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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Guru Mahima
    कविताएँ

    गुरु की महिमा

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    गुरु की महिमा गुरु की महिमा सबसे न्यारीगुरु ज्ञान की खान है।राह दिखाते हैं सबको हीमिल जाते भगवान है।। बीच भंवर में डूब ही जातागुरु की बात न मानी,अमृत – रस बरसाने वालीहै सदगुरु की वाणी।गुरु के चरणों में ही रहकरमिल जाता सम्मान है।गुरु की महिमा…..।। पुष्प चढ़ाऍं – शीश झुकाऍंकरें वंदना मिलकर सारे,खुशियों की…

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  • शुभम संस्था का यादगार कवि सम्मेलन
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम संस्था का यादगार कवि सम्मेलन, विनय सागर जायसवाल की अध्यक्षता में हुआ अद्भुत आयोजन”

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था की संस्थापक अध्यक्ष सत्यवती सिंह सत्या ने मासिक कवि सम्मेलन के अतिरिक्त अपने बेटे शुभम की पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन का आयोजन खुशहाली सभागार में उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे समाजसेवी सुरेन्द्र अग्रवाल लाला , विशिष्ट अतिथि रहे समाजसेवी…

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  • आत्म जागरण का पर्व: गुरु पूर्णिमा
    आलेख

    आत्म जागरण का पर्व: गुरु पूर्णिमा

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    सामान्यतया सभी जीवों का जन्म माता-पिता के सहयोग से होता है वह चाहे पशु पक्षी हो या मानव । परंतु मानव जीवन में ही हम गुरु ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। मां पालन पोषण तो कर सकती हैं ,पिता आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं परंतु जीवन में व्याप्त ज्ञान रूपी अंधकार से निकाल कर…

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  • Mohini Nari
    आलेख

    नारी शक्ति के नौ रूपों कि आराधना नौरात एवं वर्तमान में भारत में नारी का यथार्थ –

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    किसी भी युग या समाज के अस्तित्व कि कल्पना ही नही की जा सकती है ब्रह्म भी बिना नारी शक्ति के अधूरा है यदि सनातन में ब्रह्मा ,विष्णु ,शंकर देव है तो सरस्वती,लक्ष्मी ,पार्वती त्रिदेवियों नारि शक्ति बिना देव शक्ति संतुलित नही होती चूंकि ब्रह्म सत्ता निरपेक्ष एव विभेद रहित होती है अतः पूर्ण ब्रह्म…

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  • धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्र
    आलेख

    धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्र

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    उत्तर प्रदेश में एटीएस ने एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें विदेशी फंडिंग के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये 40 खातों में भेजे गए। मुख्य आरोपी ‘छांगरू बाबा’ उर्फ जमशेदुद्दीन के नेतृत्व में यह गिरोह ऊंची जाति की लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपये की दर से धर्मांतरण कराता था। यह मामला…

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  • पुनरावृत्ति
    कहानियां

    पुनरावृत्ति

    ByAdmin July 8, 2025July 8, 2025

    कक्षा 12 में पढ़ने वाली प्रियांशी अपनी सहपाठी राधा के साथ जनरल स्टोर से कुछ सामान खरीदने के लिए गई। जब प्रियांशी सामान खरीदने और दुकानदार से बातें करने में व्यस्त थी तो राधा ने चुपके से नेल पॉलिश और फेसवाश को चुराकर अपने बैग में छुपा लिया। यह सब करते प्रियांशी ने राधा को…

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  • आखिरी रास्ता
    कहानियां

    आखिरी रास्ता

    ByAdmin July 7, 2025July 7, 2025

    अनपढ़ रामू मजदूरी करता था। एक दिन प्रात 8:00 बजे जैसे ही वह काम पर पहुँचा, तो उसके मजदूर साथी सौरभ ने उससे कहा- “रामू भैया, तुम आज काम पर क्यों आए हो? तुम्हारे घर तो मेहमान आए हुए हैं। तुम्हें तो आज उनके साथ होना चाहिए था। एक दिन काम पर ना आते तो…

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  • गुनहगार
    कहानियां

    गुनहगार

    ByAdmin July 7, 2025July 7, 2025

    कोतवाली के सामने से गुजरते वक्त… अचानक मेरी नज़र कोतवाली के बाहर गुमसुम, मायूस बैठी चिर परिचित महिला पर पड़ी। ऐसा लगा जैसे कि वह महिला मेरे मित्र राजन की पत्नी सुनीता हो। हालांकि मैं कोतवाली से थोड़ा आगे निकल चुका था, लेकिन मेरे दिल ने कहा… जरूर कोई बात है। तभी वे कोतवाली आयी…

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  • Sawan ke Jhoole
    आलेख

    सावन मनभावन: भीगते मौसम में साहित्य और संवेदना की हरियाली

    ByAdmin July 7, 2025July 7, 2025

    सावन केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि भारतीय जीवन, साहित्य और संस्कृति में एक गहरी आत्मिक अनुभूति है। यह मौसम न केवल धरती को हरा करता है, बल्कि मन को भी तर करता है। लोकगीतों, झूले, तीज और कविता के माध्यम से सावन स्त्रियों की अभिव्यक्ति, प्रेम की प्रतीक्षा और विरह की पीड़ा का स्वर बन…

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  • पब्लिक स्कूल
    आलेख

    बचपन के दुश्मन बने पब्लिक स्कूल

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    याद आते हैं बचपन के वह दिन जब लोग गांव के बगिया में प्राथमिक ज्ञान प्राप्त करते थे। 5- 6 वर्ष की उम्र में पढ़ने जाया जाना शुरू किया। आराम से सुबह 9:00 बजे घर से निकलते थे । उछलते कूदते मौज मस्ती करते विद्यालय 10:00 बजे पहुंचते । हमें कभी होमवर्क का भी ज्यादा…

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© 2026 TheSahitya - द साहित्य

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