सुबह

सुबह | Kavita Subah

सुबह

( Subah )

अंधकार से उत्पन्न हुई एक किरण
आकाश की गहराई से आई है।
शिद्दत से प्रयास जारी रखकर,
आशा की रोशनी संग मुसकाई है ।।
ओस के सुखद स्पर्श से लबरेज
पंछियों के कलरव सी मन को भाई है ।।
सुबह की मंद मंद चल रही हवा
पी के देस की महक ले आई है ।।
कल की थकान को अलविदा कहती
नई उमंग से फिर जोश भर लाई है।।
आज के लिए उनींदीं सी रूहों को जगाती
नई उम्मीदों की डोर बांध लाई है ।।
ऊंचाईयां नापते हैं जो उनके लिए आकाश कहां चुनौती है।
आसमान से धरती तक नज़रें उसने बिछाई हैं।
सुकून को नहीं तनाव कोई है, शैतान को भिड़ने का है शौक।
कांटों की चुभन से संघर्ष करे जो उसने गुलाबों की क्यारी लगाई है।
चढ़ते सूरज को सलाम मिलते हैं, इसमें कोई शुबा नहीं।
हर कदम प्रयास और उत्साह ने ही कर्म की विजय पताका लहराई है।
जीने के सबक बिखरे हैं जीवन के हर कदम पर। तैयार हों जो हर जंग के लिए तो ये भी इक सिखलाई है।

शिखा खुराना

शिखा खुराना

यह भी पढ़ें :-

मेरी कविता के शब्द | Meri Kavita ke Shabd

Similar Posts

  • हिन्दुस्तान को जगाओ | Kavita Hindustan ko Jagao

    हिन्दुस्तान को जगाओ ( Hindustan ko Jagao ) हम कुम्भ की भाँति सो रहे हैं, बाहरी आकर हमें टटोल रहे हैं, हम खुशी का सपना देख रहे हैं, बाहरी कारोबार को बटोर रहे हैं, हम हिन्दू हिन्दी में खुश हो रहे हैं! बाहरी हिन्दुस्तान को लपेट रहे हैं। हम मात्र दो बच्चों में बस कर…

  • महाकवि गोस्वामी तुलसीदास | Tulsidas ji par Kavita

    महाकवि गोस्वामी तुलसीदास ( Mahakavi Goswami Tulsidas )    महाकवि और महान-संत थें आप तुलसीदास, श्रीराम कथा लिखकर बनें आप सबके ख़ास। जिनका जप करता है आज विश्व का नर नार, प्रेम-सुधारस भरा है जिसमें आपनें यह ख़ास।। बचपन का नाम रामबोला एवं कहतें तुलाराम, हुलसी इनकी मैया का नाम पिता-आत्माराम। महाकाव्य ऐसा रचा-रामचरितमानस था…

  • hindi kavita -फिर वही बात!

    फिर वही बात! ( Phir Wahi Baat ) ***** फिर वही बात कर रही है वो, चाहता जिसे भुलाना मैं था वो। ले गई मुझे उस काल कोठरी में, जिसे बांध गांठ , टांग आया था गठरी में। जाने बात क्या हो गई है अचानक? बार बार उसे ही दुहरा रही है, मेरी इंद्रियां समझ…

  • पुत्री और शराबी पिता

    पुत्री और शराबी पिता   पापा मेरी किताब , मेरे अरमान है,  मेरी खुशी है, मेरा भविष्य है,          सब बेच मेरी खुशियों का          शराब पी गए,   पापा मां का मंगलसूत्र सुहाग है मांग का सिंदूर है,      सब बेच उनके अरमानों का      …

  • बरसो बादल | Kavita Barso Badal

    बरसो बादल ( Barso Badal )   प्रतीक्षा पल पल करती अंखियां अब तो सुन लो मानसून बात हमारी, इंतजार कर अब ये नयन थक गए कब बरसोगे रे बादल तुम प्यारे।। इस धरती के तुम बिन मेघा प्यारी सारे पौधे,वन उपवन गए मुरझाये, तुम बिन नही कोयल कूके अब लता पताका पुष्प गए कुम्हलाये।।…

  • मन की पीड़ा

    मन की पीड़ा मन की पीड़ा से जब कांपीं उंगली तो ये शब्द निचोड़ेअक्षर-अक्षर दर्द भरा हो तो प्रस्फुटन कहाँ पर होगा अभिशापों के शब्दबाण लेकर दुर्वासा खड़े हुए हैंकैसे कह दूँ शकुन्तला का फ़िर अनुकरण कहाँ पर होगा नया रूप धर धोबी आए मन में मैल आज भी उनकेईश्वर ही जाने सीता का नव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *