शूल शैया
शूल शैया पर लेटे भीष्म पितामह के इच्छा मृत्यु के वरदान को आज अभिशप्त साबित करता ये एक-एक पल, एक -एक युग सा भीष्म पितामह को महसूस हो रहा था। दर्द जिस्म के पोर – पोर से लहू बनकर सैलाब ला चुका था। विडंबना यह कि मुख से आह भी निकालना स्वयं का…
पिता, यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी सत्ता है जो हमारे जीवन के ताने-बाने को बुनती है। मातृ दिवस पर जितना भावुक उद्रेक और काव्यमय अभिव्यक्ति होती है, पितृ दिवस पर उतनी सहजता से नहीं दिखती। शायद इसलिए कि पिता का प्रेम अक्सर मौन, अदृश्य और कठोरता की चादर ओढ़े होता है। यह…
छाया है पिता बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वोचाहता पूरे हों अपनों के सपने।बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद हैपिता जीवन की इक सौगात है।जिनके सिर पे…
मौर्य भवन जवाहरपुरी बदायूं में स्व.वीरेन्द्र कुमार सक्सेना जी की स्मृति में कविसम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन बरेली के मशहूर उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान द्वारा यह लगातार चौथा आयोजन है। इस अवसर पर मुख्यातिथि रहे बरेली के मशहूर कवि हिमांशु श्रोत्रिय तथा जानी मानी…
“मौन की मुस्कान” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, एक स्त्री की आत्मा से निकली आवाज़ है। प्रियंका सौरभ की रचनाएँ जीवन, प्रेम, संघर्ष, और सामाजिक अन्याय को गहरे संवेदनात्मक और वैचारिक धरातल पर उठाती हैं। हर कविता मौन को भाषा और चुप्पी को प्रतिरोध में बदलती है। चाहे वह सरकारी स्कूलों की आवाज़ हो या…
संध्या मैडम ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “बच्चों कल पर्यावरण दिवस है। कल हम सभी शिक्षक व बच्चें पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेंगे तथा बाकी लोगों व बच्चों को भी पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित करेंगे। पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी बच्चे अपने घर से एक-एक पौधा लेकर आएंगे और उसको स्कूल में…
2 साल बाद एक दिन राजेंद्र ने अपने मित्र एवं पूर्व शिक्षक साथी संतोष को कॉल की और उनसे पूछा- “संतोष भाई, कैसे हाल-चाल है? घर परिवार में सब ठीक है?” “सब बढ़िया है राजेन्द्र भाई। तुम सुनाओ।” संतोष ने कहा। “हमारे यहाँ भी घर परिवार में सब ठीक हैं भैया। तुमसे बात किये हुए…
रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को ‘होम-डिलीवरी’ में बदल दिया है। दिलचस्पी कम होते ही लगाव की नींव दरकने लगती है—माँ-बेटे के फ़ोन-कॉल में ‘ऑर्डर डिलिवर्ड’ का नोटिफ़िकेशन रह जाता है, दोस्ती ‘वीडियो क्लिप फ़ॉरवर्ड’ तक सिमट जाती है, और दाम्पत्य…
मुलाक़ात कम नहीं होती अजीब बात है यह रात कम नहीं होतीमेरी निगाह से ज़ुल्मात कम नहीं होती मुझे भी उनसे मुहब्बत है कह नहीं सकतामुहब्बतों पे मगर बात कम नहीं होती वो एक दिन तो मुहब्बत के तीर छोड़ेंगेहमारी उनसे मुलाक़ात कम नहीं होती तेरे हुज़ूर वफाओं का तज़करा क्या होतेरे करम की करामात…
काव्या की डायरी उठाकर अलमारी में रखते समय अचानक डायरी से एक पर्ची निकलकर नीचे गिरी। काव्या की मम्मी ने उस पर्ची पर लिखा पढ़ना शुरू किया-“तुम बेहद खूबसूरत हो। तुम्हारी आंखें, तुम्हारे होंठ, सब मुझे तुम्हारी ओर खींचते हैं। जी करता है कि बस तुम्हें देखता रहूं। तुम्हारी आवाज़, तुम्हारी बातें सुनता रहूँ। तुम्हारी…