।
शिकायत करें किससे
माँ बाप का तो विवाह
के चंद दिनों बाद ही
लिया आशिर्वाद हनी मून के
नशे में गए डूब।।
टूटा नशा तो हनी गायब
मून मून चाँद को पत्नी के
चेहरे में खोजते मगर
साथ संग निभाने के
सात फेरे कसमें रस्मे
घर वाली से जंग झगड़े में
भूल जाते।।
अब चाँद सा वो चेहरा
जिसे देखकर दीवाना हुये थे
जिसकी आंखों में सारा जहां
देखते थे रौद्र रूप की दुर्गा
काली लगे।।
जनम जनम की तो
बात छोड़ो इसी जनम में
किसी तरह पिंड छुड़ाने की
जुगत में परिवार
न्यायालय चले पड़े।।
खुद के साथ कर न सके
न्याय न्यायालय से आश
लगाते जाने क्या क्या
आरोप प्रत्यारोप एक दूजे
संवेदन हीन हो जाते।।
घरवाली से झगड़ा तो
साधारण बात शायद
भूल जाते जिंदगी के
अरमान सजाए बाबुल का
घर छोड़ अनजान घर मे
आयी ईमानदार जीवन
दांव लगाई क्यो
लगती हैं पराई।।
घरवाली से झगड़ा प्रेम का
संस्करण बंधन मजबूत का
ही प्रसंग प्रकरण क्यो जन्मों
जन्मों के बंधन की मजबूत
गांठ को तोड़ने पर उतर जाते।।
प्रेम की संवेदना में तकरार
वेदना वरदान प्रेम की निर्मल
निर्झर अविरल धारा विश्वाश।
शौम्यता विनम्रता संस्कृति
संस्कार फिर घर वाली से
झगड़ा कैसे हो सकता
सात जन्मों के सात फेरों
का फांस।।
परशुराम
राम प्रथम ब्रह्मांड
देव चिरंजीवी ब्रह्मांड
श्रेष्ठ शिष्य रुद्र भक्ति शक्ति
शाश्वत अभिमान राम।।
श्रेष्ठ शिव शिष्य फरसा
श्रेष्ठता वरदान सारंग
फरसा नारायण शिव
समन्वय शक्ति गौरव
गान नाम नही आदि
अनंत सत्य सनातन
सत्यार्थ परशुराम।।
जादाग्नि पुत्र
भार्गव कुल गौरव
कर्म धर्म ज्ञान योग्य
बैभव वैराग्य
जय जय परशुराम ।।
गुरु महिमा गरिमा
भीष्म कर्ण द्रोण
युग सृष्टि भविष्य
अतीत भाष्य भरत
भारत गुरु परंपरा
परमार्थ परशुराम ।।
अन्याय प्रतिकार
न्याय प्रिय ब्रह्म
ब्राह्मण युद्ध निपुण
धैर्य धीर धैर्य दान पुण्य
तप त्याग युग नित्य
निरंतर गान परशुराम।।
ब्रह्म वेत्ता ब्राह्मण
कर्म धर्म दायित्व प्रमाण
महेन्द्र गिरी नित्य निरंतर
अविरल अविराम
परशुराम।।
परशुराम आग है
परशुराम जल जीवन
परशुराम वन जीवन
परशुराम अवनी
आस्था अस्तिव आधार।।
आश विश्वास
आकाश परशुराम
पवन पराक्रम
भाव परशुराम
कण कण पंचतत्व
प्रवाह परशुराम।
परशुराम विचार है
परशुराम व्यवहार है
परशुराम युग सृष्टा दृष्टा
ब्रह्मांड संस्कृति संस्कार
शंखनाद परशुराम।।
युगों युगों कि चेतना
अहंकार अंधकार का
नाश अवतारों का पथ
प्रदर्शक अवतारों का
अवतार परशुराम।।
अयारी
अय्यारी शौख नशा
राजा हो या रंक
कल्पना लोक की
दुनियां खतरनाक।।
अय्यारी घिनौनी दुनिया
बादशाहत चाहत खेल
खिलौना साम्राज्य।।
घृणित अपराध
झूठ फरेब कपोल
कल्पना दुनियां का
बाज़ार।।
किस्से और कहानी में
अय्यारी लगती अच्छी
हकीकत में स्वीकार नही
पाप पापनी का संसार!!
