शांति, संतोष और आनंद

शांति, संतोष और आनंद

शांति, संतोष और आनंद

 

****

संतोष भी
मेरे पास ही रहता था।
जब मैं !
खेतों में जाता
या फिर
भैंसों को चराता।
दोपहर को
छाछ के साथ
गंठा रोटी खाता था।

*****

आनंद तो
मुझसे दूर ही नहीं था कभी।
कभी
नदिया पे नहाने में !
कभी कभार के
शादी ब्याह के खाने में !
मण्डलियों के साथ
रतजगे कर
राग रागनियां गाने में !
भड़भूंजे के यहां
अलहदा अनाज भुनाने में !
मकर संक्रांति
होली दीवाली
गूगा नवमी मनाने में !
नया सिमाया
लंगोट पहनकर
कुश्ती दंगल जाने में !
मांगी हुई जो
साइकिल मिल जाए
उसको खूब घुमाने में !

****

मैं और मेरा आनंद
तब
एक दूसरे को
खूब छकाते थे ।
परंतु तब
हमारे पास
पैसे नहीं आते थे।

*****

अब मेरे पास
खूब पैसे हैं।
पर पता नहीं क्यूं
ये मेरे पास
नहीं रह पाते हैं।
मैं इनको
पकड़ पकड़ कर लाता हूं
पर ये
भाग भाग कर
दौड़ जाते हैं !
हाथ नहीं आते हैं।

*****

इसलिए तो आजकल
शांति
संतोष
और आनंद
तीनों मिलकर
मुझे छकाते हैं।।

डॉ. जगदीप शर्मा राही
नरवाणा, हरियाणा।

यह भी पढ़ें :-

हरियाणा के कलमकार | Haryana ke Famous Sahityakar

Similar Posts

  • Kavita | कुंभ की धार्मिक महत्व

    कुंभ की धार्मिक महत्व ( Kumbh ka dharmik mahatva )   सनातन धर्म की पौराणिकता को, याद दिलाता है यह कुंभ । बारह वर्षों में एक बार ही , आता है यह कुंभ ।   सभी देवों का धरती पर , होता जिस पल आगमन । संघ साधु संत के सानिध्य का , अवसर दे…

  • प्रियवर

    प्रियवर   मेरे तन मन प्रान महान प्रियवर। प्रात:सांध्य विहान सुजान प्रियवर।।   इस असत रत सृष्टि में तुम सत्य हो, नित नवीन अनवरत पर प्राच्य हो, मेरे अंतस में तुम्हारा भान प्रियवर।।प्रात:०   ललित वीणा तार तुमसे है सुझंकृत, ये षोडस श्रृंगार तुमसे है अलंकृत, प्रेयसी का मान स्वाभिमान प्रियवर।।प्रात:०   प्रणयिका बन चरण…

  • संघर्ष पथ पर | Kavita Sangharsh Path par

    संघर्ष पथ पर, मानव सदा अकेला   स्वार्थी रिश्ते नाते परिवार समाज, सफलता संग अपनत्व भाव । विपरित कटु वचन प्रहार, शत्रुवत आचरण बर्ताव । आलोचना तीर अवरोध पर्याय, कदम कदम कंटक मेला । संघर्ष पथ पर,मानव सदा अकेला ।। लक्ष्य राह दिग्भ्रमित युक्ति, प्रेरणा अनुग्रह विलोपन । दमन आशा उमंग उल्लास, नैराश्य बीज घट…

  • आओ हम दिवाली मनाएं

    आओ हम दिवाली मनाएं आओ हम-सब साथ मनाएं दीवाली त्यौंहार,तमस की उमस दूर करें जलाएं दीप अपार।जगमग कर दे घर ऑंगन हो समृद्धि बौछार,सुखमय हो सबका जीवन महकें द्वार-द्वार।। इसदिन ही संपूर्ण हुआ श्री राम का वनवास,सीता-राम और लखन पधारे अपने निवास।झिलमिल करते दीप-जलाएं पर्व बना ख़ास,तब से चली आ रही परंपरा कार्तिक-मास।। इस अमावश…

  • यह घूंघट | Ghoonghat par Kavita

    यह घूंघट ( Yah ghoonghat )    चेहरें पर आएं नक़ाब या शायरी, या फिर आएं घूँघट का ही पर्दा। चल रही सदियों पुरानी यह रीत, कम हो रही आज बात गई बीत।। हट रहा यह घूँघट करने का पर्दा, दिख रहा चमकता हुआ ये चंदा। राज छुपे थें इस मुखड़े में अनेंक, सुना दिया…

  • रिमझिम-रिमझिम बारिश आई

    रिमझिम-रिमझिम बारिश आई   रिमझिम-रिमझिम बारिश आई। गर्मी सारी दूर भगाई।। बारिश ले कर आये बादल। भीग गया धरती का आँचल।। चली हवाएं करती सन-सन। झूम उठे हैं सबके तन-मन।। बादल प्यारे गीत सुनाते। बच्चे मिलकर धूम मचाते।। जीव जन्तु और खेत हर्षाए। पंछियों ने पँख फैलाए।। बनते घर में मीठे पूड़े। चाय के संग…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *