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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • बच्चों को यांत्रिक मानव न बनाएं
    आलेख

    बच्चों को यांत्रिक मानव न बनाएं

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    वर्तमान समय में अभिभावक बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के नाम पर उन्हें महंगे स्कूलों में भर्ती कराना, कोचिंग क्लास लगा देना मात्र अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लिया है। उनको गप्पे लड़ाना तास खेलना , पार्टियों में मौज मस्ती करने का तो समय होता है परंतु बच्चों के साथ बैठकर प्रेम से दो शब्द…

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  • चातुर्मास
    विवेचना

    चातुर्मास अस्तित्व का एक सूक्ष्म विराम

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    चातुर्मास — केवल पंचांग के चार मास नहीं, बल्कि मानवीय चेतना के गहरे आरोहण का एक सनातन सूत्र है। यह मात्र एक धार्मिक अवधि नहीं, अपितु जीवन के विराट चक्र में आत्म-अन्वेषण और पुनर्संयोजन का एक दार्शनिक पड़ाव है। आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की प्रबोधिनी एकादशी तक फैला यह काल, समय के प्रवाह…

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  • बोल म्हारी माटी
    पुस्तक समीक्षा

    पुस्तक समीक्षा: “बोल म्हारी माटी”

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    पुस्तक समीक्षा: “बोल म्हारी माटी”लेखक: डॉ. सत्यवान सौरभप्रकाशक: आर.के. फीचर्स, प्रज्ञानशाला, भिवानीमूल्य: ₹260/-पृष्ठ संख्या: 120ISBN: 978-7-1862-8282-6भाषा: हरियाणवी (देवनागरी लिपि)विधा: काव्य-संग्रह | लोक साहित्य | समकालीन सामाजिक कवितासमीक्षक: वेदप्रकाश भारत माटी री बोली में घुली कविता री आत्मा हरियाणा रा नाम आवै तो मन मैं दूध-दही, खेत-खलियाण, पहलवान, चौपाल, बागड़ी-जेबड़ी बोली अर सादगी भर्यी जिन्दगी सै।…

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  • पूर्णमद के फ्लैप पर
    पुस्तक समीक्षा

    पूर्णमदः के फ्लैप पर

    ByAdmin July 3, 2025July 3, 2025

    प्रेम की न कोई भाषा होती है,न परिभाषा,न सीमाएँ उसे सीमित करती हैं , न दूरियाँ उसे ओझल करती है, वह दूरी जीवन और मृत्यु भी क्यों न हो! “पूर्णमिदम् ” के बाद सरोज कौशिक का यह उपन्यास ” पूर्णमदः”; अलग-अलग होते हुए भी ये दोंनो उपन्यास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।वह अध्यात्म के आलोक…

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  • CET के नाम पर कोचिंग माफिया: हरियाणा में शिक्षा का बढ़ता सौदा
    आलेख

    CET के नाम पर कोचिंग माफिया: हरियाणा में शिक्षा का बढ़ता सौदा

    ByAdmin July 3, 2025July 3, 2025

    “कुकुरमुत्तों की तरह उगते कोचिंग सेंटर: CET या लूट की नई राह?” CET का चक्रव्यूह और कोचिंग का जाल हरियाणा में CET परीक्षा लागू होने के बाद जिस रफ्तार से कोचिंग सेंटर गली–गली उग आए हैं, वह न केवल शिक्षा के व्यवसायीकरण का प्रमाण है, बल्कि बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का क्रूर दोहन भी है।…

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  • कौन है नेता कौन अभिनेता
    कविताएँ

    कौन है नेता कौन अभिनेता

    ByAdmin July 2, 2025July 2, 2025

    कौन है नेता कौन अभिनेता कौन है नेता कौन अभिनेताअब पहचानना है मुश्किल। भाषण की जगह अब गीत है सुनते,गीत गीत में भाषण को हैं रचते, भाषण कम अब व्यंग ज्यादा है कसते,एक दूजे की टांग खींचतेनहीं किसी को बक्शते है। टीवी सीरियल से ज्यादाकिरदार इसमें दिखते हैं । बड़े-बड़े नेता अभिनय के लिए बड़े-बड़े…

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  • ऐसा क्यों
    कहानियां

    ऐसा क्यों?

    ByAdmin June 30, 2025July 7, 2025

    बदहवास हालत में, पसीने से तरबतर, घबराया हुआ श्याम तेजी से घर में घुसा और दोगुनी तेजी से घर का दरवाजा बंद कर लिया… और भाग कर अपने आप को एक कमरे में छुपा लिया। विधवा मां धर्मवती यह सब अपनी आंखों से देख रही थी। उन्हें बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि अचानक श्याम…

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  • विद्यालय का पहला दिन एक नई शुरुआत की प्रेरणा
    आलेख

    विद्यालय का पहला दिन: एक नई शुरुआत की प्रेरणा

    ByAdmin June 30, 2025June 30, 2025

    गर्मियों की तपती दोपहरों, आम की मिठास, दोपहर की सुस्त नींदों और दादी-नानी की कहानियों के बीच बीता ग्रीष्मकालीन अवकाश अब अपनी समाप्ति की ओर है। प्रकृति ने जैसे ही अपने स्वरूप को थोड़ा शांत किया, बादलों ने धूप को ढकना शुरू किया, स्कूल की घंटियाँ एक बार फिर बच्चों के जीवन में गूँजने लगीं।…

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  • दृष्टिकोण
    कहानियां

    दृष्टिकोण

    ByAdmin June 30, 2025June 30, 2025

    कोचिंग सेंटर पर निधि मैम बच्चों को एग्जाम की तैयारी करवा रही थी। उसी दौरान एक महिला फटे-पुराने, मैले-कुचैले कपड़ों में अपनी गोद में, एक तीन वर्ष के बच्चे व एक हाथ में एक थैला(जिसमें अनाज वगैरह कुछ था) लेकर कोचिंग सेंटर में दाखिल हुई और यह कहकर भीख मांगने लगी, “बहन जी, भैया जी,…

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  • चूल्हे से चाँद तक
    पुस्तक समीक्षा

    “चूल्हे से चाँद तक” — चूल्हे की आँच से चाँद की कविता तक की यात्रा

    ByAdmin June 29, 2025June 29, 2025

    पुस्तक समीक्षा प्रियंका सौरभ का यह काव्य संग्रह ‘चूल्हे से चाँद तक’ केवल कविता नहीं, स्त्री आत्मा की यात्रा है। यह वह आवाज़ है, जिसे सदियों से दबाया गया, पर वह फिर भी जलती रही – रोटियों के साथ, परातों के बीच, और आँसुओं में घुली स्याही के माध्यम से। इस संग्रह की कविताएं परंपरा…

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© 2026 TheSahitya - द साहित्य

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