ना जाने कैसे कैसे अजूबे
बे बुनियाद अध्यात्म
भूत प्रेत आत्मा महात्मा
शक्ति जाने क्या क्या नक्से
नुख्से नायाब ठगनी
मायाजाल।।
परी जन्नत की आती
न्याय देवी अन्याय से
लड़ती जुल्म दानवता से
मुक्त जहाँ को करती
अवनी का अंधकार।।
जादू अय्यारी की दुनियां
निहित स्वार्थ अहंकार
नफरत की जमी जंग की
हस्ती मस्ती का सरे आम।।
जादू की दुनियां का बेताज
बादशाह बैठे बैठे कायनात
मालिक की चाहत मस्ती
करामात।।
जाने क्या क्या हथकंडे
दांव पेंच की दुनियां
मौत जिन्दगी भय
दहसत अय्यासी की
अय्यारी कस्ती
पतवार।।
जीवन का कोई मोल नही
छल छद्म प्रपंच नाटक
खाबों दुनियां की
तीखी मिर्ची संसार।।
बादशाह की रईयत
ताकत अय्यारी जादू से
डरती क्रूर घमंड से चूर
इंसान जानवर के फर्क
से अंजान क्रूर दमन की
शक्ति हमराज।।
भूत प्रेत अतीत अय्यारी के
साधन साध्य वर्तमान की
क्रूर क्रूरता का साम्राज्य।।
मर्यादा परम्परा का नाम
नही जैसे हो अहंकार
अहमियत चाहो की
राहों पे चलती बवंडर
तूफ़ान।।
अंधे कि लाठी
ज़ब छोड़ देते
अपने साथ आदमी अंधा
हो जाता रहते दो आँख!!
निरोगी काया सतायु
जीवन बोझ जैसे
बिन आँख!!
पल प्रहर जीवन
समाज में चलती
जिंदगी दोस्त रिश्ते
नाते जैसे दो आँख!!
चाहे नेह स्नेह संबंध
छोड़ देते साथ
काया संग ना हो
सहीसलामत दो आँख
दोनों ही अंधे
दोनों को लाठी
कि दरकार!!
उठाने के लिए खुद का
बोझ लाठी हाथ का साथ!!
ढलता यौवन काया
कमजोर छोड़ती साथ
जिंदगी को सहारा
हाथ साथ!!
अंधे को क्या चाहिए
लाठी का रिश्ता साथ
जीवन पथ हो या मोक्ष
मार्ग!!
लाठी अंधे कि बनती
मूक सार्थक साथ!!
अंधा आंख का
सहारा लाठी समाज
प्रेम सनमान सदभाव
निर्विकार इंसान
इंसानियत जज्वा
जज़्बात अंधे कि लाठी
सच्चाई साथ!!
गर्मी का मौसम बारिस कि बूँदे
जेठ कि ज्वाला सूरज
कि गर्मी तपन तपीस
विकट विकराल!!
प्रातः सूरज के साथ
पसीने कि बुँदे लथ पथ
जीव जीवन बेहाल!!
तपन अगन
जन जीवन परेशान
मजदूर किसान कि आश
बादल वर्षा खेती बारी
शुभ आरम्भ संसार!!
सूर्य देव कि डेढ़ी भृकुटी
वायु वेग राहत ज्वाला से
मिलती राहत फिर वही
हालात!!
चाहत गर्मी से निज़ात
ज्वाला के झोंके
जीवन में जैसे
लू लपट भूचाल!!
बारिस बुँदे
जीवन अमृत धार
फुहार राहत जैसे
सरस जीवन व्यवहार!!
कभी रिमझिम वर्षा
कड़कती बिजली
पत्ते बृक्ष पर बूंद
ओस सी बदलता
मौसम ख़ुशी खास
अंदाज़!!
मानसून कि प्रथम
वर्षात क्या बात दादूर
पिले पिले दादूर जैसे
जीवन के आसार!!
नगर गली मोहल्ले में
बचपन कागज कि कस्ती
वारिस का पानी खुशियों
कि सौगात!!
ठंठी हवाओ के झोंके
तपन कि अगन
टप टप पसीने कि बुँदे
शबनम मोती जैसे
गर्म थपेड़े लू के
जिंदगी भट्टी में तपती जैसे
मौसम कि गर्मी तपन
द्वेष दम्भ अभिमान कि
अगन असह तपन अंगार!!
