• लगा आज | Geet Laga Aaj

    लगा आज ( Laga Aaj ) लगा आज हँसने का दिन हैै , उसके मन बसने का दिन है . निकल गए जो बच राहों से , फिसल गए बहकी बाहों से . वे लम्हे कसने का दिन है . पड़ी चमेली अब ये झुलसी , तुलसी भी अब लगती हुलसी . गर्मी में चसने…

  • कजली तीज | Kavita Kajli Teej

    कजली तीज ( Kajli Teej ) देखो आया कजली (सत्तू) तीज का त्यौहार सखियां सब हो जाओ तैयार मेहंदी हाथों में रचाई करके सोलह श्रृंगार आई हरी- हरी चूड़ियां खनखन करती पायल भी छम छम है बजती बिंदिया की चमक अपार स्वस्थ रहे पिया खुशियों से भरा हो संसार सुहागिनें मंदिर में दर्शन को जाती…

  • हैरान नहीं है | Ghazal Hairan Nahi Hain

    हैरान नहीं है ( Hairan Nahi Hain ) सुन कर वो मेरा हाल परेशान नहीं है इस बात से दिल मेरा भी हैरान नहीं है आसानी से खा जाते हैं धोखा ये किसी से इंसान को इंसान की पहचान नहीं है ईमान की क़ीमत तो लगाते हैं हज़ारों जो मुझको ख़रीदे यहाँ धनवान नहीं है…

  • किस मूरत को हम पूजे

    किस मूरत को हम पूजे किस मूरत को हम पूजे, जिसमें प्राण प्रतिष्ठा है। या मन मन्दिर में मेरे जो, जिसमें मेरी निष्ठा है।।१ बिना प्राण की मूरत पूजे,क्या मुझको फल देगी । मेरी विनय पुकार सुनेगी, मेरे कष्टों का हल देगी।।२ जिस मूरत में प्राण भरा है ,वह मूरत क्या सच्ची है । जिसमें…

  • शंख नाद | Kavita Shankh Naad

    शंख नाद ( Shankh Naad ) माताओं, बहनों, बालाओं, तैयार हो जाओ ललनाओं, अब गूंज उठा है शंख नाद, हथियार उठाओ ललनाओं, मांगा अधिकार गगन मांगी, जब उफ है किया देहरी लांघी, फिर सबल भी कंधों को कर लो, अब अबला मत कहलाओ, अब गूंज उठा है शंख नाद, हथियार उठाओ ललनाओं, सदियों से बनी…

  • हम हैं | Ghazal Hum Hain

    हम हैं ( Hum Hain ) नज़र शल है,जिगर ज़ख़्मी है फिर भी ख़ंदाज़न हम हैं। न जाने किस लिए उनकी मुह़ब्बत में मगन हम हैं। हमारे नाम से मनसूब है हर एक जंग-ए-ह़क़। मिसालें जिनकी क़ायम हैं वही लख़्त-ए-ह़सन हम हैं। तनाफ़ुर के अंधेरों को मिटाने की ख़ता क्या की। फ़क़त इस जुर्म पर…

  • ज़रूरत है | Ghazal Zaroorat Hai

    ज़रूरत है ( Zaroorat Hai ) जो रूठे हैं फ़क़त उनको मनाने की ज़रूरत है मिटाकर दूरियों को पास जाने की ज़रूरत है उदासी ही उदासी है हमारे दिल की बस्ती में कोई धुन प्यार की छेड़ो तराने की ज़रूरत है गुज़ारी ज़िंदगी तन्हा किसी की याद में हम ने मगर इस दौर में हमको…

  • क्या तुम कभी | Kavita Kya Tum Kabhi

    क्या तुम कभी? ( Kya tum Kabhi ) हाँ, तुम मुझे जानते हो…, पर अगर प्रश्न करूँ, कितना जानते हो…? तुम अनमने से हो जाते हो, बहुत सोचते हो, पर जवाब क्या है? कुछ आदतों को बताते हो, पर स्त्रीत्व को नहीं समझ पाते हो। एकांत क्या है, यह स्त्री से पूछो। आदतों और व्यवहार…

  • जादूगर-सम्राट शंकर | कला के सच्चे उपासक

    जादूगर-सम्राट शंकर का हर शो पारिवारिक शो होता है। जादू ही एकमात्र ऐसा शो है, जिसके एक-एक महीने तक टिकट शो लगते हैं और भारी भीड़ जमा होती है। बड़े-से-बड़े सिंगर-डांसर इत्यादि के एक आध या दो प्रोग्राम ही होते हैं, जो पूरे परिवार के साथ बैठकर नहीं देखे जा सकते। शंकर अपनी कला के…

  • देखा इक दिन | Ghazal Dekha ek Din

    देखा इक दिन ( Dekha ek Din ) आंख दुश्मन की लाल कर रख दी हेकड़ी सब निकाल कर रख दी हाल आलस का ये हमारे है आज की कल पे टाल कर रख दी सच का परचम लगा है लहराने फिर हक़ीक़त निकाल कर रख दी हाथ उसके लगा नहीं कुछ पर सारी पेटी…