Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • birsa munda
    निबंध

    बिरसा मुंडा: एक आदिवासी नायक, एक “उलगुलान” का प्रतीक और आधुनिक भारत की चेतना

    ByAdmin June 10, 2025June 10, 2025

    बिरसा मुंडा, भारतीय इतिहास के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम भूमिका निभाई, बल्कि अपने समुदाय के अधिकारों, संस्कृति और अस्मिता के लिए भी आजीवन संघर्ष किया। उनका नाम सुनते ही ‘उलगुलान’ (महान विप्लव) की गूंज सुनाई देती है, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी ज़मींदारों…

    Read More बिरसा मुंडा: एक आदिवासी नायक, एक “उलगुलान” का प्रतीक और आधुनिक भारत की चेतनाContinue

  • Vriksh Sanrakshan
    आलेख

    विश्व पर्यावरण दिवस: एक वैश्विक चेतना और सतत भविष्य की दिशा में एक विस्तृत विश्लेषण

    ByAdmin June 7, 2025June 7, 2025

    विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day – WED) एक ऐसा वार्षिक कार्यक्रम है जो हर साल 5 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन पर्यावरण संरक्षण के महत्व, पर्यावरणीय चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक पर्यावरणीय कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए समर्पित है। 1972 में संयुक्त…

    Read More विश्व पर्यावरण दिवस: एक वैश्विक चेतना और सतत भविष्य की दिशा में एक विस्तृत विश्लेषणContinue

  • पर्यावरण
    आलेख

    पर्यावरण: एक दिन की चिंता नहीं, हर दिन की ज़िम्मेदारी

    ByAdmin June 4, 2025June 4, 2025

    आजकल सोशल मीडिया पर एक आम दृश्य देखने को मिलता है — लोग पौधे लगाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और फिर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। एक पौधा लगाकर फोटो डालना तो याद रहता है, लेकिन उस पौधे को रोज़ पानी देना, उसकी देखभाल करना अक्सर भुला दिया जाता है। नतीजा यह…

    Read More पर्यावरण: एक दिन की चिंता नहीं, हर दिन की ज़िम्मेदारीContinue

  • मैने बिरयानी खा ही ली
    संस्मरण

    ओर अंततः मैने बिरयानी खा ही ली..

    ByAdmin June 4, 2025June 4, 2025

    यह मेरे लिए बड़ी परेशानी वाली बात थी कि कोयम्बटूर में शाकाहारी होटल नही के बराबर है.. ईक्का दुक्का होंगी भी तो मेरी नजरो से नही गुजरी.. रेलवे स्टेशन पर ही होटल हरिप्रिया में मेरा मुकाम था और यही एक शाकाहारी होटल थी जहाँ मैं दक्षणी भारत का भोजन करता था।        शुरुआती कुछ दिन…

    Read More ओर अंततः मैने बिरयानी खा ही ली..Continue

  • अहिल्या
    आलेख

    अहिल्या : एक जीवनी – एक दर्शन

    ByAdmin June 3, 2025June 3, 2025

              राष्ट्र सेविका समिति ने  आरंभिक काल में ही देवी अहिल्या बाई होल्कर को कर्तव्य के आदर्शवादी रूप में माना है। गंगाजल की तरह निर्मल, पवित्र, पुण्यश्लोक देवी अहिल्या अपने ऐतिहासिक युग का स्वर्णिम युग रही हैं। उनके प्रति समस्त जनसमुदाय की श्रद्धा, निष्ठाभाव, आदर और अपनेपन की भावनात्मक को अभिव्यक्त, प्रतिबिम्बित करने वाली एक…

    Read More अहिल्या : एक जीवनी – एक दर्शनContinue

  • सवाल
    कहानियां

    सवाल

    ByAdmin June 2, 2025June 2, 2025

    “हेलो काव्या, मैं विनीता बोल रही हूँ। क्या तुमने एमएससी मैथ एंट्रेंस एग्जाम का फॉर्म भरा है??” “हां विनीता, मैंने भी फॉर्म भरा है। मैंने सुना है कि इस बार सभी का एग्जाम सेंटर बरेली कॉलेज बरेली को ही बनाया गया है।” “ठीक कह रही हो, मेरा एग्जाम भी बरेली कॉलेज बरेली में ही है।…

    Read More सवालContinue

  • जानलेवा आदत जो छूटे न
    कहानियां

    जानलेवा आदत जो छूटे न

    ByAdmin June 2, 2025June 2, 2025

    एक दिन अभिषेक अपने सेवानिवृत्त गुरु दिवाकर जी से मिलने उनके घर पहुँचा। गुरुजी को चरण स्पर्श करके उसने उनका हाल-चाल लेना शुरू ही किया था कि इतने में गुरु जी का लड़का आनन्द अपने मुँह को ढ़ककर कमरे में कुछ सामान लेने आता है। इस तरह मुँह को ढका हुआ देखकर अभिषेक ने आनंद…

    Read More जानलेवा आदत जो छूटे नContinue

  • अंतर्द्वंद्व
    कहानियां

    अंतर्द्वंद्व

    ByAdmin June 1, 2025June 1, 2025

    1996 की बात है। 12 वर्षीय मानव के घर पर गांव से उसके चाचा-चाची जी आये। चाची को समोसे बहुत पसंद थे। चाची ने आते ही समोसे खाने की अपनी इच्छा जाहिर की और बोली, “मुझे चेतराम के यहां के समोसे खाने हैं। बहुत दिनों से यहां आने की सोच रही थी, आज आई हूं…

    Read More अंतर्द्वंद्वContinue

  • reflection
    आलेख

    प्रतिबिंब

    ByAdmin June 1, 2025June 1, 2025

    गाँव के प्राचीन पीपल की घनी छाया तले, जहाँ कभी उनकी वाणी से विद्या के दीप प्रज्वलित होते थे, वहीं आज मास्टर शिवप्रसाद जीवन की संध्या बेला में एक शांत, संतुलित और सजग अस्तित्व के रूप में बैठे दिखाई देते हैं।उनका कुर्ता भले ही समय की मार से पुराना हो गया हो, पर उनके विचार…

    Read More प्रतिबिंबContinue

  • chhalawa
    कविताएँ

    छलावा

    ByAdmin May 31, 2025May 31, 2025

    छलावा उस धरा सेइस धरा तकउस गगन सेइस गगन तकउस जहां सेइस जहां तकउस परिवेश सेइस परिवेश तकउस गांव सेइस शहर तकका सफर…रहा नहीं आसानजिसने बदल दिएसारे अरमान…अपनों के साथजीने का सपनाबन कर…रह जाएगा सपनाजो हो नहीं सकताअब कभी अपनाअब अपनों को…नहीं दे पाते वो सम्मानजो थे कभी जीवन की जान श्याम सुंदर यह भी…

    Read More छलावाContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 12 13 14 15 16 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search