मन मस्तीष्क संयम
संतुलन से बिगड़ता
काया माया का मौसम
बेमौसम!!
मौसम प्रकृति गर्मी
अंतर्मन कि ज्वाला
जज़्बात अग्नि जलन
शीतलता शांति अनुभूति
अनुभव संचार!!
शीतलता सौम्य
विनम्र अचार व्यवहार
घृणा मुक्त युक्त सदाचार
ठंडी हवा के झोंके
मौसम तपन अगन
कि स्पर्श स्पर्शी शरद
अनुराग!!
ठंडी हवा के झोंके
तपन अगन पसीने
कि बुँदे जैसे ओस कि
एहसास!!
समाज सम्बन्धो कि
गर्मी में संयम संतुलन
वैचारिक संस्कार!!
ठंडी हवाओ सा
जैसे गर्म लोहे पर
प्रेम कि वर्षात!!
ज्ञान का प्रकश
गुरुतर गंभीर हूँ मै
क्षुद्र नहीं विराट हूँ मै
घनघोर अंधकार में
दीप प्रकाश हूँ मै
तमस मिटाने वाला
ज्ञान हूँ मै!!
गर मुझमे बदलाव किस
काम बात का ज्ञान हूँ मै!!
बोध सत्य ज्ञान हूँ मै
विनम्र सौम्य संस्कार हूँ मै
जिस डाल पैर बैठा उसी
डाल को काटने वाले का
बदलाव कालिदास हूँ मै!!
मर्यादा महिमा अहंकार
नहीं सात्विक आचरण
व्यवहार हूँ मै!!
सयम संतुलित भूषण
आभूषण आत्म
सत्यार्थ हूँ मै!!
ज्ञान ही चिंतन
ज्ञान ही विज्ञान
विधि विधान ज्ञान हूँ मै
सद्गुण गरिमा सुधार
स्वर साधना बैभव
वैराग्य हूँ मै!!
गुण कर्म का बदलाव
हूँ मै वाल्मीकि सा क्रूर
डांकू का बदल देता संसार
ज्ञान हूँ मै!!
गर मुझमे बदलाव नहीं
तो किस काम का
ज्ञान हूँ मैं!!
डांकू ब्रम्हार्षी बन जाए
अंतर मन अज्ञान अन्धकार
छट जाए तत्व तथ्य
ज्ञान हूँ मै वाल्मीकि का
बदला संसार हूँ मै!!
दर्पण मान शोध सुधार कि
प्रक्रिया पराक्रम पुरुषार्थ हूँ मै
गर मुझमे बदलाव नहीं किस
काम का ज्ञान हूँ मै!!
कर्म धर्म बोध दायित्व
बुद्धि प्रबोध परमार्थ हूँ मै
भोग विलास वासना के
नेत्र सहित अन्धो का पथ
दर्शक दृष्टि दिशा विश्वास
ज्ञान हूँ मै!!
काम वासना से
वसीभूत राम रखा
रत्नवली उपदेश
हाड मास देह शरीर
वसी भूत वासना त्याग
ज्ञान भक्त बैराग्य तुलसी
दास हूँ मै ज्ञान हूँ मै!!
वीणा पाणि कि वीणा
झंकार हूँ मै माँ सरस्वती
मेरी अधिष्ठांत्री देवी ऋषि
रत्नवली बिद्योत्मा माँ
सरस्वती स्वरुप
दैदिप्यामान
सैर्य प्रकाश हूँ मै!!
गर मुझमे बदलाव नहीं
किस बात का ज्ञान हूँ मै
तमसो मां ज्योतिर्गमय
ज्ञान गर्व अभिप्राय हूँ मै!!
श्रम सत्यार्थ
श्रम शक्ति है श्रम भक्ति है
श्रमिक श्रम का आधार
श्रमिक सारा संसार!!
बौद्धिक श्रम शारीरिक श्रम
श्रम के अध्याय आयाम
श्रम से ही विकास निर्माण!!
श्रम से ही कल
कारखाने जल विद्युत
पथ संचार श्रम धर्म है
श्रमिक मर्म है श्रम कर्म
सत्यार्थ ब्रह्माड!!
