हैरान नहीं है

हैरान नहीं है | Ghazal Hairan Nahi Hain

हैरान नहीं है

( Hairan Nahi Hain )

सुन कर वो मेरा हाल परेशान नहीं है
इस बात से दिल मेरा भी हैरान नहीं है

आसानी से खा जाते हैं धोखा ये किसी से
इंसान को इंसान की पहचान नहीं है

ईमान की क़ीमत तो लगाते हैं हज़ारों
जो मुझको ख़रीदे यहाँ धनवान नहीं है

ख़ुद देख ले तू खोल के जा अपनी तिजोरी
सब कुछ है मगर दौलते – ईमान नहीं है

कश्ती को लगा दूँगा यक़ीनन मैं किनारे
मौजें हैं मचलती हुई तूफान नहीं है

सर अपना झुकाना पड़े कमज़र्फ के आगे
मंज़ूर मुझे इसलिए अहसान नहीं है

मैं ऐश करूँ अपनी अपना बेच के सागर
ऐसा तो मुझे कोई भी अरमान नहीं है

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

देख लिया | Geet Dekh Liya

Similar Posts

  • हे राजन | Ghazal Hey Rajan

    हे राजन ( Hey Rajan ) हे, राजन तेरे राज में,रोजगार नही है, मुफ़लिसों को वाजिब, पगार नही है। ==================== है खास जिनके धन के अंबार लगे है, देखो गरीब तुम्हारे, गुनाहगार नही है। ==================== ये कोई दुश्मन नही है तेरे तरस करो, भूखे है शोहरत के,तलबगार नही है। ==================== भर पेट खाना,बदन को छत…

  • तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी

    तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दीबुलंदी की हर इक निशानी लुटा दी ख़ुदा ने सँवारा सजाया चमन कोगुलों पे सभी मेहरबानी लुटा दी फ़िजाओं में नफ़रत का विष घोल कर केमुहब्बत की सारी कहानी लुटा दी ख़ज़ाना किया सारा खाली उन्होंनेकि हासिल हुई राजधानी लुटा दी करें रोज़ क़ुदरत…

  • बज़्म को अब न आज़माओ तुम

    बज़्म को अब न आज़माओ तुम बज़्म को अब न आज़माओ तुमशेरों में कुछ नया सुनाओ तुम बिन तेरे हम न जी सकेंगे अबदूर नज़रों से यूँ न जाओ तुम वो भी बेटी किसी के है घर कीअब न दुल्हन कोई जलाओ तुम अम्न का दीप है जलाया जबये अदावत भी अब मिटाओ तुम हो…

  • नज़र ने बोल दिया

    नज़र ने बोल दिया नज़र ने बोल दिया बू-ए-हाथ से पहलेन जाने किस से मिला है वो रात से पहले वो मेरे साथ ही ग़मगीन सा नज़र आयाजो हँस रहा था बड़ा मेरे साथ से पहले मुझे लगा ही था ये बात होने वाली हैसो देखना था तेरा हाल बात से पहले ख़बर बुरी ही…

  • झूठी बातों को फिर हवा देंगें

    झूठी बातों को फिर हवा देंगें   मौत को मेरी सब दुआ देंगें । झूठी बातों को फिर हवा देंंगें ।। बाद तेरे करूँ गिला मैं क्यूँ । प्यार दिल में तिरा दिखा देंगें ।। जो न खोजे कसूर है किसका । वे ही निर्दोष को सजा देंगें ।। तुम ही कर लो वफ़ा जरा…

  • मुस्कान ढूंढती है | Muskan Dhundhati Hai

    मुस्कान ढूंढती है ( Muskan Dhundhati Hai ) जो लुट चुका है अब वो सम्मान ढूँढती है । नन्ही कली चमन में मुस्कान ढ़ूढती है । काँटों के वास्ते वो गुलदान ढूँढ़ती है नादान है जहाँ में इन्सान ढूँढती है बेबस है ज़िन्दगी और गर्दिश में भी सितारे अब मौत का वो अपने परवान ढूँढती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *