• मृत्यु | Kavita Mirtyu

    मृत्यु ( Mrtyu ) चाँदनी तारों भरी रात में किसी देवदूत ने छू लिया ज्यूं कोई सितारा आसमां से गोते लगाकर किसी ने ज्यूं उसे हरी धरती की गोद में उतारा कोई विशाल पक्षी ज्यूं ड़़रा रहा हो हवा के रुख को कुछ बादल के टुकड़े ज्यूं छिपा दें सूरज कुछ पल को नजरअंदाज कर…

  • इच्छाओं का मर जाना | Ichchaon ka Mar Jana

    इच्छाओं का मर जाना अभी भी जीवित है पुष्प, शाख से टूट जाने के बाद, कर्म उसका महकना है, मंजिल से न बहकना है, हो जायेगा किसी प्रेमिका के नाम या आयेगा वीर की शैय्या पे काम, उसे अभी कर्तव्य पथ जाना है, अपने होने का फ़र्ज़ निभाना है वो जीवित है अपनी इच्छओं पर…

  • मैनेजमेंट गुरु- मां | Management Guru Maa

    वर्तमान समय में मैनेजमेंट के गुण सीखाने के लिए बड़े-बड़े इंस्टिट्यूट बन गए हैं । परंतु सबसे बड़ी इंस्टीट्यूट तो घर की मां है। जिससे यदि हम मैनेजमेंट के गुण को सीख सके तो जीवन सफल हो सकता है। आधुनिक माताएं जहां कारपोरेट जगत में सफलता के परचम लहरा रही हैं वहीं परिवार का मैनेजमेंट…

  • हस्ती | Kavita Hasti

    हस्ती ( Hasti ) बरसती बूंदों को गिनते हो क्यों लहराते सागर को देखिये व्यक्तिगत मे झांकते हो क्यों उसके परिणामों को देखिये माना कि वह आज कुछ नहीं उसके मुकाम को तो देखिये कदमों को उसके देखते हो क्यों कर रहे उसके प्रयासों को देखिये रोक पाने की उसे हस्ती नहीं तुम्हारी वह बिकाऊ…

  • शांति, संतोष और आनंद

    शांति, संतोष और आनंद   **** संतोष भी मेरे पास ही रहता था। जब मैं ! खेतों में जाता या फिर भैंसों को चराता। दोपहर को छाछ के साथ गंठा रोटी खाता था। ***** आनंद तो मुझसे दूर ही नहीं था कभी। कभी नदिया पे नहाने में ! कभी कभार के शादी ब्याह के खाने…

  • सीता कहे दर्द | Kavita Sita Kahe Dard

    सीता कहे दर्द ( Sita Kahe Dard ) बड़ी दर्द भरी मेरी कहानी। अँखियो में ला दे सबकी पानी।। जिनके लिए धरा पर थी आई। उन्हीं के द्वारा गई सताई।। वन को गई थी मैं प्रभु जी संग। रंग कर प्रभु की प्रीति-भक्ति रंग।। सृष्टि हितार्थ अग्नि में समाई। मेरी छाया मेरा पद पाई।। दुष्ट…

  • कितनी मुसीबत | Kitni Musibat

    कितनी मुसीबत ( Kitni Musibat )  यारों कितनी मुसीबत होती है इक जाॅ को मेरी जाॅ कहने मे, जब हो जाती है उनसे मोहब्बत उनको मोहब्बत कहने मे, हम वादा तो अक्सर करते नही पर अवसर बन ये आ जाते है, बन जाते है ये जी के जंजाल औल टूटें तो जी घबराते है, फिर…

  • बेजार | Kavita Bejaar

    बेजार ( Bejaar ) पढ़ लिखकर अब क्या करे, होना है बेजार। सौरभ डिग्री, नौकरी, बिकती जब बाजार।। अच्छा खासा आदमी, कागज़ पर विकलांग। धर्म कर्म ईमान का, ये कैसा है स्वांग।। हुई लापता नेकियां, चला धर्म वनवास। कहे भले को क्यों भला, मरे सभी अहसास।। गिरगिट निज अस्तित्व को, लेकर रहा उदास। रंग बदलने…

  • सुबह | Kavita Subah

    सुबह ( Subah ) अंधकार से उत्पन्न हुई एक किरण आकाश की गहराई से आई है। शिद्दत से प्रयास जारी रखकर, आशा की रोशनी संग मुसकाई है ।। ओस के सुखद स्पर्श से लबरेज पंछियों के कलरव सी मन को भाई है ।। सुबह की मंद मंद चल रही हवा पी के देस की महक…

  • दिल आ जाता है | Dil Aa Jata Hai

    दिल आ जाता है ( Dil Aa Jata Hai ) ये दिल कमवक्त किसी न किसी पर आ जाता है। भले ही सामने वाला इसे पसंद करे न करें। पर दिल उन्हें देखकर बहक जाता है। और मोहब्बत का बीज यही से अंकुरित होता है।। दिल की पीड़ा सहकर गीतकार बन गया। मेहबूब को फूल…