श्रम योग है श्रमिक
श्रम तेज का शक्ति सत्कार
श्रम श्रमिक तप ज्ञान
श्रम श्रमिक का अनुष्ठान!!
भिक्षाटन श्रम श्रमिक
अपमान श्रम श्रमिक
अभिमान श्रमिक हाथ
नहीं पसारे किसी
व्यक्ति के आगे श्रमिक
दानी दाता खून पसीने से
करता खजाना कुबेर निर्माण!!
किले महल का निर्माता
बड़े बड़े माल आटालिकाओ
का निर्माता श्रम श्रमिक का
करिश्मा कल्याण!!
श्रम कि महिमा का
युग समय काल समाज
श्रम से ब्रह्मा करते ब्रह्माण्ड
निर्माण!!
श्रम ही कर्मयोग का गीता
का सार सत्यार्थ श्रम
श्रमिक का शास्त्र
शास्त्र!!
श्रम समर का विजेता
श्रमिक श्रम का मर्मग्य
श्रम महिमा महत्व का
रचनाकार!!
श्रमेव जयते कार्यमेव जयते
सत्यमेव जयते का यथार्थ!!
कुरुक्षेत्र के समर भूमि से
कृष्णा का गीता ज्ञान
कर्मनेवाधिकारस्या श्रम
शक्ति का श्रमिक अवहान
कल युग पथ सिद्धांत!!
श्रम महिमा श्रमिक गरिमा
का ही युग युग ब्रह्म ब्रह्माण्ड
श्रम सत्य श्रमिक अस्ति अस्तित्व
युग ब्रह्माण्ड!!
कहते है अवनी हैं
गोल धुरी पर अपने
सूरज के चक्कर लगती
समय काल अतीत वर्तमान
भविष्य निर्माती!!
श्रम श्रमिक महिमा के
ना जाने कितने देश
श्रम श्रमिक ने बदल डाले
अवनी के इतिहास भूगोल!!
श्रमिक महिमा कि गरिमा
का वंशज अन्नदाता किसान
जन जन का अभिमान!!
श्रम श्रमिक का अतीत
वर्तमान भविष्य पल
प्रहर सूर्योदय सूर्यास्त!!
महिमा श्रमिक श्रम गौरव
गरिमा मान युग समय
समाज उदय अस्त
अभिलाषा विश्वास!!
शोषण विकास हेतु इस कदर क्यों भाता
युग काल समय
प्रक्रिया परम्परा है
विकास!!
प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता
पराक्रम का परिणाम
विकास!!
पथ विकास पथ में
जाने कितने प्राणी
परिवेश बन जाते
इतिहास!!
विकास युग समय
काल प्रारबद्ध प्रवाह
अतीत कि अवनी आधार
आकाश विकास!!
सामाजिक सामयिक
व्यक्तिगत व्यक्तित्व का
ह्रास उत्थान विकास!!
अंधा धुंध दौड़ विकास
प्रकृति प्राणी पर्यावरण
पोषण शोषण का ही
वर्तमान विकास!!
एक दूजे से आगे
निकलने कि होड़ दौड़
एक दूजे के शव सीढ़ियों
पर चढ़ने कि दक्षता है
विकास!!
शोषण विकास क़ो इस
कदर है क्यों भाता शोषण के
पालन पोषण का विकास
रिश्ता नाता!!
पल प्रहर शोषण
समाप्ति कि नई कहानी
लिख जाता विकास!!
शोषण इस कदर है भाता
बिन शोषण पोषण का पथ
पराक्रम ही विकास!!
विकास का नहीं कोई
रास्ता वास्ता!!
प्रश्न पूछता है वर्तमान
विकास क़ो शोषण
इस कदर क्यों है भाता
बिना शोषण के क्यों नहीं
आ सकता विकास!!
वाणी का
उद्घोष हर उद्भव उद्घगम का
अंत अस्तित्व नव प्रकाश
परचम है लहराता विकास!!
तीखे का स्वाद न जाने
सरस् मधुर का कैसा
व्यख्याता!!
तीखा मिट जाने पर
मधुर मुस्कान
स्वाद बताता विकास!!
सत्य यही है
समय समाज
युग काल राष्ट्र कि
संस्कृत संस्कार
शोषण सिद्धांत ही
विकास!!
सच्चाई स्वीकार करो
शोषण विकास क़ो इस
कदर क्यों भाता?
शोषण विकास कि
ध्वनि प्रतिध्वनि प्रतिबिम्ब से
बाहर निकलो मेरी भी है
इच्छा!
सांयमित संतुलित
व्यवहारिक तप ज्ञान का
तना बाना हो विकास!!
प्रेम क़े रंग हज़ार
प्रेम जगत में सत्य सार
प्रेम जीवन उत्सव उत्साह
प्रेम भाव अभिव्यक्ति प्रवाह!!
प्रेम प्रारबद्ध भाग्य भगवान
प्रेम परमार्थ करुणा दया
युग युगानंतर इतिहास!!
प्रेम क्रांति कांटे शूल
बन जाए फूल प्रेम परस्पर
शांति सूत्र सूक्त मंत्र
शस्त्र शास्त्र!!
उन्नति उन्नयन उपकार
उद्धार प्रेम सरोवर
गागर में सागर
प्रेम ज्ञान वैराग्य!!
तमस का उजियार
द्वेष दम्भ घृणा परित्याग
प्रेम संसार!!
प्रेम पराक्रम
प्रेम इच्छा और परीक्षा
सदभाव!!
प्रेम सत्य
प्रेम अस्ति अस्तित्व
प्रेम जीवेत जाग्रत
निरझऱ अविरल
आदि अनंत
प्रसंग परिणाम!!
प्रेम भक्ति है
प्रेम शक्ति है
प्रेम जन्म जीवन
प्रेम आधार अंतर्मन से
प्रसफुटित अनंत
आकाश प्रकाश!!
पिता हमारे
पालन हारे प्राण प्यारे
भाग्य विधाता
जन्म दाता भगवान
पिता हमारे!!
दुःख चाहे जितने आए
विचलित नहीं होते
मेरे लिए जीते सांसे
धड़कन कवच हमारे!!
पथ जीवन पर हाथ
पकड़ चलना सीखलाते
जन्म जीवन मर्म धर्म
बताते तात हमारे!!
मित्र शत्रु का भेद समझते
मार्ग दर्शक दृष्टि दाता
जीवन का अंधकार
मिटाते पितृ हमारे!!
संसय भ्रम मिटाते
भय मुक्त निडर निर्भीक
बनाते जन्म जीवन रहस्य
समझते जनक हमारे!!
सम्बन्ध रिश्ते नातो का
तना बाना गूढ
रहस्य समझते आदर
आदर्श आदरणीय
बताते बाप हमारे!!
गुरु प्रथम दर लें जाते
उद्देश्य उद्धभव जीवन दिखाते
प्रतियोगिता प्रतिस्पर्धा संघर्ष
शस्त्र शास्त्र गुण धर्म पथ राग
राजनीति बताते बापू हमारे!!
अवनी पर पग आशा
आकाश आस्था विश्वास
हमारे शक्ति भक्ति भाव
पढ़ाते पितृ हमारे!!
सौर्य साहस कि शिक्षा
वेद धर्म ज्ञान विज्ञानं
जीवन मूल्य बताते
लौह बनाते पिता हमारे!!
जीवन का सूत्र सूक्त बताते
न झुकने न टूटने कि शिक्षा
अडिग चट्टान फौलाद
आशाओ का औलाद
बनाते बाप हमारे!!
जाने कितने कष्ट क्लेश
भूल जाते मेरे लिए किसी
कमी अनुभव अनुभूति निकट
नहीं आने देते जनक हमारे!!
कन्धा आकाश से ऊँचा
सिंघासन गांव नगर गली
मोहल्ले बतलाते
कुल का गौरव जग
अभिमान प्यारा कहते
तात हमारे!!
राज दुलारा हैं मेरा नाम
करेगा रौशन
मेरी बूढी नज़रो कि
रौशनी मेरी जीवन
है पूंजी सारा हैं आशा
आकाश आशीर्वाद
सजाते जनक हमारे!!
जीवन
जीवन चलता
समय के साथ
उत्सव उत्साह
जीवन व्यवहार
सुख दुःख
विरह वियोग
जीवन सत्यार्थ!!
रिश्ते नाते सम्बन्ध
रीती रिवाज़ जीवन
तना वाना अर्थ
अर्थात समाज!!
प्रेम पराक्रम
युद्ध योद्धा बोध
यथार्थ जीवन
कुरुक्षेत्र धैर्य धीर
वीर पुरुषार्थ!!
प्रतिस्पर्धा प्रतियोगीता
द्वेष दम्भ घृणा दनवता
पशुवत प्रतीकर!!
उबड़ खाबढ़ ऊंच नीच
जीवन पथ अधियार
सयम सौम्य विनम्र
जन्मेजय जीवन
संस्कृति संस्कार!!
खट्टे मीठे तीखे अनुभव
अनुभूति जोखिम संघर्ष
जीवन में हर्ष विशाद
जीवन न्यायोचित
विरोचित मानव
मनवता संस्कृति
शाश्वत संवाद
संचार!!
दिल तो बच्चा है
माता पिता कि
आशा विश्वास
बच्चा बचपन!!
खुशियों का संसार
क्लेश कष्ट नहीं
आभास पल प्रहर
नव उत्साह बच्चा
बचपन!!
निर्मल मन
निर्विकार हृदय
प्राणी मात्र से
अपनापन बच्चा
बचपन!!
सिंह स्वान में
अंतर नहीं
सबसे सहज
अबुझ रिश्ते नातो
नेह स्नेह का
बंधन बचपन!!
पराए का बोध नहीं
कहती है दुनियां
बच्चे और भगवान
एक दूजे का दर्पण!!
चिंता शोक मिलन
विरह वियोग नहीं
निश्चिंत सुख
खुशियों का
बचपन!!
शैने शैने बीत जाता
बचपन किशोर
स्वर शंखनाद
माँ बाप क़े
विश्वास का
अभिनंदन
बचपन!!
बचपन कि
यादें ना चिंता
ना पल प्रहर
निकट आती
कब्र चिता का
भय निर्भीक
ख़ुशी पल प्रहर!!
आयु बढ़ती गयी
किशोर शांकनाद
हुआ प्रत्यक्ष
माँ बाप कि
आशाओ का
अभिमान कुछ
पूर्ण अपूर्ण!!
बचपन माँ आँचल
दुनियां संसार
बाप का कन्धा
संसार का ऊँचा
सिंघासन!!
बचपन बीता
आई जवानी
स्वंय माता पिता
बीते सपने जैसा
बचपन स्व संतान
पीढ़ी परम्परा का
जीवन दर्शन!!
बुजुर्ग माँ बाप कि
आशाओ का दीप
बचपन चिराग द्वेष
दम्भ घृणा दुनियां
समाज का अहं
भाग अवशेष!!
भाई भाई का शत्रु
माँ बाप का बटवारा
बचपन कि बाते ना
कोई अपना ना कोई
पराया दिवा स्वप्न
छलावा!!
निहित स्वार्थ कि
खातिर दुनियां का
हर रिश्ता नाता बात
भूखा नंगा बात बात
पर खून का
प्यासा!!
प्रेयासी पत्नी
पुत्र भाई बहन सब
अपने अपने हस्ती मस्ती
सुख स्वार्थ भोग भाग्य
संग व्यक्तिगत विशेष!!
बचपन कि बाते यादे
सबसे अपनापन सारा
संसार प्रेम प्यार कि
अवनी वंदन व्यर्थ!!
दिल कि चाहत फिर
जन्म लूँ बच्चा बन
बचपन का ही
हो जाऊं सनक
सनद सनक कुमार
बाल रूप के ऋषि कुमार
बन युगों युगों सृष्टि कि
दृष्टि बनता जाऊ!!
दिल बचपन कि
स्मरण यादों संग
जीवन अवसान को
बढ़ता जाता
दिल बच्चा ही
रह जाता!!
दिल बच्चा
बचपन कि
चाहत में
घुट घुट
जीता जाता
क्योंकि दिल बच्चा
ही रहता
अनुभव अनुभूति
मात्र जीवन पथ
कहलाता!!
बीते पल प्रहर कि
स्मरण यादें ही रह
जाती साथ दिल बच्चा
हैँ मात्र एहसास!!
क्योंकि बीते हुए लम्हो
कि कशीश कसक मात्र
साथ बीते लम्हें पल प्रहर
लौट कर नहीं आता
बचपन दिल बच्चा
ही रह जाता!!

नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गोरखपुर उत्तर प्रदेश
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अति सुन्दर कविताएं हैं आपकी ।